पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आ सकती है तूफानी तेजी! ईरान पर अमेरिका के इस एक फैसले से भारत में पड़ेगी महंगाई की मार?

US Sanctions on Iran: अमेरिका ने ईरान के खिलाफ ‘आर्थिक सर्जिकल स्ट्राइक’ करते हुए नए और कड़े प्रतिबंधों का ऐलान किया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ईरान की आर्थिक कमर तोड़ने के लिए इसे ‘इकोनॉमिक डी-डे’ करार दिया है।

वैसे तो भारत सीधे तौर पर ईरान से कच्चा तेल आयात नहीं करता है, लेकिन ग्लोबल ऑयल मार्केट के जरिए भारत पर इसका बड़ा असर पड़ने की आशंका है। चीन के विकल्प ढूंढने से लेकर भारत के क्रूड बिल, फ्रेट चार्ज और रुपए पर पड़ने वाले असर की पूरी डिटेल जानिए।

सीधे नहीं, ‘चीन फैक्टर’ से बढ़ेगी भारत की सिरदर्दी

एनर्जी इंटेलिजेंस फर्म Kpler के अनुसार, भारत ईरान से सीधे क्रूड नहीं खरीदता, इसलिए भारत पर प्रत्यक्ष प्रभाव नगण्य रहेगा। असली खतरा चीन के रुख से है। चीन हर महीने ईरान से औसतन 5 से 8 लाख बैरल प्रति दिन तेल खरीदता है। अगर अमेरिकी प्रतिबंधों के दबाव में चीन को ईरान के अलावा दूसरे देशों का रुख करना पड़ा, तो वह उन मार्केट बैरल्स पर कब्जा करने की कोशिश करेगा जिन पर भारत निर्भर है।

चीन के अचानक ग्लोबल मार्केट में आने से कच्चे तेल की मांग और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जिससे बेंचमार्क क्रूड प्राइस उछलेगा और भारत का कुल आयात बिल बढ़ जाएगा।

क्या रूस से मिलेगा सहारा?

भारत अपनी जरूरत का लगभग 50% कच्चा तेल (25 से 28 लाख बैरल प्रति दिन) रूस से खरीद रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, रूस पहले से ही अपनी क्षमता के मुताबिक भारत को अधिकतम तेल सप्लाई कर रहा है। मार्केट में सप्लाई तंग होने से रूसी क्रूड पर मिलने वाली छूट कम हो रही है और प्रीमियम बढ़ रहा है, जिसका सीधा नुकसान भारतीय रिफाइनरीज को होगा।

महंगा मालभाड़ा और इंश्योरेंस का झटका

मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनाव के कारण सिर्फ कच्चे तेल की कीमत ही नहीं, बल्कि लॉजिस्टिक्स लागत भी आसमान छू रही है। होर्मुज बंद होने के साथ ही फिलहाल लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों की संख्या घट गई है। मुख्य सप्लाई रूट्स पर फ्रेट दरें 137% से 411% तक बढ़ चुकी हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए सिंगल ट्रिप का ‘वॉर-रिस्क इंश्योरेंस’ 7.5 से 10 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। दूर-दराज से तेल मंगाने पर जहाजों का फ्रेट और वर्किंग कैपिटल कॉस्ट बढ़ जाएगी।

महंगाई, रुपए और अर्थव्यवस्था पर कैसे होगा असर?

भारत अपनी जरूरत का 90% कच्चा तेल आयात करता है। अगर ब्रेंट क्रूड के दाम में तेजी बनी रहती है, तो क्रूड का आयात बिल बढ़ने से देश का चालू खाता घाटा (CAD) बढ़ेगा और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया कमजोर होगा। जुलाई 2026 में भारत का मर्चेंडाइज डेफिसिट $32 अरब तक पहुंच गया था।

ट्रांसपोर्टेशन और शिपिंग महंगी होने से पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस (LPG) के साथ-साथ एविएशन, मैन्युफैक्चरिंग और रोजमर्रा के सामान महंगे हो सकते हैं।

भारत-ईरान द्विपक्षीय व्यापार पर सीमित प्रभाव

भारत-ईरान प्रत्यक्ष व्यापार पर इसका खास प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि 2018 में अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भारत ने मई 2019 से ईरान से तेल खरीदना बंद कर दिया था।

