व्यापारी 2 अक्टूबर ‘नो UPI डे’ नहीं मनाएंगे, वित्त मंत्री से मुलाकात के बाद विरोध का फैसला वापस लिया

UPI No Day: व्यापारियों के बड़े संगठनों ने 2 अक्टूबर को ‘नो UPI डे’ मनाने का ऐलान वापस ले लिया है। बुधवार को व्यापारिक नेताओं ने दिल्ली में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की। इसके बाद यह फैसला लिया गया।

हालांकि, ₹2,000 से ज्यादा के मर्चेंट UPI पेमेंट पर प्रस्तावित 0.4% फीस अभी भी 15 अक्टूबर से लागू होनी है। इसी फीस के विरोध में ‘नो UPI डे’ का ऐलान किया गया था।

20 व्यापारिक नेताओं से मीटिंग

इस बैठक में करीब 20 वरिष्ठ व्यापारिक नेता शामिल हुए। वे अलग-अलग राज्यों से आए थे। उन्होंने छोटे और मझोले कारोबारियों पर फीस के असर की चिंता जताई।

प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई चांदनी चौक से सांसद और Confederation of All India Traders (CAIT) के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने की।

‘नो UPI डे’ का ऐलान किसने किया था?

All India Consumer Products Federation और All India Mobile Retailers Association ने 2 अक्टूबर को ‘नो UPI डे’ मनाने का ऐलान किया था। अब दोनों संगठनों ने यह फैसला वापस ले लिया है।

प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि वित्त मंत्री के साथ बातचीत सकारात्मक रही। सरकार ने व्यापारियों की चिंताओं पर विचार करने का भरोसा दिया है। इसके बाद दोनों संगठनों ने विरोध वापस लेने का फैसला किया।

UPI फीस टालने की मांग

व्यापारिक संगठनों ने प्रस्तावित MDR को फिलहाल टालने की मांग की है। उनका कहना है कि त्योहारों का सीजन आने वाला है। इस दौरान कारोबार काफी बढ़ जाता है।

ऐसे समय में नई फीस लागू होने से कारोबारियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। इसलिए उन्होंने फीस लागू करने की तारीख आगे बढ़ाने की मांग की है।

₹1 लाख की सीमा बढ़ाने की मांग

व्यापारियों ने प्रस्तावित ₹1 लाख की सीमा की भी समीक्षा करने को कहा है। उनका सुझाव है कि इसे बढ़ाकर ₹5 लाख किया जाए।

इसके अलावा मर्चेंट टु मर्चेंट यानी M2M ट्रांजैक्शन को MDR के दायरे से बाहर रखने की मांग की गई है। व्यापारियों ने इस मामले को देखने के लिए एक विशेष समिति बनाने की मांग भी की है।

व्यापारियों ने सरकार से क्या कहा?

व्यापारियों ने कहा कि प्रस्तावित MDR का असर छोटे और मझोले कारोबारियों पर पड़ सकता है। उनका कहना है कि डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है।

ऐसे में फीस की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिससे डिजिटल पेमेंट की रफ्तार न रुके। साथ ही कारोबारियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ भी न पड़े।

UPI के खिलाफ नहीं हैं व्यापारी

व्यापारिक नेताओं ने कहा कि वे डिजिटल पेमेंट के खिलाफ नहीं हैं। उन्होंने Digital India मिशन और UPI की सफलता के लिए अपना समर्थन दोहराया।

उनका कहना है कि डिजिटल पेमेंट से जुड़े नियम उपभोक्ताओं और कारोबारियों दोनों के लिए संतुलित होने चाहिए। साथ ही इनसे कारोबार की ग्रोथ में भी मदद मिलनी चाहिए।

व्यापारियों को उम्मीद है कि सरकार के साथ बातचीत आगे भी जारी रहेगी। इससे डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने वाला ऐसा सिस्टम बन सकता है, जिसमें कारोबारियों और MSMEs पर ज्यादा बोझ न पड़े।

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UPI MDR Charges: सरकार 15 अक्टूबर की डेडलाइन नहीं बढ़ाएगी, 18% GST का हो सकता है रिव्यू

UPI MDR Charges: सरकार UPI के चुनिंदा ट्रांजैक्शन पर MDR लागू करने की 15 अक्टूबर की तारीख को आगे बढ़ाने के मूड में नहीं है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, तय तारीख से ही नया सिस्टम लागू होगा। हालांकि, MDR पर लगने वाले 18% GST को लेकर GST काउंसिल समीक्षा कर सकती है।

7 अक्टूबर की बैठक में क्या होगा?

