Income Tax Return: खुद रिटर्न फाइल करें या टैक्स एक्सपर्ट की मदद लें? जानिए क्या हैं एक्सपर्ट्स के जवाब

Income Tax Return: इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) फाइल करने की अंतिम तारीख नजदीक आ गई है। कई टैक्सपेयर्स इस उलझन में हैं कि खुद रिटर्न फाइल करें या टैक्स एक्सपर्ट की मदद लें। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने अपने टैक्स फाइलिंग पोर्टल को काफी टैक्स फ्रेंडली बना दिया है। इस पर टैक्सपेयर्स को प्री-फिल्ड डेटा यानी पहले से भरे गए डेटा दिखते हैं। एआई पावर्ड टूल्स भी उपलब्ध हैं। सवाल है कि आपको खुद रिटर्न फाइल करना चाहिए या टैक्स एक्सपर्ट के पास जाना चाहिए?

इनकम के एक से ज्यादा स्रोत होने पर खुद फाइल करने में आ सकती है मुश्किल

टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर किसी टैक्सपेयर के इनकम के कई स्रोत हैं और कैपिटल गेंस जैसी चीजें हैं तो खुद रिटर्न फाइल करने में दिक्कत आ सकती है। अगर कोई सैलरीड टैक्सपेयर है और उसकी सिर्फ एक इनकम है तो वह खुद रिटर्न फाइल कर सकता है। डेरिवेटिव ट्रेडिंग, क्रिप्टोकरेंसी से प्रॉफिट, फॉरेन एसेट या फॉरेन इनकम वाले टैक्सपेयर्स को खुद रिटर्न फाइल करने में दिक्कत आ सकती है।

अब इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करना सिर्फ एक औपचारिकता नहीं है

एसबीएचएस एंड एसोसिएट्स के पार्टनर हिमांग सिंगला ने कहा, “अब यह धारणा टूट रही है कि इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करना सिर्फ एक औपचारिकता है।” उन्होंने कहा कि आज टैक्सपेयर्स कई तरह के एसेट्स में इनवेस्ट करते हैं। इनमें शेयर, म्यूचुअल फंड्स, REITs, InvITs, बिजनेस ट्रस्ट्स, फॉरेन एसेट्स और वर्चुअल डिजिटल एसेट्स शामिल हैं।

अलग-अलग एसेट के लिए इनकम टैक्स के अलग-अलग नियम हैं

इनकम टैक्स के नियमों में अलग-अलग एसेट क्लास के लिए अलग-अलग नियम हैं। सिंगला ने कहा कि अगर इनकम टैक्स के पोर्टल पर रिटर्न फाइल कर दिया जाता है और उसमें कोई गलती होती है या पूरा डिसक्लोजर नहीं होता है या गलत आईटीआर फॉर्म का इस्तेमाल किया गया होता है तो टैक्सपेयर्स को नोटिस आ सकता है। इसका मतलब है कि टैक्स चुकाने के बावजूद छोटी सी गलती बड़ी मुसीबत पैदा कर सकती है।

एआईएस और फॉर्म 26एएस को टैक्सपेयर्स को खुद चेक कर लेना जरूरी है

King Stubb & Kasiva में पार्टनर आदित्य भट्टाचार्य ने कहा कि इनकम के कई स्रोत, बिजनेस इनकम, फॉरेन एसेट्स या कॉम्प्लेक्स डिडक्शंस वाले टैक्सपेयर्स को रिटर्न फाइल करने के लिए टैक्स एक्सपर्ट की मदद लेनी चाहिए। हालांकि, एक्सपर्ट भी रिटर्न फाइल करने से पहले टैक्सपेयर को आईटीआर को रिव्यू करने को कहते हैं। इसके अलावा फॉर्म 26एएस, एआईएस और TIS जैसे डॉक्युमेंट्स के डेटा को चेक करने की जिम्मेदारी टैक्सपेयर की होती है।

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रिटर्न फाइल करने के लिए अंतिम तारीख का नहीं करें इंतजार 

