Silver Gold Price Today : एशियाई बाजारों में शुरुआती कारोबार में सोने-चांदी के भाव में नरमी, जानिए आगे कैसी रह सकती है इनकी चाल

Silver Gold Price Today : मंगलवार को एशियाई बाजारों के शुरुआती कारोबार में सोने की कीमतों में गिरावट आई है। निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी नीति और रिटेल महंगाई के आंकड़ों पर नजर रखे हुए हैं। इससे ब्याज दरों की आगे की दिशा के बारे में संकेत मिल सकते हैं। फिलहाल हाजिर सोना (स्पॉट गोल्ड) 0.3% गिरकर 4,126.84 डॉलर प्रति औंस पर दिख रहा है। वहीं, दिसंबर की डिलीवरी वाला अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 0.3% गिरकर 4,146.00 डॉलर पर दिख रहा है।

निवेशकों का फोकस अब यूएस फेड की 27-28 अक्टूबर की नीति बैठक और अगले हफ्ते आने वाले अमेरिकी ‘पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर्स’ (PCE) डेटा पर है। यूएस फेड 2% महंगाई दर का लक्ष्य लेकर चल रहा है, इसलिए वह इस डेटा पर बहुत बारीकी से नजर रखे हुए है।

यूएस फेड ने सितंबर में अपनी बेंचमार्क ब्याज दरों को 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 3.75%-4.00% की रेंज में कर दिया था। CME के ​​’फेडवॉच टूल’ के मुताबिक ट्रेडर्स का मानना ​​है कि इस बात की 83% संभावना है कि केंद्रीय बैंक अगले हफ्ते दरों में कोई खास बदलाव नहीं करेगा,जबकि दिसंबर में दरों के बढ़ने की उम्मीद 94% बनी हुई है।

इस बीच बैंक ऑफ जापान के गवर्नर काज़ुओ उएदा ने कहा है कि रिटेल महंगाई दर केंद्रीय बैंक के 2% के लक्ष्य के काफी करीब है। ग्लोबल स्तर पर AI की भारी मांग और टाइट जॉब मार्केट के कारण महंगाई का दबाव बढ़ रहा है, जिससे ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की संभावना के संकेत मिलते हैं।

आमतौर पर, ऊंची ब्याज दरों का असर सोने की कीमतों पर पड़ता है क्योंकि इससे सोना (बुलियन) अपने पास रखने की ‘अपॉर्चुनिटी कॉस्ट’ बढ़ जाती है, जबकि सोने पर कोई ब्याज नहीं मिलता।

जियोपोलिटिकल फ्रंट की बात करें तो यमन के ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों ने सोमवार को कहा कि उन्होंने सऊदी अरब के एनर्जी इंफ्रा, हवाई अड्डों और सैन्य ठिकानों पर कई हमले किए हैं।

दूसरी कीमती धातुओं की बात करें तो, स्पॉट सिल्वर 0.7% गिरकर 56.69 डॉलर प्रति औंस पर आ गई है। वहीं, प्लैटिनम 1,639.65 डॉलर पर सपाट दिख रहा है। जबकि, पैलेडियम 0.7% गिरकर 1,112.08 डॉलर पर आ गया है।

एक्सपर्ट्स की राय

स्मॉलकेस मैनेजर और ओमनीसाइंस कैपिटल के सीईओ विकास गुप्ता का कहना है कि अगले 2-3 के नजरिए से सोने को लेकर आम राय यही है कि इसकी कीमतें बढ़ेंगी। इस अवधि के दौरान महंगाई और ब्याज दरों में भी बढ़ोतरी होगी। हालांकि,ये दोनों चीजें एक साथ नहीं हो सकतीं।

विकास गुप्ता का मानना है कि केंद्रीय बैंक सोने के बड़े खरीदार हो सकते हैं,लेकिन साथ ही ऐसे बड़े विक्रेता भी हो सकते हैं जो उसी समय सोना बेचें,जिससे सोने की कीमतें नियंत्रण में बनी रह सकती है।

भारत में त्योहारों और शादियों का सीजन आने वाला है। आमतौर पर इससे सोने की कीमतें बढ़ती हैं। हालांकि,फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना को देखते हुए,ग्लोबल मार्केट में सोने की कीमतें दबाव में रह सकती हैं। भारत में त्योहारों के दौरान सोने की कीमतों में थोड़ी तेजी आ सकती है,लेकिन उसके बाद कीमतें स्थिर रहने की संभावना है।

ब्रिकवर्क रेटिंग्स में हेड ऑफ रिसर्च,राजीव शरण का कहना है कि भारत में दशहरा मनाया जा रहा है और इस समय 24-कैरेट सोना लगभग 1.48 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा है। पिछले महीने यह अपने रिकॉर्ड हाई से 6% से ज्यादा नीचे आया है। इस त्योहारी सीजन में जो बदलाव आया है वह सोने के प्रति भारतीय परिवारों के लगाव में नहीं,बल्कि इसे खरीदने के तरीके में है। भारतीय अपने त्योहारी बजट को तो स्टेबल रख रहे हैं,भले ही इसके लिए उन्हें कम वजन वाले आभूषण खरीदने पड़ें।

साथ ही लोग सोने के सिक्कों,बार और एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) में अधिक निवेश कर रहे हैं। यह बदलाव महत्वपूर्ण है क्योंकि त्योहारी खरीदारी अब केवल गहने खरीदने तक सीमित न रहकर, संपत्ति को सुरक्षित रखने के एक व्यवस्थित तरीके में बदल रही है। आगे चलकर, अमेरिका में ऊंची ब्याज दरें सोने की कीमतों में बहुत तेज उछाल नहीं आने देंगी,जिससे निकट भविष्य में सोने की कीमत में 5% तक की उतार-चढ़ाव वाली रेंज बनी रहने की संभावना है। इस दशहरे पर,खरीदार कीमतों में आई हालिया गिरावट को किसी चेतावनी के रूप में नहीं, बल्कि खरीदारी शुरू करने के एक अच्छे मौके के तौर पर देख रहे हैं।

 

 

Gold Price Today: सोने में गिरावट पर लगा ब्रेक, दशहरा पर 24 और 22 कैरेट दोनों का भाव चढ़ा

 

