बिजनेस ट्रिप का बहाना पड़ा भारी, एयरपोर्ट पर पासपोर्ट के इस राज ने खोल दी पति की पोल!

पासपोर्ट की एक गड़बड़ी से खुला व्यक्ति की छिपी हुई ट्रिप का पूरा सीक्रेट

मुंबई: पुणे के एक बिजनेसमैन की विदेश यात्रा से जुड़ा मामला इन दिनों चर्चा में है। उसने पत्नी को इमिग्रेशन से जुड़ी परेशानी बताकर यात्रा रद्द होने की बात कही, लेकिन असल कहानी कुछ और थी। जिस महिला के साथ वह विदेश जाने वाला था, उसके पासपोर्ट में दिक्कत के चलते इमिग्रेशन क्लियर नहीं हो पाया और पूरी यात्रा रद्द करनी पड़ी। इसके बाद इस मामले में कई ऐसी बातें सामने आईं, जिनसे कहानी ने अलग मोड़ ले लिया।

पत्नी से छिपाई ट्रिप की बात

46 साल के इस बिजनेसमैन ने अपनी पत्नी को बताया था कि वह बिजनेस ट्रिप के लिए कुआलालंपुर जा रहा है। लेकिन वह एक दूसरी महिला के साथ विदेश यात्रा पर निकला था। मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन जांच के दौरान अधिकारियों को पता चला कि महिला जिस पासपोर्ट का इस्तेमाल कर रही थी, उसे पहले ही खोया हुआ घोषित किया जा चुका था।

एयरपोर्ट से अचानक बदला ये प्लान

महिला को इमिग्रेशन पर रोके जाने के बाद बिजनेसमैन को लगा कि अब उसकी पत्नी को असली बात पता चल सकती है। इसके बाद उसने अपनी यात्रा रद्द कर दी और मोबाइल फोन बंद कर दिया। पुलिस के मुताबिक, वह महिला के साथ दक्षिण मुंबई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस यानी CSMT चला गया। एयरपोर्ट से निकलने से पहले उसने वहां मौजूद लैंडलाइन फोन से पत्नी को कॉल किया और बताया कि इमिग्रेशन की परेशानी के कारण उसे अपना मोबाइल फोन जमा करना पड़ा है।

पत्नी ने दर्ज कराई किडनैपिंग की FIR

अगले दिन बिजनेसमैन ने अपनी पत्नी से थोड़ी देर WhatsApp वीडियो कॉल पर बात की और इमिग्रेशन की समस्या वाली वही बात दोहराई। इसके बाद उसका फोन नेटवर्क से बाहर हो गया और पत्नी उससे कांटेक्ट नहीं कर पाई। काफी समय तक कोई जानकारी नहीं मिलने पर उसने पुलिस से कांटेक्ट किया। उसकी शिकायत के आधार पर पुलिस ने अपहरण की FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

FIR की जानकारी मिलते ही सामने आया ये सच

मामले की FIR दर्ज होने की जानकारी मिलने के बाद बिजनेसमैन खुद सहार पुलिस स्टेशन पहुंचा। यह वही पुलिस स्टेशन है, जिसके अधिकार क्षेत्र में मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट आता है। पुलिस के सामने उसने स्वीकार किया कि इमिग्रेशन से जुड़ी परेशानी की जो कहानी उसने अपनी पत्नी को बताई थी, वह सच नहीं थी। उसने खुद यह कहानी बनाई थी ताकि अपनी ट्रिप और उसके साथ मौजूद महिला की बात पत्नी से छिपा सके।

जांच के बाद पुलिस का कहना है कि इस मामले में आगे की कार्रवाई को लेकर कोर्ट में ‘C समरी’ क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की जाएगी। पुलिस के अनुसार, ऐसी रिपोर्ट उन मामलों में इस्तेमाल की जाती है, जहां जांच के दौरान शिकायत के पीछे गलतफहमी या तथ्यों से जुड़ी स्थिति सामने आती है। इस मामले में भी जांच के बाद पूरी कहानी स्पष्ट हुई और सामने आया कि इमिग्रेशन को लेकर बताई गई बात सही नहीं थी।

थाईलैंड और वियतनाम ही नहीं, ये अनोखा देश भी बना सकते हैं आपकी अगली ट्रिप यादगार!

दक्षिण-पूर्व एशिया घूमने का प्लान बनाते समय थाईलैंड लंबे समय से लोगों की पसंद रहा है। खूबसूरत समुद्र तट, नाइटलाइफ, शॉपिंग और कई तरह के टूरिस्ट स्पॉट की वजह से यहां हर साल बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। लेकिन अब ट्रैवलर्स की पसंद में धीरे-धीरे बदलाव देखने को मिल रहा है और वियतनाम भी तेजी से लोगों की पसंद बनता जा रहा है।

वियतनाम की खास बात यह है कि यहां घूमने वालों को खूबसूरत प्राकृतिक नजारे, ऐतिहासिक जगहें, लोकल कल्चर और अलग तरह का ट्रैवल एक्सपीरियंस एक साथ मिल जाता है। साथ ही, बजट में यात्रा करने वालों के लिए भी यह देश काफी अट्रैक्टिव नजर आता है। यही वजह है कि कई ट्रैवलर अब अगली छुट्टी के लिए थाईलैंड के बजाय वियतनाम को चुनने के बारे में सोच रहे हैं।

थाईलैंड और वियतनाम की तुलना करने के तरीके:

1. कीमत और ट्रिप का खर्च

बजट की बात करें तो वियतनाम थाईलैंड के मुकाबले सस्ता ऑप्शन माना जाता है। होटल, लोकल खाना, टैक्सी और रोजकी छोटी जरूरतों पर यहां कम पैसे खर्च हो सकते हैं। बैकपैकिंग या कम बजट में घूमने वाले ट्रैवलर के लिए वियतनाम अट्रैक्टिव है। लेकिन भारत से जाने वाले ट्रैवलर का पूरा बजट सिर्फ वहां के खर्च पर डिपेंड नहीं करता। फ्लाइट, वीजा, होटल और घूमने वाली जगहों के टिकट को मिलाकर कुल खर्च देखना ज्यादा सही रहेगा।

2. घूमने की जगहों में किसका पलड़ा भारी?

