Tanishaa Mukerji: ‘यहां से जाइए हमें आपकी जरूरत नहीं’, प्रोटेस्ट के दौरान एलीट हिंदू की अंधी नफरत देख शॉक्ड हुईं तनीशा मुखर्जी

Tanishaa Mukerji: काजोल की बहन और एक्ट्रेस तनीषा एस मुखर्जी अक्सर अपने X अकाउंट पर अलग-अलग मुद्दों पर अपनी बेबाक राय शेयर करती रहती हैं। जब देश में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, तो केंद्र सरकार की भी आलोचना हो रही है। इसी बीच तनीषा ने सोशल मीडिया पर कुछ ‘अच्छे-खासे पढ़े-लिखे और खुद को ऊंचा समझने वाले’ आलोचकों पर ‘अंधी नफरत’ के साथ काम करने का आरोप लगाया।

तनीषा ने क्या कहा

हालांकि तनीषा ने विरोध प्रदर्शनों का सीधे तौर पर जिक्र नहीं किया और न ही अपनी पोस्ट के लिए कोई संदर्भ दिया। लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हर किसी को अपने देश का साथ देना चाहिए। X पर उन्होंने लिखा, “मैं कुछ ऐसे तथाकथित पढ़े-लिखे और खुद को ऊंचा समझने वाले हिंदुओं की अंधी नफरत देखकर सचमुच हैरान हूं, जो अभी भी पूरी तरह से ब्रिटिश सोच में जी रहे हैं! अगर आपको लंदन और अमेरिका इतना ही पसंद है तो प्लीज चले जाइए! हमें यहां आपकी जरूरत नहीं है कि आप हमें नीचा दिखाएं! हां बहुत सारी समस्याएं हैं, लेकिन समय लगता है और देखिए पिछले 10 सालों में हम कहां पहुंच गए हैं!”

‘बातें लॉजिकल और तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए’

तनीषा ने आगे कहा कि लोग किसी भी व्यक्ति को इस आधार पर तुरंत किसी कैटेगरी में डाल देते हैं कि वे किस राजनीतिक पार्टी का समर्थन करते हैं, जिससे आपस में मतभेद पैदा होते हैं। “अगर हम अपनी सरकार का समर्थन करते हैं, तो हम अंधभक्त और अनपढ़ कहलाते हैं। लेकिन अगर हम अमेरिका और जर्मनी से इस देश को बर्बाद करने की कोशिश करने वाले गुटों का समर्थन करते हैं, तो हम ‘कूल’ और ‘वोके’ (जागरूक) कहलाते हैं!

आपकी सोच, आपके ध्यान और आपके विचारों को लेकर एक जंग चल रही है। लेकिन प्लीज मीडिया से इतने भी प्रभावित न हों कि आप अपनी सामान्य समझ (कॉमन सेंस) का इस्तेमाल करना ही छोड़ दें! बातें लॉजिकल और तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए। कानूनों से चलने वाला समाज ही हमें सुरक्षित रखता है।

कुछ दिन पहले तनीषा मुंबई में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल हुई थीं। वहां उन्होंने पैपराजी और आम जनता से अपील करते हुए कहा था कि वे जुहू के SNDT ग्राउंड में मुखर्जी परिवार द्वारा आयोजित ‘नॉर्थ बॉम्बे सार्वजनीन दुर्गा पूजा’ के दौरान मर्यादा बनाए रखें।

तनीषा के करियर के बारे में

तनुजा की बेटी तनीषा ने 2003 में करण नाथ और डिनो मोरिया के साथ फिल्म ‘Sssshhh’ से बॉलीवुड में धमाकेदार एंट्री की थी। हालांकि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही। इसके बाद उन्होंने ‘सरकार’, ‘नील ‘एन’ निक्की’ और तमिल हिट फिल्म ‘उन्नाले उन्नाले’ में काम किया। ‘उन्नाले उन्नाले’ के लिए उन्हें विजय अवॉर्ड के लिए नॉमिनेशन भी मिला। 2013 में ‘बिग बॉस 7’ में फर्स्ट रनर-अप बनकर उन्हें काफी लोकप्रियता मिली, जहां अरमान कोहली के साथ उनके रिश्ते ने खूब सुर्खियां बटोरीं थीं।

इसके बाद उन्होंने ‘फियर फैक्टर: खतरों के खिलाड़ी 7’ (2016) में हिस्सा लिया और ‘झलक दिखला जा 11’ में भी एक कंटेस्टेंट के तौर पर नजर आईं। बाद में वह कॉमेडी शो ‘गैंग्स ऑफ हसीपुर’ में जज के तौर पर भी दिखीं। तनीषा आखिरी बार 2024 की फिल्म ‘लव यू शंकर’ में नजर आई थीं।

GDP ग्रोथ रेट 7% से ज्यादा, फिर लगातार क्यों गिर रहा भारत का शेयर बाजार?

भारतीय शेयर बाजारों में लगातार गिरावट ने इनवेस्टर्स को तगड़ी चोट पहुंचाई है। एक तरफ जहां शेयरों में सीधे पैसे लगाने वाले लोग मायूस हैं तो दूसरी तरफ म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में हर महीने सिप से इनवेस्ट करने वाले लोग चिंतित है। पिछले करीब दो साल में उनका पैसा बढ़ने की जगह घटा है। अब इनवेस्टर्स का धैर्य टूटने लगा है। इस हफ्ते के मध्य में निफ्टी गिरकर 52 हफ्ते के निचले स्तर पर आ गया। ऐसे में उनके मन में एक सवाल चल रहा है। इनवेस्टर्स यह जानना चाहते हैं कि जब दुनियाभर के शेयर बाजारों में तेजी है तो हमारा बाजार क्यों गिर रहा है?

