कनाडा में सैन्य अड्डे पर धमाका, कई सैनिक मारे गए:रक्षा मंत्री बोले- ऐसा दृश्य कभी नहीं देखा; यहां 1300 कर्मचारी तैनात थे

कनाडा के अल्बर्टा के सैन्य अड्डे पर शनिवार को जोरदार धमाके के बाद आग लग गई। इसमें कई सैनिक और कर्मचारी मारे गए। रक्षा मंत्री डेविड मैकगिन्टी ने हादसे की जानकारी दी। उन्होंने कहा, ‘मैंने ऐसा दर्दनाक दृश्य पहले कभी नहीं देखा।’ मृतकों और घायलों की संख्या फिलहाल नहीं बताई गई है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने सोशल मीडिया पर इसे गंभीर घटना बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार और स्थानीय प्रशासन साथ मिलकर राहत और बचाव के काम में जुटी है। इस सैन्य अड्डे पर 1300 से ज्यादा सैनिक और कर्मचारी काम करते है। घटना के बाद की 3 तस्वीरें डॉक्टर बोले- स्वास्थ्य केंद्र मरीजों से भरे स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, विस्फोट के बाद तेज हवाओ के कारण आग सैन्य अड्डे के आसपास तेजी से फैल गई। कई इलाकों से दमकलकर्मी आग बुझाने के लिए पहुंचे। रॉयल एलेक्जेंड्रा अस्पताल के इमरजेंसी डॉक्टर वॉरेन थिर्स्क ने इसे 15 से 25 साल में एक बार होने वाली बड़ी आपदा बताया। उन्होंने कहा कि मरीजों की संख्या इतनी ज्यादा थी कि शहर के स्वास्थ्य केंद्र पूरी तरह भर गए। अधिकारियों ने अभी तक यह नहीं बताया है कि धमाका कैसे हुआ और आग लगने की वजह क्या थी। रक्षा मंत्री मैकगिन्टी ने कहा कि कनाडा की रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) घटना की जांच कर रही है। यह कनाडा का सबसे व्यस्त सैन्य अड्डा है अल्बर्टा में यह सैन्य अड्डा कनाडा के अहम आर्मी ट्रेनिंग कैंप्स में से एक है। यहां सैनिकों को युद्ध के लिए तैयार किया जाता है। यहां कनाडियन मैनूवर ट्रेनिंग सेंटर भी है, जहां जवान युद्ध के मैदान जैसी परिस्थितियों में ट्रेनिंग लेते हैं। इसके अलावा, यहां तीसरे कनाडाई डिवीजन के सैनिकों को भी सैन्य प्रशिक्षण दिया जाता है। ———————— यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका में चुनावी प्रचार में AI का इस्तेमाल बढ़ा:न्यूयॉर्क के मेयर को महंगाई की दवा बेचते, डेमोक्रेट उम्मीदवार को 9/11 पर हंसते दिखाया अमेरिका में मिडटर्म चुनाव से पहले राजनीतिक प्रचार में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। उम्मीदवारों और राजनीतिक संगठनों ने AI से बने विज्ञापनों के प्रचार पर करीब 1300 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। पूरी खबर पढ़ें…

आईडीबीआईः नायाब नमूना

आईडीबीआई की कहानी कहीं अधिक गंभीर समस्या का उदाहरण है। आईसीआईसीआई और आईडीबीआई को दीर्घकालिक औद्योगिक एवं ढांचागत विकास के लिए पूंजी उपलब्ध कराने के लिए बनाया गया था। अब ऐसा कोई बैंक मौजूद नहीं है।

भारत में औद्योगिक विकास के सामने मौजूद पूंजी की समस्या को समझना हो, तो आईडीबीआई बैंक खास उदाहरण बन सकता है। अब इसे कनाडा की फैयरफैक्स कंपनी को बेचा जा रहा है। भारत सरकार ने इसकी 60.7 प्रतिशत हिस्सेदारी कनाडाई कंपनी को देने का फैसला किया है। बेशक इस बिक्री से सरकार को बड़ी रकम हासिल होगी, जिससे वर्तमान वित्तीय संकट का सामना करने में मदद मिलेगी। मगर गौरतलब है कि एक अन्य भारतीय बैंक- सीबीएस में फेयरफैक्स की 40 फीसदी हिस्सेदारी है। भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों के मुताबिक एक ही समूह दो बैंकों में इतना बड़ा हिस्सा नहीं रख सकता। लेकिन इसका रास्ता शायद निकाल लिया जाएगा।

खबरों के मुताबिक रिजर्व बैंक फेयरफैक्स को सीबीएस का विलय करने या उसमें अपना हिस्सा बेचने के लिए दो साल का समय दे सकता है। कुछ हलकों से बैंकों के विदेशी स्वामित्व पर भी सवाल उठाए गए हैं। इसे देश के रणनीतिक हितों के खिलाफ बताया गया है। बिक्री की इजाजत में कुछ प्रक्रियागत खामियों की तरफ भी इशारा किया गया है। ये सभी वाजिब एतराज हैं, लेकिन आईडीबीआई की कहानी उससे भी कहीं अधिक गंभीर समस्या का उदाहरण है। आईसीआईसीआई और आईडीबीआई बैंकों को दीर्घकालिक औद्योगिक एवं ढांचागत विकास के लिए पूंजी उपलब्ध कराने के लिए बनाया गया था। ऐसी फाइनेंशिंग में जोखिम भी ज्यादा रहता है। इसलिए आम बैंक इससे बचते हैं। इसीलिए “डेवलपमेंट बैंकिंग” सिस्टम का होना जरूरी समझा जाता है। लेकिन उदारीकरण के दौर में आत्म-निर्भर विकास को पिछड़ी धारणा माना जाने लगा।

