RSS चीफ मोहन भागवत लंदन के मंदिर-गुरुद्वारे में पहुंचे:ब्रिटेन के 20 संगठनों ने मेयर को लेटर लिखकर दौरे का बॉयकॉट किया

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को लंदन के मंदिरों और गुरुद्वारे के दौरे के साथ अपने विदेश दौरे के ब्रिटेन चरण की शुरुआत की। यह जानकारी RSS ने दी। RSS के केंद्रीय कार्यकारी दल के सदस्य सुनील अंबेकर और ब्रिटेन दौरे के समन्वयक संगठन Integral UK के संयोजक रोहित अंबेकर ने मीडिया कॉन्फ्रेंस में बताया कि भागवत इस दौरान धर्मगुरुओं, शिक्षाविदों, रिसर्चर्स और अन्य प्रमुख लोगों से मिलेंगे। उन्होंने कहा कि भागवत RSS के निस्वार्थ सेवा और सामाजिक सद्भाव के अनुभव के साथ ‘वसुधैव कुटुंबकम’ यानी पूरी दुनिया एक परिवार है, का संदेश साझा करेंगे। RSS के मुताबिक, लंदन का कार्यक्रम भागवत के अमेरिका और कनाडा दौरे में दिए गए संदेश को आगे बढ़ाता है। यह RSS की शताब्दी वर्ष से जुड़े तीन देशों के आउटरीच कार्यक्रम का हिस्सा है। मंदिर और गुरुद्वारे पहुंचे सुनील अंबेकर और रोहित अंबेकर ने बताया कि अंतरधार्मिक संवाद के तहत भागवत विल्सडन स्थित श्री स्वामीनारायण मंदिर और खालसा जथा ब्रिटिश आइल्स गुरुद्वारा जा चुके हैं। उन्हें लंदन के एक जैन मंदिर में भी जाना है। ब्रिटेन दौरे का मुख्य कार्यक्रम रविवार को होगा। इसमें ‘सेलिब्रेशन ऑफ वननेस’ थीम पर सामुदायिक नेताओं का स्वागत समारोह और ‘सभ्यतागत संवाद’ रखा गया है। यह कार्यक्रम ब्रिटेन में 1966 में स्थापित हिंदू सामाजिक और सांस्कृतिक संगठन हिंदू स्वयंसेवक संघ (HSS) UK ने शुरू किया है। इसे Integral UK का समर्थन मिला है। प्रवक्ताओं के मुताबिक, पूरे ब्रिटेन के 310 से ज्यादा सामुदायिक संगठन और एसोसिएशन इसमें शामिल होने की उम्मीद है। बंद कमरे में बैठकें और प्रवासी भारतीयों से मुलाकात भागवत बुधवार को लंदन पहुंचे थे। गुरुवार को उन्होंने ‘बंद कमरे में हुई गोलमेज बैठकों’ के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की। इसके बाद कारोबार और राजनीति से जुड़े प्रवासी भारतीय समुदाय के प्रमुख लोगों की बड़ी सभा हुई। सुनील अंबेकर ने बताया कि ब्रिटेन के लोग RSS को समझने में काफी रुचि रखते हैं। उन्होंने कहा कि भागवत ने लोगों की ओर से उठाए गए सभी मुद्दों पर बात की। उनके मुताबिक, कार्यक्रम में भारतीय मूल के ब्रिटिश नागरिकों के साथ ब्रिटेन के नेता, संसद से जुड़े लोग, कारोबारी, करोड़पति और अरबपति तथा FTSE 100 कंपनियों और अन्य कॉरपोरेट्स से जुड़े लोग शामिल थे। हालांकि, प्रवक्ता ने कार्यक्रम में शामिल लोगों के बारे में ज्यादा जानकारी देने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम को गोपनीय तरीके से आयोजित किया गया था, ताकि चर्चा खुलकर हो सके। भागवत के दौरे पर उठी चिंताओं पर RSS का जवाब ब्रिटेन में कुछ सिविल सोसाइटी समूहों और सांसदों ने भागवत के दौरे को लेकर चिंता जताई है। इस पर सुनील अंबेकर ने कहा, “हम शांति, एकीकरण और एकता के लिए यहां हैं। इसलिए हम हर किसी से बातचीत के लिए तैयार हैं। लोकतंत्र में अलग-अलग आवाजें हो सकती हैं। ऐसी आवाजें उठना सामान्य बात है।” उन्होंने कहा कि RSS को लेकर कई गलतफहमियां हैं, क्योंकि बुनियादी समझ में कमी है। उनके मुताबिक, “भारत किसी राष्ट्र-राज्य की राजनीतिक अवधारणा जैसा नहीं है। यह एक सांस्कृतिक अवधारणा है।” सुनील अंबेकर ने कहा कि हिंदुत्व कोई स्थिर अवधारणा नहीं है। इसमें हर तरह के धर्म और सभी धार्मिक परंपराओं के प्रति सम्मान और सत्य में विश्वास की बात है। उन्होंने कहा, “यही हिंदुत्व है, यही भारत है। मुझे लगता है कि यह दौरा इन विचारों को साफ करने में मदद करेगा।” रविवार को सार्वजनिक संबोधन RSS प्रमुख का रविवार को प्रवासी भारतीय समुदाय को दिया जाने वाला सार्वजनिक संबोधन लाइव प्रसारित किए जाने की उम्मीद है। RSS प्रमुख के साथ ब्रिटेन के मीडिया के लिए कोई बातचीत नहीं रखी गई है। भागवत के कार्यक्रम में शामिल होने वाले सभी लोगों की पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। —————————– ये खबर भी पढ़ें… न्यूयॉर्क में भागवत बोले- भारत के DNA में एकता-विविधता: हम अलग होकर भी एकदूसरे से जुड़े RSS प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में 29 अगस्त को करीब 42 मिनट स्पीच दी। उन्होंने कहा कि एकता और विविधता भारत के DNA में है। लोग अलग दिखते हैं, उनके रहने के तरीके हैं, लेकिन सभी के बीच एक जन्मजात जुड़ाव है। पूरी खबर पढ़ें…

पाकिस्तान का 100 साल पुराना हिंदू मंदिर गिराने से इंकार:कहा- बारिश की वजह से टूटा; आरोप- मदरसा बनाने के लिए मंदिर तोड़ा

