El Nino effect: अल नीनो बढ़ा सकता है भारत का फूड बिल! चावल, अरहर दाल और खाद्य तेलों ने दिए महंगाई के संकेत

El Nino effect: भारत में खाद्य कीमतों को लेकर आने वाले महीनों में दबाव बढ़ने की आशंका है। देश की रोजमर्रा की खपत वाली प्रमुख खाद्य वस्तुओं में चावल, अरहर दाल और खाद्य तेलों की कीमतों में अलग-अलग रफ्तार से बदलाव देखने को मिल रहा है। ऐसे समय में भारत El Nino की बढ़ती निगरानी के दौर में प्रवेश कर रहा है, जिससे अगर मौसम प्रतिकूल रहता है तो फसल उत्पादन और कमोडिटी सप्लाई पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, अभी ऐसा कोई सबूत नहीं है कि हाल में खाद्य कीमतों में आई तेजी सीधे El Nino की वजह से है। फिलहाल कीमतों की दिशा घरेलू उत्पादन, सरकारी नीतियों, भंडार और वैश्विक कमोडिटी बाजार जैसे कई कारकों पर निर्भर है।

सरकार ने El Nino को बताया जोखिम का कारण

केंद्र सरकार ने अपनी अगस्त 2026 की मासिक आर्थिक रिपोर्ट में El Nino को निगरानी योग्य कारक बताया था। रिपोर्ट में कहा गया था कि लंबे समय तक El Nino की स्थिति रहने पर मानसून कमजोर या असमान हो सकता है। इसका असर फसल उत्पादन और खाद्य कीमतों पर पड़ सकता है। हालांकि, वित्त मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि El Nino और कृषि उत्पादन के बीच सीधा और एक-से-एक संबंध नहीं माना जा सकता।

सिंचाई, सरकारी खरीद, खाद्यान्न भंडार और जरूरत पड़ने पर आयात जैसे उपाय मौसम के झटकों का असर कम कर सकते हैं। भारत में किसी मौसम संबंधी घटना का असर केवल बारिश पर निर्भर नहीं करता। फसल की स्थिति, जलाशयों में पानी, सरकारी स्टॉक, खरीद व्यवस्था और आयात की क्षमता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

चावल और दालों की कीमतों में भारी तेजी

सरकार के मूल्य निगरानी आंकड़ों के मुताबिक, चावल की कीमत पिछले साल की तुलना में बढ़ी है। 29 सितंबर को थोक चावल की कीमत करीब ₹4,185 प्रति क्विंटल थी, जो एक साल पहले के मुकाबले लगभग 8.5 फीसदी अधिक है। खुदरा बाजार में भी चावल की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दालों में भी अलग-अलग किस्मों की कीमतों में अंतर देखने को मिल रहा है।

अरहर या तूर दाल सितंबर के अंत में ₹125 प्रति किलो से अधिक पर बिक रही थी। अब इसकी कीमत करीब 8 फीसदी सालाना बढ़ी थी। उड़द की कीमत भी ऊपर रही। जबकि मूंग, मसूर और चना में साल-दर-साल अपेक्षाकृत कम बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, इन मौजूदा कीमतों को सीधे El Nino का असर मानना सही नहीं होगा। असली जोखिम आने वाले महीनों में सामने आ सकता है, खासकर अगर बारिश का पैटर्न या फसल उत्पादन प्रभावित होता है।

खाद्य तेलों की कीमतें बनीं चुनौती

खाद्य तेल भारत के लिए अलग तरह की चुनौती हैं, क्योंकि देश कच्चे पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल के आयात पर काफी निर्भर है। वैश्विक कीमतों के असर को कम करने के लिए सरकार ने हाल में आयात शुल्क में कटौती की है। 24 सितंबर से कच्चे सोयाबीन और कच्चे पाम ऑयल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी 10% से घटाकर 5% की गई।

  • कच्चे सूरजमुखी तेल पर ड्यूटी शून्य कर दी गई।
  • रिफाइंड सोयाबीन और पाम ऑयल पर ड्यूटी 32.5% से घटाकर 27.5% की गई।
  • रिफाइंड सूरजमुखी तेल पर ड्यूटी 22.5% कर दी गई।
  • सरकार के मुताबिक, कम आयात शुल्क से खाद्य तेलों की लैंडेड कॉस्ट घट सकती है, जिससे खुदरा कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। साथ ही घरेलू रिफाइनिंग को भी समर्थन मिल सकता है।
  • वित्त मंत्रालय की अगस्त रिपोर्ट में वैश्विक वेजिटेबल ऑयल कीमतों को महंगाई के संभावित जोखिमों में शामिल किया गया था। इसका एक कारण यह भी है कि पाम, सोयाबीन और रेपसीड जैसे तेलों का इस्तेमाल तेजी से बायोफ्यूल उत्पादन में हो रहा है।

El Nino से क्या बदलेगा?