भारत ईरान को बासमती चावल का बड़ा निर्यात करता है (अप्रैल-जून 2026 में $103 मिलियन का निर्यात)। यूएई के जरिए होने वाले पेमेंट और फ्रेट रूट में रुकावट से भारतीय बासमती एक्सपोर्टर्स को लॉजिस्टिक्स में थोड़ी दिक्कत आ सकती है।

ईरान ने हाल के सालों में अपनी घरेलू फार्मा मैन्युफैक्चरिंग बढ़ा ली है, इसलिए भारतीय दवा निर्यातकों पर इसका बड़ा असर नहीं होगा।

कुल मिलाकर ईरान पर कसा गया अमेरिकी शिकंजा सीधे तौर पर भारत की तेल आपूर्ति को ठप नहीं करेगा, बल्कि यह ‘सेकंड-ऑर्डर इफेक्ट’ के रूप में सामने आएगा। चीन द्वारा वैकल्पिक तेल बाज़ारों पर निर्भरता बढ़ाने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रूड ऑयल, शिपिंग भाड़ा और इंश्योरेंस महंगा होगा, जिससे आखिरकार भारत का इंपोर्ट बिल और घरेलू महंगाई प्रभावित हो सकती है।

Gold Silver Price Today: गिर गए सोने-चांदी के दाम, आखिर क्या है कारण, अब आगे क्या होनी चाहिए निवेश रणनीति

Gold Silver Price Today: इंटरनेशनल मार्केट में सोने-चांदी की कीमतों में दबाव देखने को मिल रहा है। दरअसल, निवेशकों ने US ट्रेजरी यील्ड, तेल की कीमतों और ब्याज दरों के आउटलुक पर विचार किया, जिसके चलते सोने के मुकाबले चांदी में ज़्यादा गिरावट आई। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, COMEX सोना $4,406 प्रति औंस पर ट्रेड कर रहा था, जिसमें 0.33% की गिरावट थी, जबकि COMEX चांदी $63.145 प्रति औंस पर थी, जिसमें 1.39% की गिरावट थी।

ये बदलाव पिछले सेशन में दोनों कीमती धातुओं में गिरावट के बाद आए हैं। मंगलवार (18 अगस्त) को सोने में लगभग 2% की गिरावट आई थी, जबकि चांदी में भी तेज़ गिरावट देखी गई थी।

सोना और चांदी क्यों गिर रहे हैं?

US ट्रेजरी यील्ड में उतार-चढ़ाव इसका मुख्य कारण है। ज़्यादा यील्ड आम तौर पर सोने पर दबाव डालती है क्योंकि इस धातु पर कोई ब्याज नहीं मिलता, जिससे यील्ड देने वाली संपत्तियां ज़्यादा आकर्षक हो जाती हैं। US यील्ड अपने हालिया ऊंचे स्तरों से नीचे आई हैं, लेकिन ग्लोबल बॉन्ड बिकवाली के कारण प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में लंबे समय के लिए उधार लेने की लागत कई सालों के उच्चतम स्तर के करीब पहुंचने के बाद भी वे ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।

बाजार US फेडरल रिज़र्व की जुलाई की बैठक के मिनट्स (कार्यवृत्त) का भी इंतज़ार कर रहा है। निवेशक सेंट्रल बैंक की ब्याज दर की दिशा के बारे में संकेत तलाशेंगे, खासकर इसलिए क्योंकि हालिया US डेटा में कमज़ोर रोज़गार और रिटेल खर्च के साथ-साथ कम महंगाई दर दिखाई दी है।

चांदी पर क्यों है ज़्यादा दबाव?

हालिया कारोबार में सोने के मुकाबले चांदी में ज़्यादा तेज़ गिरावट आई है। सोने के विपरीत, चांदी की औद्योगिक मांग का एक बड़ा हिस्सा होता है, जिसका मतलब है कि इसकी कीमतें ग्लोबल आर्थिक गतिविधियों से जुड़ी उम्मीदों पर भी प्रतिक्रिया दे सकती हैं। यह हालिया कमज़ोरी कीमती धातुओं में व्यापक गिरावट के बाद आई है।

घरेलू बाज़ार में क्या हो रहा है?

