London Trip: प्रधानमंत्री से पब्लिक तक मेट्रो, सिटी बस में सफर करते हैं

London Trip

London Trip 3: लंदन की यातायात व्यवस्था पर नजर डालते हैं। वहां मेट्रो और सिटी बसों की बात करते हैं। मेट्रो को वहां अंडरग्राउंड व ट्यूब कहते हैं। लंदन शहर की आबादी 91 लाख है तो उपनगरों को मिलाकर डेढ़ करोड़ लोग रहते हैं। वहां यातायात का प्रमुख साधन लोक परिवहन ही है। याने मेट्रो व सिटी बस। 543 मेट्रो में रोजाना 32 लाख लोग यात्रा करते हैं। इनमें कुल 4 हजार डिब्बे लगे होते हैं। ये शुक्रवार, शनिवार को 24 घंटे चलती हैं, जबकि अन्य दिनों में सुबह 5 से रात 12 बजे तक। दूसरी तरफ करीब 9 हजार डबल डेकर सिटी बस में 50 लाख लोग सफर करते हैं।

यहां की मेट्रो दुनिया की पहली सेवा है, जो 1863 में प्रारंभ हुई थी, जब और कहीं सोचा भी नहीं जा रहा होगा। 272 स्टेशन के साथ 402 किमी लंबे मार्ग पर यह यात्रा होती है। इसे मुंबई के साथ देखें तो यहां आबादी शहर की 2 करोड़ है और उपनगर सहित 2.35 करोड़ है। 2342 लोकल ट्रेन चलती हैं, जिनमें रोजाना 75 लाख लोग यात्रा करते हैं। वहीं 2600 सिटी बसों में 25 लाख लोग सफर करते हैं। ALSO READ: Trip To London : लंदन में न सड़क पर धरने-प्रदर्शन, न चक्का जाम

 

चूंकि इन दिनों इंदौर में मेट्रो का काम चल रहा है और आंशिक रूप से शुरू भी हुई है तो इस पर बात करते हैं। इंदौर की आबादी करीब 35 लाख है। मेट्रो को पूरी तरह से शुरू होने में न्यूनतम 5 वर्ष तो लगेंगे ही। तब तक लोक परिवहन के तौर पर सिटी बस,ऑटो रिक्शा, ई-रिक्शा, नगर सेवा पर निर्भरता है। इंदौर में 35 लाख की आबादी पर 16.33 लाख दो पहिया व 3.38 लाख चार पहिया वाहन पंजीकृत हैं। इनमें कुछ आसपास के इलाकों के भी होंगे। यहां 5.88 लाख आवास हैं। इसका मतलब प्रत्येक दूसरे घर में कार है और प्रत्येक घर में औसत तीन दो पहिया वाहन है। जबकि लंदन की 90 लाख आबादी 37 लाख घरों में रहती है। यहां 80 प्रतिशत लोग मेट्रो व सिटी बस में सफर करते हैं। ALSO READ: Trip To London: पाउंड को रुपए में गिनेंगे तो चाय भी नहीं पी सकेंगे

 

वहां 26.3 लाख कारें व 1.30 लाख दोपहिया वाहन पंजीकृत हैं। वहां अत्यधिक धनी व्यक्ति ही कार में आना-जाना करता है, क्योंकि शहर में पार्किंग बहुत मंहगी है। सेंट्रल लंदन में दिन भर के लिए 15 से 50 पाउंड (एक पाउंड 130 रुपए का है) तक चार्ज हैं, भले ही एक घंटे में वापस चले जाएं। मोहल्लों में भी बाहरी व्यक्ति को सड़क के दोनों ओर कार पार्क करने की अनुमति तो मिलती है, लेकिन उसके भी चार्ज हैं, जो 4.90 से 7.20 पाउंड (529 से 760 रुपए) तक है। रहवासी के लिए मासिक शुल्क है। याने वहां फ्री फोकट में कुछ नहीं है। मेट्रो में एक रूट के 6 पाउंड लगते हैं, लेकिन 16 पाउंड में दिन भर किसी भी रूट पर आ-जा सकते हैं।