भारत की जीडीपी ग्रोथ 7 फीसदी से ऊपर 

भारतीय शेयर बाजारों में गिरावट इसलिए भी परेशान कर रही है, क्योंकि देश की जीडीपी की ग्रोथ अच्छी है। यह 7 फीसदी से ऊपर बनी हुई है। अर्थव्यवस्था को लेकर कोई बड़ी समस्या नहीं दिख रही है। देश का मुद्रा भंडार मजबूत स्थिति में है। सरकार का फिस्कल डेफिसिट अनुमान के मुताबिक है। इकोनॉमी में डिमांड अच्छी है। इसकी तस्दीक हर महीने जीएसटी कलेक्शन के डेटा से हो जाती है। डायरेक्ट टैक्स कलेक्शंस के डेटा भी सामान्य हैं। बैंकिंग सेक्टर की क्रेडिट ग्रोथ बेहदत है। तीन साल से ज्यादा समय के बाद आरबीआई ने इंटरेस्ट रेट बढ़ाया है। इसका मतलब है कि अब तक इंटरेस्ट रेट ज्यादा नहीं था। किसी इकोनॉमी की स्थिति ऐसी होने पर शेयर बाजारों में अच्छी तेजी दिखती है। लेकिन, भारत का शेयर बाजार चढ़ने की जगह गिर रहा है।

दुनिया के कई बड़े शेयर बाजारों में शानदार तेजी 

दुनिया के सबसे बड़े शेयर बाजारों में भी बीते एक साल में अच्छी आई है। अमेरिकी शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक डाओ जोंस (Dow Jones) इंडस्ट्रियल एवरेज ने बीते एक साल में 13.58 फीसदी रिटर्न दिया है। दक्षिण कोरिया के कोस्पी ने इस साल 83 फीसदी से ज्यादा रिटर्न दिया है। यहां तक कि लंदन स्टॉक एक्सचेंज के प्रमुख सूचकांक FTSE ने भी बीते एक साल में करीब 12 फीसदी रिटर्न दिया है। लेकिन, बीते एक साल में भारतीय शेयर बाजारों के प्रमुख सूचकांकों Nifty और Sensex में  बड़ी गिरावट आई है। निफ्टी जहां करीब 11 फीसदी फिसला है, वही सेंसेक्स 12 फीसदी से ज्यादा लुढ़का है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बाजार को पहुंचाई चोट

भारतीय बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह विदेशी निवेशकों की बिकवाली है। बीते कई सालों से विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में बिकवाली कर रहे हैं। पिछले दो सालों में यह बिकवाली काफी बढ़ी है। 2026 में FIIs की शुद्ध बिक्री 4.41 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रही है। बर्नस्टीन की रिपोर्ट में कहा गया है कि विदेशी निवेशकों के भारतीय बाजार में नया निवेश करने की कोई वजह नहीं दिखती। यह रिपोर्ट सितंबर के तीसरे हफ्ते में आई थी। अगर बीते दो सालों की बात की जाए तो FIIs ने भारतीय बाजार से करीब 40 अरब डॉलर निकाले हैं। घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) खासकर म्यूचुअल फंडों ने इस दौरान लगातार निवेश किया है, जिससे बाजार को बड़ा सहारा मिला है।

महंगे वैल्यूएशंस की वजह से विदेशी निवेशकों ने की बिकवाली

FIIs की भारतीय बाजार में लगातार बिकवाली की दो बड़ी वजहें हैं। पहला, भारतीय शेयरों की वैल्यूएशंस पिछले कुछ सालों में काफी बढ़ गई थी। निफ्टी और सेंसेक्स की वैल्यूएशंस अपनी लंबी अवधि की औसत वैल्यूएशंस से काफी आगे निकल गई थी। इसका मतलब है कि भारतीय शेयर बाजार काफी महंगा हो गया था। इस वैल्यूएशन को जस्टिफाई करने करने के लिए कंपनियों की अर्निंग्स में तेज उछाल की जरूरत थी। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ। हालांकि, जून तिमाही से कंपनियों की अर्निंग्स में इम्प्रूवमेंट दिखा है। लेकिन, इससे निफ्टी की वैल्यूएशन घटकर करीब 19 फीसदी पर आ गई है। यह पिछले साल 23 फीसदी तक पहुंच गई थी। दुनिया के कई दूसरे देशों के बाजारों के मुकाबले भारतीय बाजार की वैल्यूएशन अब भी ज्यादा है।

भारतीय बाजार में एआई और सेमीकंडक्टर स्टॉक्स का अभाव

दूसरा, भारतीय बाजार में एआई से जुड़ी कंपनियां मौजूद नहीं हैं। पिछले दो सालों में उन बाजारों में ज्यादा तेजी आई है, जहां सीधे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी कंपनियां मौजूदा हैं। इनमें पहले नंबर पर अमेरिका है। एशिया में दक्षिण कोरिया और ताइवान है। विदेशी निवेशकों ने एआई और सेमीकंडक्टर्स से जुड़ी कंपनियों में जमकर निवेश किए हैं। इसके लिए उन्होंने भारत जैसे बाजारों से अपने पैसे निकाले हैं। इस निवेश से एआई और सेंमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में जबर्दस्त तेजी आई है। इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि Nvidia का मार्केट कैपिटलाइजेशन 6 लाख करोड़ डॉलर से ज्यादा हो गया है। यह भारत की जीडीपी से ज्यादा है। Nvidia का शेयर एक साल में 25 फीसदी से ज्यादा चढ़ा है। यही हाल दक्षिण कोरिया में चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयरों का है। विदेशी निवेशक उसी बाजार में निवेश करते हैं, जहां उन्हें ज्यादा प्रॉफिट की उम्मीद दिखती है।

अमेरिका और ईरान की लड़ाई ने बढ़ाया दबाव

इस साल फरवरी के अंत में अमेरिका और ईरान की लड़ाई शुरू हुई। इसका असर क्रूड ऑयल के उत्पादन पर पड़ा। क्रूड की सप्लाई घटने से इसकी कीमतें आसमान में पहुंच गईं। पिछले कई दिनो से ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चल रहा है। यह भारत जैसे देश के लिए अच्छा नहीं है, क्योंकि भारत क्रूड की अपनी 85 फीसदी जरूरत इंपोर्ट से पूरी करता है।

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क्रूड में उछाल का इकोनॉमी पर पड़ रहा असर 

