यूपीआई पर शुल्क लगाने का फैसला टला

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने यूपीआई के जरिए होने वाले डिजिटल लेन देन पर शुल्क लगाने का फैसला टाल दिया है। दो हजार रुपए से ज्यादा के लेनदेन पर 0.40 फीसदी शुल्क लगाने का फैसला 15 अक्टूबर से लागू होने वाला था। लेकिन देश भर में हो रहे विरोध की वजह से सरकार ने इस फैसले के अमल पर दिवाली तक रोक लगा दिया है। नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी एनपीसीआई ने त्योहारी सीजन को देखते हुए इसे टालने का फैसला लिया है।

एनपीसीआई ने कहा है कि इसे दिवाली के तुरंत बाद लगाया जाएगा, हालांकि अभी तारीख नहीं बताई है। गौरतलब है कि सरकार ने पिछले महीने फैसला किया था कि अगर ग्राहक दुकानदार को दो हजार रुपए से ज्यादा का यूपीआई पेमेंट करता है, तो दुकानदार को कुल रकम पर 0.4 फीसदी एमडीआर शुल्क देना होगा। हालांकि दो लोगों के बीच नकद लेनदेन को इस शुल्क से अलग रखा गया था।

यह भी बताया गया था कि 75 हजार रुपए या उससे ज्यादा का भुगतान करने पर अधिकतम तीन सौ रुपए का फिक्स्ड चार्ज लगेगा। इसके साथ ही रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस या ईंधन पर दो हजार रुपए से ज्यादा के भुगतान पर पांच रुपए  का फिक्स्ड चार्ज तय किया गया था। बताया जा रहा है कि दशहरा औऱ दिवाली के दौरान देश भर के बाजारों में कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, गहने और सामानों की भारी बिक्री होती है। ऐसे में डिजिटल पेमेंट बढ़ जाता है।

कारोबारी संगठनों और पेमेंट कंपनियों का मानना था कि त्योहारों के बीच नया नियम लागू करने से दुकानों पर पेमेंट में रुकावट आ सकती है। व्यापारी संगठनों ने इसका खुल कर विरोध किया और यह भी कहा कि नकद लेनदेन बढ़ने पर छापेमारी की कार्रवाई तेज हो सकती है। तभी व्यापारियों के विरोध की वजह से एनपीसीआई ने दिवाली तक इस फैसले को आगे बढ़ा दिया है।

यूपीआई भुगतान पर दिवाली तक किसी प्रकार का कोई शुल्क नहीं

भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) ने व्यापारियों के लिए दो हजार रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को दिवाली के बाद के लिए टाल दिया है। पहले के निर्णय के अनुसार, यह शुल्क 15 अक्टूबर से लागू किया जाना था।

एनपीसीआई ने मंगलवार को एक विज्ञप्ति में कहा कि उसकी यूपीआई एवं सेवा संचालन समिति ने त्योहारी मौसम को देखते हुए आज यह निर्णय लिया कि व्यक्ति से दुकानदार को (पी2एम) यूपीआई के जरिये किए जाने वाले चुनिंदा भुगतानों पर एमडीआर दिवाली के बाद लागू किया जाएगा। इसको लागू करने की तिथि बाद में अलग से तय की जाएगी।

गौरतलब है कि एनपीसीआई ने गत 15 सितंबर को घोषणा की थी कि यूपीआई के जरिये 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लगाया जाएगा जो 15 अक्टूबर से लागू होगा।रुपे डेबिट कार्ड से होने वाले ट्रांजेक्शन और 2,000 रुपये तक के यूपीआई लेनदेन पर किसी भी तरह का शुल्क नहीं लगाया जा सकेगा।

वित्त मंत्रालय ने उस समय इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा था कि व्यक्तिगत यूपीआई खातों से मर्चेंट खातों में भुगतान पर 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू होगा। अधिकतम एमडीआर 300 रुपये होगा।

