8th Pay Commission Minimum Pay Calculation: 8वें वेतन आयोग फिलहाल देशभर में बैठके कर के विभिन्न कर्मचारी संगठनों से उनकी मांगों का ब्योरा तैयार कर रहा है। इसी बीच केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक बड़ा अपडेट है है। आयोग के सामने दशकों से चले आ रहे उस नियम को बदलने की जोरदार मांग उठी है, जिसके आधार पर सरकारी कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी तय की जाती है।
अब तक वेतन आयोग न्यूनतम सैलरी का हिसाब लगाते समय एक परिवार में केवल 3 यूनिट (कर्मचारी, पति/पत्नी और 2 बच्चे) को ही जोड़ता था। लेकिन कर्मचारी यूनियनों और पेंशनभोगी संगठनों ने 8वें वेतन आयोग के समक्ष मांग रखी है कि इस परिवार यूनिट में बुजुर्ग आश्रित माता-पिता को भी शामिल किया जाए।
अगर इस फॉर्मूले को मंजूरी मिलती है, तो कर्मचारियों की बेसिक पे और पेंशन में भारी-भरकम बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। आइए आसान भाषा में समझते हैं इस नए गणित को।
3 यूनिट नहीं, अब 5.2 यूनिट पर तय हो सैलरी!
करीब 10 लाख पेंशनभोगियों का प्रतिनिधित्व करने वाले भारत पेंशनर्स समाज (BPS) और कर्मचारियों की शीर्ष संस्था नेशनल काउंसिल ऑफ जेसीएम (NCJCM-Staff Side) ने 8वें वेतन आयोग को सौंपे ज्ञापन में एक समान नया फॉर्मूला पेश किया है:
कर्मचारी (स्वयं): 1.0 यूनिट
पति या पत्नी: 1.0 यूनिट
दो बच्चे: 0.8 + 0.8 = 1.6 यूनिट
दो आश्रित माता-पिता: 0.8 + 0.8 = 1.6 यूनिट
इस हिसाब से कुल परिवार की यूनिट 5.2 (राउंड ऑफ में 5 यूनिट) बनती है। यूनियनों का तर्क है कि भारत में एक कर्मचारी न केवल अपने बच्चों का बल्कि अपने बुजुर्ग माता-पिता का भी मुख्य कमाऊ सहारा होता है। इसके अलावा ‘माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिनियम’ और ‘सोशल सिक्योरिटी कोड 2020’ भी कानूनी रूप से माता-पिता की जिम्मेदारी बच्चों पर डालता है।
सैलरी का नया गणित: ₹19,900 से सीधे ₹69,000 न्यूनतम बेसिक पे?
अगर 5 यूनिट के इस नए फॉर्मूले को 8वां वेतन आयोग स्वीकार कर लेता है, तो न्यूनतम सैलरी की गणना पूरी तरह बदल जाएगी।
NCJCM और BPS द्वारा दिए गए आंकड़े के अनुसार:
फूड बास्केट: 5 यूनिट के परिवार के लिए भोजन (चावल, दाल, सब्जी, दूध, अंडा, मांस आदि) का मासिक खर्च करीब ₹24,443 बैठता है।
अन्य खर्च: इसमें 10% मसाले/पेय पदार्थ, 7.5% मकान किराया, 20% ईंधन व बिजली, 25% स्किल डेवलपमेंट, 25% त्योहार व शादी-ब्याह और 5% टेक्नोलॉजी खर्च जोड़ने पर न्यूनतम सैलरी ₹68,947 (राउंड ऑफ ₹69,000) बनती है।
फिटमेंट फैक्टर: ₹69,000 की न्यूनतम बेसिक पे के आधार पर 3.833 का फिटमेंट फैक्टर निकलकर आता है, जिसे कर्मचारियों और पेंशनभोगियों दोनों पर समान रूप से लागू करने की मांग की गई है।
(नोट: NCJCM के एक अन्य अनुमान के अनुसार, 2025-26 की महंगाई दरों के आधार पर 5 यूनिट का न्यूनतम वेतन ₹80,444 तक भी जा सकता है)।
पिछले वेतन आयोगों में कैसे बदली मिनिमम बेसिक सैलरी?
NCJCM द्वारा 8वें वेतन आयोग को सौंपे गए आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले आयोगों में न्यूनतम वेतन किस तरह बढ़ा:

पेंशनभोगियों और कर्मचारियों पर क्या होगा इसका बड़ा असर?
रेलवे सीनियर सिटीजन्स वेलफेयर सोसाइटी (RSCWS) ने भी तर्क दिया है कि वर्तमान में भत्तों पर ज्यादा और बेसिक पे पर कम ध्यान दिया जाता है। चूंकि पेंशन और ग्रेच्युटी पूरी तरह से बेसिक पे पर निर्भर करती हैं, इसलिए बेसिक पे कम होने से रिटायर्ड कर्मचारियों को नुकसान होता है।
अगर 8वां वेतन आयोग 5 यूनिट का फॉर्मूला मान लेता है, तो बेसिक सैलरी की शुरुआती सीमा काफी ऊपर चली जाएगी। इसका सीधा फायदा यह होगा कि नए कर्मचारियों की सैलरी के साथ-साथ पुराने पेंशनभोगियों की पेंशन में भी कई गुना का इजाफा होगा।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, परिवार की परिभाषा में माता-पिता को शामिल करने की यह मांग केवल आर्थिक नहीं, बल्कि व्यावहारिक रूप से बेहद जायज लगती है। अब सबकी निगाहें 8वें वेतन आयोग के अंतिम फैसले पर टिकी हैं कि क्या वह इस 5.2 यूनिट वाले फॉर्मूले को स्वीकार करता है या पुराने 3-यूनिट ढर्रे पर ही कायम रहता है। यह फैसला आने वाले एक दशक तक देश के लाखों कर्मचारियों और पेंशनरों का भविष्य तय करेगा।