डेस्टिनेशन के मामले में किसी एक देश को बेहतर कहना सही नहीं है, क्योंकि दोनों की अपनी अलग खासियत है। थाईलैंड खूबसूरत समुद्र तटों, द्वीपों, रिसॉर्ट्स और नाइटलाइफ के लिए जाना जाता है। बैंकॉक जैसे बड़े शहरों में शॉपिंग, मनोरंजन और घूमने के कई ऑप्शन मिलते हैं। दूसरी तरफ, वियतनाम में पहाड़, समुद्र, पुराने शहर, नदियां और ग्रामीण इलाकों का अलग एक्सपीरियंस मिलता है। हनोई, सापा, हा लॉन्ग बे और मेकांग डेल्टा जैसी जगहें उन लोगों को पसंद आ सकती हैं जो नेचर के साथ हिस्ट्री और लोकल कल्चर को भी करीब से देखना चाहते हैं।

3. खाने के मामले में कौन बेहतर?

खाने की पसंद पूरी तरह व्यक्ति पर डिपेंड करती है, क्योंकि दोनों देशों का खाना अपने-अपने तरीके से खास है। थाईलैंड में पैड थाई, टॉम यम, करी और कई तरह का स्ट्रीट फूड आसानी से मिल जाता है। वहीं वियतनाम का फो, बान्ह मी, बन चा और वियतनामी कॉफी काफी लोकप्रिय हैं। थाई खाना ज्यादा मसालेदार और तीखा होता है, जबकि वियतनामी खाने में ताजी सब्जियों, हर्ब्स और हल्के स्वाद का इस्तेमाल ज्यादा देखने को मिलता है। आप स्ट्रीट फूड ट्राय करना पसंद करते हैं, तो दोनों देशों में आपके लिए काफी कुछ नया हो सकता है।

4. इंफ्रास्ट्रक्चर और सेफ्टी

टूरिस्टों के लिए घूमने की फैसिलिटी के मामले में थाईलैंड को काफी एक्सपीरियंस हासिल है। बैंकॉक जैसे शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट, होटल, टैक्सी और टूरिस्ट सुविधाएं आसानी से मिल जाती हैं। वियतनाम में भी पिछले कुछ वर्षों में टूरिज्म इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से बेहतर हुआ है, लेकिन कुछ जगहों पर ट्रैफिक और लोकल ट्रांसपोर्ट नए ट्रैवलर के लिए थोड़ा अलग एक्सपीरियंस हो सकता है। दोनों देशों में सड़क पार करते समय, बाइक वाले इलाकों में और भीड़भाड़ वाली जगहों पर सामान संभालकर रखना और सावधानी बरतना जरूरी है।

5. वीजा और इमिग्रेशन

फॉरेन ट्रिप की प्लानिंग में वीजा सबसे जरूरी चीजों में से एक है और इसके रूल समय के साथ बदलते रहते हैं। 2026 में भारतीय ट्रैवलर के लिए थाईलैंड की एंट्री व्यवस्था आसान रही है, जबकि वियतनाम जाने के लिए भारतीय पासपोर्ट होल्डर्स को ई-वीजा की जरूरत पड़ती है। इसलिए टिकट बुक करने से पहले दोनों देशों की मौजूदा वीजा और एंट्री शर्तों को जरूर चेक कर लेना चाहिए।

दक्षिण-पूर्व एशिया में घूमने के लिए हर देश की अपनी अलग खासियत है। किसी को समुद्र तट और आइलैंड पसंद आ सकते हैं, तो किसी को इतिहास, संस्कृति, पहाड़ या मॉडर्न शहर ज्यादा अट्रैक्ट कर सकते हैं। इस पूरे रीजन में टूरिस्म को आसान, बेहतर और ज्यादा टिकाऊ बनाने पर भी लगातार काम हो रहा है। इसलिए किसी एक देश को हर ट्रैवलर के लिए सबसे बेहतर कहना सही नहीं होगा। आप पहली बार दक्षिण-पूर्व एशिया घूमने जा रहे हैं, तो अपने बजट, पसंद और ट्रैवल के मकसद के हिसाब से डेस्टिनेशन चुनना ज्यादा अच्छा रहेगा। सही जगह चुनकर आपकी छुट्टी को सिर्फ एक ट्रिप नहीं, बल्कि एक नया एक्सपीरियंस बना सकता है।

भारत के राष्ट्र-निर्माता और इंजीनियरिंग के मसीहा: सर एम. विश्वेश्वरैया

भारत के राष्ट्र-निर्माता और इंजीनियरिंग के मसीहा: सर एम. विश्वेश्वरैया

Mokshagundam Visvesvaraya

हर साल 15 सितंबर को भारत में अभियंता दिवस यानी इंजीनियर्स डे मनाया जाता है। यह दिन महान अभियंता, राष्ट्र-निर्माता और भारत रत्न से सम्मानित सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया (सर एम.वी.) की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। उन्होंने अपनी दूरदर्शिता, तकनीकी दक्षता और जल प्रबंधन के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्यों से आधुनिक भारत के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

 

सर एम. विश्वेश्वरैया को भारतीय इंजीनियरिंग के महान स्तंभों में गिना जाता है। उन्हें आधुनिक मैसूर के विकास में उनके योगदान के लिए विशेष रूप से याद किया जाता है। उनकी सोच केवल इंजीनियरिंग परियोजनाओं तक सीमित नहीं थी, बल्कि वे औद्योगिक विकास, शिक्षा, सिंचाई, जल संरक्षण और आर्थिक प्रगति को भी राष्ट्र निर्माण का आधार मानते थे।

 

15 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है अभियंता दिवस?

अभियंता दिवस हर वर्ष 15 सितंबर को सर एम. विश्वेश्वरैया की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इस दिन देशभर में इंजीनियरिंग संस्थानों, शैक्षणिक संस्थाओं और विभिन्न संगठनों में कार्यक्रम आयोजित कर उनके योगदान को याद किया जाता है।

 

खासकर कर्नाटक में यह दिन विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है। उनके जीवन, कार्यों और राष्ट्र निर्माण में योगदान पर चर्चा की जाती है तथा नई पीढ़ी को उनकी उपलब्धियों से प्रेरणा लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

 

शुरुआती जीवन और शिक्षा

सर एम. विश्वेश्वरैया का जन्म 15 सितंबर 1861 को तत्कालीन मैसूर रियासत के मुद्देनहल्ली गांव में हुआ था, जो वर्तमान में कर्नाटक के चिकबल्लापुर जिले में स्थित है। उनका जन्म एक तेलुगु भाषी ब्राह्मण परिवार में हुआ था।

 

उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा के बाद बेंगलुरु के सेंट्रल कॉलेज से बी.ए. की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए पुणे के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थान में प्रवेश लिया। सिविल इंजीनियरिंग की शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत की और जल्द ही अपनी प्रतिभा तथा कार्यकुशलता के कारण अलग पहचान बना ली।

 

इंजीनियरिंग से राष्ट्र सेवा तक का सफर

सर एम.वी. ने अपने करियर की शुरुआत बॉम्बे प्रेसीडेंसी के लोक निर्माण विभाग (PWD) से की। इंजीनियर के रूप में उन्होंने जल संसाधन, सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम किया।

 

उनकी तकनीकी समझ और समस्या के व्यावहारिक समाधान खोजने की क्षमता ने उन्हें अपने समय के अग्रणी इंजीनियरों में शामिल कर दिया। वर्ष 1912 से 1918 तक उन्होंने मैसूर राज्य के दीवान के रूप में भी सेवाएं दीं।

 

दीवान के रूप में उन्होंने मैसूर के औद्योगिक, शैक्षणिक और आर्थिक विकास को गति देने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल कीं। इसी कारण उन्हें आधुनिक मैसूर के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला व्यक्तित्व माना जाता है।

 

जल प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण में बड़ा योगदान

सर एम. विश्वेश्वरैया का सबसे महत्वपूर्ण योगदान जल प्रबंधन और सिंचाई व्यवस्था के क्षेत्र में माना जाता है। उस दौर में भारत के कई हिस्से बाढ़, सूखे और सिंचाई की समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्होंने इन समस्याओं के समाधान के लिए वैज्ञानिक और आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया।

 

उन्होंने जल के संरक्षण, बांधों के निर्माण और अतिरिक्त पानी के प्रभावी प्रबंधन से जुड़ी तकनीकों के विकास और उपयोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी तकनीकी दक्षता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ब्रिटिश भारत सरकार ने उन्हें अदन (वर्तमान यमन) की जल आपूर्ति और जल निकासी व्यवस्था का अध्ययन करने के लिए भेजा था।

 

वे दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में विकसित हो रही तकनीकों को समझने और उन्हें भारत की परिस्थितियों के अनुरूप लागू करने में भी रुचि रखते थे। उनकी यह सोच उस समय के लिए बेहद दूरदर्शी मानी जाती थी।

 

विदेश यात्राओं से सीखने का जुनून

सर एम.वी. का मानना था कि किसी भी देश की प्रगति के लिए नई तकनीकों और वैज्ञानिक सोच को अपनाना जरूरी है। इसी उद्देश्य से उन्होंने विदेशों की तकनीकी प्रगति का अध्ययन किया।

 

उन्होंने जापान, अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका सहित विभिन्न क्षेत्रों की यात्राएं कीं और वहां की इंजीनियरिंग तथा औद्योगिक व्यवस्थाओं का अध्ययन किया। उनका उद्देश्य केवल जानकारी हासिल करना नहीं था, बल्कि उपयोगी तकनीकों को भारत की जरूरतों के अनुरूप अपनाना था।

 

ब्रिटिश सरकार ने दिया 'सर' का सम्मान

सर एम. विश्वेश्वरैया के असाधारण योगदान को देखते हुए वर्ष 1915 में ब्रिटिश सरकार ने उन्हें 'नाइट कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द इंडियन एम्पायर' की उपाधि प्रदान की। इसके बाद उनके नाम के साथ 'सर' की उपाधि जुड़ गई। हालांकि उनका वास्तविक सम्मान भारत के विकास और राष्ट्र सेवा में किए गए उनके कार्यों से स्थापित हुआ।

 

भारत रत्न से हुए सम्मानित

स्वतंत्र भारत में भी उनके योगदान को सर्वोच्च सम्मान मिला। वर्ष 1955 में भारत सरकार ने उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित किया। यह सम्मान उनके लंबे सार्वजनिक जीवन, इंजीनियरिंग के क्षेत्र में योगदान और राष्ट्र निर्माण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की पहचान था।

 

100 वर्ष से अधिक का जीवन और अंतिम समय

सर एम. विश्वेश्वरैया ने लंबा और बेहद सक्रिय जीवन जिया। उन्होंने अपने जीवन के अंतिम वर्षों तक देश के विकास, तकनीकी शिक्षा और औद्योगिक प्रगति से जुड़े विषयों पर विचार व्यक्त किए।

 

उन्होंने 14 अप्रैल 1962 को बेंगलुरु में अंतिम सांस ली। उनकी स्मृति में उनके पैतृक गांव मुद्देनहल्ली में स्मारक भी बनाया गया है, जहां आज भी लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचते हैं।

 

नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा हैं सर एम.वी.

सर एम. विश्वेश्वरैया का जीवन इस बात का उदाहरण है कि तकनीकी ज्ञान का इस्तेमाल केवल व्यक्तिगत सफलता के लिए नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास के लिए भी किया जा सकता है।

 

उन्होंने जल प्रबंधन से लेकर औद्योगिक विकास तक अनेक क्षेत्रों में दूरदर्शी सोच का परिचय दिया। उनका जीवन अनुशासन, मेहनत, तकनीकी दक्षता और राष्ट्र सेवा के समन्वय की प्रेरक मिसाल है।

 

इसलिए 15 सितंबर का अभियंता दिवस केवल इंजीनियरों के सम्मान का अवसर नहीं है, बल्कि यह उस महान अभियंता को याद करने का दिन भी है, जिसने अपने ज्ञान और दूरदृष्टि से आधुनिक भारत की विकास यात्रा को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

30 की उम्र में 50 लाख की नेटवर्थ, फिर भी खुद को मानता है गरीब! Reddit पर शख्स ने बताई पूरी कहानी

30 साल की उम्र में अगर किसी कपल की संयुक्त नेटवर्थ 50 लाख रुपये हो जाए, तो इसे आमतौर पर बड़ी आर्थिक उपलब्धि माना जाएगा। लेकिन एक Reddit यूजर के लिए यह मुकाम खुशी के साथ-साथ उलझन भी लेकर आया है। करीब सात साल से नौकरी कर रहे इस शख्स ने बताया कि अच्छी कमाई और बचत के बावजूद उसे लगता है कि वह अपने दोस्तों से आर्थिक रूप से पीछे रह गया है।

पति-पत्नी की कमाई 32 लाख

इस शख्स के मुताबिक, उसकी सालाना कमाई करीब 20 लाख रुपये है, जबकि उसकी पत्नी लगभग 12 लाख रुपये कमाती हैं। दोनों की कुल मासिक इन-हैंड इनकम करीब 2.2 लाख रुपये है। इसके बावजूद उनकी लाइफस्टाइल काफी साधारण है। दोनों अभी किराये के घर में रहते हैं और उनके पास अपनी कार भी नहीं है। रोजमर्रा के काम के लिए वह अब भी करीब आठ साल पुरानी बाइक चलाते हैं। इतना ही नहीं, शादी को लगभग दो साल हो चुके हैं, लेकिन दोनों अभी तक ठीक से हनीमून पर भी नहीं जा पाए हैं।

दोस्तों को देखकर होने लगा खुद पर शक

Reddit पर अपनी कहानी शेयर करते हुए इस शख्स ने लिखा कि उसके कई कॉलेज फ्रेंड्स उससे काफी आगे नजर आते हैं। किसी ने दो फ्लैट खरीद लिए हैं, जिनमें से एक किराये पर दिया हुआ है। कई दोस्तों के पास कार है और वे बाली तथा मालदीव जैसी जगहों पर घूमने भी जा चुके हैं।

दूसरों की जिंदगी देखकर उसे अपनी आर्थिक स्थिति को लेकर सवाल उठने लगे हैं। उसे समझ नहीं आ रहा कि 50 लाख रुपये की नेटवर्थ होने के बावजूद आखिर उसे खुद को ‘पीछे’ क्यों महसूस हो रहा है।

पत्नी के खर्च से भी होती है परेशानी

उसने यह भी स्वीकार किया कि कभी-कभी पत्नी के खर्च को लेकर उसे चिढ़ होती है। सोशल मीडिया से प्रभावित होकर पत्नी महंगे मेकअप और दूसरी फैंसी चीजों पर पैसे खर्च करती हैं। यही अंतर उसे और ज्यादा सोचने पर मजबूर करता है। वह खुद बचत और आर्थिक सुरक्षा को प्राथमिकता देता है, जबकि उसे लगता है कि पत्नी वर्तमान जिंदगी को थोड़ा ज्यादा खुलकर जीना चाहती हैं।

‘क्या मैं बहुत ज्यादा बचत कर रहा हूं?’

इस पूरे मामले में उसका सबसे बड़ा सवाल यही है कि कहीं वह पैसे बचाने के चक्कर में जिंदगी जीना तो नहीं भूल रहा। उसने लिखा कि वह गर्व महसूस करता है कि दोनों ने मिलकर 50 लाख रुपये की नेटवर्थ हासिल की है। लेकिन साथ ही वह एक बेहतर घर खरीदना, पत्नी के साथ घूमना और जिंदगी का आनंद लेना भी चाहता है। दूसरी तरफ उसे डर है कि ऐसा करने से कहीं उसकी आर्थिक स्थिरता खतरे में न पड़ जाए। वह यह भी सोचता है कि क्या वह दूसरों से अपनी तुलना बहुत ज्यादा कर रहा है या फिर वास्तव में उसकी वित्तीय योजना में कोई कमी है।

Reddit पर लोगों ने दी ‘रियलिटी चेक’ की सलाह

उसकी पोस्ट पर कई Reddit यूजर्स ने उसे दोस्तों की जिंदगी से अपनी तुलना बंद करने की सलाह दी। एक यूजर ने कहा कि तुलना खुशी छीन लेती है और उसे अपने लिए अगले 5-10 साल का लक्ष्य तय करना चाहिए, न कि दूसरों की जिंदगी देखकर अपनी सफलता मापनी चाहिए। एक अन्य यूजर ने उसकी स्थिति पर सहमति जताते हुए बताया कि वह भी किराये के घर में रहता है और उसके पास कार नहीं है। वह अब भी आठ साल पुरानी बाइक चलाता है, जिसका सेल्फ-स्टार्ट तक काम नहीं करता और एक इंडिकेटर भी खराब है। एक अन्य व्यक्ति ने इस सलाह को सही बताते हुए कहा कि जिंदगी में कभी-कभी किसी ऐसे व्यक्ति की जरूरत होती है, जो हमें रियलिटी चेक दे सके।

असली सवाल 50 लाख नहीं, संतुष्टि का है

इस कहानी ने एक दिलचस्प सवाल खड़ा किया है क्या आर्थिक रूप से सफल होने का मतलब सिर्फ घर, कार और विदेश यात्राएं हैं? या फिर अपनी जरूरतों के मुताबिक बचत करना और भविष्य को सुरक्षित रखना भी सफलता है? शायद इस कपल के लिए सबसे जरूरी यह तय करना है कि उन्हें वास्तव में कैसी जिंदगी चाहिए। क्योंकि दूसरों की उपलब्धियों से अपनी खुशी और आर्थिक सफलता की तुलना करने पर 50 लाख भी कम लग सकते हैं।

VIDEO: ‘Money Follows My Brother…’ ‘India’s Got Latent’ में कंटेस्टेंट ने की एक्टर रवि किशन की जबरदस्त मिमिक्री, वीडियो वायरल

इजराइली PM के मेकअप पर ₹4 करोड़ खर्च:2023 जंग के दौरान 3 महीने में बालों पर ₹22 लाख लगे; हेयर स्टाइलिस्ट का नाम छिपाया

इजराइल में प्रधानमंत्री के बालों की स्टाइलिंग और मेकअप पर 2019 से अगस्त 2026 तक करीब 4.7 लाख डॉलर यानी लगभग 4 करोड़ रुपए खर्च हुए। इसका खुलासा सूचना के अधिकार के तहत मिले सरकारी रिकॉर्ड से हुआ है। दिसंबर 2025 में वकील यारा शलित ने PM ऑफिस से इस खर्च की जानकारी मांगी थी। इसके बाद अलग-अलग साल और महीनों में हुए खर्च का ब्योरा जारी किया गया। इस दौरान पिछले 7 साल में तीन प्रधानमंत्री रहे- बेंजामिन नेतन्याहू, नफ्ताली बेनेट और याइर लैपिड। रिकॉर्ड के मुताबिक, बाल और मेकअप पर हुए कुल खर्च का करीब 90% हिस्सा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी पत्नी सारा पर हुआ। हालांकि, कई दस्तावेजों में उनके हेयर स्टाइलिस्ट और मेकअप आर्टिस्ट के नाम भी छिपा दिए गए। प्रधानमंत्री कार्यालय ने इसके लिए राज्य की सुरक्षा का हवाला दिया। 2023 में युद्ध शुरू होने के दौरान भी बाल-मेकअप पर खर्च 2025 में सबसे ज्यादा खर्च, विदेश यात्राओं में भी बिल बढ़ा 2025 में प्रधानमंत्री के बालों और मेकअप पर सबसे ज्यादा रकम खर्च हुई। इस साल कुल खर्च करीब 1.11 लाख डॉलर यानी लगभग 93 लाख रुपए रहा। विदेश यात्राओं के दौरान भी बालों और मेकअप पर बड़ी रकम खर्च हुई। फरवरी 2025 में नेतन्याहू की 4 दिन की वॉशिंगटन यात्रा के दौरान मेकअप आर्टिस्ट और हेयर स्टाइलिस्ट की सेवाओं पर करीब 13,500 डॉलर यानी 11 लाख रुपए खर्च हुए। यह विदेश यात्रा के दौरान इस मद में सबसे बड़ा खर्च था। यह यात्रा ट्रम्प से मुलाकात के लिए हुई थी। उस समय नेतन्याहू ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल में व्हाइट हाउस जाने वाले पहले विदेशी नेता थे। जुलाई 2024 में नेतन्याहू की एक और वॉशिंगटन यात्रा के दौरान भी इन सेवाओं पर करीब 11,500 डॉलर यानी 9.6 लाख रुपए खर्च हुए थे। मेहमानों और कपड़ों पर भी नेतन्याहू का खर्च ज्यादा बाल और मेकअप के अलावा प्रधानमंत्री के आधिकारिक प्रतिनिधित्व से जुड़े खर्च की अलग मद भी है। इसमें कपड़ों और मेहमानों की मेजबानी जैसे खर्च शामिल हैं। इस मद में नेतन्याहू से जुड़े खर्च करीब 1.34 लाख डॉलर यानी 1.12 करोड़ रुपए रहे। नफ्ताली बेनेट के लिए यह रकम करीब 19,000 डॉलर यानी 16 लाख रुपए और याइर लैपिड के लिए करीब 2,600 डॉलर यानी 2.2 लाख रुपए थी। हालांकि, सरकार ने गहनों, कपड़ों और इमेज कंसल्टिंग से जुड़े खर्च का पूरा ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया। सूचना की स्वतंत्रता के लिए काम करने वाले संगठन की ओर से इन जानकारियों की भी मांग की गई थी। इस मामले में सबसे ज्यादा ध्यान इसलिए जा रहा है क्योंकि सरकारी रिकॉर्ड में प्रधानमंत्री के बालों की स्टाइलिंग और मेकअप पर अलग से हजारों डॉलर खर्च होने की जानकारी सामने आई है। खास तौर पर 2025 में यह खर्च 1 लाख डॉलर से ज्यादा रहा। खर्च का हिसाब-किताब 2019-अगस्त 2026: हेयर स्टाइलिंग और मेकअप पर करीब 4.7 लाख डॉलर नेतन्याहू और सारा: कुल हेयर-मेकअप खर्च का करीब 90% 2023: करीब 1.03 लाख डॉलर 2022: करीब 27,600 डॉलर 2025: करीब 1.11 लाख डॉलर, सबसे ज्यादा फरवरी 2025 वॉशिंगटन यात्रा: करीब 13,500 डॉलर जुलाई 2024 वॉशिंगटन यात्रा: करीब 11,500 डॉलर सितंबर-नवंबर 2023: बालों पर करीब 2,600 डॉलर, मेकअप पर 1,580 डॉलर अक्टूबर 2023: बालों की स्टाइलिंग पर करीब 810 डॉलर बालों पर खूब एक्सपेरिमेंट करते हैं नेतन्याहू नेतन्याहू के बालों का रंग बदलना कोई नई बात नहीं है। पिछले कई सालों से इजराइली मीडिया उनके बालों के अलग-अलग रंगों पर रिपोर्ट करता रहा है। कभी उनके बाल गहरे भूरे दिखे, तो कभी ग्रे, सफेद, हरे या बैंगनी रंग के शेड में नजर आए। 2017 में उनके बदलते हेयर कलर पर इतनी चर्चा हुई कि उन्होंने खुद इस पर मजाक किया था। उन्होंने कहा था कि ‘ब्राउन नया ग्रे है’। फिर कुछ हफ्तों में उनका पुराना ग्रे रंग वापस आ जाएगा। इसके कुछ साल बाद, 2021 में नेतन्याहू ने खुद अपने बालों के रंग का राज बताया। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि वे ऐसा शैंपू इस्तेमाल करते हैं, जिससे बालों का रंग बदला जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि रंग को लेकर किए गए प्रयोगों के दौरान उनके बाल कभी हरे, कभी भूरे और कभी बैंगनी हो गए थे।

सस्ती नहीं फ्री में मिलेगी फ्लाइट! क्रेडिट कार्ड का ऐसा इस्तेमाल नहीं जानते होंगे आप

डेली लाइफ में हम क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल शॉपिंग, बिल पेमेंट और दूसरी जरूरतों के लिए करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका इस्तेमाल ट्रैवलिंग के दौरान भी काफी काम आ सकता है। सही तरीके से इस्तेमाल करने पर क्रेडिट कार्ड से मिलने वाले कुछ फायदे आपकी ट्रैवल का खर्च कम करने में मदद कर सकते हैं। फ्लाइट से सफर करने वालों के लिए यह तरीका काफी यूनिक हो सकता है। इसमें रोज के खर्च को समझदारी से इस्तेमाल करके ट्रैवल से जुड़े फायदे लिए जा सकते हैं।

ऐसे काम में आता है क्रेडिट कार्ड

क्रेडिट कार्ड से मिलने वाला वेलकम बोनस

कई क्रेडिट कार्ड नए कस्टमर को कार्ड लेने के बाद कुछ कंडीशन पूरी करने पर वेलकम बोनस देते हैं। यह बोनस रिवॉर्ड पॉइंट, एयर माइल्स या ट्रैवल वाउचर के रूप में मिल सकता है। कुछ कार्ड में तय समय के अंदर एक स्पेसिफिक अमाउंट खर्च करनी होती है। इसलिए कार्ड लेने से पहले यह देखना जरूरी है कि बोनस पाने के लिए कितनी रकम खर्च करनी होगी और उसकी वैलिडिटी कितनी है।

क्रेडिट कार्ड से माइल्स ट्रांसफर

क्रेडिट कार्ड से जमा किए गए रिवॉर्ड पॉइंट्स को कुछ मामलों में एयरलाइन के पार्टनर प्रोग्राम में ट्रांसफर किया जा सकता है। इसके बाद इन माइल्स का इस्तेमाल फ्लाइट टिकट या दूसरे ट्रैवल बेनिफिट्स के लिए किया जा सकता है। हर कार्ड और एयरलाइन के ट्रांसफर रूल अलग हो सकते हैं, इसलिए पॉइंट ट्रांसफर करने से पहले रेट और टर्म्स जरूर देख लें।

शॉपिंग से करें पॉइंट कलेक्शन

घर के बिजली-पानी के बिल, किराने का सामान, ऑनलाइन शॉपिंग या दूसरे जरूरी खर्च क्रेडिट कार्ड से करने पर रिवॉर्ड पॉइंट मिल सकते हैं। यानी जिन खर्चों को आप वैसे भी करने वाले हैं, उन पर मिलने वाले पॉइंट्स को बाद में ट्रैवल के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन कार्ड का इस्तेमाल अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से ही करना चाहिए।

माइलस्टोन बेनिफिट और फॉरेक्स चार्ज से सेविंग

कुछ क्रेडिट कार्ड पर साल में एक तय रकम खर्च करने पर माइलस्टोन बेनिफिट मिलते हैं। इनमें फ्लाइट वाउचर, ट्रैवल क्रेडिट या दूसरे फायदे शामिल हो सकते हैं। यदि आप वैसे ही उस रकम के आसपास खर्च करते हैं, तो यह बेनिफिट आपके लिए काम के हो सकता है। फॉरेन ट्रैवलिंग में कार्ड से पेमेंट करने पर फॉरेन करेंसी से जुड़ा एक्स्ट्रा चार्ज लग सकता है। कुछ जीरो फॉरेक्स मार्क-अप कार्ड इस खर्च को कम करने में मदद कर सकते हैं। अब्रॉड जाने से पहले कार्ड पर लगने वाले फॉरेक्स चार्ज, सालाना फीस और दूसरे चार्ज की इनफार्मेशन जरूर चेक कर लें।

ध्यान रखें ये जरूरी बातें

कार्ड की फीस चेक करें

क्रेडिट कार्ड लेने से पहले उसकी सालाना फीस, रिन्यूअल चार्ज और दूसरे शुल्क के बारे में जरूर जानकारी ले लें। कई बार रिवॉर्ड के चक्कर में कार्ड की फीस ज्यादा हो सकती है और इससे मिलने वाला फायदा कम हो सकता है। इसलिए कार्ड चुनने से पहले उसके सभी चार्ज और ट्रैवल बेनिफिट्स को अच्छी तरह समझना जरूरी है।

सिर्फ रिवॉर्ड पाने के लिए खर्च न करें

सिर्फ रिवॉर्ड पॉइंट जमा करने के लिए जरूरत से ज्यादा शॉपिंग करना सही नहीं है। कई बार ज्यादा पॉइंट पाने के चक्कर में हम ऐसी चीजों पर भी पैसे खर्च कर देते हैं, जिनकी सच में जरूरत नहीं होती। इससे ट्रैवल पर बचत होने के बजाय आपका कुल खर्च बढ़ सकता है।

बिल पेमेंट में रखें सावधानी

ट्रैवल रिवॉर्ड का फायदा तभी है जब क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल समझदारी से किया जाए। हर महीने बिल की तय तारीख से पहले पूरा पेमेंट चुकाने की कोशिश करें। बिल का पेमेंट देर से होता है या इंटरेस्ट देना पड़ता है, तो रिवॉर्ड से मिलने वाला फायदा कम हो सकता है।

क्रेडिट कार्ड को सिर्फ खर्च करने का जरिया समझने के बजाय सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए, तो यह आपकी यात्रा की प्लानिंग में भी काम आ सकता है। जरूरत है तो बस थोड़ी समझदारी और सावधानी की। अपनी जरूरत के हिसाब से इसका इस्तेमाल करें और रूल को समझकर ही फायदा उठाएं, ताकि ट्रैवल का खर्च संभालना आपके लिए आसान हो सके।

पीएम मोदी का नया मंत्र- Wed in India, आखिर क्या है इसके मायने?

पीएम मोदी का नया मंत्र- Wed in India, आखिर क्या है इसके मायने?

मेक इन इंडिया के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों को एक नया मंत्र दिया है 'Wed in India'। देश की मजबूत आर्थिक वृद्धि के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से 'स्वदेशी' और 'आत्मनिर्भरता' को अपनाने की भावुक अपील की है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की 7.8 प्रतिशत GDP विकास दर का हवाला देते हुए पीएम मोदी ने विशेष रूप से विदेशों में होने वाली खर्चीली शादियों पर चिंता जताई और 'Wed in India' (भारत में शादी) के मंत्र पर जोर दिया।

विदेशों में शादियों के चलन पर चिंता

पीएम मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि घूमने के अलावा अनावश्यक विदेश यात्राओं से बचना चाहिए और विदेशों में शादियां रचाने के चलन पर विराम लगना चाहिए। उन्होंने कहा कि विदेश यात्राएं अगर घूमने के लिए जाते हैं, तो नहीं जाना चाहिए। अगर विदेश में शादियां करते हैं, तो नहीं करनी चाहिए। ‘वेड इन इंडिया’ के मंत्र को जीना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने घरेलू उत्पादों की खपत बढ़ाने और बिना जरूरत के सोना न खरीदने की भी सलाह दी। ALSO READ: शहबाज शरीफ के सामने गरजे पीएम मोदी, आतंकवाद पर दोहरे मापदंड नहीं चलेंगे, जड़ से खत्म करना होगा इकोसिस्टम

विदेशी डेस्टिनेशन वेडिंग का सच

उद्योग अनुमानों और रिपोर्टों के अनुसार, भारत में हर साल लगभग 5000 अंतरराष्ट्रीय डेस्टिनेशन वेडिंग्स (विदेशों में) आयोजित की जाती हैं। हालांकि इसका कोई आधिकारिक सरकारी आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। लेकिन, कंज्यूमर और वेडिंग इंडस्ट्री रिपोर्ट्स के अनुसार हर साल इन 5000 शादियों के जरिए भारतीय परिवारों का लगभग 50 हजार करोड़ रुपए का खर्च देश से बाहर विदेशी वेडिंग डेस्टिनेशन (जैसे थाईलैंड, यूएई, श्रीलंका, वियतनाम और यूरोप) में चला जाता है। ALSO READ: 7.8% विकास दर पर गदगद हुए पीएम मोदी: बोले- दुनिया संकटों में फंसी है, फिर भी तेजी से आगे बढ़ रहा भारत

पीएम मोदी की अपील का उद्देश्य

पीएम मोदी की सीधी अपील का उद्देश्य इसी धन को देश के भीतर बनाए रखना है। भारत में डेस्टिनेशन वेडिंग का औसतन खर्च करीब 58 लाख रुपए आता है, वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह बजट बढ़कर लगभग 1.5 करोड़ रुपए तक पहुंच जाता है। भारतीयों के लिए थाइलैंड सबसे लोकप्रिय विदेशी वेडिंग डेस्टिनेशन बना हुआ है। इसके अलावा UAE, वियतनाम और श्रीलंका (2025 में 25% की वृद्धि) भी प्रमुख विकल्प हैं, जबकि इटली, स्पेन और ग्रीस का चयन लक्जरी शादियों के लिए किया जाता है। Policybazaar के आंकड़े दर्शाते हैं कि अंतरराष्ट्रीय शादियों के लिए ट्रैवल इंश्योरेंस की खरीद में लगातार दो वर्षों तक 27.4% की सालाना वृद्धि हुई है।

7.8% की शानदार विकास दर के बीच पीएम मोदी ने क्यों की सोना नहीं खरीदने की अपील?

7.8% की शानदार विकास दर के बीच पीएम मोदी ने क्यों की सोना नहीं खरीदने की अपील?

PM Modi appeal on Gold

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की मजबूत आर्थिक विकास दर पर प्रसन्नता जताते हुए एक अनूठी अपील की है। भारत की 7.8 फीसदी की शानदार जीडीपी ग्रोथ पर देशवासियों को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि यदि बहुत जरूरी न हो, तो सोने की खरीदारी से बचना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने देश में बने सामानों को प्राथमिकता देने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का आह्वान किया। ALSO READ: 7.8% विकास दर पर गदगद हुए पीएम मोदी: बोले- दुनिया संकटों में फंसी है, फिर भी तेजी से आगे बढ़ रहा भारत

 

वर्तमान वैश्विक परिदृश्य पर बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आज पूरी दुनिया कई तरह के संकटों और युद्ध की स्थितियों से जूझ रही है। कोविड महामारी के बाद से वैश्विक सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है और दुनिया में आर्थिक स्थिरता का अभाव है। इन तमाम अंतरराष्ट्रीय बाधाओं के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।

 

'मेड इन इंडिया' और 'वेडिंग इन इंडिया' पर जोर

प्रधानमंत्री ने देशवासियों से विदेशी मोह छोड़ने और 'मेड इन इंडिया' के मंत्र को अपने जीवन में उतारने की अपील की। उन्होंने खास तौर पर विदेश यात्राओं और विदेश में शादियों के आयोजन पर रोक लगाने या उनसे बचने की सलाह दी। पीएम मोदी ने कहा कि यदि लोग देश के भीतर ही शादियों का आयोजन करेंगे, तो इससे पर्यटन, होटल, कैटरिंग, और हैंडीक्राफ्ट जैसे स्थानीय उद्योगों को बड़ा बढ़ावा मिलेगा और देश का पैसा देश के भीतर ही रोजगार सृजन में काम आएगा। ALSO READ: पश्चिम एशिया के संकट के बीच भारत की बड़ी आर्थिक छलांग: जीडीपी ग्रोथ 7.8% रही, RBI का अनुमान पीछे छूटा
 

2047 के विकसित भारत का संकल्प

प्रधानमंत्री ने देश को आत्मनिर्भर बनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि भारत को अपनी स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने तक एक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ना है। उन्होंने कहा कि आज की यह मेहनत और अनुशासन ही आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को उज्ज्वल बनाएगा। सरकार की नीतियां सही दिशा में आगे बढ़ रही हैं, और देश के 140 करोड़ नागरिकों की सामूहिक शक्ति ही भारत को वैश्विक पटल पर नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।

 

पीएम मोदी ने क्यों की सोना नहीं खरीदने की अपील?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सोना न खरीदने की अपील करने के पीछे मुख्य रूप से देश को आत्मनिर्भर बनाने और घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का उद्देश्य है। इसके प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:

 

विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करना: भारत अपनी सोने की जरूरत का अधिकांश हिस्सा इंपोर्ट करता है। भारी मात्रा में सोना खरीदने से देश का धन बाहर जाता है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ता है।

'मेड इन इंडिया' और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा: प्रधानमंत्री चाहते हैं कि देशवासी विदेशी वस्तुओं या अनावश्यक महंगी खरीदारी के बजाय स्थानीय स्तर पर बने उत्पादों और सेवाओं पर खर्च करें, जिससे देश के भीतर ही रोजगार और व्यापार को बढ़ावा मिले।

वैश्विक अनिश्चितताओं से बचाव: वर्तमान में दुनिया भर में युद्ध, सप्लाई चेन में बाधाएं और आर्थिक अस्थिरता जैसी समस्याएं बनी हुई हैं। ऐसे समय में देश की आर्थिक स्थिति को सुरक्षित और सुदृढ़ रखने के लिए अनावश्यक और गैर-जरूरी चीजों की खरीदारी से बचना जरूरी है।

2047 के विकसित भारत का लक्ष्य: देश को स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने तक एक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए नागरिकों को आर्थिक अनुशासन अपनाने और अपनी गाढ़ी कमाई को देश के समग्र विकास व उत्पादक क्षेत्रों में लगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

भारत की डिजिटल ताकत का नया मुकाम! इन 11 देशों में पहुंचा भारत का डिजिटल पेमेंट

भारत का UPI पिछले कुछ सालों में लोगों की रोज की जिंदगी का हिस्सा बन गया है। चाय की दुकान से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग तक, कुछ सेकंड में पेमेंट करने की सुविधा ने डिजिटल पेमेंट को काफी आसान बना दिया है। अब इसकी पहुंच सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि धीरे-धीरे दूसरे देशों में भी बढ़ रही है। ऐसे में विदेश जाने वाले भारतीयों के लिए भी UPI एक सुविधाजनक पेमेंट ऑप्शन बनता जा रहा है।

UPI की बढ़ती पॉपुलैरिटी का अंदाजा इसके बढ़ते इस्तेमाल से लगाया जा सकता है। जुलाई 2026 में इसके जरिए बड़े लेवल पर ट्रांजैक्शन हुए और अब इसकी इंटरनेशनल पहुंच 11 देशों तक हो गई है। ग्रीस और मालदीव के जुड़ने के बाद यह विस्तार और खास हो गया है।

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1. दुनियाभर में बढ़ी UPI की पहचान

पिछले करीब एक दशक में UPI का इस्तेमाल लगभग 12,000 गुना बढ़ा है। अब यह भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम का एक जरुरी भाग बन चुका है। इसकी पॉपुलैरिटी सिर्फ भारत तक नहीं है, बल्कि दूसरे देशों में भी लोग इसे पेमेंट के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में दुनियाभर में हुए रियल-टाइम पेमेंट ट्रांजैक्शन में UPI की हिस्सेदारी करीब 49% थी।

2. 11 देशों तक पहुंचा UPI

UPI अब भारत के अलावा 11 देशों में क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट की फैसिलिटी दे रहा है। भूटान, नेपाल, सिंगापुर, UAE और फ्रांस के साथ श्रीलंका, मॉरीशस, कतर, कंबोडिया, ग्रीस और मालदीव भी इस लिस्ट में शामिल हैं। ग्रीस और मालदीव UPI से जुड़ने वाले सबसे नए देश हैं। इससे विदेश जाने वाले भारतीयों के लिए डिजिटल पेमेंट का एक आसान ऑप्शन बढ़ा है।

3. UPI में जुड़े नए फीचर्स

2020 से 2022 के बीच UPI में कई नए बदलाव किए गए। UPI AutoPay की मदद से EMI और दूसरे नियमित पेमेंट आसान हुए, जबकि UPI 123PAY से फीचर फोन इस्तेमाल करने वालों को भी डिजिटल पेमेंट की सुविधा मिली। इसी दौरान UPI Lite आया और बाद में क्रेडिट कार्ड को UPI से जोड़ने का ऑप्शन भी दिया गया। इस दौरान भूटान में UPI की इंटरनेशनल शुरुआत भी हुई।

4. इजी और सिक्योर पेमेंट

2024 में UPI Circle जैसे फीचर की शुरुआत हुई, जिससे कोई भी लिमिट के अंदर दूसरे व्यक्ति को अपने UPI अकाउंट से पेमेंट करने की परमिशन दे सकता है। टैक्स पेमेंट और UPI से जुड़े दूसरे ट्रांजैक्शन की लिमिट में भी बदलाव किए गए। इसके बाद 2025 में ऑन-डिवाइस बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन और फेस बेस्ड फेस ऑथेंटिकेशन जैसे ऑप्शन जोड़े गए। इन चेंज का मकसद UPI को लोगों के लिए ज्यादा आसान, सुविधाजनक और सिक्योर बनाना है।

UPI की बढ़ती पहुंच से साफ है कि भारत का डिजिटल पेमेंट सिस्टम अब देश की बॉर्डर से आगे भी पहचान बना रहा है। नए देशों और नए फीचर्स के जुड़ने से लोगों के लिए पेमेंट करना आसान और कनविनिएंट हो रहा है। आने वाले समय में UPI की पहुंच और बढ़ने की उम्मीद है।

पासपोर्ट खोने की गलती पड़ सकती है भारी, तुरंत अपनाएं ये आसान ट्रिक

विदेश ट्रैवलिंग करते समय यदि अचानक आपका पासपोर्ट खो जाए, तो घबराहट हो ही जाती है। लेकिन ऐसी सिचुएशन में जल्दबाजी करने से बेहतर सही कदम उठाना जरूरी होता है। थोड़ी समझदारी और सही जानकारी के साथ आप नया ट्रैवल डॉक्यूमेंट बनवा सकते हैं और अपनी जर्नी बिना ज्यादा परेशानी के कर सकते हैं।

पहले ढूंढें और शिकायत करें

अगर विदेश में आपका पासपोर्ट नहीं मिल रहा है, तो घबराएं नहीं। होटल का कमरा, बैग, कैब, एयरपोर्ट या जिन जगहों पर आप गए थे, वहां अच्छी तरह से चेक करें। अगर फिर भी पासपोर्ट नहीं मिलता या चोरी होने का शक है, तो तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन में कम्प्लेन कराएं। पुलिस रिपोर्ट बहुत जरूरी होती है, क्योंकि नया पासपोर्ट या इमरजेंसी ट्रैवल डॉक्यूमेंट बनवाते समय इसकी जरूरत पड़ती है। इसलिए कम्प्लेन करने में देर न लगाएं।

एम्बेसी से तुरंत कांटेक्ट करें

पुलिस में कम्प्लेन करने के बाद अपने देश के पास के इंडियन एम्बेसी (Embassy) या वाणिज्य दूतावास (Consulate) से कांटेक्ट करें। वहां के ऑफिसर आपको पूरी प्रोसेस समझाएंगे और बताएंगे कि आगे क्या करना है। अगर आपके पास आइडेंटिटी डॉक्यूमेंट या उनकी कॉपी हैं, तो उन्हें साथ रखें। इससे आपकी आइडेंटिटी जल्दी चेक हो जाती है और नया डॉक्यूमेंट बनवाने में आसानी होती है।

जरूरी डॉक्यूमेंट रखें तैयार 

जब भी आप ट्रिप पर निकले तो पहले पासपोर्ट, वीजा और दूसरे जरूरी आइडेंटिटी कार्ड की डिजिटल और प्रिंट कॉपी अपने पास जरूर रखें। ओरिजिनल पासपोर्ट खो जाए, तो यही कॉपियां आपके काम आ सकती हैं। नया पासपोर्ट बनवाने के लिए पुलिस रिपोर्ट, पहचान का प्रमाण, जन्मतिथि का प्रमाण, पते का प्रमाण और पासपोर्ट खोने का एफिडेबिट डॉक्यूमेंट लिए जा सकते हैं। पहले से तैयारी होने पर परेशानी कम होती है।

नया पासपोर्ट या इमरजेंसी सर्टिफिकेट

अगर आपकी ट्रिप अभी बाकी है, तो आप नया पासपोर्ट बनवाने के लिए अप्लाई कर सकते हैं। इसमें कुछ दिन या करीब एक हफ्ते लग सकते है। लेकिन अगर आपको सिर्फ भारत वापस लौटना है, तो एम्बेसी आपको इमरजेंसी सर्टिफिकेट या टेम्परेरी ट्रैवल डॉक्यूमेंट है। इससे आप अपने देश वापस आ सकते हैं। यह फैसिलिटी ट्रैवल के बेस पर दी जाती है।

वीजा और इंश्योरेंस का रखें ध्यान 

पुराने पासपोर्ट में किसी देश का वैलिड वीजा होने पर उसके लिए भी अलग से प्रोसेस पूरी करनी पड़ सकती है। ऐसे में उस देश के एम्बेसी से कांटेक्ट करें और नया वीजा बनाने की प्रोसेस जाने। साथ ही अपनी एयरलाइन, होटल और ट्रैवल इंश्योरेंस कंपनी को भी पासपोर्ट खोने के बारे में बताये। कई ट्रैवल इंश्योरेंस पॉलिसीस इस केस में ज्यादा रहने, आने-जाने और जरूरी डॉक्यूमेंट बनवाने का खर्च भी कवर करती हैं।

आगे के लिए रखें ये सावधानी 

पासपोर्ट खोने जैसी परेशानी से पूरी तरह बचना मुश्किल है, लेकिन थोड़ी तैयारी आपका काफी टाइम और स्ट्रेस बचा सकती है। टॉवल से पहले पासपोर्ट और वीजा की स्कैन कॉपी क्लाउड स्टोरेज में सेव करें, एक कॉपी ईमेल में रखें और एक प्रिंट अपने सामान से अलग रखें। किसी भरोसेमंद फैमिली मेंबर के पास भी इसकी कॉपी होना अच्छा रहता है। यह तैयारी मुश्किल समय में आपकी ट्रिप को एक बड़ी मदद कर सकती है।