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इसी तरह अनिवार्य सेवाओं जैसे रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि क्षेत्र में बीज, खाद आदि के लिए पांच रुपये प्रति ट्रांजेक्शन का सपाट शुल्क तय किया गया है। पूंजी बाजार से संबंधित लेनदेन जैसे म्यूचुअल फंड, प्रतिभूति और स्टॉक ब्रोकर तथा डीलरों के लिए एमडीआर की दर 0.02 प्रतिशत तय की गई है। इसमें भी अधिकतम शुल्क 300 रुपये होगी।

सरकार यह भी स्पष्ट कर चुकी है कि व्यक्तिगत से व्यक्तिगत यूपीआई खातों में लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। यूपीआई से हर महीने एक लाख रुपये तक का लेनदेन करने वाले छोटे व्यापारियों को भी एमडीआर के दायरे से बाहर रखा गया है।

यूपीआई पर लगने वाले एमडीआर में से 40 प्रतिशत उस बैंक को जाएगा जिसमें भुगतान करने वाले ग्राहक का खाता है। भुगतान स्वीकार करने वाले कारोबारी का जिस बैंक में खाता है या वह जिस भुगतान गेटवे का इस्तेमाल कर रहा है उसे 30 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा। यूपीआई ऐप को 20 प्रतिशत और यूपीआई ऐप के बैंकिंग साझेदार को शुल्क में 10 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा। सूत्रों का कहना है कि इसमें सरकार या रिजर्व बैंक को एक भी पैसा नहीं मिलेगा।

सरकार ने कहा है कि यूपीआई से होने वाले 96 प्रतिशत मर्चेंट ट्रांजेक्शन 2,000 रुपये या इससे से कम मूल्य के होते हैं और इसलिए ये शुल्क के दायरे से बाहर रहेंगे।

एनपीसीआई देश में खुदरा भुगतान और निपटान प्रणालियों के संचालन के लिए उत्तरदायी एक शीर्ष संस्था है। इसकी स्थापना भारतीय रिजर्व बैंक और बैंकों के फोरम भारतीय बैंक संघ (आईबीए) के जरिये की गई है। यह संस्था प्रौद्योगिकी के उपयोग के माध्यम से खुदरा भुगतान प्रणालियों में नवाचार लाने, परिचालन में अधिक दक्षता प्राप्त करने तथा भुगतान प्रणालियों की पहुंच को व्यापक बनाने पर केंद्रित है।

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UPI के चार्जेज पर NSE के सीईओ का बड़ा बयान, ब्रोकर और उनके क्लाइंट्स के बीच का मामला

NSE on UPI Charges: देश के सबसे बड़े एक्सचेंज एनएसई के एमडी और सीईओ आशीष चौहान का कहना है कि यूपीआई पेमेंट्स पर नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर सरकार से कोई बातचीत नहीं हुई है। उनका कहना है कि यह मामला ब्रोकर्स और उनके क्लाइंट्स के बीच का है और इस बात की संभावना है कि वे इसका हल निकाल लेंगे। उन्होंने ये बातें एनएसई की बीएसई पर लिस्टिंग के एक दिन बाद पत्रकारों से बातचीत में कही। एनएसई के ₹1785 के शेयर ₹22,562 करोड़ के आईपीओ को 5 गुना से अधिक सब्सक्रिप्शन मिलने के बाद 24 सितंबर को 1% से कम प्रीमियम पर लिस्ट हुए थे।

UPI MDR पर क्या कहा NSE के सीईओ ने?

एनएसई के सीईओ आशीष चौहान ने कहा कि यूपीआई से जुड़े एमडीआर पर सरकार के साथ कोई चर्चा नहीं हुई है। उन्होंने आगे कहा कि यह NPCI (नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया) का फैसला है और अब हमें इंतजार करना होगा और देखना होगा। उन्होंने आगे कहा कि यह ब्रोकर और क्लाइंट के बीच का मामला लगता है और जो भी दिक्कत होगी, वे उसका कोई न कोई समाधान निकाल लेंगे।

