Tecno ने लॉन्च किया दमदार Spark Go 3 Pro, पानी, धूल और गिरने से नहीं होगा आसानी से खराब

Tecno ने भारत में Spark Go 3 Pro लॉन्च किया है। कंपनी का दावा है कि यह इस सेगमेंट का पहला स्मार्टफोन है जिसे IP69 ड्यूरेबिलिटी रेटिंग मिली है। बता दें कि यह नया बजट स्मार्टफोन उन यूजर्स के लिए बनाया गया है जिन्हें ऐसे डिवाइस की जरूरत है जो मुश्किल हालात झेल सके और तेज प्रेशर वाले पानी के जेट, धूल और गलती से गिरने जैसी स्थितियों से सुरक्षित रह सके।

कंपनी के मुताबिक, Spark Go 3 Pro को डिलीवरी एग्जीक्यूटिव, किसानों, छात्रों और प्रोफेशनल्स जैसे यूजर्स को ध्यान में रखकर बनाया गया है, जिन्हें रोजाना इस्तेमाल के लिए एक मजबूत स्मार्टफोन चाहिए, जिसमें जरूरी फीचर्स से कोई समझौता न करना पड़े।

कीमत और उपलब्धता

Tecno Spark Go 3 Pro भारत में 4 सितंबर, 2026 से रिटेल स्टोर, Amazon और Flipkart पर बिक्री के लिए उपलब्ध होगा। इसके 4GB RAM + 64GB स्टोरेज वाले वेरिएंट की कीमत ₹15,999 है, जबकि 4GB RAM + 128GB स्टोरेज वाले मॉडल की कीमत ₹16,999 है।

स्पेसिफिकेशन्स

Tecno Spark Go 3 Pro की सबसे बड़ी खासियत इसकी IP69-रेटेड बनावट है। कंपनी का कहना है कि यह तेज दबाव वाले पानी के जेट, धूल और गलती से गिरने पर सुरक्षा देती है, जिससे यह मुश्किल आउटडोर स्थितियों में काम करने वाले यूजर्स के लिए सही है।

इस स्मार्टफोन में 120Hz का डिस्प्ले है, जो आम 60Hz पैनल के मुकाबले ज्यादा स्मूद स्क्रॉलिंग, गेमिंग और एनिमेशन का अनुभव देता है। डिवाइस को पावर देने के लिए इसमें 5,200mAh की बैटरी है। Tecno का कहना है कि इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि एक बार चार्ज करने पर यह पूरे दिन चल सके।

इसके अलावा, क्लियर वॉइस कॉल के लिए फोन में AI वॉइसप्रिंट नॉइज कैंसिलेशन फीचर दिया गया है, जो बातचीत के दौरान बैकग्राउंड के शोर को कम करता है। इस डिवाइस में IR ब्लास्टर भी है, जिससे यूजर्स टेलीविजन और एयर कंडीशनर जैसे कम्पैटिबल घरेलू उपकरणों को सीधे स्मार्टफोन से कंट्रोल कर सकते हैं।

Tecno का कहना है कि Spark Go 3 Pro को मजबूती और भरोसे को ध्यान में रखकर बनाया गया है। यह उन ग्राहकों के लिए है जो किफायती कीमत पर मजबूत स्मार्टफोन का अनुभव चाहते हैं, साथ ही रोजाना के कामों और मनोरंजन के लिए मॉडर्न फीचर्स भी चाहते हैं।

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कनाडा का अमेरिकी सामान पर 8 सितंबर से जवाबी टैरिफ:ट्रम्प ने 50% टैरिफ का ऐलान किया था, दोनों देशों के बीच तीन दिन की बातचीत फेल

