UPI के चार्जेज पर NSE के सीईओ का बड़ा बयान, ब्रोकर और उनके क्लाइंट्स के बीच का मामला

NSE on UPI Charges: देश के सबसे बड़े एक्सचेंज एनएसई के एमडी और सीईओ आशीष चौहान का कहना है कि यूपीआई पेमेंट्स पर नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर सरकार से कोई बातचीत नहीं हुई है। उनका कहना है कि यह मामला ब्रोकर्स और उनके क्लाइंट्स के बीच का है और इस बात की संभावना है कि वे इसका हल निकाल लेंगे। उन्होंने ये बातें एनएसई की बीएसई पर लिस्टिंग के एक दिन बाद पत्रकारों से बातचीत में कही। एनएसई के ₹1785 के शेयर ₹22,562 करोड़ के आईपीओ को 5 गुना से अधिक सब्सक्रिप्शन मिलने के बाद 24 सितंबर को 1% से कम प्रीमियम पर लिस्ट हुए थे।

UPI MDR पर क्या कहा NSE के सीईओ ने?

एनएसई के सीईओ आशीष चौहान ने कहा कि यूपीआई से जुड़े एमडीआर पर सरकार के साथ कोई चर्चा नहीं हुई है। उन्होंने आगे कहा कि यह NPCI (नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया) का फैसला है और अब हमें इंतजार करना होगा और देखना होगा। उन्होंने आगे कहा कि यह ब्रोकर और क्लाइंट के बीच का मामला लगता है और जो भी दिक्कत होगी, वे उसका कोई न कोई समाधान निकाल लेंगे।

बता दें कि एनपीसीआई ने यूपीआई ट्रांजैक्शन के लिए एक नया एमडीआर फ्रेमवर्क पेश किया है। इसके तहत कैपिटल-मार्केट ट्रांजैक्शन यानी कि स्टॉकब्रोकर, सिक्योरिटीज और म्यूचुअल फंड से जुड़े पेमेंट पर 0.02% का MDR लगेगा, जिसकी अधिकतम सीमा प्रति ट्रांजैक्शन ₹300 तय की गई है। नए चार्ज 15 अक्टूबर से लागू होंगे।

ब्रोडर लेवल पर बात करें तो यूपीआई फ्रेमवर्क में ₹2000 से अधिक के खास P2M (पर्सन-टू-मर्चेंट) ट्रांजैक्शन पर 0.4% एमडीआर का प्रावधान है, जबकि ₹2,000 तक के मर्चेंट यूपीआई पेमेंट और छोटे कारोबारियों के लिए जीरो-एमडीआर फ्रेमवर्क के तहत आने वाले ट्रांजैक्शन पर कोई चार्ज नहीं लगेगा। वित्त मंत्रालय का कहना है कि लगभग 96% P2M ट्राजैक्शन पर कोई असर नहीं पड़ेगा और ग्राहकों से एमडीआर हीं लिया जाएगा।

NSE IPO Listing: कैसा था स्टॉक मार्केट में शेयरों का पहला दिन

एनएसई की लिस्टिंग का लंबे समय से इंतजार हो रहा था और अब जाकर यह 24 सितंबर को लिस्ट हुआ। इसका इश्यू पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल का था और 5 गुना से अधिक भरने के बाद शेयरों ने आईपीओ निवेशकों को 1% से कम लिस्टिंग गेन दिया। हालांकि फिर इसने उड़ना भरने की कोशिश की। इसका ₹1785 का शेयर बीएसई पर ₹1800 के भाव पर लिस्ट होने के बाद ₹1878 की ऊंचाई तक पहुंचे थे यानी कि आईपीओ निवेशक 5% से अधिक मुनाफे तक पहुंचे थे।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

NSE share Price : लिस्टिंग के बाद NSE के शेयरों में बढ़त जारी, ब्रोकरेज भी हुए बुलिश, जानिए क्या हैं इनके टारगेट