पाकिस्तान ने पंजाब प्रांत में करीब 100 साल पुराने हिंदू मंदिर गिराए जाने की खबरों को गलत बताया है। उसका कहना है कि 21 जुलाई को भारी बारिश के कारण मंदिर क्षतिग्रस्त होकर गिर गया था। वहीं, स्थानीय लोगों और हिंदू समुदाय के प्रतिनिधियों का आरोप है कि मंदिर को जानबूझकर गिराया गया और उसकी जमीन पास के मदरसे के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश की गई। दूसरी ओर, रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि मंदिर की इमारत को 21 अगस्त को गिराया गया। दोनों तारीखों के बीच करीब एक महीने का अंतर है। इसी वजह से मंदिर गिराए जाने की घटना को लेकर सवाल उठ रहे हैं। TLP पर मंदिर गिराने के आरोप पाकिस्तान मसिहा मिल्लत पार्टी (PMMP), स्थानीय लोगों और हिंदू समुदाय ने आरोप लगाया था कि मंदिर को स्थानीय मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने गिराया। इन लोगों ने इस मामले में तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP) से जुड़े लोगों की भूमिका होने का भी आरोप लगाया है। TLP पाकिस्तान का एक कट्टरपंथी इस्लामी संगठन है, जिस पर वहां प्रतिबंध लगा हुआ है। भारत ने मंदिर गिराए जाने की निंदा की मामला सामने आने के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने 2 सितंबर को इसकी निंदा की थी। भारत ने कहा था कि मंदिर की सुरक्षा के लिए स्थानीय अधिकारियों ने समय पर कार्रवाई नहीं की, जो चिंता की बात है। विदेश मंत्रालय ने कहा था कि यह घटना पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की स्थिति पर सवाल खड़े करती है। भारत ने पाकिस्तान से मंदिर गिराने के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने और मंदिर को फिर से ठीक कराने की मांग की थी। पाकिस्तान बोला- तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया भारत के बयान के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया दी। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सज्जाद हैदर खान ने भारत के आरोपों को झूठा और राजनीतिक मकसद से लगाया गया बताया। उन्होंने कहा कि भारत इस मामले में तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहा है। खान ने पाकिस्तान के स्थानीय एवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड के अधिकारियों के हवाले से कहा कि मंदिर की इमारत भारी बारिश के कारण क्षतिग्रस्त हुई थी। मंदिर की मरम्मत करवाएगा पाकिस्तान पाकिस्तान का यह भी दावा है कि स्थानीय अधिकारियों ने मंदिर को हुए नुकसान का सर्वे किया है और मंदिर को दोबारा ठीक करने के लिए कदम शुरू कर दिए गए हैं। ————————- यह भी पढ़ें… PAK ग्रूमिंग गैंग ने लंदन में सिख युवती को फंसाया: ब्रेनवॉश किया, नितनेम-गुरुद्वारा जाना छोड़ा इंग्लैंड (UK) में पंजाबी युवती पाकिस्तानी ग्रूमिंग गैंग के चंगुल में फंस गई। पूरी खबर पढ़ें…

लंदन में सीक्रेट मीटिंग, मुनीर का मैसेज और पाकिस्तान का नक्शा बदलने का प्लान! इस नए दांव से उड़े जरदारी-शहबाज के होश

Pakistan Political Crisis: पाकिस्तान की सियासत में एक बार फिर बड़ा भूचाल आने के संकेत मिल रहे हैं। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और गृह मंत्री मोहसिन नकवी के बीच लंदन में हुई 90 मिनट की एक सीक्रेट बैठक ने इस्लामाबाद से लेकर लाहौर तक राजनीतिक हलचल तेज कर दी है।

CNN-News18 के सूत्रों के हवाले से आई खबर के मुताबिक, गृह मंत्री मोहसिन नकवी फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का एक बेहद ‘सीक्रेट मैसेज’ लेकर लंदन में जरदारी के पास पहुंचे थे। इस बैठक का मुख्य एजेंडा पाकिस्तान के प्रशासनिक नक्शे को बदलना यानी नए प्रांत और प्रशासनिक इकाइयां बनाना था।

आइए आपको बताते हैं कि लंदन की इस बैठक का क्या मतलब है, पाक सेना नया नक्शा क्यों बनाना चाहती है और इसमें नवाज शरीफ की एंट्री कैसे हुई है।

असीम मुनीर का मैसेज और जरदारी की चाल

जानकारी के मुताबिक, पाक आर्मी देश में नए प्रांत बनाने के प्रस्ताव पर तेजी से काम आगे बढ़ाना चाहती है और इसके लिए राष्ट्रपति जरदारी पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रपति जरदारी नए प्रांत बनाने के पूरी तरह खिलाफ नहीं हैं, लेकिन वे इसे बेहद धीमी और चरणबद्ध प्रक्रिया के तहत लागू करना चाहते हैं।

जरदारी का सुझाव है कि नए प्रांतों के गठन की शुरुआत पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा (KPK) से की जानी चाहिए, क्योंकि इन दोनों राज्यों की प्रांतीय असेंबलियों में नए प्रांत बनाने को लेकर पहले ही प्रस्ताव पारित हो चुके हैं।

PPP के लिए सिंध क्यों बना है सबसे बड़ा रोड़ा?

आसिफ अली जरदारी अपने राजनीतिक गढ़ सिंध के किसी भी तरह के बंटवारे के सख्त खिलाफ हैं। सिंध प्रांत पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) की सत्ता का मुख्य आधार है। जरदारी को डर है कि सिंध को बांटने का कोई भी कदम उठाने पर वहां के राष्ट्रवादी गुट उग्र विरोध प्रदर्शन शुरू कर सकते हैं, जिससे पीपीपी का सियासी वर्चस्व खत्म हो जाएगा।

वहीं बलूचिस्तान में पहले से जारी उग्रवाद और नाजुक सुरक्षा स्थितियों के कारण भी जरदारी वहां फिलहाल कोई नया प्रशासनिक प्रयोग करने से बच रहे हैं।

सीधा बंटवारा नहीं, तो क्या है अल्टरनेटिव प्लान?