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने शनिवार को कहा कि कनाडा 8 सितंबर से अमेरिकी सामान पर जवाबी टैरिफ लगाएगा। यह फैसला अमेरिका की ओर से कनाडा के करीब 20 अरब डॉलर के उत्पादों पर 50% टैरिफ लगाए जाने के बाद लिया गया है। दोनों देशों के बीच आखिरी दौर की बातचीत भी शुक्रवार को बिना किसी समझौते के खत्म हो गई। कनाडा का जवाबी टैरिफ स्टील, डेयरी उत्पाद, घरेलू उपकरण, कृषि उपकरण, पल्प एंड पेपर और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे अमेरिकी सामान पर लगेगा। किन-किन उत्पादों पर कितना टैरिफ लगेगा, इसकी पूरी जानकारी आने वाले दिनों में जारी की जाएगी। दोनों देशों के बीच 3 दिन चली बातचीत बेनतीजा रही अमेरिका और कनाडा के बीच 3 दिन तक चली ट्रेड डील की बातचीत नाकाम रही। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शनिवार आधी रात से कनाडा के 20 अरब डॉलर (करीब 1.9 लाख करोड़ रुपए) के सामान पर 50% टैरिफ लागू कर दिया। यह टैरिफ कनाडा के अमेरिका भेजे जाने वाले कुल सामान का करीब 5% है। अमेरिका और कनाडा के अधिकारियों ने वॉशिंगटन डीसी में तीन दिन की बातचीत की थी, लेकिन व्यापार समझौता फाइनल नहीं हो सका। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि अमेरिका जितना टैरिफ लगाएगा, कनाडा भी उतना ही जवाब देगा। अमेरिका बोला- अच्छा ऑफर दिया था, उन्होंने मौका गंवाया दोनो देशों के बीच ट्रेड डील नहीं हो पाने के बाद अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि कनाडा ने अमेरिका के साथ पार्टनशिप का बहुत अच्छा मौका गंवा दिया है। USTR के मुताबिक, उन्होंने कनाडा को किसी भी बड़े एक्सपोर्टर के मुकाबले सबसे अच्छा ऑफर दिया था। लेकिन कनाडा की नई मांगों और पहले किए गए वादों से पीछे हटने की वजह से यह डील नहीं हो पाई। USTR ने आगे कहा कि अगर यह डील होती तो इससे एयरोस्पेस में सप्लाई चेन कोऑर्डिनेशन, गलत ट्रेड प्रैक्टिस से निपटने के लिए जरूरी कदम, खनिजों पर सहयोग, और US-मेक्सिको-कनाडा एग्रीमेंट (USMCA) बातचीत की घोषणा जैसे नतीजे सामने आते। अमेरिका ने कनाडा पर इतना ज्यादा टैरिफ क्यों लगाया? अमेरिका का कहना है कि कनाडा की कुछ व्यापार नीतियां अमेरिकी कंपनियों के लिए नुकसानदेह हैं। दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर लंबे समय से विवाद चल रहा है। इनमें ऑटोमोबाइल, डेयरी प्रोडक्ट्स, शराब और लकड़ी का कारोबार प्रमुख हैं। अमेरिका ने पहले नए टैरिफ 20 अगस्त से लगाने का ऐलान किया था। हालांकि, डेडलाइन से ठीक पहले दोनों देशों ने बातचीत शुरू करने का फैसला किया। इसके बाद ट्रम्प ने टैरिफ लागू करने की समयसीमा 3 दिन बढ़ा दी, ताकि समझौते की कोशिश की जा सके। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, कई मुद्दों पर सहमति बन गई थी, लेकिन कुछ अहम मामलों में दोनों देश एक-दूसरे की शर्तों पर सहमत नहीं हो सके। 1. अमेरिकी कारों के साथ भेदभाव का आरोप अमेरिका लंबे समय से शिकायत करता रहा है कि कनाडा की ट्रेड पॉलिसी अमेरिकी कार कंपनियों को कनाडा के बाजार में बराबर मौका नहीं देती। अमेरिका चाहता है कि उसकी कारों और दूसरे सामान के लिए कनाडा का बाजार ज्यादा खुले। कनाडा ने बदले में अमेरिका से स्टील, एल्युमिनियम, कारों और लकड़ी पर लगाए गए टैरिफ में राहत मांगी थी। लेकिन अमेरिका इन टैरिफ को हटाने पर तैयार नहीं हुआ। 2. कनाडा का अपने डेयरी मार्केट को प्रोटेक्शन कनाडा अपने डेयरी बाजार को विदेशी कंपनियों और सस्ते डेयरी प्रोडक्ट्स से बचाने के लिए लंबे समय से कई नियम लागू करता रहा है। अमेरिका चाहता है कि उसके दूध, पनीर और दूसरे डेयरी प्रोडक्ट्स को कनाडा के बाजार में ज्यादा आसानी से बेचने का मौका मिले। लेकिन कनाडा अपने डेयरी सेक्टर को लेकर ज्यादा रियायत देने के लिए तैयार नहीं हुआ। इस मुद्दे पर भी दोनों देशों के बीच मतभेद बने रहे। 3. अमेरिकी शराब की बिक्री पर प्रतिबंध कनाडा के कुछ हिस्सों में अमेरिकी शराब की बिक्री को लेकर भी पाबंदियां लगाई गई हैं। अमेरिका इसे अपने सामान के साथ भेदभाव के तौर पर देखता है। अमेरिका चाहता है कि उसकी शराब को कनाडा के बाजार में ज्यादा आसानी से बेचने की इजाजत मिले। इसके अलावा दोनों देशों के बीच कनाडा की सॉफ्टवुड लंबर यानी लकड़ी को लेकर भी लंबे समय से विवाद है। अमेरिका कनाडा से आने वाली लकड़ी पर कई तरह के व्यापारिक प्रतिबंध और शुल्क लगाता रहा है। ————— यह खबर भी पढ़ें… भारत पर 100% टैरिफ वाला बिल अमेरिकी सीनेट में पास:रूसी तेल खरीदने वाले 5 देशों पर कार्रवाई; 86 सांसदों ने पक्ष में वोट किया, 11 विरोध में अमेरिकी सीनेट ने 86-11 के बहुमत से भारत समेत 5 देशों पर 100% तक का टैरिफ लगाने वाला बिल पास कर दिया है। इसका मकसद रूस की तेल से होने वाली कमाई को कम करना है, ताकि उसकी युद्ध लड़ने की क्षमता कमजोर हो सके। पूरी खबर पढ़ें…

