UPI के चार्जेज पर NSE के सीईओ का बड़ा बयान, ब्रोकर और उनके क्लाइंट्स के बीच का मामला

NSE on UPI Charges: देश के सबसे बड़े एक्सचेंज एनएसई के एमडी और सीईओ आशीष चौहान का कहना है कि यूपीआई पेमेंट्स पर नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर सरकार से कोई बातचीत नहीं हुई है। उनका कहना है कि यह मामला ब्रोकर्स और उनके क्लाइंट्स के बीच का है और इस बात की संभावना है कि वे इसका हल निकाल लेंगे। उन्होंने ये बातें एनएसई की बीएसई पर लिस्टिंग के एक दिन बाद पत्रकारों से बातचीत में कही। एनएसई के ₹1785 के शेयर ₹22,562 करोड़ के आईपीओ को 5 गुना से अधिक सब्सक्रिप्शन मिलने के बाद 24 सितंबर को 1% से कम प्रीमियम पर लिस्ट हुए थे।

UPI MDR पर क्या कहा NSE के सीईओ ने?

एनएसई के सीईओ आशीष चौहान ने कहा कि यूपीआई से जुड़े एमडीआर पर सरकार के साथ कोई चर्चा नहीं हुई है। उन्होंने आगे कहा कि यह NPCI (नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया) का फैसला है और अब हमें इंतजार करना होगा और देखना होगा। उन्होंने आगे कहा कि यह ब्रोकर और क्लाइंट के बीच का मामला लगता है और जो भी दिक्कत होगी, वे उसका कोई न कोई समाधान निकाल लेंगे।

बता दें कि एनपीसीआई ने यूपीआई ट्रांजैक्शन के लिए एक नया एमडीआर फ्रेमवर्क पेश किया है। इसके तहत कैपिटल-मार्केट ट्रांजैक्शन यानी कि स्टॉकब्रोकर, सिक्योरिटीज और म्यूचुअल फंड से जुड़े पेमेंट पर 0.02% का MDR लगेगा, जिसकी अधिकतम सीमा प्रति ट्रांजैक्शन ₹300 तय की गई है। नए चार्ज 15 अक्टूबर से लागू होंगे।

ब्रोडर लेवल पर बात करें तो यूपीआई फ्रेमवर्क में ₹2000 से अधिक के खास P2M (पर्सन-टू-मर्चेंट) ट्रांजैक्शन पर 0.4% एमडीआर का प्रावधान है, जबकि ₹2,000 तक के मर्चेंट यूपीआई पेमेंट और छोटे कारोबारियों के लिए जीरो-एमडीआर फ्रेमवर्क के तहत आने वाले ट्रांजैक्शन पर कोई चार्ज नहीं लगेगा। वित्त मंत्रालय का कहना है कि लगभग 96% P2M ट्राजैक्शन पर कोई असर नहीं पड़ेगा और ग्राहकों से एमडीआर हीं लिया जाएगा।

NSE IPO Listing: कैसा था स्टॉक मार्केट में शेयरों का पहला दिन

एनएसई की लिस्टिंग का लंबे समय से इंतजार हो रहा था और अब जाकर यह 24 सितंबर को लिस्ट हुआ। इसका इश्यू पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल का था और 5 गुना से अधिक भरने के बाद शेयरों ने आईपीओ निवेशकों को 1% से कम लिस्टिंग गेन दिया। हालांकि फिर इसने उड़ना भरने की कोशिश की। इसका ₹1785 का शेयर बीएसई पर ₹1800 के भाव पर लिस्ट होने के बाद ₹1878 की ऊंचाई तक पहुंचे थे यानी कि आईपीओ निवेशक 5% से अधिक मुनाफे तक पहुंचे थे।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Indian Oil ने किया खारिज, 23 सितंबर को नहीं है कोई No-UPI Day, ये है पूरा मामला