अब रिटर्न फाइल करने के लिए एक हफ्ते से कम का समय बचा है। अगर आपने अब तक फाइल नहीं किया है तो आपको जल्द रिटर्न फाइल कर देना चाहिए। आपको अगर खुद फाइल करने में दिक्कत आ रही है तो आप टैक्स एक्सपर्ट की मदद ले सकते हैं। इससे आपको बाद में दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा।

खेत बेचने पर कितना लगता है टैक्स? ITR में कहां और कैसे दिखाएं यह कमाई, जानिए टैक्स विभाग के जरूरी नियम

Tax on Agricultural Land Sale: भारत में कृषि भूमि यानी खेत बेचने को लेकर आम तौर पर यही माना जाता है कि इस पर कोई टैक्स नहीं लगता है। लेकिन टैक्स नियमों के मुताबिक यह पूरी तरह सच नहीं है। कृषि भूमि बेचने पर टैक्स लगेगा या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि वह जमीन ‘ग्रामीण’ इलाके में आती है या ‘शहरी’ इलाके में।

कई बार टैक्स न लगने के बावजूद, ITR में इस कमाई की जानकारी न देना या गलत जगह दिखाना आपको मुश्किल में डाल सकता है और इनकम टैक्स विभाग का नोटिस आ सकता है। आइए आपको बताते हैं कि कृषि भूमि की बिक्री पर टैक्स का क्या नियम है और इसे रिटर्न में कैसे दर्ज करें।

ग्रामीण कृषि भूमि: यहां नहीं लगता कोई कैपिटल गेन्स टैक्स

इनकम टैक्स एक्ट की धारा 2(14) के तहत, ‘ग्रामीण कृषि भूमि’ को कैपिटल एसेट यानी पूंजीगत संपत्ति नहीं माना जाता है।

टैक्स छूट: चूंकि यह कैपिटल एसेट नहीं है, इसलिए इसे बेचने पर होने वाले मुनाफे पर कोई ‘कैपिटल गेन्स टैक्स’ नहीं लगता है।

ITR में कहां दिखाएं: चूंकि यह कमाई पूरी तरह टैक्स-फ्री है, इसलिए इसे आईटीआर के Schedule EI यानी टैक्स-फ्री आमदनी वाले कॉलम में दिखाना चाहिए। कई लोग इसे गलती से Schedule CG में दिखा देते हैं, जिससे सिस्टम ऑटोमैटिक टैक्स कैलकुलेट कर लेता है और बेवजह परेशानी खड़ी होती है।

शहरी कृषि भूमि: देना होगा टैक्स, लेकिन यहां मिलेगी राहत

अगर आपकी कृषि भूमि ‘शहरी’ दायरे में आती है, तो इसकी बिक्री से होने वाला मुनाफा पूरी तरह टैक्स के दायरे में आएगा। हालांकि, टैक्सपेयर्स को राहत देने के लिए इनकम टैक्स एक्ट की धारा 54B बनाई गई है। इसके तहत अगर आप जमीन बेचने से मिले पैसों से कोई दूसरी कृषि भूमि खरीद लेते हैं, तो आप टैक्स छूट का दावा कर सकते हैं।

कैसे तय होता है कि जमीन ‘ग्रामीण’ है या ‘शहरी’?

कोई भी खेती की जमीन सिर्फ इसलिए ग्रामीण नहीं हो जाती क्योंकि वहां खेती हो रही है। टैक्स नियमों के अनुसार, नजदीकी नगर पालिका की आबादी और वहां से हवाई दूरी के आधार पर इसका फैसला होता है:

स्थानीय निकाय की आबादीनगर पालिका सीमा से जरूरी  न्यूनतम दूरी जमीन का वर्गीकरण
10,000 से 1 लाख के बीच2 किलोमीटर से ज्यादा दूर होना जरूरीग्रामीण (Tax-Free)
1 लाख से 10 लाख के बीच6 किलोमीटर से ज्यादा दूर होना जरूरीग्रामीण (Tax-Free)
10 लाख से अधिक 8 किलोमीटर से ज्यादा दूर होना जरूरीग्रामीण (Tax-Free)