MDR पर GST का मुद्दा फिलहाल 7 अक्टूबर को होने वाली GST काउंसिल की बैठक के एजेंडे में नहीं है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि बैठक के दौरान काउंसिल इस मुद्दे को उठा सकती है। यानी अभी यह तय नहीं है कि GST पर कोई फैसला होगा या नहीं।

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब कारोबारियों के बीच MDR को लेकर चिंता है। उनका मानना है कि इससे मर्चेंट्स पर लागत बढ़ सकती है। साथ ही, पूरे UPI ट्रांजैक्शन सिस्टम की लागत पर भी इसका असर पड़ सकता है।

सरकार क्यों ला रही है MDR?

सरकार ने MDR लागू करने का बचाव किया है। सरकार का कहना है कि UPI इकोसिस्टम को चलाने में काफी खर्च होता है। मौजूदा MDR उस पूरी लागत की भरपाई नहीं करता।

सरकारी सूत्रों ने कहा कि UPI पर MDR से इकोसिस्टम को बनाए रखने की लागत की 100% भरपाई नहीं होती। सरकार के मुताबिक, UPI ट्रांजैक्शन बढ़ने के साथ टिकाऊ रेवेन्यू मॉडल की जरूरत भी बढ़ रही है।

₹2,000 से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR

नए सिस्टम के तहत ₹2,000 से ज्यादा के चुनिंदा UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR लगाया जाएगा। हालांकि, एक ट्रांजैक्शन पर इसकी अधिकतम सीमा ₹300 होगी।

MDR की दरें Indian Banks’ Association (IBA) ने संबंधित पक्षों से चर्चा के बाद तय की हैं। यानी इस दर को तय करने की प्रक्रिया में अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स से सलाह ली गई है।

ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा कोई चार्ज

सरकार ने साफ किया है कि UPI से पेमेंट करने वाले ग्राहकों से कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा। यानी आम ग्राहक पहले की तरह UPI के जरिए पेमेंट कर सकेंगे।

वहीं, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति यानी P2P ट्रांजैक्शन भी फ्री रहेंगे। नया MDR चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लागू होगा।

सरकार पेट्रोल पंप पर यूपीआई पेमेंट को एमडीआर से छूट देने पर कर सकती है विचार

MDR Charges Row: 96% मर्चेंट पेमेंट पर नहीं लगेगा कोई शुल्क! वित्त मंत्रालय ने बताया- UPI ट्रांजैक्शन पर कहां लगेगा चार्ज और कहां नहीं लगेगा?

UPI Charges Row: सरकार ने 15 अक्टूबर 2026 से बड़े व्यापारी भुगतान के लिए UPI लेनदेन पर नई शुल्क व्यवस्था लागू करने की घोषणा कर दी है। इसके तहत 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर व्यापारियों से 0.4 प्रतिशत शुल्क लिया जाएगा। जबकि 75,000 रुपये या उससे अधिक के भुगतान पर इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी। हालांकि, भुगतान करने वाले ग्राहकों को यह शुल्क नहीं देना होगा। सरकार का कहना है कि इसका बोझ दुकानदार या व्यापारी को उठाना पड़ेगा।

दो व्यक्तियों के बीच होने वाले पीयर-टू-पीयर (P2M) यूपीआई भुगतान पर किसी भी राशि के लिए कोई मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR)शुल्क नहीं लगेगा। इसके अलावा 2,000 रुपये तक के छोटे व्यापारी लेनदेन भी शुल्क से बाहर रहेंगे। ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (MCR) वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले किसी व्यापारी से लिया जाता है।

96% मर्चेंट पेमेंट पर नहीं लगेगा कोई शुल्क!

सरकार के मुताबिक, व्यक्तियों से व्यापारियों को होने वाले कुल पी2एम लेनदेन की मात्रा में 2,000 रुपये से कम राशि वाले लेनदेन 95 प्रतिशत से भी अधिक हैं। वित्त मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा, “96 प्रतिशत मर्चेंट ट्रांजैक्शन भी रकम की परवाह किए बिना शुल्क से मुक्त रहेंगे। ₹2,000 तक के मर्चेंट पेमेंट और छोटे व्यापारियों के लिए Zero-MDR व्यवस्था के तहत आने वाले ट्रांजैक्शन पर भी कोई शुल्क नहीं लगेगा।”

मंत्रालय के मुताबिक, इसका मतलब है कि लगभग 96 प्रतिशत Person-to-Merchant (P2M) ट्रांजैक्शन पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा। MDR केवल निर्धारित श्रेणी के ₹2,000 से अधिक मूल्य वाले मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लागू होगा। वित्त मंत्रालय ने बयान में कहा, “यह शुल्क केवल 2,000 रुपये से अधिक के पी2एम लेनदेन पर ही 0.4 प्रतिशत की दर से लागू होगा।”