ऑल इंडिया सराफा एसोसिएशन के अनुसार, भारत में मंगलवार (18 अगस्त) को सोने की कीमतें ₹2,000 बढ़कर 99.9% शुद्धता वाले सोने के लिए ₹1.58 लाख प्रति 10 ग्राम हो गईं। वहीं चांदी की कीमत भी ₹730 बढ़कर ₹2.40 लाख प्रति किलोग्राम हो गई। घरेलू कीमतें ग्लोबल स्पॉट कीमतों में गिरावट के अनुरूप थीं, साथ ही रुपया, आयात लागत और स्थानीय मांग ने भी भारतीय बुलियन दरों को प्रभावित किया।

क्रूड प्राइस बढ़ा रही अनिश्चितता

US-ईरान संघर्ष और होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर जारी अनिश्चितता के बीच कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं। तेल की कीमतें बढ़ने से महंगाई का दबाव बढ़ सकता है और सेंट्रल बैंकों के लिए ब्याज दरों को लेकर स्थिति और मुश्किल हो सकती है। अगर निवेशकों को लगता है कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रहेंगी, तो इसका असर सोने की कीमतों पर पड़ सकता है।

वहीं, जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन एसेट) के तौर पर सोने की मांग बढ़ सकती है। इससे बुलियन मार्केट दो विपरीत ताकतों के बीच फंसा हुआ है — एक तरफ सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की मांग और दूसरी तरफ ऊंची यील्ड/ब्याज दरों को लेकर चिंता।

अब निवेशकों को किन बातों पर रखनी चाहिए नजर?

सोने और चांदी की कीमतों में बदलाव की तत्काल वजह US फेड की बैठक के मिनट्स (बैठक का ब्योरा) हो सकते हैं। अगर इससे कोई संकेत मिलता है कि पॉलिसी बनाने वाले महंगाई को लेकर चिंतित हैं और ब्याज दरों में कटौती के पक्ष में नहीं हैं, तो बुलियन पर दबाव बना रह सकता है।

दूसरी ओर, अगर आर्थिक आंकड़े कमजोर रहते हैं या फेड की तरफ से ब्याज दरें कम रखने का संकेत (डोविश सिग्नल) मिलता है, तो ऊंची ब्याज दरों की उम्मीदें कम होने से सोने और चांदी को सहारा मिल सकता है।

फिलहाल, US ट्रेजरी यील्ड, डॉलर, कच्चे तेल की कीमतें, जियोपॉलिटिकल घटनाक्रम और फेड के संकेत ही वे मुख्य कारक हैं जिन पर कीमती धातुओं की कीमतों में अगले बदलाव के लिए नज़र रखनी होगी।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

मजबूत NBFCs,बैंक और रियल एस्टेट शेयरों को गिरावट में खरीदें, SBI Funds IPO में सिर्फ लिस्टिंग गेन के लिए लगाएं दांव

बाजार की आगे की दशा और दिशा पर बात करते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने कहा कि निफ्टी अब तक पिछले बुधवार की कैंडल नहीं तोड़ पाया है। बुधवार का हाई 24,300 और निचला स्तर 23,805 था। पिछले 3-4 दिनों का हाई देखिए,वही पार नहीं हो रहा। लेकिन निचले स्तर पर 24,000 भी नहीं टूट रहा है। कल भी हमारा 24,200-24,250 का शॉर्ट जोन था और क्लोजिंग में वापस हमने न्यूट्रल नजरिया रखा। अभी कुछ दिन यही रणनीति रहेगी। निफ्टी में इंट्राडे रहिए और क्लोजिंग में न्यूट्रल रहें।