बता दें कि एनपीसीआई ने यूपीआई ट्रांजैक्शन के लिए एक नया एमडीआर फ्रेमवर्क पेश किया है। इसके तहत कैपिटल-मार्केट ट्रांजैक्शन यानी कि स्टॉकब्रोकर, सिक्योरिटीज और म्यूचुअल फंड से जुड़े पेमेंट पर 0.02% का MDR लगेगा, जिसकी अधिकतम सीमा प्रति ट्रांजैक्शन ₹300 तय की गई है। नए चार्ज 15 अक्टूबर से लागू होंगे।

ब्रोडर लेवल पर बात करें तो यूपीआई फ्रेमवर्क में ₹2000 से अधिक के खास P2M (पर्सन-टू-मर्चेंट) ट्रांजैक्शन पर 0.4% एमडीआर का प्रावधान है, जबकि ₹2,000 तक के मर्चेंट यूपीआई पेमेंट और छोटे कारोबारियों के लिए जीरो-एमडीआर फ्रेमवर्क के तहत आने वाले ट्रांजैक्शन पर कोई चार्ज नहीं लगेगा। वित्त मंत्रालय का कहना है कि लगभग 96% P2M ट्राजैक्शन पर कोई असर नहीं पड़ेगा और ग्राहकों से एमडीआर हीं लिया जाएगा।

NSE IPO Listing: कैसा था स्टॉक मार्केट में शेयरों का पहला दिन

एनएसई की लिस्टिंग का लंबे समय से इंतजार हो रहा था और अब जाकर यह 24 सितंबर को लिस्ट हुआ। इसका इश्यू पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल का था और 5 गुना से अधिक भरने के बाद शेयरों ने आईपीओ निवेशकों को 1% से कम लिस्टिंग गेन दिया। हालांकि फिर इसने उड़ना भरने की कोशिश की। इसका ₹1785 का शेयर बीएसई पर ₹1800 के भाव पर लिस्ट होने के बाद ₹1878 की ऊंचाई तक पहुंचे थे यानी कि आईपीओ निवेशक 5% से अधिक मुनाफे तक पहुंचे थे।

UPI MDR Charges: सरकार 15 अक्टूबर की डेडलाइन नहीं बढ़ाएगी, 18% GST का हो सकता है रिव्यू

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

लंबी और मध्यम अवधि के लिहाज से यह शेयरों में निवेश का शानदार मौका, एक्सपर्ट ने बताई इसकी खास वजह

शेयर बाजारों पर दबाव घटने का नाम नहीं ले रहा है। क्रूड की बढ़ती कीमतों, अमेरिकी में बॉन्ड यील्ड में उछाल और आईटी शेयरों में बिकवाली ने बाजार के सेंटिमेंट को खराब किया है। इनवेस्टर्स बाजार से दूरी बना रहे हैं। उन्हें बाजार में हालात बदलते नहीं दिख रहे। सवाल है कि आगे बाजार की चाल कैसी रहने वाली है। इस सवाल का जवाब बंधन एएमसी के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट कार्तिक कुमार ने दिया। उन्होंने शेयर बाजार को लेकर कई अहम बातें बताईं।

बाजार एक साल तक सीमित दायरे में रह सकते हैं

कुमार ने कहा कि शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक एक साल तक सीमित दायरे में बने रह सकते हैं। हालांकि, शेयरों की वैल्यूएशंस अट्रैक्टिव लेवल पर आ गई है, जिससे उन इनवेस्टर्स के लिए खरीदारी का अच्छा मौका बना है, जो मध्यम और लंबी अवधि के लिए निवेश करना चाहते हैं। कई क्वालिटी स्टॉक्स की कीमत पीक से काफी नीचे आ चुकी है।

यह शेयर बाजार में एंट्री के लिए शानदार मौका 

उन्होंने कहा कि अगर कोई मार्केट में एंट्री करना चाहता है तो यह उसके लिए खराब समय नहीं है। बाजार पर दबाव बढ़ाने में तीन चीजों का हाथ है। इनमें क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल, अमेरिकी में बढ़ती बॉन्ड यील्ड और डॉलर में मजबूती शामिल हैं। पिछले कुछ हफ्तों में क्रूड ने मार्केट पर काफी दबाव बनाया है। यह काफी समय से 100 डॉलर के पार टिका हुआ है।

