कौन हैं केटी जकारिया, जिन्हें ट्रंप ने 5 दिन में ही प्रेस सेक्रेटरी के पद से हटाया?

Katie Zacharia: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन में एक बार फिर बड़ा फेरबदल देखने को मिला है। व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी बनीं केटी जकारिया का कार्यकाल कुछ ही दिनों में खत्म हो गया। ट्रंप ने हाल ही में अचानक उनकी नियुक्ति का ऐलान किया था, लेकिन अब उन्हें इस पद से हटा दिया गया है। इस घटनाक्रम ने ट्रंप के पहले कार्यकाल की यादें ताजा कर दी हैं, जब व्हाइट हाउस में अधिकारियों को बार-बार बदला जाता था।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, शुक्रवार को व्हाइट हाउस के दो अधिकारियों ने जकारिया के पद छोड़ने की पुष्टि की। इनमें से एक अधिकारी ने कहा कि उन्हें पद से हटा दिया गया है, जबकि दूसरे ने बताया कि वह अब इस जिम्मेदारी से अलग हो रही हैं।

केटी जकारिया को पद से हटाने से पहले के पांच दिन काफी उतार-चढ़ाव भरे रहे। इस दौरान उन्हें कई असहज सवालों का सामना करना पड़ा। सवाल पूछने वालों में डोनाल्ड ट्रंप के कुछ प्रमुख मीडिया समर्थक भी शामिल थे। दिलचस्प बात यह है कि जकारिया को पद से हटाए जाने की पुष्टि होने से कुछ घंटे पहले ही ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से उन्हें इस नौकरी पर दोबारा विचार करने की सलाह दी थी।

व्हाइट हाउस में केटी जकारिया का कार्यकाल कैसे लड़खड़ा गया

ट्रम्प ने 9 अक्टूबर को जकारिया की नियुक्ति की घोषणा की थी। उन्हें कैरोलीन लेविट की जगह नियुक्त किया गया था, जो अब तक की सबसे कम उम्र की व्हाइट हाउस प्रेस सचिव थीं और कई सालों से ट्रम्प के करीबी लोगों में शामिल रही थीं।

केटी जकारिया रूढ़िवादी विचारों वाली राजनीतिक टिप्पणीकार हैं। ‘ट्रुथ सोशल’ (Truth Social) की मूल कंपनी ‘ट्रम्प मीडिया’ के संचार विभाग में काम कर चुकी थीं। इसके अलावा, ट्रम्प के दूसरे प्रशासन के दौरान उन्होंने कुछ समय के लिए ‘डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी’ में भी काम किया था।

हालांकि, मंगलवार को जब वह पहली बार व्हाइट हाउस प्रेस कोर के सामने आईं, तो तुरंत ही उन पर सवाल उठने लगे।

एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, ब्रीफिंग के दौरान जकारिया असहज दिखीं। वे रुक-रुक कर बोल रही थीं और ट्रम्प की उपलब्धियों का जिक्र कर रही थीं। उन्होंने केवल तीन पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए-ये सभी पत्रकार ऐसे मीडिया संस्थानों से थे जिनका झुकाव रूढ़िवादी विचारधारा की ओर था या जो ट्रम्प के समर्थक थे। लगभग 14 मिनट बाद उन्होंने बातचीत खत्म कर दी।

बाद में जकारिया ने बताया कि उन्होंने जानबूझकर इस सेशन को छोटा रखा था, क्योंकि उसी दिन सुबह ट्रम्प को पत्रकारों के सवालों के जवाब देने थे। उन्होंने यह भी कहा कि व्हाइट हाउस के कर्मचारियों ने उन्हें पहले से पूरी जानकारी (ब्रीफिंग) नहीं दी थी।

इसके बाद, बुधवार और गुरुवार को वे अलास्का, एरिजोना और मोंटाना में ट्रम्प की रैलियों में उनके साथ गईं, लेकिन उन्होंने कोई और प्रेस ब्रीफिंग नहीं की।

हालांकि, पत्रकारों के सामने उनका यह प्रदर्शन उन कई मुद्दों में से सिर्फ एक था, जो उनके छोटे कार्यकाल के दौरान चर्चा का मुख्य विषय बने रहे।

केटी जकारिया की कानूनी योग्यताओं को लेकर विवाद

जकारिया की प्रोफेशनल बैकग्राउंड पर भी सवाल उठे, खासकर तब जब उन्होंने कुछ रूढ़िवादी टीवी नेटवर्कों पर खुद को वकील बताया।

जकारिया ने पेपरडाइन यूनिवर्सिटी के लॉ स्कूल से पढ़ाई की है, लेकिन वह कैलिफोर्निया की बार परीक्षा पास नहीं कर पाई थीं। इसके अलावा, उनके पास अमेरिका में वकालत करने के लिए जरूरी कोई अन्य योग्यता भी नहीं थी।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं मिला जिससे पता चले कि वह अमेरिका के किसी भी राज्य या डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया में वकील के तौर पर पंजीकृत थीं या उन्हें बार में शामिल किया गया था।

हालांकि, जकारिया ने खुद को ‘वकील’ कहने का बचाव करते हुए कहा कि जब वह कानूनी विश्लेषण देती थीं, तो यह शब्द इस्तेमाल करना सही था। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने चीन में वकील के तौर पर काम किया था।

रॉयटर्स को दिए एक बयान में उन्होंने कहा, “मैंने सभी जरूरी योग्यताओं के साथ इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन लॉ (अंतरराष्ट्रीय लेन-देन कानून) की प्रैक्टिस की है।”

इस विवाद ने उन रूढ़िवादी मीडिया हस्तियों का भी ध्यान खींचा, जो आमतौर पर ट्रम्प प्रशासन का समर्थन करते हैं।

वहीं, फॉक्स न्यूज के होस्ट शॉन हैनिटी, जो लंबे समय से ट्रम्प के सहयोगी रहे हैं, ने सवाल उठाया कि जकारिया ने अपनी योग्यताओं के बारे में खुलकर बात क्यों नहीं की। जब उन्होंने यह स्वीकार कर लिया कि वह कैलिफोर्निया बार परीक्षा पास नहीं कर पाई थीं, तो हैनिटी ने पूछा, “सीधे यह क्यों नहीं कह दिया कि ‘मैंने पेपरडाइन लॉ स्कूल से पढ़ाई की, फिर करियर का एक अलग रास्ता चुन लिया, और मैंने एक बार बार परीक्षा दी थी, लेकिन पास नहीं हो पाई’?”