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 के अंत तक El Nino के बहुत मजबूत स्थिति में पहुंचने का अनुमान जताया गया है। El Nino प्रशांत क्षेत्र से काफी दूर तक बारिश और तापमान के पैटर्न को प्रभावित कर सकता है। हालांकि इसका असर अलग-अलग क्षेत्रों में अलग होता है।

भारत के लिए सबसे अहम सवाल यह नहीं है कि El Nino कितना मजबूत होगा। बल्कि यह है कि यह भारतीय मानसून, फसल चक्र और मौजूदा खाद्य-सप्लाई व्यवस्था के साथ किस तरह इंटरेक्ट करता है। WMO ने जलवायु जोखिमों से निपटने के लिए पहले से मिलने वाले मौसम पूर्वानुमानों के महत्व पर भी जोर दिया है। संगठन की ताजा चेतावनी में गर्मी, बाढ़ और सूखे के साथ खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले व्यापक असर का उल्लेख किया गया है।

सरकार के पास कई विकल्प मौजूद

भारत के पास खाद्य आपूर्ति को संभालने के लिए कई नीतिगत विकल्प मौजूद हैं। सरकारी खरीद और खाद्यान्न भंडार प्रमुख वस्तुओं की कमी के दौरान कीमतों को कंट्रोल करने में मदद कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर आयात के जरिए घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाई जा सकती है। खाद्य तेलों पर हालिया आयात शुल्क कटौती इसका एक उदाहरण है कि सरकार व्यापार नीति के जरिए घरेलू कीमतों को प्रभावित कर सकती है।

RBI की भी रहेगी नजर

खाद्य कीमतों का असर देश की व्यापक महंगाई पर भी पड़ सकता है। Reuters की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत की खपत वाली वस्तुओं की टोकरी में महंगाई का दबाव व्यापक हुआ है और करीब आधी वस्तुओं की कीमतें सालाना आधार पर 4% या उससे अधिक बढ़ रही हैं, जबकि मार्च में यह हिस्सा करीब एक-तिहाई था। इसी अवधि में अप्रैल-जून तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था में करीब 8% की वृद्धि दर्ज की गई। ऐसे में RBI के लिए अहम सवाल यह होगा कि क्या मौसम से जुड़े बदलाव केवल कुछ खाद्य वस्तुओं तक सीमित रहते हैं या वे लगातार खाद्य महंगाई में बदलकर व्यापक कीमतों तक पहुंचते हैं।

अभी की तस्वीर क्या है?

फिलहाल भारत में खाद्य कीमतों की तस्वीर एकसमान तेजी वाली नहीं है। चावल और कुछ दालों की कीमतें पिछले साल की तुलना में ज्यादा हैं। जबकि खाद्य तेल वैश्विक सप्लाई और कीमतों से प्रभावित हो सकते हैं। दूसरी ओर, सरकार ने खाद्य तेलों के आयात शुल्क में कटौती जैसे कदम उठाए हैं। अब आने वाले कुछ महीने यह तय करने में अहम होंगे कि El Nino सिर्फ मौसम से जुड़ा जोखिम बना रहता है या भारत के खाद्य बिल और महंगाई पर इसका स्पष्ट असर दिखाई देने लगता है।

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Windfall Gains Tax: सरकार ने डीजल और ATF के एक्सपोर्ट पर और घटाया विंडफॉल गेन्स टैक्स, पेट्रोल पर ड्यूटी जस की जस

सरकार ने 1 अक्टूबर से शुरू 15 दिनों की अवधि के लिए डीजल और ATF (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) के एक्सपोर्ट पर विंडफॉल गेन्स टैक्स घटा दिया है। पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर इस टैक्स में कोई बदलाव नहीं किया गया है। एक सरकारी आदेश के मुताबिक, डीजल के एक्सपोर्ट पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) और रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस की दर अब 16 रुपये प्रति लीटर है, जो पहले 20 रुपये प्रति लीटर थी। ATF के एक्सपोर्ट पर ड्यूटी को 15 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 10.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर ड्यूटी को 0.5 रुपये प्रति लीटर पर बरकरार रखा गया है।

वित्त मंत्रालय ने एक नोटिफिकेशन में कहा कि ड्यूटी में ये बदलाव 1 अक्टूबर से लागू होंगे। यह भी कहा कि घरेलू खपत के लिए जारी पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा ड्यूटी दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

इससे पहले सरकार ने 16 सितंबर से शुरू 15 दिनों की अवधि के लिए भी पेट्रोल, डीजल और ATF (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) के एक्सपोर्ट पर विंडफॉल गेन्स टैक्स घटाया था। उस वक्त डीजल के एक्सपोर्ट पर SAED और रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस की दर 20 रुपये प्रति लीटर, ATF के एक्सपोर्ट पर ड्यूटी 15 रुपये प्रति लीटर और पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर ड्यूटी 0.5 रुपये प्रति लीटर की गई थी। 1 सितंबर को सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर विंडफॉल गेन्स टैक्स बढ़ाया था, जबकि ATF पर घटाया था।