यहां लगेगा 5 रुपये का शुल्क

रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, फ्यूल और खेती के कच्चे माल जैसे जरूरी और कम मार्जिन वाले सेक्टर में 2,000 रुपये से अधिक के प्रत्येक लेनदेन पर पांच रुपये का एक समान शुल्क लगेगा। इसका उद्देश्य महत्वपूर्ण सेवाओं की लागत को विश्वसनीय बनाए रखना है। इन कैटेगरी की हिस्सेदारी पी2एम लेनदेन की मात्रा में करीब 17 प्रतिशत है। जबकि लेनदेन के मूल्य में लगभग 46 प्रतिशत है।

यही समान शुल्क व्यवस्था सरकारी उपयोगिता बिलों (बिजली, पानी और पाइप वाली गैस) के भुगतान तथा स्कूल फीस और विश्वविद्यालय शुल्क जैसे शैक्षणिक भुगतान पर भी लागू होगी। हालांकि 2,000 रुपये तक के ऐसे भुगतान इस शुल्क से मुक्त रहेंगे।

अधिकतम सीमा ₹300 होगी

म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज और शेयर ब्रोकर एवं डीलर के जरिए किए गए पेमेंट पर 0.02% का MDR लगाया जाएगा, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 होगी। सरकार ने कहा है कि UPI ऐप प्रोवाइडर्स को डिजिटल प्लेटफॉर्म फीस या छिपे हुए चार्ज लगाने की इजाजत नहीं होगी। बैंकों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे सुनिश्चित करें कि मर्चेंट इस नई फीस का बोझ ग्राहकों पर न डालें। इसके अलावा, पर्सनल UPI ट्रांजैक्शन के लिए मुफ्त ट्रांजैक्शन की संख्या पर कोई मासिक कोटा या सीमा नहीं होगी।

छोटे व्यापारियों को राहत!

यूपीआई क्यूआर कोड के जरिएहर महीने एक लाख रुपये तक पाने वाले छोटे व्यापारी नई व्यवस्था के तहत शून्य एमडीआर का लाभ लेते रहेंगे। यदि कोई व्यापारी लगातार तीन महीने तक एक लाख रुपये से अधिक का मासिक लेनदेन करता है, तो उसे सामान्य पी2एम कैटेगरी में रखा जाएगा। सरकार के अनुसार, नई व्यवस्था से केवल करीब चार प्रतिशत व्यापारी लेनदेन ही प्रभावित होंगे। इसकी वजह है कि अधिकांश लेनदेन या तो 2,000 रुपये की सीमा से कम हैं या पी2एम छूट के दायरे में आते हैं।

ऑटोपे पर कोई MDR नहीं

नया MDR नियम सिर्फ उन UPI ​​पेमेंट पर लागू होगा जो सीधे यूजर के बैंक अकाउंट से मर्चेंट के अकाउंट में किए जाते हैं। RuPay क्रेडिट कार्ड या पहले से मंजूर ‘क्रेडिट लाइन’ का इस्तेमाल करके UPI से किए गए पेमेंट के लिए अलग नियम होंगे। वहीं, यूटिलिटी बिल, OTT सब्सक्रिप्शन और रेगुलर इन्वेस्टमेंट के लिए ऑटोमेटेड बार-बार होने वाले पेमेंट जैसे UPI मैंडेट या ‘ऑटोपे पर कोई MDR नहीं लगेगा।

2020 से लागू है MDR चार्ज

MDR चार्ज व्यवस्था जनवरी, 2020 से लागू थी। इसका उद्देश्य डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना था। हालांकि, बैंक और फिनटेक कंपनियां इसे टिकाऊ नहीं बताते हुए शुल्क फिर से लागू करने की लंबे समय से मांग कर रही थीं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) भी पहले सरकार से इस नीति की समीक्षा करने का आग्रह कर चुके हैं।

MDR सरकार या NPCI द्वारा वसूला जाने वाला टैक्स नहीं

वित्त मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि MDR को टैक्स या सरकार/NPCI द्वारा वसूला जाने वाला शुल्क नहीं समझना चाहिए। मंत्रालय के अनुसार, यह राशि पेमेंट इकोसिस्टम में शामिल विभिन्न पक्षों, जैसे बैंकों और पेमेंट ऐप प्रोवाइडर्स के बीच वितरित की जाती है। मंत्रालय ने कहा कि इसका उद्देश्य UPI सिस्टम के संचालन और उसके लगातार विस्तार को समर्थन देना है।

UPI को लंबे समय तक टिकाऊ बनाने की कोशिश

मंत्रालय के मुताबिक, यह व्यवस्था Payment and Settlement Systems Act, 2007 के तहत ‘यूपीआई स्टीयरिंग कमेटी’ में विस्तृत विचार-विमर्श के बाद लाई गई है। इसका उद्देश्य UPI इकोसिस्टम की स्थिरता और विस्तार सुनिश्चित करना है। साथ ही आम लोगों और छोटे व्यापारियों को अतिरिक्त शुल्क से बचाना है।

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UPI ट्रांजैक्शन पर कहां लगेगा चार्ज और कहां नहीं लगेगा?  