NSE share Price : नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ़ इंडिया (NSE) के शेयरों में गुरुवार के ट्रेडिंग सेशन में 5.21 प्रतिशत तक की बढ़त देखने को मिली है। इश्यू प्राइस से ज़्यादा कीमत पर लिस्ट होने के बाद भी शेयरों में तेज़ी जारी है। आज BSE पर NSE के शेयरों की ट्रेडिंग ₹1,800 प्रति शेयर के भाव से शुरू हुई,जो इसके ₹1,785 के इश्यू प्राइस से 0.84 प्रतिशत ज़्यादा थी। बाद में यह स्टॉक बढ़कर ₹1,878 पर पहुंच गया, जो इश्यू प्राइस से 5.21 प्रतिशत ज़्यादा है। इस बढ़त के साथ NSE दुनिया के 10 सबसे बड़े लिस्टेड एक्सचेंजों और मार्केट वैल्यू के हिसाब से भारत की 10 सबसे बड़ी कंपनियों में शामिल हो गया है।

मार्केट एक्सपर्ट्स को उम्मीद है कि इस स्टॉक में और बढ़त होगी। ब्रोकरेज फर्मों ने इसके लिए ₹1,965 प्रति शेयर तक का प्राइस टारगेट दिया है।

NSE पर पीएल कैपिटल की राय

PL Capital ने NSE को एक्युमुलेट (accumulate) रेटिंग देते हुए ₹1,950 प्रति शेयर का प्राइस टारगेट तय किया है। इसका मतलब है कि इश्यू प्राइस के मुकाबले इसमें लगभग 9.2 प्रतिशत की बढ़त की संभावना है। PL Capital ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि NSE का कैश और फ्यूचर्स मार्केट में दबदबा बना रहेगा। लेकिन इंडेक्स ऑप्शंस में हिस्सेदारी घटने से असर पड़ सकता है। FY26-29E के दौरान रेवेन्यू और PAT में लगभग 11 प्रतिशत सालाना ग्रोथ की उम्मीद है। वन-ऑफ खर्चों के एडजस्ट होने के बाद EBITDA मार्जिन 76 प्रतिशत पर आ सकती है।

ब्रोकरेज का कहना है रि NSE का एक्सचेंज मार्केट पर दबदबा है। कैश मार्केट में इसकी हिस्सेदारी 93 प्रतिशत से ज़्यादा है और स्टॉक व इंडेक्स फ्यूचर्स में यह लगभग 100 प्रतिशत हिस्से पर काबिज है। हालांकि रेगुलेटरी दिक्कतों की वजह से इंडेक्स ऑप्शंस में NSE की मार्केट हिस्सेदारी घटकर लगभग 65 प्रतिशत रह गई है। इसके साथ ही CAS और प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग नियमों के लागू होने से वॉल्यूम पर भी असर पड़ा है।

हालांकि FY21-26 के दौरान रेवेन्यू में 25% सालाना की दर से बढ़ोतरी हुई, लेकिन PL Capital का अनुमान है कि इंडेक्स ऑप्शंस में हिस्सेदारी घटने के कारण FY26-29E के दौरान यह ग्रोथ धीमी होकर 11% सालाना पर आ जाएगी।

ब्रोकरेज को उम्मीद है कि NSE का EBITDA मार्जिन FY26 के 71% से बढ़कर FY29 तक 76% हो जाएगा,क्योंकि वन-ऑफ खर्चों का असर कम हो जाएगा। उम्मीद है कि इस दौरान कर बाद मुनाफे में 11% सालाना की दर से बढ़ोतरी होगी।

PL Capital ने अपनी रिपोर्ट में आगे कहा है कि NSE के IPO में कंपनी की वैल्यूएशन ₹4.4 लाख करोड़ आंकी गई है,जो FY29E की अर्निंग के आधार पर 32 गुना प्राइस-टू-अर्निंग्स मल्टीपल है। कंपनी का कहना है कि इस वैल्यूएशन में प्रीमियम का बड़ा हिस्सा शामिल है।

इस रिपोर्ट में भारतीय एक्सचेंज मार्केट में NSE की लीडरशिप पोजीशन,इसके अलग-अलग तरह से हो रहे विकास और वन-टाइम खर्चों का असर कम होने के साथ EBITDA मार्जिन में सुधार की उम्मीद पर ज़ोर दिया गया है।

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NSE पर मैक्वेरी की राय

मैक्वेरी (Macquarie) ने NSE के लिए आउटपरफॉर्म रेटिंग और ₹1,965 प्रति शेयर के टारगेट प्राइस के साथ कवरेज शुरू की है। इस टारगेट प्राइस का मतलब है कि IPO के ₹1,785 के इश्यू प्राइस के मुकाबले इसमें लगभग 10 प्रतिशत की बढ़त की संभावना है।