Indian Oil on No-UPI Day: तेल बेचने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी इंडियन ऑयल इंडियन ऑयल ‘नो-यूपीआई डे’ को लेकर सफाई दी है। कंपनी का कहना है कि मध्य प्रदेश के इंदौर में 23 सितंबर को बिना यूपीआई के तेल बेचने वाली बात पूरी तरह आधारहीन है और पेट्रोल पंप मालिकों ने ऐसा कुछ नहीं कहा है। इंडियन ऑयल ने यह बात शनिवार 19 सितंबर को X (पूर्व नाम Twitter) पर कही। बता दें कि 15 अक्टूबर से कुछ मर्चेंट ट्रांजैक्शन के लिए यूपीआई पेमेंट से जुड़े नियमों में बदलाव होने वाला है। नए नियमों के तहत ग्राहक बिना कोई फीस दिए यूपीआई से पेमेंट कर सकेंगे तो ₹2,000 से अधिक के कुछ खास मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगेगा।

क्या है No-UPI Day से जुड़ा पूरा मामला

सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हो रही है, जिसमें दावा किया गया है कि मध्य प्रदेश के इंदौर में पेट्रोल पंप मालिकों ने 23 सितंबर को ‘नो-UPI डे’ मनाने का ऐलान किया है। अब इंडियन ऑयल ने इसे फर्जी बताया है। वायरल पोस्ट में दावा किया गया है कि पेट्रोल पंप वाले मर्चेंट फीस के विरोध में ₹2 हजार से अधिक के यूपीआई पेमेंट नहीं ले रहे और 23 सितंबर को ‘नो-यूपीआई डे’ मनाएंगे। इंडियन ऑयल का कहना है कि यह वायरल मैसेज फर्जी और गुमराह करने वाला है और मध्य प्रदेश में पेट्रोल पंप मालिकों ने ₹2,000 से अधिक के UPI पेमेंट पर ऐसी कोई पाबंदी लगाने का ऐलान नहीं किया है। कंपनी का कहना है कि पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन लगातार मिनिस्ट्री के अधिकारियों के संपर्क में हैं और ‘नो-यूपीआई डे’ जैसा कुछ ऐलान नहीं हुआ है बल्कि पेट्रोल पंप डीलर्स तो डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने में सबसे आगे रहे हैं।

कैसी है इंडियन ऑयल के शेयरों की हालत

इंडियन ऑयल के शेयर शुक्रवार 18 सितंबर को बीएसई पर 2.01% की बढ़त के साथ ₹136.80 के भाव पर बंद हुए थे। इस साल इसने निवेशकों को तगड़ा शॉक दिया है। 27 फरवरी 2026 को बीएसई पर यह ₹188.90 पर था जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। इस हाई लेवल से दो ही महीने में यह 31.02% टूटकर 2 अप्रैल 2026 को ₹130.30 पर आ गया था जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है।

UPI पर ट्रांजेक्शन चार्ज को लेकर दुविधा में हैं? तो यहां जानें अपने हर सवाल का पूरा जवाब

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

UPI पर 0.4% एमडीआर चार्ज का फैसला वापस नहीं होगा, सीनियर सरकारी अधिकारी ने कहा

यूपीआई ट्रांजेक्शंस पर 0.4 फीसदी एमडीआर चार्ज का फैसला वापस नहीं होगा। सरकार के सूत्रों ने 16 सितंबर को यह बताया। एनपीसीआई ने 15 सितंबर को 2000 रुपये से ज्यादा वैल्यू के ट्रांजेक्शंस पर 0.4 फीसदी एमडीआर चार्ज लगाने का ऐलान किया।

एमडीआर चार्ज का फैसला वापस नहीं लेगी सरकार

सरकार क्या 2000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजेक्शंस पर 0.4 फीसदी एमडीआर लगाने का फैसला वापस लेगी? इस सवाल के जवाब में एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि इस बारे में फैसला लिया जा चुका है और इसे वापस लेने का सवाल ही नहीं पैदा होता।