नतीजतन, 2002 और 2004 में इन दोनों को कॉमर्शियल बैंक बना दिया गया। उसके बाद भारत में कोई डेवलपमेंट बैंक नहीं है। नतीजतन लघु एवं मझौले कारोबारियों के लिए वित्त का टोटा है। ये वो कारोबार हैं, जो शेयर बाजार से पूंजी नहीं उठा सकते। नतीजतन, नए निजी निगमों के उदय का रास्ता बंद है। अब आईडीबीआई का स्वामित्व विदेशी हाथ में दिया जा रहा है। यानी उसे पुराने रूप लाना असंभव हो जाएगा। जिस समय दुनिया में रुझान भूमंडलीकरण से निकल कर आत्म-निर्भरता की ओर लौटने का है, ये फैसला भारत की उलटी दिशा का नायाब नमूना है।

आज मिलेगा शांति का नोबेल,ट्रम्प 7 साल से मांग रहे:कनाडा के PM दावेदार, इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन का नाम भी चर्चा में

2026 के नोबेल शांति पुरस्कार का ऐलान आज नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प करीब 7 साल से नोबेल मांग रहे हैं। उनके लिए नोबेल शांति पुरस्कार की चर्चा 2019 में तेज हुई थी। उस वक्त ट्रम्प ने उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन से बातचीत की थी। ट्रम्प के समर्थकों ने इसे दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की कोशिश बताया। जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने भी कथित तौर पर ट्रम्प को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट किया था। इस बार ट्रम्प के साथ कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, पोप लियो XIV और यहां तक कि इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) का नाम भी चर्चा में है। नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में होगी। 2025 में की विजेता ने अपना नोबेल ट्रम्प को सौंपा पिछले साल भी ट्रम्प ने कई बार नोबेल देने की मांग की थी। उन्होंने भारत-पाकिस्तान समेत 8 युद्धों को रोकने का दावा किया। ट्रम्प खुद कई बार कह चुके हैं कि उन्होंने शांति के लिए काम किया है और उन्हें नोबेल मिलना चाहिए। 2025 का पुरस्कार वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो को मिला। बाद में मचाडो ने अपना नोबेल मेडल ट्रम्प को सौंप दिया। उन्होंने इसे वेनेजुएला की आजादी के लिए ट्रम्प के समर्थन के सम्मान के तौर पर बताया। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन का नाम क्यों आया इस साल की नोबेल रेस में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन का नाम सबसे अलग है। ISS पर अमेरिका, रूस, फ्रांस और कनाडा के अंतरिक्ष यात्री साथ काम करते हैं। धरती पर इन देशों के बीच राजनीतिक तनाव और मतभेद हैं, लेकिन अंतरिक्ष स्टेशन पर उनके वैज्ञानिक एक साथ काम करते हैं। ओस्लो पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक हाकोन जेरलोव ने इसे अंतरराष्ट्रीय सहयोग का उदाहरण बताया है। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पृथ्वी से करीब 400 किलोमीटर ऊपर अंतरिक्ष में मौजूद है। यह करीब 28 हजार किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पृथ्वी का चक्कर लगाता है। सूडान का आम लोगों का नेटवर्क भी दावेदार सूडान के इमरजेंसी रिस्पॉन्स रूम्स (ईआरआर) का नाम भी प्रमुख दावेदारों में है। 2023 में सूडान में गृहयुद्ध शुरू होने के बाद विदेशी राहतकर्मी बड़ी संख्या में देश छोड़कर चले गए। इसके बाद स्थानीय लोगों ने खुद अपने इलाकों में राहत का काम संभाला। उन्होंने सामुदायिक रसोई और क्लिनिक चलाए। विदेश में रहने वाले सूडानी लोगों ने भी पैसे भेजकर इन अभियानों की मदद की। अंतरराष्ट्रीय सहायता कम होने के बावजूद यह नेटवर्क लोगों तक जरूरी मदद पहुंचाता रहा। शांति का नोबेल स्वीडन की बजाय नॉर्वे में क्यों? नोबेल के बाकी पुरस्कार स्वीडन में दिए जाते हैं, लेकिन शांति का नोबेल नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में दिया जाता है। इसकी वजह करीब 130 साल पुरानी है। यह व्यवस्था खुद अल्फ्रेड नोबेल ने अपनी वसीयत में तय की थी। 1895 में लिखी अपनी वसीयत में नोबेल ने तय किया था कि शांति पुरस्कार का फैसला नॉर्वे की संसद द्वारा चुनी गई समिति करेगी। उस समय स्वीडन और नॉर्वे एक ही राजा के अधीन थे, हालांकि दोनों की अपनी संसद और अलग राजनीतिक व्यवस्था थी। नोबेल ने यह नहीं बताया था कि शांति पुरस्कार के लिए उन्होंने नॉर्वे को ही क्यों चुना।
नोबेल की 1896 में मौत हुई और 1901 से पुरस्कार दिए जाने लगे। उस समय स्वीडन और नॉर्वे एक संघ में थे। 1905 में दोनों देश अलग हो गए, लेकिन नोबेल की वसीयत में शांति पुरस्कार के लिए नॉर्वे को दी गई जिम्मेदारी जारी रही। इसी वजह से आज भी फिजिक्स, केमिस्ट्री, मेडिसिन, साहित्य और अर्थशास्त्र के नोबेल स्वीडन में, जबकि शांति का नोबेल नॉर्वे में दिया जाता है। ——————— ये खबर भी पढ़ें… 2026 का साहित्य नोबेल कनाडाई लेखिका ऐन कार्सन को:ग्रीक-रोमन साहित्य को आधुनिक दुनिया से जोड़ा, चर्चित किताब ‘द ब्यूटी ऑफ द हसबैंड’ कनाडा की लेखिका और कवयित्री ऐन कार्सन को 2026 का साहित्य नोबेल पुरस्कार दिया गया है। नोबेल समिति ने उन्हें ऐसी रचनाओं के लिए सम्मानित किया है, जिनमें उन्होंने पुराने यूनानी-रोमन साहित्य को आज की जिंदगी, प्यार, रिश्तों और दुख से जोड़ा। पूरी खबर यहां पढ़ें…