क्या है विंडफॉल गेन्स टैक्स

अगर ऑयल कंपनियां 75 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा पर कच्चे तेल की बिक्री करती हैं, तो इससे हासिल होने वाले प्रॉफिट पर विंडफॉल गेन्स टैक्स लगता है। वहीं डीजल, ATF और पेट्रोल के निर्यात के लिए यह लेवी तब लागू होती है, जब मार्जिन 20 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो जाता है। पिछले दो सप्ताह में तेल की औसत कीमतों के आधार पर हर 15 दिनों पर विंडफॉल गेन्स टैक्स की रेट का रिव्यू किया जाता है। बता दें कि कच्चे तेल को जमीन और समुद्र से निकाल कर रिफाइन किया जाता और इसे पेट्रोल, डीजल और एयर टर्बाइन फ्यूल (ATF) में कनवर्ट किया जाता है।

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मार्च 2026 से फिर लगने लगा है यह टैक्स

भारत ने विंडफॉल गेन्स टैक्स सबसे पहले जुलाई 2022 में लागू किया था। फिर 2 साल बाद दिसंबर 2024 में इसे हटा दिया। लेकिन फिर फरवरी 2026 में ईरान के खिलाफ शुरू हुए अमेरिका-इजराइल युद्ध से तेल की कीमतों में तगड़ा उछाल आया। इसे देखते हुए मार्च 2026 में यह लेवी फिर से लागू की गई।

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Petrol Diesel Price Today, 1 October 2026: देश के प्रमुख शहरों में गुरुवार, 1 अक्टूबर को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर की दर से बिक रहा है। वहीं, मुंबई में पेट्रोल 111.21 रुपये और डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर है। तेल कंपनियां भारत में लागू डायनेमिक फ्यूल प्राइसिंग सिस्टम के तहत पेट्रोल और डीजल की कीमतों की रोजाना समीक्षा करती हैं। नई कीमतें हर दिन सुबह 6 बजे लागू की जाती हैं। हालांकि, अलग-अलग राज्यों में टैक्स, वैट, परिवहन लागत और डीलर कमीशन के कारण ईंधन की कीमतों में अंतर रहता है।

देश के प्रमुश शहरों में आज पेट्रोल-डीजल का रेट

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उपलब्ध शहरवार दरों के मुताबिक, देश के ज्यादातर बड़े शहरों में पेट्रोल 100 रुपये प्रति लीटर से ऊपर बना हुआ है। कई बाजारों में डीजल की कीमत भी 95 रुपये प्रति लीटर से अधिक है। दिए गए प्रमुख शहरों में हैदराबाद में पेट्रोल ₹115.73 प्रति लीटर सबसे ज्यादा है। इसके बाद कोलकाता ₹113.51, पटना ₹113.37 और जयपुर ₹112.66 है।

अलग-अलग शहरों में क्यों बदलते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?

पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में राज्यों के बीच अंतर की सबसे बड़ी वजह राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले टैक्स और VAT हैं। इसके अलावा परिवहन खर्च और डीलर कमीशन भी अंतिम कीमत को प्रभावित करते हैं। पेट्रोल और डीजल अभी GST के दायरे से बाहर हैं। इसलिए राज्य स्तर पर लगने वाला टैक्स इनके खुदरा दाम तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

कच्चे तेल और रुपये की कीमत का भी असर

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव का असर घरेलू पेट्रोलियम उत्पादों की लागत पर पड़ता है। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर भी ईंधन की कीमतों को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण कारक है। रुपये में कमजोरी से आयातित कच्चे तेल की लागत बढ़ सकती है।

सुबह 6 बजे बदलते हैं पेट्रोल-डीजल के रेट

भारत में जून 2017 से डायनेमिक फ्यूल प्राइसिंग सिस्टम लागू है। इसके तहत तेल कंपनियां रोजाना पेट्रोल और डीजल की कीमतों की समीक्षा करती हैं और संशोधित दरें सुबह 6 बजे लागू होती हैं। ग्राहक अपने शहर में पेट्रोल-डीजल की कीमत की जानकारी तेल कंपनी की SMS सेवा के जरिए भी हासिल कर सकते हैं। इंडियन ऑयल की सेवा के तहत ‘RSP’ लिखकर संबंधित नंबर पर SMS भेजकर स्थानीय कीमत की जानकारी ली जा सकती है।

डीजल और ATF के एक्सपोर्ट शुल्क में फिर कटौती

केंद्र सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात शुल्क में लगातार दूसरी पखवाड़े कटौती की है। 1 अक्टूबर 2026 से डीजल पर एक्सपोर्ट लेवी घटाकर 16 रुपये प्रति लीटर और ATF पर 10.5 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है। वहीं, पेट्रोल पर निर्यात शुल्क 0.5 रुपये प्रति लीटर पर पहले की तरह बरकरार रखा गया है।

वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचनाओं के मुताबिक, डीजल पर निर्यात शुल्क में 4 रुपये प्रति लीटर की कमी की गई है। इससे पहले 16 सितंबर से 30 सितंबर तक यह शुल्क 20 रुपये प्रति लीटर था। इसी तरह ATF पर लेवी 4.5 रुपये प्रति लीटर घटाकर 15 रुपये से 10.5 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है।