  • 2,000 रुपये तक के यूपीआई लेनदेन पर कोई एमडीआर नहीं लगाया जाएगा।
  • 2,000 रुपये से अधिक के ग्राहक-से-व्यापारी लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू होगा।
  • 3,000 रुपये की खरीदारी पर 0.4 प्रतिशत की दर से व्यापारी द्वारा जमाकर्ता बैंक को 12 रुपये का शुल्क देना होगा।
  • यह कमीशन बैंकों सहित पूरे पेमेंट इकोसिस्टम के पार्टनर्स के बीच बांटा जाएगा।
  • लेनदेन मूल्य की परवाह किए बिना व्यक्तियों के बीच होने वाले (पी2पी) लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।
  • ₹75,000 और उससे ज्यादा के बड़े पेमेंट के लिए MDR की सीमा हर ट्रांजैक्शन पर अधिक से अधिक ₹300 तय की जाएगी।
  • टेलीकॉम, इंश्योरेंस और फ्यूल जैसे जरूरी सेक्टर के लिए हर ट्रांजैक्शन पर ₹5 का फ़्लैट MDR लागू होगा।
  • म्यूचुअल फंड और स्टॉक ब्रोकर को किए जाने वाले भुगतान पर अधिकतम 300 रुपये की सीमा के साथ 0.02 प्रतिशत एमडीआर लगेगा।
  • प्रति माह एक लाख रुपये तक प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारियों के लिए सभी लेनदेन पर अनिवार्य रूप से शून्य एमडीआर की सुविधा मिलेगी।
  • UPI ऐप सेवाओं पर स्टेज फीस या किसी भी तरह के छिपे हुए शुल्क लगाने पर रोक होगी।
  • बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि व्यापारी यूपीआई भुगतान के लिए उपभोक्ताओं पर एमडीआर शुल्क का बोझ न डालें।
  • व्यक्तियों के लिए मुफ्त यूपीआई लेनदेन पर कोई मासिक कोटा, मात्रा की सीमा नहीं होगी।
  • बैंकों और NPCI की ओर से लागू की गई रोजाना ट्रांज़ैक्शन की सीमाएं कैटेगरी के आधार पर ₹1 लाख से ₹5 लाख के दायरे में रहेंगी।
  • कुल एमडीआर कलेक्शन के पांच प्रतिशत योगदान के साथ छोटे व्यापारियों द्वारा यूपीआई के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष कोष स्थापित किया जाएगा।
  • एमडीआर लागू होने से केवल चार प्रतिशत मर्चेंट लेनदेन ही प्रभावित होंगे।
  • नया एमडीआर ढांचा 15 अक्टूबर, 2026 से प्रभावी होगा।

UPI MDR Charge: क्या OTT सब्सक्रिप्शन, SIP का ऑटोपे महंगा होगा? शेयर मार्केट, इंश्योरेंस से पेट्रोल तक… कितना चार्ज लगेगा? समझिए सभी नियम

UPI MDR Charge: UPI पेमेंट पर हर जगह एक जैसा MDR नहीं लगेगा। अलग-अलग सेक्टर के लिए अलग नियम बनाए गए हैं। कैपिटल मार्केट, इंश्योरेंस, पेट्रोल पंप, सरकारी बिल और एजुकेशन पेमेंट के लिए अलग MDR स्ट्रक्चर है।

इनमें कई जगह ₹2,000 तक के पेमेंट पर MDR नहीं है। वहीं बड़े पेमेंट के लिए फ्लैट फीस या अधिकतम सीमा वाला सिस्टम रखा गया है। NCPI ने बताया है कि किस सेक्टर में कितना MDR रहेगा।

ऑटोपे वाले UPI पेमेंट पर चार्ज नहीं लगेगा

UPI के चुनिंदा पेमेंट पर MDR लागू होने से उन लोगों को चिंता करने की जरूरत नहीं, जो ऑटोपे से पेमेंट करते हैं। इनमें Netflix, Amazon Prime जैसे OTT सब्सक्रिप्शन शामिल हैं। बिजली-पानी के बिल और म्यूचुअल फंड SIP भी इसी तरह ऑटोमैटिक कटते हैं।

NPCI ने अपने FAQ में यह बात साफ की है कि UPI ऑटोपे पर तय MDR चार्ज नहीं लगेगा।

कैपिटल मार्केट पेमेंट पर कितना MDR?