कनाडाई लेखक पर AI से किताब लिखने का आरोप:फ्रांस के सबसे बड़े पुरस्कार की रेस से बाहर, लेखक बोले- 2019 में ये सब नहीं था

कनाडाई लेखक थेलीसन ओरेलियन की किताब को फ्रांस के सबसे बड़े साहित्यिक पुरस्कार ‘प्रिक्स गोनकोर्ट’ की दौड़ से बाहर कर दिया गया है। ओरेलियन पर उनकी किताब ‘इट वॉज ईदर दैट ऑर डाई’ लिखने में AI की मदद लेने का आरोप लगा है। लेखक ने इससे इनकार किया है। उन्होंने कहा कि किताब पर 2017 में काम शुरू हुआ था और 2019 में पहला ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया था। तब आम लोगों के लिए AI उपलब्ध नहीं थे। हालांकि गोनकोर्ट अकादमी इससे सहमत नहीं हुई। अकादमी ने कहा कि रिसर्चर्स और पत्रकारों की जांच में किताब का बड़ा हिस्सा AI की मदद से लिखने का संकेत मिला है। अकादमी ने कहा कि वे AI कंटेंट से तैयार साहित्य को किसी भी रूप में बढ़ावा नहीं देना चाहते। सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ विवाद ओरेलियन की किताब को लेकर विवाद एक छोटे से गुमनाम सोशल मीडिया अकाउंट से शुरू हुआ। बाद में फ्रांस के अखबार ले फिगारो के लेखक सैमुअल फिटूसी ने माना कि वह इस अकाउंट को चलाते थे। फिटूसी ने कहा कि कुछ यूजर्स ने उनसे ओरेलियन की किताब की जांच करने को कहा था। इसके बाद उन्होंने किताब को पैंग्राम नाम के AI से लिखावट पहचानने वाले टूल से जांचा। उनका कहना था कि इसका मकसद ओरेलियन को निशाना बनाना नहीं था। वह लोगों का ध्यान इस ओर खींचना चाहते थे कि AI अब किताबें लिखने में भी इस्तेमाल हो रहा है। तीन AI टूल्स की मदद से किताब की जांच ओरेलियन की किताब की जांच तीन AI पहचानने वाले टूल और कई एक्सपर्ट्स ने की। इन जांचों में किताब में AI के इस्तेमाल की संभावना बताई गई। हालांकि, एक्सपर्ट्स ने यह भी कहा कि ऐसे टूल्स के नतीजों को 100% सही नहीं माना जा सकता। पैंग्राम- किताब के 95% हिस्से में AI के इस्तेमाल की संभावना है। GPT जीरो- किताब के 87% हिस्से में AI के इस्तेमाल की संभावना है। विंस्टन- अलग-अलग हिस्सों में 12% से 66% इंसानी लेखन की संभावना बताई। फ्रांस के AI रिसर्चर थियरी पोइबो ने कहा कि किताब में AI इस्तेमाल होने की संभावना है, लेकिन अभी यह पूरी तरह पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता। फ्रांस में किताब की बहुत चर्चा हो रही ओरेलियन की किताब फ्रांस में पहले से ही चर्चा में थी। इसमें एक हाईस्कूल शिक्षक की कहानी है, जो हैती में गैंग से बचकर निकलता है। इसके बाद वह डेरियन गैप (घने जंगलों, पहाड़ियों और दलदलों का एक खतरनाक रास्ता) पार कर अमेरिका और फिर कनाडा पहुंचता है। कुछ ही हफ्तों में किताब की 54 हजार से ज्यादा कॉपी बिक चुकी हैं। इसे अच्छी समीक्षाएं मिली थीं और कई साहित्यिक पुरस्कारों के लिए इसका नाम आया था। ओरेलियन इस महीने अपनी किताब के प्रचार के लिए फ्रांस पहुंचे थे। उनकी किताब को वहां अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही थी। उन्हें टीवी कार्यक्रमों में बुलाया जा रहा था और किताब गोनकोर्ट के अलावा भी कई बड़े साहित्यिक पुरस्कारों की दौड़ में शामिल थी। भूकंप के बाद हैती छोड़ा, कनाडा गए ओरेलियन 38 साल के हैं। उनका जन्म हैती के गोनाइव्स शहर में हुआ था। उनके पिता अकाउंटेंट और मां दर्जी थीं। 2010 के भूकंप के बाद उन्होंने हैती छोड़ दिया था। इस भूकंप में 2 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी और उनका घर भी तबाह हो गया था। इसके बाद वे डोमिनिकन रिपब्लिक पहुंचे। वहां से उन्होंने कनाडा जाने के लिए वीजा की अर्जी दी, लेकिन पहली अर्जी खारिज हो गई। इसके बाद एक क्यूबेक की कांसुलर अधिकारी ने उनकी हालत देखकर उन्हें 30 दिन में यह साबित करने का मौका दिया कि कनाडा में उनके परिवार के लोग उनका खर्च उठा सकते हैं। उनके अंकल ने जरूरी दस्तावेज भेजे और इसके बाद उनका कनाडा जाने का रास्ता खुला। —————————–
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ओपनएआई ने दावा किया है कि उसकी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक ने गणित की दुनिया के सबसे मुश्किल सवालों में से एक को सॉल्व कर दिया है। AI को इसे सुलझाने में सिर्फ 88 घंटे लगे। पूरी खबर यहां पढ़ें…