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

PM मोदी 11 दिसंबर को कनाडा जाएंगे:ट्रेड डील पर बातचीत होगी; ट्रम्प के टैरिफ दबाव के बीच कनाडा नए बाजार तलाश रहा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11-12 दिसंबर को कनाडा के दौरे पर जाएंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच ट्रेड डील पर बातचीत होगी। भारत-कनाडा व्यापार समझौते (CEPA) पर हस्ताक्षर होने की संभावना भी है। भारत और कनाडा 2030 तक आपसी कारोबार को बढ़ाकर सालाना 7 लाख करोड़ रुपए करना चाहते हैं। अभी दोनों देशों के बीच करीब 3 लाख करोड़ रूपए का व्यापार होता है। पीएम मोदी का दौरा ऐसे समय पर हो रहा है जब कनाडा और अमेरिका के बीच ट्रेड वॉर की स्थिती है। ट्रम्प के टैरिफ दबाव के बीच कनाडा नए बाजार तलाश रहा है। PM मोदी ने पीएम कार्नी से फोन पर बात की प्रधानमंत्री मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच 13 अक्टूबर को फोन पर बातचीत हुई। मोदी ने इसे अच्छी बातचीत बताया। दोनों नेताओं ने व्यापार, ऊर्जा, तकनीक, सुरक्षा और दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर सहमति जताई। कनाडा के प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, दोनों नेता चाहते हैं कि भारत और कनाडा के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत जल्द पूरी हो। बातचीत में हिंद-प्रशांत क्षेत्र के हालात पर भी चर्चा हुई। कार्नी ने रूस-यूक्रेन युद्ध का शांतिपूर्ण समाधान निकालने की कोशिशों के लिए मोदी की तारीफ भी की। 2023 में निज्जर की हत्या के बाद रिश्ते बिगड़े थे भारत और कनाडा के रिश्तों में 2023 में खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद तनाव बढ़ गया था। इसके बाद दोनों देशों के रिश्ते काफी तनावपूर्ण हो गए। लेकिन मार्क कार्नी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से रिश्ते सुधारने की कोशिशें तेज हुई हैं। पिछले साल नवंबर में भारत दौरे के दौरान कार्नी ने भारत को भरोसेमंद व्यापारिक साझेदार बताया था। दिसंबर में पीएम का 3 देशों के दौरे का कार्यक्रम रिपोर्ट के मुताबिक, मोदी दिसंबर में कनाडा के अलावा अमेरिका और बेल्जियम भी जा सकते हैं। इन दौरों में व्यापार और दूसरे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। 11-12 दिसंबर: कनाडा – मोदी टोरंटो और ओटावा जाएंगे। दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत होगी। 13-15 दिसंबर: अमेरिका – फ्लोरिडा में G20 समिट में शामिल होने का कार्यक्रम है। 16-17 दिसंबर: बेल्जियम – ब्रसेल्स में भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार समझौते पर चर्चा हो सकती है। कनाडा दौरे की तारीख की पुष्टि हो चुकी है। अमेरिका और बेल्जियम के कार्यक्रमों की तारीखों की आधिकारिक घोषणा होना बाकि है। ——————– ये खबर भी पढ़ें…. भारत पर 100% टैरिफ लगेगा या नहीं,10 दिन में फैसला: ट्रम्प तय करेंगे रूसी तेल खरीदने वाले किन देशों पर प्रतिबंध अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भारत पर 100% टैरिफ लगाने को लेकर करीब 10 दिन में फैसला ले सकते हैं। यह बात अमेरिकी दूत सर्जियो गोर ने ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में कही। गोर ने कहा कि भारत को प्रतिबंधों से छूट मिलेगी या नहीं, यह भी ट्रम्प ही तय करेंगे।

PM मोदी 11 दिसंबर को कनाडा जाएंगे:ट्रेड डील पर बातचीत होगी; ट्रम्प के टैरिफ दबाव के बीच कनाडा नए बाजार तलाश रहा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 से 12 दिसंबर को कनाडा के दौरे पर रहेंगें। इस दौरान दोनों देशों के बीच ट्रेड डील पर बातचीत होगी। भारत-कनाडा व्यापार समझौते (CEPA) पर हस्ताक्षर होने की संभावना भी है। इसके तहत दो देश व्यापार, निवेश और कारोबार बढ़ाने के लिए नियम तय करते हैं। भारत और कनाडा 2030 तक आपसी कारोबार को बढ़ाकर सालाना 7 लाख करोड़ रुपए करना चाहते हैं। अभी दोनों देशों के बीच करीब 3 लाख करोड़ रूपए का व्यापार होता है। PM मोदी का दौरा ऐसे समय पर हो रहा है जब कनाडा और अमेरिका के बीच ट्रेड वॉर की स्थिती है। ट्रम्प के टैरिफ दबाव के बीच कनाडा नए बाजार तलाश रहा है। PM मोदी ने मार्क कार्नी से फोन पर बात की थी प्रधानमंत्री मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच 13 अक्टूबर को फोन पर बातचीत हुई। मोदी ने इसे अच्छी बातचीत बताया। दोनों नेताओं ने व्यापार, ऊर्जा, तकनीक, सुरक्षा और दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर सहमति जताई। कनाडा के प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, दोनों नेता चाहते हैं कि भारत और कनाडा के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत जल्द पूरी हो। बातचीत में हिंद-प्रशांत क्षेत्र के हालात पर भी चर्चा हुई। कार्नी ने रूस-यूक्रेन युद्ध का शांतिपूर्ण समाधान निकालने की कोशिशों के लिए मोदी की तारीफ भी की। 2023 में निज्जर की हत्या के बाद रिश्ते बिगड़े थे भारत और कनाडा के रिश्तों में 2023 में खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद तनाव बढ़ गया था। इसके बाद दोनों देशों के रिश्ते काफी तनावपूर्ण हो गए। लेकिन मार्क कार्नी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से रिश्ते सुधारने की कोशिशें तेज हुई हैं। पिछले साल नवंबर में भारत दौरे के दौरान कार्नी ने भारत को भरोसेमंद व्यापारिक साझेदार बताया था। PM मोदी का 11 साल बाद द्विपक्षीय दौरा जून 2025 – PM मोदी का यह द्विपक्षीय दौरा नहीं था। वे G7 समिट में शामिल होने गए थे। हालांकि बैठक के इतर उन्होंने PM कार्नी से मुलाकात की थी। अप्रैल 2015 – PM मोदी कनाडा के द्विपक्षीय दौरे पर गए थे। उस समय कनाडा के प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर थे। इस दौरे के बाद भारत ने कनाडा से यूरेनियम खरीदने का समझौता भी किया था। दिसंबर में PM का 3 देशों के दौरे का कार्यक्रम रिपोर्ट के मुताबिक, मोदी दिसंबर में कनाडा के अलावा अमेरिका और बेल्जियम भी जा सकते हैं। इन दौरों में व्यापार और दूसरे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। 11-12 दिसंबर: कनाडा – मोदी टोरंटो और ओटावा जाएंगे। दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत होगी। 13-15 दिसंबर: अमेरिका – फ्लोरिडा में G20 समिट में शामिल होने का कार्यक्रम है। 16-17 दिसंबर: बेल्जियम – ब्रसेल्स में भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार समझौते पर चर्चा हो सकती है। अमेरिका और बेल्जियम के कार्यक्रमों की तारीखों की आधिकारिक घोषणा होना बाकि है। ——————– ये खबर भी पढ़ें…. भारत पर 100% टैरिफ लगेगा या नहीं,10 दिन में फैसला: ट्रम्प तय करेंगे रूसी तेल खरीदने वाले किन देशों पर प्रतिबंध अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भारत पर 100% टैरिफ लगाने को लेकर करीब 10 दिन में फैसला ले सकते हैं। यह बात अमेरिकी दूत सर्जियो गोर ने ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में कही। गोर ने कहा कि भारत को प्रतिबंधों से छूट मिलेगी या नहीं, यह भी ट्रम्प ही तय करेंगे।