संविधान में तुरंत संशोधन करके नक्शा बदलने के बजाय एक बीच का रास्ता भी तलाशा जा रहा है:

नई प्रशासनिक इकाइयां बनाना: पहले चरण में प्रांतों को विभाजित करने के बजाय नई प्रशासनिक इकाइयां बनाई जाएं और स्थानीय निकायों को मजबूत किया जाए।

संवैधानिक संशोधन: इसके बाद संविधान के अनुच्छेद 140 और अनुच्छेद 160 में संशोधन पर विचार किया जा सकता है।

अनुच्छेद 140: स्थानीय सरकारों के ढांचे से संबंधित है।

अनुच्छेद 160: राष्ट्रीय वित्त आयोग (NFC) और केंद्र-राज्यों के बीच वित्तीय संसाधनों के बंटवारे का फैसला करता है।

नवाज शरीफ की एंट्री और रायविंड में बड़ी बैठक

सैन्य प्रतिष्ठान के बढ़ते दबाव के बीच राष्ट्रपति जरदारी ने पीएमएल-एन (PML-N) के सुप्रीम नेता नवाज शरीफ से संपर्क साधा है। CNN-News18 के सूत्रों के अनुसार, हाल ही में लाहौर के रायविंड में नवाज शरीफ की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल मीटिंग हुई, जिसमें प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज मौजूद थीं। बैठक में तय हुआ कि नए प्रांतों के इस संवेदनशील मुद्दे पर पहला स्टैंड पीपीपी लेगी, जिसके बाद ही PML-N अपना अगला कदम तय करेगी।

पाक सेना क्यों बदलना चाहती है देश का नक्शा?

सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तानी सेना/सैन्य प्रतिष्ठान छोटे प्रांत या प्रशासनिक इकाइयां बनाकर PML-N (पंजाब में मजबूत) और PPP (सिंध में मजबूत) के पारंपरिक राजनीतिक वर्चस्व को कमजोर करना चाहती है।

अगर पंजाब और सिंध जैसे बड़े सूबों को बांटा जाता है, तो सत्ता के नए केंद्र बनेंगे और पुरानी स्थापित राजनीतिक पार्टियों की पकड़ ढीली पड़ जाएगी। यही वजह है कि यह कोई सामान्य प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि पाकिस्तान का राजनीतिक समीकरण बदलने वाला खेल है।

PAK ग्रूमिंग गैंग ने लंदन में सिख युवती को फंसाया:ब्रेनवॉश किया, नितनेम-गुरुद्वारा जाना छोड़ा, पुलिस को मां-बाप की शिकायत की, फिर घर छोड़ चली गई

इंग्लैंड (UK) में पंजाबी युवती पाकिस्तानी ग्रूमिंग गैंग के चंगुल में फंस गई। युवती की मां ने एक पंजाबी चैनल से बातचीत में कहा कि उसकी 19 साल की बेटी है। वह नितनेम करती, गुरुद्वारे जाकर सेवा करती थी लेकिन गैंग ने उसे फंसा लिया। उसने सब कुछ छोड़ दिया। उसका ब्रेनवॉश कर दिया। जब हमने समझाने की कोशिश की तो हमारी शिकायत लंदन पुलिस को कर दी। इसके बाद हमें छोड़कर चली गई। मां ने कहा कि यूनिवर्सिटी में लड़कियों के एक ग्रुप से जोड़ने के बाद एक लड़का उसके टच में आया, उसके बाद ही उसका पूरा व्यवहार बदल गया। उसने इंग्लैंड में रहते सिखों से इस मामले में मदद मांगी है। लड़की को कैसे फंसाया, ग्रूमिंग गैंग का पूरा प्रोसेस क्या है, आगे क्या होता है, ये जानने के लिए पूरी रिपोर्ट पढ़िए… 5 पॉइंट में जानिए, युवती की मां ने ग्रूमिंग को लेकर क्या कहा.. 1. स्कूल में पढ़ी, यूनिवर्सिटी तक सब ठीक था
मां ने कहा- मेरी बेटी का नाम सिमरन है। वह 19 साल की है। बेटी यहीं (लंदन) की जन्मी है, लेकिन फिर भी वह जैसी हमारी भारतीय समुदाय की बच्चियां होती हैं, उस तरह थी। हमारे घर में एक अच्छे माहौल में पली-बढ़ी थी उसने स्कूल खत्म किया और सितंबर 2025 में यूनिवर्सिटी में पढ़ने के लिए गई। तब तक सब कुछ ठीक था। 2. यूनिवर्सिटी में लड़कियों का ग्रुप बना, फिर एक लड़का उसके टच में आया
मां ने कहा- यूनिवर्सिटी में जाकर मुस्लिम लड़कियों का ग्रुप बना। फिर एक लड़का उनके संपर्क में आया। जिसने मेरी बेटी से संपर्क किया और फिर उसका थोड़ा-थोड़ा व्यवहार बदलने लगा। वह पहले बहुत अच्छी थी, बहुत इज्जत करती थी हमारी, कभी वह हमारे आगे बोलती नहीं थी। फिर हमें शक हुआ कि शायद कुछ गलत है। हमें जून 2026 में पता चला कि एक मुस्लिम लड़का उसके साथ जुड़ चुका है। उसके बाद उसका व्यवहार बदल गया। 3. मां-बाप को वह बातें बोलती, जिससे यकीन नहीं आता
मां ने कहा- वह काफी आक्रामक होने लगी। यहां तक कि उसको यह पता चलना बंद हो गया कि हम उसके माता-पिता हैं। वह कभी-कभी हमें इतनी गलत चीजें बोल देती थी कि हम विश्वास ही नहीं कर पाते थे कि यह सिमरन ही बोल रही है। स्कूल में हर टीचर उसकी तारीफ करता था कि यह हमारी बहुत इज्जत करती है। 4. घर पर पाठ करती, गुरुद्वारे जाती, फिर पूरी बदल गई
मां ने कहा- वह घर पर पाठ करती थी। जब भी उसको समय मिलता था, हम गुरुद्वारे जाते, सेवा करके आते थे। उसका ब्रेनवाश कर दिया गया। मतलब कि पूरी तरह से बदल दिया उसको। वह अपना किरदार ही भूल गई। मेरी फैमिली गुरसिख है। पति का परिवार अमृतधारी है। बेटी सिमरन भी सिक्खी को मानती थी लेकिन फिर वह पूरी तरह से बदल गई। 5. समझाया तो पुलिस को हमारी ही शिकायत कर दी, फिर छोड़कर चली गई
मां ने कहा- जब हमने उसे समझाने की कोशिश की तो उसने लंदन पुलिस को शिकायत कर दी। उसने झूठ कहा कि हमने उसको मारा-पीटा। जबकि हमने कभी भी उस पर हाथ नहीं उठाया। यहां तक कि हमने उससे ऊंची आवाज में बात करना भी बंद कर दिया था। हमें लगता था कि हम प्यार से उसको समझा लें, घर वापस ले आएं, हर वह चीजें करने लगे, जिससे वह खुश रहती थी। लेकिन मुझे नहीं पता कि उसका इतना माइंडवॉश कर दिया उन्होंने कि हमारी मेरी पूरी फैमिली पर आरोप लगाकर वह चली गई।
पहले भी एक युवती ने ऑनसक्रीन किए थे खुलासे बता दें, 6 महीने पहले इंग्लैंड में रहने वाले पंजाबी नवदीप सिंह ने एक युवती का वीडियो पोस्ट किया है, जिसमें युवती ने ऐसे ही कुछ दावे किए थे। उसने बताया था कि ब्रिटेन में कौर-टू-खान मूवमेंट चल रहा है। सिख लड़कियों को फंसाकर उन्हें मुसलमान बनाया जा रहा है। इसके लिए यूके में पाकिस्तानी ग्रूमिंग गैंग सक्रिय है। युवती ने वीडियो में दावा किया था कि यूके में ग्रूमिंग गैंग को कौर (सिख लड़की) से खान (मुस्लिम) बनाने पर 10 हजार पाउंड दिए जा रहे हैं। युवती का कहना था कि पाकिस्तानी मूल की ग्रूमिंग गैंग सोची-समझी साजिश के तहत गैर-मुस्लिम लड़कियों, खासकर सिख लड़कियों को निशाना बना रहे हैं। युवती ने ग्रूमिंग गैंग की स्ट्रेटजी का भी खुलासा किया था। उसका कहना था कि ग्रूमिंग गैंग पहले लड़कियों को टारगेट कर उनसे इमोशनली अटैच होते हैं, फिर उन्हें महंगी गाड़ियों व रेस्टोरेंट्स में घुमाते हैं और जब लड़की उनके जाल में फंस जाती है तो उसका धर्म परिवर्तन करा देते हैं। युवती का दावा है कि अलग-अलग धर्म की लड़कियों को फंसाने के रेट भी अलग हैं। सिख लड़की को फंसाकर मुस्लिम बनाने पर युवक को 10,000 पाउंड (करीब 11 लाख रुपये) मिलते हैं। वहीं, हिंदू या ईसाई लड़की के धर्म परिवर्तन कराने पर 5,000 पाउंड (करीब साढ़े 5 लाख रुपये) का इनाम दिया जाता है। कैसे जाल बिछाते हैं ग्रूमिंग गैंग, स्टेप-टू-स्टेप प्रोसेस जानिए…