अगर जमीन इन तय सीमाओं के भीतर आती है, तो उसे ‘शहरी कृषि भूमि’ माना जाएगा और उस पर टैक्स लगेगा।

इनकम टैक्स नोटिस से बचना है, तो पास रखें ये 4 दस्तावेज

टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर भविष्य में इनकम टैक्स विभाग आपसे इस टैक्स छूट को लेकर स्पष्टीकरण मांगता है, तो आपके पास ये दस्तावेज होने चाहिए:

तहसीलदार का सर्टिफिकेट: स्थानीय राजस्व प्राधिकारी से मिला एक आधिकारिक प्रमाण पत्र, जो नजदीकी नगर पालिका से जमीन की सटीक हवाई दूरी और वहां की आबादी की पुष्टि करता हो।

राज्य के राजस्व रिकॉर्ड: जमीन के आधिकारिक दस्तावेज जैसे 7/12 एक्सट्रैक्ट, RTC, या जमाबंदी, जो यह साबित करें कि जमीन आधिकारिक तौर पर कृषि भूमि ही है।

खेती करने का सबूत: बीज, खाद के बिल, सिंचाई के रिकॉर्ड या मंडी की रसीदें, जिससे यह साबित हो सके कि जमीन पर वास्तव में खेती की जा रही थी।

बैंक ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड: रजिस्टर्ड सेल डीड और बैंक स्टेटमेंट, जो यह साबित करें कि पूरा लेनदेन वैध तरीके से हुआ है और कोई अवैध नकद लेनदेन नहीं हुआ है।

अक्सर होने वाली गलतियां जो लाती हैं टैक्स नोटिस

पूरी तरह छिपा लेना: कई लोग सोचते हैं कि टैक्स नहीं लगना है तो आईटीआर में क्यों बताएं? यह सबसे बड़ी गलती है। सब-रजिस्ट्रार ऑफिस जमीन की रजिस्ट्री की जानकारी टैक्स विभाग को देता है, जो आपके एआईएस (AIS) में दिखती है। अगर आप इसे ITR में नहीं दिखाएंगे, तो डेटा मिसमैच का नोटिस आ सकता है।

खेती न होने पर भी छूट का दावा: अगर कोई जमीन कृषि भूमि के रूप में दर्ज है लेकिन सालों से वहां कोई खेती नहीं हुई है, तो विभाग आपकी छूट को खारिज कर सकता है। इसलिए कृषि आय या ऑपरेशन्स का सबूत रखना बेहद जरूरी है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

ITR Filing 2026: रिटर्न फाइल करने के बाद रिवाइज कर रहे हजारों टैक्सपेयर, जानिए क्या है इसकी वजह

ITR Filing 2026: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने के बाद उसे रिवाइज्ड करने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है। इसकी वजह इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की बढ़ती डेटा निगरानी है। विभाग के पास अब पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा वित्तीय जानकारी पहुंच रही है। ऐसे में कई लोगों को रिटर्न भरने के बाद पता चलता है कि उनकी कुछ कमाई या लेनदेन रिकॉर्ड में बाद में जुड़ गए हैं। इसके बाद उन्हें रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करनी पड़ती है।

क्यों बढ़ रहे हैं रिवाइज्ड रिटर्न?

इसकी सबसे बड़ी वजह एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) है। AIS एक ऐसा दस्तावेज है, जिसमें आपकी कमाई और वित्तीय लेनदेन से जुड़ी जानकारी एक जगह दिखाई देती है। इसमें सैलरी, ब्याज, डिविडेंड, म्यूचुअल फंड और शेयरों के सौदे, प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री, विदेशी धन भेजने और बड़े खर्च जैसी जानकारी शामिल होती है।

समस्या यह है कि AIS एक बार में पूरी तरह तैयार नहीं होता। बैंक, कंपनियां और दूसरी संस्थाएं समय-समय पर डेटा अपडेट करती रहती हैं। ऐसे में जो लोग जल्दी ITR भर देते हैं, उन्हें बाद में AIS में नई एंट्री दिखाई दे सकती है। इसके बाद रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करना जरूरी हो जाता है।