क्रूड में उछाल से सरकार का इंपोर्ट बिल बढ़ा है। इससे डॉलर के मुकाबले रुपये पर भी दबाव बढ़ा है। रुपया अपने रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब आ गया है। महंगे क्रूड की वजह से इस साल ऑयल मार्केटिंग कंपनियां चार बार पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ा चुकी हैं। इसका असर आम आदमी की खर्च करने की क्षमता पर पड़ रहा है। क्रूड का इस्तेमाल करने वाली कंपनियों की उत्पादन लागत भी बढ़ी है। इससे शेयर बाजार का सेंटीमेंट कमजोर हुआ है।

Katrina Kaif Looks: ‘तेनु काला चश्मा जचदा ऐ जचदा ऐ गोरे मुखड़े ते…’, अपने नए ग्लैमरस लुक से कैटरीना कैफ ने ट्रोलर्स के मुंह पर मारा तमाचा

Katrina Kaif Looks: आपने ‘मैं हूं ना’ फिल्म का वो डायलॉग तो सुना होगा…’मुंह तो बंद करो अंकल’। जी हां, ये डायलॉग बीते दिनों कैटरीना कैफ को बॉडी शेम करने वाले ट्रोलर्स के लिए आज बिल्कुल सटीक बैठता है। हाल में ही लंदन में अपने ब्यूटी ब्रांड के 1 साल होने पर इवेंट में पहुंची कैटरीना कैफ बेहद शानदार लुक में नजर आईं। ओवरसाइज्ड ब्राउन आउटफिट में वह बहुत खूबसूरत लग रहीं थी। आप भी देखिए एक्ट्रेस की तस्वीरें…

कैटरीना कैफ ने लंदन में अपने ब्यूटी ब्रांड ‘के ब्यूटी’ (Kay Beauty) के इंटरनेशनल लॉन्च के लिए ‘स्पेस एनके’ (Space NK) में सिर से पैर तक ब्राउन कपड़ों में जबरदस्त स्ट्रीट-स्टाइल लुक कैरी किया। सेलिब्रिटी स्टाइलिस्ट रिया कपूर ने इस इवेंट की कैटरीना की कई तस्वीरें शेयर कीं।

लंदन इवेंट के लिए कैटरीना ने ‘टोटेम’ (Toteme) का लेयर्ड ब्राउन लुक अपनाया। इस आउटफिट में एक ओवरसाइज़्ड, स्ट्रक्चर्ड ब्लेजर था और इसे एक सिंपल ब्लैक टॉप के ऊपर पहना गया था। उन्होंने इसे चॉकलेट-ब्राउन रंग की ढीली-ढाली ड्रेप्ड ट्राउजर के साथ पहना, जिससे शार्प टेलरिंग वाले आउटफिट को धोती जैसा लुक मिला।

ब्राउन रंग के अलग-अलग शेड्स और टेक्सचर ने मोनोक्रोम स्टाइलिंग को फीका नहीं पड़ने दिया। जहां ब्लेजर ने आउटफिट को एक शेप दिया, वहीं ढीले-ढाले बॉटम्स ने उसमें मूवमेंट जोड़ा और लुक को कम फॉर्मल बनाया। कैटरीना ने अपने लुक को ‘पेरिस टेक्सास’ के गहरे ब्राउन रंग के बूट्स के साथ पूरा किया। उन्होंने एक स्ट्रक्चर्ड काला ‘डीमेलियर लंदन’ बैग लिया था, जबकि बड़े आकार के काले ‘लिंडा फैरो’ सनग्लासेस ने उनके पॉलिश्ड स्ट्रीट-स्टाइल लुक को और निखारा।

कैटरीना ने वेवी ओपन हेयर स्टाइल की, जबकि उनका मेकअप सॉफ्ट और नैचुरल लग रहा था – जिसमें डिफाइंड आंखें और हल्के न्यूड रंग का लिपशेड शामिल है। तस्वीरों में कैटरीना को लंदन की सड़कों पर वॉक करती दिखीं। तस्वीरों ने जल्द ही उनके बॉलीवुड साथियों का ध्यान खींचा। आलिया भट्ट ने पोस्ट पर कई फायर इमोजी शेयर किए।

अनिल कपूर को भी यह लुक बहुत पसंद आया और उन्होंने फायर इमोजी के साथ कमेंट किया, “क्लासिक कैटरीना”। रिया ने बताया कि उन्होंने सान्या कपूर के साथ मिलकर कैटरीना को स्टाइल किया था, जबकि तस्वीरें मार्को बहलर ने खींची थीं।

ममदानी की जीत ने बदली यूरोप की राजनीति:वामपंथी पार्टियों ने सस्ते घर और कम किराए को मुद्दा बनाया; बर्लिन में जीत मिली