ब्रिटेन पहुंचे मोहन भागवत, हिंदू संगठनों ने स्वागत किया:सरकार ने संसद में कहा- दौरा इमिग्रेशन नियमों की शर्तें पूरी करता है; पहले उठे थे सवाल

100 से ज्यादा ब्रिटिश हिंदू संगठनों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत का ब्रिटेन पहुंचने पर स्वागत किया। वे तीन देशों के दौरे के अंतिम चरण में गुरुवार को लंदन पहुंचे हैं। भागवत का दौरा संगठन की स्थापना के 100 साल पूरे होने के मौके पर चलाए जा रहे अंतरराष्ट्रीय संपर्क अभियानों का हिस्सा है। इस दौरे के तहत वे अमेरिका और कनाडा भी जा चुके हैं। ब्रिटेन के सुरक्षा मंत्री डैन जार्विस ने गुरुवार को संसद में लिखित सवाल का जवाब देते हुए कहा कि भागवत की यात्रा देश के इमिग्रेशन नियमों की शर्तें पूरी करती है। दरअसल, ब्रिटिश-भारतीय सांसद नादिया व्हिटोम ने पिछले हफ्ते संसद में सवाल पूछा था कि कि क्या इस दौरे की पूरी समीक्षा नियमों के तहत की गई है मंत्री ने कहा- सभी लोगों को इमिग्रेशन नियम पूरे करने होंगे

मंत्री डैन जार्विस ने जवाब दिया कि गृह मंत्रालय व्यक्तिगत मामलों पर टिप्पणी नहीं कर सकता। हालांकि, मंत्रालय खतरों की पूरी श्रेणी से निपटने और हिंसा व व्यक्तियों तथा समुदायों के खिलाफ नफरत को बढ़ावा देने वाले विचार फैलाने वालों पर कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा, “ब्रिटेन में प्रवेश की मांग करने वाले सभी लोगों को इमिग्रेशन नियमों की शर्तें पूरी करनी होंगी।” 2018 में भी अमेरिका गए थे भागवत मोहन भागवत इससे पहले सितंबर 2018 में अमेरिका गए थे। उन्होंने शिकागो में 7 से 9 सितंबर 2018 तक आयोजित दूसरे वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस में हिस्सा लिया था। इस कार्यक्रम में 60 देशों से करीब 2,500 प्रतिनिधि शामिल हुए थे। भागवत ने कांग्रेस के उद्घाटन सत्र में मुख्य भाषण दिया था। 2018 के इस दौरे की उपलब्ध रिपोर्टों में भागवत की किसी अमेरिकी राजनयिक से मुलाकात या उन्हें किसी औपचारिक राजनयिक सम्मान दिए जाने का जिक्र नहीं मिलता। उनका दौरा मुख्य रूप से वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस और उससे जुड़े कार्यक्रमों पर केंद्रित था। —————————– ये खबर भी पढ़ें… न्यूयॉर्क में भागवत बोले- भारत के DNA में एकता-विविधता:हम अलग होकर भी एकदूसरे से जुड़े, गलत सोच इंसान को जानवरों के करीब ले जाती है RSS प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में 29 अगस्त करीब 42 मिनट स्पीच दी। पूरी खबर पढ़ें…

अमेरिका में $1 के सिक्के पर ट्रम्प की तस्वीर:250वीं वर्षगांठ पर जारी हुआ, बिक्री शुरू होने के कुछ घंटे बाद आउट ऑफ स्टॉक