कैपिटल मार्केट से जुड़े UPI पेमेंट पर 0.02% MDR लगेगा। हालांकि, इसकी अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन है।

यह नियम रेगुलेटेड कैपिटल मार्केट संस्थाओं से जुड़े पेमेंट पर लागू होगा। इसमें एसेट मैनेजमेंट कंपनियां यानी म्यूचुअल फंड की AMC, SEBI रजिस्टर्ड स्टॉकब्रोकर, सिक्योरिटीज डीलर और इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म शामिल हैं। UPI से डेट इंस्ट्रूमेंट खरीदने, म्यूचुअल फंड में निवेश करने और ब्रोकर वॉलेट में पैसा डालने जैसे पेमेंट भी इसमें शामिल हैं।

इंश्योरेंस प्रीमियम पर क्या चार्ज लगेगा?

इंश्योरेंस प्रीमियम के लिए भी अलग MDR रखा गया है। ₹2,000 से ज्यादा के प्रीमियम पेमेंट पर 0.04% या ₹5 का फ्लैट MDR लागू होगा।

यानी इस कैटेगरी में ज्यादा रकम के पेमेंट पर सामान्य तरीके से MDR बढ़ता नहीं जाएगा। बड़े प्रीमियम का पेमेंट करने वालों के लिए यह व्यवस्था ज्यादा काम की हो सकती है। खास बात यह है कि साल में एक या दो बार प्रीमियम भरने वाले ग्राहकों के बड़े पेमेंट पर ज्यादा प्रतिशत के हिसाब से फीस नहीं बढ़ेगी।

पेट्रोल पंप पर UPI पेमेंट का नियम

पेट्रोल पंप पर ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर ₹5 का फ्लैट MDR रखा गया है। यानी पेट्रोल की रकम बढ़ने के साथ MDR भी उसी अनुपात में नहीं बढ़ेगा।

वहीं ₹2,000 तक के फ्यूल पेमेंट पर MDR शून्य रहेगा। इसका मतलब छोटे पेट्रोल-डीजल पेमेंट पर MDR नहीं लगेगा।

बिजली-पानी के बिल पर कितना MDR?

बिजली, पानी और पाइप्ड नेचुरल गैस जैसे यूटिलिटी पेमेंट के लिए भी अलग व्यवस्था है। ₹2,000 से ज्यादा के यूटिलिटी पेमेंट पर ₹5 प्रति ट्रांजैक्शन का MDR रखा गया है। ₹2,000 तक के पेमेंट पर MDR नहीं लगेगा।

इसमें बिजली के बिल, नगर निकाय के पानी के शुल्क और पाइप्ड नेचुरल गैस के पेमेंट शामिल हैं। इस व्यवस्था का मकसद सरकारी बोर्ड और नगर निकायों के लिए डिजिटल बिल कलेक्शन को सस्ता रखना है।

स्कूल-कॉलेज की फीस पर क्या नियम है?

एजुकेशन पेमेंट को भी अलग कैटेगरी में रखा गया है। इसमें स्कूल की फीस, यूनिवर्सिटी की टर्म फीस और संस्थानों की एंट्रेंस एग्जाम फीस शामिल हैं। ₹2,000 तक के एजुकेशन पेमेंट पर MDR पूरी तरह फ्री रहेगा। ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट के लिए फ्लैट फीस या कैप वाली व्यवस्था का फायदा मिलेगा।

इससे बड़े एजुकेशन पेमेंट पर ज्यादा प्रतिशत के हिसाब से फीस लगने का बोझ कम होगा। स्कूल, कॉलेज और स्टूडेंट्स बड़ी फीस का पेमेंट भी डिजिटल तरीके से कर सकेंगे।

अलग-अलग सेक्टर के लिए अलग MDR क्यों?

NCPI का कहना है कि UPI पर हर तरह के पेमेंट का पैटर्न एक जैसा नहीं है। कहीं छोटे-छोटे पेमेंट होते हैं। वहीं कैपिटल मार्केट, इंश्योरेंस और एजुकेशन में एक बार में बड़ी रकम का पेमेंट हो सकता है।

इसी वजह से इन सेक्टर के लिए अलग MDR स्ट्रक्चर रखा गया है। कहीं प्रतिशत के हिसाब से MDR है। वहीं कुछ जगह फ्लैट फीस या अधिकतम सीमा तय की गई है। इससे बड़े पेमेंट पर MDR का खर्च नियंत्रित रखने की कोशिश की गई है।

UPI पर ट्रांजेक्शन चार्ज को लेकर दुविधा में हैं? तो यहां जानें अपने हर सवाल का पूरा जवाब

2000, 3000, 50000 से लेकर 75000 रुपये तक के UPI पेमेंट पर कितना लगेगा MDR, यहां जानिए पूरा कैलकुलेशन