इंश्योरेंस कंपनियों की अर्निंग्स को लेकर तस्वीर साफ नहीं 

उन्होंने कहा कि बंधन एएमसी ने लार्जकैप और मिडकैप बैंकों में निवेश बढ़ाया है। हालांकि, हमने इंश्योरेंस कंपनियों से दूरी बनाई है। इसकी वजह यह है कि इन कंपनियों की अर्निंग्स को लेकर तस्वीर साफ नहीं है। ऐसे में कुछ समय तक इस सेक्टर से दूर रहना ठीक रहेगा। कैपिटल मार्केट्स की थीम अट्रैक्टिव लगती है। मार्केट में लोगों का पार्टिसिपेशन बढ़ने से इस सेक्टर को फायदा होगा।

आईपीओ में बोली लगाने में सावधानी बरतने की सलाह

कुमार ने आईपीओ मार्केट को लेकर मिलीजुली प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बंधन एएमसी आईपीओ में बोली लगाने में काफी सावधानी बरतती है। फंड हाउस का अपना एनालिसिस सिस्टम है। हर आईपीओ के एनालिसिस के बाद ही एएमसी बोली लगाने का फैसला लेती है।

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यूपीआई एमडीआर चार्ज का असर कंपनियों पर दिखेगा

उन्होंने कहा कि बंधन बैंक का निवेश कुछ ऐसी कंपनियों में है, जो यूपीआई से जुड़ी हैं। सरकार ने 2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई के पेमेंट पर एमडीआर चार्ज लगाने का फैसला किया है। यह देखना होगा कि इन कंपनियों पर इसका असर किस तरह से पड़ता है।

UPI MDR Charges: सरकार 15 अक्टूबर की डेडलाइन नहीं बढ़ाएगी, 18% GST का हो सकता है रिव्यू

UPI MDR Charges: सरकार UPI के चुनिंदा ट्रांजैक्शन पर MDR लागू करने की 15 अक्टूबर की तारीख को आगे बढ़ाने के मूड में नहीं है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, तय तारीख से ही नया सिस्टम लागू होगा। हालांकि, MDR पर लगने वाले 18% GST को लेकर GST काउंसिल समीक्षा कर सकती है।

7 अक्टूबर की बैठक में क्या होगा?

MDR पर GST का मुद्दा फिलहाल 7 अक्टूबर को होने वाली GST काउंसिल की बैठक के एजेंडे में नहीं है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि बैठक के दौरान काउंसिल इस मुद्दे को उठा सकती है। यानी अभी यह तय नहीं है कि GST पर कोई फैसला होगा या नहीं।

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब कारोबारियों के बीच MDR को लेकर चिंता है। उनका मानना है कि इससे मर्चेंट्स पर लागत बढ़ सकती है। साथ ही, पूरे UPI ट्रांजैक्शन सिस्टम की लागत पर भी इसका असर पड़ सकता है।

सरकार क्यों ला रही है MDR?

सरकार ने MDR लागू करने का बचाव किया है। सरकार का कहना है कि UPI इकोसिस्टम को चलाने में काफी खर्च होता है। मौजूदा MDR उस पूरी लागत की भरपाई नहीं करता।

सरकारी सूत्रों ने कहा कि UPI पर MDR से इकोसिस्टम को बनाए रखने की लागत की 100% भरपाई नहीं होती। सरकार के मुताबिक, UPI ट्रांजैक्शन बढ़ने के साथ टिकाऊ रेवेन्यू मॉडल की जरूरत भी बढ़ रही है।

₹2,000 से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR

नए सिस्टम के तहत ₹2,000 से ज्यादा के चुनिंदा UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR लगाया जाएगा। हालांकि, एक ट्रांजैक्शन पर इसकी अधिकतम सीमा ₹300 होगी।