मैक्वेरी ने NSE को द डोमिनेटर (बाज़ार पर दबदबा रखने वाली कंपनी) बताया है। इसके पीछे कंपनी का बड़ा मार्केट शेयर,सेवाओं की व्यापक रेंज, टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर और मज़बूत लिक्विडिटी जैसे कारण बताए गए हैं।

 

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NSE IPO Listing: ₹1800 पर लिस्ट एनएसई का ₹1140 का शेयर, 1% से कम लिस्टिंग गेन

NSE IPO Listing: देश के सबसे बड़े एक्सचेंज एनएसई के शेयरों की आज BSE पर 1% से कम प्रीमियम पर एंट्री हुई। इसके आईपीओ को ओवरऑल 5 गुना से अधिक बोली मिली थी। आईपीओ के तहत ₹1140 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज BSE पर इसकी ₹1800.00 पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को महज 0.84% का लिस्टिंग गेन (Krystal Integrated Services Listing Gain) मिला। लिस्टिंग के बाद शेयर और ऊपर चढ़े। उछलकर यह ₹1827.95 (NSE Share Price) पर पहुंच गया यानी कि आईपीओ निवेशक अब 2.41% मुनाफे में हैं। एंप्लॉयीज अधिक फायदे में हैं क्योंकि उन्हें हर शेयर ₹108 के डिस्काउंट पर मिला है।

कैसा रिस्पांस मिला था NSE IPO को

एनएसई का ₹22,562 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 17-21 सितंबर तक खुला था। यह आईपीओ ओवरऑल 5.71 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 12.68 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 6.55 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 1.39 गुना और एंप्लॉयीज का हिस्सा 2.40 गुना भरा था।

इस आईपीओ के तहत कोई नया शेयर नहीं जारी हुआ है बल्कि ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत ₹1 की फेस वैल्यू वाले 12,64,36,650 शेयर ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत बिके हैं। चूंकि कोई नया शेयर नहीं जारी हुआ है तो कंपनी को आईपीओ का पैसा नहीं मिला है बल्कि शेयर बेचने वाले शेयरहोल्डर्स को मिला है।

NSE के बारे में

एनएसई देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है और दुनिया के सबसे बड़े मल्टी-एसेट एक्सचेंज प्लेटफॉर्म्स में शुमार है। इसकी शुरुआत साल 1992 में हुई थी। यह इक्विटी, डेरिवेटिव्स, करेंसी डेरिवेटिव्स, कमोडिटीज, डेट सिक्योरिटीज और म्यूचुअल फंड्स जैसे एसेट क्वास में ट्रेडिंग, क्लियरिंग, सेटलमेंट, लिस्टिंग, मार्केट डेटा, इंडेक्स सर्विसेज और रेगुलेटरी ओवरसाइट को लेकर एक इंटीग्रेटेड इकोसिस्टम मुहैया कराती है।

एनएसई ने देश में लगातार कैश मार्केट टर्नओवर, इक्विटी डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग और करेंसी डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग में अपनी बादशाहत बरकरार रखी है। जून 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक इस पर 26.13 करोड़ से अधिक निवेशक रजिस्टर्ड हैं तो 12.9 करोड़ यूनिक इंवेस्टर्स और 1328 ट्रे़डिंग मेंबर्स हैं। इसके अलावा एनएसई पर 3005 कंपनियां लिस्टेड हैं जिनका जून 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक मार्केट कैप करीब ₹474 लाख करोड़ है। इसके अलावा मार्च 2026 के आखिरी में कैश मार्केट में टर्नओवर के हिसाब से एनएसई की हिस्सेदारी 99.79%, इक्विटी फ्यूचर्स में 74.71%, इक्विटी ऑप्शंस में 99.48% और एक्सचेंज-ट्रेडेड करेंसी ऑप्शंस में 100% हिस्सेदारी है। इसके अलावा एनएसई क्लियरिंग लिमिटेड की भी वित्त वर्ष 2026 में कैश मार्केट में 88.42%, इक्विटी डेरिवेटिव्स में 91.04% और एक्सचेंज-ट्रेडेड डेरिवेटिव्स में 74.09% हिस्सेदारी है।

