8th Pay Commission से पेंशनर्स की हो सकती है बल्ले-बल्ले! ₹45,000 न्यूनतम पेंशन और OPS बहाली की उठी मांग

8th Pay Commission OPS vs NPS Demand: देश में जबसे 8वें वेतन आयोग का गठन हुआ है तभी से सरकारी कर्मचारियों में सैलरी और पेंशन को लेकर चर्चा तेज है। कोई फिटमेंट फैक्टर की बात करता है तो कोई भत्तों की। वही रिटायर हो चुके कर्मचारियों के बीच पुरानी पेंशन योजना और नेशनल पेंशन सिस्टम को लेकर बहस होती है।

जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित 8वें वेतन आयोग का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। 3 नवंबर 2025 को गठित इस आयोग को 10 महीने से अधिक का समय हो चुका है। देश के अलग-अलग शहरों में कर्मचारी यूनियनों और एसोसिएशनों के साथ लगातार बैठकें की जा रही हैं। सितंबर में पुडुचेरी और चंडीगढ़ में हुई बैठकों के बाद अब 7 और 8 अक्टूबर को बेंगलुरु में केंद्रीय कर्मचारियों की मांगें सुनी जाएंगी।

आयोग को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का वक्त दिया गया है, जिसके अनुसार रिपोर्ट मई-जून 2027 तक सरकार को सौंपी जा सकती है। बैठकों में फिटमेंट फैक्टर, सैलरी रिवीजन और भत्तों के अलावा सबसे गर्मा-गर्मी वाला विषय पुरानी पेंशन योजना (OPS) बनाम नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) का बना हुआ है। साल 2004 के बाद सेवा में आए केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनभोगी संगठन अब ‘गारंटीड पेंशन’ की मांग पर अड़ गए हैं।

क्यों केंद्रीय कर्मचारियों के लिए सबसे बड़ा मुद्दा बना ‘OPS vs NPS’?

वर्ष 2004 के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों के लिए शुरू की गई अंशदायी पेंशन व्यवस्था से देश भर के कर्मचारी संगठन असंतुष्ट हैं। 8वें वेतन आयोग को सौंपे गए ज्ञापनों में कर्मचारी यूनियनों ने साफ कहा है कि मौजूदा बाजार-आधारित रिटर्न वाली योजनाएं उनके और उनके परिवार के भविष्य को आर्थिक सुरक्षा देने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही हैं।

कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें अनिश्चितता के माहौल से निकालकर पुरानी ‘परिभाषित लाभ’ वाली व्यवस्था के तहत लाया जाए।

प्रमुख कर्मचारी संगठनों की क्या हैं 4 बड़ी मांगें?

अलग-अलग केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनभोगी यूनियनों ने 8वें वेतन आयोग के समक्ष अपनी विस्तृत मांगें रखी हैं:

A. मिनिस्टीरियल स्टाफ एसोसिएशन (सर्वे ऑफ इंडिया): सर्वे ऑफ इंडिया के कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) की पूरी तरह बहाली की मांग की है। उनकी मांग है कि सेवानिवृत्ति के समय कर्मचारी के अंतिम प्राप्त मूल वेतन का कम से कम 50% हिस्सा गारंटीड पेंशन के रूप में तय किया जाए।

B. फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशन्स (FNPO): डाक विभाग के इस प्रमुख संगठन ने तर्क दिया है कि NPS और हाल ही में घोषित यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) जैसी योजनाएं कर्मचारियों की आशंकाओं को दूर नहीं कर पा रही हैं। इसलिए NPS और UPS के दायरे में आने वाले सभी कर्मचारियों को वापस पुरानी परिभाषित-लाभ पेंशन व्यवस्था (OPS) में शामिल किया जाए।

C. रेलवे सीनियर सिटीजन्स वेलफेयर सोसाइटी (RSCWS): रेलवे पेंशनभोगियों के इस संगठन ने पूर्व कर्मचारियों के वित्तीय और स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है। संघ ने सरकार से एक गारंटीड न्यूनतम पेंशन का प्रावधान करने और पेंशन सुरक्षा को और मजबूत करने का आग्रह किया है।

D. भारत पेंशनर्स समाज (BPS): पेंशनभोगियों के इस सबसे बड़े मंच ने आयोग के सामने आंकड़ों के साथ बड़ी मांग रखी है। BPS ने न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर ₹45,000 प्रति माह करने, अंतिम वेतन का 67% पेंशन देने और फैमिली पेंशन को अंतिम वेतन का 50% करने की सिफारिश की है।

आगे क्या होगा? जानिए कब लागू हो सकती हैं सिफारिशें

वेतन आयोग देश भर के अलग-अलग जोनों में जाकर सभी हितधारकों की बातें सुन रहा है। इन बैठकों में फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाने, न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी करने और पेंशन बराबरी जैसे गंभीर मुद्दों पर भी ज्ञापन प्राप्त हुए हैं।