न्यूयॉर्क में जोहरान ममदानी की जीत का असर अब यूरोप की राजनीति में दिखने लगा है। यूरोपीय नेता ममदानी की तरह महंगे किराए, बढ़ती महंगाई और आम लोगों के खर्च पर फोकस कर रहे हैं। सबसे दिलचस्प मामला जर्मनी के बर्लिन का है। वहां महंगे घरों को मुद्दा बनाकर एलिफ एराल्प ने चुनाव जीत लिया। जर्मन मीडिया ने अब एराल्प को ‘बर्लिन की ममदानी’ कह रहे हैं। वहीं, फ्रांस, स्पेन और नीदरलैंड के वामपंथी नेता भी ममदानी की राजनीति पर नजर रख रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि ममदानी ने यूरोप के वामपंथ को चुनाव लड़ने का नया तरीका दे दिया है। 1. जर्मनी: सस्ते घरों का वादा किया, सबसे ज्यादा सीटें मिलीं अगर यूरोप में किसी एक नेता को ममदानी से सबसे सीधे तौर पर जोड़ा जा सकता है, तो वह एलिफ एराल्प हैं। 45 साल की एराल्प वकील हैं और तुर्की मूल के परिवार से आती हैं। उनके माता-पिता 1980 के तुर्की सैन्य तख्तापलट के बाद जर्मनी आए थे। एराल्प 2017 में द लिंक से जुड़ी थीं। पिछले महीने हुए चुनाव में उनकी पार्टी का सबसे बड़ा मुद्दा रहा- महंगा शहर और महंगा किराया। एराल्प ने बर्लिन में निजी कंपनियों के पास मौजूद करीब 2.2 लाख मकानों को सार्वजनिक नियंत्रण में लाने की मांग की। इसका फायदा द लिंक को मिला। वह चुनाव में करीब 25.7% वोट मिले और वह सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। अब सरकार बनाने के लिए उसे दूसरी पार्टियों के साथ गठबंधन करना होगा। 2. ब्रिटेन: पर्यावरण के मुद्दे को महंगे घर से जोड़ा ब्रिटेन में ममदानी से सबसे ज्यादा तुलना जैक पोलांस्की की होती है। वे ग्रीन पार्टी के नेता हैं। यह पार्टी मुख्य रूप से पर्यावरण और जलवायु के मुद्दों पर राजनीति करती रही है। लेकिन पोलांस्की ने इनका दायरा बढ़ाया है। पोलांस्की महंगाई, महंगे घर, बढ़ते किराए, रोजमर्रा के खर्च और अमीरों पर ज्यादा टैक्स जैसे मुद्दों को पर्यावरण की राजनीति से जोड़ते हैं। पोलांस्की इसे ‘इको-पॉपुलिज्म’ कहते हैं। ममदानी की तरह पोलांस्की भी सोशल मीडिया को राजनीति का अहम माध्यम बना रहे हैं। पोलांस्की ने बताया कि उनकी वीडियो टीम ममदानी के वीडियो बनाने वाली टीम से टिप्स ले रही है। दिलचस्प बात यह है कि पोलांस्की इस समय लंदन की होलबॉर्न सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के सांसद पद से हटने के बाद 8 अक्टूबर को यहां उपचुनाव हो रहा है। दो साल पहले हुए चुनाव में ग्रीन पार्टी को यहां सिर्फ 10 फीसदी वोट मिले थे। कुछ सर्वे में अनुमान लगाया गया है कि इस बार ग्रीन को 40 फीसदी वोट मिल सकता है। 3. स्पेन: 87 साल की महिला को घर से निकाला, सरकार गिरी स्पेन में महंगा घर और बढ़ता किराया इस समय बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है। पिछले महीने मैड्रिड में 87 साल की मारिकर्मेन अबास्कल को 70 साल से रह रहे घर से निकाल दिया गया। इसके बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। यह मामला स्पेन के आवास संकट का प्रतीक बन गया। मामला इतना बढ़ा कि सरकार पर आवास संकट से निपटने का दबाव बढ़ गया। संसद में सरकार के आवास संबंधी प्रस्ताव खारिज होने के बाद प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने 29 नवंबर को समय से पहले आम चुनाव कराने का ऐलान कर दिया। यानी स्पेन में भी घर और किराया अब सिर्फ सामाजिक समस्या नहीं रहे। वे सीधे चुनावी राजनीति का मुद्दा बन चुके हैं। 4. फ्रांस: पेरिस में 60 हजार सस्ते घर बनाने का वादा फ्रांस की राजधानी पेरिस के मेयर इमैनुएल ग्रेगोयर समाजवादी पार्टी से जुड़े हैं। वे इसी साल मेयर चुने गए हैं। उनकी राजनीति में महंगा घर और बढ़ता किराया बड़ा मुद्दा है। ग्रेगोयर पेरिस में ज्यादा सस्ते घर बनाने, खाली पड़े मकानों को लोगों के लिए इस्तेमाल करने और किराए पर नियंत्रण बढ़ाने की बात करते हैं। उनकी सरकार का मकसद 60 हजार नए सस्ते घर बनाना है। ममदानी की जीत से पहले भी फ्रांस के कुछ वामपंथी नेता उनके अभियान से सीखने की बात कर चुके थे। ब्रिटेन की तरह यहां भी ममदानी की चुनावी शैली और सीधे मैसेज देने के तरीके पर नजर रखी गई। 5. नीदरलैंड: घर की कमी को मुद्दा बनाया, सबसे बड़ी पार्टी बनी नीदरलैंड में ममदानी की जीत से पहले ही घर और किराए का मुद्दा चुनावी राजनीति के केंद्र में आ चुका था। 2025 के राष्ट्रीय चुनाव में D66 के नेता रॉब येटन ने आवास संकट को बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया। उस समय देश में करीब 4 लाख घरों की कमी थी। घर खरीदना महंगा हो चुका था और किराए लगातार बढ़ रहे थे। यानी लाखों लोगों के सामने सवाल था। सरकार महंगाई कब कम करेगी से पहले घर मिलेगा कब? येटन की पार्टी D66 ने हर साल 1 लाख नए घर बनाने और 10 नई टाउनशिप विकसित करने का प्रस्ताव रखा। चुनाव में इसका फायदा भी मिला। पार्टी 2023 की 9 सीटों से बढ़कर 2025 में 26 सीटों पर पहुंच गई और सबसे बड़ी पार्टियों में शामिल हुई। यानी नीदरलैंड में सस्ता घर और कम किराया यूरोप में ममदानी की जीत से पहले ही बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका था। ममदानी की जीत ने इस बहस को और चर्चा में ला दिया। ——————————

2026 के फिजिक्स नोबेल का ऐलान आज:मेटामटेरियल्स, ग्राफीन और क्वांटम तकनीक के वैज्ञानिक दावेदार; 11.5 करोड़ रुपए मिलेंगे