एक्सचेंज के वित्तीय सेहत की बात करें तो वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना 11% से अधिक की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹10,302.06 करोड़ पर पहुंच गया। हालांकि इस दौरान टोटल इनकम में उठा-पटक दिखी और वित्त वर्ष 2024 में ₹16,352.06 करोड़ और वित्त वर्ष 2025 में ₹19,176.83 करोड़ से यह वित्त वर्ष 2026 में ₹18,713.37 करोड़ पर आ गया। चालू वित्त वर्ष 2027 की बात करें तो जून 2026 तिमाही में इसे ₹3,120.08 करोड़ का शुद्ध मुनाफा और ₹5,252.17 करोड़ का टोटल इनकम हासिल हुआ था। जून 2026 तिमाही के आखिरी में एक्सचेंज के रिजर्व और सरप्लस में ₹34,996.73 करोड़ पड़े थे।

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

NSE IPO के बारे में बड़ा अपडेट, 11 सितंबर को होगा शेयर के प्राइस बैंड का ऐलान

एनएसई के आईपीओ में बोली लगाने की सोच रहे हैं तो तैयार रहें। एक्सचेंज 11 सितंबर यानी शुक्रवार को शेयर के प्राइस बैंड का ऐलान करेगा। सीएनबीसी-टीवी18 ने सूत्रों के हवाले से यह खबर दी है। एनएसई ने 9 सितंबर को सेबी के पास अपेडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस फाइल किया। यह इस बात का संकेत है कि एक्सचेंज आईपीओ का प्रोसेस जल्द पूरा करना चाहता है।

इस आईपीओ में कुछ पुराने इनवेस्टर्स बेच रहे शेयर

NSE के आईपीओ के अब 23,000 करोड़ रुपये के रहने का अनुमान है। पहले एक्सचेंज का प्लान 30,0000 करोड़ रुपये का आईपीओ पेश करने का था। कुछ पुराने शेयरहोल्डर्स ने अब आईपीओ के जरिए पहले से कम शेयर बेचने का फैसला किया है। इस वजह से आईपीओ का साइज कम रहेगा। यह आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल है।

एक्सचेंज की वैल्यूएशन 4.42 लाख करोड़ रह सकती है

इनवेस्टर्स को इस आईपीओ के बारे में कुछ बातें समझ लेने की जरूरत है। शेयर का प्राइस बैंड 1,700-1,785 रुपये रह सकता है। एक्सचेंज अब 5.5 फीसदी शेयर बेच रहा है, जिसके लिए एनएसई की वैल्यूएशन 4.42 लाख करोड़ रुपये हो सकती है। पहले एक्सचेंज की वैल्यूएशन 5.26 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान था।

ट्रेडिंग वॉल्यूम के मामले में बीएसई से काफी आगे हैं एनएसई

एनएसई देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है। इसका मुकाबला बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) से है। लेकिन, NSE बीएसई से काफी आगे है। कैश और फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) दोनों में ही इसकी हिस्सेदारी बीएसई से काफी ज्यादा है। हालांकि, बीएसई न सिर्फ भारत बल्कि एशिया का सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेंज है। एनएसई के शेयर सिर्फ बीएसई पर लिस्ट होंगे। बीएसई के शेयर भी सिर्फ एनएसई पर लिस्ट होंगे। किसी एक्सचेंज को अपने ही प्लेटफॉर्म पर शेयर लिस्ट कराने की इजाजत नहीं है।

बीएसई के शेयर ने लिस्टिंग के बाद दिया है छप्परफाड़ रिटर्न

बीएसई के शेयरों ने लिस्टिंग के बाद से जिस तरह का रिटर्न दिया है, उससे इनवेस्टर्स की दिलचस्पी एनएसई के आईपीओ में बढ़ी है। इनवेस्टर्स लंबे समय से एनएसई के आईपीओ का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, लिस्टिंग के बाद एनएसई के शेयरों का प्रदर्शन कैसा रहेगा, इस बारे में अभी कुछ कहना मुश्किल है। लेकिन, यह तय है कि बीएसई और एनएसई देश के दो सबसे बड़े एक्सचेंज हैं। देश में स्टॉक मार्केट्स में पार्टिसिपेशन बढ़ने का फायदा दोनों ही एक्सचेंजों को होगा।

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बीएसई का शेयर 2017 में एनएसई पर लिस्ट हुआ था