 

इंदौर में लोक परिवहन की दयनीय स्थिति किसी से छुपी नहीं है, लेकिन यह भी उतना ही सच है कि हम लोक परिवहन का उपयोग करना भी नहीं चाहते। हमें ठेठ दुकान व घर तक अपने ही वाहन से जाना है। मेट्रो को तो अभी गिनें ही नहीं। तब लोक परिवहन में केवल 350 सिटी बसें हैं। 20 हजार ऑटो रिक्शा व 8 हजार ई-रिक्शा हैं। 20 लाख पंजीकृत कार-दोपहिया में से यदि 5 लाख भी इंदौर की सड़क पर चलते होंगे तो कल्पना कर लीजिए कि शहर में यातायात का किस कदर सत्यानाश होता रहेगा। वैसे, लोक परिवहन का उपयोग एक आदत होती है, जो हमारी अभी तो नहीं है। हम स्वयं के वाहन से ही आना-जाना अपनी शान समझते हैं, जबकि लंदन या यूरोप में प्रधानमंत्री, मंत्री, मेयर, अधिकारी, करोड़पति, सेलिब्रिटी भी मेट्रो में सफर कर लेते हैं। (क्रमश:)। लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं।  

ब्रिटेन में भीषण गर्मी:AC वाले दफ्तरों में स्टाफ की मौजूदगी 75% तक बढ़ी, AC ऑफिस की भी डिमांड बढ़ी

ब्रिटेन में साल की तीसरी भीषण गर्मी के बीच कर्मचारी घर की उमस में काम करने के बजाय एयर-कंडीशन्ड दफ्तरों का रुख कर रहे हैं। ब्रिटेन के कई हिस्सों में तापमान 40° डिग्री के पार चला गया है। पारंपरिक ब्रिटिश घर गर्मी को रोकने के लिए डिजाइन नहीं किए गए हैं, जिसके कारण लोग ‘वर्क फ्रॉम होम’ के बजाय एसी लगे दफ्तरों में जाकर काम करना पसंद कर रहे हैं। दफ्तरों में उपस्थिति कोविड के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। लंदन में कंपनियों को ऑफिस स्पेस दिलाने वाली ‘एडॉप्ट वर्कस्पेस’ ने भी कहा कि गर्म मौसम में उनके साथ जुड़े कई सर्विस प्रोवाइडर्स के यहां एसी ऑफिस की डिमांड दोहरे अंकों में बढ़ी है। गौरतलब है कि लंदन में प्रदूषण रोकने के लिए स्थानीय काउंसिलों ने घरों में एसी न लगाने और लगे हुए एसी हटाने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि एसी के बजाय पंखे चलाएं और खिड़की-दरवाजे खोलकर रखें। तीन साल में एसी वाले घरों की संख्या दोगुनी ब्रिटेन में एयर कंडीशनिंग (एसी) वाले घरों की संख्या तीन वर्षों में दोगुनी होकर 40 लाख तक पहुंच गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि घर से काम करने के चलन और बढ़ती भीषण गर्मी के कारण पोर्टेबल पंखों और एसी की मांग में सालाना 79% का उछाल आया है। इन 40 लाख घरों में से 19 लाख में स्थायी एसी इकाइयां लगी हैं। लंदन की फ्लेक्सिबल ऑफिस कंपनी ‘ऑफिस स्पेस इन टाउन’ के मुताबिक ‘रेड अलर्ट’ वाले गर्म दिनों में उनके दफ्तरों में मौजूदगी 75% बढ़ गई। कंपनी के अनुसार लोग घरों में गर्मी से परेशान हैं इसलिए ठंडी जगह चुन रहे हैं, ताकि आराम से काम कर सकें और उनकी कार्यक्षमता बनी रहे।