सितंबर से अब तक डीजल पर 9 रुपये की कटौती

सरकार ने 1 सितंबर से डीजल और ATF पर एक्सपोर्ट लेवी में लगातार कटौती की है। 1 सितंबर को डीजल पर शुल्क 25 रुपये प्रति लीटर था, जिसे अब घटाकर 16 रुपये कर दिया गया है। यानी एक महीने में इसमें 9 रुपये प्रति लीटर की कमी हुई है। वहीं, ATF पर निर्यात शुल्क इस अवधि में 19 रुपये से घटकर 10.5 रुपये प्रति लीटर रह गया है। यानी ATF पर 8.5 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई है।

घरेलू पेट्रोल-डीजल की एक्साइज ड्यूटी में बदलाव नहीं

सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू खपत के लिए जारी किए जाने वाले पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा एक्साइज ड्यूटी दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यानी यह फैसला मुख्य रूप से पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगने वाली लेवी से जुड़ा है।

हर पखवाड़े होती है शुल्क की समीक्षा

पेट्रोल, डीजल और ATF पर निर्यात शुल्क 27 मार्च 2026 से लगाया गया था। पश्चिम एशिया में संकट के बीच पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात को हतोत्साहित करने और घरेलू बाजार में इनकी उपलब्धता बनाए रखने के उद्देश्य से यह व्यवस्था लागू की गई थी। सरकार इन निर्यात शुल्क दरों की हर 15 दिन में समीक्षा करती है। इसके लिए पिछली समीक्षा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और ATF की औसत कीमतों को आधार बनाया जाता है।

1 अक्टूबर से लागू नई दरें भी इसी समीक्षा प्रक्रिया का परिणाम हैं। अगली समीक्षा में अंतरराष्ट्रीय कीमतों के आधार पर इन शुल्क दरों में फिर बदलाव किया जा सकता है। सरकार की ताजा अधिसूचना ने 26 मार्च को जारी उन अधिसूचनाओं में संशोधन किया है, जिनके तहत पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लेवी लागू की गई थी।

UPI Charges: ₹2000 से ज्यादा के UPI ट्रांजैक्शन पर चार्ज का रास्ता साफ! सुप्रीम कोर्ट ने स्टे देने से किया इनकार

UPI Merchant Transaction Charges: ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट से बड़ा अपडेट आया है। केंद्र सरकार के फैसले पर कोर्ट ने फिलहाल रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है। वैसे शीर्ष अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है और इस फैसले के कानूनी आधार व तकनीकी पहलुओं को स्पष्ट करने के लिए एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ती जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने वित्त मंत्रालय की ओर से 14 और 15 सितंबर को जारी गजट अधिसूचनाओं को रद्द करने की मांग वाली रिट याचिका पर यह सुनवाई की।

कोर्ट रूम दिखा जबरदस्त ड्रामा

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने यूपीआई लेनदेन पर लगाए जा रहे इस शुल्क के कानूनी स्वरूप और अधिकार क्षेत्र पर कई अहम सवाल उठाए। जस्टिस बागची ने सवाल किया कि, ‘यह फीस या टैक्स नहीं तो आखिर क्या है?’ न्यायमूर्ती जॉयमाल्य बागची ने सरकार की मंशा और अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘अगर यह कोई फीस नहीं है, तो फिर इस शुल्क का वास्तविक चरित्र क्या है? 140 करोड़ भारतीयों के लेनदेन पर इस तरह का चार्ज वसूलने का एग्जीक्यूटिव स्कोप क्या है?”

‘सरकार की जेब में एक रुपया भी नहीं जाएगा’- ASG वेंकटरमण

केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल वेंकटरमण ने अदालत में स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा, ‘यह सरकारी टैक्स नहीं है। ASG ने कहा कि यह सरकार द्वारा वसूला जाने वाला कोई टैक्स या वैधानिक कलेक्शन नहीं है। सरकार इसमें से एक भी रुपया अपने पास नहीं रख रही है’।

जैसे क्रेडिट या डेबिट कार्ड स्वाइप करने पर बैंकों और गेटवे का इंफ्रास्ट्रक्चर कॉस्ट आता है, वैसे ही यूपीआई में भी दो प्रमुख ऑपरेटर (बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर) शामिल हैं। यह उनके बीच का एक ‘इंटरबैंक सेटलमेंट फीस’ है, जिसे NPCI मैनेज करता है।

‘हमें ये सारे तथ्य हलफनामे पर चाहिए’- CJI सूर्यकांत

CJI सूर्यकांत ने मामले के तकनीकी स्वरूप को देखते हुए कहा कि अदालत को इन सभी दावों और आंकड़ों की लिखित पुष्टि चाहिए। इसलिए केंद्र सरकार को हलफनामा दाखिल कर इस नीतिगत फैसले का आधार समझाना होगा।

क्या आम जनता की जेब पर पड़ेगा असर?