बीएसई का आईपीओ 2017 की शुरुआत में आया था। कंपनी ने 806 रुपये प्रति शेयर की कीमत पर इनवेस्टर्स को शेयर एलॉट किए थे। शेयर की लिस्टिंग करीब 33 फीसदी प्रीमियम के साथ 1,085 रुपये पर हुई थी। तब बीएसई की वैल्यूएशन करीब 4,400 करोड़ रुपये लगाई गई थी। लिस्टिंग के बाद से इस शेयर ने निवेशकों को मालामाल किया है। स्टॉक की कीमत 3,273 रुपये चल रही है। इसका मतलब है कि इस शेयर ने निवेशकों का पैसा सिर्फ 9 साल में करीब 32 गुना किया है।

Tempsens Instruments IPO: खुलने से पहले 56% पर पहुंचा GMP, 20 अगस्त से लगा सकेंगे पैसा

Tempsens Instruments IPO: थर्मल इंजीनियरिंग और स्पेशलाइज्ड केबल बनाने वाली कंपनी Tempsens Instruments का IPO 20 अगस्त को सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा। इश्यू खुलने से पहले ही ग्रे मार्केट में इसे लेकर जबरदस्त उत्साह दिख रहा है। Investorgain के मुताबिक, कंपनी का GMP ₹168 पहुंच गया है। यानी अपर प्राइस बैंड के मुकाबले करीब 56% प्रीमियम का संकेत मिल रहा है। वहीं IPO Watch ने करीब 51.33% GMP बताया है।

कंपनी इस IPO के जरिए ₹650 करोड़ जुटाना चाहती है। एंकर निवेशकों के लिए बोली 19 अगस्त को खुलेगी, जबकि रिटेल निवेशक 20 से 24 अगस्त तक आवेदन कर सकेंगे। कंपनी के शेयर 28 अगस्त को BSE और NSE पर लिस्ट होने की संभावना है।

IPO की जरूरी बातें

इश्यू साइज₹650 करोड़
प्राइस बैंड
₹285-300 प्रति शेयर

एंकर बिडिंग19 अगस्त
सब्सक्रिप्शन20 से 24 अगस्त
संभावित लिस्टिंग
28 अगस्त (BSE और NSE)

₹468 पर हो सकती है लिस्टिंग

Tempsens ने IPO का प्राइस बैंड ₹285 से ₹300 प्रति शेयर तय किया है। अगर मौजूदा ₹168 का GMP बना रहता है, तो शेयर की संभावित लिस्टिंग करीब ₹468 पर हो सकती है।

इस हिसाब से प्रति शेयर करीब ₹168 का संभावित फायदा बनता है। हालांकि, यह सिर्फ ग्रे मार्केट का संकेत है। असली लिस्टिंग प्राइस बाजार के सेंटीमेंट और मांग पर तय होगा।

जुटाए गए पैसे का कहां होगा इस्तेमाल?

Tempsens IPO से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल अपने कारोबार के विस्तार में करेगी। इसमें इलेक्ट्रिकल हीटिंग सॉल्यूशंस और स्पेशलाइज्ड केबल बिजनेस में पूंजीगत निवेश शामिल है। इसके अलावा कंपनी कुछ कर्ज भी चुकाएगी और बाकी रकम सामान्य कॉर्पोरेट जरूरतों में खर्च करेगी।

Tempsens क्या करती है?

1990 में शुरू हुई Tempsens Instruments थर्मल इंजीनियरिंग और स्पेशलाइज्ड केबल बनाने वाली कंपनी है। कंपनी इंडस्ट्री के लिए कस्टमाइज्ड टेम्परेचर सेंसर, इलेक्ट्रिकल हीटिंग सॉल्यूशंस और स्पेशलाइज्ड केबल तैयार करती है।

इसके पोर्टफोलियो में कॉन्टैक्ट और नॉन-कॉन्टैक्ट दोनों तरह के टेम्परेचर सेंसर शामिल हैं। कंपनी अलग-अलग औद्योगिक सेक्टर के लिए जरूरत के हिसाब से सॉल्यूशंस भी देती है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