अमेरिका को छोड़कर कनाडा अब यूरोप के साथ आएगा:यूरोपीय संघ का पहला एसोसिएट मेंबर बनेगा, ब्रिटेन-यूक्रेन के साथ मिलकर सुरक्षा मजबूत करेगा

अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच कनाडा अब यूरोप के करीब जाने की तैयारी में है। वह यूरोपीय संघ (EU) का पहला ‘एसोसिएट मेंबर’ बनने जा रहा है। एसोसिएट मेंबर के तौर पर कनाडा यूरोपीय संघ के 27 देशों में शामिल नहीं होगा और उसे वोटिंग का अधिकार भी नहीं मिलेगा, लेकिन रक्षा, AI, टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, जरूरी खनिज और व्यापार जैसे मामलों में यूरोपीय संघ के साथ उसका सहयोग बढ़ेगा। इसके साथ ही कनाडा ब्रिटेन और यूक्रेन जैसे यूरोपीय संघ से बाहर के देशों के साथ यूरोप की सुरक्षा मजबूत करने के लिए एक नई सिक्योरिटी काउंसिल में भी शामिल हो सकता है। कनाडा के प्रधानमंत्री ने यूरोपीय संघ के साथ जुड़ने की इच्छा जताई थी

यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने बुधवार को कहा कि यूरोपीय संघ कनाडा के लिए अपने दरवाजे खोलना चाहता है। इस दौरान कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी भी मौजूद थे। कार्नी ने पिछले हफ्ते यूरोपीय संघ के साथ एक ‘गठबंधन’ बनाने की इच्छा जताई थी। कनाडा के लिए यूरोपीय संघ को नई व्यवस्था बनानी पड़ेगी यूरोपीय संघ के नियमों में अभी ‘एसोसिएट मेंबर’ जैसी कोई सदस्यता नहीं है। इसलिए अगर कनाडा को यह दर्जा देना है, तो यूरोपीय संघ को इसके लिए नए नियम बनाने होंगे और सदस्य देशों की सहमति लेनी होगी। इस तरह का विचार पहली बार इस साल जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने यूक्रेन के लिए रखा था। लेकिन यूक्रेन ने इसमें ज्यादा रुचि नहीं दिखाई, क्योंकि वह यूरोपीय संघ का पूरा सदस्य बनना चाहता है। उस योजना के तहत यूक्रेन को यूरोपीय संघ की बैठकों में हिस्सा लेने और कुछ संस्थाओं में प्रतिनिधित्व का मौका मिल सकता था। उसे यूरोपीय संघ की कुछ योजनाओं और फंड का लाभ भी मिलता, लेकिन अन्य सदस्य देशों की तरह फैसलों पर वोट देने का अधिकार नहीं होता। यूरोपीय संघ और कनाडा के बीच व्यापार बढ़ा अमेरिका की ओर से लगाए गए टैरिफ और चीन से बढ़ती कारोबारी चुनौती के बीच यूरोपीय संघ और कनाडा पहले से ही एक-दूसरे के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। दोनों के बीच CETA नाम का व्यापार समझौता है, जिससे ज्यादातर सामानों पर लगने वाला आयात शुल्क खत्म हो चुका है। इसका असर यह हुआ कि 2016 के बाद से EU और कनाडा के बीच कारोबार 80% से ज्यादा बढ़ गया। इस साल कनाडा यूरोप के एक बड़े रक्षा फंड से जुड़ने वाला पहला गैर-यूरोपीय देश भी बना है। वॉन डेर लेयेन ने कहा कि दुनिया में ताकत सिर्फ बड़े या अमीर देशों के पास नहीं होनी चाहिए। लोकतांत्रिक देशों को यह हक होना चाहिए कि वे अपनी पसंद के साझेदार चुन सकें। उन्होंने कहा कि इसी सोच के तहत यूरोप और कनाडा अपने रिश्ते और मजबूत कर रहे हैं। अमेरिका और कनाडा के बीच ट्रेड वॉर जारी अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापार विवाद करीब 18 महीने से जारी है। जुलाई में ट्रम्प ने कनाडा पर अमेरिकी उद्योगों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया था। इसके बाद ट्रम्प ने एक पुराने कानून का इस्तेमाल करते हुए चुनिंदा कनाडाई सामान पर 50% तक टैरिफ लगाने का फैसला किया। इसके बाद कनाडा ने कई अमेरिकी सामान पर 50% तक जवाबी टैरिफ लागू किया था। इसके पहले दोनों देशों के बीच कई महीनों तक बातचीत चली, लेकिन 21 अगस्त में यह बातचीत टूट गई। इसके बाद दोनों के बीच टैरिफ वॉर शुरू हो गई। ————————- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका का कनाडा के डेयरी प्रोडक्ट और शराब पर बैन: मोटरसाइकिलों पर भी रोक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कनाडा से आने वाले डेयरी प्रोडक्ट, शराब और मोटरसाइकिलों पर रोक लगाने का फैसला किया है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

कनाडा में स्टडी वीजा के नियम बदले:अब ₹17 लाख बैंक बैलेंस रखना होगा; 31 अगस्त तक अप्लाई करने वाले पंजाबियों को फायदा हुआ