2026 के फिजिक्स नोबेल पुरस्कार की घोषणा आज होगी। स्वीडन की रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज भौतिकी में अहम काम करने वाले वैज्ञानिकों के नाम बताएगी। यह पुरस्कार ऐसी खोज के लिए दिया जाता है, जिसने फिजिक्स को समझने या विज्ञान-तकनीक को आगे बढ़ाने में बड़ी मदद की हो। इस साल मेटामटेरियल्स, ग्राफीन और क्वांटम तकनीक पर काम करने वाले वैज्ञानिक चर्चा में हैं। इनमें जॉन पेंड्री, निकॉला स्पैल्डिन, पाब्लो जारिलो-हरेरो और अलेक्सी किताएव जैसे नाम शामिल हैं। हालांकि, नोबेल कमेटी ने संभावित विजेताओं की कोई आधिकारिक सूची जारी नहीं की है। नोबेल विजेताओं को दिसंबर में स्वीडन के स्टॉकहोम में सम्मानित किया जाएगा। उन्हें मेडल, डिप्लोमा और पुरस्कार राशि मिलेगी। 2026 में नोबेल पुरस्कार की राशि करीब 11.5 करोड़ रुपए है। एक से ज्यादा वैज्ञानिकों को पुरस्कार मिलने पर रकम उनके बीच बांटी जाएगी। फिजिक्स नोबेल के लिए 4 क्षेत्रों के वैज्ञानिकों के नाम चर्चा में इस साल फिजिक्स नोबेल के लिए चार अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले वैज्ञानिकों के नाम चर्चा में हैं। इनमें मेटामटेरियल्स, ग्राफीन, क्वांटम कंप्यूटिंग और बेहद सटीक घड़ियों पर काम करने वाले वैज्ञानिक शामिल हैं। 1. मेटामटेरियल्स के लिए जॉन पेंड्री जॉन पेंड्री ब्रिटेन के इंपीरियल कॉलेज लंदन के भौतिक विज्ञानी हैं। उनका नाम मेटामटेरियल्स पर काम के लिए चर्चा में है। ये ऐसी कृत्रिम सामग्री होती हैं, जिन्हें खास गुणों के साथ बनाया जाता है। पेंड्री के काम से रोशनी को मोड़ने और नियंत्रित करने की तकनीक को समझने में मदद मिली। इससे ऐसी तकनीक की संभावना सामने आई, जिसमें किसी वस्तु को छिपाने जैसा प्रभाव पैदा किया जा सकता है। इस क्षेत्र में डेविड स्मिथ और फेडेरिको कैपासो के नाम भी चर्चा में हैं। 2.ग्राफीन की परतें घुमाने की तकनीक के लिए तीन नाम की चर्चा पाब्लो जारिलो-हरेरो, एलन मैकडोनाल्ड और ईवा अंद्रेई का नाम ट्विस्ट्रोनिक्स पर काम के लिए चर्चा में है। इसमें ग्राफीन जैसी बेहद पतली सामग्री की दो परतों को थोड़ा घुमाया जाता है। इससे सामग्री के गुण बदल सकते हैं। कुछ स्थितियों में इसमें सुपरकंडक्टिविटी जैसे गुण भी दिखाई दे सकते हैं। इन तीनों को 2026 का कावली नैनोसाइंस पुरस्कार भी मिला है। 3. क्वांटम कंप्यूटिंग के काम के लिए तीन वैज्ञानिक चर्चा में अलेक्सी किताएव, जॉन प्रेस्किल और पीटर शोर के नाम क्वांटम कंप्यूटिंग से जुड़े काम के लिए चर्चा में हैं। क्वांटम कंप्यूटर बहुत संवेदनशील होते हैं। छोटी-सी गड़बड़ी भी उनके नतीजे को बदल सकती है। इन वैज्ञानिकों के काम ने क्वांटम जानकारी को गलतियों से बचाने और ज्यादा भरोसेमंद क्वांटम कंप्यूटर बनाने के तरीकों को समझने में मदद की। 4. बेहद सटीक घड़ियों की तकनीक पर काम करने वाले दो वैज्ञानिक हिदेतोशी कातोरी और जून ये का नाम ऑप्टिकल लैटिस क्लॉक पर काम के लिए चर्चा में है। ये ऐसी घड़ियां हैं, जो समय को बेहद सटीक तरीके से माप सकती हैं। इनमें परमाणुओं और लेजर की मदद ली जाती है। इनका इस्तेमाल वैज्ञानिक प्रयोगों के साथ GPS और कम्युनिकेशन जैसी तकनीकों में भी हो सकता है। 2025 में इलेक्ट्रिक सर्किट से जुड़ी क्वांटम खोज के लिए मिला नोबेल 2025 का फिजिक्स नोबेल जॉन क्लार्क, मिशेल एच. डेवोरेट और जॉन एम. मार्टिनिस को दिया गया था। उन्हें ऐसी खोज के लिए सम्मानित किया गया, जिसमें क्वांटम दुनिया के नियमों को इलेक्ट्रिक सर्किट में देखा गया। वैज्ञानिकों ने दिखाया कि क्वांटम दुनिया में होने वाली घटनाएं सिर्फ बेहद छोटी चीजों में ही नहीं, बल्कि इलेक्ट्रिक सर्किट में भी देखी जा सकती हैं। इस खोज से क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी नई तकनीकों को समझने और आगे बढ़ाने में मदद मिली। —————————— ये खबर भी पढ़ें… दिमागी कोशिकाओं को कंट्रोल करने की तकनीक पर मेडिसिन नोबेल:जर्मनी-अमेरिका के 3 वैज्ञानिकों की रिसर्च; डिप्रेशन और मानसिक बीमारियों को समझना आसान हुआ 2026 का मेडिसिन नोबेल जर्मनी के पीटर हेगेमैन और जॉर्ज नागेल और अमेरिका के कार्ल डाइसेरोथ को दिया गया है। इन वैज्ञानिकों ने ऑप्टोजेनेटिक्स नाम की ऐसी तकनीक विकसित करने में मदद की, जिससे रोशनी की मदद से दिमाग की अलग-अलग तंत्रिका कोशिकाओं को नियंत्रित करके उनके काम को समझा जा सकता है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

नाइजीरिया में 32 लोगों को ले जा रहा मिलिट्री-प्लेन क्रैश:25 यात्री और 7 क्रू सवार थे; नदी के पास गिरा, सर्च ऑपरेशन जारी

