8th Pay Commission पर 1 अक्टूबर को ये है 5 बड़े अपडेट्स! जानें आपकी सैलरी और पेंशन पर क्या होगा असर

8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग से जुड़ी गतिविधियों ने रफ्तार पकड़ ली है। 1 अक्टूबर 2026 तक आयोग के कामकाज, बैठकों और कर्मचारियों की मांगों को लेकर 5 सबसे बड़े अपडेट्स सामने आए हैं, जिन्हें हर सरकारी कर्मचारी को जानना जरूरी है।

1. अक्टूबर में होंगी आयोग की 2 बड़ी बैठकें (बेंगलुरु और मुंबई दौरा)

8वें वेतन आयोग की टीम देश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर कर्मचारियों और पेंशनर्स यूनियनों से सीधी बात कर रही है। आयोग 7 और 8 अक्टूबर को बेंगलुरु में और 22-23 अक्टूबर को मुंबई में बड़ी बैठकें करने जा रहा है। इन बैठकों में रेलवे, डिफेंस और सिविल कर्मचारियों के संगठन अपनी मांगें सीधे आयोग के सामने रखेंगे।

2. मीटिंग में शामिल होने की डेडलाइन (10 अक्टूबर)

अगर कोई मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठन या पेंशनर्स एसोसिएशन मुंबई की बैठक में हिस्सा लेकर अपना सुझाव देना चाहता है, तो आधिकारिक प्रक्रिया के तहत आवेदन करने की अंतिम तारीख 10 अक्टूबर 2026 रखी गई है। आयोग इन मेमोरेंडम और सुझावों के आधार पर ही अपनी सिफारिशें तैयार करेगा।

3. दशहरा पर डीए (DA Hike) का तोहफा संभव

त्योहारों के इस सीजन में कर्मचारियों के जुलाई से दिसंबर 2026 तक के महंगाई भत्ते (DA) में बढ़ोतरी का ऐलान किसी भी वक्त हो सकता है। माना जा रहा है कि सरकार डीए में 3% की बढ़ोतरी कर सकती है, जिससे कुल महंगाई भत्ता बढ़कर 63% हो जाएगा।

4. फिटमेंट फैक्टर और न्यूनतम सैलरी पर तगड़ी मांग

स्टाफ साइड (NC-JCM) और विभिन्न कर्मचारी संघों ने आयोग के सामने न्यूनतम बेसिक पे को ₹69,000 करने और फिटमेंट फैक्टर को 3.833 करने का प्रस्ताव रखा है। इसके साथ ही सालाना इंक्रीमेंट को 3% से बढ़ाकर 6% करने की भी मांग रखी गई है। हालांकि, आयोग ने अभी सैलरी या फिटमेंट फैक्टर पर कोई आधिकारिक फैसला नहीं सुनाया है।

5. रिपोर्ट सबमिशन और लागू होने की समयसीमा

3 नवंबर 2025 को गठित हुए 8वें वेतन आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने (मई 2027 तक) का समय मिला है। आयोग की रिपोर्ट 2027 के मध्य में आएगी और इसे 1 जनवरी 2026 से ही प्रभावी माना जाएगा जिसका एरियर कर्मचारियों को मिलेगा।

8th Pay Commission: 3.61 से 4.00 तक फिटमेंट फैक्टर की मांग! जानिए कितनी बढ़ेगी बेसिक सैलरी और पेंशन?

8th Pay Commission Fitment Facto: 8वें केंद्रीय वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच सुगबुगाहट तेज हो गई है। 7वें वेतन आयोग में जहां फिटमेंट फैक्टर 2.57 तय किया गया था जिससे न्यूनतम बेसिक पे ₹7,000 से बढ़कर ₹18,000 हुई थी। अब 8वें वेतन आयोग के लिए कर्मचारी यूनियनों ने 3.61 से लेकर 4.00 तक के फिटमेंट फैक्टर की मांग रखी है।

कागज पर फिटमेंट फैक्टर के ये आंकड़े छोटे लग सकते हैं, लेकिन असलियत में इनसे हर महीने कर्मचारियों की सैलरी में हजारों रुपये का अंतर आने वाला है।

फिटमेंट फैक्टर क्या है और यह क्यों है अहम?