इस सुनवाई के दौरान आम नागरिकों और छोटे व्यापारियों से जुड़े 3 सबसे बड़े आंकड़े सामने आए:

क्या 96% यूजर इससे बाहर हैं?- ASG के अनुसार, गेटवे का इस्तेमाल करने वाले 96% सामान्य ग्राहक और छोटे लेनदेन इससे पूरी तरह मुक्त रहेंगे।

क्या दुकानों पर सामान महंगा होगा?- यह नियम केवल 2,000 रुपये से अधिक के बड़े कमर्शियल लेनदेन (P2M) पर लागू है। आम लोगों के बीच ट्रांसफर (P2P – पर्सन टू पर्सन) पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

अत्यावश्यक सेवाओं पर कितना चार्ज?- जरूरी सेवाओं के लिए इस चार्ज की एक ऊपरी सीमा तय की गई है, जो अधिकतम ₹5 ही हो सकती है।

कब से प्रभावी होगा यह नया नियम?

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को सूचित किया कि इस पूरी व्यवस्था का असर 15 अक्टूबर से धरातल पर दिखना शुरू होगा, जो इसका पहला माइलस्टोन है। सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार का हलफनामा दाखिल होने के बाद इस मामले पर अगली सुनवाई होगी।

(रिपोर्ट: शंकर आनंद)

बैंकों की हड़ताल टली !

नई दिल्ली। आज से यानी सोमवार, 28 सितंबर से 30 सितंबर तक देश के सरकारी बैंकों में कामकाज ठप्प रहेगा। बैंक कर्मचारियों के लगभग सभी बड़े संगठनों ने तीन दिन की हड़ताल का ऐलान किया है। कर्मचारी पांच दिन का कामकाज हफ्ता किए जाने की मांग कर रहे हैं। इससे पहले रविवार को छुट्टी होने के बावजूद सरकारी बैंक खुले रहे। करीब 10 साल के बाद रविवार को आम लोगों के लिए बैंक खुला रहा। इससे पहले, 2016 में नोटबंदी के बाद 14 नवंबर को रविवार के दिन बैंक खुले थे। तब पुराने पांच सौ और एक हजार रुपए के नोट बदलने, जमा करने और कैश निकालने के लिए लोग बैंकों में लाइन में लगे थे।

बहरहाल, सोमवार से बुधवार तक तीन दिन बैंक बंद रहेंगे। हालांकि इस दौरान एटीएम और ऑनलाइन सेवाएं काम करती रहेंगी। साथ ही सरकार ने तय कियै है कि बैंक हड़ताल के दौरान स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और पंजाब नेशनल बैंक सहित सभी सरकारी बैंकों के एटीएम से मंथली फ्री लिमिट खत्म होने के बाद भी नकद निकालने पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।

गौरतलब है कि रिजर्व बैंक के नियमों के मुताबिक, अभी अपने बैंक के एटीएम से हर महीने पांच बार फ्री में नकदी निकाल सकते हैं। दूसरे बैंक के एटीएम से दिल्ली, मुंबई जैसे महानगरों में महीने में तीन बार और छोटे शहरों में पांच बार फ्री लेनदेन की लिमिट है। अगर ग्राहक एक महीने में लिमिट से ज्यादा बार एटीएम से नकदी निकालते हैं, तो हर बार 23 रुपया और जीएसटी लगेगा।

लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बैंकों ने लिमिट के बावजूद फ्री में नकदी निकालने की सुविधा दी है। बहरहाल, भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग के साथ इंडियन बैंक्स एसोसिएशन और बैंक प्रबंधन के पदाधिकारियों की बात हुई लेकिन कर्मचारी संगठनों ने हड़ताल टालने अपील को ठुकरा दिया। तीन दिन की इस हड़ताल में देश की सात बड़ी बैंक यूनियनें शामिल होंगी, जिनसे लगभग 90 फीसदी से ज्यादा बैंक कर्मचारी जुड़े हैं। इनमें एआईबीईए, एआईबीओसी, एनसीबीई, एआईबीओए, बीईएफई, आईएनबीईएफ और आईएनबीओसी शामिल हैं। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि जब तक सरकार हफ्ते में पांच कामकाजी दिन का नियम लागू करने की कोई पक्की तारीख तय नहीं कर देती, तब तक उनका यह विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।

UPI के चार्जेज पर NSE के सीईओ का बड़ा बयान, ब्रोकर और उनके क्लाइंट्स के बीच का मामला

NSE on UPI Charges: देश के सबसे बड़े एक्सचेंज एनएसई के एमडी और सीईओ आशीष चौहान का कहना है कि यूपीआई पेमेंट्स पर नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर सरकार से कोई बातचीत नहीं हुई है। उनका कहना है कि यह मामला ब्रोकर्स और उनके क्लाइंट्स के बीच का है और इस बात की संभावना है कि वे इसका हल निकाल लेंगे। उन्होंने ये बातें एनएसई की बीएसई पर लिस्टिंग के एक दिन बाद पत्रकारों से बातचीत में कही। एनएसई के ₹1785 के शेयर ₹22,562 करोड़ के आईपीओ को 5 गुना से अधिक सब्सक्रिप्शन मिलने के बाद 24 सितंबर को 1% से कम प्रीमियम पर लिस्ट हुए थे।

UPI MDR पर क्या कहा NSE के सीईओ ने?