‘अमेरिका बदल गया है…’, ट्रंप के टैरिफ से कनाडा नाराज, अब 8 सितंबर से अमेरिका पर लगाएगा जवाबी टैरिफ

US-Canada Trade War: अमेरिका और कनाडा के बीच ट्रेड वॉर यानी व्यापार विवाद और बढ़ गया है। दोनों देशों के बीच आखिरी समय में हुई बातचीत से कोई समझौता नहीं हो सका। इसके बाद अमेरिका ने कनाडा से आने वाले करीब 20 अरब डॉलर (लगभग 1.7 लाख करोड़ रुपये) के सामान पर 50% टैरिफ लगा दिया है। वहीं, जवाब में कनाडा ने भी 8 सितंबर से अमेरिका के खिलाफ इसी तरह के कदम उठाने की घोषणा की है।

बता दें कि अमेरिका के नए टैरिफ का असर कनाडा से अमेरिका को होने वाले सालाना निर्यात के लगभग 5% हिस्से पर पड़ेगा और इसमें हॉकी के सामान, डेयरी उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य सामान सहित कई तरह के उत्पाद शामिल हैं।

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि ओटावा ने बातचीत के दौरान कई रियायतें दीं, लेकिन वॉशिंगटन की उन मांगों को ठुकरा दिया जिन्हें उन्होंने जरूरत से ज्यादा बताया।

उन्होंने X पर लिखा, “एक साल से ज्यादा समय से, कनाडा ने अमेरिका के साथ एक नई और व्यापक व्यापार डील पर बातचीत करने के लिए पूरी ईमानदारी और मेहनत से काम किया है। हमने व्यावहारिक, धैर्यवान और लगातार प्रयास करने वाला रवैया अपनाया है। हमारा मकसद हमेशा कनाडाई लोगों के लिए सबसे अच्छी डील हासिल करना रहा है, न कि किसी भी कीमत पर या किसी भी समय-सीमा में डील करना। कल देर शाम मैंने अपने वार्ताकारों को ओटावा लौटने का निर्देश दिया। हम अमेरिका के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं कर सकते और न ही हम उनकी मांगी गई चीजें देंगे।”

कनाडा डॉलर-के-बदले-डॉलर के हिसाब से टैरिफ लगाकर जवाब देगा

कार्नी ने कहा कि अमेरिका के टैरिफ लागू होने के बाद कनाडा भी जवाबी टैरिफ लगाएगा। इन उपायों में स्टील, डेयरी, घरेलू उपकरण, कृषि उपकरण, पल्प और पेपर, और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टर शामिल हो सकते हैं।

कार्नी ने कहा, “आने वाले दिनों में हम इन नए टैरिफ उपायों की जानकारी जारी करेंगे, जो लेबर डे के बाद आने वाले मंगलवार से लागू होंगे।”

कनाडा ने बातचीत के दौरान यह प्रस्ताव भी दिया था कि अगर वॉशिंगटन अपने टैरिफ में काफी कमी करता है, तो वह अमेरिकी स्टील, एल्युमीनियम और ऑटोमोबाइल पर लगे अपने बाकी जवाबी टैरिफ हटा लेगा। ओटावा ने यह भी संकेत दिया था कि प्रांत अमेरिकी शराब उत्पादों को अपने बाजार में वापस आने की इजाजत दे सकते हैं।

हालांकि, कार्नी ने कहा कि अमेरिका के अंतिम प्रस्ताव कनाडा की स्वीकार करने की क्षमता से कहीं अधिक थे।

अमेरिका का दावा- कनाडा ने बेहतर डील ठुकराई

अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर ने वॉशिंगटन के रुख का बचाव करते हुए कहा कि ट्रंप प्रशासन ने कनाडा के लिए अहम उत्पादों – जैसे स्टील, ऑटोमोबाइल और लकड़ी – पर रियायतें देने की पेशकश की थी।

ग्रीर ने कहा, “हम ऐसे कदम उठा रहे हैं जो कनाडा की जवाबी कार्रवाई का जवाब देंगे।”

उन्होंने तर्क दिया कि कनाडा को बेहतर शर्तें ऑफर की गई थीं, लेकिन उसने उन्हें स्वीकार नहीं किया।

