Trading Plan : वीकली एक्सपायरी के दिन बाजार में जोरदार तेजी, जानिए आगे के लिए क्या हो ट्रेडिंग रणनीति

Trading Plan : IT शेयरों के दम पर बाजार में जोरदार तेजी देखने को मिल रही है। वीकली एक्सपायरी पर निफ्टी करीब 190 प्वाइंट उछलकर 22550 के करीब कारोबार कर रहा है। हालांकि बैंक निफ्टी में 20 DEMA पर रजिस्टेंस दिखा है। फिर भी यह 200 प्वाइंट ऊपर है। वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में ऊपरी स्तरों से दबाव है। वोलैटिलिटी इंडेक्स INDIA VIX 7% से ज्यादा फिसलकर ठंडा पड़ा है।

आज सबसे दमदार और सुपरहिट प्ले साबित हुआ IT सेक्टर। अच्छे नतीजे और कमेंट्री के बाद HCL टेक 4 परसेंट चढ़कर निफ्टी का टॉप गेनर बना है। उधर TCS, एम्फैसिस, LTM, कोफोर्ज, पर्सिस्टेंट में भी जोश है। AI ट्रेड में रिवर्सल से सपोर्ट मिला है।

MDR चार्ज लागू होने की तारीख बढ़ा दी गई है। अब यह 15 अक्टूबर की बजाए दिवाली के तुरंत बाद लागू होगा। तारीख का एलान जल्द होगा। NPCI के बयान के बाद फिनटेक शेयरों में निचले स्तरों से रिकवरी दिखीहै।

अमेरिका में AI शेयरों में रिवर्सल से GE वर्नोवा, हिताची और CG पावर का सेंटीमेंट बिगड़ा है। तीनों शेयर वायदा के टॉप लूजर्स में शामिल है। वहीं जनवरी सीरीज में वायदा से बाहर होने से पॉलिकैब में मिनी एक्सिडेंट हुआ है। उधर नतीजों के बाद RBL बैंक में तेज गिरावट है, यह करीब 7 परसेंट टूटा है।

IT के साथ साथ FMCG और PSU बैंकों में ज्यादा खरीदारी आई है। ये दोनों सेक्टर इंडेक्स करीब एक परसेंट मजबूत दिख रहे हैं। फाइनेंशियल और रियल्टी में भी तेजी है। लेकिन फार्मा और डिफेंस में हल्का दबाव है।

बंधन बैंक में आज जोरजदार तेजी है। यह शेयर 8 परसेंट उछलकर वायदा का टॉप गेनर बना है। न्यूज रिपोर्ट्स के मुताबिक IHC और दूसरे निवेशक बंधन फाइनेंशियल होल्डिंग्स में हिस्सा खरीद सकते हैं। हालांकि खबर पर बैंक ने सफाई जारी करते हुए कहा है कि उसे ऐसी कोई जानकारी नहीं है।

उधर कल वायदा में शामिल केनरा बैंक, BHEL और ICICI लोम्बार्ड के नतीजे आएंगे। दूसरी तिमाही में केनरा बैंक की ब्याज से कमाई यानी NII 17% से ज्यादा बढ़ सकती है। वहीं मुनाफा फ्लैट रह सकता है। असेट क्वॉलिटी में भी सुधार दिख सकता है। वहीं BHEL का प्रॉफिट 78% बढ़ सकता है।

एक्सपायरी के दिन उठापटक

बाजार पर अपनी राय साझा करते हुए सीएनबीसी-आवाज के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने कहा कि आज उतार-चढ़ाव भरा दिन रहा,लेकिन ज्यादातर बढ़त के साथ कारोबार हुआ। निफ्टी का हाई एक बार फिर 10 DEMA पर थमा। इसी तरह बैंक निफ्टी का हाई भी एक बार फिर 20 DEMA पर थमता दिखा। बड़ी तेजी IT में आई। आज सुबह के शो की शुरुआत हमने IT के साथ की थी। सिर्फ आवाज ने बताया,आज IT क्यों चलेगा और पावर शेयर क्यों गिरेंगे। HCL Tech की अगुवाई में IT में बड़ी रैली देखने को मिली। वहीं, GVT&D, हिताची जैसे शेयरों में गिरावट दिखी। कॉस्पी की बड़ी गिरावट का सीधा असर दिखा। आज स्मॉल कैप ने काफी खराब प्रदर्शन किया।

बाजार: अब क्या?

अनुज सिंघल ने कहा कि बाजार में अभी भी रिस्क वही है। 10 और 20 DEMA पर रुकावट है। आज एक्सपायरी है,आखिरी घंटे में बड़े मूव आ सकते हैं। आज पूरे बाजार को IT ने संभाला है। सुबह गैप अप खुलने के बाद भी IT में बड़ा ट्रेड मिला और रोज आपको एक बड़ी थीम पर फोकस करना है। आज सुबह हमने सिर्फ इसी ट्रेड पर फोकस किया। निफ्टी को चलने के लिए 3-4 और सेक्टर्स को चलना होगा। बैंक निफ्टी 20 DEMA के पास आकर रुक रहा है। रुपये में दूसरे दिन भी मजबूती है,जो पॉजिटिव है।

निफ्टी-बैंक निफ्टी पर स्ट्रटैटेजी

अनुज सिंघल के मुताबिक निफ्टी के लिए 22,550-22,600 और फिर 22,650 पर रेजिस्टेंस है। इसके लिए 22,400-22,450 पर सपोर्ट है। वहीं, बैंक निफ्टी के लिए 55,050-55,250, फिर 55,500 पर रेजिस्टेंस है। इसके लिए 54,800-55,000 पर सपोर्ट है।

 

 

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UPI पर MDR चार्ज लागू होने की 15 अक्टूबर की तारीख टली, नए डेट को लेकर आया अब ये बड़ा अपडेट

UPI MDR Date Extended: देशभर के करोड़ों UPI यूजर्स और दुकानदारों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। त्योहारी सीजन की खरीदारी के बीच 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाले यूपीआई मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के नए नियमों को दिवाली के बाद तक के लिए आगे बढ़ा दिया गया है।

उद्योग जगत, मर्चेंट बॉडीज, फिनटेक कंपनियों और पेमेंट एग्रीगेटरों द्वारा नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और वित्त मंत्रालय के सामने उठाई गई चिंताओं के बाद इस डेडलाइन को बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया गया है।

क्यों बढ़ाई गई MDR लागू करने की तारीख?