बाजार: आज के 2 बड़े सेक्टरल कॉल्स

कोरिया के बाजार में भारी गिरावट आई है। बैंक ऑफ कोरिया ने पॉलिसी रेट 2.50% से बढ़ाकर 2.75% किया है। आमतौर पर कोस्पी में गिरावट हमारे लिए एल्गो पॉजिटिव मानी जाती है। खास तौर से IT शेयरों में आज फिर तेजी आ सकती है। कल भी हमने IT पर घबराने से रोका था। सिर्फ CNBC-आवाज़ ने LTTS पर बिना घुमाए-फिराए लॉन्ग का नजरिया दिया था। TCS पर भी पिछले 1 हफ्ते से पॉजिटिव नजरिया रहा है। सिर्फ टाटा एलेक्सी और HCLTech पर हमने निगेटिव नजरिया रखा था। नतीजे,प्लेसमेंट और वैल्युएशन का कॉम्बिनेशन देखिए। आज उदाहरण के तौर पर विप्रो और टेक महिंद्रा पर लगभग सभी निगेटिव हैं। अगर इनके नतीजे हल्के से भी बेहतर आए तो इनमें जोरदार तेजी आ सकती है।

कच्चा तेल $85 पर है और रुपया ऑल टाइम लो के करीब है। ये भी IT शेयरों के लिए एल्गो पॉजिटिव ट्रिगर्स हैं। इसके अलावा लाइफ इंश्योरेंस शेयरों में भी तेजी देखने को मिल सकती है। कल ICICI Pru के नतीजे बाजार के दौरान आए थे। ICICI Pru में प्रूडेंशियल की बिक्री का डर भी कम हुआ है। HDFC Life के नतीजे भी काफी अच्छे हैं।

बाजार: क्या हो रणनीति?

हमारी दिक्कत ये है कि कच्चा तेल $85 पर अड़ा हुआ है और यही कारण है कि कोई रैली टिकती नहीं है। मगर बाजार में किसी भी एंगल से पैनिक नहीं है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण है India VIX। India VIX में रत्ती भर भी डर के संकेत नहीं हैं। इसीलिए जैसे ही हम 24,000 के करीब आते हैं,खरीदारी आ जाती है। ऐसे में इस रेंज को स्मार्टली खेलने की जरूरत है। इंडेक्स में बड़ी ट्रेड 23,800 के नीचे या 24,300 के ऊपर ही मिलेगी। तब तक आपको इंडेक्स में इंट्राडे ही रहना होगा और क्लोजिंग में किसी भी लेकर जाने की टेम्पटेशन से बचिए। लेकर जाना ही है तो हेज के साथ या इंडिविजुअल शेयरों में मजबूत NBFCs,बैंक,ऑटो,रियल एस्टेट शेयरों को गिरावट में खरीदें। कच्चे तेल से जुड़े शेयरों में अब इन स्तरों पर शॉर्ट से बचें। जहां अर्निंग्स मजबूत हैं और कमेंट्री पॉजिटिव है,वहां खरीदारी करें।

निफ्टी पर रणनीति

निफ्टी के लिए पहला रजिस्टेंस 24,200-24,250 पर और बड़ा रजिस्टेंस 24,275-24,325 पर है। इसके लिए पहला सपोर्ट 23,950-24,050 पर और बड़ा सपोर्ट 23,800-23,850 पर है। खरीदारी का सबसे अच्छा जोन 24,000-24,050 है। इसके लिए 23,950 पर स्टॉप-लॉस रखें। बिकवाली का सबसे अच्छा जोन 24,200-24,250 के रिजेक्शन पर है। इसके लिए SL 24,325 पर रखें।

Stock Picks : मिड और स्माल कैप में काफी अच्छा मोमेंटम, ऑटो और केमिकल स्पेस के इन दो शेयरों में हो सकती है अच्छी कमाई

बैंक निफ्टी पर रणनीति

बैंक निफ्टी के लिए पहला सपोर्ट 57,500-57,700 पर और बड़ा सपोर्ट 57,200-57,400 पर है। इसके लिए पहला रजिस्टेंस 57,800-58,000 पर और बड़ा रजिस्टेंस 58,200-58,500 पर है। इस समय बैंक निफ्टी में ट्रेड करना बेहद मुश्किल है। कल का इंट्राडे चार्ट देखिए।

SBI Funds IPO: क्या करें निवेशक?