नाइजीरिया के दक्षिणी हिस्से में सोमवार को 32 लोगों को लेकर जा रहा सैन्य प्लेन क्रैश हो गया। प्लेन में 25 यात्री और 7 क्रू मेंबर सवार थे। हादसा ओंडो राज्य के नदी किनारे बसे इग्बोकोंडा शहर में हुआ। हादसे में कितने लोग हताहत हुए, इसकी तत्काल जानकारी नहीं मिली है। नाइजीरिया के एविएशन मिनिस्टर फेस्टस कीयामो ने बताया कि प्लेन एक नियमित मिशन पर देश के आर्थिक केंद्र लागोस जा रहा था। स्थानीय समय के मुताबिक सुबह करीब 9 बजे प्लेन रडार से गायब हो गया। बाद में पता चला कि यह नौसैनिक बेस के पास क्रैश हुआ है। स्थानीय लोगों ने बताया कि प्लेन नदी के पास गिरा और उसका कुछ हिस्सा पानी में डूब रहा था। प्रत्यक्षदर्शी अकिनबुलेजो पियस ने कहा कि उन्हें तेज आवाज सुनाई दी, जो उन्हें बिजली गिरने जैसी लगी। इसके बाद उन्होंने प्लेन को पेड़ों के ऊपर से गुजरते और नीचे गिरते देखा। मौके पर शरीर के कुछ हिस्से, कपड़े और जूते भी मिले। प्लेन हादसे के बाद तस्वीर…. हादसे में ATR-42 मिलिट्री प्लेन क्रैश हुआ नाइजीरियाई एयरफोर्स ने बताया कि क्रैश हुआ प्लेन ATR-42 था। नाइजीरियाई सेना इस प्लेन का इस्तेमाल खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी करने और सैनिकों व सामान को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए करती रही है। पानी में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना ज्यादा मुश्किल नदी या पानी में प्लेन गिरने के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन जमीन पर हादसे के मुकाबले ज्यादा मुश्किल हो सकता है। गोताखोरों और रेस्क्यू टीम को तेज बहाव, कम विजिबिलिटी, प्लेन के पानी में डूबने और मलबे के फैलने जैसी कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। पानी में रेस्क्यू ऑपरेशन की बड़ी चुनौतियां…. 1. पानी का तेज बहाव नदी का बहाव मलबे और लोगों को हादसे वाली जगह से दूर ले जा सकता है। इससे रेस्क्यू टीम के लिए सही जगह का पता लगाना मुश्किल होता है। 2. पानी के अंदर कुछ दिखाई नहीं देता नदी का पानी अक्सर गंदा होता है। गोताखोरों को कुछ मीटर दूर की चीज भी दिखाई नहीं दे सकती। ऐसे में उन्हें टॉर्च, सोनार और दूसरे उपकरणों की मदद लेनी पड़ती है। 3. प्लेन तेजी से डूब सकता है प्लेन का कोई हिस्सा पानी के अंदर जाने के बाद उसकी लोकेशन बदल सकती है। केबिन में फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए गोताखोरों को पहले प्लेन की स्थिति और गहराई का पता लगाना पड़ता है। 4. मलबे से चोट का खतरा टूटा हुआ प्लेन, सीटें, धातु के हिस्से और दूसरे सामान पानी के अंदर खतरा पैदा कर सकते हैं। गोताखोरों के कपड़े या उपकरण इनमें फंस भी सकते हैं। 5. नदी की गहराई और तल की स्थिति नदी के नीचे कीचड़, रेत या पत्थर होने से गोताखोरों की आवाजाही मुश्किल हो सकती है। गहराई ज्यादा होने पर सामान्य गोताखोरी भी मुश्किल हो जाती है। 6. पानी में ईंधन के फैलने से खतरा क्रैश के बाद प्लेन से ईंधन या दूसरे पदार्थ पानी में फैल सकते हैं। इससे रेस्क्यू टीम के लिए अतिरिक्त सुरक्षा चुनौती पैदा हो सकती है। 7. सोनार और दूसरे उपकरणों की जरूरत जब पानी में कुछ दिखाई नहीं देता, तो रेस्क्यू टीम मलबे और प्लेन की स्थिति पता लगाने के लिए सोनार जैसे उपकरणों का इस्तेमाल कर सकती है। इसके बाद गोताखोरों को तय जगह पर भेजा जाता है। नाइजीरिया में पहले भी हुए बड़े प्लेन हादसे नाइजीरिया में पिछले 20 साल में कई बड़े प्लेन हादसे हुए हैं। इनमें यात्री और सैन्य प्लेन दोनों शामिल हैं। कुछ हादसों में 100 से ज्यादा लोगों की जान गई। 2005 में दो बड़े हादसे बेलव्यू एयरलाइंस हादसा: अक्टूबर 2005 में बेलव्यू एयरलाइंस का प्लेन लागोस से अबुजा जाते समय उड़ान भरने के कुछ देर बाद क्रैश हो गया। प्लेन में सवार 117 लोगों की मौत हुई। सोलिसो एयरलाइंस हादसा: दिसंबर 2005 में सोलिसो एयरलाइंस का प्लेन अबुजा से पोर्ट हारकोर्ट जाते समय गिर गया। इसमें 109 लोगों की मौत हुई। मरने वालों में कई स्कूली बच्चे भी थे। 2006 में 114 लोगों की मौत अक्टूबर 2006 में एडीसी एयरलाइंस का प्लेन अबुजा से पोर्ट हारकोर्ट जाते समय क्रैश हुआ। प्लेन में 114 लोग सवार थे और सभी की मौत हो गई। 2012 में रिहायशी इलाके में गिरा प्लेन जून 2012 में डाना एयर का प्लेन अबुजा से लागोस जाते समय क्रैश हो गया। प्लेन लागोस के एक रिहायशी इलाके में गिरा। इसमें सवार 153 लोगों की मौत हुई। जमीन पर मौजूद लोग भी हादसे की चपेट में आए। ———————————– ये खबर भी पढ़ें….. लंदन-शिकागो फ्लाइट 28 हजार फीट नीचे आई:पायलट ने इमरजेंसी अलर्ट भेजा; रास्ता बदलकर लंदन लौटी, वजह साफ नहीं ब्रिटिश एयरवेज की फ्लाइट BA295 आयरलैंड के ऊपर उड़ान भरते समय कुछ ही मिनटों में करीब 28 हजार फीट नीचे आ गई। इस दौरान प्लेन ने 7700 इमरजेंसी कोड एक्टिव किया। पूरी खबर यहां पढ़ें…

लंदन-शिकागो फ्लाइट 28 हजार फीट नीचे आई:पायलट ने इमरजेंसी अलर्ट भेजा; रास्ता बदलकर लंदन लौटी, वजह साफ नहीं