आज इनकम टैक्स डिपार्टमेंट पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा बड़े पैमाने डेटा जुटा रहा है। ऐसे में रिटर्न भरते समय छूटी हुई जानकारी बाद में सामने आ जाती है।

टैक्स रिकॉर्ड्स बदलते रहते हैं

AIS और टैक्सपेयर इन्फॉर्मेशन समरी (TIS) अब स्थिर दस्तावेज नहीं हैं। इनमें रिटर्न दाखिल होने के बाद भी बदलाव हो सकता है। यानी आपने जिस दिन ITR भरी, उसके बाद भी आपके रिकॉर्ड में नई जानकारी जुड़ सकती है। यही वजह है कि कई बार रिटर्न सही भरने के बावजूद बाद में बदलाव की जरूरत पड़ जाती है।

इसके अलावा इनकम टैक्स डिपार्टमेंट अब डेटा एनालिटिक्स और फेसलेस स्क्रूटनी का ज्यादा इस्तेमाल कर रहा है। सिस्टम अपने आप आंकड़ों का मिलान करता है। अगर कोई अंतर दिखाई देता है, तो उसे आसानी से पकड़ा जा सकता है।

पहले छोटी-मोटी गड़बड़ियां नजरअंदाज हो जाती थीं। अब ऐसा नहीं है। ऐसे में कई टैक्सपेयर नोटिस आने का इंतजार करने के बजाय खुद ही रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करना बेहतर समझते हैं।

AY 2026-27 के लिए डेडलाइन?

  • असेसमेंट ईयर 2026-27 के रिटर्न अभी भी Income Tax Act, 1961 के तहत दाखिल किए जाएंगे। यह बात तब भी लागू रहेगी, जब 1 अप्रैल 2026 से नया Income Tax Act, 2025 लागू हो चुका होगा।
  • मौजूदा नियमों के अनुसार Section 139(5) के तहत रिवाइज्ड रिटर्न 31 दिसंबर 2026 तक दाखिल की जा सकती है। हालांकि असेसमेंट पूरा होने के बाद यह सुविधा नहीं मिलेगी।
  • फाइनेंस बिल 2026 में इस डेडलाइन को बढ़ाकर 31 मार्च 2027 करने का प्रस्ताव रखा गया है। लेकिन दिसंबर 2026 के बाद रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने पर शुल्क देना पड़ सकता है।
  • अगर यह समय सीमा भी निकल जाती है, तो Section 139(8A) के तहत Updated Return दाखिल करने का विकल्प मिलता है। यह सुविधा 48 महीने तक उपलब्ध रहती है। हालांकि इसमें अतिरिक्त टैक्स देना पड़ सकता है।

पहली बार में सही ITR भरना क्यों जरूरी?

बार-बार रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने से बेहतर है कि पहली बार में ही सही रिटर्न भरी जाए। ITR दाखिल करने से पहले AIS, TIS और Form 26AS का मिलान अपने रिकॉर्ड से जरूर करना चाहिए। इसमें Form 16, बैंक स्टेटमेंट, ब्रोकर स्टेटमेंट, ब्याज के सर्टिफिकेट और कैपिटल गेन स्टेटमेंट जैसे दस्तावेज शामिल हैं।

अगर AIS में कोई गलत जानकारी दिखाई देती है, तो ‘Report Incorrect Information’ सुविधा का इस्तेमाल किया जा सकता है।

किन लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए?

जिन लोगों की कमाई के कई स्रोत हैं, उन्हें खास सावधानी बरतनी चाहिए। शेयर बाजार में निवेश करने वाले, म्यूचुअल फंड में पैसा लगाने वाले, विदेशी लेनदेन करने वाले या कैपिटल गेन कमाने वाले लोगों को ITR भरने से पहले सभी दस्तावेजों का मिलान जरूर कर लेना चाहिए।

थोड़ी-सी सावधानी बाद में रिवाइज्ड रिटर्न भरने की जरूरत को कम कर सकती है। साथ ही इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की जांच या नोटिस का जोखिम भी घट सकता है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।