Silver Gold Price Today : MCX पर सोने-चांदी में 1% से ज्यादा की तेजी, जानिए इनमें आज क्या हो कमाई की रणनीति

Silver Gold Price Today : एमसीएक्स पर सोने का अक्टूबर वायदा 1,904 रुपए यानी 1.30 फीसदी की बढ़त के साथ 148,021 रुपए पर दिख रहा है। वहीं, सिल्वर का दिसंबर वायदा 2,544 रुपए यानी 1.11 फीसदी की बढ़त के साथ 226,190 रुपए पर दिख रहा है। केडिया एडवाइजरी का कहना है कि आज सोने की ट्रेडिंग रेंज 147470-151880 है। महंगाई उम्मीद से कम रहने के कारण सोने की कीमतों में बढ़त हुई है। इससे यह उम्मीद मजबूत हुई कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। US का हेडलाइन PCE प्राइस इंडेक्स महीने-दर-महीने 0.3% बढ़ा है, जबकि खाने-पीने की चीज़ों और एनर्जी को छोड़कर कोर PCE में 0.2% की बढ़ोतरी हुई है। शुक्रवार को आने वाली सरकारी रोज़गार रिपोर्ट में पेरोल में 90,000 की बढ़ोतरी दिखने की उम्मीद है। जुलाई में हांगकांग के ज़रिए चीन का नेट गोल्ड इंपोर्ट जून के मुकाबले लगभग 11% और साल-दर-साल आधार पर 28% बढ़ा है।

केडिया एडवाइजरी की MCX गोल्ड दिसंबर फ्यूचर्स में 150000 रुपए के आसपास, 151000 रुपए के स्टॉप-लॉस के साथ, 148500-147500 रुपए के टारगेट को लिए खरीदारी की सलाह है।

ICICI डायरेक्ट की राय है कि मज़बूत अमेरिकी डॉलर और बढ़ती ट्रेजरी यील्ड के दबाव में, स्पॉट गोल्ड के $4,200 के लेवल के पास रुकावट का सामना करने और $4,100 की ओर गिरने की उम्मीद है। एनर्जी की वजह से लगातार बनी हुई महंगाई और बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी से कीमतों पर दबाव पड़ने की संभावना है। इसके अलावा,अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में बहुत कम प्रगति होने से तेल की कीमतें ऊंची बनी रहेंगी और बड़े सेंट्रल बैंकों को सख्त मॉनेटरी पॉलिसी अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

दूसरी ओर सेंट्रल बैंको की भारी खरीदारी और ETF में बेहतर निवेश से बुलियन की कीमतों को सहारा मिलेगा। इस बीच,शुक्रवार को आने वाली US जॉब रिपोर्ट पर सबकी नजरें होंगी,जिससे US लेबर मार्केट की मजबूती के बारे में और साफ जानकारी मिल सकती है।

MCX गोल्ड दिसंबर के लिए ₹152,000 के आस-पास रेजिस्टेंस दिख रहा है। इसके ₹148,000-₹147,000 के लेवल तक गिरने की उम्मीद है। MCX सिल्वर दिसंबर के ₹221,000 और ₹228,000 के लेवल के बीच बने रहने की उम्मीद है। अगर यह ₹221,000 से नीचे जाता है,तो इसमें ₹218,000 के लेवल तक गिरावट आ सकती है।

 

Silver Price Today: अक्टूबर के पहले दिन चांदी हुई महंगी, खरीदारी से पहले जानें आज 10 प्रमुख शहरों के ताजा रेट

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Silver Gold Price Today : MCX पर सोने-चांदी में दिख रही तेजी, जानिए इनमें आज क्या हो कमाई की रणनीति

Silver Gold Price Today : घरेलू बाजार में सोने-चांदी में आज बढ़त के साथ कारोबार होता दिख रहा है। 11.25 बजे के आसपास एमसीएक्स पर गोल्ड का अक्टूबर वायदा 1,018 रुपए यानी 0.70 फीसदी की बढ़त के साथ 147,250 रुपए पर कारोबार कर रहा था। वहीं, चांदी का दिसंबर वायदा 915 रुपए यानी 0.41 फीसदी की तेजी के साथ 226,365 रुपए पर नजर आ रहा था। अमेरिका और ईरान के बीच जारी जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता के चलते आज भारत के रिटेल मार्केट में सोने की कीमत बढ़ गई है।