एनएसई के सीईओ आशीष चौहान ने कहा कि यूपीआई से जुड़े एमडीआर पर सरकार के साथ कोई चर्चा नहीं हुई है। उन्होंने आगे कहा कि यह NPCI (नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया) का फैसला है और अब हमें इंतजार करना होगा और देखना होगा। उन्होंने आगे कहा कि यह ब्रोकर और क्लाइंट के बीच का मामला लगता है और जो भी दिक्कत होगी, वे उसका कोई न कोई समाधान निकाल लेंगे।

बता दें कि एनपीसीआई ने यूपीआई ट्रांजैक्शन के लिए एक नया एमडीआर फ्रेमवर्क पेश किया है। इसके तहत कैपिटल-मार्केट ट्रांजैक्शन यानी कि स्टॉकब्रोकर, सिक्योरिटीज और म्यूचुअल फंड से जुड़े पेमेंट पर 0.02% का MDR लगेगा, जिसकी अधिकतम सीमा प्रति ट्रांजैक्शन ₹300 तय की गई है। नए चार्ज 15 अक्टूबर से लागू होंगे।

ब्रोडर लेवल पर बात करें तो यूपीआई फ्रेमवर्क में ₹2000 से अधिक के खास P2M (पर्सन-टू-मर्चेंट) ट्रांजैक्शन पर 0.4% एमडीआर का प्रावधान है, जबकि ₹2,000 तक के मर्चेंट यूपीआई पेमेंट और छोटे कारोबारियों के लिए जीरो-एमडीआर फ्रेमवर्क के तहत आने वाले ट्रांजैक्शन पर कोई चार्ज नहीं लगेगा। वित्त मंत्रालय का कहना है कि लगभग 96% P2M ट्राजैक्शन पर कोई असर नहीं पड़ेगा और ग्राहकों से एमडीआर हीं लिया जाएगा।

NSE IPO Listing: कैसा था स्टॉक मार्केट में शेयरों का पहला दिन

एनएसई की लिस्टिंग का लंबे समय से इंतजार हो रहा था और अब जाकर यह 24 सितंबर को लिस्ट हुआ। इसका इश्यू पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल का था और 5 गुना से अधिक भरने के बाद शेयरों ने आईपीओ निवेशकों को 1% से कम लिस्टिंग गेन दिया। हालांकि फिर इसने उड़ना भरने की कोशिश की। इसका ₹1785 का शेयर बीएसई पर ₹1800 के भाव पर लिस्ट होने के बाद ₹1878 की ऊंचाई तक पहुंचे थे यानी कि आईपीओ निवेशक 5% से अधिक मुनाफे तक पहुंचे थे।

UPI MDR Charges: सरकार 15 अक्टूबर की डेडलाइन नहीं बढ़ाएगी, 18% GST का हो सकता है रिव्यू

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Bank Open Sunday: कल रविवार को भी खुलेंगे बैंक! जानिए RBI ने क्यों जारी किया ये बड़ा आदेश

Bank Open Sunday September 27: अगर आपका बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम अटका हुआ है, तो रविवार होने के बावजूद आप कल यानी 27 सितंबर को शाखा जाकर अपना काम निपटा सकते हैं। वित्त मंत्रालय की सिफारिश पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कल देश के सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को सामान्य दिनों की तरह खुला रखने का विशेष आदेश जारी किया है।

आमतौर पर रविवार को देशभर के बैंकों में साप्ताहिक अवकाश रहता है। हालांकि, इस अभूतपूर्व फैसले के पीछे की मुख्य वजह 28 से 30 सितंबर तक देश भर में होने वाली बैंक हड़ताल है।

RBI और सरकार ने क्यों दिया बैंक खोलने का आदेश?

बैंकिंग यूनियनों ने 28 से 30 सितंबर (सोमवार से बुधवार) तक तीन दिवसीय हड़ताल का ऐलान किया है। चूंकि 26 सितंबर को महीने का चौथा शनिवार था और 27 सितंबर को रविवार, ऐसे में बैंक लगातार 5 दिनों के लिए पूरी तरह ठप हो जाते।

लगातार 5 दिन शाखाएं बंद रहने से आम जनता को नकदी निकासी, चेक क्लियरिंग, लोन डॉक्युमेंटेशन और व्यावसायिक लेनदेन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता। इसी समस्या को टालने के लिए केंद्र सरकार के निर्देश पर RBI ने रविवार को भी बैंक खोलने की मंजूरी दी है।

30 सितंबर को बैंकों की अर्धवार्षिक क्लोजिंग भी है, जो वित्तीय और मार्केट ऑपरेशन्स के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। हड़ताल से पहले एक कार्यदिवस मिलने से पेंडिंग काम निपटाए जा सकेंगे।

कल कौन-कौन से बैंक और सेवाएं चालू रहेंगी?