उन्होंने ‘लॉयर’ (वकील) और ‘अटॉर्नी’ (कानूनी प्रतिनिधि) शब्दों के बीच उनके द्वारा किए गए अंतर को भी चुनौती दी और सवाल किया कि उन्होंने सीधे तौर पर यह क्यों नहीं कहा कि उन्होंने कभी वकालत नहीं की है।

जकारिया ने फिर दोहराया कि वह वकील के तौर पर काम नहीं कर रही थीं और न ही कोई कानूनी सलाह दे रही थीं। शुक्रवार को फॉक्स न्यूज के एक अलग इंटरव्यू में, उन्होंने कहा कि उनसे यह कभी नहीं पूछा गया था कि प्रेस सेक्रेटरी बनने से पहले उन्होंने बार परीक्षा पास की है या नहीं।

जकारिया और ट्रम्प, दोनों का यही कहना था कि उन्हें प्रशासन में वकील के तौर पर नहीं, बल्कि कम्युनिकेशंस (संचार) विभाग में काम करने के लिए रखा गया था।

‘मैं फिर से विचार करने को कहूंगा’: ट्रम्प ने उनके भविष्य पर सवाल उठाए

शुक्रवार तक, जकारिया के भविष्य को लेकर उठ रहे सवालों को नजरअंदाज करना मुश्किल हो गया था। उसी दिन फॉक्स न्यूज चैनल पर एक कार्यक्रम के दौरान, उनसे पूछा गया कि क्या राष्ट्रपति का उन पर अभी भी भरोसा है।

उन्होंने जवाब दिया, “मुझे उम्मीद है कि मैं अपने आस-पास के सभी लोगों का भरोसा और विश्वास जीत सकूंगी।” उन्होंने यह बताने से भी इनकार कर दिया कि वह व्हाइट हाउस में अपनी अगली प्रेस ब्रीफिंग कब करेंगी।

कुछ घंटों बाद, ट्रम्प ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि उन्होंने उन्हें अपने पद पर फिर से विचार करने की सलाह दी थी। जॉर्जिया में एक रैली के लिए रवाना होने से पहले व्हाइट हाउस के साउथ लॉन में पत्रकारों से बात करते हुए, राष्ट्रपति ने कहा कि उनका मानना ​​है कि मीडिया ने जकारिया के साथ अनुचित व्यवहार किया है।

ट्रंप ने कहा, “मैंने उससे कहा, ‘मुझे लगता है कि खुश रहना तुम्हारे लिए बेहतर होगा।'”

“मैंने कहा, ‘सच कहूं तो, अगर मैं तुम्हारी जगह होता, तो मैं फिर से सोचता।’ मैंने कहा, ‘तुम इस बारे में सोच लो, लेकिन मैं तो फिर से विचार करता।'”

ट्रंप ने यह भी बताया कि उन्होंने उससे पूछा था, “‘केटी, क्या तुम्हें इसकी जरूरत है? मुझे नहीं लगता कि तुम्हें इसकी जरूरत है।'” उन्होंने कहा कि वह चाहते थे कि “उसका जीवन अच्छा रहे,” न कि वह “मीडिया के हाथों बुरी तरह परेशान” हो।

उस समय, राष्ट्रपति ने उन्हें पद से हटाने की घोषणा तो नहीं की, लेकिन संकेत दिया कि अपनी यात्राओं से लौटने के बाद वे उनके भविष्य पर चर्चा करेंगे। ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, “जब मैं वापस आऊंगा, तो हम बात करेंगे।”

जब उनसे किसी संभावित विकल्प (रिप्लेसमेंट) के बारे में पूछा गया, तो ट्रंप ने कहा कि इस पद के लिए कई लोग इच्छुक हैं।

व्हाइट हाउस में एक जाना-पहचाना फेरबदल, लेकिन जकारिया के लिए आगे क्या?

जकारिया को हटाना उसी तरह के अचानक किए गए बदलावों की वापसी है, जो अक्सर ट्रम्प के पहले कार्यकाल में देखने को मिलते थे, लेकिन उनके दूसरे कार्यकाल में ऐसे बदलाव कम ही हुए थे।

उनका कार्यकाल एंथनी स्कारामुची से भी छोटा रहा, जो 2017 में व्हाइट हाउस के कम्युनिकेशंस डायरेक्टर के तौर पर सिर्फ 10 दिन तक इस पद पर रहे थे।

उनके जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए, स्कारामुची ने ‘X’ पर लिखा, “रिकॉर्ड तो टूटने के लिए ही बनते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “लेकिन मुझे दूसरों के दुख में कोई खुशी नहीं मिलती।”

प्रेस सेक्रेटरी के पद से हटाए जाने के बावजूद, हो सकता है कि जकारिया ट्रम्प प्रशासन को पूरी तरह से न छोड़ें। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें प्रशासन में कोई दूसरी जिम्मेदारी दी जा सकती है।

ABC न्यूज ने दो सूत्रों के हवाले से बताया कि केटी जकारिया को ट्रंप प्रशासन में ही किसी दूसरी जिम्मेदारी में भेजे जाने की संभावना है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस बारे में जल्द ही आधिकारिक ऐलान किया जा सकता है।

हालांकि, व्हाइट हाउस ने अभी तक यह नहीं बताया है कि प्रेस सेक्रेटरी के पद पर जकारिया की जगह कौन लेगा।

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चारधाम यात्रा: अटूट आस्था, VIP संस्कृति और व्यवस्थाओं की अग्निपरीक्षा

चारधाम यात्रा: अटूट आस्था, VIP संस्कृति और व्यवस्थाओं की अग्निपरीक्षा

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यात्राएँ केवल पर्यटन नहीं, बल्कि स्वयं को जानने, जन-आस्था को अनुभव करने और प्रकृति के निकट पहुँचने का अवसर होती हैं। धार्मिक यात्रा मनुष्य को सांसारिक भागदौड़ से दूर कर आत्मचिंतन और ईश्वर के सान्निध्य में जाने का मार्ग दिखाती है। इसी भावना के साथ 26 सितंबर को मध्य प्रदेश के देवास से उत्तराखंड की चारधाम यात्रा प्रारंभ हुई। 15 दिनों के इस सफर ने मुझे आध्यात्मिक संतोष तो दिया, लेकिन धार्मिक स्थलों की व्यवस्थाओं और श्रद्धालुओं की कठिनाइयों ने कई गंभीर प्रश्न भी खड़े किए।

 

माँ गंगा की आरती से हिमालय की दिव्यता तक

हरिद्वार में माँ गंगा की भव्य आरती, मंत्रोच्चार और दीपों से जगमगाती जलधारा ने मन को भावविभोर कर दिया। ऋषिकेश के आध्यात्मिक वातावरण से होते हुए यात्रा माँ यमुनोत्री पहुँची। लगभग छह से सात किलोमीटर के दुर्गम पहाड़ी मार्ग पर पैदल चढ़ाई, थकान और हल्की बारिश के बीच माँ यमुना के दर्शन हुए। इसके बाद उत्तरकाशी में श्री काशी विश्वनाथ महादेव और गंगोत्री में माँ गंगा के दर्शन किए। हिमालय की विशालता ने अनुभव कराया कि प्रकृति के सामने मनुष्य का अहंकार कितना छोटा है।

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केदारनाथ: आस्था अटूट, लेकिन व्यवस्था पर सवाल

यात्रा का सबसे कठिन पड़ाव बाबा केदारनाथ धाम रहा। लगभग 20 से 22 किलोमीटर के दुर्गम मार्ग पर चढ़ाई, घोड़े-खच्चरों की आवाजाही और यात्रियों की भीड़ के बीच आगे बढ़ना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था। लगभग 12 घंटे की मशक्कत के बाद रात करीब दो बजे धाम पहुँचना संभव हुआ, जबकि दर्शन का सौभाग्य अगले दिन शाम लगभग छह बजे मिला। बाबा केदारनाथ के सम्मुख पहुँचते ही मन श्रद्धा से भर गया और सारी थकान मानो क्षणभर में मिट गई।

 

लेकिन घंटों की प्रतीक्षा ने सवाल भी खड़ा किया कि क्या श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन उपलब्ध कराना सरकार और प्रशासन की प्राथमिकता नहीं होनी चाहिए?