Trip To London: पाउंड को रुपए में गिनेंगे तो चाय भी नहीं पी सकेंगे

Trip To London

Trip To London: जब भी पर्यटन के लिए विदेश जाएं तो भारतीय रुपए में मूल्य आंकना मुसीबत खड़ी करेगा। वजह साफ है कि विश्व की अधिकांश लेन-देन की मुद्रा का मूल्य रुपए से कई गुना ज्यादा है। प्रमुख तौर पर डॉलर 95 रुपए का, पाउंड 130 रुपए का, यूरो 111 का, कुवैती दीनार सबसे महंगा 310 का और दुबई का दिरहम 26 रुपए का। इसलिए ब्रिटेन में चाय जब 450 रुपए की आती है तो हम लोग एक खाली गिलास मांगकर कट मार लेते हैं।

 

लंदन चूंकि विश्व के पहले पांच महंगे शहर में है तो आपका बजट तो गड़बड़ाएगा ही। सर्वाधिक महंगा सिंगापुर है। इसलिए पहले से मानसिक और आर्थिक तैयारी जरूरी है। वहां यदि आपका कोई परिजन है तो पहले चर्चा कर तय कर लें कि कौन-सी खाद्य सामग्री ले जाना है और कौन-सी वहां से खरीदना है। विशेष तौर पर दाल, सब्जी, राजमा, पोहे, उपमा, चाय का रेडी टू इट वाला सामान साथ लिया जा सकता है। यदि एकाध हफ्ता रुकना है तो 15 किलो की एक अटैची में खाने का सामान रखना समझदारी होगी। यदि बजट की चिंता नहीं है तो कोई बात नहीं। मैं आपको मोटे पर लगने वाली सामग्री की लंदन की दरें बता देता हूं, जो मई 2026 में वहां थीं।

ये मध्यम बजट की दरें हैं

रेस्टारेंट में एक व्यक्ति का खाना 2,500 का, दो का करीब 10 हजार का। याने 20 से 80 पाउंड तक। कैपेचिनो कॉफी 530 रुपए की, मसाला डोसा 1300 रुपए का, छोले-भटूरे 1500 रुपए के, पानी की बोतल 80 से 200 तक की, दूध 182 रुपए लीटर, ब्रेड 212 की, जो हमें 40 में मिल जाती है। चावल एक किलो 235 का, 12 अंडे 500 के। इसी तरह से मोबाइल का 10 जीबी डाटा 1755 रुपए का, जो यहां 400 में मिलता है। ब्रॉडबैंड 4,000 का जो यहां 775 में मिलता है। पेट्रोल-डीजल 150-170 रुपए लीटर है।

 

सब्जियों के भाव सुनकर दहशत में आ सकते हैं। खीरा 3 नग 130 रुपए के, गाजर करीब 600 रुपए किलो, पत्ता गोभी एक नग 90 रुपए की, नींबू 120 रुपए का। केले 155 के एक किलो (जिसमें 6-7 आएंगे), आलू 165 रुपए किलो, प्याज 150 रुपए किलो। भाव का यह अंतर रुपए और पाउंड के मूल्य में फर्क का नतीजा तो है ही, वहां महंगाई का स्तर भी ऊंचा है।

एक विश्लेषण के अनुसार यदि इंदौर व लंदन का तुलनात्मक अध्ययन करें तो लंदन की बजाय इंदौर में जीवन स्तर 79.6 प्रतिशत सस्ता है। मकान, दुकान, ऑफिस का किराया 94.3 प्रतिशत सस्ता है। इंदौर में रेस्टारेंट 84.4 प्रतिशत, किराना 71.3 प्रतिशत सस्ता है। हमारी क्रय शक्ति लंदन वालों की बजाय 50.6 प्रतिशत अधिक है। यदि इंदौर में रहने के लिए 1011 पाउंड (एक लाख 30 हजार 460 रुपए) चाहिए तो लंदन वाले को 6900 पाउंड (8 लाख 90 हजार 100 रुपए) चाहिए। स्वाभाविक रूप से प्रॉपर्टी भी मंहगी है। मध्यमवर्गीय इलाके में 2 बेडरूम का फ्लैट औसत सवा चार करोड़ रुपए से पौने सात करोड़ रुपए का आएगा। याने 4 लाख से साढ़े 6 लाख पाउंड में। इतनी रकम में इंदौर में शानदार 3-4 हजार वर्गफीट का बंगला मिल जाएगा। 