अमेरिका ने अपनी 250वीं वर्षगांठ के मौके पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तस्वीर वाला $1 का खास सिक्का जारी किया है। अमेरिकी मिंट ने बुधवार दोपहर 12 बजे इसकी बिक्री शुरू की। बिक्री शुरू होने के कुछ घंटे बाद ही सिक्का आउट ऑफ स्टॉक हो गया। दोपहर करीब 3 बजे अमेरिकी मिंट की वेबसाइट पर 25 सिक्कों का रोल उपलब्ध नहीं था। वहीं, 100 सिक्कों का बैग भी आउट ऑफ स्टॉक दिख रहा था। सिक्के के एक तरफ ट्रम्प की तस्वीर है। इसके साथ ‘IN GOD WE TRUST’ और ‘LIBERTY’ लिखा है। दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति की मुहर और अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के लिए ‘250’ लिखा गया है। 25 सिक्कों के रोल की कीमत 61 डॉलर अमेरिकी मिंट के मुताबिक, 25 सिक्कों के रोल की कीमत 61 डॉलर और 100 सिक्कों के बैग की कीमत 154.50 डॉलर है। बिक्री शुरू होने के करीब आधे घंटे बाद ही वेबसाइट पर लोगों को वेटिंग एरिया में भेजा जाने लगा। वहां करीब 1 घंटे का वेटिंग टाइम बताया गया। गुरुवार दोपहर 2 बजे तक एक परिवार अधिकतम 2 खरीदारी कर सकता था। अमेरिकी मिंट ने बताया कि 2.5 लाख सिक्कों को खास ‘4 जुलाई’ निशान के साथ रैंडम तरीके से रोल और बैग में रखा गया है। ये सिक्के 4 जुलाई को बनाए गए थे। अमेरिका में इसी दिन स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है। 1926 के बाद पहली बार जीवित राष्ट्रपति की तस्वीर अमेरिकी मिंट के मुताबिक, इससे पहले किसी जीवित राष्ट्रपति की तस्वीर 1926 में सिक्के पर दिखाई गई थी। उस समय राष्ट्रपति कैल्विन कूलिज की तस्वीर अमेरिका की स्वतंत्रता की घोषणा पर हस्ताक्षर की 150वीं वर्षगांठ के मौके पर जारी आधे डॉलर के सिक्के पर लगाई गई थी। अमेरिकी कानून के तहत किसी जीवित राष्ट्रपति या जीवित पूर्व राष्ट्रपति की तस्वीर सिक्के पर लगाना प्रतिबंधित है। हालांकि, अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के लिए कांग्रेस नेसर्कुलेटिंग कलेक्टिबल कॉइन रीडिजाइन एक्ट पास किया। इसके तहत ट्रेजरी को इस अवसर पर खास $1 के सिक्के जारी करने की अनुमति मिली। कानून में यह भी कहा गया है कि सिक्के के पीछे वाले हिस्से पर किसी जीवित व्यक्ति का पोर्ट्रेट नहीं हो सकता। ट्रम्प की तस्वीर सिक्के के आगे वाले हिस्से पर है, इसलिए इसे कानून के मुताबिक माना गया है। —————————– ये खबर भी पढ़ें… नीदरलैंड्स ने अमेरिका-कनाडा से 86 टन सोना हटाकर लंदन भेजा:बैंक ऑफ इंग्लैड में रखा, कहा- संकट आने पर यहां आसानी से बेच सकेंगे नीदरलैंड्स ने अमेरिका और कनाडा में रखा अपना 86 टन सोना निकालकर लंदन भेज दिया है। डच सेंट्रल बैंक (DNB) के मुताबिक, यह ट्रांसफर मार्च से अगस्त के बीच कई महीनों में किया गया। अब यह सोना बैंक ऑफ इंग्लैंड में रखा गया है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

नीदरलैंड्स ने अमेरिका-कनाडा से 86 टन सोना हटाकर लंदन भेजा:बैंक ऑफ इंग्लैड में रखा, कहा- संकट आने पर यहां आसानी से बेच सकेंगे

नीदरलैंड्स ने अमेरिका और कनाडा में रखा 86 टन सोना निकालकर लंदन भेज दिया है। डच सेंट्रल बैंक (DNB) ने बताया कि यह ट्रांसफर मार्च से अगस्त के बीच कई महीनों में किया गया। अब यह सोना बैंक ऑफ इंग्लैंड में रखा गया है। DNB के मुताबिक, संकट की स्थिति में लंदन में रखा सोना ज्यादा आसानी से खरीदा-बेचा जा सकता है। इस ट्रांसफर से पहले DNB के कुल सोने का 31.3% न्यूयॉर्क और 19.7% ओटावा में रखा था। अब दोनों जगहों पर यह हिस्सेदारी घटकर 18.5% रह गई है। वहीं, लंदन में रखे सोने की हिस्सेदारी 18.1% से बढ़कर 32.1% हो गई है। नीदरलैंड्स में 30.8% सोना अभी भी रखा हुआ है। 27 टन सोना न्यूयॉर्क-ओटावा से नीदरलैंड्स लाया गया DNB के मुताबिक, 27 टन सोने की छड़ें न्यूयॉर्क और ओटावा से नीदरलैंड्स के जाइस्ट पहुंचाई गईं। इसके बाद इसी मात्रा और गुणवत्ता का सोना लंदन भेज दिया गया। सोने की छड़ों को पिघलाने की जरूरत नहीं पड़ी। हालांकि, अटलांटिक महासागर के पार इतनी बड़ी मात्रा में सोना किस तरह पहुंचाया गया, इसकी जानकारी बैंक ने नहीं दी। DNB ने बताया कि ट्रांसफर का बाकी हिस्सा अलग तरीके से किया गया। न्यूयॉर्क में सोना बेचा गया और उतनी ही मात्रा का सोना लंदन में दोबारा खरीदा गया। बैंक के मुताबिक, सोने की खरीद-बिक्री और फिजिकल ट्रांसफर को साथ करने से इतनी बड़ी और जटिल प्रक्रिया से जुड़े जोखिम को बांटने में मदद मिली। संकट में लंदन का सोना जल्दी इस्तेमाल हो सकेगा DNB के मुताबिक, बैंक ऑफ इंग्लैंड में रखा सोना दुनिया में सबसे आसानी से ट्रेड होने वाले सोने में माना जाता है। इसलिए किसी संकट के समय इसे अमेरिका या कनाडा में रखे सोने की तुलना में ज्यादा आसानी से बेचा या खरीदा जा सकता है। DNB ने इस फैसले के पीछे “बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव” का हवाला दिया है। हालांकि, बैंक ने यह साफ नहीं किया कि वह किन घटनाओं को लेकर ऐसा कह रहा है। अमेरिका-कनाडा के बीच जारी है ट्रेड विवाद यह फैसला ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और कनाडा के बीच ट्रेड विवाद चल रहा है। दोनों देशों के बीच बातचीत फेल होने के बाद एक-दूसरे के सामान पर नए टैरिफ लगाए गए हैं। कनाडा के स्टील, एल्युमिनियम, लकड़ी और ऑटोमोबाइल जैसे प्रमुख सेक्टर अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित हुए हैं। अगस्त में अमेरिका ने करीब 28 अरब कनाडाई डॉलर यानी 20 अरब डॉलर के कनाडाई सामान पर अतिरिक्त 50% टैरिफ लगाने का ऐलान किया था। नीदरलैंड्स के पास कुल 612.4 टन सोना DNB के मुताबिक, 2025 के अंत में नीदरलैंड्स के पास कुल 612.4 टन सोना था। इसकी कीमत करीब 72.2 अरब यूरो थी। बैंक ने बताया कि सोने को अलग-अलग जगहों पर रखने की व्यवस्था का मकसद जोखिम को बांटना और संकट के समय सोने तक आसानी से पहुंच बनाए रखना है। लंदन का गोल्ड मार्केट सबसे बड़ा फ्रांस की नेशनल गोल्ड काउंटर के प्रेसिडेंट लॉरेंट श्वार्ट्ज ने कहा कि सेंट्रल बैंक करीब एक दशक से अपने गोल्ड रिजर्व को अलग-अलग जगहों पर शिफ्ट कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका के मौजूदा राजनीतिक माहौल की वजह से भी कुछ सेंट्रल बैंक सोना रखने के लिए दूसरी जगहों को चुन सकते हैं। श्वार्ट्ज के मुताबिक, लंदन का गोल्ड मार्केट दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे ज्यादा लिक्विड मार्केट है। यानी यहां सोने को आसानी से खरीदा-बेचा जा सकता है। इसलिए संकट के समय लंदन में रखा सोना जल्दी इस्तेमाल किया जा सकता है। सेंट्रल बैंक यहां अपने सोने को दूसरे बैंकिंग संस्थानों को आसानी से उधार भी दे सकते हैं। ——————– ये खबर भी पढ़ें… रूस-यूक्रेन ने ब्लैक सी में 300 जहाजों पर हमले किए:दुनिया में गेहूं-मक्का महंगा होने का खतरा; रूस का अनाज निर्यात 71% घटा रूस-यूक्रेन युद्ध में ब्लैक सी अब जंग का बड़ा मोर्चा बन गया है। पिछले करीब डेढ़ महीने में दोनों देशों ने 300 से ज्यादा जहाजों को निशाना बनाया है। इनमें अनाज ले जाने वाले जहाज, तेल टैंकर और दूसरे मालवाहक पोत शामिल हैं। लगातार हमलों से ब्लैक सी का समुद्री व्यापार प्रभावित हुआ है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