MDR की दरें Indian Banks’ Association (IBA) ने संबंधित पक्षों से चर्चा के बाद तय की हैं। यानी इस दर को तय करने की प्रक्रिया में अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स से सलाह ली गई है।

ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा कोई चार्ज

सरकार ने साफ किया है कि UPI से पेमेंट करने वाले ग्राहकों से कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा। यानी आम ग्राहक पहले की तरह UPI के जरिए पेमेंट कर सकेंगे।

वहीं, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति यानी P2P ट्रांजैक्शन भी फ्री रहेंगे। नया MDR चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लागू होगा।

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PhonePe Rural India Plan: फोनपे में निकलेंगी 20000 नौकरियां! भारत के गांव-देहात में विस्तार के लिए कंपनी का बड़ा प्लान

PhonePe Rural India Plan: डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म फोनपे ने गुरुवार को अगले साल भारत के छोटे शहरों और गांवों में अपने बुनियादी ढांचे को और गहराई तक पहुंचाने की योजना की घोषणा की। इसके तहत डिजिटल पेमेंट कंपनी अपने मर्चेंट नेटवर्क को बढ़ाने के लिए 20,000 ऑन-रोल सेल्स कर्मचारियों की भर्ती करेगी। कंपनी अगले 12 महीनों में 50 लाख से अधिक पेमेंट डिवाइस भी लगाएगी। इनमें स्मार्टस्पीकर और पीओएस डिवाइस शामिल होंगे। इनमें से करीब 50% डिवाइस ग्रामीण भारत में लगाए जाएंगे। इससे टियर-6 कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल भुगतान स्वीकार करने की सुविधा और गहराई तक पहुंचेगी।

वॉलमार्ट के समर्थन वाली कंपनी फोनपे का यह कदम भारत के एनपीसीआई के उस फैसले के बाद आया है जिसमें चुनिंदा यूपीआई मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% शुल्क लगाने का फैसला किया गया है। इसका एक हिस्सा कम सेवा वाले इलाकों में छोटे व्यापारियों के बीच डिजिटल पेमेंट की स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए रखा जाएगा। फोनपे ने कहा, “हाल ही में घोषित एमडीआर ढांचा कंपनी को लंबे समय का नजरिया रखने और मर्चेंट बढ़ाने में निवेचश करने की इजाजत देता है।” अगस्त तक, फोनपे के भुगतान नेटवर्क में 72 करोड़ से अधिक पंजीकृत यूजर और 5 करोड़ से ज्यादा मर्चेंट शामिल थे।

पिछले साल लागू किए गए नए श्रम संहिताएं भी कंपनी को प्रक्रियाओं को सरल बनाकर तेजी से भर्ती करने में सक्षम बना रही हैं। इससे बड़ी संख्या में ऑन-रोल कर्मचारियों को आसानी से कंपनी में शामिल करने में मदद मिल रही है। भारत ने दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम में से एक तैयार किया है। इस यात्रा के अगले चरण में देश के हर हिस्से के छोटे कारोबारियों को डिजिटल अर्थव्यवस्था में भाग लेने में सक्षम बनाने वाले मर्चेंट पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर में लगातार निवेश की जरूरत होगी।

फोनपे का प्रस्तावित विस्तार इसी अवसर को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। काफी बड़े फ्रंटलाइन ऑन-रोल कार्यबल की मदद से फोनपे छोटे कस्बों और गांवों में कारोबारियों तक पहुंच सकेगा, उन्हें डिजिटल भुगतान से जोड़ सकेगा, केवाईसी प्रक्रिया पूरी कर सकेगा, पेमेंट डिवाइस लगा सकेगा और कारोबारियों को लगातार सहायता प्रदान कर सकेगा।

इस विस्तार से लाखों छोटे कारोबारियों को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से और अधिक जोड़ने में भी मदद मिलेगी। डिजिटल रूप से सक्रिय और केवाईसी-अनुपालन वाला मर्चेंट नेटवर्क कारोबारी गतिविधियों को अधिक स्पष्ट रूप से सामने ला सकता है और पात्र कारोबारियों को औपचारिक वित्तीय सेवाओं की व्यापक रेंज तक पहुंच उपलब्ध करा सकता है। इसमें ऋण देने वाली संस्थाओं द्वारा प्रदान किए जाने वाले कर्ज भी शामिल हैं।

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सरकार कैसे एमडीआर शुल्क को मॉनिटर करेगी?