आखिरी समय की मांगों की वजह से बातचीत टूट गई

कार्नी के मुताबिक, अमेरिका की आखिरी मांगों में ऐसी शर्तें शामिल थीं जिनसे कनाडा में बनी गाड़ियों पर टैरिफ में मिलने वाली छूट कम हो जाती, दूसरे देशों के साथ ट्रेड एग्रीमेंट करने की कनाडा की क्षमता सीमित हो जाती और भाषा, संस्कृति व संप्रभुता से जुड़ी सुरक्षा पर असर पड़ता।

कार्नी ने इन मांगों को “अस्वीकार्य” बताया और कहा कि कनाडा अब अमेरिका के साथ पहले जैसे रिश्तों की स्थिति में वापस नहीं जाएगा।

बातचीत टूटने की यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब कुछ दिन पहले ही दोनों देशों के अधिकारियों ने उम्मीद जताई थी कि वे किसी समझौते पर पहुंचने के करीब हैं।

USMCA के भविष्य पर सवाल

बढ़ते विवाद ने यूनाइटेड स्टेट्स-मेक्सिको-कनाडा एग्रीमेंट (USMCA) के भविष्य पर भी चिंताएं बढ़ा दी हैं। यह नॉर्थ अमेरिकन ट्रेड पैक्ट इन तीनों देशों के बीच होने वाले व्यापार के एक बड़े हिस्से को नियंत्रित करता है।

अमेरिका पहले ही मैक्सिको के साथ इस समझौते में बदलाव को लेकर बातचीत शुरू कर चुका है, लेकिन कनाडा के साथ अभी तक औपचारिक बातचीत शुरू नहीं हुई है।

अमेरिका और कनाडा के बीच बढ़ता यह विवाद लंबे समय से सहयोगी रहे इन दोनों देशों के रिश्तों में एक बड़ा बदलाव दिखाता है। पिछले साल अमेरिका और कनाडा के बीच लगभग 880 अरब डॉलर का सामान और सेवाएं एक्सचेंज की गईं, जिससे वे व्यापार के लिए एक-दूसरे पर बहुत ज्यादा निर्भर हो गए हैं।

पुराने सहयोगी देशों के रिश्तों में बढ़ा तनाव

टैरिफ को लेकर यह ताजा विवाद वॉशिंगटन और ओटावा के बीच महीनों से बढ़ते तनाव के बाद शुरू हुआ है। ट्रंप ने अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए बार-बार टैरिफ लगाने पर जोर दिया है और कनाडा के अमेरिका का 51वां राज्य बनने के बारे में विवादित बातें भी कही हैं।

कार्नी ने दोनों देशों के रिश्तों में आ रहे बदलाव को स्वीकार करते हुए कहा कि कनाडा ने यह समझ लिया है कि “अमेरिका बदल गया है” और दोनों देश “अपने पुराने रिश्तों की स्थिति में वापस नहीं लौटेंगे।”

बता दें कि कनाडा अपने सामान का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा अमेरिका को निर्यात करता है, इसलिए यह विवाद कनाडाई कारोबारियों और कर्मचारियों के लिए बहुत अहम है।

ओंटारियो के प्रीमियर डग फोर्ड ने कार्नी के जवाब का समर्थन किया है। उन्होंने “टैरिफ के बदले टैरिफ और डॉलर के बदले डॉलर” के आधार पर जवाबी कार्रवाई करने की बात कही और कहा कि “सभी विकल्पों पर विचार किया जाना चाहिए।”

ट्रंप ने नए टैरिफ के लिए 1930 के ट्रेड लॉ का इस्तेमाल किया

ये नए टैरिफ US टैरिफ एक्ट, 1930 की धारा 338 पर आधारित हैं। इस नियम के तहत US राष्ट्रपति उन देशों से होने वाले इंपोर्ट पर 50% तक टैरिफ लगा सकते हैं, जिन्होंने अमेरिकी कारोबारों के साथ भेदभाव किया हो।

यह नियम ‘महामंदी’ (Great Depression) के दौर का है और पहले कभी भी इस तरह से टैरिफ लगाने के लिए इसका इस्तेमाल नहीं किया गया है।

इन नए कदमों से वह ट्रेड विवाद और गहरा हो गया है, जिसने दुनिया के सबसे करीबी आर्थिक और राजनीतिक रिश्तों में से एक पर पहले ही तनाव पैदा कर दिया है। फिलहाल आगे कोई बातचीत तय नहीं है, इसलिए दोनों देश अब टैरिफ विवाद के अगले दौर की तैयारी कर रहे हैं।

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स्कूल टीचर जेब में ₹10000 लेकर दिल्ली आया, खड़ी कर दी ₹80000 करोड़ की कंपनी; जानिए हैवेल्स के मालिक की पूरी कहानी