आज का एक्सप्लेनर:आसिम मुनीर ने गुपचुप ‘तख्तापलट’ कर दिया; कैसे पाकिस्तान में सबसे ताकतवर बने, आखिर हासिल क्या करना चाहते हैं

पाकिस्तान में 5वीं बार सेना के जनरल ने ‘तख्तापलट’ कर दिया है। फर्क बस इतना है कि इस बार ये टैकों के जरिए नहीं, संसद के रास्ते हुआ है। नए कानून से फील्ड मार्शल आसिम मुनीर पाकिस्तान के सबसे ताकतवर शख्स बन गए हैं। इससे जुड़े 5 जरूरी सवालों के जवाब, आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: आसिम मुनीर को कौन-सी नई ताकतें मिल गई हैं?
जवाब: नवंबर 2022 में आसिम मुनीर पाकिस्तान के 17वें आर्मी चीफ बने थे। उनका कार्यकाल खत्म होने से 6 महीने पहले, यानी मई 2025 में भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ लॉन्च कर दिया। पाकिस्तान ने जीत का झूठा दावा किया और आसिम मुनीर को ‘हीरो’ बताया। इसके बाद आसिम मुनीर की ताकत बढ़ती चली गई… 20 मई 2025 को मुनीर फील्ड मार्शल बने। ये पाकिस्तानी सेना की सबसे ऊंची रैंक होती है। आम बोलचाल में इसे ‘फाइव स्टार जनरल’ कहते हैं। इससे पहले पाकिस्तान में सिर्फ जनरल अयूब खान इस रैंक तक पहुंचे थे। नवंबर 2025 को पाकिस्तानी संविधान के आर्टिकल 243 में 27वां संशोधन करके सेना में नया चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज, CDF का पद बनाया गया। मुनीर देश के पहले CDF बने। वो 2030 तक इस पद पर रहेंगे। संशोधन के जरिए इसे बढ़ाया भी जा सकता है। 20 अगस्त 2026 को पाकिस्तानी संसद में 2 नए कानून पारित हुए, जिससे CDF को 5 बड़ी शक्तियां मिल गई हैं। डिफेंस फोर्सेज ऑफ पाकिस्तान एक्ट, 2026 के तहत 3 ताकतें… नेशनल कमांड अथॉरिटी एक्ट, 2026 के तहत 2 ताकतें… यानी आसिम मुनीर तीनों सेनाओं के प्रमुख हैं, न्यूक्लियर हथियारों से जुड़े फैसले लेने की भी ताकत है। सैन्य अफसरों से जुड़ा हर फैसला भी निर्णायक रूप से वही लेंगे और सबसे बड़ी बात- मुनीर पर कोई मुकदमा नहीं चल सकता। सवाल-2: मदरसे में पढ़े मुनीर पाकिस्तान के सबसे ताकतवर शख्स कैसे बन गए?
जवाब: मुनीर के पिता सैयद सरवर मुनीर 1947 में पंजाब के जालंधर से पलायन कर पाकिस्तान पहुंचे थे। वो रावलपिंडी के मशहूर एफजी टेक्निकल स्कूल के हेडमास्टर बने। साथ ही मस्जिद में इमामत करते और इस्लामिक उपदेश देते। गहरे धार्मिक झुकाव वाले इस घर में 1968 में आसिम मुनीर का जन्म हुआ। पाकिस्तानी जर्नलिस्ट एजाज सैयद के मुताबिक, घर वाले चाहते थे कि आसिम कुरआन हिफ्ज करे। मुनीर सातवीं तक मदरसे में पढ़े और कुरआन रटी। फिर कुछ दिन एफजी टेक्निकल स्कूल पढ़ने गए। इसके बाद रावलपिंडी के सर सैयद कॉलेज गए, जहां से पूर्व आर्मी चीफ कमर जावेद बाजवा ने पढ़ाई की थी। क्रिकेट के शौकीन मुनीर कॉलेज के दिनों में तेज गेंदबाज थे। स्कूल के बाद मुनीर ने जापान के फूजी स्कूल, क्वेटा के कमांड एंड स्टाफ कॉलेज और मलेशिया के आर्म्ड फोर्सेज कॉलेज से पढ़ाई की। उसके बाद इस्लामाबाद की नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी से पब्लिक पॉलिसी और स्ट्रेटेजिक सिक्योरिटी मैनेजमेंट में मास्टर्स किया। 1986 में मिलिट्री करियर शुरू हुआ, सऊदी में दोबारा कुरआन रटी 25 अप्रैल 1986 को मुनीर को पाकिस्तान आर्मी में के फ्रंटियर फोर्स रेजिमेंट की 23वीं बटालियन में पहली तैनाती मिली। जब मुनीर लेफ्टिनेंट कर्नल बने, तो उन्हें सऊदी अरब में पाकिस्तानी दूतावास में तैनाती मिली। वहां मुनीर को महसूस हुआ कि वे कुरआन भूल रहे हैं। ऐसे में लगातार 3 साल वह छुट्टियों में घर नहीं गए और इस दौरान दोबारा कुरआन रटी। इसके बाद आसिम सियाचिन ग्लेशियर में भी रहे। आसिम का काफी वक्त पाकिस्तान के कब्जाए कश्मीर यानी PoK में भी गुजरा। फिर 2014 में मेजर जनरल, 2016 में पाकिस्तान के मिलिट्री इंटेलिजेंस के डायरेक्टर जनरल और सितंबर 2018 में लेफ्टिनेंट जनरल की पोस्ट तक पहुंचे। सिर्फ 8 महीने ISI चीफ रहे मुनीर, पीएम इमरान से झगड़ा भारी पड़ा 25 अक्टूबर 2018 को मुनीर ISI के डीजी बने। 