UPI पेमेंट पर MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट को लेकर अब तस्वीर साफ है, जो 15 अक्टूबर से लागू होने वाली है। इसका हिसाब पेमेंट की रकम के आधार पर होगा। ₹2,000 तक के ट्रांजैक्शन पर कोई MDR नहीं लगेगा। इसके ऊपर 0.40% की दर से MDR की गणना होगी। हालांकि, बड़े पेमेंट पर इसकी अधिकतम सीमा भी तय है।

सरकार ने साफ किया है कि MDR ग्राहक को नहीं देना होगा। इसका भुगतान मर्चेंट यानी दुकानदार करेगा। यह रकम मर्चेंट के बैंक को मिलेगी। इसलिए ग्राहक के खाते से पेमेंट की रकम के अलावा MDR की रकम अलग से नहीं कटेगी।

किस पेमेंट पर कितना लगेगा MDR

मर्चेंट को दी गई रकमMDR प्रतिशतMDR की रकम
₹2,000कोई MDR नहीं₹0
₹3,0000.40%₹12
₹50,0000.40%₹200
₹75,000 से ज्यादाअधिकतम ₹300₹300

₹3,000 के पेमेंट पर कितना MDR?

मान लीजिए आपने किसी दुकान पर ₹3,000 का UPI पेमेंट किया। इस रकम पर 0.40% MDR लगेगा। ₹3,000 का 0.40% ₹12 होता है। यानी मर्चेंट को इस ट्रांजैक्शन पर ₹12 MDR देना होगा।

अब ₹50,000 का पेमेंट लेते हैं। इसका 0.40% ₹200 होता है। यानी ₹50,000 के UPI पेमेंट पर मर्चेंट का MDR ₹200 होगा।

₹75,000 के बाद क्या होगा?

यहां एक जरूरी बात है। बड़े पेमेंट पर MDR की एक अधिकतम सीमा रखी गई है। ₹75,000 और उससे ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर MDR ₹300 फिक्स रहेगा। इसके बाद पेमेंट की रकम बढ़ने पर भी MDR ₹300 से ज्यादा नहीं होगा।

इसे ₹1 लाख के पेमेंट से समझिए। ₹1 लाख का 0.40% ₹400 होता है। लेकिन यहां ₹300 की अधिकतम सीमा लागू होगी। इसलिए मर्चेंट को ₹400 नहीं, बल्कि ₹300 MDR देना होगा।

₹2,000 के पेमेंट पर कोई MDR नहीं

₹2,000 तक के UPI पेमेंट पर MDR शून्य रहेगा। यानी ₹2,000 के पेमेंट पर मर्चेंट को कोई MDR नहीं देना होगा।

इसके बाद ₹3,000 पर ₹12 और ₹50,000 पर ₹200 MDR होगा। वहीं ₹75,000 या उससे ज्यादा के पेमेंट पर MDR ₹300 पर रुक जाएगा।

UPI MDR Fees: ₹2000 से ऊपर के पेमेंट पर 0.40% MDR लगेगा, हर ट्रांजैक्शन पर ₹300 की लिमिट रहेगी

UPI Payment पर 6 साल बाद फिर लगेगा MDR! क्यों हो रही वापसी, किनमें बंटेगा इसका पैसा

UPI Payment Charges: लगभग छह साल बाद यूपीआई से लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वापस आ सकता है। दुकानदार को ₹2,000 या उससे अधिक के यूपीआई पेमेंट पर 0.3% का चार्ज लग सकता है। इसके लागू होने का कानूनी रास्ता तब साफ हुआ, जब सरकार ने अगस्त में पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट में बदलाव किया और जीरो-एमडीआर प्रोटेक्शन को हटा दिया। 21 अगस्त की फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक अब यूपीआई से पेमेंट पर जीरो की बजाय 0.3% के शुल्क का नियम अगले दो हफ्ते के भीतर लागू किया जा सकता है। हालांकि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ कर दिया है कि ग्राहकों और छोटे कारोबारियों पर इसका भार नहीं डाला जाएगा। सरकार की कोशिश इस पेमेंट सिस्टम से जुड़ी एंटिटीज को डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाए रखने पर होने वाले खर्च के कुछ हिस्से की भरपाई है। ₹2,000 या इससे अधिक के लेन-देन पर MDR लागू होने से इलेक्ट्रॉनिक्स, सिक्योरिटीज, कपड़े और अधिक दाम वाली खरीदारी प्रभावित हो सकती है।