पिछले महीने यूपीआई स्टीयरिंग कमेटी ने ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा P2M ट्रांजैक्शंस पर 0.4% MDR चार्ज लगाने का प्रस्ताव रखा था। लेकिन जैसे-जैसे इसकी डेडलाइन (15 अक्टूबर) पास आ रही थी, बाजार में कई बड़ी व्यावहारिक और तकनीकी दिक्कतें सामने आ रही थीं:

त्योहारी सीजन का असर: दशहरा, दिवाली और छठ जैसे बड़े त्योहारों के दौरान देश में सबसे ज्यादा खुदरा कारोबार होता है। ऐसे में अचानक MDR लागू होने से व्यापारियों पर अतिरिक्त लागत का बोझ पड़ता, जिसके त्योहारी खरीदारी के दौरान महंगाई के रूप में ग्राहकों की जेब पर असर पड़ने की पूरी आशंका थी।

कैटेगिरी और तकनीकी भ्रम: कार्ड्स के मुकाबले UPI का ढांचा काफी अलग है। इसमें यूटिलिटी बिल, लोन रीपेमेंट (ऑटो-डेबिट फेल होने पर मैन्युअल पेमेंट) और कैपिटल मार्केट (शेयर बाजार/ब्रोकिंग अकाउंट में फंड ट्रांसफर) जैसे ट्रांजैक्शन्स के लिए अलग-अलग नियम तय किए गए हैं, जिन्हें लेकर पेमेंट कंपनियों और मर्चेंट्स में असमंजस की स्थिति बनी हुई थी।

कैपिटल मार्केट और लोन रीपेमेंट का पेंच: ब्रोकिंग और कैपिटल मार्केट एसोसिएशन ने भी सेबी के सामने यह बात रखी थी कि ट्रेडिंग अकाउंट में पैसे डालना पर्सन-टू-पर्सन (P2P) जैसा ही है, जिस पर अतिरिक्त MDR लादना सही नहीं है। इन सभी तकनीकी और सिस्टम अपग्रेड से जुड़ी अड़चनों को दूर करने के लिए उद्योग जगत ने इसे आगे बढ़ाने की मांग की थी।

अब क्या रहेगा मौजूदा नियम?

अब जब तक नई डेडलाइन नहीं आती, तब तक यूपीआई के जरिए होने वाले सभी सामान्य मर्चेंट पेमेंट और रोजमर्रा के लेनदेन पहले की तरह ही पूरी तरह सुरक्षित और बिना किसी अतिरिक्त MDR चार्ज के जारी रहेंगे। इसके साथ छोटे दुकानदारों, स्ट्रीट वेंडर्स और आम ग्राहकों को त्योहारी सीजन के दौरान किसी भी प्रकार के अतिरिक्त शुल्क की चिंता करने की जरूरत नहीं है।

अप्रैल-सितंबर में 27% बढ़े UPI ट्रांजेक्शन, ₹177 लाख करोड़ पर पहुंची वैल्यू

UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) के जरिए लेनदेन की संख्या चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही यानि कि अप्रैल-सितंबर 2026 में 27 प्रतिशत बढ़कर करीब 145 अरब हो गई। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में UPI के जरिए 114 अरब लेनदेन हुए थे। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-सितंबर 2026 के दौरान UPI के जरिए 177 लाख करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ। यह आंकड़ा एक साल पहले के 148 लाख करोड़ रुपये से 20 प्रतिशत ज्यादा है।

हालांकि सितंबर में UPI के जरिए लेनदेन मासिक आधार पर 1.8 प्रतिशत घटकर 2,407 करोड़ रहा। अगस्त में UPI के जरिए 2,450 करोड़ लेनदेन हुए थे। भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में UPI के जरिए लेनदेन की कुल वैल्यू भी 1.50 प्रतिशत घटकर 29.37 लाख करोड़ रुपये रही, जो अगस्त में 29.82 लाख करोड़ रुपये थी। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि लेनदेन में गिरावट का कारण अगस्त में 31 दिन और सितंबर में 30 दिन होना है। सितंबर में प्रतिदिन औसत लेनदेन 80.2 करोड़ रहा, जबकि अगस्त में यह 79.1 करोड़ था।

15 अक्टूबर से 2000 रुपये से अधिक के UPI लेनदेन पर MDR

सरकार ने 15 अक्टूबर 2026 से मर्चेंट्स के लिए 2,000 रुपये से अधिक के UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू किया है। छोटे पेमेंट्स पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। दो व्यक्तियों के बीच (पर्सन टू पर्सन) लेनदेन फ्री रहेगा, फिर चाहे भेजी गई राशि कितनी भी हो। UPI QR कोड के जरिए महीने में 1 लाख रुपये तक पेमेंट लेने वाले छोटे मर्चेंट किसी भी नए चार्ज से पूरी तरह मुक्त रहेंगे।

75,000 रुपये और उससे अधिक के लेन-देन के लिए, MDR की मैक्सिमम लिमिट प्रति लेन-देन 300 रुपये तक ही रहेगी। रेलवे, टेलिकॉम, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट सहित आवश्यक और कम मार्जिन वाले क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के लेन-देन पर प्रति लेनदेन 5 रुपये का एकसमान MDR लागू होगा। म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज और शेयर ब्रोकर व डीलर के जरिए किए जाने वाले पेमेंट पर 0.02 प्रतिशत MDR लगेगा, जो अधिकतम 300 रुपये होगा।