Havells India Success Story: 1958 की बात है। पंजाब का एक 21 साल का स्कूल टीचर नौकरी छोड़कर दिल्ली पहुंचा। जेब में सिर्फ 10,000 रुपये थे। कोई बड़ा कारोबारी परिवार नहीं था। इंजीनियरिंग की डिग्री भी नहीं थी। लेकिन बिजली के सामान के कारोबार की थोड़ी समझ थी और अपना कारोबार खड़ा करने का इरादा था।

उस युवक का नाम था कीमत राय गुप्ता। दिल्ली के पुराने इलाके भागीरथ पैलेस में उन्होंने बिजली के सामान की ट्रेडिंग शुरू की। छह दशक से ज्यादा समय बाद उसी छोटे कारोबार का नाम Havells India है। आज कंपनी की मार्केट वैल्यू करीब 80,000 करोड़ रुपये है और इसके प्रोडक्ट 70 से ज्यादा देशों में पहुंचते हैं।

लेकिन 10,000 रुपये से 80,000 करोड़ रुपये तक का यह सफर सीधी लाइन में नहीं चला। इसमें कई ऐसे फैसले आए, जिन्होंने कंपनी की दिशा बदल दी।

भागीरथ पैलेस से शुरुआत

कीमत राय गुप्ता का जन्म 1937 में मालेरकोटला में हुआ था। पढ़ाई पूरी करने के बजाय उन्होंने कारोबार का रास्ता चुना और 1958 में दिल्ली आ गए। उन्होंने भागीरथ पैलेस में Guptaji & Company शुरू की।

उस समय भागीरथ पैलेस बिजली के सामान के बड़े थोक बाजार के रूप में जाना जाता था। गुप्ता ने शुरुआत में केबल, वायर, स्विचगियर और दूसरे इलेक्ट्रिकल सामान की ट्रेडिंग की।

कारोबार छोटा था, लेकिन यहां उन्होंने एक ऐसी चीज सीखी जो आगे चलकर बहुत काम आई। उन्हें समझ आने लगा कि ग्राहक सिर्फ सस्ता सामान नहीं चाहता। उसे सही समय पर सामान चाहिए। भरोसेमंद सप्लायर चाहिए। और सबसे जरूरी, लगातार अच्छी सर्विस चाहिए। यही तजुर्बा आगे Havells की नींव बना।

Havells ब्रांड ₹7 लाख में खरीदा

कहानी में बड़ा मोड़ 1971 में आया। गुप्ता ने करीब 7 लाख रुपये में Havells ब्रांड खरीद लिया। उस समय यह कोई बड़ा और चमकदार ब्रांड नहीं था। कारोबार संघर्ष कर रहा था। लेकिन गुप्ता को इस नाम की पहचान पहले से थी। उन्होंने ब्रांड को खत्म करने के बजाय उसी नाम के साथ आगे बढ़ने का फैसला किया।

यहीं से उनका नजरिया बदल गया। अब मकसद सिर्फ दूसरे निर्माताओं का सामान खरीदकर बेचना नहीं था। वह अपना सामान बनाना चाहते थे। अपना ब्रांड खड़ा करना चाहते थे। यह फैसला छोटा दिख सकता है, लेकिन Havells की पूरी कहानी में यही सबसे अहम मोड़ था।

ट्रेडिंग से मैन्युफैक्चरिंग तक

गुप्ता ने धीरे-धीरे मैन्युफैक्चरिंग में पैसा लगाना शुरू किया। 1976 में दिल्ली के कीर्ति नगर में Havells का पहला मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगा। यहां रीवायरेबल स्विच और चेंजओवर स्विच बनाए जाते थे।

अब कंपनी सिर्फ बाजार में मौजूद दूसरे ब्रांडों पर निर्भर नहीं थी। उसके पास अपना उत्पादन था। इसका मतलब था कि कंपनी प्रोडक्ट की क्वालिटी, उपलब्धता और डिजाइन पर ज्यादा नियंत्रण रख सकती थी। आगे चलकर Havells ने एनर्जी मीटर और दूसरे इलेक्ट्रिकल प्रोडक्ट्स में भी कदम बढ़ाया। कंपनी धीरे-धीरे ट्रेडर से निर्माता बनने लगी।

कंपनी बनी, फिर शेयर बाजार पहुंची

8 अगस्त 1983 को Havells India की स्थापना हुई। अगले दशक में कंपनी का कारोबार और विस्तार बढ़ता गया। दिसंबर 1993 में कंपनी का पब्लिक इश्यू आया और इसके शेयर शेयर बाजार में लिस्ट हुए।

यह कंपनी के लिए बड़ा बदलाव था। अब Havells सिर्फ एक परिवार का कारोबार नहीं था। इसमें पब्लिक शेयरहोल्डर्स भी थे। कंपनी के पास आगे विस्तार के लिए पूंजी जुटाने का रास्ता भी खुल गया। इसी दौर में Havells ने दूसरी कंपनियों और ब्रांड्स को अपने साथ जोड़ना शुरू किया।

