UPI MDR Charges Row: यूपीआई पेमेंट पर चार्ज को लेकर ‘इंडिया’ गठबंधन में फूट! मोदी सरकार को मिला CM उमर अब्दुल्ला का साथ

UPI MDR Charges Row: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार (17 सितंबर) को यूपीआई के माध्यम से लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत चार्ज लगाने के मामले में केंद्र सरकार का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने केंद्र के फैसले का सपोर्ट करते हुए कहा कि डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखना और चलाना सस्ता नहीं है। लेकिन साथ ही उन्होंने सरकार को खुदरा ग्राहकों के हितों की रक्षा करने की सलाह भी दी। सीएम ने कहा कि UPI सिस्टम को चलाना बहुत महंगा है। उन्होंने कहा कि जो चीजें हमें मुफ्त में मिलती हैं, हम उनकी कद्र नहीं करते।

अब्दुल्ला ने गुरुवार (17 सितंबर) को पत्रकारों से बातचीत में कहा, “यह शुल्क हर किसी पर नहीं लगाया जा रहा है। सबसे पहले, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजने पर कोई चार्ज नहीं लगता है। इसके अलावा, आम ग्राहकों से तब तक कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा जब तक वे एक तय सीमा से ज्यादा का लेन-देन नहीं करते।” मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपीआई इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखने और उसे चलाने का काम सस्ता नहीं है।

‘काफी पैसा खर्च होता है…’

सीएम ने कहा कि इस पेमेंट सिस्टम को चलाने में काफी पैसा खर्च होता है। पीटीआई के मुताबिक उन्होंने कहा, “असलियत यह भी है कि जब कोई चीज पूरी तरह मुफ्त मिलती है, तो हम अक्सर उसकी सही कीमत नहीं समझते। फिर भी भारत सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आम नागरिकों पर इस शुल्क का बोझ न पड़े। अगर कंपनियों से शुल्क ली भी जाती है, तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है, क्योंकि वैसे भी कंपनियां यूपीआई से काफी मुनाफा कमाती हैं।”

J&K के CM ने कहा, “यह चार्ज आपसे या मुझसे नहीं लिया जाएगा। इसका भुगतान उन व्यवसायों को करना होगा जहां लेनदेन हो रहा है। अभी जो आदेश जारी किया गया है। उसमें साफ कहा गया है कि यह चार्ज ग्राहक पर नहीं डाला जा सकता। दूसरी बात, अगर आप और मैं एक-दूसरे को पैसे भेज रहे हैं, तो उस पर भी कोई चार्ज नहीं लगेगा। ₹2,000 से कम के लेनदेन पर कोई मर्चेंट चार्ज नहीं है, क्योंकि ज्यादातर व्यावसायिक लेनदेन ₹2,000 से कम के ही होते हैं। ₹2,000 से ज़्यादा के लेनदेन पर चार्ज लगता है, लेकिन उसकी भी एक सीमा तय की गई है।”

अब्दुल्ला ने आगे कहा, “मैंने सुना है कि UPI को चालू रखने में लगभग ₹20,000 करोड़ खर्च होते हैं। ₹20,000 करोड़ का मतलब है कि यह पैसा आपके और मेरे द्वारा दिए गए टैक्स से आ रहा है। कहीं न कहीं से तो यह पैसा आ ही रहा है। तो, जाने-अनजाने में हम UPI के लिए पहले से ही भुगतान कर रहे हैं। लेकिन आज हम इसके लिए अपने टैक्स के जरिए भुगतान कर रहे हैं। अगर इसके बाद बड़ी कंपनियां और व्यापारी इसके लिए भुगतान करते हैं, तो मुझे नहीं लगता कि किसी को कोई आपत्ति होनी चाहिए।”

‘फैसला अमेरिकी दबाव में नहीं’

इस बीच, यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (MDR) लगाने का फैसला अमेरिकी दबाव में किए जाने के आरोपों को वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को खारिज कर दिया। मंत्रालय ने कहा कि नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के हाल में जारी गाइडलाइंस में यूपीआई पर क्रेडिट कार्ड के जरिए लेनदेन के लिए केवल रुपे क्रेडिट कार्ड की अनुमति है। इससे विदेशी क्रेडिट कार्ड को कोई लाभ नहीं मिलने वाला है।

फाइनेंशियल सर्विसेज डिपार्टमेंट (DFS) ने US ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) की 2026 की रिपोर्ट में की गई टिप्पणियों के जवाब में यह स्पष्टीकरण जारी किया है। रिपोर्ट में कहा गया था कि US की इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट सर्विस देने वाली कंपनियों को भारत के UPI पेमेंट सिस्टम में RuPay कार्ड जैसी सुविधाएं या मौके नहीं मिलते हैं।

DFS ने एक बयान में कहा, “15 सितंबर के NPCI सर्कुलर में RuPay के अलावा दूसरे क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करके UPI पर क्रेडिट ट्रांजैक्शन की इजाजत नहीं है। यह आरोप कि बाहरी दबाव की वजह से MDR लागू किया जा रहा है, ‘गलत और गुमराह करने वाला’ है।”

सरकार का यह बयान ऐसे समय आया है जब कांग्रेस समेत कुछ विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि सरकार ने 2,000 रुपये से अधिक के व्यापारी यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगाने का फैसला अमेरिकी दबाव में किया है।

NPCI ने क्या कहा?