 

इसे एक दूसरे तरीके से भी समझ सकते हैं। लंदन में औसत प्रति व्यक्ति मासिक खर्च 1500 पाउंड याने 18 हजार पाउंड वार्षिक (23 लाख 32 हजार रुपए है) होता है। इंदौर में औसत खर्च 15 हजार से 25 हजार रुपए याने अधिकतम 3 लाख रुपए वार्षिक होता है। इस तरह लंदन हमसे करीब 8 गुना अधिक महंगा है। यह विश्लेषण ग्लोबल वेल्थ एंड लाइफस्टाइल का है, जो बताता है कि सिंगापुर व लंदन काफी महंगे शहर हैं। लंदन में जहां 4 व्यक्तियों के रुकने लायक जो अपार्टमेंट औसत 20-25 हजार रुपए रोज वाले मिलेंगे, वे एडिनबरा (स्कॉटलैंड) में 35 हजार रुपए रोज के रहेंगे। यहां अपेक्षाकृत सीमित सुविधा व अत्यधिक पर्यटकों की वजह से मंहगाई अधिक है, क्योंकि यह लंदन से प्राकृतिक रूप से अधिक खूबसूरत है।

अपार्टमेंट में रूम सर्विस या रोजाना सफाई जैसी कोई सुविधा नहीं होती। वहां हफ्ते में तय दिन सफाई के लिये कोई आएगा। अपार्टमेंट व कमरे के लॉक डिजिटल होते हैं, जो आपको बुकिंग होने पर बता दिए जाएंगे। एडिनबरा में तो मेन गेट के बाहर एक बॉक्स होता है, जिसका नंबर आपको दे देंगे। वह सही हुआ तो बॉक्स खोलकर कमरे की चाबी मिल जाएगी। यदि कुछ गड़बड़ हो तो पचते रहो, कोई मदद नहीं मिलेगी, क्योंकि कोई सुरक्षा गार्ड नहीं होता।

 

ब्रिटेन व यूरोप में भी ज्यादातर मकानों के दरवाजे-खिड़कियां कांच के होते हैं, जिनमें सरियों की ग्रिल नहीं होती। इसका आशय यही है कि वहां ग्रिल उखाड़कर या दरवाजे तोड़कर चोरियां नहीं होतीं। ऐसा भी नहीं है कि चोरियां नहीं होतीं। लंदन के व्यस्त इलाकों में विशेष तौर पर आई फोन की लूट काफी होती हैं। ये काम ई-बाइक गिरोह व नकाबपोश करते हैं, जो राह चलते उन लोगों के फोन उड़ा लेते हैं, जो बात करते हुए चलते हैं।

 

2024-25 में एक लाख 6 हजार आई फोन चोरी हुए थे। ये फोन चीन में बेच दिए जाते हैं। वहां इन्हें नए सिरे से असेंबल कर विश्व बाजार में फिर बेच देते हैं। यह करीब एक हजार करोड़ रुपए का चोरी के आई फोन का कारोबार है। अधिकांश फोन हांगकांग व चीन भेज दिए जाते हैं, जहां रि-सेट, रि-प्रोग्रामिंग कर फिर से बेच दिए हैं। (क्रमश:) -लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं। 

Trip To London : लंदन में न सड़क पर धरने-प्रदर्शन, न चक्का जाम

Trip To London

Trip To London: जानकर अजीब-सा लगता है ना? लेकिन यह हकीकत है। ऐसा नहीं है कि ऐसा मैंने नहीं देखा, बल्कि वास्तविकता में भी है। होते हैं, लेकिन पूर्व सूचना के आधार पर, निर्धारित जगह पर, निश्चित समय पर। चारों तरफ पुलिस घेरे रहेगी, हेलिकॉप्टर से निगरानी होगी, लेकिन हुड़दंगलीला न प्रदर्शनकारियों की चलेगी, न पुलिस की। यह और बात है कि फ्रांस में फुटबाल के दीवानों ने जो किया, उसने तो सारी हदें पार कर दी। लेकिन, ये अपवाद हैं। हां, कोई अकेला व्यक्ति भी सड़क के बीच के फुटपाथ जितने ऊंचे डिवाइडर पर तख्ती लेकर चुपचाप या कुछ बोलते हुए भी प्रदर्शन कर सकता है, जिसे पुलिस जवान अपने घेरे में रखेंगे, लेकिन करेंगे कुछ नहीं, जब तक कि वह कुछ गैर कानूनी हरकत न करे। कितना अटपटा लगता है ना?