 

देश के कोने-कोने से लोग धन, समय और शारीरिक सामर्थ्य खर्च करके अपने आराध्य तक पहुँचते हैं। इनमें बुजुर्ग, महिलाएँ और अस्वस्थ लोग भी होते हैं। कठिन यात्रा के बाद घंटों कतार में खड़े रहना और अंततः कुछ सेकंड के दर्शन पाना उनकी पीड़ा को बढ़ाता है। इस समस्या के बीच VIP संस्कृति भी चिंता का विषय है। विशेष व्यक्तियों को प्राथमिकता देने से यदि आम श्रद्धालुओं को अतिरिक्त प्रतीक्षा करनी पड़े, तो यह व्यवस्था उनकी आस्था और सम्मान दोनों को ठेस पहुँचाती है।

 

ईश्वर के दरबार में हर भक्त बराबर है; किसी की विशेष सुविधा आम श्रद्धालु की परेशानी का कारण नहीं बननी चाहिए। हिमालय की कठिन भौगोलिक परिस्थितियाँ सरकार और प्रशासन के सामने चुनौती अवश्य हैं, लेकिन बेहतर योजना और जवाबदेही की आवश्यकता को नकारा नहीं जा सकता। श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ना उपलब्धि हो सकती है, पर उनकी परेशानियाँ बढ़ना व्यवस्था की सफलता नहीं है।

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त्रियुगीनारायण से बद्रीनाथ तक

केदारनाथ के बाद त्रियुगीनारायण मंदिर में दर्शन का अवसर मिला। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी स्थल पर भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। मंदिर की अखंड धूनी तथा भगवान विष्णु की उपस्थिति इस स्थान की आध्यात्मिक महत्ता बढ़ाती है। इसके बाद बद्रीनाथ धाम में भगवान बद्रीविशाल के दर्शन के साथ यात्रा पूर्ण हुई। इन पवित्र स्थलों ने श्रद्धा, समर्पण और भारतीय संस्कृति की गहराई का अनुभव कराया।

 

आस्था या सोशल मीडिया का प्रदर्शन?

यात्रा के दौरान धार्मिक स्थलों पर तस्वीरें लेने और रील बनाने की बढ़ती प्रवृत्ति भी दिखाई दी। अनुभव साझा करना गलत नहीं है, लेकिन जब कैमरा श्रद्धा पर हावी हो जाए, तो तीर्थयात्रा का वास्तविक उद्देश्य पीछे छूटने लगता है। प्रश्न यह है कि हम ईश्वर के दर्शन करने जाते हैं या दुनिया को यह दिखाने कि हम दर्शन करने गए थे? भक्ति का वास्तविक आनंद लाइक और कमेंट में नहीं, बल्कि उस क्षण में है जब मन बिना किसी दिखावे के अपने आराध्य के सामने झुकता है।

 

सरकार और प्रशासन के लिए स्पष्ट संदेश

चारधाम यात्रा में उमड़ती भीड़ सरकार और प्रशासन के लिए अवसर से अधिक जिम्मेदारी है। दर्शन व्यवस्था, यातायात, पार्किंग, पेयजल, स्वच्छता, चिकित्सा और आपातकालीन सहायता को मजबूत करना अनिवार्य है। बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए विशेष सुविधाएँ सुनिश्चित की जानी चाहिए तथा VIP व्यवस्था के कारण आम श्रद्धालुओं का आवागमन और दर्शन बाधित नहीं होने चाहिए।

 

श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सम्मान कोई सरकारी एहसान नहीं, बल्कि प्रशासन की बुनियादी जिम्मेदारी है। सरकार को घोषणाओं से आगे बढ़कर धरातल पर सुधार दिखाना होगा। समय रहते व्यवस्थाएँ नहीं सुधारी गईं, तो बढ़ती भीड़ भविष्य में गंभीर कठिनाइयाँ पैदा कर सकती है। विकास के साथ हिमालय के नाजुक पर्यावरण की रक्षा भी उतनी ही आवश्यक है।

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आस्था का सम्मान, व्यवस्था की जवाबदेही

10 अक्टूबर को लौटते समय मन में चारधाम के दर्शन का संतोष था, लेकिन व्यवस्थाओं में सुधार की आवश्यकता भी स्पष्ट थी। सरकार को जवाबदेही निभानी होगी, प्रशासन को संवेदनशील बनना होगा और यात्रियों को अनुशासन तथा पर्यावरण संरक्षण का पालन करना होगा।

 

आस्था अटूट है, लेकिन श्रद्धालुओं की सहनशीलता को व्यवस्था की कमजोरियों का विकल्प नहीं बनाया जा सकता। ईश्वर के दरबार में समानता तभी सार्थक होगी, जब प्रत्येक भक्त को समान सम्मान और यथासंभव सुविधाजनक दर्शन मिलें। क्योंकि चारधाम की यात्रा पैरों से जितनी पूरी होती है, उससे कहीं अधिक हृदय और आत्मा से पूरी होती है।

 

हर हर महादेव! जय बद्रीविशाल! जय माँ गंगे! जय माँ यमुना!