उधर बुधवार को इंटरनेशनल मार्केट में सोने की कीमतों में गिरावट आई और मंथली लॉस की ओर बढ़ता दिख रहा है। ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीदों का असर मार्केट सेंटीमेंट पर पड़ा है। साथ ही,इन्वेस्टर्स फेडरल रिजर्व के अगले पॉलिसी फैसले के बारे में अंदाजा लगाने के लिए US के महंगाई के आंकड़ों पर नजरें बनाए हुए हैं। इंटरनेशनल मार्केट में स्पॉट गोल्ड 0.2% गिरकर $4,170.63 प्रति औंस पर आ गया और इस महीने अब तक इसमें 6% से ज़्यादा की गिरावट आई है।

Giottus.com के CEO विक्रम सुब्बुराज का कहना है कि MCX पर अक्टूबर का गोल्ड फ्यूचर्स 29 सितंबर को ₹1,46,247 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ,जो ₹557 या 0.38% कम था। 28 सितंबर को इस कॉन्ट्रैक्ट में 2.7% की गिरावट आई थी। मंगलवार के कारोबार में दिसंबर कॉन्ट्रैक्ट का गोल्ड लगभग ₹1,48,766 पर था। दिसंबर का सिल्वर कॉन्ट्रैक्ट लगभग ₹2,25,945 पर था,जिसमें 0.91% की गिरावट आई थी। यह गिरावट काफी तेज़ रही है। सोना सितंबर के मध्य में लगभग ₹1.54 लाख प्रति 10 ग्राम से गिरकर लगभग ₹1.46 लाख पर आ गया है।

उन्होंने आगे कहा कि यूएस फेड के हालिया बयानों से कुछ राहत मिली है। न्यूयॉर्क फेड के प्रेसिडेंट जॉन विलियम्स ने कहा है कि ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की कोई जल्दबाजी नहीं है। नतीजतन, बाज़ार ने अक्टूबर में दरों की बढ़ोतरी की संभावना को पहले के लगभग 70% से घटाकर लगभग 50% कर दिया है। भारतीय निवेशकों के लिए सोने-चांदी में उतार-चढ़ाव ज़्यादा रहने की संभावना है। रुपया भी अहम होगा क्योंकि करेंसी की कमजोरी घरेलू बाजार में सोने-चांदी की कीमतों को सहारा दे सकती है।

कमोडिटी में कमाई वाले कॉल

कमोडिटी में कमाई वाले कॉल के लिए आज हमारे साथ हैं Kedia Advisory के अजय केडिया। आज इनकी गोल्ड और सिल्वर में खरीदारी की सलाह है। गोल्ड में इनकी 147000 रुपए के आसपास, 146000 रुपए के स्टॉप-लॉस के साथ, 150000 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है। वहीं,सिल्वर में इनकी 224000 रुपए के आसपास, 222000 रुपए के स्टॉप-लॉस के साथ, 228000 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है।

 

 

Silver Price Today: चांदी की कीमतें हुई सस्ती, खरीदारी से पहले जानें आज 10 प्रमुख शहरों के ताजा रेट

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

आज का एक्सप्लेनर:जिनपिंग का स्वागत करने एयरपोर्ट जाएंगे ट्रम्प, स्टेट डिनर भी देंगे; आखिर चीन को खुश क्यों कर रहा अमेरिका, पूरी कहानी

यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की से तीखी बहस, जापान की पीएम को नीचा दिखाना, भारत के पीएम को टैरिफ की चेतावनी… अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ज्यादातर विदेशी नेताओं के साथ अपमानजनक तरीके से पेश आते रहे। लेकिन चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग के दौरे से पहले ट्रम्प के तेवर बदले-बदले से हैं। जिनपिंग के लिए रेड कार्पेट कैसे बिछा रहे ट्रम्प, चीन को खुश करने के पीछे क्या कोई खास मकसद और इस दौरे का दुनिया पर असर क्या पड़ेगा; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: अमेरिका की जमीन पर जिनपिंग के स्वागत में क्या-क्या होगा? जवाब: शी जिनपिंग 11 साल बाद अमेरिका पहुंच रहे हैं। भारतीय समय के मुताबिक 23-24 सितंबर की रात 1 बजे के बाद उनका विमान वॉशिंगटन डीसी के जॉइंट बेस एंड्रयूज पर लैंड करेगा। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक… सवाल-2: आखिर जिनपिंग को इतनी तवज्जो क्यों दे रहे ट्रम्प, बदले में क्या चाहिए? जवाब: अमेरिका में दशकों पुरानी परंपरा रही है कि विदेशी नेता राष्ट्रपति से मिलने व्हाइट हाउस आते हैं, व्हाइट हाउस उनके स्वागत के लिए एयरपोर्ट नहीं जाता। ट्रम्प का प्रोटोकॉल तोड़ना सिर्फ शिष्टाचार नहीं, चीन की अहमियत का कूटनीतिक संकेत माना जा रहा है। इसकी वजह मोटे-तौर पर 4 मांगों में छिपी है… 1. चीन रेयर अर्थ मिनरल्स की सप्लाई बनाए रखे 2. चाकू, बेलन, नोटबुक का कारोबार टैरिफ-फ्री हो 3. बड़ी डील की घोषणा, जिससे मिड-टर्म चुनावों में माहौल बने 4. चीन के साथ ‘AI हॉटलाइन’ बने, ताकि ये बेलगाम न हो अमेरिकी थिंकटैंक सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज में चीनी कारोबार के एक्सपर्ट स्कॉट कैनेडी के मुताबिक, ‘ट्रम्प प्रशासन को उम्मीद थी कि टैरिफ के एकतरफा भारी दबाव से चीन झुक जाएगा। ऐसा नहीं हुआ। चीन का निर्यात इस साल 28% बढ़ा है। इसलिए मोलभाव में शी की स्थिति ट्रम्प से मजबूत दिख रही है।’ सवाल-3: जिनपिंग अमेरिका से क्या हासिल करने की कोशिश करेंगे? जवाब: अमेरिकी टैरिफ के बावजूद लगातार दूसरे साल चीन का ट्रेड सरप्लस 1 ट्रिलियन डॉलर पार कर सकता है। यानी चीन ने जितना सामान दूसरे देशों से खरीदा उससे कहीं ज्यादा उन्हें बेचा है। साफ है कि चीन व्यापार के लिए सिर्फ अमेरिका पर निर्भर नहीं है। ऐसे में अमेरिकी दौरे से जिनपिंग 3 चीजें साधना चाहते हैं… 1. अमेरिका ताइवान की आजादी का विरोध करे 2. रेयर अर्थ मिनरल्स के एवज में ज्यादा टैरिफ छूट मिले 3. जिनपिंग का भव्य स्वागत, जिससे चीन में छवि मजबूत हो सवाल-4: क्या इस दौरे से भारत और दुनिया पर कोई बड़ा असर पड़ेगा? जवाब: एशियाई और यूरोपीय देशों को डर है कि अगर अमेरिका और चीन साथ आ गए तो ये वर्ल्ड ऑर्डर, यानी दुनिया के नियम खुद तय करेंगे। AI के क्षेत्र में अमेरिका और चीन ही सबसे तेजी से काम कर रहे हैं। दोनों नेताओं की मीटिंग के बाद पूरी दुनिया में AI को नियंत्रित करने का सिस्टम तैयार हो सकता है। ईरान जंग शुरू होने के बाद से तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। अगर चीन की मध्यस्थता से अमेरिका ईरान जंग से बाहर निकल पाए और होर्मुज स्ट्रेट के कंट्रोल पर सहमति बन जाए, तो ग्लोबल ऑइल सप्लाई फिर पटरी पर आ सकती है। अमेरिका और चीन में ट्रेड वॉर की वजह से विदेशी कंपनियों के फैक्ट्री लगाने के लिए भारत विकल्प बनकर उभरा था। अमेरिका-चीन की सुलह से भारत के हाथ से यह मौका निकल सकता है। ब्रिगेडियर अनिल रमन (रि.) के मुताबिक, ‘एशिया-पैसेफिक क्षेत्र में चीन को मैनेज करने के लिए अमेरिका भारत से अच्छे रिश्ते बनाकर रखता था। अगर अब अमेरिका-चीन आपस में ही अपने रिश्ते संभालने लगेंगे, तो अमेरिका को भारत की जरूरत कम होगी। लेकिन अगर चीन-अमेरिका में सहमति नहीं बन पाती है, तो अमेरिका के लिए भारत की जरूरत बढ़ जाएगी।’ अमेरिका ने रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने वाला बिल पास हो गया है। अगर रेयर अर्थ मिनरल्स के बदले अमेरिका चीन को रूसी तेल खरीदने की ढील देता है, तो भारत पर अमेरिका को ऐसा कोई ऑफर देने का दबाव बढ़ेगा, जिससे उसे भी रियायत मिले। ———- ये खबर भी पढ़िए… खामेनेई को घर में मारा, अब ईरानी राष्ट्रपति को वीजा:अमेरिका के दुश्मनों को भी न्यूयॉर्क आकर खिलाफ बोलने की छूट क्यों; 5 किस्से ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान न्यूयॉर्क पहुंच गए हैं। वे हर साल होने वाले यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली (UNGA) में आज भाषण देंगे। उनके साथ विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी होंगे। इन नेताओं को अपना दुश्मन मानने वाले अमेरिका ने ही इन्हें वीजा दिया है। पूरी खबर पढ़िए..

Silver Gold Price Today : MCX पर सोने-चांदी में कमजोरी, जानिए कमोडिटी मार्केट में आज कहां हो सकती है कमाई

Silver Gold Price Today : MCX पर सोने-चांदी में आज कमजोरी देखने को मिल रही है। 11.15 बजे के आसपास एमसीएक्स पर गोल्ड का अक्तूबर वायदा 524 रुपए यानी 0.34 फीसदी की कमजोरी के साथ 152,580 पर नजर आ रहा था। वहीं, चांदी का दिसंबर वायदा 1,667.00 रुपए यानी 0.70 फीसदी की कमजोरी के साथ 237,820 के लेवल पर नजर आ रहा था। US फेडरल रिजर्व (Fed) का सख्त रुख को सोने-चांदी (जिससे कोई ब्याज नहीं मिलता) पर दबाव डालने वाला एक मुख्य कारण माना जा रहा है।

फेड के अपडेटेड इकोनॉमिक प्रोजेक्शन से पता चलता है कि इस साल कम से कम एक और बार ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीद है। इसके अलावा, बोस्टन फेड की प्रेसिडेंट सुसान कॉलिन्स और सेंट लुइस फेड के प्रेसिडेंट अल्बर्टो मुसालेम ने पॉलिसी को और सख्त करने का खुलकर समर्थन किया है। उनका मानना है कि कमोडिटी की कीमतों में अचानक उछाल के कारण महंगाई का जोखिम अभी भी बना हुआ है।

उधर भारतीय बाजार में सोने की कीमत ₹1,50,000 प्रति 10 ग्राम से ऊपर बनी हुई है और ₹1,42,000 से ₹1,35,000 प्रति 10 ग्राम के आसपास एक मजबूत आधार बना रही है। बाजार जानकारों के मुताबिक,भारत में सोने की कीमतों में बड़ी बढ़त की उम्मीद है। इसकी वजह त्योहारों का मौसम है,जिससे फिजिकल सोने की मांग बढ़ रही है। उनका कहना है कि जियोपॉलिटिकल तनाव,बढ़ती फिजिकल मांग और कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण ग्लोबल कमोडिटी मार्केट में अस्थिरता जैसे अहम कारण दुनिया भर में सोने की कीमतों को बढ़ा सकते हैं। जेफरीज के फाइनेंशियल एनालिस्ट क्रिस वुड सोने को लेकर काफी पॉजिटिव हैं। उनका मानना ​​है कि लंबे समय में सोने की कीमतें 10,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती हैं। सोने की कीमत का $10,000 प्रति औंस तक पहुंचने का मतलब है कि भारतीय बाजार में इसकी कीमत ₹3 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर को पार कर सकती है।

दूसरी कमोडिटीज पर एक नजर

एमसीएक्स पर कॉपर का सितंबर कॉन्ट्रैक्ट 2.10 रुपए यानी 0.15 फीसदी की बढ़त के साथ 1,414.55 रुपए पर और क्रूड ऑयर का अक्टूबर कॉन्ट्रैक्ट 139 रुपए यानी 1.57 फीसदी की बढ़त के साथ 8,974 रुपए पर दिख रहा है। वहीं, नैचुरल गैस का सितंबर कॉन्ट्रैक्ट 0.40 रुपए यानी 0.15 फीसदी की बढ़त के साथ 273.40 रुपए पर कारोबार कर रहा है।