आयोग अपनी रिपोर्ट मई-जून 2027 तक केंद्र सरकार को सौंपेगा। इसके बाद सरकार द्वारा सिफारिशें मंजूर होने पर इसे लागू किया जाएगा। अब सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि क्या केंद्र सरकार मौजूदा NPS/UPS जैसे अंशदायी ढांचे को ही मजबूत करेगी या फिर कर्मचारी संगठनों के भारी दबाव में पेंशन संरचना में कोई क्रांतिकारी बदलाव लेकर आएगी।

8वें वेतन आयोग के तहत पेंशन सुधारों को लेकर जिस तरह से केंद्रीय कर्मचारी एकजुट होकर ‘गारंटीड पेंशन’ और अंतिम वेतन के 50% के फिक्स फॉर्मूले की मांग कर रहे हैं, उससे सरकार पर नैतिक दबाव बढ़ गया है। 2027 में आने वाली फाइनल रिपोर्ट यह तय करेगी कि 2004 के बाद भर्ती हुए लाखों कर्मचारियों का रिटायरमेंट सुरक्षित हो पाएगा या नहीं।

8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग की जयपुर में अहम बैठक! सैलरी और पेंशन पर हो सकता है ये बड़ा फैसला

8th Pay Commission Jaipur Meeting: 8वें केंद्रीय वेतन आयोग का काम अब तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, भत्तों और पेंशन में संशोधन की प्रक्रिया के तहत आयोग देश भर के विभिन्न संघों और संगठनों के साथ लगातार परामर्श कर रहा है।

इसी कड़ी में 8वां वेतन आयोग 31 अगस्त और 1 सितंबर को राजस्थान के जयपुर में हितधारकों और कर्मचारी यूनियनों के साथ आधिकारिक बैठकें करने वाला है। सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाला यह आयोग कर्मचारियों की समस्याओं, मांगों और कामकाजी परिस्थितियों का जायजा ले रहा है।

8वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने से देश के 50 लाख से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों और 65 लाख से अधिक पेंशनभोगियों को सीधा लाभ मिलेगा।

सितंबर और अक्टूबर में किन-किन शहरों का दौरा करेगा आयोग?

मार्च से ही आयोग विभिन्न राज्यों का दौरा कर आंकड़े और सुझाव जुटा रहा है। आगामी दिनों का शेड्यूल इस प्रकार है:

  • चेन्नई (तमिलनाडु): 7 से 8 सितंबर
  • पुडुचेरी: 9 सितंबर
  • चंडीगढ़: 16 से 18 सितंबर
  • बेंगलुरु (कर्नाटक): 7 से 8 अक्टूबर (अपॉइंटमेंट के लिए 18 सितंबर तक आवेदन खुला है।)
  • मुंबई (सेंट्रल रेलवे): रेलवे कर्मचारियों की कामकाजी स्थितियों का प्रत्यक्ष अनुभव लेने के लिए आयोग मुंबई में सेंट्रल रेलवे का दौरा भी करेगा।

जयपुर बैठक और राज्य दौरों का क्या है मुख्य एजेंडा?

हालांकि आयोग ने कोई आधिकारिक लिस्ट जारी नहीं की है, लेकिन कर्मचारी यूनियनों द्वारा सौंपे गए ज्ञापनों के आधार पर बैठकों में मुख्य रूप से इन मुद्दों पर चर्चा हो रही है:

फिटमेंट फैक्टर और बेसिक पे: बेसिक सैलरी में बढ़ोतरी और नए फिटमेंट फैक्टर का निर्धारण।

महंगाई के हिसाब से वेतन संशोधन: महंगाई दर और जीवन यापन की लागत के अनुकूल सैलरी स्ट्रक्चर तैयार करना।

भत्तों का पुनर्गठन: हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और ट्रैवल अलाउंस (TA) में सुधार।

पेंशन सुधार: सेवानिवृत्ति के बाद वित्तीय सुरक्षा को बेहतर बनाना।

कर्मचारी कल्याण और कार्य परिस्थितियां: कर्मचारियों के मनोबल और कार्यस्थल की सुविधाओं में सुधार।

कब तक लागू होंगी 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें?

आयोग के गठन 3 नवंबर 2025 से 18 महीने के भीतर सिफारिशें सौंपनी हैं। इसका मतलब है कि आयोग फरवरी से मई 2027 के बीच अपनी आधिकारिक रिपोर्ट सरकार को सौंप सकता है।

पिछले वेतन आयोगों के रुझान को देखें तो सिफारिशें आने के बाद उनके अंतिम क्रियान्वयन में 2 से 3 साल का समय लग जाता है। यानी 2027 में होने वाली घोषणाओं का पूर्ण लाभ कर्मचारियों को 2029 या 2030 तक मिल सकता है।