कुमाऊं से दिल्ली-एनसीआर पहुंचना हुआ आसान! पंतनगर से नोएडा एयरपोर्ट के बीच मिली सीधी फ्लाइट से ये सारे फायदे

कुमाऊ क्षेत्र को दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जोड़ने वाली हवाई यातायात से पर्यटन, व्यापार और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है। पंतनगर और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बीच इंडिगो की सीधी उड़ान सेवा से यात्रियों को आवागमन का एक सुविधाजनक विकल्प मिल रहा है। इससे हल्द्वानी, नैनीताल, भीमताल, मुक्तेश्वर और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को दिल्ली-एनसीआर के प्रमुख आर्थिक, व्यावसायिक और शैक्षणिक केंद्रों तक पहुंचने में सहूलियत मिलेगी।

अब तक लंबी दूरी की यात्रा के लिए सड़क मार्ग पर निर्भर रहने वाले यात्रियों को हवाई सफर का एक अतिरिक्त विकल्प मिल रहा है। इससे कारोबारियों, पर्यटकों, विद्यार्थियों और परिवारों को समय के बेहतर प्रबंधन के साथ यात्रा की योजना बनाने में मदद मिल सकती है। खास तौर पर दिल्ली, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और फरीदाबाद जैसे शहरों से संपर्क बेहतर होने से कुमाऊं और एनसीआर के बीच आर्थिक एवं सामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

पर्यटन और धार्मिक यात्राओं को मिलेगा बढ़ावा

कुमाऊं अपनी प्राकृतिक सुंदरता, झीलों, पहाड़ों और धार्मिक स्थलों के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। नैनीताल, भीमताल और मुक्तेश्वर जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंचने वाले यात्रियों के लिए बेहतर हवाई संपर्क क्षेत्र की पर्यटन अर्थव्यवस्था को लाभ पहुंचा सकता है। वहीं, कुमाऊं से दिल्ली और आसपास के धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों, जैसे मथुरा, वृंदावन और आगरा, की यात्रा करने वालों को भी आगे की यात्रा की योजना बनाने में सुविधा मिल सकती है।

बेहतर कनेक्टिविटी से होटल, टैक्सी, स्थानीय परिवहन, रेस्तरां और पर्यटन से जुड़े दूसरे व्यवसायों के लिए भी नए अवसर पैदा हो सकते हैं। पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से स्थानीय रोजगार और छोटे कारोबार को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

देश के बड़े शहरों तक पहुंच का नया विकल्प

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के माध्यम से इंडिगो के व्यापक नेटवर्क से जुड़कर यात्री मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे प्रमुख महानगरों के लिए आगे की यात्रा के विकल्प तलाश सकते हैं। इससे कुमाऊं के व्यापारियों और उद्यमियों को देश के विभिन्न बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, आगे की यात्रा की उपलब्धता संबंधित उड़ानों के कार्यक्रम और कनेक्शन पर निर्भर करेगी।

कार्गो सुविधाओं से कारोबार को नई उम्मीद

यात्री सुविधाओं के साथ नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का कार्गो इंफ्रास्ट्रक्चर भी क्षेत्रीय कारोबार के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्थानीय व्यवसायों की जरूरतों के अनुरूप कार्गो सेवाओं का बेहतर उपयोग होने पर माल की आवाजाही को अधिक सुविधाजनक बनाने में मदद मिल सकती है। इससे क्षेत्र के उद्योगों, व्यापारियों और अन्य कारोबारी इकाइयों को व्यापक बाजारों से जुड़ने के अवसर मिल सकते हैं।

इसी दिशा में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, इंडिगो और एयर इंडिया सैट्स ने पंतनगर में ट्रैवल एवं ट्रेड समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ रोडशो आयोजित किया। इसमें कुमाऊं गढ़वाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (केजीसीसीआई), ट्रैवल एजेंटों, फ्रेट फॉरवर्डर्स और कॉरपोरेट प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में यात्री कनेक्टिविटी, आगे की यात्रा के विकल्पों, एयरपोर्ट सुविधाओं और कार्गो संबंधी संभावनाओं पर चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने किफायती किराए, अधिक यात्रा विकल्पों और बेहतर कार्गो मूवमेंट की जरूरत पर जोर दिया।

यात्रियों को मिलेंगे विशेष ऑफर

पंतनगर से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की उड़ानों से यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए कुछ विशेष प्रमोशनल ऑफर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। पंतनगर का बोर्डिंग पास दिखाने पर एयरपोर्ट के चुनिंदा डाइनिंग आउटलेट्स, जिनमें कोस्टा कॉफी, केएफसी, सबवे, चाय पॉइंट और स्मूर शामिल हैं, पर 10% तक की छूट मिलेगी, जिसकी अधिकतम सीमा 200 रुपये है। इसके अलावा, इलेक्ट्रिक टैक्सी और कार रेंटल सेवाओं पर 40% तक की छूट का भी प्रावधान है। इन ऑफर्स की लागू शर्तें संबंधित सेवा प्रदाताओं पर निर्भर करेंगी।

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के वाइस प्रेसिडेंट क्रिस्टोफ श्नेलमैन के अनुसार, पंतनगर-नोएडा एयरपोर्ट मार्ग कुमाऊँ के यात्रियों के लिए यात्रा के विकल्प बढ़ाने के साथ दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख आध्यात्मिक एवं व्यावसायिक केंद्रों तक पहुंच आसान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

कुल मिलाकर, पंतनगर और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बीच हवाई संपर्क कुमाऊं के लिए केवल यात्रा का नया विकल्प नहीं, बल्कि पर्यटन, व्यापार और क्षेत्रीय आर्थिक विकास की संभावनाओं को मजबूत करने वाला कदम भी साबित हो सकता है।

ग्रेटर नोएडा से पवन गुप्ता की रिपोर्ट

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Video: 2 साल भारत में रही कोरियाई महिला, 7 शहर घूमने के बाद इस जगह पर आया दिल

भारत में घूमने की जगहों की कमी नहीं है, लेकिन हर किसी की पसंद अलग होती है। दक्षिण कोरिया की जंग ए उम ने अपने बच्चों के साथ भारत में दो साल बिताए और इस दौरान कई शहरों को करीब से जाना। हालांकि, उनकी यात्राओं में एक जगह ऐसी रही, जिसने उन्हें सबसे ज्यादा प्रभावित किया। समुद्र की खूबसूरती और वहां के अनुभवों ने उनका नजरिया ही खास बना दिया। अब उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी पसंदीदा जगह का जिक्र किया है, जिसके बाद लोग उनकी यात्रा पर चर्चा कर रहे हैं और उन्हें नए पर्यटन स्थलों के सुझाव दे रहे हैं।

भारत के सात शहरों में देखा अलग-अलग रंग

जंग ए उम ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा किया, जिसका शीर्षक था, ‘भारत में 2 साल: एक कोरियाई मां की ईमानदार राय’। इसमें उन्होंने भारत में रहने और घूमने के अपने अनुभव बताए। उन्होंने चेन्नई, बेंगलुरु, दिल्ली, मुंबई, केरल, कोयंबटूर और अंडमान की यात्रा की। उनके मुताबिक, भारत इतना बड़ा और विविधताओं से भरा देश है कि हर शहर में अलग माहौल महसूस होता है। कहीं भाषा बदल जाती है, कहीं खानपान और कहीं लोगों की जीवनशैली। इसके बावजूद उन्हें हर जगह खूबसूरती और लोगों का अच्छा व्यवहार देखने को मिला। उनका कहना है कि भारत के अलग-अलग शहरों का अपना आकर्षण है और हर जगह कुछ नया सीखने और देखने को मिलता है।

अंडमान की खूबसूरती ने किया सबसे ज्यादा प्रभावित

जिन जगहों को जंग ने देखा, उनमें अंडमान द्वीपसमूह उनका पसंदीदा बनकर उभरा। यहां का प्राकृतिक सौंदर्य, साफ पानी और समुद्र के भीतर दिखाई देने वाला जीव-जगत उन्हें बेहद पसंद आया।