SBI Funds देश का सबसे बड़ा म्यूचुअल फंड है,मगर सिर्फ AUM के आधार पर। सिर्फ AUM सबसे बड़े MF का पैमाना नहीं हो सकता। अगर ऐसा होता तो IPO वैल्यूएशन ICICI Pru के मुकाबले इतने डिस्काउंट पर नहीं होता। ऊपरी प्राइस बैंड पर मार्केट कैप ICICI Pru से 40,000 करोड़ रुपए कम होगा। SBI AMC की AUM ग्रोथ 17% है,जबकि ICICI Pru की 26% है। SBI AMC का Equity AUM 36% है,जबकि इंडस्ट्री एवरेज 56% है। SBI AMC का 32% AUM Passive Funds से है। यही कारण है कि SBI MF का मुनाफा कमजोर है और ICICI Pru के मुकाबले ROE काफी नीचे है। अब क्योंकि टेबल पर कुछ छोड़ा है तो लिस्टिंग गेन मिल सकता है। अगर अप्लाई कर रहे हैं तो सिर्फ लिस्टिंग गेन के हिसाब से करें। अगर सिर्फ MF सेक्टर पर दांव लगाना है तो और भी बेहतर विकल्प हैं।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Stock Picks : मिड और स्माल कैप में काफी अच्छा मोमेंटम, ऑटो और केमिकल स्पेस के इन दो शेयरों में हो सकती है अच्छी कमाई

Stock Picks : IT,ऑयल एंड गैस,ऑटो और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स शेयरों में खरीदारी के दम पर भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स हल्की बढ़त के साथ ट्रेड कर रहे हैं। निफ्टी 24,100 के स्तर के ऊपर कारोबार कर रहा है निफ्टी में सबसे ज्यादा बढ़त वाले शेयरों में HCL टेक,इंफोसिस,टेक महिंद्रा,हिंडाल्को और विप्रो शामिल हैं। जबकि शुरुआती कारोबार में SBI लाइफ इंश्योरेंस,ग्रासिम,ONGC,बजाज फिनसर्व और आयशर मोटर्स में गिरावट दिख रही है। वहीं,ब्रॉडर मार्केट में सुस्ती दिख रही है। शुरुआती कारोबार में निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में कोई खास हलचल नहीं दिखी है।

निफ्टी व्यू

ऐसे में मार्केट ट्रेंड पर बात करते हुए मंत्री फिनमार्ट के अरुण कुमार मंत्री ने कहा कि मार्केट में कोई बड़ा ब्रेकआउट या ब्रेकडाउन के लेवल्स नहीं है पर कंप्लीट कंसोलिडेशन नजर आ रहा है। निफ्टी के लिए 23800-24000 के जोन में एक स्ट्रांग सपोर्ट दिख रहा है। दूसरी तरफ देखें तो इसके लिए 24,200-24,250 पर एक स्ट्रांग रेजिस्टेंस दिख रहा। ऐसे में हम साफ तौर पर कह सकते हैं कि मार्केट कंसोलडेशन के ग्रिप में है। अगर आप निफ्टी के बाहर जाते हैं तो मिड कैप और स्माल कैप में काफी अच्छा मोमेंटम है। पिछले तीन दिनों की बात करें जो इस हफ्ते मिड और स्माल कैप में काफी अच्छा एक्शन देखने को मिला है। ऐसे में लगाता है कि आगे काफी अच्छा स्टॉक स्पेसिफिक रुझान देखने को मिल सकता है। मिड कैप अपने ऑल टाइम हाई के आसपास है। निफ्टी की बात करें तो यह हमें ऊपर में 24,200 और नीचे में 23,800 के बीच ही कंसोलीडेट होता दिख सकता है।

बैंक निफ्टी व्यू

बैंक निफ्टी की बात करें तो यह एक मेक और ब्रेक जोन के आसपास है। तीन से चार बड़े बैंक के रिजल्ट शनिवार को आने हैं। उससे पहले बैंक निफ्टी हो सकता है थोड़ा एक्शन में आता हुआ नजर आए। इसके लिए 57,200 के आसपास अच्छा सपोर्ट है। अगर बैंक निफ्टी में गिरावट मिलती है तो 57,200 के स्टॉप लॉस के साथ बैंक निफ्टी में खरीदार करनी चाहिए। इसमें हमें 58,400-58,500 के टारगेट आ सकते हैं।