NSE के आईपीओ के बारे में बड़ा अपडेट, अगले महीने मिल सकती है सेबी की मंजूरी

सेबी अगले महीने एनएसई के आईपीओ को मंजूरी दे सकता है। मर्चेंट बैंकिंग के सूत्रों ने यह जानकारी दी है। इसके बाद एनएसई के लिए विदेश में रोड शो करने का रास्ता साफ हो जाएगा। एनएसई का आईपीओ इस साल सितंबर में आ सकता है। यह देश के सबसे बड़े आईपीओ में से एक होगा। इनवेस्टर्स काफी समय से इस आईपीओ का इंतजार कर रहे हैं।

अगले महीने मिल सकता है ग्रीन सिग्नल

मर्चेंट बैंकिंग के सूत्रों के मुताबिक, “मौजूदा रफ्तार से इस आईपीओ को अगले महीने ग्रीन सिग्नल मिल जाने की संभावना है। इश्यू से जुड़े सभी सवालों के जवाब दे दिए गए हैं।” सूत्र ने यह नहीं बताया कि किस तरह के सवालों के जवाब दिए गए हैं। लेकिन, उन्होंने कहा कि ज्यादातर समय इसका संबंध डिसक्लोजर के लैंग्वेज से होता है।

17 जुलाई से विदेश में रोड शो का प्लान

एक दूसरे सूत्र ने कहा, “चूंकि को-लोकेशन और डार्क फाइबर जैसे बड़े मसलों को पहले से ही आईपीओ से डीलिंक्ड कर दिया गया है और ये सेटलमेंट प्रोसेस में हैं, जिससे अब बड़ा मसला नहीं रह गया है। इसलिए अब सेबी और एक्सचेंज को बाकी चीजों पर फोकस करना है।” सूत्र ने बताया कि घरेलू निवेशकों के लिए रोड शो का प्लान बन चुका है। मर्चेंट बैंकर्स ने विदेशी निवेशकों के लिए 17 जुलाई से रोड शो का प्लान बनाया है। ये रोड शो अमेरिका, यूनाइटेड किंग्डम, हांगकांग और सिंगापुर में होंगे।

सितंबर में आ सकता है आईपीओ

अगर सबकुछ प्लान के हिसाब से चलता है तो एनएसई का आईपीओ सितंबर में आ सकता है। हालांकि, सबकुछ सेबी के ऑब्जर्वेशन लेटर पर निर्भर करता है। NSE ने आईपीओ के एप्रूवल के समय और रोड शो के बारे में कुछ बताने से इनकार कर दिया। मनीकंट्रोल के सवाल के जवाब में एनएसई के प्रवक्ता ने कहा, “कंपनी (NSE) ने सेबी के पास डीआरएचपी फाइल कर दिया है। इस वक्त हम इससे ज्यादा कुछ बताने की स्थिति में नहीं हैं।”

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एक्सचेंज को भी डिसक्लोजर नियमों का पालन करना है जरूरी

सूत्र ने बताया, “एक्सचेंज और सभी मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशंस सेबी के नियम के तहत उन सभी नियमों का पालन करते हैं, जिनका पालन दूसरी कंपनियों को करना पड़ता है।” मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशंस (MIIs) सेबी के सभी डिसक्लोजर नियमों का पालन करते हैं। इसके बाद भी बीएसई और एमसीएक्स के आईपीओ के रिव्यू में लगा समय एक समान नहीं था। बीएसई ने सेबी के पाश 12 सितंबर, 2016 को डीआरएचपी फाइल किया था। उसे सेबी का ऑब्जर्वेशन 30 दिसंबर, 2016 को मिला था। इसके मुकाबले एमसीएक्स का आईपीओ करीब 7 महीने में एप्रूव्ड हो गया था।

NSE ने 10 साल बाद IPO के लिए दाखिल किया DRHP; ₹30000 करोड़ का हो सकता है इश्यू; SBI बेचेगा सबसे ज्यादा हिस्सेदारी

NSE IPO: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का IPO आखिरकार 10 साल के लंबे इंतजार के बाद आगे बढ़ गया है। देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज ने बुधवार को SEBI और BSE के पास 607 पेज का ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल कर दिया। NSE के शेयर सिर्फ BSE पर लिस्ट होंगे, ठीक वैसे ही जैसे BSE के शेयर सिर्फ NSE पर लिस्टेड हैं।

यह IPO पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा। यानी एक्सचेंज को कोई नया पैसा नहीं मिलेगा, बल्कि मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे। प्रस्तावित योजना के तहत शेयरधारक मिलकर NSE की करीब 6% इक्विटी बेचेंगे।