 

लंदन की छोटी-छोटी लेकिन कुछ महत्वपूर्ण बातों पर चर्चा करते हैं। हमारे इंदौर की तरह एक दिन छोड़कर पानी नहीं आता,न पानी के लिये टैंकर या बोरिंग के भरोसे हैं। वहां पानी 24 घंटे आता है और दो-तीन मंजिल तक आसानी से पहुंच जाए, इतना प्रेशर रहता है। सिंक के या बाथरूम के नल से लेकर पानी पी सकते हैं। आप यदि आशंकित हो तो आरओ या वाटर फिल्टर लगा सकते हो। फूड या किसी भी सामान की डिलेवरी के लिए ज्यादातर साइकिल, बैटरी साइकिल या कोई बाइक का उपयोग करता है। ये चौराहों पर सिग्नल जंप करते, लेफ्ट टर्न से राइट जाते हुए कभी नहीं दिखेंगे। वहां एटीएम के काउंटर के अलग कैबिन नहीं, बल्कि किसी भी भवन की दीवार में फिट रहते हैं, जिन्हें तोड़कर कैश लूटने की संभावना न्यूनतम होती है।

 

सड़क, मोहल्ले, मेट्रो, सिटी बस, मॉल, रेस्टारेंट या बगीचे में कुत्ते नजर आएंगे, लेकिन वे स्ट्रीट डॉग नहीं होते, बल्कि पालतू होते हैं। मालिक हाथ या बैग में पोट्‌टी पॉलिथिन लेकर चलता है। चूंकि सभी फुटपाथ पर चलते हैं तो कहीं-कहीं टकराने जैसी नौबत आए तो तत्काल वे रुककर सामने वाले को संकेत दे देते हैं। किसी को जल्दी हो तो एक्सक्यूज मी कहकर रास्ता मांगेंगे। अरे भिया, जरा छेटी होना-ऐसा नहीं बोलते। यह शिष्टाचार जबरदस्त है। एक दिन में बीसियों बार ऐसा मौका आता है। इंदौर में तो हम फुटपाथ पर चलते नहीं और चलें तो टक्कर देकर निकल जाएं।

 

हर छोटी-बड़ी दुकान, मॉल, शॉपिंग सेंटर, रेस्टारेंट हो, ज्यादातर जगह नो कैश के बोर्ड टंगे होते हैं। हम भारतीयों की मुश्किल हो जाती है, जो रुपए के बदले पाउंड ले जाने की याद तो रखते हैं, लेकिन क्रेडिट, डेबिट कार्ड नहीं रखते। वे 90 प्रतिशत तक कैशलेस इकॉनॉमी को अपना चुके हैं। मेट्रो, सिटी बस, कार टैक्सी, शॉपिंग सभी कुछ कार्ड से। इसलिए भारत से कोई जा रहा हो तो ट्रेवल एजेंट आपको यहां पर एक कार्ड दे देगा, जो विदेश में कहीं भी भुगतान के काम आएगा। इसमें फायदा यह भी है कि वहां बैलेंस खत्म होने पर एजेंट को फोन करने पर वह यहां से रकम उसमें डिपॉजिट कर सकता है या आपका कोई रिश्तेदार भी जमा कर सकता है।