अरुण कुमार मंत्री के पसंदीदा शेयर

बाजार में काफी अच्छा स्टॉक स्पेसिफिक एक्शन देखने को मिल रहा है। ऐसे में आज का पहला स्टॉक ऑटो सेक्टर से है। आइशर मोटर्स में खरीदारी की सलाह रहेगी। स्टॉक में एक एक्सीलेंट मोमेंटम है और ओवरऑल रिवर्सल के संकेत नजर आ रहे हैं। इस स्टॉक में 7400 रुपए के आसपास 7321 रुपए के स्टॉप लॉस के साथ, 7576 रुपए तक के टारगेट के लिए खरीदारी की जा सकती है। दूसरा स्टॉक एक नॉन एफओ स्टॉक है। यह है आरती इंडस्ट्रीज। इसमें आगे अच्छा मोमेंटम देखने को मिल सकता है। इसमें 499 रुपए के आसपास, 487 रुपए का स्टॉप लॉस लगा कर, 528 रुपए तक के टारगेट के लिए खरीदारी की जा सकती है।

 

Market View : बाजार में कंसोलिडेशन का मूड, चार्ट पर शानदार दिख रहे इन दो शेयरों में हो सकती है बंपर कमाई

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

 

Market View : भारतीय बाजार के लिए आज मिले-जुले संकेत, इन दो शेयरों में हो सकती है अच्छी कमाई

Market View : भारतीय बाजार के लिए आज मिले-जुले संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी में हल्की बढ़त है। हालांकि FIIs की कैश और वायदा मिलाकर 7700 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिकवाली हुई है। उधर एशियाई बाजारों में रौनक है। निक्केई 1 फीसदी तो कॉस्पी 6% उछला है। वहीं, चिप शेयरों में खरीदारी लौटने से नैस्डैक करीब एक फीसदी चढ़ा और डाओ और S&P में भी बढ़त देखने को मिली है।

आज क्या हो रणनीति?

निफ्टी पर रणनीति

बाजार पर बात करते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के वीरेंद्र कुमार ने कहा कि निफ्टी के लिए पहला रेजिस्टेंस 24173-24223 पर और बड़ा रेजिस्टेंस 24268-24309 पर है। इसके लिए पहला बेस 23928-23970 पर और बड़ा बेस 23809-23869 पर है। एक्सपायरी के दिन निफ्टी रेंज में रहा और कोई रिवर्सल नहीं मिला। FIIs की कैश मार्केट में बिकवाली रहा, इंडेक्स में शॉर्ट किया। खासकर क्रूड ($86) के चलते बैंक निफ्टी में शॉर्ट किया। अमेरिका के हमले और ईरान की जवाबी कार्रवाई जारी है। जियोपोलिटिक तनाव अभी भी बरकरार है।

FIIs का नेट शॉर्ट बढ़कर 2.65 लाख पर रहा है। स्टॉक फ्यूचर्स में भी भारी बिकवाली रही। 24100-24200-24300 पर कॉल बिके,24000 पर पुट। इसमें कोई शंका नहीं है कि तेजी का मोमेंटम गायब है। लेकिन 24000-23950 का सपोर्ट अब भी कायम है। फिलहाल ट्रेडिंग रेंज 24173-24223 से 24000-23970 के बीच है। पहले इसी दायरे पर नजर रखें। फिलहाल नीचे की ओर बड़ी कमजोरी के संकेत नहीं है। लेकिन 23970 के नीचे धीरे-धीरे दबाव बढ़ सकता है। 57000 के नीचे बैंक निफ्टी गया तो बेस-2 का रास्ता खुलेगा। 24173-24223 के ऊपर ही निफ्टी में मजबूती लौटेगी। इसके ऊपर रजिस्टेंस-2 की ओर तेजी संभव है।

बैंक निफ्टी पर रणनीति

वीरेंद्र कुमार ने कहा कि बैंक निफ्टी के लिए पहला रेजिस्टेंस 57690-57830 पर और बड़ा रेजिस्टेंस 58078-58271 पर है। इसके लिए पहला बेस 56967-57031/57261 पर और बड़ा बेस 56512-56626 (100/50/200 DEMA) पर है। बैंक निफ्टी 10 DEMA के नीचे फिसला। लेकिन नीचे की ओर बड़ा दबाव नहीं दिखा। FIIs ने बैंक निफ्टी में बिकवाली की है। क्रूड के बढ़ने से अंडरपरफॉर्मेंस की आशंका है।