दूसरी कंपनियां खरीदीं, कारोबार बढ़ाया

Havells ने Towers and Transformers जैसे कारोबारों का अधिग्रहण किया। रिपोर्टों के मुताबिक, कंपनी ने एक घाटे में चल रहे कारोबार को भी अपने साथ जोड़ने के बाद करीब एक साल में मुनाफे में ला दिया।

इसके बाद Standard Electricals और Crabtree India जैसे नाम भी Havells के पोर्टफोलियो में आए। यहां कंपनी की रणनीति साफ दिखाई देने लगी थी। सिर्फ अपना कारोबार बढ़ाना लक्ष्य नहीं था। अलग-अलग प्रोडक्ट, ब्रांड और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को एक साथ जोड़ना था।

बेटे ने संभाली कमान

कीमत राय गुप्ता के बेटे अनिल राय गुप्ता 1992 में Havells से जुड़े। आगे चलकर उनके नेतृत्व में कंपनी का फोकस आम ग्राहक तक और ज्यादा पहुंच बनाने पर गया।

Havells ने पंखे, लाइटिंग, मॉड्यूलर स्विच, वॉटर हीटर और घरेलू उपकरणों जैसे प्रोडक्ट्स में विस्तार किया। कंपनी अब सिर्फ इलेक्ट्रिकल सामान बनाने वाली कंपनी नहीं रह गई थी। वह धीरे-धीरे घरों में इस्तेमाल होने वाले प्रोडक्ट्स का ब्रांड बन रही थी। यही बदलाव आगे की ग्रोथ का बड़ा आधार बना।

फिर आया सबसे बड़ा दांव

साल 2007 में Havells ने एक बड़ा फैसला लिया। कंपनी ने यूरोप की बड़ी लाइटिंग कंपनी Sylvania Lighting International को करीब 227.5 मिलियन यूरो में खरीद लिया। उस समय यह सौदा करीब 1,400 करोड़ रुपये का था।

इस अधिग्रहण से Havells को तुरंत अंतरराष्ट्रीय बाजार में बड़ा नेटवर्क मिल गया। स्थापित ब्रांड और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क भी मिला। लेकिन यह दांव उम्मीद के मुताबिक आसान नहीं रहा।

विदेशी कारोबार बना चुनौती

2008 की ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस ने हालात बदल दिए। करेंसी में उतार-चढ़ाव हुआ। Sylvania के कारोबार को संभालना भी आसान नहीं रहा। अधिग्रहण से मिलने वाले फायदे के बजाय कंपनी पर दबाव बढ़ने लगा।

Havells ने यहां एक और अहम फैसला लिया। उसने सिर्फ इसलिए कारोबार पकड़े नहीं रखा कि उसके लिए बड़ी रकम खर्च हो चुकी थी। 2016 में Havells ने अपने लाइटिंग बिजनेस में 80% हिस्सेदारी Shanghai Feilo Acoustics को बेच दी। यह फैसला बताता है कि कंपनी के लिए विस्तार से ज्यादा जरूरी पूंजी और मैनेजमेंट का सही इस्तेमाल था।

Lloyd ने बदल दिया गेम

इसके बाद Havells ने भारत के कंज्यूमर मार्केट पर और ज्यादा ध्यान लगाया। 2017 में कंपनी ने Lloyd Electric & Engineering का कंज्यूमर ड्यूरेबल्स कारोबार करीब 1,600 करोड़ रुपये के एंटरप्राइज वैल्यू पर खरीदा।

Lloyd के साथ Havells को एयर कंडीशनर, वॉशिंग मशीन, रेफ्रिजरेटर और टेलीविजन जैसे बड़े कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स सेगमेंट में सीधी एंट्री मिली। यह अधिग्रहण भी कंपनी की रणनीति का हिस्सा था। Havells पारंपरिक इलेक्ट्रिकल प्रोडक्ट्स से आगे बढ़कर घर के बड़े अप्लायंसेज तक पहुंचना चाहती थी।

₹10,000 से ₹80,000 करोड़ तक

कीमत राय गुप्ता का निधन नवंबर 2014 में 77 साल की उम्र में हुआ। तब तक उनका छोटा सा कारोबार एक बड़ी लिस्टेड कंपनी बन चुका था। आज Havells का कारोबार केबल और वायर, स्विचगियर, पंखे, लाइटिंग, एयर कंडीशनर, वॉटर हीटर और घरेलू उपकरणों तक फैला है। कंपनी के पोर्टफोलियो में Havells, Lloyd, Crabtree और Standard जैसे ब्रांड हैं।