ब्रिटिश एयरवेज की फ्लाइट BA295 आयरलैंड के ऊपर उड़ान भरते समय कुछ ही मिनटों में करीब 28 हजार फीट नीचे आ गई। इस दौरान विमान ने 7700 इमरजेंसी कोड एक्टिव किया। इसके बाद फ्लाइट को शिकागो जाने के बजाय वापस लंदन की ओर मोड़ दिया गया। इमरजेंसी की वजह अभी सामने नहीं आई है। फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, विमान आयरलैंड के ऊपर करीब 9 हजार फीट की ऊंचाई तक आया था। 7700 कोड एयर ट्रैफिक कंट्रोल को विमान में सामान्य इमरजेंसी का संकेत देता है। इससे यह पता नहीं चलता कि समस्या किस तरह की है। खबर अपडेट हो रही है…

चार दिन की गिरावट से उबरा शेयर बाजार

विदेशों से मिले सकारात्मक संकेतों के बीच सोमवार को घरेलू शेयर बाजारों में चार दिन के बाद तेजी लौट आई और प्रमुख सूचकांक 0.6 प्रतिशत ऊपर बंद हुए।

बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 472.77 अंक (0.66 प्रतिशत) ऊपर 72,382.47 अंक पर बंद हुआ। यह सुबह 431 अंक चढ़कर 72,340.95 अंक पर खुला था और कुछ ही देर में 722 अंक की बढ़त में पहुंच गया। हालांकि दोपहर बाद तक यह 71,840.18 अंक तक लुढ़क भी गया। इस प्रकार सूचकांक में 791 अंकों का उतार-चढ़ाव देखा गया।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी-50 सूचकांक भी 133.80 अंक यानी 0.60 प्रतिशत की बढ़त में 22,555.75 अंक पर बंद हुआ। लगातार चार दिन की गिरावट के बाद बाजार में तेजी लौटी है।

एफएमसीजी और टिकाऊ उपभोक्ता उत्पाद समूहों में अधिक लिवाली देखी गई। निफ्टी एफएमसीजी 1.80 प्रतिशत मजबूत बंद हुआ। टिकाऊ उपभोक्ता उत्पाद समूह के सूचकांक में 1.53 फीसदी और मीडिया समूह में 0.92 फीसदी की तेजी रही। बैंकिंग, वित्त, रियल्टी और तेल एवं गैस समूहों के सूचकांक भी ऊपर रहे। स्वास्थ्य और फार्मा समूहों से सूचकांक टूट गए।

वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों से घरेलू बाजार में निवेश धारणा मजबूत हुई। वृहत बाजार में भी बिकवाली की जोर रहा। निफ्टी मिडकैप-50 सूचकांक 0.42 प्रतिशत और स्मॉलकैप-100 सूचकांक 0.47 प्रतिशत की बढ़त में रहा।

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एनएसई में जिन 3,706 कंपनियों के शेयरों में कारोबार हुआ उनमें से 1,844 के शेयर लाल निशान में और 1,745 के हरे निशान में रहे। अन्य 117 कंपनियों के शेयर अपरिवर्तित रहे।

सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से 20 में तेजी रही। आईटीसी का शेयर 4.49 प्रतिशत ऊपर बंद हुआ। इटरनल के शेयर में 2.50 फीसदी, भारती एयरटेल में 2.38, बजाज फाइनेंस में 2.28, अडानी पोर्ट्स में 2.13 और आईसीआईसीआई बैंक में 2.11 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।

रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर 1.72 फीसदी, एलएंडटी का 1.48, एनटीपीसी का 1.45, टाइटन का 1.43, टीसीएस का 1.40, मारुति सुजुकी का 1.07 और पावरग्रिड का शेयर 0.92 प्रतिशत चढ़ा। बजाज फिनसर्व, एक्सिस बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, महिंद्रा एंड महिंद्रा और भारतीय स्टेट बैंक के शेयर भी हरे निशान में रहे।

एचसीएल टेक्नोलॉजीज में 3.69 प्रतिशत की गिरावट रही। एचडीएफसी बैंक का शेयर 1.99 प्रतिशत, सन फार्मा का 1.55, इंफोसिस का 1.50 और एशियन पेंट्स का 1.43 प्रतिशत टूट गया। ट्रेंट, कोटक महिंद्रा बैंक और टाटा स्टील के शेयर भी लाल निशान में रहे।

वैश्विक स्तर पर एशिया में जापान का निक्केई 2.40 प्रतिशत, चीन का शंघाई कंपोजिट 0.31 प्रतिशत और हांगकांग का हैंग सेंग 0.28 प्रतिशत की बढ़त में बंद हुआ। यूरोपीय बाजारों में शुरुआती कारोबार में ब्रिटेन का एफटीएसई 0.52 फीसदी और जर्मनी का डैक्स 0.25 फीसदी ऊपर था।

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‘द साइकिल ऑफ लव’ के लंदन प्रीमियर में पहुंचीं एली अवराम

अभिनेत्री एली अवराम हाल ही में ‘द साइकिल ऑफ लव’ के लंदन प्रीमियर में शामिल हुईं। यह डॉक्यूमेंट्री भारतीय कलाकार पीके महानंदिया और स्वीडिश महिला लोट्टा की सच्ची प्रेम कहानी पर आधारित है।

एली ने कहा कि उनके लिए लंदन स्क्रीनिंग महज एक फिल्म समारोह नहीं, बल्कि उस परिवार से अपने पुराने जुड़ाव को महसूस करने का अवसर था। उन्होंने बताया कि वह इस परिवार को कई वर्षों से जानती हैं और उनकी कहानी से गहरा जुड़ाव महसूस करती हैं।

एली ने कहा, “पीके और लोट्टा की कहानी बहुत प्रेरणादायक है और दुनिया को इसे जरूर सुनना चाहिए। यह कहानी आपके दिल में इतनी उम्मीद भर देती है कि आपको प्यार और इंसानियत की ताकत पर विश्वास होने लगता है।

‘द साइकिल ऑफ लव’ पीके महानंदिया के असाधारण जीवन और अपने प्रेम तक पहुंचने के उनके जुनून को दर्शाती है। लोट्टा के भारत से स्वीडन लौटने के बाद पीके ने उनसे दोबारा मिलने का फैसला किया और भारत से स्वीडन तक साइकिल से सफर किया। आज इस दंपति की शादी को 50 वर्ष पूरे हो चुके हैं।