कमोडिटी में कमाई वाले कॉल

कमोडिटी में कमाई वाले कॉल के लिए आज हमारे साथ हैं Prithvi Finmart के मनोज कुमार जैन। इनको आज GOLD MINI और NICKEL में कमाई के मौके दिख रहे हैं। GOLD MINI अक्टूबर कॉन्ट्रैक्ट में इनकी 152800 रुपए के आसपास, 152200 रुपए के स्टॉप लॉस के साथ, 154000 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है। वहीं, NICKEL अक्टूबर कॉन्ट्रैक्ट में इनकी 1590 रुपए के आसपास,1578 रुपए के स्टॉप लॉस के साथ, 1612 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है।

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

 

Gold Rate Today : कमोडिटी में कमाई वाले कॉल के लिए आज हमारे साथ हैं Prithvi Finmart के मनोज कुमार जैन। इनको आज GOLD MINI और NICKEL में कमाई के मौके दिख रहे हैं

Gold vs silver: फेड की ब्याज दर में बढ़ोतरी, डॉलर और जियोपॉलिटिकल रिस्क का कीमतों पर असर क्यों

Gold Silver Price: सोने-चांदी की कीमतों में शुक्रवार, 18 सितंबर को अलग-अलग रुझान देखने को मिला। बाजार अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट्स की बढ़ोतरी और भविष्य में ब्याज दरों की दिशा के बारे में दिए गए संकेतों के असर का आकलन करता नजर आया। यहीं कारण है कि 18 सितंबर की ताजा कीमतों के अनुसार, COMEX पर सोना 0.26% गिरकर $4,388.20 प्रति औंस पर था, जबकि COMEX चांदी 0.18% बढ़कर $66.215 प्रति औंस पर थी।

कीमतों में यह उतार-चढ़ाव फेड के बेंचमार्क रेट को 25 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ाने के फैसले के बाद कीमती धातुओं के लिए अस्थिर सत्र के बाद आया है। अमेरिका में ऊंची ब्याज दरें और ट्रेजरी यील्ड आमतौर पर सोना और चांदी जैसी बिना ब्याज देने वाली संपत्तियों पर दबाव डालती हैं, जबकि मजबूत अमेरिकी डॉलर विदेशी खरीदारों के लिए डॉलर में कीमत वाली कीमती धातुओं को महंगा बना सकता है।

आखिर क्यों फेड की पॉलिसी को लेकर संवेदनशील रहता है सोना?

VT मार्केट्स के मार्केट एनालिस्ट रुचिट ठाकुर ने कहा कि फेड की ओर से ब्याज दरों को 4% तक बढ़ाना और बढ़ती महंगाई व मजबूत आर्थिक गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करना शॉर्ट टर्म में अमेरिकी डॉलर और ट्रेजरी यील्ड को सपोर्ट करता है। इससे सोना और चांदी पर दबाव पड़ सकता है क्योंकि ऊंची यील्ड उन संपत्तियों को रखने की ‘अपॉर्चुनिटी कॉस्ट’ (वैकल्पिक लागत) बढ़ा देती है जिनसे कोई ब्याज नहीं मिलता।

उन्होंने बताया कि फेड के फैसले के तुरंत बाद सोने में 1% से ज्यादा और चांदी में करीब 1.7% की गिरावट आई। हालांकि, उन्होंने स्थिति के दूसरे पहलू की ओर भी इशारा करते हुए कहा कि ग्रोथ, ट्रेड, फिस्कल पॉलिसी और जियोपॉलिटिक्स को लेकर लगातार बनी अनिश्चितता कीमती धातुओं के लिए ‘सेफ-हेवन’ (सुरक्षित निवेश) की मांग को सपोर्ट कर सकती है।

इधर आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स में कमोडिटीज और करेंसी की रिसर्च एनालिस्ट वेदिका नार्वेकर ने कहा कि 17 सितंबर को सोने की कीमतों में रिकवरी मुख्य रूप से फेड के फैसले के बाद बॉन्ड यील्ड में तेज बढ़ोतरी के बाद उनमें आई नरमी से जुड़ी थी, न कि सोने से जुड़े फंडामेंटल्स में किसी बदलाव से।

नार्वेकर के अनुसार, 2026 के अंत तक फेड का अनुमानित ब्याज दर आउटलुक 3.8% से बढ़कर 4.1% हो गया, जिससे संकेत मिलता है कि बाजारों को भविष्य में ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की संभावना को ध्यान में रखना पड़ सकता है। इसलिए उन्हें उम्मीद है कि सोने की कीमत एक बड़े दायरे में बनी रहेगी, क्योंकि ऊंचे यील्ड और मजबूत डॉलर की वजह से शॉर्ट टर्म में इसमें लगातार बढ़ोतरी की गुंजाइश कम है।

आखिर कीमतों को कहां से मिल रहा है सहारा

ऊंची ब्याज दरों के दबाव के मुकाबले जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता एक अहम कारक बनी हुई है। ठाकुर ने कहा कि ग्रोथ, ट्रेड, फिस्कल पॉलिसी और जियोपॉलिटिकल तनाव को लेकर अनिश्चितता रिस्क वाले एसेट्स में भरोसा कम कर सकती है और सोने जैसे सुरक्षित एसेट्स की मांग बढ़ा सकती है।

तेल की कीमतें भी एक ऐसा कारक हैं जिन पर बाजार की नजर है। शुक्रवार (18 सितंबर) की शुरुआत में ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग $103.77 प्रति बैरल थी, जबकि WTI की कीमत $100.88 के आसपास थी। दोनों बेंचमार्क में लगभग 1% की गिरावट आई। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, वेस्ट एशिया में जारी तनाव के बीच सप्लाई में रुकावट की चिंताओं को सऊदी क्रूड को ले जाने के वैकल्पिक तरीकों की उम्मीदों से कुछ हद तक कम किया जा रहा था।

सोने के लिए, लगातार जियोपॉलिटिकल जोखिम इस धातु की मांग को ‘स्टोर ऑफ वैल्यू’ (मूल्य संचय) के तौर पर सहारा दे सकते हैं, भले ही ऊंची ब्याज दरें दबाव बना रही हों।