यह लाख टके का सवाल है कि केंद्र सरकार किस तरह से यह निगरानी करेगी कि दुकानदार यूपीआई के जरिए होने वाले लेनदेन में एमडीआर शुल्क यानी केंद्र सरकार ने दो हजार से ऊपर के लेनदेन पर जो 0.40 फीसदी शुल्क लगाया है वह खुद दे रहा है या ग्राहक से ले रहा है? सरकार की ओर से ऐसी बात कही गई है। यह शुल्क लगाने के बाद जब विवाद बढ़ा तो सरकार की ओर से कहा गया कि ग्राहकों को शुल्क नहीं देना होगा। हालांकि सब जानते हैं कि दुकानदार इस तरह का कोई भी शुल्क अपनी जेब से नहीं चुकाता है। वह अपने मुनाफे में से सरकार को शुल्क नहीं देगा। किसी न किसी रूप में वह ग्राहक से ही पैसा वसूलेगा।

जब इस बात का मुद्दा बना तब सरकार ने कहा कि वह एमडीआर शुल्क की निगरानी करेगी। लेकिन इसका कोई मॉडल नहीं है। यह सिर्फ आंख में धूल झोंकने वाली बात है। पिछले साल भारत में 24 हजार करोड़ ट्रांजेक्शन हुए हैं, जिसमें 413 लाख करोड़ रुपए का कारोबार हुआ है। इसका अर्थ है कि हर महीने औसतन दो हजार करोड़ ट्रांजेक्शन हो रहे हैं। करोड़ों छोटी छोटी दुकानों या रेहड़ी, पटरी पर इसका इस्तेमाल हो रहा है। क्या सरकार के पास इतने लोग हैं या ऐसी तकनीकी सलाहियात है कि वह सबको मॉनिटर करे? सरकार जब सामानों में मिलावट और उनकी तौल में होने वाली गड़ब़ड़ियों को नहीं पकड़ पा रही है तो हर ट्रांजेक्शन को कैसे मॉनिटर करेगी। फिर भी लोगों को बरगलाने के लिए एक बयान दे दिया गया।

एमडीआर पर जीएसटी भी लगेगा

एक तो वित्तीय मामलों की शब्दावली इतनी जटिल होती है कि कई बार जो होता है उसका उलटा कहा जाता है। जैसे यूपीआई के जरिए लेनदेन पर शुल्क लगाने वाले फैसले में यूपीआई की तरह ही बार बार एमडीआर शब्द का इस्तेमाल हो रहा है। इसका अर्थ है मर्चेंट डिस्काउंट रेट। सोचें, इसमें डिस्काउंट यानी छूट शब्द है लेकिन असल में इसी छूट पर शुल्क लगाने का फैसला हुआ है। अब खबर है कि सरकार एमडीआर के ऊपर जीएसटी भी लगाएगी। सोचें, इसी को हिंदी मुहावरे में कोढ़ में खुजली कहा गया है। पहले सरकार लेनेदेन पर शुल्क लगाएगी और उस शुल्क के ऊपर जीएसटी वसूलेगी।

वित्तीय मामलों के जानकारों का कहना है कि यूपीआई एक पेमेंट सेटलमेंट सर्विस है इसलिए इस पर लगने वाला शुल्क जीएसटी के दायरे में आएगा। हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि शुल्क की तरह जीएसटी भी ग्राहकों को नहीं देना है, बल्कि दुकानदार देगा। हालांकि सबको पता है कि दुकानदार न तो शुल्क अपनी जेब से देगा और न जीएसटी। बहरहाल, कहा जा रहा है कि जीएसटी रजिस्टर्ड दुकानदार जो शुल्क वसूलेगा उस पर जीएसटी चुकाएगा और बाद में वह रिफंड ले सकता है। उसे इनपुट टैक्स क्रेडिट के रूप में रिफंड मिल जाएगा। लेकिन हकीकत यह है कि दुकानदार इस पचड़े में नहीं पड़ना चाहते हैं। उनको पता है कि आज वे जीएसटी भरेंगे तो कितने दिन के बाद रिफंड मिलेगा। उनकी पूंजी फंस रही है, जीएसटी में।