स्टडी वीजा पर कनाडा जाने वाले पंजाबियों को अब ज्यादा पैसे खर्चने पड़ेंगे। अब पढ़ने जाने वाले स्टूडेंट्स को अपने रहने-खाने सहित अन्य व्यवस्थाओं के लिए बैंक बैलेंस 17 लाख रखना होगा। इमीग्रेशन रिफ्यूजी सिटिजनशिप डिपार्टमेंट ने नए नियम लागू कर दिए है, जिसे अफिशियल वेबसाइट पर 1 दिन पहले अपडेट किया गया है। कनाडा सरकार का कहना है कि देश में बढ़ रही महंगाई के चलते ये निर्णय लिया गया है। पहले कनाडा स्टडी के लिए जाने वाले स्टूडेंट्स को 15 लाख के करीब सालाना बैंक बैलेंस मेंटेन रखना जरूरी था। IRCC के अनुसार 31 अगस्त तक अप्लाई कर चुके स्टूडेंट्स पर नए नियम लागू नहीं होंगे। 1 सितंबर 2026 से अप्लाई कर रहे स्टूडेंट्स पर नए नियमों के तहत अब कनाडाई यूनिवर्सिटी या कॉलेज में दाखिला लेने से पहले अपनी वित्तीय मजबूती साबित करने करने के लिए पहले से लगभग 2 लाख रुपए ज्यादा बैंक बैलेंस दिखाना होगा। कॉलेज फीस और ट्रेवल खर्च के अतिरिक्त दिखाना हो बैलेंस कनाडा सरकार की आधिकारिक वेबसाइट (canada.ca) पर जारी ताजा नोटिफिकेशन के अनुसार, अब सिंगल एप्लीकेंट (अकेले जाने वाले छात्र) को लिविंग एक्सपेंस यानी रहने-खाने के खर्च के तौर पर कम से कम 23,448 कनाडाई डॉलर (CAD) का फंड दिखाना अनिवार्य होगा। भारतीय रुपए में यह रकम करीब 17 लाख रुपए बैठती है। इस रकम में कॉलेज की ट्यूशन फीस और भारत से कनाडा आने-जाने का ट्रैवल खर्च शामिल नहीं है। ट्यूशन फीस और यात्रा खर्च का हिसाब इस निर्धारित राशि से अलग रहेगा। परिवार के 4 मेंबर के साथ दिखाने होंगे 30 लाख इमिग्रेशन विभाग (IRCC) के आधिकारिक डेटा चार्ट के मुताबिक, यदि छात्र के साथ उनके परिवार के सदस्य भी कनाडा जाते हैं, तो उसी हिसाब से फंड की सीमा बढ़ जाएगी। दो लोगों के परिवार के लिए यह सीमा 29,185 CAD (20.10 लाख), तीन सदस्यों के लिए 35,880 CAD (24.74 लाख) और चार सदस्यों के परिवार के लिए 43,562 CAD (30.04 लाख) तय की गई है। इसके बाद परिवार के प्रत्येक अतिरिक्त सदस्य के जुड़ने पर 6,315 कनाडाई डॉलर (4.35 लाख) का अतिरिक्त फंड बैंक खाते में दिखाना अनिवार्य होगा। हालांकि, ये नियम क्यूबेक प्रांत को छोड़कर पूरे कनाडा में लागू होंगे, क्योंकि क्यूबेक अपने लिविंग एक्सपेंस के नियम अलग से तय करता है। महंगाई के चलते कनाडा सरकार ने बढ़ाया बजट IRCC की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, इस फैसले का मुख्य मकसद कनाडा में रह रहे अंतरराष्ट्रीय छात्रों को वित्तीय संकट और महंगाई से बचाना है। बीते कुछ वर्षों में कनाडा के प्रमुख शहरों में रेंट (मकान का किराया), ग्रोसरी और बेसिक यूटिलिटीज के दाम काफी तेजी से बढ़े हैं। पुराना फंड पैरामीटर मौजूदा महंगाई दरों के हिसाब से काफी कम पड़ रहा था, जिसके चलते कई विदेशी छात्रों को वहां जाकर पार्ट-टाइम जॉब्स पर पूरी तरह निर्भर रहना पड़ता था या रहने-खाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। वीजा अप्लाई से पहले इन बातों का रखें ध्यान अब 1 सितंबर 2026 के बाद वीजा फाइल जमा करने वाले सभी छात्रों को तीन अलग-अलग मदों में अपना फंड प्रूफ देना होगा। पहला, पहले साल की पूरी ट्यूशन फीस; दूसरा तय लिविंग एक्सपेंस दिखाना होगा जो सिंगल छात्र के लिए 23,448 डालर है। तीसरा, भारत से कनाडा आने-जाने का टिकट खर्च। विशेषज्ञों की सलाह है कि कनाडाई वीजा के रिजेक्शन से बचने के लिए छात्र अपने स्पॉन्सर या बैंक स्टेटमेंट में आधिकारिक वेबसाइट द्वारा तय राशि से थोड़ा अधिक ही बैलेंस मेंटेन रखें, ताकि एप्लीकेशन में कोई अड़चन न आए। कनाडा में 10 लाख पंजाबी रह रहे कनाडा में पंजाबी मूल के लोगों की कुल संख्या लगभग 9.4 लाख से 10 लाख के बीच है, जो वहां की कुल आबादी का करीब 2.6% है।

अमेरिका का कनाडा के डेयरी प्रोडक्ट और शराब पर बैन:मोटरसाइकिलों पर भी रोक, 29 सितंबर से लागू होगा; व्यापार में भेदभाव का आरोप लगाया