स्कूबा डाइविंग के दौरान समुद्री जीवन को करीब से देखने का अनुभव भी उनके लिए खास रहा। उन्होंने बताया कि वह ऑफ-सीजन में अंडमान पहुंची थीं, फिर भी वहां का अनुभव उनकी उम्मीदों से कहीं बेहतर निकला। अपनी पोस्ट के कैप्शन में उन्होंने अंडमान को अपनी पसंदीदा नई खोजों में से एक बताया और वहां की प्राकृतिक सुंदरता को यादगार करार दिया।

भारत में अभी घूमने के लिए बहुत कुछ बाकी

दो साल भारत में बिताने के बावजूद जंग को लगता है कि अभी कई जगहें देखना बाकी हैं। उन्होंने कहा कि जब तक वह भारत में रहेंगी, नई जगहों की खोज करती रहेंगी और अपने अनुभव दुनिया के लोगों के साथ साझा करेंगी। उनकी पोस्ट पर लोगों ने भी खूब प्रतिक्रिया दी। कई यूजर्स ने भारत की तारीफ करने के लिए उनका धन्यवाद किया, जबकि कुछ ने उन्हें पूर्वोत्तर भारत घूमने की सलाह दी। एक यूजर ने बताया कि पूर्वोत्तर का अनुभव देश के दूसरे हिस्सों से काफी अलग है।

सोशल मीडिया पर क्यों पसंद आ रही है कहानी?

जंग का अनुभव बताता है कि भारत की पहचान सिर्फ उसके ऐतिहासिक स्थलों या प्राकृतिक नजारों से नहीं, बल्कि यहां की सांस्कृतिक विविधता और लोगों के व्यवहार से भी बनती है। उनके लिए अंडमान की यात्रा सिर्फ घूमने-फिरने का मौका नहीं, बल्कि एक ऐसी खोज रही, जिसने भारत के प्रति उनकी यादों को और खास बना दिया।

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झारखंड की राजधानी रांची का बिरसा मुंडा एयरपोर्ट अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के संचालन के लिए तैयार है। अब जरूरत किसी एयरलाइन कंपनी के आगे आने की है। रांची बिरसा मुंडा एयरपोर्ट के डायरेक्टर विनोद कुमार बताते हैं, अंतरराष्ट्रीय उड़ान शुरू करने का प्रस्ताव मिलने पर कस्टम, इमिग्रेशन सहित आवश्यक सेवाओं को सक्रिय किया जा सकता है।

अंतरराष्ट्रीय सेवा शुरू होने पर यात्रियों को पासपोर्ट और वीजा जांच, इमिग्रेशन काउंटर, कस्टम जांच, अंतरराष्ट्रीय बैगेज हैंडलिंग, सुरक्षा जांच और आवश्यक स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं मिलेंगी। इससे झारखंड के यात्रियों के लिए विदेश यात्रा अधिक सुविधाजनक हो सकेगी। इसके लिए रनवे भी थोड़ा लंबा और चौड़ा किया जाएगा।

डूरंड कप में किया गया है टेस्ट

डायरेक्टर विनोद कुमार ने बताया,अभी हाल में ही राज्य में डूरंड कप आयोजित हुआ था। इसमें हमने अस्थाई रूप से कई सारी सुविधाओं को सक्रिय किया था जैसे इमीग्रेशन, विजा सत्यापन, अंतरराष्ट्रीय बैगेज हैंडलिंग में पूरी तरह सफल परीक्षण रहा। ऐसे में अगर कोई एयरलाइन कंपनी इंटरनेशनल रूट पर उड़ान शुरू करने का प्रस्ताव भेजती है तो रांची एयरपोर्ट पूरी तरह तैयार है।

उन्होंने आगे बताया कि परीक्षण के दौरान सुरक्षा, इमीग्रेशन, यात्रियों का दबाव हर चीजों पर रांची एयरपोर्ट खरा उतरा है। अब बस जरूरत है तो किसी विमानन कंपनी के प्रस्ताव की। ऐसे में जो लोग खासतौर पर दिल्ली और मुंबई जाकर अंतरराष्ट्रीय उड़ान से सफर करते हैं, उनको बड़ी सुविधा होगी।

6000 यात्री करते हैं यात्रा

जानकारी देते हुए विनोद कुमार बताते हैं,रांची एयरपोर्ट में हर दिन 4000 से 5000 यात्री उड़ान भरते हैं। वहीं, कुछ खास मौके या फेस्टिव सीजन पर या वीकेंड के कोई खास दिन पर ये तादाद 6000 तक हो जाती है। साथ ही, रोजाना औसत 45-50 विमान की आवाजाही होती है। तो रांची एयरपोर्ट अंतरराष्ट्रीय उड़ान के लिए पूरी तरह तैयार है।

रांची से शिखा श्रेया की रिपोर्ट

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The Legend of Hanuman 7: ‘द लीजेंड ऑफ हनुमान 7’ का रिलीज हुआ ट्रेलर, इस दिन होगी जियोहॉटस्टार पर होगी स्ट्रीम

The Legend of Hanuman 7 Trailer release: हनुमान की गाथा एक बार फिर लौट आई है। इस बार दांव पहले से कहीं बड़े हैं। JioHotstar ने ‘द लीजेंड ऑफ हनुमान’ सीजन 7 का ट्रेलर जारी कर दिया है। इसके साथ ही दर्शकों के पसंदीदा शोज में से एक का अब तक का सबसे बड़ा अध्याय सामने आया है। ग्राफिक इंडिया द्वारा निर्मित और शरद देवराजन के सह-निर्माण में तैयार इस सीजन का प्रीमियर 23 अक्टूबर को होगा।

नए सीजन में लंका का युद्ध अपने निर्णायक और भयावह मोड़ पर पहुंचता है, जहां रावण अब तक के अपने सबसे शक्तिशाली रूप में सामने आता है। वानर सेना के शिविर में निराशा छाने लगती है, तभी हनुमान उस एक अस्त्र की तलाश में निकल पड़ते हैं, जो रावण का हमेशा के लिए अंत कर सकता है।

लेकिन अंतिम अस्त्र की यह खोज जल्द ही उन्हें युद्धभूमि से बहुत आगे समय के अलग-अलग पड़ावों तक ले जाती है। इस यात्रा में वे भगवान राम के अतीत के उन अनजाने पहलुओं और मृत्यु के साम्राज्य तक पहुंचते हैं, जिनसे अब तक पर्दा नहीं उठा था। इसी दौरान हनुमान एक ऐसे रहस्य से पर्दा उठाते हैं, जो सब कुछ बदलकर रख देगा—उनकी दिव्यता का वास्तविक स्वरूप और उनकी असीम शक्ति।