UPI MDR Charges Row: यूपीआई पेमेंट पर चार्ज को लेकर ‘इंडिया’ गठबंधन में फूट! मोदी सरकार को मिला CM उमर अब्दुल्ला का साथ

UPI MDR Charges Row: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार (17 सितंबर) को यूपीआई के माध्यम से लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत चार्ज लगाने के मामले में केंद्र सरकार का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने केंद्र के फैसले का सपोर्ट करते हुए कहा कि डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखना और चलाना सस्ता नहीं है। लेकिन साथ ही उन्होंने सरकार को खुदरा ग्राहकों के हितों की रक्षा करने की सलाह भी दी। सीएम ने कहा कि UPI सिस्टम को चलाना बहुत महंगा है। उन्होंने कहा कि जो चीजें हमें मुफ्त में मिलती हैं, हम उनकी कद्र नहीं करते।

अब्दुल्ला ने गुरुवार (17 सितंबर) को पत्रकारों से बातचीत में कहा, “यह शुल्क हर किसी पर नहीं लगाया जा रहा है। सबसे पहले, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजने पर कोई चार्ज नहीं लगता है। इसके अलावा, आम ग्राहकों से तब तक कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा जब तक वे एक तय सीमा से ज्यादा का लेन-देन नहीं करते।” मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपीआई इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखने और उसे चलाने का काम सस्ता नहीं है।

‘काफी पैसा खर्च होता है…’

सीएम ने कहा कि इस पेमेंट सिस्टम को चलाने में काफी पैसा खर्च होता है। पीटीआई के मुताबिक उन्होंने कहा, “असलियत यह भी है कि जब कोई चीज पूरी तरह मुफ्त मिलती है, तो हम अक्सर उसकी सही कीमत नहीं समझते। फिर भी भारत सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आम नागरिकों पर इस शुल्क का बोझ न पड़े। अगर कंपनियों से शुल्क ली भी जाती है, तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है, क्योंकि वैसे भी कंपनियां यूपीआई से काफी मुनाफा कमाती हैं।”

J&K के CM ने कहा, “यह चार्ज आपसे या मुझसे नहीं लिया जाएगा। इसका भुगतान उन व्यवसायों को करना होगा जहां लेनदेन हो रहा है। अभी जो आदेश जारी किया गया है। उसमें साफ कहा गया है कि यह चार्ज ग्राहक पर नहीं डाला जा सकता। दूसरी बात, अगर आप और मैं एक-दूसरे को पैसे भेज रहे हैं, तो उस पर भी कोई चार्ज नहीं लगेगा। ₹2,000 से कम के लेनदेन पर कोई मर्चेंट चार्ज नहीं है, क्योंकि ज्यादातर व्यावसायिक लेनदेन ₹2,000 से कम के ही होते हैं। ₹2,000 से ज़्यादा के लेनदेन पर चार्ज लगता है, लेकिन उसकी भी एक सीमा तय की गई है।”

अब्दुल्ला ने आगे कहा, “मैंने सुना है कि UPI को चालू रखने में लगभग ₹20,000 करोड़ खर्च होते हैं। ₹20,000 करोड़ का मतलब है कि यह पैसा आपके और मेरे द्वारा दिए गए टैक्स से आ रहा है। कहीं न कहीं से तो यह पैसा आ ही रहा है। तो, जाने-अनजाने में हम UPI के लिए पहले से ही भुगतान कर रहे हैं। लेकिन आज हम इसके लिए अपने टैक्स के जरिए भुगतान कर रहे हैं। अगर इसके बाद बड़ी कंपनियां और व्यापारी इसके लिए भुगतान करते हैं, तो मुझे नहीं लगता कि किसी को कोई आपत्ति होनी चाहिए।”