11 अगस्त 2026 को Havells का शेयर करीब 1,278 रुपये पर बंद हुआ। और कंपनी का मार्केट कैप करीब 80,123 करोड़ रुपये था। यानी जिस कारोबार की शुरुआत एक युवा ने दिल्ली के थोक बाजार में 10,000 रुपये से की थी, वह करीब 68 साल बाद 80,000 करोड़ रुपये की कंपनी बन चुका है।

इस कहानी की सबसे दिलचस्प बात सिर्फ रकम नहीं है। असली कहानी उन फैसलों की है जो सही समय पर लिए गए। पहले ट्रेडिंग छोड़ी और मैन्युफैक्चरिंग में आए। फिर अपना ब्रांड बनाया। जरूरत पड़ी तो दूसरी कंपनियां खरीदीं। विदेशी दांव फंसा तो उससे बाहर निकल गए। और फिर भारतीय कंज्यूमर मार्केट पर फोकस कर दिया।

यही वजह है कि Havells की कहानी सिर्फ एक इलेक्ट्रिकल कंपनी के बनने की कहानी नहीं है। यह समय के साथ बिजनेस मॉडल बदलने की कहानी भी है।

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Dhoot Transmission IPO: एंकर इनवेस्टर्स से मिले ₹918 करोड़, 10 अगस्त से खुलेगा इश्यू; ग्रे मार्केट में अभी से भागा शेयर

धूत ट्रांसमिशन लिमिटेड का ₹3,066.89 करोड़ का IPO 10 अगस्त को खुलने जा रहा है। इससे पहले एंकर बुक में कंपनी ने ₹918.3 करोड़ जुटाए हैं। BSE की वेबसाइट पर अपलोड किए गए एक सर्कुलर के अनुसार, कंपनी ने 72 एंकर इनवेस्टर्स को ₹871 प्रति शेयर के भाव पर 1.05 करोड़ से ज्यादा इक्विटी शेयर अलॉट किए। घरेलू म्यूचुअल फंड्स का हिस्सा सबसे बड़ा रहा। 12 फंड हाउसेज ने 46 स्कीमों के जरिए निवेश किया। उन्हें 64.59 लाख इक्विटी शेयर अलॉट किए गए।

एंकर बुक में कई घरेलू और ग्लोबल इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स ने हिस्सा लिया। इनमें SBI म्यूचुअल फंड (MF), ICICI प्रूडेंशियल MF, HDFC MF, ICICI प्रूडेंशियल AMC, निप्पॉन इंडिया MF, फ्रैंकलिन टेंप्लेटन, टाटा MF, इनवेस्को MF, HSBC MF, PGIM इंडिया MF, सुंदरम MF, व्हाइटओक, अबू धाबी इनवेस्टमेंट अथॉरिटी, ब्लैकरॉक, एक्सिस MF, मिरे एसेट, अमंडी फंड्स, आलियांज ग्लोबल इनवेस्टर्स, गवर्नमेंट पेंशन फंड, SBI लाइफ इंश्योरेंस, ICICI प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस, बजाज आलियांस लाइफ इंश्योरेंस, HDFC लाइफ इंश्योरेंस और एक्सिस मैक्स लाइफ इंश्योरेंस जैसे नाम शामिल हैं।

धूत ट्रांसमिशन लिमिटेड भारत की प्रमुख इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स (E&E) कंपनियों में से एक है। यह कंपनी ऑटोमोटिव और नॉन-ऑटोमोटिव इस्तेमाल के लिए वायरिंग हार्नेस और इलेक्ट्रिकल डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम की डिजाइन, इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई का काम करती है। कंपनी के पास कई तरह के प्रोडक्ट्स हैं, जिनमें वायरिंग हार्नेस, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोलर, ऑटोमोटिव स्विच, बैटरी पैक, टर्मिनल, कनेक्टर, केबल और पावर सप्लाई कॉर्ड शामिल हैं। ये प्रोडक्ट्स इंटरनल कंबशन इंजन (ICE) और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) दोनों तरह के प्लेटफॉर्म के लिए उपलब्ध हैं। कंपनी के प्रोडक्ट टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर, कमर्शियल व्हीकल, ऑफ-रोड व्हीकल, अर्थ मूवर, खेती के उपकरण, मेडिकल डिवाइस और घरेलू उपकरणों के लिए इस्तेमाल होते हैं।

IPO में ₹1,400 करोड़ के नए शेयर

धूत ट्रांसमिशन के IPO में ₹1,400 करोड़ के 1.61 करोड़ नए शेयर जारी होंगे। साथ ही ₹1,666.89 करोड़ के 1.91 करोड़ शेयरों का ऑफर फॉर सेल (OFS) रहेगा। OFS में प्रमोटर्स- BC एशिया इनवेस्टमेंट्स XV लिमिटेड और मंगलम कैपिटल प्राइवेट लिमिटेड शेयरों को बिक्री के लिए रखेंगे। BC एशिया इनवेस्टमेंट्स XV लिमिटेड, प्राइवेट इक्विटी फर्म बेन कैपिटल की एक एंटिटी है। प्राइस बैंड ₹829-₹871 प्रति शेयर और लॉट साइज 17 शेयर है। IPO के 12 अगस्त को बंद होने के बाद अलॉटमेंट 13 अगस्त को फाइनल होगा। कंपनी के शेयर NSE और BSE पर 17 अगस्त को लिस्ट होने की उम्मीद है।