अमेरिका ने कनाडा के डेयरी प्रोडक्ट, ज्यादातर शराब और मोटरसाइकिलों के आयात पर बैन लगाने का फैसला किया है। यह प्रतिबंध 29 सितंबर से लागू होगा। अमेरिकी सरकार ने कनाडा पर अमेरिकी कंपनियों और किसानों के साथ व्यापार में भेदभाव करने का आरोप लगाया है। अमेरिका का कहना है कि कनाडा की डेयरी और पनीर से जुड़ी व्यापार व्यवस्था अमेरिकी किसानों के लिए सही नहीं है। अमेरिका के मुताबिक, कनाडा की टैरिफ-कोटा व्यवस्था के कारण अमेरिकी डेयरी उत्पादों को वहां पर्याप्त बाजार नहीं मिल पाता। इससे पहले कनाडा ने मंगलवार से करीब 20 अरब डॉलर के अमेरिकी सामान पर जवाबी टैरिफ लागू कर दिया। ट्रम्प बोले- बराबरी नहीं तो बाजार तक पहुंच भी नहीं ट्रम्प ने अमेरिकी सरकार की खरीद से भी कनाडाई सामान हटाने का आदेश दिया है। उन्होंने जनरल सर्विसेज एडमिनिस्ट्रेशन (GSA) और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) को सरकारी खरीद की सूची से कनाडाई उत्पाद हटाने को कहा है। ट्रम्प ने कहा कि कनाडा जब तक अमेरिकी कंपनियों और किसानों को अपने बाजार में बराबर और उचित पहुंच नहीं देता, तब तक कनाडाई सामान को अमेरिकी सरकारी खरीद में जगह नहीं मिलेगी। उन्होंने अपनी नीति को “बराबरी नहीं तो पहुंच नहीं” बताया। 18 महीने से चल रहा व्यापार विवाद अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापार विवाद करीब 18 महीने से जारी है। पिछले महीने दोनों देशों के बीच बातचीत टूटने के बाद टैरिफ और दूसरे व्यापार प्रतिबंधों का सिलसिला तेज हो गया है। दोनों देश एक-दूसरे के सामान पर नए शुल्क और प्रतिबंध लगाकर दबाव बना रहे हैं, जिससे लंबे समय से मजबूत रहे अमेरिका-कनाडा व्यापारिक रिश्तों में तनाव बढ़ता जा रहा है। खबर अपडेट हो रही है…

ट्रम्प बोले- कनाडाई बॉम्बार्डियर प्लेन अमेरिका में नहीं बिकेंगे:कहा- हमारे बाजार चाहिए तो यहीं बनाओ, US को पिगी बैंक मत समझो

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कनाडा की विमान कंपनी बॉम्बार्डियर को अमेरिका में विमान बेचने से रोकने की धमकी दी है। ट्रम्प ने कहा कि अगर बॉम्बार्डियर को अमेरिकी बाजार में कारोबार करना है तो उसे विमान अमेरिका में ही बनाने होंगे। उन्होंने कहा कि कनाडा अमेरिका के बाजार का गलत फायदा उठा रहा है। हालांकि ट्रम्प ने यह नहीं बताया कि बॉम्बार्डियर के विमानों की बिक्री रोकने के लिए अमेरिका कौन-सा कदम उठाएगा। ट्रम्प ने सोमवार को ट्रुथ सोशल पर लिखा, अमेरिका में बॉम्बार्डियर विमान की बिक्री अब नहीं होगी। उन्हें अमेरिका को पिगी बैंक समझना बंद करना होगा। अमेरिका बॉम्बार्डियर के लिए सबसे बड़ा बाजार है अमेरिका बॉम्बार्डियर कंपनी के लिए बेहद अहम बाजार है। आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में बॉम्बार्डियर की कुल आय 9.55 अरब डॉलर रही। इस कमाई का बड़ा हिस्सा अमेरिका से आता है लेकिन रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं है कि कमाई का 50 प्रतिशत अमेरिका में किए गए कारोबार से आया। कंपनी ने कहा- हमने US में हजारों लोगों को नौकरी दी ट्रम्प की धमकी के बाद बॉम्बार्डियर कंपनी ने कहा कि उसका अमेरिका में बड़ा कारोबार है और इससे वहां हजारों लोगों को नौकरी मिलती है। कंपनी ने बताया कि उसकी सप्लाई चेन में अमेरिका के 47 राज्यों की करीब 2,800 कंपनियां शामिल हैं। बॉम्बार्डियर ने यह भी कहा कि उसके विमानों में अमेरिका में बने इंजन, एवियोनिक्स और कई दूसरे अहम उपकरण इस्तेमाल होते हैं। कंपनी इस साल इंडियाना के फोर्ट वेन में अपनी नई फैसिलिटी भी शुरू करने वाली है। जनवरी में भी ट्रम्प ने दी थी धमकी कनाडाई कंपनी बॉम्बार्डियर को लेकर ट्रम्प पहले भी सख्त रुख अपना चुके हैं। जनवरी में उन्होंने कंपनी के विमानों का अमेरिका में सर्टिफिकेशन रद्द करने और कनाडाई विमानों पर 50% टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। उस समय ट्रम्प कनाडा से इसलिए नाराज थे क्योंकि उनका आरोप था कि कनाडा ने अमेरिकी कंपनी गल्फस्ट्रीम के नए विमानों को सर्टिफिकेशन देने से इनकार किया था। उस समय ट्रम्प की धमकी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। बॉम्बार्डियर के विमान अभी भी अमेरिका में सर्टिफाइड हैं। अमेरिका-कनाडा के बीच बढ़ रहा ट्रेड वॉर बॉम्बार्डियर पर ट्रम्प की नई धमकी ऐसे समय आई है, जब अमेरिका और कनाडा के बीच टैरिफ को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है। पिछले महीने ट्रम्प ने करीब 20 अरब डॉलर के कनाडाई सामान पर 50% टैरिफ लगाया था। इसमें हॉकी स्टिक से लेकर सीमेंट तक के सामान शामिल थे। इसके जवाब में कनाडा ने भी अमेरिका से आने वाले करीब 20 अरब डॉलर के सामान पर जवाबी टैरिफ लगाने का फैसला किया है। ये टैरिफ मंगलवार से प्रभावी हो गए हैं। बॉम्बार्डियर पर रोक लगाना आसान नहीं ट्रम्प की धमकी के बावजूद बॉम्बार्डियर के विमानों की बिक्री पर तुरंत रोक लगाना आसान नहीं होगा। अमेरिका में विमानों को सर्टिफाई करने की जिम्मेदारी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन यानी FAA की है। यानी राष्ट्रपति सीधे किसी विमान का सर्टिफिकेशन रद्द नहीं कर सकते। इसके लिए संबंधित अमेरिकी एजेंसी की प्रक्रिया से गुजरना होगा। अमेरिका-कनाडा के बीच विवाद की 5 बड़ी वजहें 1. टैरिफ की नई लड़ाई सबसे बड़ा विवाद टैरिफ को लेकर है। अमेरिका ने कनाडा के करीब 20 अरब डॉलर के सामान पर 50% तक अतिरिक्त शुल्क लगाया है। इसमें शराब, डेयरी, फर्नीचर, हॉकी उपकरण और कई दूसरे सामान शामिल हैं। बातचीत टूटने के बाद कनाडा ने भी डॉलर-फॉर-डॉलर जवाबी टैरिफ लगाने का फैसला किया है। 2. कनाडा को 51वां राज्य कहना ट्रम्प कई बार कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की बात कह चुके हैं। ट्रम्प का कहना है कि अमेरिका व्यापार के मामले में कनाडा को अरबों डॉलर का फायदा पहुंचाता है। यदि कनाडा अमेरिका का हिस्सा बन जाता है, तो यह व्यापारिक असमानता और टैरिफ से जुड़े विवाद अपने आप खत्म हो जाएंगे। 3. ट्रूडो को कनाडा का गवर्नर कहना ट्रम्प ने कई बार कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को तंजिया लहजे में ‘गवर्नर’ कहकर संबोधित किया था। कनाडाई नेताओं और जनता ने इसे अपनी संप्रभुता का अपमान माना। 4. सीमा सुरक्षा, अवैध घुसपैठ और फेंटानिल तस्करी अमेरिका और कनाडा के बीच बढ़ती सीमा सुरक्षा चिंताएं भी बड़े विवाद का कारण बनी हैं। ट्रम्प प्रशासन का आरोप रहा है कि कनाडा की उत्तरी सीमा से अवैध प्रवासियों की घुसपैठ और खतरनाक नशीली दवाओं (विशेषकर फेंटानिल) की तस्करी अमेरिका में बढ़ रही है। अमेरिका ने कनाडा से अपनी सीमाओं पर सख्त निगरानी और सख्त आव्रजन नीतियां लागू करने की मांग की है। 5. डेयरी और कृषि विवाद अमेरिका लंबे समय से कनाडा की ‘सप्लाई मैनेजमेंट’ सिस्टम का विरोध करता रहा है, जो कनाडाई डेयरी और पोल्ट्री (मुर्गी पालन) मार्केट को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाती है। अमेरिका चाहता है कि कनाडा अपने डेयरी बाजार को अमेरिकी किसानों के लिए पूरी तरह खोले। ———————– यह खबर भी पढ़ें… अमेरिकी मंत्री ने कनाडा को ‘भौंकने वाला छोटा कुत्ता’ बताया: बोले- पीएम कार्नी ने बेहतरीन ट्रेड डील ठुकराई अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कनाडा की तुलना छोटे कुत्ते से की। उन्होंने कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी पर बेहतरीन व्यापार समझौते को ठुकराने का आरोप भी लगाया। पूरी खबर पढ़ें…