RBI के सर्कुलर के अनुसार, 27 सितंबर, रविवार को सभी सरकारी बैंक जैसे- SBI, PNB, BOB, कैनरा बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRBs) में पूरी तरह कामकाज होगा। बैंक शाखाओं के साथ-साथ उनके प्रशासनिक कार्यालय, एटीएम से जुड़ी शाखाएं और करेंसी चेस्ट सामान्य कामकाजी घंटों के दौरान काम करेंगे।

प्राइवेट बैंक जैसे- HDFC Bank, ICICI Bank, Axis Bank हड़ताल का हिस्सा नहीं हैं। रविवार को उनकी शाखाओं की सामान्य छुट्टियां लागू हो सकती है।

क्यों हड़ताल पर जा रहे हैं बैंक कर्मचारी?

बैंकिंग क्षेत्र के करीब 90% कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले ‘यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स’ (UFBU) ने 3 दिनों की हड़ताल बुलाई है। कर्मचारियों की मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:

5-डे बैंकिंग: सभी शनिवारों को आधिकारिक छुट्टी घोषित करना।

पेंशन में सुधार व OPS: पुरानी पेंशन योजना (OPS) का विकल्प देना और पेंशनर्स के लिए एक समान महंगाई भत्ता लागू करना।

हालांकि, सरकार और बैंक प्रबंधन ने यूनियनों से हड़ताल वापस लेने या टालने की अपील की है, लेकिन सहमति न बन पाने के कारण हड़ताल का जोखिम बरकरार है।

Bank Strike: 3 दिनों की हड़ताल के बीच ग्राहकों को बड़ी राहत, सरकारी बैंकों ने ATM को लेकर किया ये बड़ा ऐलान

Bank Strike: जानिए पीएनबी, यूनियन बैंक और बैंक ऑफ इंडिया ने तीन दिन की हड़ताल से पहले एंप्लॉयीज से क्या अपील की

Bank Strike: अगले हफ्ते सरकारी और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) में तीन दिन की हड़ताल है। इन बैंकों की सभी शाखाओं में हड़ताल की वजह से 28 सितंबर से लेकर 30 सितंबर तक कामकाज नहीं होगा। 28 सितंबर को सोमवार है, जबकि 30 सितंबर को बुधवार है। इसका मतलब है कि अगले हफ्ते सरकारी बैंकों और आरआरबी में सिर्फ तीन दिन ही सामान्य कामकाज होंगे।

बैंकों ने एंप्लॉयीज को भेजे नए मैसेजेज

पंजाब नेशनल बैंक (PNB), यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (UBI), बैंक ऑफ इंडिया (BOI) और इंडियन बैंक ने अपने ग्राहकों को हड़ताल की वजह से होने वाली दिक्कतों से बचाने के लिए कदम उठाए हैं। इन बैंकों ने तीन दिन की प्रस्तावित हड़ताल से पहले अपने एंप्लॉयीज को नए मैसेज भेजे हैं। UBI ने अपने सभी एंप्लॉयीज को भेजे कम्युनिकेशंस में एंप्लॉयीज वेल्फेयर के लिए किए गए उपायों के बारे में बताया है।

एंप्लॉयीज को उनके फायदों से जुड़े कदमों के बारे में बताया

UBI ने एंप्लॉयीज को वेज सेटलमेंट के बाद पे और अलाउन्स में हुई वृद्धि, वेल्फेयर से जुड़े ज्यादा फायदे, रिक्रूटमेंट, रिटायरमेंट बाद के बेनेफिट्स और एचआर रिफॉर्म्स के बारे में बताया है। बैंक ने एंप्लॉयीज से हड़ताल में शामिल नहीं होने को कहा है। उनसे यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि बैंकिंग सेवाओं में किसी तरह की बाधा नहीं आए। दूसरे सरकारी बैंकों ने भी अगले हफ्ते की तीन दिन की हड़ताल से पहले अपने एंप्लॉयीज को मैसेजेज भेजे हैं। इनमें उन्हें बैंकिंग ऑपरेशंस और ग्राहक सेवाएं बनाए रखने को कहा गया है।

वित्त मंत्रालय ने भी बैंकों के एंप्लॉयीज से अपील की

वित्त मंत्रालय ने भी 21 सितंबर को सरकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के एंप्लॉयीज से प्रस्तावित हड़ताल में शामिल नहीं होने की अपील की है। मंत्रालय ने कहा है कि सरकार ने पहले ही परफॉर्मेंस लिंक्ड इनसेंटिव (PLI) को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। हफ्ते में पांच दिन कामकाज के मसले पर भी विचार चल रहा है।