‘फैसला अमेरिकी दबाव में नहीं’

इस बीच, यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (MDR) लगाने का फैसला अमेरिकी दबाव में किए जाने के आरोपों को वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को खारिज कर दिया। मंत्रालय ने कहा कि नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के हाल में जारी गाइडलाइंस में यूपीआई पर क्रेडिट कार्ड के जरिए लेनदेन के लिए केवल रुपे क्रेडिट कार्ड की अनुमति है। इससे विदेशी क्रेडिट कार्ड को कोई लाभ नहीं मिलने वाला है।

फाइनेंशियल सर्विसेज डिपार्टमेंट (DFS) ने US ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) की 2026 की रिपोर्ट में की गई टिप्पणियों के जवाब में यह स्पष्टीकरण जारी किया है। रिपोर्ट में कहा गया था कि US की इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट सर्विस देने वाली कंपनियों को भारत के UPI पेमेंट सिस्टम में RuPay कार्ड जैसी सुविधाएं या मौके नहीं मिलते हैं।

DFS ने एक बयान में कहा, “15 सितंबर के NPCI सर्कुलर में RuPay के अलावा दूसरे क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करके UPI पर क्रेडिट ट्रांजैक्शन की इजाजत नहीं है। यह आरोप कि बाहरी दबाव की वजह से MDR लागू किया जा रहा है, ‘गलत और गुमराह करने वाला’ है।”

सरकार का यह बयान ऐसे समय आया है जब कांग्रेस समेत कुछ विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि सरकार ने 2,000 रुपये से अधिक के व्यापारी यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगाने का फैसला अमेरिकी दबाव में किया है।

NPCI ने क्या कहा?

NPCI ने कहा है कि अधिक मूल्य के चुनिंदा लेनदेन पर एमडीआर लागू करने का उद्देश्य यूपीआई परिवेश के लिए टिकाऊ रेवेन्यू मॉडल तैयार करना है। इसके साथ ही इससे छोटे तीसरे पक्ष के ऐप प्रोवाइडर को बाजार में अधिक हिस्सेदारी हासिल करने के लिए प्रतिस्पर्धा करने का अवसर मिलेगा।

एनपीसीआई ने नवंबर, 2020 में तीसरे पक्ष के ऐप प्रोवाइडर के लिए 30 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी की सीमा तय की थी। हालांकि, उसका कहना है कि टिकाऊ रेवेन्यू मॉडल के अभाव में बाजार की प्रमुख इकाइयों के अलावा अन्य कंपनियां प्रतिस्पर्धा नहीं कर पा रही थीं।

क्या है पूरा मामला?

नए गाइडलाइंस के तहत, 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के व्यक्ति-से-व्यापारी (पी2एम) UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लगेगा। इसका भुगतान व्यापारी करेगा। वहीं, 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर यह अधिकतम 300 रुपये होगा। हालांकि, दो व्यक्तियों के बीच होने वाला लेनदेन और रोजमर्रा के छोटे व्यापारी भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।

रेलवे, दूरसंचार, ईंधन और बीमा जैसी आवश्यक सेवाओं के लिए 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर पांच रुपये का शुल्क होगा। जबकि म्यूचुअल फंड और शेयर ब्रोकिंग जैसे पूंजी बाजार लेनदेन पर 0.02 प्रतिशत एमडीआर लगेगा, जो अधिकतम 300 रुपये होगा। महीने में यूपीआई क्यूआर कोड के जरिए एक लाख रुपये तक का कलेक्शन करने वाले छोटे व्यापारी इस शुल्क से पूरी तरह मुक्त रहेंगे। गांवों और कस्बों में व्यापारियों को किए जाने वाले यूपीआई क्यूआर भुगतान पर भी एमडीआर नहीं लगेगा।

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