फिटमेंट फैक्टर वह मल्टीप्लायर होता है, जिसे कर्मचारी की मौजूदा बेसिक पे से गुणा करके नए वेतन आयोग के तहत नई सैलरी तय की जाती है। यह न केवल महंगाई भत्ते (DA) के असर को समाहित करता है, बल्कि कर्मचारियों की वास्तविक आय में वृद्धि भी सुनिश्चित करता है। पेंशनभोगियों की बेसिक पेंशन तय करने में भी इसी फैक्टर का इस्तेमाल होता है।

यूनियनों की प्रमुख मांगें: किसकी कितनी है सिफारिश?

अलग-अलग कर्मचारी और पेंशनभोगी संगठनों ने 8वें वेतन आयोग के सामने अपनी-अपनी मांगें और कैलकुलेशन रखी हैं:

BPMS (फिटमेंट फैक्टर 4.00 – न्यूनतम पे ₹72,000): भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ (BPMS) ने सबसे ज्यादा 4.00 फिटमेंट फैक्टर की मांग की है। इसके तहत न्यूनतम बेसिक पे ₹72,000 तय करने का प्रस्ताव है। BPMS का कहना है कि इसमें 1.58 घटक केवल महंगाई भत्ते (DA) के असर को बेअसर करने के लिए है, जबकि बाकी हिस्सा राष्ट्रीय प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि के आधार पर है।

NCJCM स्टाफ साइड और BPS (फिटमेंट फैक्टर 3.833 – न्यूनतम पे ₹69,000): नेशनल काउंसिल JCM (स्टाफ साइड) और भारत पेंशनर्स समाज (BPS) ने 3.833 फिटमेंट फैक्टर का प्रस्ताव दिया है।

इसके तहत न्यूनतम सैलरी ₹69,000 होगी। NCJCM ने 5 सदस्यों के परिवार के खाने, कपड़े, मकान, शिक्षा, शादी और तकनीक जैसे 15वें ILC मानदंडों के आधार पर यह गणना की है।

MSA (फिटमेंट फैक्टर 3.61 – न्यूनतम पे ₹65,000): मिनिस्ट्रियल स्टाफ एसोसिएशन (MSA) ने 3.61 का फिटमेंट फैक्टर प्रस्तावित किया है, जिससे न्यूनतम पे ₹65,000 (लेवल-1) हो जाएगी।

सैलरी मैट्रिक्स: लेवल के हिसाब से कितना होगा फायदा?

अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर के कारण पे-मैट्रिक्स में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है:

लेवल 1: MSA (3.61) के तहत ₹64,980, NCJCM (3.833) के तहत ₹69,000 और BPMS (4.00) के तहत यह ₹72,000 होगी।

लेवल 6: NCJCM के प्रस्ताव के अनुसार बेसिक पे बढ़कर ₹1,35,700 हो जाएगी।

लेवल 9 व 10 (मर्ज्ड): NCJCM के तहत यह ₹2,15,100 तक पहुंच जाएगी।

क्या सरकार उठा पाएगी इसका वित्तीय बोझ?

NCJCM का तर्क है कि 2014-15 के बाद से देश की जीडीपी में 165.23% और कुल कर राजस्व में 205.41% की भारी वृद्धि हुई है। इसलिए सरकार के पास वेतन में इस बढ़ोतरी के वित्तीय प्रभाव को आसानी से संभालने की पूरी क्षमता है। रेलवे सीनियर सिटीजन्स वेलफेयर सोसाइटी (RSCWS) ने भी जोर दिया है कि बेसिक पे में पर्याप्त बढ़ोतरी न होने से रिटायर्ड कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा प्रभावित होती है।

50 लाख से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों और लाखों पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग द्वारा चुना जाने वाला फिटमेंट फैक्टर बेहद निर्णायक होगा। यह न केवल हर महीने मिलने वाली इन-हैंड सैलरी तय करेगा, बल्कि पेंशन, ग्रेच्युटी की सीमा और कम्यूटेशन अमाउंट पर भी लंबे समय तक असर डालेगा।