एमडीआर चार्ज से यूपीआई सिस्टम को फायदा

सूत्रों ने बताया कि एमडीआर चार्ज लगाने का फैसला यूपीआई ईकोसिस्टम के हित में लिया गया है। इसका मकसद यूपीआई की सेफ्टी और सिक्योरिटी को मजबूत बनाना है। सूत्रों ने यह भी कहा कि 2020 में यूपीआई शुरू होने पर दूसरे देशों की तरह लेवी लगाने का फैसला लिया गया था। नए एमडीआर फ्रेमवर्क से यूपीआई को बनाए रखने में मदद मिलेगी।

कई पक्षों ने एमडीआर चार्ज का किया विरोध

यूपीआई पेमेंट पर एमडीआर चार्ज लगाने का कई पक्षों ने विरोध किया है। इनमें ट्रेडर्स, दुकानदार और राजनीतिक दल शामिल हैं। राजनीतिक दलों ने इसे ‘मोदी टैक्स’ बताया है। कांग्रेस सहित कुछ विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अमेरिकी दबाव के आगे झुकने का आरोप लगाया है।

एमडीआर चार्ज से यूपीआई के विस्तार में मदद मिलेगी

सरकार ने एमडीआर चार्ज लगाने के फैसले का बचाव करते हुए 15 सितंबर को कहा कि इससे रूरल और सेमी अर्बन एरिया में यूपीआई के विस्तार में मदद मिलेगी। सरकार का कहना है कि यूपीआई से होने वाले ज्यादातर पेमेंट्स को फ्री बनाए रखा गया है।

संसद की समिति ने यूपीआई को फ्री रखने का समर्थन नहीं किया था 

फाइनेंस पर संसद की स्थायी समिति ने अपनी 32वीं रिपोर्ट में कहा था कि ‘जीरो यूपीआई रीजीम’ से सरकार पर वित्तीय दबाव पड़ता है। इससे लॉन्ग टर्म इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करने की यूपीआई ईकोसिस्टम की क्षमता भी सीमित बनी रहती है। उसने यूपीआई को वित्तीय रूप से सस्टेनेबल बनाए रखने के लिए व्यावहारिक रेवेन्यू की व्यवस्था शुरू करने की सलाह दी थी।

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यूपीआई सिस्टम पर सरकार को सालाना 2000 करोड़ खर्च करना पड़ता है

समिति ने यह भी कहा था कि यूपीआई पेमेंट ईकोसिस्टम की मदद के लिए सरकार सालाना 2000 करोड़ रुपये खर्च करती है। करीब 6 सालों तक पूरी तरह से फ्री रहने के बाद यूपीआई अब चार्जेबल हो जाएगा। एमडीआर चार्ज 15 अक्तूबर से लागू हो जाएगा। हालांकि, चार्ज के दायरे में 2000 रुपये से ऊपर के ट्रांजेक्शन आएंगे। कस्टमर्स को यह चार्ज नहीं चुकाना होगा।

UPI Payment Rules : आम यूजर के लिए UPI रहेगा फ्री, किन ट्रांजेक्शन पर लगेगा चार्ज, जान लीजिए सरकार के नए नियम

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MDR Charges on UPI payment

UPI से पैसे भेजने वालों के लिए बड़ी राहत है। नए पेमेंट फ्रेमवर्क के मुताबिक एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति (P2P) को किए जाने वाले UPI भुगतान पर कोई चार्ज नहीं लगेगा, चाहे ट्रांजैक्शन की रकम कितनी भी हो। यानी दोस्तों, परिवार या किसी दूसरे व्यक्ति को UPI से पैसे भेजना पहले की तरह मुफ्त रहेगा।

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नए नियमों का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि आम व्यक्ति का P2P UPI भुगतान मुफ्त बना रहेगा। बदलाव मुख्य रूप से कुछ बड़े Merchant Payments पर MDR से जुड़ा है। इसलिए अगर आप रोजमर्रा में दोस्त, परिवार या किसी व्यक्ति को UPI से पैसे भेजते हैं, तो आपको इस बदलाव से सीधे तौर पर कोई नया शुल्क नहीं देना होगा। 