शानदार एक्शन के साथ इमोशन, आस्था और मित्रता का संगम पेश करता यह सीजन हनुमान की यात्रा में एक नए और प्रभावशाली अध्याय की शुरुआत करता है। अब रावण के अंत की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। ‘द लीजेंड ऑफ हनुमान’ सीजन 7 का प्रीमियर 23 अक्टूबर को विशेष रूप से JioHotstar पर होगा।

शरद केलकर एक बार फिर रावण की आवाज के रूप में लौट रहे हैं और अपने दमदार अंदाज से इस शक्तिशाली खलनायक के किरदार को जीवंत करेंगे। शो में वापसी को लेकर शरद केलकर ने कहा- “मैं ‘द लीजेंड ऑफ हनुमान’ का हिस्सा बनकर बेहद खुश हूं। यह ऐसा शो है, जो हमारी पौराणिक कथाओं की कुछ कालजयी गाथाओं को जीवंत करता है। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ेगी, दर्शक इससे जुड़े रहेंगे और हर नए खुलासे का इंतजार करेंगे।”

शरद देवराजन, निर्माता एवं लेखक, सह-संस्थापक और सीईओ, ग्राफिक इंडिया ने कहा- “‘द लीजेंड ऑफ हनुमान’ का निर्माण मेरे जीवन की सबसे संतोषजनक यात्राओं में से एक रहा है। JioHotstar के साथ हमारी साझेदारी ने हमें इस दुनिया का विस्तार करने और इसकी कई परतों को दर्शकों के सामने ऐसे अंदाज में प्रस्तुत करने का अवसर दिया है, जो कालजयी होने के साथ-साथ आज के दौर से भी जुड़ा है। एनिमेशन ही ऐसा माध्यम है, जो भगवान हनुमान की कथा के विशाल स्वरूप, कल्पनाशीलता और आध्यात्मिक गहराई के साथ न्याय कर सकता है।

शरद देवराजन, जीवन जे. कांग और चारुवी अग्रवाल द्वारा निर्मित ‘द लीजेंड ऑफ हनुमान’ सीजन 7 अपनी विशिष्ट एनिमेशन शैली और विस्तृत पौराणिक दुनिया को आगे बढ़ाता है। ग्राफिक इंडिया की इस प्रस्तुति का निर्देशन जीवन जे. कांग और नवीन जॉन ने किया है, जबकि इसकी पटकथा शरद देवराजन, जीवन जे. कांग, सरवत चड्ढा और शिवांगी सिंह ने लिखी है।

ट्रेलर हनुमान की यात्रा के अब तक के सबसे शक्तिशाली अध्याय की झलक पेश करता है। देखें ‘द लीजेंड ऑफ हनुमान’ सीजन 7, 23 अक्टूबर से विशेष रूप से JioHotstar पर।

पटना के महावीर मंदिर की अनूठी पहल, प्रसाद और दान की कमाई से चल रहे अस्पताल, बच्चों के लिए बन रहा बाल कैंसर हॉस्पिटल

बिहार की राजधानी पटना स्थित महावीर मंदिर सिर्फ एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल नहीं है। पटना जंक्शन से लगा यह मंदिर आस्था के साथ-साथ सेवा और जनकल्याण की भी एक बड़ी मिसाल है। यहां बजरंगबली के दर्शन करने के लिए हर दिन हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि मंदिर में चढ़ने वाले नैवेद्यम प्रसाद और अन्य माध्यमों से होने वाली कमाई का इस्तेमाल मरीजों के इलाज, शिक्षा और जरूरतमंदों को भोजन उपलब्ध कराने जैसे कार्यों में भी किया जाता है। महावीर मंदिर न्यास समिति के अंतर्गत कई अस्पताल, चिकित्सा संस्थान, प्रशिक्षण केंद्र और भोजनालय संचालित होते हैं।

प्रसाद की कमाई से होता है मरीजों का इलाज

महावीर मंदिर की आय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा नैवेद्यम प्रसाद की बिक्री से होने वाली बचत से आता है। इसके अलावा श्रद्धालुओं के चढ़ावे, कर्मकांड शुल्क, स्वैच्छिक दान, विक्रय केंद्रों की बचत और बैंक से मिलने वाले ब्याज से भी मंदिर को आय होती है। इन्हीं संसाधनों के जरिए महावीर मंदिर न्यास समिति स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण संस्थानों का संचालन करती है। इन संस्थानों में महावीर कैंसर संस्थान, महावीर आरोग्य संस्थान, महावीर वात्सल्य अस्पताल, महावीर नेत्रालय, महावीर हार्ट हॉस्पिटल, महावीर वरिष्ठ नागरिक अस्पताल और विशालनाथ अस्पताल शामिल हैं।

इसके अलावा भीखमदास ठाकुरबाड़ी स्थित महावीर नेत्रालय की शाखा भी संचालित की जाती है। इन संस्थानों के माध्यम से कैंसर, हृदय रोग, आंखों की बीमारियों और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे मरीजों को चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इस अस्पतालों में बेहद कम दरों पर आधुनिक सुविधाएं दी जाती है।

बन रहा है बाल कैंसर संस्थान

महावीर मंदिर न्यास समिति का स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा विस्तार लगातार आगे बढ़ रहा है। इसी कड़ी में महावीर किशोर कुणाल बाल कैंसर संस्थान का निर्माण कार्य भी जारी है। 100 बेड का एक नया अस्पताल बनाया जा रहा है। यह पूरी तरह कैंसर पीड़ित बच्चों के इलाज को समर्पित होगा। इसका निर्माण कार्य शुरू हो चुका है और 2027 तक इसके तैयार होने की उम्मीद है। इस अस्पताल में 18 साल तक के बच्चों को निशुल्क इलाज की सुविधा दी जाएगी। यहां जांच और उपचार के लिए सभी आधुनिक उपकरण और तकनीकें होंगी।

इलाज के साथ मेडिकल शिक्षा पर भी जोर

महावीर मंदिर की गतिविधियां केवल अस्पतालों के संचालन तक सीमित नहीं हैं। महावीर पैरा मेडिकल ट्रेनिंग और महावीर एएनएम नर्सिंग ट्रेनिंग सेंटर के माध्यम से चिकित्सा एवं नर्सिंग से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाता है। वहीं, पाणिनि वेद विद्यालय के जरिए पारंपरिक वैदिक शिक्षा को भी बढ़ावा दिया जाता है।

गयाजी से अयोध्या तक जरूरतमंदों के लिए भोजन की व्यवस्था

धार्मिक स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं और जरूरतमंद लोगों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए भी महावीर मंदिर न्यास समिति की ओर से पहल की गई है। इसके तहत गयाजी में विष्णु रसोई, सीतामढ़ी में सीता रसोई और अयोध्या में राम रसोई का संचालन किया जाता है। इन रसोइयों में लोगों को निःशुल्क भोजन उपलब्ध कराया जाता है। धार्मिक यात्राओं पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए ऐसी व्यवस्था काफी उपयोगी साबित होती है।