NPCI ने कहा है कि अधिक मूल्य के चुनिंदा लेनदेन पर एमडीआर लागू करने का उद्देश्य यूपीआई परिवेश के लिए टिकाऊ रेवेन्यू मॉडल तैयार करना है। इसके साथ ही इससे छोटे तीसरे पक्ष के ऐप प्रोवाइडर को बाजार में अधिक हिस्सेदारी हासिल करने के लिए प्रतिस्पर्धा करने का अवसर मिलेगा।

एनपीसीआई ने नवंबर, 2020 में तीसरे पक्ष के ऐप प्रोवाइडर के लिए 30 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी की सीमा तय की थी। हालांकि, उसका कहना है कि टिकाऊ रेवेन्यू मॉडल के अभाव में बाजार की प्रमुख इकाइयों के अलावा अन्य कंपनियां प्रतिस्पर्धा नहीं कर पा रही थीं।

क्या है पूरा मामला?

नए गाइडलाइंस के तहत, 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के व्यक्ति-से-व्यापारी (पी2एम) UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लगेगा। इसका भुगतान व्यापारी करेगा। वहीं, 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर यह अधिकतम 300 रुपये होगा। हालांकि, दो व्यक्तियों के बीच होने वाला लेनदेन और रोजमर्रा के छोटे व्यापारी भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।

रेलवे, दूरसंचार, ईंधन और बीमा जैसी आवश्यक सेवाओं के लिए 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर पांच रुपये का शुल्क होगा। जबकि म्यूचुअल फंड और शेयर ब्रोकिंग जैसे पूंजी बाजार लेनदेन पर 0.02 प्रतिशत एमडीआर लगेगा, जो अधिकतम 300 रुपये होगा। महीने में यूपीआई क्यूआर कोड के जरिए एक लाख रुपये तक का कलेक्शन करने वाले छोटे व्यापारी इस शुल्क से पूरी तरह मुक्त रहेंगे। गांवों और कस्बों में व्यापारियों को किए जाने वाले यूपीआई क्यूआर भुगतान पर भी एमडीआर नहीं लगेगा।

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2000, 3000, 50000 से लेकर 75000 रुपये तक के UPI पेमेंट पर कितना लगेगा MDR, यहां जानिए पूरा कैलकुलेशन

UPI पेमेंट पर MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट को लेकर अब तस्वीर साफ है, जो 15 अक्टूबर से लागू होने वाली है। इसका हिसाब पेमेंट की रकम के आधार पर होगा। ₹2,000 तक के ट्रांजैक्शन पर कोई MDR नहीं लगेगा। इसके ऊपर 0.40% की दर से MDR की गणना होगी। हालांकि, बड़े पेमेंट पर इसकी अधिकतम सीमा भी तय है।

सरकार ने साफ किया है कि MDR ग्राहक को नहीं देना होगा। इसका भुगतान मर्चेंट यानी दुकानदार करेगा। यह रकम मर्चेंट के बैंक को मिलेगी। इसलिए ग्राहक के खाते से पेमेंट की रकम के अलावा MDR की रकम अलग से नहीं कटेगी।

किस पेमेंट पर कितना लगेगा MDR

मर्चेंट को दी गई रकमMDR प्रतिशतMDR की रकम
₹2,000कोई MDR नहीं₹0
₹3,0000.40%₹12
₹50,0000.40%₹200
₹75,000 से ज्यादाअधिकतम ₹300₹300

₹3,000 के पेमेंट पर कितना MDR?

मान लीजिए आपने किसी दुकान पर ₹3,000 का UPI पेमेंट किया। इस रकम पर 0.40% MDR लगेगा। ₹3,000 का 0.40% ₹12 होता है। यानी मर्चेंट को इस ट्रांजैक्शन पर ₹12 MDR देना होगा।

अब ₹50,000 का पेमेंट लेते हैं। इसका 0.40% ₹200 होता है। यानी ₹50,000 के UPI पेमेंट पर मर्चेंट का MDR ₹200 होगा।

₹75,000 के बाद क्या होगा?

यहां एक जरूरी बात है। बड़े पेमेंट पर MDR की एक अधिकतम सीमा रखी गई है। ₹75,000 और उससे ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर MDR ₹300 फिक्स रहेगा। इसके बाद पेमेंट की रकम बढ़ने पर भी MDR ₹300 से ज्यादा नहीं होगा।

इसे ₹1 लाख के पेमेंट से समझिए। ₹1 लाख का 0.40% ₹400 होता है। लेकिन यहां ₹300 की अधिकतम सीमा लागू होगी। इसलिए मर्चेंट को ₹400 नहीं, बल्कि ₹300 MDR देना होगा।

₹2,000 के पेमेंट पर कोई MDR नहीं

₹2,000 तक के UPI पेमेंट पर MDR शून्य रहेगा। यानी ₹2,000 के पेमेंट पर मर्चेंट को कोई MDR नहीं देना होगा।

इसके बाद ₹3,000 पर ₹12 और ₹50,000 पर ₹200 MDR होगा। वहीं ₹75,000 या उससे ज्यादा के पेमेंट पर MDR ₹300 पर रुक जाएगा।

UPI MDR Fees: ₹2000 से ऊपर के पेमेंट पर 0.40% MDR लगेगा, हर ट्रांजैक्शन पर ₹300 की लिमिट रहेगी