Trip To London

भारतीय वैसे तो कोशिश करते हैं कि खाने का कुछ सामान यहां से ले जाएं। जैसे थेपले, खाखरे, दूध के पराठे, नमकीन, अचार, जीरावन, रेडी टू इट वाले सब्जियों के पैकेट, रेडिमेड चाय-कॉफी के पाउच आदि। वहां कोई भी सामग्री इसलिए बजट के बाहर हो जाती है कि एक पाउंड 125 से 130 रुपए का होता है। तब आप दिमाग लगाते हैं कि पौने दो पाउंड की चाय 450 में और मसाला डोसा 1300 रुपए का आता है। तब आप अनावश्यक रूप से खाने-पीने से बचते हैं, जो कि गलत होता है। पानी की बोतल ही 80 रुपए की आती है। इस गणित से आप विदेश में कहीं घूम नहीं सकते। खासकर, यूरोप, ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा, रूस या किसी भी विकसित पश्चिमी देश में।

 

अब एक चलन और बढ रहा है कि यदि 4-6 लोग या परिवार जा रहा है तो वे होटल की बजाय अपार्टमेंट में रुकना पसंद करते हैं। वह एक, दो, तीन बेडरूम का मिल जाता है, जिसमें 6-7 व्यक्ति रुक सकते हैं। वहां खाना बनाने की सामग्री के अलावा सब मिलेगा। जैसे, गैस, इलेक्ट्रिक चूल्हा, इंडक्शन, हॉट वाटर पॉट, क्रॉकरी, रसोई बनाने के नॉन स्टीक कूकवेयर, फ्रीज, माइक्रोवेव ओवन, कॉफी मशीन, वॉशिंग मशीन वगैरह सब कुछ। बाथरूम के लिए पर्याप्त टॉवेल, नेपकीन, टॉयलेट पेपर, सोप भी। बस कहीं-कहीं एक बड़ी गड़बड़ होती है- न तो बेडरूम में अंदर से चिटकनी या लॉक होता है, न बाथरूम में कपड़े टांगने की खूंटी। और तो और टॉयलेट के साथ हैंड शॉवर भी नहीं होता, न ही मग होता है। टॉयलेट पेपर से ही सफाई करना होता है। ये अपार्टमेंट होटल से सस्ते पड़ते हैं और पसंद का खाना मिल जाता है। दाल, चावल, आटा, मसाले, सब्जियां वगैरह वहां आसानी से मिलता है।

 

आज जब भारत में पोस्टल सर्विस काफी कमजोर हो चुकी है, ब्रिटेन में रॉयल पोस्ट काफी लोकप्रिय और प्रामाणिक है। वहां बहुतायत से लाल रंग के लैटर बॉक्स भी मिलेंगे और रॉयल पोस्ट की वैन कूरियर सेवा के तहत घर पहुंच सेवा भी देती है। जिसके तहत आप भारत के निजी कूरियर वाले की तरह कोई भी छोटा-बड़ा सामान कहीं भी भेज सकते हैं। (क्रमश:) 
-लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं। 

 

Viral Video: ‘लंदन में फोन छिपाकर चलती हूं, भारत में बिना डर के’, विदेशी महिला के इस वीडियो ने इंटरनेट पर मचाया धमाल

सोशल मीडिया पर इन दिनों विदेशी महिला टूरिस्ट का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में विदेशी महिला भारत में अपने घूमने के एक्सपीरिएंस को शेयर करती हुई नजर आ रही है। उसने बताया कि भारत के कई राज्यों की यात्रा के दौरान उसे सार्वजनिक जगहों पर मोबाइल इस्तेमाल करने में कोई डर नहीं लगा। वहीं इस मामले में भारत उन्हें लंदन से भी ज्यादा सेफ लगा। सोशल मीडिया पर ये वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वहीं इस वीडियो पर लोगों ने अपना रिएक्शन भी दिया है।

डिजिटल क्रिएटर एम्मा ने बताया कि, केरल और मेघालय समेत भारत के कई राज्यों की यात्रा के दौरान उनका एक्सपीरिएंस काफी अच्छा रहा। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा, “ये बात विवादित लग सकती है, लेकिन सच कहूं तो मुझे लंदन की तुलना में भारत में अपना फोन इस्तेमाल करने को लेकर कम चिंता हुई।”