पूर्वी चम्पारण में में आकार ले रहा विराट रामायण मंदिर

महावीर मंदिर न्यास समिति की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में पूर्वी चंपारण जिले के चकिया क्षेत्र में निर्माणाधीन विराट रामायण मंदिर भी शामिल है। विराट रामायण मंदिर का निर्माण संसार के सबसे बड़े मंदिर के रूप में हो रहा है।

इस भव्य मंदिर परिसर में 33 फीट ऊंचा और लगभग 210 मीट्रिक टन वजनी शिवलिंग स्थापित किया गया है। मंदिर की प्रस्तावित लंबाई 1080 फीट और चौड़ाई 540 फीट है। इसकी संरचना में कुल 18 शिखर और 22 मंदिर शामिल होंगे। मुख्य शिखर की ऊंचाई 270 फीट रखी गई है, जबकि अन्य शिखरों की ऊंचाई 180, 135, 108 और 90 फीट प्रस्तावित है। महावीर मंदिर न्यास समिति के सचिव सायण कुणाल के अनुसार, निर्माण कार्य को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने के लिए हरसंभव प्रयास किया जा रहा है।

रोजाना करीब 10 लाख रुपये की आय

महावीर मंदिर की आर्थिक गतिविधियों का अंदाजा मई 2023 में महावीर मंदिर न्यास समिति की ओर से जारी आंकड़ों से लगाया जा सकता है। इन आंकड़ों के अनुसार, मंदिर की प्रतिदिन की आय करीब 10 लाख रुपये थी। इस आय में भेंटपात्रों में मिलने वाली चढ़ावे की राशि, कर्मकांड शुल्क, नैवेद्यम प्रसाद से होने वाली बचत, श्रद्धालुओं की ओर से स्वेच्छा से दिए जाने वाले दान, विक्रय केंद्रों की बचत और बैंक ब्याज शामिल थे। इसमें अस्पतालों और अन्य संस्थानों की आय-व्यय राशि शामिल नहीं थी।

पटना से सच्चिदानंद की रिपोर्ट

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Flydubai: ‘इजराइल में फ्लाइट क्रैश करना था सपना’ ओमानी को-पायलट ने पूछताछ में किए चौंकाने वाले खुलासे

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) फ्लाईदुबई फ्लाइट के कॉकपिट पर हमला करने वाले ओमानी नागरिक हमाम अल-हमामी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई कर सकती है। न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, फ्लाईदुबई विमान को हाईजैक करने के आरोपी को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में मौत की सजा का सामना करना पड़ सकता है। हमाम अल-हमामी ने इजराइल जा रहे यात्रियों से भरे विमान को तेल अवीव के बेन-गुरियन एयरपोर्ट पर क्रैश कराने की कोशिश की थी। इसी बीच आरोपी ने पुछताछ में कई खुलासे किए हैं। अल-हम्मामी ने जांच के दौरान कथित तौर पर बताया कि उसने इजराइल के एक एयरपोर्ट से विमान को टकराने का सपना देखा था।

कर चुका है इजराइल की यात्रा

जेरूसलम पोस्ट के अनुसार, ओमान के 29 वर्षीय नागरिक हमाम अल-हम्मामी ने इजराइल जाने वाली एयरलाइनों के बारे में पहले से जानकारी जुटाई थी। जांच में ये भी सामने आया कि कॉकपिट पर हमला करने से कुछ महीने पहले वह इजराइल की यात्रा कर चुका था। कथित तौर पर हमाम अल-हम्मामी ने जांचकर्ताओं से कहा, “मैंने कई एयरलाइनों में नौकरी पाने की कोशिश की थी। मैंने यह भी पता लगाया कि कौन-कौन सी एयरलाइंस तेल अवीव के लिए उड़ान भरती हैं। इसी वजह से मैंने फ्लाईदुबई को चुना। नौकरी मिलने से पहले ही मैंने इस पूरी योजना के बारे में सोच लिया था।”

जुलाई में बनाई थी योजना

जेरूसलम पोस्ट के अनुसार, हमाम अल-हम्मामी ने फ्लाईदुबई में करीब आठ महीने तक काम किया था। बताया जा रहा कि उसने जुलाई में विमान को क्रैश कराने की योजना बनाई थी, लेकिन उस समय एक क्रू मेंबर के पास होने के कारण उसने अपना इरादा बदल दिया। इसके बाद भी इजराइल की जमीन पर विमान गिराने की कथित योजना उसने नहीं छोड़ी। जांच के दौरान उसने कथित तौर पर कहा, “सपना था बेन-गुरियन (तेल अवीव) एयरपोर्ट से टकराना।”

क्या थी योजना

रिपोर्ट के अनुसार, अल-हम्मामी की कथित योजना थी कि हमला इतनी तेजी से किया जाए कि इजराइली सेना को लड़ाकू विमान भेजकर कार्रवाई करने का पर्याप्त समय न मिल सके। पोस्ट के एक सूत्र के मुताबिक, जांचकर्ताओं को फिलहाल आशंका है कि उसने किसी आतंकी संगठन के निर्देश पर नहीं, बल्कि अपने स्तर पर अकेले यह योजना बनाई थी। उसे ‘लोन वुल्फ’ के तौर पर देखा जा रहा है और UAE में उससे पूछताछ अभी जारी है।

फ्लाइट को क्रैश कराने की थी साजिश

एक वरिष्ठ अमीराती अधिकारी के हवाले से Ynet ने बताया कि फ्लाईदुबई के को-पायलट हमाम अल-हम्मामी को इस मामले में मौत की सजा मिल सकती है। आरोप है कि उसने विमान के कैप्टन स्मित मच्छर पर क्रैश एक्स से हमला किया था। इसके बाद सरकारी वकील आरोपी के खिलाफ सबसे सख्त सजा की मांग कर रहे हैं। फ्लाईदुबई फ्लाइट को-पायलट ने भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर हमला करने के बाद विमान का कंट्रोल अपने हाथ में लेने की कोशिश की। विमान में करीब 180 लोग सवार थे। कैप्टन मच्छार ने किसी तरह कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया, जिसके बाद यात्रियों और अन्य लोगों ने मिलकर हमलावर को काबू में करने में मदद की।

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कब मनाई जाती है गुरु नानक देव की पुण्यतिथि? जानें उनके प्रेरणादायी प्रसंग और अनमोल विचार

कब मनाई जाती है गुरु नानक देव की पुण्यतिथि? जानें उनके प्रेरणादायी प्रसंग और अनमोल विचार

Learn about inspiring episodes and invaluable teachings of Guru Nanak Dev

Guru Nanak Dev Ji Punyatithi 2026: प्रति वर्ष अनुसार सिख धर्म के संस्थापक तथा सिखों के पहले गुरु, गुरु नानक देव जी की पुण्यतिथि अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 22 सितंबर को थी, लेकिन साल 2026 में तिथिनुसार उनकी पुण्यतिथि आश्विन कृष्ण दशमी तिथि के दिन भी मनाई जा रही है, जो कि 5 अक्‍टूबर, सोमवार को आ रही है। गुरु नानक देव जी धर्मगुरु, ईश्वर के सच्चे प्रतिनिधि, राष्ट्रप्रेम, एकता और शांति के प्रेरक, महान महापुरुष तथा सिख पंथ के प्रथम गुरु एवं संस्थापक थे। आइए, जानते हैं गुरु नानक देव जी के प्रेरणादायी प्रसंग और अनमोल विचार के बारे में विस्‍तार से… 

 

गुरु नानक देव के प्रमुख उपदेश और सिद्धांत

गुरु नानक देव जी धर्मगुरु, ईश्वर के सच्चे प्रतिनिधि, राष्ट्रप्रेम, एकता और शांति के प्रेरक, महान महापुरुष तथा सिख पंथ के प्रथम गुरु एवं संस्थापक थे। जब समाज में पाखंड, अंधविश्वास व कई असामाजिक कुरीतियां सिर उठाए खड़ी थीं, हर तरफ असमानता, छुआछूत व अराजकता का वातावरण जोरों पर था, ऐसे नाजुक समय में गुरु नानक देव ने आध्यात्मिक चेतना जाग्रत कर समाज को मुख्यधारा में लाने का कार्य किया। 

 

गुरु नानक देव ने की सिख धर्म की स्थापना

गुरु नानक देव ने जहां सिख धर्म की स्थापना की, वही उदारवादी दृष्टिकोण से सभी धर्मों की अच्छाइयों को भी समाहित किया। उन्होंने अपने समय के भारतीय समाज में व्याप्त कुप्रथाओं, अंधविश्वासों, पुरानी रुढ़ियों और पाखंडों को दूर करते हुए प्रेम, सेवा, परिश्रम, परोपकार और भाईचारे की दृढ़ नींव पर सिख धर्म की स्थापना की। उनका मुख्य उपदेश था, ईश्वर एक है, हिन्दू-मुसलमान सभी एक ही ईश्वर की संतान हैं, ईश्वर के लिए सभी समान हैं और उसी ने सबको बनाया है।

 

गुरु नानक देव के अनमोल विचार

गुरु नानक देव जी कहते थे कि हमें हमेशा लोभ का त्याग करना चाहिए और मेहनत से अपना धन कमाकर जीवन जीना चाहिए। हमेशा तनाव मुक्त रहकर हमें अपने कर्म को निरंतर करते रहना चाहिए और हमेशा खुश रहना चाहिए। धन को कभी भी अपने ह्रदय से लगाकर नहीं रखना चाहिए, उसका स्थान हमेशा जेब में ही होना चाहिए। तभी आप लालच और अहंकार से दूर रह पाएंगे। 

 

गुरु नानक देव कहते हैं हर मनुष्य को सबसे पहले खुद की बुराइयों और गलत आदतों पर विजय पाने की कोशिश करनी चाहिए। हर इंसान को हमेशा अच्छे और विनम्र सेवाभाव से अपना जीवन गुजारना चाहिए, क्योंकि अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन होता है, अत: मनुष्य को अहंकार नहीं करना चाहिए।

 

गुरु नानक देव ने की 4 लंबी यात्राएं

गुरु नानक देव जी ने सत्य और मानवता के प्रचार के लिए लगभग 24 वर्षों तक चार दिशाओं में हजारों किलोमीटर की पैदल यात्राएं कीं, जिन्हें उदासी कहा जाता है। इन यात्राओं में उनके साथ उनके मुस्लिम साथी और संगीतकार भाई मरदाना (जो रबाब बजाते थे) भी रहते थे।

 

अंतिम समय और करतारपुर साहिब

अपनी यात्राओं के बाद गुरु नानक देव जी ने रावी नदी के तट पर करतारपुर (वर्तमान पाकिस्तान) नगर बसाया और एक किसान के रूप में जीवन व्यतीत किया।

उत्तराखंड में मौसम का कहर! चारधाम यात्रा दो दिन के लिए स्थगित, कई जिलों में भारी बारिश का रेड अलर्ट

उत्तराखंड में खराब मौसम और भारी बारिश की चेतावनी को देखते हुए चार धाम यात्रा को दो दिनों के लिए रोक दिया गया है। मौसम विभाग ने कई जिलों में ‘रेड’ और ‘ऑरेंज’अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग ने उत्तराखंड के कई इलाकों में तेज बारिश की चेतावनी जारी की है। इसी को ध्यान में रखते हुए यात्रियों की सुरक्षा के लिए यात्रा 27 सितंबर से 28 सितंबर तक बंद रखने का फैसला लिया गया है। प्रशासन ने यह कदम देश और विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया है। वहीं मौसम में सुधार होने के बाद चार धाम यात्रा दोबारा शुरू कर दी जाएगी।

भारी बारिश की वजह से रोकी यात्रा

PTI की रिपोर्ट के अनुसार, गढ़वाल कमिश्नर आनंद स्वरूप ने सभी जिलाधिकारियों को जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। मौसम विभाग के रेड अलर्ट और यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए चार धाम यात्रा को शनिवार दोपहर से रविवार तक रोकने का फैसला लिया गया है। प्रशासन ने कहा कि मौसम में सुधार होने के बाद चार धाम यात्रा दोबारा शुरू कर दी जाएगी। मौसम विभाग ने 26 और 27 सितंबर को उत्तराखंड के कई इलाकों में तेज बारिश की चेतावनी जारी की है। शनिवार को बागेश्वर, पिथौरागढ़, चंपावत, नैनीताल और ऊधम सिंह नगर में भारी बारिश का रेड अलर्ट है। वहीं देहरादून, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, चमोली और अल्मोड़ा में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। हरिद्वार, उत्तरकाशी और टिहरी के लिए येलो अलर्ट है।

इन जगहों पर जारी है रेड अलर्ट

उत्तराखंड में रविवार को भी कई जिलों में तेज बारिश का खतरा बना हुआ है। मौसम विभाग ने देहरादून, टिहरी, पौड़ी और हरिद्वार के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। वहीं उत्तरकाशी, चमोली, नैनीताल और रुद्रप्रयाग में ऑरेंज अलर्ट है, वहीं कुछ अन्य जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को सतर्क रहने और जरूरी तैयारियां पूरी रखने के निर्देश दिए हैं।

लोगों को सतर्क रहने की सलाह

मुख्यमंत्री ने लोगों और पर्यटकों से अपील की है कि खराब मौसम को देखते हुए बेवजह यात्रा करने से बचें और कहीं जाने से पहले मौसम व सड़कों की ताजा स्थिति जरूर जांच लें। मौसम विभाग ने कई इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी है। लगातार बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और सड़क बंद होने की आशंका है, वहीं नदियों और बरसाती नालों का जलस्तर बढ़ सकता है। मैदानी इलाकों में भी जलभराव की स्थिति बन सकती है, इसलिए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

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