अमेरिकी मंत्री ने कनाडा को ‘छोटा भौंकने वाला कुत्ता’ बताया:बोले- पीएम कार्नी ने बेहतरीन ट्रेड डील ठुकराई; अगस्त में हुई बातचीत नाकाम रही थी

अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर कनाडा के रवैये की आलोचना की है। उन्होंने कनाडा की तुलना बड़े कुत्ते को परेशान करने वाले छोटे भौंकने वाले कुत्ते से की। फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में बेसेंट ने कहा कि कनाडा के साथ व्यापार युद्ध का अमेरिका की कीमतों पर असर बहुत मामूली होगा। उन्होंने कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी पर बेहतरीन व्यापार समझौते को ठुकराने का आरोप भी लगाया। दरअसल, अमेरिका और कनाडा के बीच 19-21 अगस्त में हुए तीन दिन की ट्रेड बातचीत के बाद डील नहीं हो पाई थी। पीएम मार्क कार्नी का कहना था कि अमेरिका ने आखिरी समय पर डील की शर्तें बदल दी थी। वहीं अमेरिका ने कहा कि उन्होंने अच्छा ऑफर दिया था। खबर लगातर अपडेट हो रही है…

अमेरिकी मंत्री ने कनाडा को ‘छोटा भौंकने वाला कुत्ता’ बताया:बोले- पीएम कार्नी ने बेहतरीन ट्रेड डील ठुकराई; अगस्त में बातचीत नाकाम हुई थी

अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर कनाडा के रवैये की आलोचना की है। उन्होंने कनाडा की तुलना बड़े कुत्ते को परेशान करने वाले छोटे भौंकने वाले कुत्ते से की। फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में बेसेंट ने कहा कि कनाडा के साथ व्यापार युद्ध का अमेरिका की कीमतों पर असर बहुत मामूली होगा। उन्होंने कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी पर बेहतरीन व्यापार समझौते को ठुकराने का आरोप भी लगाया। दरअसल, अमेरिका और कनाडा के बीच 19-21 अगस्त में हुए तीन दिन की ट्रेड बातचीत के बाद डील नहीं हो पाई थी। पीएम मार्क कार्नी का कहना था कि अमेरिका ने आखिरी समय पर डील की शर्तें बदल दी थी। वहीं अमेरिका ने कहा कि उन्होंने अच्छा ऑफर दिया था। फॉक्स न्यूज ने जब बेसेंट से पूछा कि अमेरिका और कनाडा के बीच चल रहे व्यापार विवाद का आगे क्या होगा, तो बेसेंट ने कहा, बेंसेट बोले- कनाडाई टैरिफ का अमेरिका पर कोई असर नहीं अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी ने ट्रेड वॉर से अमेरिका में कीमतें बढ़ने की आशंका को लेकर भी चिंता नहीं जताई। बेसेंट ने कहा, “मैं चाहता हूं कि कोई मुझे यह दिखाए कि कनाडा के टैरिफ का अमेरिकी कीमतों पर कोई महत्वपूर्ण सांख्यिकीय असर है। मैं इस मुद्दे पर किसी से भी बहस करने के लिए तैयार हूं।” बेसेंट का यह बयान ऐसे समय आया है, जब पिछले कुछ समय से उनका और कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का एक-दूसरे पर बयान देने का सिलसिला जारी है। इससे पहले भी बेसेंट ने कार्नी पर आरोप लगाया था कि वे कनाडा की अर्थव्यवस्था के लिए क्या बेहतर है, इसके बजाय अपनी राजनीतिक छवि की ज्यादा चिंता करते हैं। ट्रम्प ने कनाडा पर 50% टैरिफ लगाया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता न होने के बाद 22 अगस्त से कनाडा के 20 अरब डॉलर (करीब 1.9 लाख करोड़ रुपए) के सामान पर 50% टैरिफ लागू कर दिया था। यह टैरिफ कनाडा के अमेरिका भेजे जाने वाले कुल सामान का करीब 5% है। पीएम कार्नी ने इस टैरिफ को कनाडा पर हमला बताया। उन्होंने अमेरिका के साथ बढ़ते ट्रेड विवाद को लेकर कहा, “हम जंग में हैं, क्योंकि हम पर हमला हुआ है।” अमेरिका ने कनाडा पर इतना ज्यादा टैरिफ क्यों लगाया? अमेरिका का कहना है कि कनाडा की कुछ व्यापार नीतियां अमेरिकी कंपनियों के लिए नुकसानदेह हैं। दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर लंबे समय से विवाद चल रहा है। इनमें ऑटोमोबाइल, डेयरी प्रोडक्ट्स, शराब और लकड़ी का कारोबार प्रमुख हैं। अमेरिका ने पहले नए टैरिफ 20 अगस्त से लगाने का ऐलान किया था। हालांकि, डेडलाइन से ठीक पहले दोनों देशों ने बातचीत शुरू करने का फैसला किया। इसके बाद ट्रम्प ने टैरिफ लागू करने की समयसीमा 3 दिन बढ़ा दी, ताकि समझौते की कोशिश की जा सके। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, कई मुद्दों पर सहमति बन गई थी, लेकिन कुछ अहम मामलों में दोनों देश एक-दूसरे की शर्तों पर सहमत नहीं हो सके। 1. अमेरिकी कारों के साथ भेदभाव का आरोप 2. कनाडा का अपने डेयरी मार्केट को प्रोटेक्शन 3. अमेरिकी शराब की बिक्री पर प्रतिबंध कनाडा के अमेरिका पर जवाबी टैरिफ अमेरिका के 50% टैरिफ के बाद कनाडा ने भी जवाबी कार्रवाई का ऐलान कर दिया। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि कनाडा अमेरिका के टैरिफ का डॉलर-फॉर-डॉलर जवाब देगा। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार तनाव और बढ़ गया। अमेरिका और कनाडा एक-दूसरे के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में शामिल हैं, इसलिए टैरिफ बढ़ने का असर दोनों देशों के कारोबार और सामान की कीमतों पर पड़ने का अनुमान है। अमेरिका-कनाडा के बीच 3 अन्य बड़े विवाद 1. कनाडा को 51वां राज्य कहना ट्रम्प कई बार कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की बात कह चुके हैं। ट्रम्प का कहना है कि अमेरिका व्यापार के मामले में कनाडा को अरबों डॉलर का फायदा पहुंचाता है। यदि कनाडा अमेरिका का हिस्सा बन जाता है, तो यह व्यापारिक असमानता और टैरिफ से जुड़े विवाद अपने आप खत्म हो जाएंगे। 2. ट्रूडो को कनाडा का गवर्नर कहना ट्रम्प ने कई बार कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को तंजिया लहजे में ‘गवर्नर’ कहकर संबोधित किया था। कनाडाई नेताओं और जनता ने इसे अपनी संप्रभुता का अपमान माना। 3. सीमा सुरक्षा, अवैध घुसपैठ और फेंटानिल तस्करी अमेरिका और कनाडा के बीच बढ़ती सीमा सुरक्षा चिंताएं भी बड़े विवाद का कारण बनी हैं। ट्रम्प प्रशासन का आरोप रहा है कि कनाडा की उत्तरी सीमा से अवैध प्रवासियों की घुसपैठ और खतरनाक नशीली दवाओं (विशेषकर फेंटानिल) की तस्करी अमेरिका में बढ़ रही है। अमेरिका ने कनाडा से अपनी सीमाओं पर सख्त निगरानी और सख्त आव्रजन नीतियां लागू करने की मांग की है। —————- यह खबर भी पढ़ें… ट्रम्प ने कनाडा से जुड़ी झील का नाम बदला:’लेक ओंटारियो’ अब ‘लेक अमेरिका’ कहलाएगा; कनाडा बोला- हम पुराना नाम ही बोलेंगे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को लेक ओंटारियो का नाम बदलकर ‘लेक अमेरिका’ करने के आदेश पर साइन किया। पूरी खबर पढ़ें…