 

हालांकि, दुकानदार या कारोबारी को किए जाने वाले कुछ बड़े UPI भुगतान (P2M) पर Merchant Discount Rate यानी MDR लागू होगा। ₹2,000 से ज्यादा के कुछ Merchant Transactions पर 0.4 प्रतिशत MDR लगाया जाएगा।

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₹2,000 से ज्यादा के हर UPI पेमेंट पर ग्राहक को चार्ज नहीं देना होगा

 

यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है। MDR मुख्य रूप से Merchant और Payment Ecosystem के बीच लगने वाला शुल्क है। इसका मतलब यह नहीं है कि ग्राहक के UPI ऐप से ₹2,000 से ज्यादा भुगतान करने पर उसके खाते से अलग से 0.4 प्रतिशत काट लिया जाएगा।

 

सरकार ने बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी है कि व्यापारी MDR की लागत ग्राहक से न वसूलें।

 

P2P UPI पेमेंट हमेशा फ्री रहेगा

 

अगर आप अपने दोस्त, रिश्तेदार या किसी अन्य व्यक्ति को UPI से पैसे भेजते हैं, तो उस पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।

 

  • ₹500 भेजें — कोई चार्ज नहीं
  • ₹2,000 भेजें — कोई चार्ज नहीं
  • ₹10,000 भेजें — कोई चार्ज नहीं
  • इससे भी ज्यादा रकम भेजें — P2P UPI पर कोई चार्ज नहीं

 

P2P ट्रांजैक्शन UPI के कुल ट्रांजैक्शन वॉल्यूम का करीब 37 प्रतिशत और कुल वैल्यू का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा हैं।

 

दुकानदार को ₹2,000 से ज्यादा देने पर क्या बदलेगा?

 

Person-to-Merchant यानी P2M ट्रांजैक्शन में ₹2,000 से ज्यादा के कुछ भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा।

 

यह शुल्क पेमेंट सिस्टम से जुड़े अलग-अलग हिस्सेदारों, जैसे बैंक और ऐप प्रोवाइडर के बीच साझा किया जाएगा।

 

₹75,000 या उससे ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर MDR अधिकतम ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन तक सीमित रहेगा।

 

उदाहरण से समझिए

 

अगर किसी पात्र Merchant Transaction की रकम ₹10,000 है, तो 0.4 प्रतिशत के हिसाब से MDR ₹40 होगा।

 

वहीं ₹75,000 या उससे ज्यादा की रकम पर 0.4 प्रतिशत की गणना ₹300 से ज्यादा होने पर भी MDR ₹300 तक सीमित रहेगा।

 

रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस और पेट्रोल जैसे क्षेत्रों के लिए अलग नियम

 

कुछ जरूरी सेवाओं और क्षेत्रों में ₹2,000 से ज्यादा के UPI Merchant Payments पर फ्लैट ₹5 MDR लागू होगा।

 

इनमें शामिल हैं:

 

  • रेलवे
  • टेलीकॉम
  • इंश्योरेंस
  • ईंधन/फ्यूल
  • कृषि से जुड़े इनपुट

 

  • इन क्षेत्रों के ट्रांजैक्शन UPI के P2M भुगतान में बड़ी हिस्सेदारी रखते हैं।
  • म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार से जुड़े भुगतान पर भी MDR
  • म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉक ब्रोकर और डीलर्स से जुड़े भुगतानों पर 0.02 प्रतिशत MDR लागू होगा।
  • इसका अधिकतम शुल्क ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन तक सीमित रहेगा।

 

छोटे दुकानदारों को राहत

 

छोटे व्यापारियों के लिए भी व्यवस्था में राहत रखी गई है। P2PM कैटेगरी में ऐसे छोटे व्यापारी जो UPI QR Code के जरिए महीने में ₹1 लाख तक प्राप्त करते हैं, उनके लिए सभी ट्रांजैक्शन पर अनिवार्य Zero MDR जारी रहेगा।