हफ्ते में पांच दिन कामकाज की मांग सबसे ऊपर

बैंकों के एंप्लॉयीज की सबसे बड़ी मांग हफ्ते में पांच दिन के कामकाज की है। उनका कहना है कि उनकी इस मांग पर काफी समय बीत जाने के बाद भी फैसला नहीं हुआ है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) का कहना है कि मार्च 2024 में जिस वेज रिवीजन सेटलमेंट पर हस्ताक्षर हुआ था उसमें बैंकों में हफ्ते में पांच दिन कामकाज का प्रस्ताव भी शामिल था। लेकिन, इसे अब तक लागू नहीं किया गया।

22 सितंबर को दोनों पक्षों के बीच हुई बातचीत

22 सितंबर को UFBU से हुई बातचीत में इंडियन बैंक एसोसिएशन (IBA) और डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज (DFS) के प्रतिनिधियों ने यूनियन फोरम को कहा था कि पांच दिन कामकाज के हफ्ते पर विचार चल रहा है। उनका कहना था कि यूनियन फोरम को यह हड़ताल टाल देनी चाहिए। लेकिन, UFBU ने कहा कि वह हड़ताल वापस लेने के प्रस्ताव पर तभी विचार करेगी, जब इस मसले पर ठोस प्रगति होती है।

Bank Strike: बैंकों में 5 दिन वर्किंग पर आया सरकार का जवाब, कर्मचारियों की हड़ताल से पहले ये जानकारी सामने आई

केंद्र सरकार ने बैंक कर्मचारियों की 28 सितंबर से 30 सितंबर 2026 तक तीन दिनों की देशव्यापी बैंक हड़ताल को लेकर अपील जारी की है। वित्त मंत्रालय ने कर्मचारी संगठनों से हड़ताल का फैसला वापस लेने को कहा है। सरकार ने कर्मचारियों से अपील की है कि वे हड़ताल पर जाने के फैसले पर दोबारा विचार करें और इसे टालने की कोशिश करें। सरकार ने कहा, बैंक कर्मचारियों की कई मांगों को लेकर बातचीत चल रही है और ऐसे समय में हड़ताल होने से बैंक ग्राहकों के साथ-साथ कारोबार और सरकारी लेनदेन भी प्रभावित हो सकते हैं।

सरकार ने किया पोस्ट

5-Day Banking को लेकर सरकार ने अपना रुख साफ करते हुए कहा है कि सरकारी बैंकों में हर महीने पहले से ही दूसरे और चौथे शनिवार को छुट्टी रहती है। ऐसे में बाकी शनिवार को बैंक खुले रहते हैं, जिससे ग्राहकों को जरूरी बैंकिंग सेवाएं मिलती हैं। इसी बीच बैंक कर्मचारी संगठनों ने 28 से 30 सितंबर तक तीन दिन की हड़ताल का ऐलान किया है। सरकार ने कर्मचारियों से अपील की है कि वे हड़ताल पर जाने के फैसले पर दोबारा विचार करें और इसे टालने की कोशिश करें, ताकि बैंकिंग सेवाएं प्रभावित न हों।

 

भारतीय रिफाइनरी कंपनियों को बड़ी राहत

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने रिलायंस और नायरा जैसी बड़ी रिफाइनरी कंपनियों को बड़ी राहत दी है। सरकार ने पेट्रोल, डीजल और जेट ईंधन के निर्यात पर लगने वाले टैक्स में कटौती कर दी है। विंडफॉल टैक्स में कटौती और नई दरें 16 सितंबर 2026 से लागू हो गई हैं, जिससे भारतीय रिफाइनरी कंपनियों का खर्च घटेगा और उन्हें विदेशी बाजार में तेल बेचने पर सीधा फायदा मिलेगा।

सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक पेट्रोल पर निर्यात टैक्स में प्रति लीटर पांच रुपए की कटौती की गई है। डीजल पर चार रुपए और जेट ईंधन पर प्रति लीटर एक रुपए की कटौती की गई है। जेट ईंधन पर पहले डेढ़ रुपए प्रति लीटर की दर से टैक्स लगता था, जो अब सिर्फ 50 पैसे प्रति लीटर है। पेट्रोल पर पहले 25 रुपए लीटर टैक्स था, जिसे 20 रुपए कर दिया गया है। कटौती के बाद डीजल पर टैक्स 14 रुपया रह गया है।

गौरतलब है कि सरकार हर 15 दिन में विंडफॉल टैक्स की समीक्षा करती है। इससे पहले एक सितंबर को टैक्स बढ़ाया गया था, लेकिन कहा जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत सामान्य होने के कारण सरकार ने इस बढ़ोतरी को वापस ले लिया है। हालांकि इस कटौती से आम जनता पर कोई असर नहीं होगा। उनक लिए पेट्रोल, डीजल के दामों में कोई बदलाव नहीं होगा। वित्त मंत्रालय ने साफ किया है कि देश के भीतर बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी की दरें पहले की तरह ही रहेंगी। यह बदलाव केवल विदेशों में ईंधन निर्यात करने वाली कंपनियों पर लागू होता है।