57261-57031 का जोन सबसे अहम सपोर्ट है। 20 DEMA के बाद यही मजबूत बेस है। बेस-1 बचा तो बैंक निफ्टी रेंज में रह सकता है। रजिस्टेंस-1 और बेस-1 के बीच कारोबार संभव है। बेस-1 टूटने पर बेस-2 की ओर फिसलने का खतरा है। तभी बड़ी कमजोरी के संकेत मिलेंगे। क्रूड में नरमी बैंक निफ्टी के लिए सबसे बड़ा ट्रिगर होगा। इसके साथ 57830 के ऊपर टिकने पर तेजी लौट सकती है।

चकाचक चार्ट वाले शेयर

चकाचक चार्ट वाले शेयर बताने के लिए हमारे साथ जुड़े हैं Prakashgaba.com के प्रकाश गाबा। इनकी ABB में 7050 रुपए के टारगेट के लिए, 6825 रुपए के स्टॉप-लॉस के साथ खरीदारी की सलाह है। Polycab में भी इनकी 9800 रुपए के टारगेट के लिए, 9450 रुपए के स्टॉप-लॉस के साथ खरीदारी की सलाह है।

 

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Crude Oil Price: US-ईरान बातचीत की संभावना से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, ब्रेंट $72 प्रति बैरल के करीब

Crude Oil Price: मंगलवार को तेल की कीमतों में गिरावट आई क्योंकि इन्वेस्टर्स दोहा में होने वाली US-ईरान बातचीत के नतीजे का इंतज़ार कर रहे थे, जबकि दोनों पक्षों ने वीकेंड में मिसाइल हमले किए, जिससे चार महीने से चल रहे संघर्ष को खत्म करने के मकसद से किया गया अंतरिम सीजफ़ायर दबाव में आ गया।

मंगलवार को एक्सपायर होने वाला अगस्त डिलीवरी का ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 1.03%, या 75 सेंट गिरकर $72.40 प्रति बैरल पर आ गया। ज़्यादा एक्टिवली ट्रेड होने वाला सितंबर ब्रेंट कॉन्ट्रैक्ट 0.54%, या 40 सेंट गिरकर $73.51 प्रति बैरल पर आ गया।

इस बीच, US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 0.66%, या 47 सेंट गिरकर $70.32 प्रति बैरल पर आ गया।

आज कच्चे तेल की कीमतों को क्या चला रहा है?

ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री काजम गरीबाबादी के हवाले से रॉयटर्स ने सोमवार को कहा कि ईरानी और ओमानी एक्सपर्ट्स आने वाले दिनों में होर्मुज स्ट्रेट के जरिए ट्रांजिट रूट को फिर से तय करने पर बातचीत शुरू कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि ईरान जहाजों को तय शिपिंग लेन से बाहर जाने से रोकने की कोशिश करेगा।

साथ ही, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माईल बघाई ने साफ किया कि आने वाले दिनों में अमेरिका के साथ किसी भी लेवल पर कोई मीटिंग या बातचीत तय नहीं है।

संभावित बातचीत को लेकर अलग-अलग संकेतों ने 17 जून के सीज़फ़ायर समझौते की कमज़ोरी को दिखाया, जिसने होर्मुज स्ट्रेट के ज़रिए दुनिया भर में तेल शिपमेंट में रुकावट डालने वाली दुश्मनी को कुछ समय के लिए रोक दिया था और नवंबर में होने वाले कांग्रेस चुनावों से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक पॉलिटिकल टेस्ट खड़ा कर दिया था।

इज़राइल अमेरिका-ईरान शांति प्रक्रिया से बाहर रहा है और उसने सार्वजनिक रूप से इस समझौते से खुद को दूर रखा है।

शिपिंग डेटा के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर नए हमलों और अमेरिका और ईरान के बीच नए हमलों के बावजूद, मिडिल ईस्ट के एनर्जी प्रोड्यूसर कच्चे तेल और LNG कार्गो लोड करना जारी रखे हुए हैं।

Crude Oil Price: US- ईरान शांति वार्ता अटकी, क्रूड में उबाल, $70 के ऊपर बना है भाव

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।