इसका मतलब छोटे दुकानदारों और छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त शुल्क का दबाव नहीं पड़ेगा।

 

UPI ऐप अलग से Platform Fee नहीं लगा सकेंगे

 

नए नियमों में UPI ऐप प्रोवाइडर्स को अलग से Platform Fee या Hidden Charges लगाने की अनुमति नहीं होगी। साथ ही बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि व्यापारी MDR का खर्च सीधे ग्राहक से न वसूलें। यानी ग्राहक को दुकान पर UPI से भुगतान करते समय अलग से कोई छिपा हुआ UPI चार्ज नहीं लगाया जाना चाहिए।

 

UPI इस्तेमाल करने वालों के लिए कोई Monthly Limit नहीं

 

आम यूजर्स के लिए मुफ्त UPI ट्रांजैक्शन की संख्या पर कोई मासिक कोटा या वॉल्यूम लिमिट नहीं होगी। यानी ऐसा नहीं है कि महीने में एक निश्चित संख्या में मुफ्त UPI भुगतान करने के बाद हर ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगने लगेगा।

Daily UPI Limit और चार्ज अलग-अलग चीजें हैं

 

बैंक और NPCI अलग-अलग कैटेगरी के हिसाब से UPI की दैनिक सीमा तय करते हैं। यह सीमा आम तौर पर ₹1 लाख से ₹5 लाख तक हो सकती है। लेकिन इसे UPI शुल्क नहीं समझना चाहिए। यह सीमा मुख्य रूप से सुरक्षा और रिस्क मैनेजमेंट के लिए होती है।

 

आम यूजर के लिए सबसे जरूरी 5 बातें

 

1. व्यक्ति से व्यक्ति UPI: किसी भी रकम पर मुफ्त रहेगा।

2. Merchant को भुगतान: ₹2,000 से ज्यादा के कुछ पात्र P2M ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR लागू होगा।

3. ₹75,000 या उससे ज्यादा: MDR अधिकतम ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन तक रहेगा।

4. छोटे दुकानदार: महीने में ₹1 लाख तक UPI QR से प्राप्त करने वाले पात्र छोटे व्यापारियों के लिए Zero MDR जारी रहेगा।

5. ग्राहक से Hidden Charge: UPI ऐप या व्यापारी द्वारा MDR को अलग से ग्राहक पर डालने की अनुमति नहीं होगी।

UPI Payment पर 6 साल बाद फिर लगेगा MDR! क्यों हो रही वापसी, किनमें बंटेगा इसका पैसा

UPI Payment Charges: लगभग छह साल बाद यूपीआई से लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वापस आ सकता है। दुकानदार को ₹2,000 या उससे अधिक के यूपीआई पेमेंट पर 0.3% का चार्ज लग सकता है। इसके लागू होने का कानूनी रास्ता तब साफ हुआ, जब सरकार ने अगस्त में पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट में बदलाव किया और जीरो-एमडीआर प्रोटेक्शन को हटा दिया। 21 अगस्त की फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक अब यूपीआई से पेमेंट पर जीरो की बजाय 0.3% के शुल्क का नियम अगले दो हफ्ते के भीतर लागू किया जा सकता है। हालांकि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ कर दिया है कि ग्राहकों और छोटे कारोबारियों पर इसका भार नहीं डाला जाएगा। सरकार की कोशिश इस पेमेंट सिस्टम से जुड़ी एंटिटीज को डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाए रखने पर होने वाले खर्च के कुछ हिस्से की भरपाई है। ₹2,000 या इससे अधिक के लेन-देन पर MDR लागू होने से इलेक्ट्रॉनिक्स, सिक्योरिटीज, कपड़े और अधिक दाम वाली खरीदारी प्रभावित हो सकती है।