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न्यूयॉर्क में प्रियंका चोपड़ा द्वारा आयोजित स्क्रीनिंग के बाद लंदन प्रीमियर में शामिल होने को लेकर एली ने कहा, “मैं यहां आकर उनका समर्थन करने और उनकी कहानी से जुड़े इस खूबसूरत संदेश को लोगों तक पहुंचाने के लिए बहुत खुश हूं।

एली ने कहा कि यह केवल किसी फिल्म की कल्पना नहीं, बल्कि वास्तविक प्रेम कहानी है। उन्होंने कहा, “उन्होंने सच में भारत से स्वीडन तक साइकिल से सफर किया था। आज उनकी शादी को 50 साल हो चुके हैं। यह पीके के मजबूत इरादे और लोट्टा तक पहुंचने के उनके संकल्प की खूबसूरत मिसाल है।

एली के लिए पीके और लोट्टा से व्यक्तिगत रूप से मिलना भी बेहद भावुक अनुभव रहा। उन्होंने कहा, “आखिरकार उनसे व्यक्तिगत रूप से मिलना और आज भी उनके बीच उसी तरह का प्यार देखना बहुत भावुक करने वाला था। दुनिया को ऐसी और कहानियों की जरूरत है।

एली का इस कहानी से जुड़ाव कई वर्ष पुराना है। उन्होंने 2017 में उनकी किताब पढ़ी थी। स्वीडन की रहने वाली एली बचपन से ही भारत के प्रति आकर्षित रही हैं और लोट्टा के भारत से जुड़ाव में उन्हें अपने जीवन और सफर की झलक दिखाई देती है।

एली ने कहा, “2017 में जब मैंने उनकी किताब पढ़ी, तो लोट्टा और भारत के साथ उनके जुड़ाव ने मुझे बहुत प्रभावित किया। मैं खुद स्वीडन से हूं और बचपन से ही भारत की ओर आकर्षित रही हूं। इसलिए उनकी कहानी की कई बातें मुझे अपनी जिंदगी और अपने सफर से जुड़ी हुई लगती हैं।

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अमेरिका ने ब्रिटिश एयरबेस से B-1 बॉम्बर हटाए:आतंकी साजिश के शक के बाद सुरक्षा बढ़ाई थी, आरोपियों की जमानत पर ट्रम्प नाराज थे

अमेरिका ने ब्रिटेन के फेयरफोर्ड एयरबेस से अपने सभी B-1 बॉम्बर विमान वापस बुला लिए हैं। यहां करीब 12 B-1 बॉम्बर तैनात थे। पेंटागन ने रविवार को इसकी पुष्टि की। हाल ही में इस एयरबेस की सुरक्षा बढ़ाई गई थी। आतंकी साजिश के शक में यहां से पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया था। बाद में सभी आरोपियों को जमानत मिल गई थी। इस पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने नाराजगी जताई थी। एयरबेस के पास 3 वैन मिली थीं पिछले रविवार को इंग्लैंड में एयरबेस के पास व्हेलफोर्ड गांव में रहने वाले एक किसान ने सड़क पर तीन वैन खड़ी देखीं थी। उसके मुताबिक, कई नकाबपोश लोग वहां मौजूद थे और बाद में मौके से फरार हो गए। एक महिला ने पुलिस को 3 संदिग्ध वैन के बारे में में जानकारी दी थी। पुलिस को सूचना मिलने के बाद इलाके में सुरक्षा बढ़ाई गई और एयरबेस के आसपास 85 घरों को खाली कराया गया। तस्वीरों में इन वैन के अंदर बैरल जैसी चीजें दिखाई दीं थीं। इनमें से एक वैन पर एक फर्जी लोगो और फोन नंबर लगा था, जिससे वह किसी असली डीजल सप्लाई कंपनी की गाड़ी जैसी लग रही थी। जांच में वैन से कोई विस्फोटक नहीं मिला। नेशनल काउंटर टेररिज्म पुलिसिंग के प्रमुख लॉरेंस टेलर ने बताया था कि वहां से कुछ मात्रा में पेट्रोल बरामद हुआ था। पांच ब्रिटिश पुरुषों को गिरफ्तार किया था इस घटना के बाद लंदन के रहने वाले 23 से 25 साल की उम्र के पांच ब्रिटिश पुरुषों को गिरफ्तार किया गया था। बाद में सभी को जमानत पर छोड़ दिया गया। जांच के दौरान 1 अक्टूबर को लंदन से एक ब्रिटिश-ईरानी नागरिक को भी गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के मुताबिक, उसकी गिरफ्तारी फेयरफोर्ड एयरबेस के पास हुई संदिग्ध घटना की जांच के सिलसिले में की गई थी। बाद में उसे भी जमानत पर रिहा कर दिया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने आरोपियों को जमानत मिलने पर कहा था कि वह ऐसा नहीं करते। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मामले में किसी विदेशी ताकत (ईरान) के शामिल होने की आशंका जताई थी। ईरान ने बाद में इन आरोपों को खारिज कर दिया था। ईरान के खिलाफ ऑपरेशन के लिए इस्तेमाल हो रहा था फेयरफोर्ड ब्रिटेन ने मार्च में अमेरिका को RAF फेयरफोर्ड का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ खास रक्षात्मक अभियानों के लिए करने की अनुमति दी थी। इसके बाद से अमेरिकी बॉम्बर और दूसरे सैन्य विमान यहां से उड़ान भरते और लौटते देखे गए हैं। यह एयरबेस 1944 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान खोला गया था। इस एयरबेस का रनवे करीब 9,990 फीट यानी 3 किलोमीटर लंबा है। यूरोप के उन चुनिंदा एयरफील्ड में इसकी गिनती होती है, जहां भारी बॉम्बर विमानों को उतारा और उड़ाया जा सकता है। ——————————- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका ने ईरान के दो राजनयिकों को निकाला: आदेश मिलने के बाद भी न्यूयॉर्क में रुके रहे अमेरिका ने ईरान के दो राजनयिकों को देश से बाहर भेज दिया है। दोनों संयुक्त राष्ट्र (UN) महासभा में शामिल होने के लिए न्यूयॉर्क पहुंचे थे, लेकिन महासभा खत्म होने के बाद भी वहीं रुके रहे। पूरी खबर यहां पढ़ें…