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ऐसे बंटेगी MDR की रकम

MDR लगाने का मकसद डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम के लिए एक टिकाऊ रेवेन्यू सिस्टम बनाना है। MDR वह फीस है, जो मर्चेंट डिजिटल ट्रांजेक्शन को प्रोसेस करने के लिए पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को देते हैं। इकट्ठा की गई रकम को UPI इकोसिस्टम में बैंकों और दूसरी एंटिटीज के बीच बांटा जाएगा। इकट्ठा किए गए कुल MDR का 40% ग्राहकों के बैंकों को, 30% पेमेंट गेटवे को, 20% UPI ऐप को और बाकी 10% UPI ऐप के स्पॉन्सर बैंक को जाएगा।

UPI Charges: ₹2000 से ज्यादा के UPI ट्रांजैक्शन पर चार्ज का रास्ता साफ! सुप्रीम कोर्ट ने स्टे देने से किया इनकार

UPI Merchant Transaction Charges: ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट से बड़ा अपडेट आया है। केंद्र सरकार के फैसले पर कोर्ट ने फिलहाल रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है। वैसे शीर्ष अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है और इस फैसले के कानूनी आधार व तकनीकी पहलुओं को स्पष्ट करने के लिए एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ती जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने वित्त मंत्रालय की ओर से 14 और 15 सितंबर को जारी गजट अधिसूचनाओं को रद्द करने की मांग वाली रिट याचिका पर यह सुनवाई की।

कोर्ट रूम दिखा जबरदस्त ड्रामा

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने यूपीआई लेनदेन पर लगाए जा रहे इस शुल्क के कानूनी स्वरूप और अधिकार क्षेत्र पर कई अहम सवाल उठाए। जस्टिस बागची ने सवाल किया कि, ‘यह फीस या टैक्स नहीं तो आखिर क्या है?’ न्यायमूर्ती जॉयमाल्य बागची ने सरकार की मंशा और अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘अगर यह कोई फीस नहीं है, तो फिर इस शुल्क का वास्तविक चरित्र क्या है? 140 करोड़ भारतीयों के लेनदेन पर इस तरह का चार्ज वसूलने का एग्जीक्यूटिव स्कोप क्या है?”

‘सरकार की जेब में एक रुपया भी नहीं जाएगा’- ASG वेंकटरमण

केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल वेंकटरमण ने अदालत में स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा, ‘यह सरकारी टैक्स नहीं है। ASG ने कहा कि यह सरकार द्वारा वसूला जाने वाला कोई टैक्स या वैधानिक कलेक्शन नहीं है। सरकार इसमें से एक भी रुपया अपने पास नहीं रख रही है’।

जैसे क्रेडिट या डेबिट कार्ड स्वाइप करने पर बैंकों और गेटवे का इंफ्रास्ट्रक्चर कॉस्ट आता है, वैसे ही यूपीआई में भी दो प्रमुख ऑपरेटर (बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर) शामिल हैं। यह उनके बीच का एक ‘इंटरबैंक सेटलमेंट फीस’ है, जिसे NPCI मैनेज करता है।

‘हमें ये सारे तथ्य हलफनामे पर चाहिए’- CJI सूर्यकांत

CJI सूर्यकांत ने मामले के तकनीकी स्वरूप को देखते हुए कहा कि अदालत को इन सभी दावों और आंकड़ों की लिखित पुष्टि चाहिए। इसलिए केंद्र सरकार को हलफनामा दाखिल कर इस नीतिगत फैसले का आधार समझाना होगा।

क्या आम जनता की जेब पर पड़ेगा असर?

इस सुनवाई के दौरान आम नागरिकों और छोटे व्यापारियों से जुड़े 3 सबसे बड़े आंकड़े सामने आए:

क्या 96% यूजर इससे बाहर हैं?- ASG के अनुसार, गेटवे का इस्तेमाल करने वाले 96% सामान्य ग्राहक और छोटे लेनदेन इससे पूरी तरह मुक्त रहेंगे।

क्या दुकानों पर सामान महंगा होगा?- यह नियम केवल 2,000 रुपये से अधिक के बड़े कमर्शियल लेनदेन (P2M) पर लागू है। आम लोगों के बीच ट्रांसफर (P2P – पर्सन टू पर्सन) पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

अत्यावश्यक सेवाओं पर कितना चार्ज?- जरूरी सेवाओं के लिए इस चार्ज की एक ऊपरी सीमा तय की गई है, जो अधिकतम ₹5 ही हो सकती है।

कब से प्रभावी होगा यह नया नियम?

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को सूचित किया कि इस पूरी व्यवस्था का असर 15 अक्टूबर से धरातल पर दिखना शुरू होगा, जो इसका पहला माइलस्टोन है। सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार का हलफनामा दाखिल होने के बाद इस मामले पर अगली सुनवाई होगी।

(रिपोर्ट: शंकर आनंद)

UPI के चार्जेज पर NSE के सीईओ का बड़ा बयान, ब्रोकर और उनके क्लाइंट्स के बीच का मामला

NSE on UPI Charges: देश के सबसे बड़े एक्सचेंज एनएसई के एमडी और सीईओ आशीष चौहान का कहना है कि यूपीआई पेमेंट्स पर नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर सरकार से कोई बातचीत नहीं हुई है। उनका कहना है कि यह मामला ब्रोकर्स और उनके क्लाइंट्स के बीच का है और इस बात की संभावना है कि वे इसका हल निकाल लेंगे। उन्होंने ये बातें एनएसई की बीएसई पर लिस्टिंग के एक दिन बाद पत्रकारों से बातचीत में कही। एनएसई के ₹1785 के शेयर ₹22,562 करोड़ के आईपीओ को 5 गुना से अधिक सब्सक्रिप्शन मिलने के बाद 24 सितंबर को 1% से कम प्रीमियम पर लिस्ट हुए थे।

UPI MDR पर क्या कहा NSE के सीईओ ने?