कामा ज्वैलरी के MD कॉलिन शाह ने कहा कि फेड का ‘लंबे समय तक ऊंची दरें बनाए रखने’ का रुख डॉलर को सहारा देकर और बिना यील्ड वाले एसेट्स को रखने की ‘अपॉर्चुनिटी कॉस्ट’ (वैकल्पिक लागत) बढ़ाकर सोने के लिए निकट भविष्य में मुश्किलें पैदा कर सकता है। हालांकि, उन्होंने कहा कि महंगाई की ऊंची उम्मीदें और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितताएं ‘स्टोर ऑफ वैल्यू’ के तौर पर और मैक्रो-इकोनॉमिक व जियोपॉलिटिकल जोखिमों से बचाव (हेज) के तौर पर सोने की भूमिका को सहारा देती रहती हैं।

भारतीय सोने की कीमतों पर इसका क्या असर होगा

घरेलू सोने की कीमतें रुपये-डॉलर एक्सचेंज रेट से भी प्रभावित होती हैं क्योंकि भारत अपनी ज्यादातर bullion (सोना-चांदी) का आयात करता है। रुपये के कमजोर होने से सोने की घरेलू कीमत बढ़ सकती है, भले ही अंतरराष्ट्रीय कीमतें दबाव में हों।

Giottus.com के CEO विक्रम सुब्बुराज ने 17 सितंबर को इस अंतर पर प्रकाश डाला। जहां फेड के फैसले के बाद विदेशी स्पॉट गोल्ड में गिरावट आई थी, वहीं अक्टूबर डिलीवरी के लिए MCX गोल्ड 1.29% बढ़कर ₹1.52 लाख प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था, जबकि दिसंबर की चांदी 1.27% बढ़कर ₹2.35 लाख प्रति किलोग्राम पर थी।

HDFC सिक्योरिटीज में कमोडिटीज के सीनियर एनालिस्ट सौमिल गांधी ने घरेलू सोने में गिरावट का कारण आंशिक रूप से कमजोर मांग और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में रात भर आई कमजोरी को बताया।

सोना बनाम चांदी: इनकी चाल में अंतर क्यों हो सकता है

सोना आमतौर पर मॉनेटरी पॉलिसी, रियल यील्ड, करेंसी और सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) की मांग से अधिक निकटता से जुड़ा होता है। चांदी, जिसे कीमती धातु भी माना जाता है, उसका औद्योगिक उपयोग में बड़ा हिस्सा होता है। इसलिए, इसकी कीमत निवेश की मांग और औद्योगिक गतिविधियों की उम्मीदों, दोनों के आधार पर बदल सकती है।

इसका मतलब है कि ‘हॉकिश’ फेड (सख्त मौद्रिक नीति वाला फेडरल रिजर्व) ऊंची यील्ड और मजबूत डॉलर के जरिए दोनों धातुओं पर दबाव डाल सकता है, जबकि भू-राजनीतिक अनिश्चितता और औद्योगिक मांग की उम्मीदों में बदलाव उन्हें अलग-अलग दिशाओं में ले जा सकते हैं।

इसलिए, भारतीय निवेशकों को केवल वैश्विक बुलियन कीमतों को देखने के बजाय सोने और चांदी की अंतरराष्ट्रीय कीमतों, रुपये-डॉलर एक्सचेंज रेट और घरेलू मांग की स्थितियों पर एक साथ विचार करना चाहिए।

Silver Price Today: सस्ती हुई चांदी, जानें 17 सितंबर को मुंबई से चेन्नई तक 1 किलो की कीमत

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

अमेरिका को छोड़कर कनाडा अब यूरोप के साथ आएगा:यूरोपीय संघ का पहला एसोसिएट मेंबर बनेगा, ब्रिटेन-यूक्रेन के साथ मिलकर सुरक्षा मजबूत करेगा

अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच कनाडा अब यूरोप के करीब जाने की तैयारी में है। वह यूरोपीय संघ (EU) का पहला ‘एसोसिएट मेंबर’ बनने जा रहा है। एसोसिएट मेंबर के तौर पर कनाडा यूरोपीय संघ के 27 देशों में शामिल नहीं होगा और उसे वोटिंग का अधिकार भी नहीं मिलेगा, लेकिन रक्षा, AI, टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, जरूरी खनिज और व्यापार जैसे मामलों में यूरोपीय संघ के साथ उसका सहयोग बढ़ेगा। इसके साथ ही कनाडा ब्रिटेन और यूक्रेन जैसे यूरोपीय संघ से बाहर के देशों के साथ यूरोप की सुरक्षा मजबूत करने के लिए एक नई सिक्योरिटी काउंसिल में भी शामिल हो सकता है। कनाडा के प्रधानमंत्री ने यूरोपीय संघ के साथ जुड़ने की इच्छा जताई थी

यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने बुधवार को कहा कि यूरोपीय संघ कनाडा के लिए अपने दरवाजे खोलना चाहता है। इस दौरान कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी भी मौजूद थे। कार्नी ने पिछले हफ्ते यूरोपीय संघ के साथ एक ‘गठबंधन’ बनाने की इच्छा जताई थी। कनाडा के लिए यूरोपीय संघ को नई व्यवस्था बनानी पड़ेगी यूरोपीय संघ के नियमों में अभी ‘एसोसिएट मेंबर’ जैसी कोई सदस्यता नहीं है। इसलिए अगर कनाडा को यह दर्जा देना है, तो यूरोपीय संघ को इसके लिए नए नियम बनाने होंगे और सदस्य देशों की सहमति लेनी होगी। इस तरह का विचार पहली बार इस साल जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने यूक्रेन के लिए रखा था। लेकिन यूक्रेन ने इसमें ज्यादा रुचि नहीं दिखाई, क्योंकि वह यूरोपीय संघ का पूरा सदस्य बनना चाहता है। उस योजना के तहत यूक्रेन को यूरोपीय संघ की बैठकों में हिस्सा लेने और कुछ संस्थाओं में प्रतिनिधित्व का मौका मिल सकता था। उसे यूरोपीय संघ की कुछ योजनाओं और फंड का लाभ भी मिलता, लेकिन अन्य सदस्य देशों की तरह फैसलों पर वोट देने का अधिकार नहीं होता। यूरोपीय संघ और कनाडा के बीच व्यापार बढ़ा अमेरिका की ओर से लगाए गए टैरिफ और चीन से बढ़ती कारोबारी चुनौती के बीच यूरोपीय संघ और कनाडा पहले से ही एक-दूसरे के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। दोनों के बीच CETA नाम का व्यापार समझौता है, जिससे ज्यादातर सामानों पर लगने वाला आयात शुल्क खत्म हो चुका है। इसका असर यह हुआ कि 2016 के बाद से EU और कनाडा के बीच कारोबार 80% से ज्यादा बढ़ गया। इस साल कनाडा यूरोप के एक बड़े रक्षा फंड से जुड़ने वाला पहला गैर-यूरोपीय देश भी बना है। वॉन डेर लेयेन ने कहा कि दुनिया में ताकत सिर्फ बड़े या अमीर देशों के पास नहीं होनी चाहिए। लोकतांत्रिक देशों को यह हक होना चाहिए कि वे अपनी पसंद के साझेदार चुन सकें। उन्होंने कहा कि इसी सोच के तहत यूरोप और कनाडा अपने रिश्ते और मजबूत कर रहे हैं। अमेरिका और कनाडा के बीच ट्रेड वॉर जारी अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापार विवाद करीब 18 महीने से जारी है। जुलाई में ट्रम्प ने कनाडा पर अमेरिकी उद्योगों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया था। इसके बाद ट्रम्प ने एक पुराने कानून का इस्तेमाल करते हुए चुनिंदा कनाडाई सामान पर 50% तक टैरिफ लगाने का फैसला किया। इसके बाद कनाडा ने कई अमेरिकी सामान पर 50% तक जवाबी टैरिफ लागू किया था। इसके पहले दोनों देशों के बीच कई महीनों तक बातचीत चली, लेकिन 21 अगस्त में यह बातचीत टूट गई। इसके बाद दोनों के बीच टैरिफ वॉर शुरू हो गई। ————————- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका का कनाडा के डेयरी प्रोडक्ट और शराब पर बैन: मोटरसाइकिलों पर भी रोक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कनाडा से आने वाले डेयरी प्रोडक्ट, शराब और मोटरसाइकिलों पर रोक लगाने का फैसला किया है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

Gold Silver Price:फेड के फैसले से पहले सोना-चांदी स्थिर, कच्चे तेल की कीमतों पर नजर

Gold Silver Price: बुधवार, 16 सितंबर को शुरुआती कारोबार में सोने की कीमतें काफी हद तक स्थिर रहीं, जबकि चांदी में बढ़त देखी गई क्योंकि निवेशक दिन में बाद में आने वाले अमेरिकी फेडरल रिजर्व के पॉलिसी फैसले का इंतजार कर रहे थे। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और मजबूत डॉलर का असर बुलियन (सोने-चांदी) पर बना रहा, जबकि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने महंगाई की चिंताओं को बनाए रखा।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में, COMEX सोना $4,329.30 प्रति औंस पर था, जो पिछले बंद भाव $4,333.50 प्रति औंस से $3.50 या 0.08% कम था। कॉन्ट्रैक्ट ने दिन के दौरान $4,339.50 प्रति औंस का उच्चतम और $4,315.20 प्रति औंस का निचला स्तर छुआ।

वहीं, COMEX चांदी 0.59% बढ़कर $64.235 प्रति औंस हो गई, जबकि पिछला बंद भाव $64.185 प्रति औंस था। चांदी $64.480 प्रति औंस के उच्चतम और $63.940 प्रति औंस के निचले स्तर के बीच कारोबार करती रही।

घरेलू बाजार में, PTI द्वारा बताए गए स्थानीय व्यापारियों के अनुसार, मंगलवार (15 सितंबर) को नई दिल्ली में सोने की कीमतें ₹1,000 गिरकर ₹1.54 लाख प्रति 10 ग्राम हो गईं, जिससे यह कीमती धातु एक महीने से अधिक समय के अपने निचले स्तर पर आ गई।

हालांकि, चांदी की कीमत ₹2.34 लाख प्रति किलोग्राम (टैक्स सहित) पर स्थिर रही।

सोने में हालिया कमजोरी अंतरराष्ट्रीय स्पॉट कीमतों में गिरावट के बाद आई। विश्लेषकों ने इस बदलाव का कारण मजबूत अमेरिकी डॉलर और बढ़ती ट्रेजरी यील्ड को बताया।

अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड मंगलवार (15 सितंबर) को 5% के पार पहुंच गई, जो 2007 के बाद का उच्चतम स्तर था, हालांकि बुधवार को एशियाई कारोबार में इसमें थोड़ी नरमी आई। बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी सोने पर दबाव डाल सकती है क्योंकि इस कीमती धातु से कोई ब्याज आय नहीं होती है।

डॉलर इंडेक्स दो सप्ताह के उच्चतम स्तर के करीब कारोबार कर रहा था, जिससे डॉलर में कीमत तय होने वाले सोने पर और दबाव पड़ा। साथ ही, पिछले सत्र में भारी बढ़त के बाद ब्रेंट क्रूड $108 प्रति बैरल के आसपास ऊंचे स्तर पर बना रहा, जिससे महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ गईं। अब बाज़ार की नज़रें फ़ेडरल रिज़र्व के पॉलिसी फ़ैसले और ब्याज दरों पर उसकी गाइडेंस पर टिकी हैं। फ़ेड के रेट आउटलुक में बदलाव डॉलर और बॉन्ड यील्ड पर असर डाल सकते हैं, जिससे सेंट्रल बैंक की टिप्पणी बुलियन की कीमतों के लिए निकट भविष्य में एक अहम ट्रिगर बन जाती है।

कॉमर्स मिनिस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में अगस्त में सोने का आयात सालाना आधार पर 57.75% घटकर 2.3 अरब डॉलर रह गया, जबकि चांदी का आयात 127% बढ़कर 1.02 अरब डॉलर हो गया। अप्रैल-अगस्त 2026-27 के दौरान सोने का आयात 3.38% बढ़कर 17.47 अरब डॉलर हो गया।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।