कितना होगा NSE का वैल्यूएशन

अनलिस्टेड मार्केट में NSE का वैल्यूएशन करीब 5 लाख करोड़ रुपये माना जा रहा है। इस आधार पर मार्केट एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि IPO का आकार लगभग 30,000 करोड़ रुपये हो सकता है। अगर ऐसा होता है तो यह 2024 में आए Hyundai Motor India के करीब 27,000 करोड़ रुपये के IPO के बाद सबसे बड़ा IPO होगा।

दिलचस्प बात यह है कि NSE की प्रमुख शेयरधारक और देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) इस OFS में अपनी हिस्सेदारी नहीं बेच रही है।

SBI सबसे बड़ा सेलिंग शेयरधारक

ड्राफ्ट दस्तावेज के मुताबिक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) सबसे बड़ा सेलिंग शेयरधारक होगा। बैंक 2.47 करोड़ शेयर बेचने की योजना बना रहा है। इसके अलावा मॉरीशस स्थित MS Strategic (Mauritius) Limited 1.60 करोड़ शेयर बेच सकती है। वहीं, कनाडा पेंशन प्लान इनवेस्टमेंट बोर्ड करीब 1.19 करोड़ शेयरों की बिक्री करेगी।

अन्य प्रमुख विक्रेताओं में Aranda Investments (Mauritius) Pte. Ltd., बैंक ऑफ बड़ौदा और स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन शामिल हैं। ये सभी करीब 1.1 करोड़ शेयर तक बेच सकते हैं।

बीमा कंपनियां भी बेचेंगी हिस्सेदारी

सरकारी बीमा कंपनियां भी इस IPO में अपनी हिस्सेदारी घटाएंगी।

  • जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (GIC Re) करीब 1.06 करोड़ शेयर बेचेगी।
  • द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड करीब 1.05 करोड़ शेयर बेचेगी।
  • नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड लगभग 60-60 लाख शेयर बेचेंगी।

IPO फाइलिंग से पहले NSE की IPO कमेटी ने बुधवार को बैठक कर प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया। NSE के बोर्ड ने सोमवार को DRHP को मंजूरी दी थी।

जनवरी में मिली थी SEBI की मंजूरी

NSE के बोर्ड ने 6 फरवरी 2026 को IPO प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इससे पहले जनवरी 2026 में SEBI ने एक्सचेंज को ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) दिया था। इसी के बाद लिस्टिंग का रास्ता साफ हुआ।

SEBI की यह मंजूरी इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि इसे को-लोकेशन मामले से जुड़े कुछ पुराने मामलों के अंतिम निपटारे से अलग रखा गया था।

2016 से अटका हुआ था IPO

NSE की लिस्टिंग करीब 10 साल से अटकी हुई थी। इसकी सबसे बड़ी वजह को-लोकेशन विवाद था, जिसमें कुछ ब्रोकरों को ट्रेडिंग सिस्टम तक दूसरों के मुकाबले तेज और प्राथमिक पहुंच मिलने के आरोप लगे थे।

NSE ने 2016 में करीब 10,000 करोड़ रुपये के OFS के लिए पहली बार ड्राफ्ट पेपर दाखिल किए थे। लेकिन SEBI ने गवर्नेंस संबंधी चिंताओं के चलते प्रस्ताव वापस लेने की सलाह दी थी। इसके बाद NSE ने गवर्नेंस और कंप्लायंस में कई सुधार किए। IPO की तैयारी के लिए एक्सचेंज ने 20 मर्चेंट बैंकर समेत कई सलाहकार भी नियुक्त किए। फिलहाल NSE के करीब 1.8 लाख शेयरधारक हैं।

को-लोकेशन केस में सेटलमेंट की कोशिश

NSE ने जून 2025 में को-लोकेशन मामले में सेटलमेंट एप्लिकेशन दाखिल की थी। इसमें केस निपटाने के लिए 1,387.39 करोड़ रुपये देने का प्रस्ताव रखा था।

इससे पहले SEBI की हाई-पावर्ड एडवाइजरी कमेटी (HPAC) करीब 1,880 करोड़ रुपये के सेटलमेंट की सिफारिश कर चुकी थी। यह मामला अभी भी SEBI के विचाराधीन है।

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