एनएसई के सीईओ आशीष चौहान ने कहा कि यूपीआई से जुड़े एमडीआर पर सरकार के साथ कोई चर्चा नहीं हुई है। उन्होंने आगे कहा कि यह NPCI (नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया) का फैसला है और अब हमें इंतजार करना होगा और देखना होगा। उन्होंने आगे कहा कि यह ब्रोकर और क्लाइंट के बीच का मामला लगता है और जो भी दिक्कत होगी, वे उसका कोई न कोई समाधान निकाल लेंगे।

बता दें कि एनपीसीआई ने यूपीआई ट्रांजैक्शन के लिए एक नया एमडीआर फ्रेमवर्क पेश किया है। इसके तहत कैपिटल-मार्केट ट्रांजैक्शन यानी कि स्टॉकब्रोकर, सिक्योरिटीज और म्यूचुअल फंड से जुड़े पेमेंट पर 0.02% का MDR लगेगा, जिसकी अधिकतम सीमा प्रति ट्रांजैक्शन ₹300 तय की गई है। नए चार्ज 15 अक्टूबर से लागू होंगे।

ब्रोडर लेवल पर बात करें तो यूपीआई फ्रेमवर्क में ₹2000 से अधिक के खास P2M (पर्सन-टू-मर्चेंट) ट्रांजैक्शन पर 0.4% एमडीआर का प्रावधान है, जबकि ₹2,000 तक के मर्चेंट यूपीआई पेमेंट और छोटे कारोबारियों के लिए जीरो-एमडीआर फ्रेमवर्क के तहत आने वाले ट्रांजैक्शन पर कोई चार्ज नहीं लगेगा। वित्त मंत्रालय का कहना है कि लगभग 96% P2M ट्राजैक्शन पर कोई असर नहीं पड़ेगा और ग्राहकों से एमडीआर हीं लिया जाएगा।

NSE IPO Listing: कैसा था स्टॉक मार्केट में शेयरों का पहला दिन

एनएसई की लिस्टिंग का लंबे समय से इंतजार हो रहा था और अब जाकर यह 24 सितंबर को लिस्ट हुआ। इसका इश्यू पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल का था और 5 गुना से अधिक भरने के बाद शेयरों ने आईपीओ निवेशकों को 1% से कम लिस्टिंग गेन दिया। हालांकि फिर इसने उड़ना भरने की कोशिश की। इसका ₹1785 का शेयर बीएसई पर ₹1800 के भाव पर लिस्ट होने के बाद ₹1878 की ऊंचाई तक पहुंचे थे यानी कि आईपीओ निवेशक 5% से अधिक मुनाफे तक पहुंचे थे।

UPI MDR Charges: सरकार 15 अक्टूबर की डेडलाइन नहीं बढ़ाएगी, 18% GST का हो सकता है रिव्यू

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

UPI MDR Charges Row: यूपीआई पेमेंट पर चार्ज को लेकर ‘इंडिया’ गठबंधन में फूट! मोदी सरकार को मिला CM उमर अब्दुल्ला का साथ

UPI MDR Charges Row: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार (17 सितंबर) को यूपीआई के माध्यम से लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत चार्ज लगाने के मामले में केंद्र सरकार का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने केंद्र के फैसले का सपोर्ट करते हुए कहा कि डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखना और चलाना सस्ता नहीं है। लेकिन साथ ही उन्होंने सरकार को खुदरा ग्राहकों के हितों की रक्षा करने की सलाह भी दी। सीएम ने कहा कि UPI सिस्टम को चलाना बहुत महंगा है। उन्होंने कहा कि जो चीजें हमें मुफ्त में मिलती हैं, हम उनकी कद्र नहीं करते।

अब्दुल्ला ने गुरुवार (17 सितंबर) को पत्रकारों से बातचीत में कहा, “यह शुल्क हर किसी पर नहीं लगाया जा रहा है। सबसे पहले, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजने पर कोई चार्ज नहीं लगता है। इसके अलावा, आम ग्राहकों से तब तक कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा जब तक वे एक तय सीमा से ज्यादा का लेन-देन नहीं करते।” मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपीआई इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखने और उसे चलाने का काम सस्ता नहीं है।

‘काफी पैसा खर्च होता है…’

सीएम ने कहा कि इस पेमेंट सिस्टम को चलाने में काफी पैसा खर्च होता है। पीटीआई के मुताबिक उन्होंने कहा, “असलियत यह भी है कि जब कोई चीज पूरी तरह मुफ्त मिलती है, तो हम अक्सर उसकी सही कीमत नहीं समझते। फिर भी भारत सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आम नागरिकों पर इस शुल्क का बोझ न पड़े। अगर कंपनियों से शुल्क ली भी जाती है, तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है, क्योंकि वैसे भी कंपनियां यूपीआई से काफी मुनाफा कमाती हैं।”

J&K के CM ने कहा, “यह चार्ज आपसे या मुझसे नहीं लिया जाएगा। इसका भुगतान उन व्यवसायों को करना होगा जहां लेनदेन हो रहा है। अभी जो आदेश जारी किया गया है। उसमें साफ कहा गया है कि यह चार्ज ग्राहक पर नहीं डाला जा सकता। दूसरी बात, अगर आप और मैं एक-दूसरे को पैसे भेज रहे हैं, तो उस पर भी कोई चार्ज नहीं लगेगा। ₹2,000 से कम के लेनदेन पर कोई मर्चेंट चार्ज नहीं है, क्योंकि ज्यादातर व्यावसायिक लेनदेन ₹2,000 से कम के ही होते हैं। ₹2,000 से ज़्यादा के लेनदेन पर चार्ज लगता है, लेकिन उसकी भी एक सीमा तय की गई है।”

अब्दुल्ला ने आगे कहा, “मैंने सुना है कि UPI को चालू रखने में लगभग ₹20,000 करोड़ खर्च होते हैं। ₹20,000 करोड़ का मतलब है कि यह पैसा आपके और मेरे द्वारा दिए गए टैक्स से आ रहा है। कहीं न कहीं से तो यह पैसा आ ही रहा है। तो, जाने-अनजाने में हम UPI के लिए पहले से ही भुगतान कर रहे हैं। लेकिन आज हम इसके लिए अपने टैक्स के जरिए भुगतान कर रहे हैं। अगर इसके बाद बड़ी कंपनियां और व्यापारी इसके लिए भुगतान करते हैं, तो मुझे नहीं लगता कि किसी को कोई आपत्ति होनी चाहिए।”

‘फैसला अमेरिकी दबाव में नहीं’

इस बीच, यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (MDR) लगाने का फैसला अमेरिकी दबाव में किए जाने के आरोपों को वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को खारिज कर दिया। मंत्रालय ने कहा कि नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के हाल में जारी गाइडलाइंस में यूपीआई पर क्रेडिट कार्ड के जरिए लेनदेन के लिए केवल रुपे क्रेडिट कार्ड की अनुमति है। इससे विदेशी क्रेडिट कार्ड को कोई लाभ नहीं मिलने वाला है।

फाइनेंशियल सर्विसेज डिपार्टमेंट (DFS) ने US ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) की 2026 की रिपोर्ट में की गई टिप्पणियों के जवाब में यह स्पष्टीकरण जारी किया है। रिपोर्ट में कहा गया था कि US की इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट सर्विस देने वाली कंपनियों को भारत के UPI पेमेंट सिस्टम में RuPay कार्ड जैसी सुविधाएं या मौके नहीं मिलते हैं।

DFS ने एक बयान में कहा, “15 सितंबर के NPCI सर्कुलर में RuPay के अलावा दूसरे क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करके UPI पर क्रेडिट ट्रांजैक्शन की इजाजत नहीं है। यह आरोप कि बाहरी दबाव की वजह से MDR लागू किया जा रहा है, ‘गलत और गुमराह करने वाला’ है।”

सरकार का यह बयान ऐसे समय आया है जब कांग्रेस समेत कुछ विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि सरकार ने 2,000 रुपये से अधिक के व्यापारी यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगाने का फैसला अमेरिकी दबाव में किया है।

NPCI ने क्या कहा?

NPCI ने कहा है कि अधिक मूल्य के चुनिंदा लेनदेन पर एमडीआर लागू करने का उद्देश्य यूपीआई परिवेश के लिए टिकाऊ रेवेन्यू मॉडल तैयार करना है। इसके साथ ही इससे छोटे तीसरे पक्ष के ऐप प्रोवाइडर को बाजार में अधिक हिस्सेदारी हासिल करने के लिए प्रतिस्पर्धा करने का अवसर मिलेगा।

एनपीसीआई ने नवंबर, 2020 में तीसरे पक्ष के ऐप प्रोवाइडर के लिए 30 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी की सीमा तय की थी। हालांकि, उसका कहना है कि टिकाऊ रेवेन्यू मॉडल के अभाव में बाजार की प्रमुख इकाइयों के अलावा अन्य कंपनियां प्रतिस्पर्धा नहीं कर पा रही थीं।

क्या है पूरा मामला?

नए गाइडलाइंस के तहत, 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के व्यक्ति-से-व्यापारी (पी2एम) UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लगेगा। इसका भुगतान व्यापारी करेगा। वहीं, 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर यह अधिकतम 300 रुपये होगा। हालांकि, दो व्यक्तियों के बीच होने वाला लेनदेन और रोजमर्रा के छोटे व्यापारी भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।

रेलवे, दूरसंचार, ईंधन और बीमा जैसी आवश्यक सेवाओं के लिए 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर पांच रुपये का शुल्क होगा। जबकि म्यूचुअल फंड और शेयर ब्रोकिंग जैसे पूंजी बाजार लेनदेन पर 0.02 प्रतिशत एमडीआर लगेगा, जो अधिकतम 300 रुपये होगा। महीने में यूपीआई क्यूआर कोड के जरिए एक लाख रुपये तक का कलेक्शन करने वाले छोटे व्यापारी इस शुल्क से पूरी तरह मुक्त रहेंगे। गांवों और कस्बों में व्यापारियों को किए जाने वाले यूपीआई क्यूआर भुगतान पर भी एमडीआर नहीं लगेगा।

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सिर्फ कैश में पेमेंट करें… UPI पर चार्ज का बड़ा असर दिल्ली के बाजारों में दिखना शुरू, लोकल ट्रेडर्स अब नकद पर देने लगे जोर

UPI पर 0.4% फीस से बवाल: दिल्ली के दुकानदारों ने कहा- अब कैश लाओ, UPI नहीं चलेगा

New Delhi, Sep 16 (PTI) – केंद्र सरकार के 2000 रुपये से ऊपर के UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4% फीस लगाने के फैसले के बाद दिल्ली के बाजारों में कैश की वापसी शुरू हो गई है। ट्रेडर्स एसोसिएशनों ने साफ कह दिया है कि वे अब कैश पेमेंट को पुश करेंगे ताकि डिजिटल पेमेंट की एक्स्ट्रा कॉस्ट से बचा जा सके।

सरकार ने मंगलवार को बड़े डिजिटल मर्चेंट पेमेंट के लिए नया फ्रेमवर्क लाकर जनवरी 2020 से चली आ रही जीरो-MDR व्यवस्था खत्म कर दी है। इस चार्ज को 75,000 रुपये और उससे ऊपर के पेमेंट पर 300 रुपये पर कैप किया गया है।

दिल्ली के बाजारों में क्या हो रहा है?

कमला नगर से ऐलान:

कमला नगर मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष नितिन गुप्ता ने कहा, “हमने सरकार के डिजिटल पेमेंट के पुश को सपोर्ट किया था, लेकिन अब अगर हम पर ही चार्ज लगेगा तो हम कैश ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देंगे। हम पहले से ही ट्रांजैक्शन चार्ज और 18% GST दे रहे हैं। अब अगर UPI पर भी MDR चार्ज किया तो हम कैश प्रमोट करेंगे। UPI आया था तो हमने सपोर्ट किया था, अब चार्ज लगेगा तो सपोर्ट नहीं करेंगे। हम ट्रांजैक्शन चार्ज क्यों दें?”

उन्होंने दुकानदारों से कैश पेमेंट को बढ़ावा देने की अपील की और कहा कि अगर अभी ये चार्ज मान लिया तो भविष्य में रेट और बढ़ सकता है। उन्होंने ये भी माना कि “हम डिजिटल पेमेंट के आदी हो चुके हैं। बाजार जाते वक्त कभी-कभी कैश भी नहीं रखते। अब वापस कैश पर जाना मुश्किल होगा।”

खान मार्केट और नई दिल्ली ट्रेडर्स का विरोध:

नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन के महासचिव अमित गुप्ता ने PTI से कहा, “UPI को ट्रेडर्स और ग्राहकों के लिए पेमेंट आसान बनाने के लिए लाया गया था। अगर अब 2000 रुपये से ऊपर के ट्रांजैक्शन पर अतिरिक्त चार्ज व्यापारियों को देना पड़ा तो कई लोग कैश को प्राथमिकता देंगे। हमें डिजिटल पेमेंट से कोई दिक्कत नहीं, लेकिन अतिरिक्त लागत व्यापारियों पर नहीं थोपनी चाहिए।”

खान मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष संजीव मेहरा ने कहा, “हम पहले से ही क्रेडिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर MDR का विरोध कर रहे थे और अब UPI पर भी चार्ज देना होगा। अगर हमसे UPI पर चार्ज लिया गया तो हम कैश पेमेंट को बढ़ावा देंगे।” उन्होंने कहा कि व्यापारी अब बड़े पेमेंट के लिए चेक और दूसरे बैंकिंग चैनल पर भी विचार करेंगे।

छोटे दुकानदारों का दर्द:

कमला नगर के रिटेल दुकानदार रजत जैन ने कहा कि ये चार्ज रिटेलर्स के लिए मुश्किल होगा, खासकर दिल्ली यूनिवर्सिटी के पास जहां स्टूडेंट्स 10-20 रुपये की भी खरीदारी करते हैं। “हम उनसे एक पैसा भी एक्स्ट्रा नहीं मांग सकते, लेकिन हम GST और अब UPI का चार्ज भी दें। कस्टमर से कैश मांगो तो वो कहता है UPI से करूंगा। सारा बोझ हम पर है।”

सदर बाजार बड़ी मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष परमजीत सिंह पम्मा ने कहा कि ये कदम 2000 रुपये से ऊपर बड़ी संख्या में UPI ट्रांजैक्शन करने वाले छोटे, मध्यम और थोक व्यापारियों की लागत बढ़ा देगा। एक ट्रांजैक्शन पर छोटा चार्ज भी महीने-दर-महीने बड़ा खर्च बन जाएगा।

ग्राहक कपिल अरोड़ा ने कहा, “अगर व्यापारियों को ज्यादा चार्ज देना पड़ा तो वो हमसे ही वसूलेंगे। इस तरह न सिर्फ व्यापारी बल्कि ग्राहक भी परेशान होंगे।”

नए नियम में क्या है राहत?

सरकार ने कहा है कि UPI QR कोड के जरिए महीने में 1 लाख रुपये तक कमाने वाले छोटे मर्चेंट्स को छूट रहेगी। सरकार के मुताबिक इससे 96% मर्चेंट ट्रांजैक्शन कवर हो जाएंगे।

नया MDR ग्राहकों से नहीं वसूला जा सकता

  • व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) UPI ट्रांसफर, जो UPI वॉल्यूम का 37% और वैल्यू का 70% है, चार्ज से बाहर रहेगा
  • रेलवे, टेलीकॉम, फ्यूल जैसे एसेंशियल सेक्टर्स पर फ्लैट 5 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन फीस
  • कैपिटल मार्केट ट्रांजैक्शन पर 0.02% रेट

 

PhonePe मार्च तक पेश कर सकती है आईपीओ, सीईओ समीर निगम ने बताया पूरा प्लान

फोनपे मार्च तक आईपीओ पेश कर सकती है। कंपनी के को-फाउंडर और सीईओ समीर निगम ने इस बारे में बताया। उन्होंने कहा कि यूपीआई ट्रांजेक्शंस पर एमडीआर के ऐलान और बढ़ते रेवेन्यू को देखते हुए फोनपे इस वित्त वर्ष के अंत तक अपना आईपीओ पेश कर सकती है।

आईपीओ के प्लान पर UPI पर एमडीआर का असर

निगम ने मनीकंट्रोल को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में कई महत्वपूर्ण बातें बताईं। उन्होंने कहा, “इसने (यूपीआई पर एमडीआर) निश्चित रूप से हमें आईपीओ के और करीब ला दिया है। कुछ दूसरे वेरिएबल्स भी हैं। हम इनमें से कुछ पर विचार कर रहे हैं। एमडीआर का मसला सेटल हो जाने पर हम दोबारा विचार (आईपीओ) करना शुरू करेंगे। उम्मीद है कि यह समय जल्द आने वाला है।”

NPCI ने यूपीआई ट्रांजेक्शंस पर एमडीआर का किया ऐलान

फोनपे के सीईओ का यह बयान यूपीआई पर एमडीआर के ऐलान के एक दिन बाद आया है। नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने 15 सितंबर को यूपीआई ट्रांजेक्शंस पर 0.4 फीसदी एमडीआर का ऐलान किया। 2000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजेक्शंस एमडीआर चार्ज के दायरे में आएंगे। यह 15 अक्तूबर से लागू होगा।

एमडीआर का बोझ यूजर्स पर नहीं पड़ेगा

MDR वह कमीशन है, जिसका पेमेंट डिजिटल ट्रांजेक्शंस को प्रोसेस करने के लिए मर्चेंट्स बैंक को देते हैं। यूपीआई पर एमडीआर लागू होने के बाद अब यह मर्चेंट्स के लिए फ्री नहीं रह जाएगा। हालांकि, यूजर्स के लिए यह पहले की तरह फ्री बना रहेगा। हालांकि, अभी यह बताना मुश्किल है कि मर्चेंट्स पहले की तरह यूपीआई से पेमेंट लेंगे या नहीं।

फोनपे के आईपीओ को सेबी की मिल चुकी है मंजूरी

फोनपे ने इस साल की शुरुआत में आईपीओ का प्लान अनिश्चित समय के लिए टाल दिया था। उसने जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता और कमजोर इनवेस्टर सेंटीमेंट को इसका कारण बताया था। हालांकि, बेंगलुरु की इस फिनटेक फर्म के आईपीओ को सेबी की मंजूरी 20 जनवरी को मिल गई थी। तब मनीकंट्रोल ने खबर दी थी कि फोनपे आईपीओ से करीब 12,000 करोड़ रुपये जुटाना चाहती है।

एमडीआर को पॉजिटिव रिस्पॉन्स का मिलेगा फायदा

निगम ने कहा, “करीब तीन-चार साल से यूपीआई पर एमडीआर की चर्चा चल रही थी। यह एक ऐसा मसला था, जिसके बारे में कई इनवेस्टर्स हमसे पूछते थे। इसका कंज्यूमर साइड और मर्चेंट साइड पर किस तरह का असर पड़ेगा? मेरा मानना है कि इस पर रिस्पॉन्स पॉजिटिव रहने पर हमें मदद मिलेगी।”

यूपीआई ट्रांजेक्शंस में यूपीआई की 45% हिस्सेदारी

एमडीआर चार्ज से आने वाले पैसे का करीब 20 फीसदी यूपीआई ऐप्स के पास जाएगा। यूपीआई ट्रांजेक्शंस में फोनपे का मार्केट शेयर 45 फीसदी से ज्यादा है। इसका मतलब है कि एमडीआर कलेक्शंस का करीब 10 फीसदी फोनपे के पास जा सकता है। पेटीएम ने 2021 के आखिर में खुद को शेयर बाजारों में लिस्ट कराया था। उसका आईपीओ करीब 18,000 करोड़ रुपये का था।

MDR Charges Row: 96% मर्चेंट पेमेंट पर नहीं लगेगा कोई शुल्क! वित्त मंत्रालय ने बताया- UPI ट्रांजैक्शन पर कहां लगेगा चार्ज और कहां नहीं लगेगा?

UPI Charges Row: सरकार ने 15 अक्टूबर 2026 से बड़े व्यापारी भुगतान के लिए UPI लेनदेन पर नई शुल्क व्यवस्था लागू करने की घोषणा कर दी है। इसके तहत 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर व्यापारियों से 0.4 प्रतिशत शुल्क लिया जाएगा। जबकि 75,000 रुपये या उससे अधिक के भुगतान पर इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी। हालांकि, भुगतान करने वाले ग्राहकों को यह शुल्क नहीं देना होगा। सरकार का कहना है कि इसका बोझ दुकानदार या व्यापारी को उठाना पड़ेगा।

दो व्यक्तियों के बीच होने वाले पीयर-टू-पीयर (P2M) यूपीआई भुगतान पर किसी भी राशि के लिए कोई मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR)शुल्क नहीं लगेगा। इसके अलावा 2,000 रुपये तक के छोटे व्यापारी लेनदेन भी शुल्क से बाहर रहेंगे। ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (MCR) वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले किसी व्यापारी से लिया जाता है।

96% मर्चेंट पेमेंट पर नहीं लगेगा कोई शुल्क!

सरकार के मुताबिक, व्यक्तियों से व्यापारियों को होने वाले कुल पी2एम लेनदेन की मात्रा में 2,000 रुपये से कम राशि वाले लेनदेन 95 प्रतिशत से भी अधिक हैं। वित्त मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा, “96 प्रतिशत मर्चेंट ट्रांजैक्शन भी रकम की परवाह किए बिना शुल्क से मुक्त रहेंगे। ₹2,000 तक के मर्चेंट पेमेंट और छोटे व्यापारियों के लिए Zero-MDR व्यवस्था के तहत आने वाले ट्रांजैक्शन पर भी कोई शुल्क नहीं लगेगा।”

मंत्रालय के मुताबिक, इसका मतलब है कि लगभग 96 प्रतिशत Person-to-Merchant (P2M) ट्रांजैक्शन पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा। MDR केवल निर्धारित श्रेणी के ₹2,000 से अधिक मूल्य वाले मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लागू होगा। वित्त मंत्रालय ने बयान में कहा, “यह शुल्क केवल 2,000 रुपये से अधिक के पी2एम लेनदेन पर ही 0.4 प्रतिशत की दर से लागू होगा।”

यहां लगेगा 5 रुपये का शुल्क

रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, फ्यूल और खेती के कच्चे माल जैसे जरूरी और कम मार्जिन वाले सेक्टर में 2,000 रुपये से अधिक के प्रत्येक लेनदेन पर पांच रुपये का एक समान शुल्क लगेगा। इसका उद्देश्य महत्वपूर्ण सेवाओं की लागत को विश्वसनीय बनाए रखना है। इन कैटेगरी की हिस्सेदारी पी2एम लेनदेन की मात्रा में करीब 17 प्रतिशत है। जबकि लेनदेन के मूल्य में लगभग 46 प्रतिशत है।

यही समान शुल्क व्यवस्था सरकारी उपयोगिता बिलों (बिजली, पानी और पाइप वाली गैस) के भुगतान तथा स्कूल फीस और विश्वविद्यालय शुल्क जैसे शैक्षणिक भुगतान पर भी लागू होगी। हालांकि 2,000 रुपये तक के ऐसे भुगतान इस शुल्क से मुक्त रहेंगे।

अधिकतम सीमा ₹300 होगी

म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज और शेयर ब्रोकर एवं डीलर के जरिए किए गए पेमेंट पर 0.02% का MDR लगाया जाएगा, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 होगी। सरकार ने कहा है कि UPI ऐप प्रोवाइडर्स को डिजिटल प्लेटफॉर्म फीस या छिपे हुए चार्ज लगाने की इजाजत नहीं होगी। बैंकों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे सुनिश्चित करें कि मर्चेंट इस नई फीस का बोझ ग्राहकों पर न डालें। इसके अलावा, पर्सनल UPI ट्रांजैक्शन के लिए मुफ्त ट्रांजैक्शन की संख्या पर कोई मासिक कोटा या सीमा नहीं होगी।

छोटे व्यापारियों को राहत!

यूपीआई क्यूआर कोड के जरिएहर महीने एक लाख रुपये तक पाने वाले छोटे व्यापारी नई व्यवस्था के तहत शून्य एमडीआर का लाभ लेते रहेंगे। यदि कोई व्यापारी लगातार तीन महीने तक एक लाख रुपये से अधिक का मासिक लेनदेन करता है, तो उसे सामान्य पी2एम कैटेगरी में रखा जाएगा। सरकार के अनुसार, नई व्यवस्था से केवल करीब चार प्रतिशत व्यापारी लेनदेन ही प्रभावित होंगे। इसकी वजह है कि अधिकांश लेनदेन या तो 2,000 रुपये की सीमा से कम हैं या पी2एम छूट के दायरे में आते हैं।

ऑटोपे पर कोई MDR नहीं

नया MDR नियम सिर्फ उन UPI ​​पेमेंट पर लागू होगा जो सीधे यूजर के बैंक अकाउंट से मर्चेंट के अकाउंट में किए जाते हैं। RuPay क्रेडिट कार्ड या पहले से मंजूर ‘क्रेडिट लाइन’ का इस्तेमाल करके UPI से किए गए पेमेंट के लिए अलग नियम होंगे। वहीं, यूटिलिटी बिल, OTT सब्सक्रिप्शन और रेगुलर इन्वेस्टमेंट के लिए ऑटोमेटेड बार-बार होने वाले पेमेंट जैसे UPI मैंडेट या ‘ऑटोपे पर कोई MDR नहीं लगेगा।

2020 से लागू है MDR चार्ज

MDR चार्ज व्यवस्था जनवरी, 2020 से लागू थी। इसका उद्देश्य डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना था। हालांकि, बैंक और फिनटेक कंपनियां इसे टिकाऊ नहीं बताते हुए शुल्क फिर से लागू करने की लंबे समय से मांग कर रही थीं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) भी पहले सरकार से इस नीति की समीक्षा करने का आग्रह कर चुके हैं।

MDR सरकार या NPCI द्वारा वसूला जाने वाला टैक्स नहीं

वित्त मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि MDR को टैक्स या सरकार/NPCI द्वारा वसूला जाने वाला शुल्क नहीं समझना चाहिए। मंत्रालय के अनुसार, यह राशि पेमेंट इकोसिस्टम में शामिल विभिन्न पक्षों, जैसे बैंकों और पेमेंट ऐप प्रोवाइडर्स के बीच वितरित की जाती है। मंत्रालय ने कहा कि इसका उद्देश्य UPI सिस्टम के संचालन और उसके लगातार विस्तार को समर्थन देना है।

UPI को लंबे समय तक टिकाऊ बनाने की कोशिश

मंत्रालय के मुताबिक, यह व्यवस्था Payment and Settlement Systems Act, 2007 के तहत ‘यूपीआई स्टीयरिंग कमेटी’ में विस्तृत विचार-विमर्श के बाद लाई गई है। इसका उद्देश्य UPI इकोसिस्टम की स्थिरता और विस्तार सुनिश्चित करना है। साथ ही आम लोगों और छोटे व्यापारियों को अतिरिक्त शुल्क से बचाना है।

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UPI ट्रांजैक्शन पर कहां लगेगा चार्ज और कहां नहीं लगेगा?  

  • 2,000 रुपये तक के यूपीआई लेनदेन पर कोई एमडीआर नहीं लगाया जाएगा।
  • 2,000 रुपये से अधिक के ग्राहक-से-व्यापारी लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू होगा।
  • 3,000 रुपये की खरीदारी पर 0.4 प्रतिशत की दर से व्यापारी द्वारा जमाकर्ता बैंक को 12 रुपये का शुल्क देना होगा।
  • यह कमीशन बैंकों सहित पूरे पेमेंट इकोसिस्टम के पार्टनर्स के बीच बांटा जाएगा।
  • लेनदेन मूल्य की परवाह किए बिना व्यक्तियों के बीच होने वाले (पी2पी) लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।
  • ₹75,000 और उससे ज्यादा के बड़े पेमेंट के लिए MDR की सीमा हर ट्रांजैक्शन पर अधिक से अधिक ₹300 तय की जाएगी।
  • टेलीकॉम, इंश्योरेंस और फ्यूल जैसे जरूरी सेक्टर के लिए हर ट्रांजैक्शन पर ₹5 का फ़्लैट MDR लागू होगा।
  • म्यूचुअल फंड और स्टॉक ब्रोकर को किए जाने वाले भुगतान पर अधिकतम 300 रुपये की सीमा के साथ 0.02 प्रतिशत एमडीआर लगेगा।
  • प्रति माह एक लाख रुपये तक प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारियों के लिए सभी लेनदेन पर अनिवार्य रूप से शून्य एमडीआर की सुविधा मिलेगी।
  • UPI ऐप सेवाओं पर स्टेज फीस या किसी भी तरह के छिपे हुए शुल्क लगाने पर रोक होगी।
  • बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि व्यापारी यूपीआई भुगतान के लिए उपभोक्ताओं पर एमडीआर शुल्क का बोझ न डालें।
  • व्यक्तियों के लिए मुफ्त यूपीआई लेनदेन पर कोई मासिक कोटा, मात्रा की सीमा नहीं होगी।
  • बैंकों और NPCI की ओर से लागू की गई रोजाना ट्रांज़ैक्शन की सीमाएं कैटेगरी के आधार पर ₹1 लाख से ₹5 लाख के दायरे में रहेंगी।
  • कुल एमडीआर कलेक्शन के पांच प्रतिशत योगदान के साथ छोटे व्यापारियों द्वारा यूपीआई के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष कोष स्थापित किया जाएगा।
  • एमडीआर लागू होने से केवल चार प्रतिशत मर्चेंट लेनदेन ही प्रभावित होंगे।
  • नया एमडीआर ढांचा 15 अक्टूबर, 2026 से प्रभावी होगा।