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IPO के पैसों का कैसे होगा इस्तेमाल

कंपनी अपने IPO में नए शेयर जारी कर जुटाई गई राशि का इस्तेमाल अपना और अपनी सब्सिडियरी कंपनियों का कर्ज चुकाने, हरियाणा के झज्जर और तमिलनाडु के होसुर में वायरिंग हार्नेस मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने, पहले से न पता अधिग्रहणों और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च करेगी। IPO में 50 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए, 35 प्रतिशत हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए और 15 प्रतिशत हिस्सा नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व है। ग्रे मार्केट में धूत ट्रांसमिशन का शेयर अभी से 28.36 प्रतिशत प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। ग्रे मार्केट एक अनऑथराइज्ड मार्केट है, जहां​ किसी कंपनी के शेयर उसकी लिस्टिंग तक ट्रेड करते हैं।

Dhoot Transmission की वित्तीय सेहत

धूत ट्रांसमिशन का वित्त वर्ष 2025-26 में रेवेन्यू 31 प्रतिशत बढ़कर ₹4,563.70 करोड़ हो गया। एक साल पहले रेवेन्यू ₹3,472.24 करोड़ था। शुद्ध मुनाफा 12 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ ₹396.84 करोड़ रहा, जो वित्त वर्ष 2025 में ₹353.89 करोड़ था। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी पर ₹841.39 करोड़ की उधारी थी। इस IPO के​ लिए एक्सिस कैपिटल, जेफरीज इंडिया, कोटक महिंद्रा कैपिटल कंपनी, नोमुरा फाइनेंशियल एडवाइजरी एंड सिक्योरिटीज (इंडिया), SBI कैपिटल मार्केट्स और 360 ONE WAM बुक रनिंग लीड मैनेजर हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

फ्रिज पर मैग्नेट लगाने से पहले जान लें यह जरूरी बात, ये मैग्नेट कहीं ‘बिजली चोर’ तो नहीं!

आपने सुना है कि फ्रिज पर मैग्नेट लगाने से बिजली का बिल बढ़ जाता है। आजकल सोशल मीडिया पर यह मिथ काफी वायरल है, लेकिन यह सच है या सिर्फ एक अफवाह। इस दावे को लेकर एक्सपर्ट्स ने क्या कहा है और इसके पीछे की सच्चाई क्या है, यही जानना सबसे जरूरी है:

Fridge Magnet Myth (फ्रिज मैग्नेट का सच)

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फ्रिज पर मैग्नेट लगाने से बिजली का बिल नहीं बढ़ता। कोई भी फ्रिज मैग्नेट इतने पावरफुल नहीं होते कि वे फ्रिज के काम करने के तरीके या उसकी बिजली की खपत को बढ़ा सकें।

Heavy Magnets (भारी मैग्नेट से रखें दूरी)

How to Choose Standard Refrigerator Size for Your Home - Spinchill

अगर फ्रिज पर बहुत ज्यादा या भारी मैग्नेट लगा दिए जाएं, तो समय के साथ दरवाजे के कब्जों (हिंज) पर जयदा दबाव पड़ सकता है। इससे फ्रिज की फिटिंग और उम्र पर असर पड़ सकता है।

Cooling Performance (कूलिंग पर पड़ता है असर)

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एक्सपर्ट्स के अनुसार, फ्रिज के बाहर लगे मैग्नेट अंदर की कूलिंग, सेंसर या खाने की क्वालिटी पर कोई असर नहीं डालते। इसलिए इस बात को लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं है।

Save Electricity (बिजली बचाने का सही तरीका)

This may contain: an open refrigerator in a kitchen with food on the counter and door to the other side

अगर बिजली का बिल कम करना चाहते हैं, तो फ्रिज का दरवाजा बार-बार खुला न छोड़ें, रबर सील की जांच करते रहें, सही टेम्परेचर सेट करें और फ्रिज की रेगुलर सफाई करें। यही तरीके सच में बिजली बचाने में मदद करते हैं।

Expert Advice (क्या करें)

Best Fridge Magnets for Heavy Items: A Complete Guide - Fridge Magnets

फ्रिज पर कुछ हल्के मैग्नेट लगाना बिल्कुल सही है। बस बहुत ज्यादा भारी मैग्नेट या बिना कारण वजन दरवाजे पर न रखें, ताकि फ्रिज लंबे समय तक अच्छी तरह काम करता रहे।