किसे मिलेगा UPI Payment में MDR का पैसा

एमडीआर का पैसा किसी एक को नहीं मिलेगा बल्कि बैंक, फिनटेक कंपनियां और इस लेन-देन में शामिल अन्य एंटिटीज में बंटेगा। साल 2019 तक एमडीआर वाली व्यवस्था लागू थी लेकिन फिर डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए इसे जीरो कर दिया गया। इसे हटाए जाने से पहले ₹100 से अधिक मूल्य वाले ऑफलाइन क्यूआर कोड के जरिए किए गए P2M (पर्सन-टू-मर्चेंट) पेमेंट पर 0.3% शुल्क लगता था, जिसे इश्यूअर (Issuer) और एक्वायरर (Acquirer) बैंकों के बीच बराबर बांटा जाता था। एमडीआर की अधिकतम सीमा भी ₹100 थी, जिसे साल 2020 में पूरी तरह समाप्त कर दिया गया।

अब इसे फिर लाया जा रहा है। इसका पैसा पेमेंट चेन में चार प्लेयर्स के बीच बंटेगा। एक हिस्सा ग्राहक के बैंक को, दूसरा हिस्सा पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और ट्रांजैक्शन हैंडल करने वाले इसके बैंक को, तीसरा हिस्सा दुकानदार की तरफ से यानी एक्वायरिंग बैंकों और उसके पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को तो चौथा हिस्सा यूपीआई नेटवर्क चलाने और लेन-देन का निपटारा करने वाली NPCI को मिलेगा। एमडीआर में सबसे अधिक हिस्सा इंटरचेंज शुल्क के रूप में इश्यूइंग बैंक यानी ग्राहकों के बैंक को तो सबसे कम हिस्सा एनपीसीआई को मिलेगा।

क्यों हुई वापसी

भर्तृहरि महताब के नेतृत्व में फाइनेंस से जुड़ी संसदीय स्थायी समिति ने 12 अगस्त को अपनी रिपोर्ट में जिक्र किया कि यूपीआई को बढ़ावा देने और जीरो-MDR के कारण इंडस्ट्री के रेवेन्यू लॉस की भरपाई के लिए सरकार ने सिर्फ ₹2,000 करोड़ एलॉट किए हैं जोकि डिजिटल पेमेंट इंडस्ट्री की अनुमानित सालाना लागत ₹20,700 करोड़ से बहुत ही कम है। कमेटी ने आगाह किया है कि इसके चलते साइबर सिक्योरिटी, फर्जीवाड़े की रोकथाम और पेमेंट नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर में जरूरी निवेश प्रभावित हो सकता है। चूंकि अब एआई का इस्तेमाल बढ़ा है तो साइबर खतरे भी बढ़े हैं, जिससे चिंता और गंभीर हो गई है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा भी कह चुके हैं कि यूपीआई हमेशा फ्री नहीं रह सकता है और कोई न कोई इसका खर्च चुका रहा है।

हालांकि सिर्फ एमडीआर ही इन खर्चों की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं है। डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज ने संसदीय समिति को बताया कि फंडिंग के बोझ को कम करने के लिए दो विकल्पों पर विचार किया जा रहा है- अधिक वैल्यू वाले यूपीआई पेमेंट पर एमडीआर को दोबारा लागू करना या आने वाले वषों में सरकारी सहायता को धीरे-धीरे कम करना। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में देश में करीब ₹314 लाख करोड़ के 24,000 करोड़ से अधिक UPI लेनदेन हुए। इसमें से 71% P2P (पर्सन-टू-पर्सन) और बाकी P2M (पर्सन-टू-मर्चेंट) थे। पी2एम में सिर्फ 4% की वैल्यू ही ₹2,000 या उससे अधिक थी यानी कि अधिकतर यूपीआई पेमेंट एमडीआर के दायरे से बाहर रहेगा तो छोटे कारोबारियों को बाहर रखने से इसका दायरा और सीमित हो जाता है।

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जेब में ₹0 कैश, फिर भी घूमेंगे विदेश! देखें कहां काम करेगा भारतीय UPI

कभी भी अब्रॉड ट्रैवल में सबसे बड़ी परेशानी होती है पेमेंट करना। पहले लोगों को कैश बदलवाना पड़ता था या इंटरनेशनल कार्ड साथ रखना पड़ता था। लेकिन अब भारत के लोगों के लिए यह काम काफी आसान हो गया है। कई देशों में UPI से सीधे मोबाइल के जरिए पेमेंट की सुविधा मिलने लगी है, जिससे शॉपिंग करना, होटल का बिल पेमेंट या रेस्टोरेंट में पेमेंट करना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है।

स्पेन की तैयारी 

जल्दी ही स्पेन भी अब वह देश होगा, जहां जाकर भारत के लोग UPI से आसानी से पेमेंट कर सकेंगे। होटल, रेस्टोरेंट, कैफे और दुकानों पर सिर्फ QR कोड स्कैन करके पेमेंट करना आसान हो जाएगा। इससे कैश रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी और ट्रैवल पहले से ज्यादा आसान होगा।

नेपाल और भूटान 

नेपाल और भूटान घूमने जाने वाले भारतीयों के लिए UPI काफी काम की फैसिलिटी है। यहां कई दुकानों, होटलों और आउटलेट पर UPI से पेमेंट किया जा सकता है। इससे करेंसी चेंज करने की परेशानी कम हो जाती है और मोबाइल से कुछ ही सेकंड में पेमेंट हो जाता है।

ग्रीस 

ग्रीस भी कुछ समय पहले UPI फैसिलिटी अपनाने वाले देशों में जुड़ चूका है। अगर आप एथेंस की हिस्टोरिक साइट देखने जाएं या सेंटोरिनी और माइकोनोस आइलैंड की सैर करें, तो कई जगहों पर डिजिटल पेमेंट करने की फैसिलिटी मिल सकती है। इससे शॉपिंग करना और घूमना दोनों आसान हो जाते हैं।

सिंगापुर

सिंगापुर उन देशों में है, जहां भारतीय UPI को अपनाया गया। यहां टूरिस्ट शॉपिंग मॉल, कैफे, रेस्टोरेंट और कई जगहों पर आसानी से मोबाइल से पेमेंट कर सकते हैं। इससे बार-बार कैश निकालने या पैसे बदलवाने की जरूरत नहीं पड़ती।

कतर और यूएई

कतर, दुबई और अबू धाबी वाले पॉपुलर टूरिस्ट डेस्टिनेशन पर भी UPI का इस्तेमाल धीरे-धीरे बढ़ रहा है। कई रिटेल स्टोर, एयरपोर्ट, रेस्टोरेंट और कुछ टूरिस्ट डेस्टिनेशन पर QR कोड स्कैन करके आसानी से पेमेंट किया जा सकता है। इससे ट्रैवल में पेमेंट करना पहले से ज्यादा आसान हो गया है।

फ्रांस, मॉरिशस और श्रीलंका

फ्रांस यूरोप का पहला देश था, जिसने UPI पेमेंट की शुरुआत की। इसके बाद मॉरिशस और श्रीलंका ने भी यह फैसिलिटी शुरू कर दी थी। अब इन देशों में कई होटल, लोकल मार्केट, बीच, रेस्टोरेंट पर टूरिस्ट आसानी से डिजिटल पेमेंट कर सकते हैं। इससे घूमने-फिरने का एक्सपीरियंस आसान बन जाता है।

टूरिस्ट बेनिफिट 

दुनिया के कई देशों में UPI की सुविधा मिलने से भारत के लोग का काम पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है। अब हर बार फॉरेन करेंसी साथ रखने या इंटरनेशनल कार्ड रखने की जरूरत नहीं पड़ती। जहां UPI अवेलेबल है, वहां मोबाइल से QR कोड स्कैन करके कुछ ही सेकंड में पेमेंट किया जा सकता है। जो भी देश इस फैसिलिटी को अपना रहे हैं, वहां ट्रैवल करना अब आसान और सेफ होता जा रहा है।