किसे मिलेगा UPI Payment में MDR का पैसा

एमडीआर का पैसा किसी एक को नहीं मिलेगा बल्कि बैंक, फिनटेक कंपनियां और इस लेन-देन में शामिल अन्य एंटिटीज में बंटेगा। साल 2019 तक एमडीआर वाली व्यवस्था लागू थी लेकिन फिर डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए इसे जीरो कर दिया गया। इसे हटाए जाने से पहले ₹100 से अधिक मूल्य वाले ऑफलाइन क्यूआर कोड के जरिए किए गए P2M (पर्सन-टू-मर्चेंट) पेमेंट पर 0.3% शुल्क लगता था, जिसे इश्यूअर (Issuer) और एक्वायरर (Acquirer) बैंकों के बीच बराबर बांटा जाता था। एमडीआर की अधिकतम सीमा भी ₹100 थी, जिसे साल 2020 में पूरी तरह समाप्त कर दिया गया।

अब इसे फिर लाया जा रहा है। इसका पैसा पेमेंट चेन में चार प्लेयर्स के बीच बंटेगा। एक हिस्सा ग्राहक के बैंक को, दूसरा हिस्सा पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और ट्रांजैक्शन हैंडल करने वाले इसके बैंक को, तीसरा हिस्सा दुकानदार की तरफ से यानी एक्वायरिंग बैंकों और उसके पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को तो चौथा हिस्सा यूपीआई नेटवर्क चलाने और लेन-देन का निपटारा करने वाली NPCI को मिलेगा। एमडीआर में सबसे अधिक हिस्सा इंटरचेंज शुल्क के रूप में इश्यूइंग बैंक यानी ग्राहकों के बैंक को तो सबसे कम हिस्सा एनपीसीआई को मिलेगा।

क्यों हुई वापसी

भर्तृहरि महताब के नेतृत्व में फाइनेंस से जुड़ी संसदीय स्थायी समिति ने 12 अगस्त को अपनी रिपोर्ट में जिक्र किया कि यूपीआई को बढ़ावा देने और जीरो-MDR के कारण इंडस्ट्री के रेवेन्यू लॉस की भरपाई के लिए सरकार ने सिर्फ ₹2,000 करोड़ एलॉट किए हैं जोकि डिजिटल पेमेंट इंडस्ट्री की अनुमानित सालाना लागत ₹20,700 करोड़ से बहुत ही कम है। कमेटी ने आगाह किया है कि इसके चलते साइबर सिक्योरिटी, फर्जीवाड़े की रोकथाम और पेमेंट नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर में जरूरी निवेश प्रभावित हो सकता है। चूंकि अब एआई का इस्तेमाल बढ़ा है तो साइबर खतरे भी बढ़े हैं, जिससे चिंता और गंभीर हो गई है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा भी कह चुके हैं कि यूपीआई हमेशा फ्री नहीं रह सकता है और कोई न कोई इसका खर्च चुका रहा है।

हालांकि सिर्फ एमडीआर ही इन खर्चों की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं है। डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज ने संसदीय समिति को बताया कि फंडिंग के बोझ को कम करने के लिए दो विकल्पों पर विचार किया जा रहा है- अधिक वैल्यू वाले यूपीआई पेमेंट पर एमडीआर को दोबारा लागू करना या आने वाले वषों में सरकारी सहायता को धीरे-धीरे कम करना। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में देश में करीब ₹314 लाख करोड़ के 24,000 करोड़ से अधिक UPI लेनदेन हुए। इसमें से 71% P2P (पर्सन-टू-पर्सन) और बाकी P2M (पर्सन-टू-मर्चेंट) थे। पी2एम में सिर्फ 4% की वैल्यू ही ₹2,000 या उससे अधिक थी यानी कि अधिकतर यूपीआई पेमेंट एमडीआर के दायरे से बाहर रहेगा तो छोटे कारोबारियों को बाहर रखने से इसका दायरा और सीमित हो जाता है।

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क्या UPI पेमेंट पर आपको देना होगा चार्ज और कटेगा आपका पैसा? करोड़ों यूजर्स के लिए Payments Council of India ने दिया बड़ा अपडेट

UPI Payment Update: देश में डिजिटल पेमेंट का आधार बन चुके यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों यूजर्स के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या आने वाले समय में UPI पेमेंट पर चार्ज लगेगा? इस पूरे विवाद और चर्चाओं के बीच पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक डिटेल्ड Q&A शेयर कर कई जरूरी चीजों पर स्थिति साफ की है। हमारे सहयोगी सीएनबीसी टीवी 18 की रिपोर्ट के मुताबिक PCI और केंद्र सरकार दोनों ने साफ कर दिया है कि आम उपभोक्ताओं के लिए UPI पेमेंट पूरी तरह से मुफ्त है और रहेगा। इस पूरी बहस का मुख्य केंद्र उपभोक्ता नहीं बल्कि भारत के इस विशाल डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को चलाने पर आने वाली लागत है।

आम उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों के लिए UPI रहेगा बिल्कुल फ्री

पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) के मुताबिक UPI के इस्तेमाल और UPI पेमेंट्स स्वीकार करने के बीच के फर्क को समझना जरूरी है। 2016 में अपनी शुरुआत से लेकर अब तक आम यूजर्स के लिए UPI पूरी तरह से फ्री रहा है। कस्टमर बिना किसी ट्रांजैक्शन चार्ज के एक बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते में तुरंत पैसे भेज सकते हैं। किराना दुकानों सहित देश के छोटे व्यापारियों के लिए भी UPI पेमेंट स्वीकार करने पर कोई मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) नहीं लगता है। भारत के सबसे छोटे व्यवसायों तक डिजिटल भुगतान को सुलभ बनाए रखना इस प्लेटफॉर्म के विस्तार का मुख्य आधार रहा है।

फ्री होने के बावजूद क्यों उठ रहे हैं फंडिंग और लागत से जुड़े सवाल?

अगर ग्राहकों और छोटे व्यापारियों से कोई चार्ज नहीं लिया जा रहा है, तो फिर UPI पर खर्च कौन उठा रहा है? PCI ने स्पष्ट किया है कि भले ही यह सेवा यूजर्स के लिए मुफ्त है लेकिन इसका इंफ्रास्ट्रक्चर मुफ्त में काम नहीं करता। UPI इकोसिस्टम को चलाने के लिए टेक्नोलॉजी, साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी की रोकथाम, कंप्लायंस, कस्टमर सपोर्ट और इनोवेशन में लगातार इन्वेस्टमेंट की जरूरत होती है। पिछले लगभग एक दशक में बैंकों, पेमेंट कंपनियों, फिनटेक फर्मों, भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मिलकर इस नेटवर्क को बनाने और इसे बनाए रखने में भारी निवेश किया है। PCI के मुताबिक यह बहस किसी यूजर के रोजमर्रा के ट्रांजैक्शन पर फीस लगाने के बारे में नहीं है बल्कि ट्रांजैक्शन वॉल्यूम बढ़ने के साथ पेमेंट सिस्टम के सस्टेनेबल फंडिंग को लेकर है।

मर्चेंट सर्विस चार्ज को लेकर क्या है स्थिति?

सीएनबीसी टीवी 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, मर्चेंट सर्विस चार्ज (जहां लागू हो) व्यापारियों और उनके पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स के बीच की वाणिज्यिक व्यवस्था होती है। ऐसे किसी भी शुल्क का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि आम ग्राहकों को UPI का इस्तेमाल करने के लिए पैसे देने पड़ेंगे। UPI अब सिर्फ एक पेमेंट ऑप्शन नहीं रह गया है बल्कि यह भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का एक अहम हिस्सा बन चुका है। इसका इस्तेमाल करोड़ों आम लोग और बिजनेस कर रहे हैं। 24×7 सुरक्षित, मजबूत और बिना किसी बाधा के सर्विस देने के लिए साइबर सुरक्षा और टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन पर लगातार फंडिंग की जरूरत होती है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का स्पष्टीकरण और संसद का नया विधेयक

UPI पर MDR और चार्जेस को लेकर हाल ही में उठी आशंकाओं पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि भविष्य में अगर कभी MDR पेश किया भी जाता है तो वह मर्चेंट्स (व्यापारियों) पर लागू होगा, ग्राहकों पर नहीं। यह स्पष्टीकरण टैक्सेशन और दूसरे कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 के बाद पैदा हुई चिंताओं के जवाब में आया है। हालांकि इस विधेयक के तहत UPI ट्रांजैक्शन पर कोई MDR या नई फीस लागू नहीं की गई है। यह बिल सिर्फ एक कानूनी ढांचा तैयार करता है, जो सरकार को भविष्य की अधिसूचनाओं के माध्यम से मौजूदा जीरो-MDR व्यवस्था में संशोधन करने का अधिकार देता है।

MDR क्या होता है और आगे क्या होगा?

MDR वह शुल्क होता है जो पेमेंट लेने वाला व्यापारी देता है, न कि पेमेंट करने वाला ग्राहक। आमतौर पर यह शुल्क ट्रांजैक्शन प्रोसेस करने वाले अधिग्रहणकर्ता बैंक, जारीकर्ता बैंक, पेमेंट नेटवर्क और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स के बीच बांटा जाता है। बैंकों और पेमेंट कंपनियों ने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सुरक्षा और सिस्टम अपग्रेडेशन के बढ़ते खर्चों पर चिंता जताई है। वित्त मंत्री ने जानकारी दी है कि संसद द्वारा विधेयक पारित किए जाने के बाद ही NPCI की अध्यक्षता वाली UPI और सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी इस मुद्दे की समीक्षा करेगी। फिलहाल आम UPI यूजर्स के लिए कोई बदलाव नहीं हुआ है और जीरो-कॉस्ट पेमेंट की मौजूदा व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी।