IAS से इस्तीफा देकर पॉलिटिक्स करने का ऐलान करने वाली दिव्या मित्तल कितना पढ़ी-लिखी हैं? इनकी पूरी प्रोफाइल जानिए

पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा के बाद अब राजनीति की राह चुनने का ऐलान किया है। करीब 13 साल तक IAS के तौर पर काम करने के बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश से अपनी राजनीतिक शुरुआत करने की बात कही है। सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में उन्होंने लोगों से जुड़ने और उनके मुद्दों को उठाने की बात कही। दिव्या मित्तल के राजनीति में आने की खबर के साथ उनकी पढ़ाई और अब तक के सफर को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। आखिर IAS बनने से पहले उन्होंने क्या पढ़ाई की और उनका करियर कैसा रहा? आइए जानते हैं।

IIT दिल्ली से शुरू हुई पढ़ाई

दिव्या मित्तल ने IIT दिल्ली से Engineering Physics में BTech किया। उनके LinkedIn प्रोफाइल के मुताबिक, उन्होंने 2001 से 2005 के बीच यह पढ़ाई की। ग्रेजुएशन में उनका CGPA 9.07/10 था और वह अपने विभाग में दूसरे स्थान पर रही थीं। इसके बाद उन्होंने IIM बेंगलुरु से MBA किया। 2005 से 2007 के बीच की गई इस पढ़ाई में भी उनका प्रदर्शन अच्छा रहा। उपलब्ध प्रोफाइल जानकारी के अनुसार, वह अपनी MBA बैच के टॉप 5 फीसदी छात्रों में शामिल थीं।

पढ़ाई के बाद लंदन में नौकरी

MBA पूरा करने के बाद दिव्या मित्तल ने विदेश में कॉर्पोरेट करियर शुरू किया। उन्होंने लंदन में JP Morgan में Associate के तौर पर काम किया। अप्रैल 2007 से जुलाई 2008 तक उन्होंने वहां नौकरी की। इसके बाद उन्होंने कॉर्पोरेट करियर छोड़कर भारत लौटने और UPSC की तैयारी करने का फैसला किया।

UPSC में सफलता और IAS का सफर

दिव्या मित्तल ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास की। रिपोर्टों के मुताबिक, अपने पहले प्रयास में वह IPS के लिए चुनी गईं और बाद के प्रयास में ऑल इंडिया रैंक 68 हासिल कर IAS बनीं। वह 2013 बैच की उत्तर प्रदेश कैडर की अधिकारी रहीं। IAS के तौर पर उन्होंने उत्तर प्रदेश में कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं। वह संत कबीर नगर, मिर्जापुर और देवरिया की जिलाधिकारी रह चुकी हैं। इसके अलावा उन्होंने NITI Aayog और उत्तर प्रदेश सरकार में भी अलग-अलग पदों पर काम किया।मिर्जापुर में उनके कार्यकाल के दौरान एक पहाड़ी गांव तक पाइपलाइन के जरिए पानी पहुंचाने की पहल भी चर्चा में रही।

MIT से भी की पढ़ाई

दिव्या मित्तल ने नौकरी और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच अपनी पढ़ाई जारी रखी। उन्होंने 2019 से 2020 के बीच MITx से Data, Economics and Development Policy में MicroMasters किया। यानी उनकी शैक्षणिक यात्रा इंजीनियरिंग से शुरू होकर मैनेजमेंट, डेटा और डेवलपमेंट पॉलिसी तक पहुंची।

IAS के बाद अब राजनीति में एंट्री

अगस्त 2026 में दिव्या मित्तल ने करीब 13 साल की IAS सेवा के बाद इस्तीफा दे दिया। अब उन्होंने साफ कर दिया है कि उनकी अगली पारी राजनीति में होगी।

उन्होंने कहा है कि वह उत्तर प्रदेश से राजनीतिक शुरुआत करेंगी और किसी राजनीतिक पार्टी के साथ नहीं जाएंगी। अपने वीडियो संदेश में उन्होंने शिक्षक, डॉक्टर, किसान, मजदूर, वकील और छात्रों से जुड़ने की अपील की है।

IIT दिल्ली की पढ़ाई, IIM बेंगलुरु का MBA, लंदन की नौकरी, UPSC में सफलता और करीब 13 साल की प्रशासनिक सेवा के बाद दिव्या मित्तल अब अपने करियर का एक नया अध्याय शुरू करने जा रही हैं।

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15 सितंबर से IAS सेवा से बाहर हुईं दिव्या मित्तल, इस्तीफा मंजूर होते ही किया ये पोस्ट

उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की चर्चित आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा से विदाई ले ली है। निजी कारणों, पारिवारिक जिम्मेदारियों और जिंदगी में कुछ नए लक्ष्य तय करने का हवाला देते हुए उन्होंने 30 अगस्त को इस्तीफे की घोषणा की थी। अब केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने उनके इस्तीफे को मंजूरी दे दी है। 15 सितंबर से उनका इस्तीफा प्रभावी हो गया।

दिव्या मित्तल का यह फैसला इसलिए खास है, क्योंकि IAS बनने के लिए उन्होंने पहले भी एक सुरक्षित और शानदार करियर को पीछे छोड़ा था। उनकी कहानी सिर्फ एक अफसर के इस्तीफे की नहीं, बल्कि बार-बार अपनी जिंदगी की दिशा खुद तय करने वाली महिला की कहानी है।

लंदन में शानदार नौकरी, फिर भी मन में थी एक कसक

IIT दिल्ली और IIM बेंगलुरु से पढ़ाई करने के बाद दिव्या मित्तल ने लंदन में अच्छी नौकरी हासिल की। विदेश में बेहतर करियर, आकर्षक सैलरी और सुविधाओं के बावजूद उन्हें लगा कि जिंदगी में कुछ कमी है। उन्होंने नौकरी छोड़कर भारत लौटने और UPSC की तैयारी करने का फैसला किया। पहले प्रयास में IPS और दूसरे प्रयास में 2013 में IAS बनकर उन्होंने साबित कर दिया कि बड़ा जोखिम उठाने का साहस उनमें शुरू से रहा है।

उनके पति गगनदीप सिंह ने भी 2022 में सरकारी नौकरी छोड़कर अपनी कंपनी शुरू की थी। यानी परिवार में पारंपरिक सुरक्षित करियर से हटकर अपनी राह चुनने का सिलसिला नया नहीं है।

सख्त तेवर और काम की अलग पहचान

IAS बनने के बाद दिव्या मित्तल की पहचान तेजतर्रार, बेबाक और सख्त अधिकारी के रूप में बनी। मिर्जापुर, बस्ती और देवरिया समेत कई जिलों में उन्होंने प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालीं। मिर्जापुर में उनके काम को खास तौर पर याद किया जाता है। ग्रामीण इलाकों में पानी की समस्या को लेकर उन्होंने गंभीरता से काम किया। जिन क्षेत्रों में आजादी के 75 साल बाद भी पानी पहुंचना बड़ी चुनौती थी, वहां उनकी पहल से लोगों को राहत मिली। यही वजह है कि उनके इस्तीफे की खबर के बाद कई ग्रामीण भावुक दिखाई दिए और उनके कार्यकाल को याद किया।

एक सोशल मीडिया पोस्ट ने बढ़ाई चर्चाएं

इस्तीफा मंजूर होने के बाद दिव्या मित्तल ने सोशल मीडिया पर जयशंकर प्रसाद की पंक्ति लिखी “प्रशस्त पुण्य पंथ है, बढ़े चलो, बढ़े चलो।” इस एक पंक्ति ने उनके अगले कदम को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी। क्या वह सामाजिक क्षेत्र में जाएंगी, कोई नया काम शुरू करेंगी या राजनीति का रुख करेंगी? फिलहाल उन्होंने अपने भविष्य की योजना सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन संदेश साफ है एक सफर खत्म हुआ है और शायद किसी नई मंजिल की ओर कदम बढ़ चुके हैं।

इस्तीफे के साथ राजनीति भी गरमाई

दिव्या मित्तल के इस्तीफे पर राजनीतिक बयानबाजी भी हुई। समाजवादी पार्टी की ओर से आरोप लगाया गया कि प्रदेश में ईमानदार अधिकारियों को काम करने की पर्याप्त स्वतंत्रता नहीं मिल रही। कांग्रेस नेता अजय राय ने राज्यपाल को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की और संकेत दिया कि अगर दिव्या मित्तल चुनाव लड़ना चाहें तो कांग्रेस उनके नाम पर विचार कर सकती है।

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Divya Mittal: कौन हैं दिव्या मित्तल जिन्होंने 13 साल करके छोड़ दी IAS की नौकरी और दिया इस्तीफा?

उत्तर प्रदेश की 2013 बैच की आईएएस दिव्या मित्तल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (आईएएस) के पद पर उन्होंने 13 सालों तक काम किया। वहीं सोशल मीडिया पर एक लंबे-चौड़े पोस्ट के जरिए उन्होंने इस बात की जानकारी दी है। अपने पोस्ट में दिव्या मित्तल ने लिखा, “आज मैंने 13 साल की इस यादगार यात्रा को अपनी इच्छा से खत्म करते हुए IAS से इस्तीफा दे दिया है।” वहीं इस पोस्ट के बाद से सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई कि कौन है दिव्या मित्तल। दिव्या ने आईएएस ऑफिसर बनने के लिए लंदन से वापस भारत आई थी। आइए जानते हैं कौन हैं कौन है दिव्या मित्तल