8 ही महीने बाद जून 2019 में उन्हें हटाकर लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद को नया ISI डीजी बनाया गया। इसकी वजह थी- मुनीर का इमरान खान से झगड़ा। मुनीर ने इमरान खान की पत्नी बुशरा बीबी के करप्शन के एक मामले को उजागर कर दिया था। इसलिए इमरान खान के कहने पर तब के आर्मी चीफ बाजवा ने मुनीर को ISI से बाहर का रास्ता दिखाया था। इमरान पीएम पद से हटाए गए, तो मुनीर नए आर्मी चीफ बने मुनीर नवंबर 2022 तक करीब एक साल क्वार्टरमास्टर जनरल रहे। ये भी ISI चीफ के मुकाबले काफी छोटा पद होता है। हालांकि 2022 की शुरुआत में इस्लामाबाद का सियासी माहौल बदलने लगा। 10 अप्रैल को इमरान अविश्वास प्रस्ताव लाकर पीएम पद से हटाए गए। अगले ही दिन नवाज शरीफ के गुट वाली मुस्लिम लीग के नेता और नवाज के छोटे भाई शहबाज शरीफ पीएम बन गए। मुनीर शहबाज के करीबी थे। माना जाता है कि इमरान को सत्ता से हटाने के हथकंडों में मुनीर ने अंदरखाने साथ दिया। मुनीर को भी इसका ‘रिटर्न गिफ्ट’ मिला। 29 नवंबर को बाजवा को हटाकर मुनीर को नया आर्मी चीफ बना दिया गया। मुनीर पहले आर्मी चीफ बने, जो पाकिस्तान की दोनों खुफिया एजेंसियों- ISI और मिलिट्री इंटेलिजेंस के चीफ रहे थे। अब मुनीर पहले ऐसे आर्मी चीफ हैं, जिनके पास एक साथ 3 पद हैं- आर्मी चीफ के अलावा फील्ड मार्शल का मिलिट्री ओहदा और नया नवेला सबसे ताकतवर पद- CDF। सवाल-3: आसिम मुनीर आखिर हासिल क्या करना चाहते हैं?
जवाब: आसिम मुनीर खुद को ऐसे शासक के तौर पर स्थापित करना चाहते हैं, जिसके लिए कोई खतरा या चुनौती न पैदा हो सके। मुनीर ने अपने लिए ये शील्ड 3 तरह से बनाई है…. 1. मुनीर के आगे बेबस मौजूदा सरकार 2. चुनाव के जरिए आसिम को हटाना मुश्किल 3. सरकार के जरिए कोर्ट पर भी सेना कंट्रोल सवाल-4: पाकिस्तान के पुराने सैन्य तानाशाहों के साथ क्या हुआ था?
जवाब: पिछले सैन्य तानाशाहों ने इस्तीफा दिया, गिरफ्तार हुए या सबकुछ छोड़कर भागना पड़ा…. 1. जनरल अयूब खान: 27 अक्टूबर 1958 को राष्ट्रपति इस्कंदर मिर्जा का तख्तापलट किया। मिर्जा को इंग्लैंड भागना पड़ा और अयूब खुद राष्ट्रपति बने। 1965 की जंग में भारत से हार के बाद अयूब खान के बुरे दिन शुरू हो गए। मार्च 1969 में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। 2. जनरल याह्या खान: जनरल याह्या खान मार्शल लॉ लगाकर राष्ट्रपति बने। 1971 में भारत-पाकिस्तान जंग में पाकिस्तान की हार हुई और बांग्लादेश का जन्म हुआ। भारी बेइज्जती के बाद दिसंबर 1971 में याह्या को इस्तीफा देना पड़ा। नई सरकार ने उन्हें हाउस अरेस्ट कर दिया। 1980 में उनकी गुमनाम मौत हुई। 3. जनरल जिया-उल-हक: सेना प्रमुख जिया ने साल 1977 में पीएम जुल्फिकार अली भुट्टो का तख्तापलट किया। बाद में भुट्टो पर एक मर्डर केस चलाकर 1979 में उन्हें फांसी दे दी।
जिया ने पाकिस्तान में सबसे लंबे समय तक राज किया। 17 अगस्त 1988 को एक प्लेन क्रैश में उनकी मौत हो गई। 4. जनरल परवेज मुशर्रफ: 12 अक्टूबर 1999 को मुशर्रफ, पीएम नवाज शरीफ का तख्तापलट कर राष्ट्रपति बन बैठे। नवाज को जेल में डाल दिया। बाद में वे सऊदी अरब भाग गए। मुशर्रफ के खिलाफ विरोध हुए, उन्होंने इमरजेंसी भी लगाई, आखिरकार अगस्त 2008 में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। वे दुबई और फिर लंदन भाग गए। 2019 में उन्हें देशद्रोह के मामले में फांसी की सजा मिली। फरवरी 2023 में दुबई में उनकी मौत हो गई। सवाल-5: क्या मुनीर की सत्ता कायम होने से भारत को कोई खतरा है?
जवाब: मुनीर का रुख पूरी तरह एंटी इंडिया है… 7 अगस्त 2026 को पाकिस्तान, सऊदी और तुर्किये में एक डिफेंस डील हुई। इसके तहत किसी एक देश पर हमला, तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। पाकिस्तान को इस पैक्ट का पहला जनरल सेक्रेटरी जनरल बनाया गया है। ताकतें बढ़ने से आसिम मुनीर को अपने एंटी इंडिया एजेंडे पर काम करना आसान हो जाएगा। ये भारत के लिए चिंता का सबब हो सकता है। ———————— ये खबर भी पढ़ें… आज का एक्सप्लेनर:पाकिस्तान पर हमला हुआ तो लड़ने आएंगे सऊदी-तुर्किये, आखिर क्या है मक्का एग्रीमेंट; भारत कैसे काउंटर करेगा पाकिस्तान पर हमला हुआ, तो सऊदी और तुर्किये भी साथ लड़ने आएंगे। 7 अगस्त 2026 को मक्का में तीनों देशों में बीच एक खास रक्षा समझौता हुआ है। अब किसी एक पर हमला, तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। पूरी खबर पढ़ें…