सड़कों पर रिकॉर्ड की वीडियो

वीडियो में एम्मा भारत की सड़कों पर आराम से चलते हुए अपने फोन से व्लॉग रिकॉर्ड करती नजर आती हैं। वह बिना किसी डर के खुलेआम मोबाइल का इस्तेमाल करती दिखाई देती हैं। वीडियो पर लिखा था, “मैं भारत में अपना फोन हाथ में लेकर चल रही हूं।” इसके बाद वीडियो का दूसरा हिस्सा लंदन का है, जहां वह अपना फोन पहले सावधानी से बैग में रखती हैं और फिर उसे सेफ रखने के लिए मजबूती से हाथ में पकड़ लेती हैं।

फोन की नहीं थी चिंता

उन्होंने लिखा, “केरल, वर्कला, गुवाहाटी और मेघालय जैसी जगहों की यात्रा करने के बाद मेरी सोच पूरी तरह बदल गई। भारत आने से पहले मैंने जो बातें सुनी थीं, मेरा अनुभव उनसे बिल्कुल अलग रहा। मैं आराम से वीडियो शूट कर रही थी, खुलेआम अपना फोन इस्तेमाल कर रही थी और एक पल के लिए भी मुझे यह महसूस नहीं हुआ कि मुझे हर समय अपना सामान संभालकर रखना है।”

लंदन में फोन चोरी का डर

उन्होंने अपने इस अनुभव की तुलना लंदन की रोजमर्रा की जिंदगी से करते हुए लिखा, “वहीं दूसरी ओर लंदन में हालात बिल्कुल अलग हैं। वहां मुझे हमेशा फोन चोरी होने की चिंता रहती है। सच कहूं तो ऐसा लगता है जैसे मेरा फोन मेरे हाथ से चिपका हुआ हो, क्योंकि मैं उसे एक पल के लिए भी ढीला नहीं छोड़ती।” उन्होंने आगे लिखा, “हर जगह के अपने-अपने जोखिम होते हैं और यह सिर्फ मेरा निजी अनुभव है। मेरा यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि कहीं भी बिना सावधानी के घूमना चाहिए। लेकिन इतना जरूर कहना चाहूंगी कि इंटरनेट पर जो बातें दिखाई देती हैं, वे हमेशा पूरी सच्चाई नहीं बतातीं।”

लोगों ने पोस्ट पर किए कमेंट

उनकी पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही। वहीं इस तुलना पर लोग अपनी-अपनी राय रखी और अपने यात्रा के एक्सपीरिएंश भी शेयर किए। कई यूजर्स ने कहा कि उन्हें भारत के कई शहरों में खुलेआम फोन इस्तेमाल करने में सुरक्षित महसूस हुआ, वहीं कुछ लोगों का मानना था कि सुरक्षा हर शहर और इलाके के हिसाब से अलग हो सकती है। एक यूजर ने लिखा, “बिल्कुल सही… यूके में तो अब घड़ियां भी सुरक्षित नहीं हैं।” दूसरे यूजर ने कहा, “ये वीडियो शेयर करने के लिए धन्यवाद। आजकल चोरी के मामलों में यूरोप, भारत के मुकाबले ज्यादा असुरक्षित लगता है।”

एक दूसरे यूजर ने कहा, “भारत में ज्यादा समस्या स्कैम की है, सड़क पर फोन छीनने जैसी घटनाएं उतनी आम नहीं हैं, क्योंकि यहां ज्यादातर लोगों के पास पहले से अच्छे स्मार्टफोन हैं।” वहीं, एक अन्य यूजर ने लिखा, “ऐसा बिल्कुल नहीं है। मेरे एक दोस्त के भाई का फोन गुरुग्राम में सड़क पर चलते समय बात करते-बात करते छीन लिया गया था। हम भी सड़क पर चलते समय अपना फोन या हैंडबैग हमेशा सुरक्षित रखते हैं। मुझे लगता है कि यह पोस्ट सिर्फ ध्यान खींचने के लिए बनाई गई है।”

View this post on Instagram

A post shared by Emma UGC | BANGKOK