कौन है दिव्या मित्तल

दिव्या मित्तल ने अपनी शुरुआती पढ़ाई दिल्ली से की है। वहीं 12वीं के बाद IIT दिल्ली में 2001 से 2005 के बीच बीटेक की डिग्री पूरी की। इसके बाद उन्होंने CAT परीक्षा पास की और IIM बेंगलुरु में MBA में प्रवेश लिया। 2005-07 के दौरान पढ़ाई पूरी होने के बाद दिव्या ने लंदन में नौकरी मिल गई। लेकिन लंदन में कुछ समय काम करने के बाद भारत लौटने का फैसला किया। इसके बाद उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहले प्रयास में UPSC पास कर IPS सेवा हासिल की और इसके अगले प्रयास में ऑल इंडिया रैंक 68 हासिल करते हुए IAS के लिए चयनित हुईं।

देश के लिए कुछ करना था

सोशल मीडिया पर किए इमोशनल पोस्ट में दिव्या ने कहा, “आज मैंने 13 साल की इस यादगार यात्रा को अपनी इच्छा से खत्म करते हुए IAS से इस्तीफा दे दिया है। एक साधारण परिवार में पली-बढ़ी और एक अच्छे व सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात मेहनत करके IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ाई की और इसके बाद लंदन में नौकरी भी मिल गई। लेकिन सब कुछ हासिल करने के बाद भी मन में कुछ कमी महसूस होती थी। अपने देश से दूर रहना हमेशा खलता था।”

‘मेरी पढ़ाई, मेरा आत्मविश्वास और दुनिया में कहीं भी अपने दम पर आगे बढ़ने की ताकत, सब इसी देश की देन थी। मुझे लगा कि इस मिट्टी का कर्ज चुकाना चाहिए। मैं चाहती थी कि जिस भारत का सपना मैंने देखा है, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। इसी सोच के साथ मैं वापस भारत आई और IAS अधिकारी बनने का मौका मिला।”

हर जगह से काफी कुछ सीखने को मिला

पोस्ट में आगे कहा, “इस दौरान मुझे बहुत कुछ करने और सीखने का मौका मिला। देवरिया ने मुझे सिखाया कि सही बात के साथ खड़ा होना कोई विकल्प नहीं, बल्कि हमारी जिम्मेदारी है। मीरजापुर ने सिखाया कि ‘असंभव’ कोई सच नहीं होता, यह सिर्फ हमारी सोच हो सकती है। मां विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर यह समझ आया कि असली ताकत किसी पद से नहीं, बल्कि उनकी कृपा और लोगों के भरोसे से मिलती है। मेरी सबसे बड़ी सीख यह रही कि अपने लिए देखे गए सपने तो पूरे हो चुके थे, अब बारी अपने लोगों के सपनों को पूरा करने की थी। इस जीवन में सबसे ज्यादा खुशी तब मिली, जब किसी परिवार को पहली बार जमीन का अधिकार मिला, किसी दिव्यांग व्यक्ति को सम्मान के साथ जीने का मौका मिला या किसी किसान के खेत तक पानी पहुंचा। लोगों के संघर्ष में उनके साथ चलते हुए मैंने जाना कि हर सरकारी फाइल के पीछे एक इंसान होता है और उसकी गरिमा का सम्मान करना ही असली न्याय है।”

मूर्ख थी जो सोचती थी

पोस्ट में आगे कहा, “मूर्ख थी जो सोचा था कि कुछ देने आयी हूं। सच यह है कि सबसे ज्यादा मैंने ही पाया, और वो कर्ज और भी बढ़ता गया। लोगों ने मेरी खुशी में मुझसे भी ज्यादा खुश हुए। जब मैं खुद थकी या परेशान होती थी, तब भी उन्होंने मुझ पर पूरा भरोसा बनाए रखा। इसी भरोसे ने मुझे आगे बढ़ते रहने की ताकत दी। मुझे इतना प्यार, सम्मान और अपनापन मिला कि मेरी जिंदगी पूरी तरह भर गई। इस सफर में मेरे साथ काम करने वाले साथियों, अधिकारियों और कर्मचारियों का भी बड़ा योगदान रहा, जिन्होंने हर कदम पर मेरा साथ दिया और मिलकर काम किया।”

 

नम आंखों से दे रही इस्तीफा

दिव्या ने पोस्ट के आखिर में कहा, “आज दिल में आभार है और आंखें नम हैं। बस एक तस्वीर बार-बार आंखों के सामने आ रही है। लहुरिया दह की पहाड़ी की वह बुजुर्ग मां, जिसने अपने गांव में पहली बार पानी पहुंचते देखा था। उन्होंने कुछ नहीं कहा, बस कांपते हाथों से मेरे सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया। आज मेरा पद जरूर छूट गया है, लेकिन उनका वह प्यार भरा स्पर्श मैं जिंदगी भर नहीं भूल पाऊंगी। और इस देश की मिट्टी ने जो सपना मुझे दिया है, वह भी हमेशा मेरे साथ रहेगा।”