IIT-IIM के बाद लंदन में थी शानदार नौकरी, UPSC के लिए छोड़ा करियर; अब IAS दिव्या मित्तल ने दिया इस्तीफा

दिव्या मित्तल की कहानी उस सोच से बिल्कुल अलग है, जिसमें अच्छी पढ़ाई, विदेश की नौकरी और शानदार करियर को सफलता की आखिरी मंजिल माना जाता है। IIT Delhi और IIM Bangalore जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से पढ़ाई करने के बाद उन्होंने लंदन में ट्रेडर के तौर पर काम किया। बाहर से उनकी जिंदगी पूरी तरह सफल नजर आती थी, लेकिन उनके मन में अपने देश के लिए कुछ करने की इच्छा बनी रही। इसी सोच ने उन्हें विदेश की नौकरी छोड़कर भारत लौटने और IAS बनने के लिए प्रेरित किया। करीब 13 साल तक सिविल सेवा में रहने के बाद अब उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

30 अगस्त को सोशल मीडिया पर साझा किए गए भावुक पोस्ट में उन्होंने अपने सफर और उससे जुड़ी यादों को साझा किया। उनका ये फैसला इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि उन्होंने सफलता की कई मंजिलें हासिल करने के बाद भी अपनी राह बदलने का साहस दिखाया।

साधारण परिवार से IIT और IIM तक का सफर

दिव्या मित्तल ने बताया कि वह एक साधारण माहौल में पली-बढ़ीं और एक अच्छा और सफल जीवन बनाने का सपना देखा था। इस सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की और IIT Delhi में दाखिला लिया। इसके बाद उन्होंने IIM Bangalore से MBA किया और पढ़ाई पूरी करने के बाद लंदन में ट्रेडर के तौर पर काम शुरू किया। प्रतिष्ठित संस्थानों की डिग्री और विदेश में शानदार नौकरी के बावजूद उन्हें महसूस हुआ कि उनकी जिंदगी में कुछ कमी है।

लंदन की नौकरी छोड़ भारत लौटने का फैसला

विदेश में रहते हुए उन्हें अपने देश से दूर होने का एहसास लगातार परेशान करता रहा। Mittal के मुताबिक, उन्हें लगता था कि उनकी शिक्षा, आत्मविश्वास और मिले अवसरों पर देश का भी हक है। इसी सोच ने उन्हें वापस भारत आने और देश के लिए कुछ करने का फैसला लेने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद उन्होंने IAS को अपना रास्ता चुना और 2013 में सिविल सेवा में शामिल हो गईं।

उत्तर प्रदेश में अफसर रहते हुए बदली सफलता की परिभाषा

IAS बनने के बाद मित्तल ने उत्तर प्रदेश में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। वह Deoria, Mirzapur और Sant Kabir Nagar की District Magistrate भी रहीं। प्रशासनिक जिम्मेदारियों के दौरान उनके सामने ऐसे कई मौके आए, जिन्होंने उनके लिए सफलता का मतलब बदल दिया। किसी परिवार को पहली बार जमीन का अधिकार मिलना, दिव्यांग लोगों को सम्मान के साथ आगे बढ़ने का मौका मिलना या किसानों के खेतों तक पानी पहुंचना इन अनुभवों ने उन्हें महसूस कराया कि सरकारी काम सिर्फ फाइलों तक सीमित नहीं है।

उन्होंने लिखा कि हर सरकारी फाइल के पीछे एक इंसान की जिंदगी जुड़ी होती है।

एक बुजुर्ग महिला का आशीर्वाद कभी नहीं भूल पाईं

Mirzapur के Lahuriya Dih गांव की एक घटना मित्तल के दिल में हमेशा के लिए बस गई। उन्होंने याद किया कि जब पहली बार गांव में पानी पहुंचा तो एक बुजुर्ग महिला ने यह देखकर कुछ नहीं कहा। इसके बजाय उसने कांपते हाथों से Mittal के सिर पर हाथ रखा और उन्हें आशीर्वाद दिया। Mittal के लिए वह पल किसी पद या उपलब्धि से कहीं बड़ा था। उन्होंने भावुक होकर कहा कि पद आज भले पीछे छूट जाए, लेकिन उस बुजुर्ग महिला का स्पर्श उनकी जिंदगीभर की याद बनकर रहेगा।

13 साल बाद समझ आया- देने से ज्यादा पाया

IAS के 13 सालों को याद करते हुए Mittal ने बताया कि शुरुआत में उन्हें लगता था कि वह लोगों को कुछ देने के लिए सेवा में आई हैं। लेकिन समय के साथ उनकी सोच बदल गई। उन्हें एहसास हुआ कि लोगों से मिले प्यार, भरोसे और सम्मान ने उन्हें कहीं ज्यादा समृद्ध किया। जब भी वह थकतीं या खुद मुश्किल दौर से गुजरतीं, लोगों का विश्वास उन्हें आगे बढ़ने की ताकत देता था।

पद छोड़ा, लेकिन सपना अब भी वही है

साधारण परिवेश से निकलकर IIT और IIM तक पहुंचना, लंदन में ट्रेडर बनना और फिर देश की सेवा के लिए IAS में आना Mittal का सफर कई मोड़ों से गुजरा है।

अब उन्होंने 13 साल की सेवा के बाद IAS से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, पद छोड़ने के बावजूद उनका कहना है कि जिस भारत का सपना देखकर वह विदेश से वापस लौटी थीं, वह सपना आज भी उनके साथ है।

Video: शहर बदला तो परिवार हुआ करीब! Bengaluru से Gurgaon शिफ्ट होने के बाद महिला ने गिनाए फायदे