ज्ञानेश कुमार सरकारी गवाह बनें : राहुल

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा है कि देश में ‘वोट चोरी’ करवाई जा रही है इसलिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देकर सरकारी गवाह बन जाना चाहिए।

श्री गांधी ने शनिवार को अपने पॉडकास्ट में परीक्षाओं में देरी, नियुक्तियां अटकने और बुनियादी सुविधाओं की कमी का जिक्र करते हुए ऐसे मुद्दों पर जवाबदेही तय करने की जरूरत बतायी। उन्होंने पिछले एक महीने में इंदौर, नासिक, बालाघाट और दिल्ली में छात्रों की गूंज कार्यक्रम के दौरान के अनुभव साझा करते हुए कहा कि छात्रों के सवाल ऐसी व्यवस्था को चुनौती देते हैं।

उन्होंने कहा कि आरएसएस-भाजपा से जुड़े लोगों ने देश के संस्थानों पर कब्जा कर लिया है और आदिवासी और पिछड़े वर्ग के छात्रों को जो सुविधाएं मिलती हैं उनमें कटौती की जा रही है इसलिए इन मामलों में सरकार की ओर से जवाबदेही तय होनी चाहिए।

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श्री गांधी ने इस पॉडकास्ट में महाराष्ट्र के नासिक में आंदोलनरत आदिवासी विद्यार्थियों, महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों और मध्य प्रदेश के बालाघाट में कुपोषण तथा बीमारियों से बच्चों को खोने वाले आदिवासी परिवारों के साथ अपनी मुलाकात का भी जिक्र किया। उन्होंने बालाघाट में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण पूरी तरह लागू करने का आग्रह किया और कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव को इस संदर्भ में पत्र लिखा है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली के बेला एस्टेट की झुग्गी बस्ती में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद 729 निवासियों में से 728 के नाम मतदाता सूची से हट गये। इसे मतदान के अधिकार के उल्लंघन का गंभीर मामला बताते हुए उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देकर सरकारी गवाह बनना चाहिए।

वोट चोरी को संविधान पर हमला बताते हुए श्री गांधी ने 30 सितंबर को यहां इंडिया गठबंधन के नेताओं के साथ हुई बैठक का उल्लेख किया और कहा कि उसमें प्रत्येक भारतीय के मतदान के अधिकार की रक्षा पर विचार-विमर्श किया गया है।

उन्होंने परीक्षा में देरी, नियुक्तियां अटकने और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसे मुद्दों के साथ ही दिल्ली के सत्य निकेतन की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि शिक्षा बजट में कटौती की वजह से ऐसा हो रहा है और इन सब मामलों में जवाबदेही तय होनी चाहिए।

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राहुल गांधी क्या मैनेज हो गए?

यह बहुत दिलचस्प घटनाक्रम है और मजेदार यह है कि भाजपा और राइटविंग का इकोसिस्टम इसको हाईलाइट कर रहा है। यह सवाल पूछा जा रहा है कि जब राहुल गांधी ने अपनी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में देश के सबसे बड़े कारोबारी मुकेश अंबानी की तस्वीर लगा कर उन पर निशाना साधा तो फिर दूसरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में से उनकी तस्वीर क्यों हटा दी गई है? कई तरह की बातें कहीं जा रही हैं। ऊपर से फोन आने से लेकर किसी अन्य तरह से मैनेज होने की बात कही जा रही है। तभी सवाल है कि क्या राहुल गांधी मैनेज हो गए? राहुल ने अभी तक अपनी ऐसी ही इमेज बनाई है कि उनको कोई मैनेज नहीं कर सकता।

पर इस घटनाक्रम के बाद सवाल उठे हैं। असल में राहुल ने इंदौर में 19 सितंबर को ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम किया था। उस कार्यक्रम की थीम थी ‘सिस्टम बनाम स्टूडेंट’। उसमें राहुल ने छह लोगों की एक स्लाइड दिखाई, जिसमें भाजपा और संघ के शीर्ष नेताओं के अलावा दो कारोबारियों मुकेश अंबानी और गौतम अडानी की तस्वीर भी थी। रा

हुल ने दावा किया कि इन लोगों ने पूरे सिस्टम पर कब्जा कर रखा है। लेकिन चुनाव आयोग को लेकर खुलासे के बाद 24 सितंबर को राहुल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसकी थीम ‘डिस्ट्रॉयर्स ऑफ डेमोक्रेसी’ थी, उसमें जो स्लाइड दिखाई उसमें गौतम अडानी की तस्वीर तो थी लेकिन मुकेश अंबानी की तस्वीर नहीं थी। इसके बाद सवाल उठा कि राहुल ने उनकी तस्वीर क्यों हटा दी। कई लोगों ने लिखा कि परिवार से पुराने रिश्ते हैं। उनके अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से रिश्तों और निवेश का भी जिक्र हुआ। लेकिन असलियत का पत तब चलेगा, जब राहुल फिर कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे और ऐसी ही स्लाइड दिखाएंगे।

विपक्ष क्या साझा आंदोलन करेगा?

विपक्षी पार्टियों को एक के बाद एक ऐसे मुद्दे मिल रहे हैं, जिन पर वह साझा आंदोलन करे तो सरकार के खिलाफ नाराजगी को दिशा दे सकता है। ताजा मामला चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर हुए खुलासे का है। अंग्रेजी के अखबार ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ने एक खोजी रिपोर्ट में बताया है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर आयोग में एक राय नहीं है और इसे लेकर 10 महीने के अंदर दो चुनाव आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त से 14 बार अपनी आपत्ति दर्ज कराई। नाम जोड़ने वाले फॉर्म छह में किए गए बदलाव को तो दो आयुक्तों ने अवैध और अनधिकृत तक बताया। ऐसे ही ईआरओ को चुनाव आयोग का सेंट्रल डाटा बेस इस्तेमाल करने से रोकने और नाम काटने व जोड़ने के उनके मूल अधिकार को ही कमतर करने का आरोप लगाया। यह बहुत बड़ा मुद्दा है और अभी तक विपक्षी पार्टियां चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर जो आरोप लगाती थीं, इस रिपोर्ट से एक तरह से उनकी पुष्टि हुई है।

फिर भी ऐसा नहीं लग रहा है कि विपक्षी पार्टियां एकजुट होकर इसके खिलाफ आंदोलन करेंगी। जंतर मंतर का प्रदर्शन हो या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला हो सभी पार्टियां अपनी राजनीति अलग कर रही हैं। राहुल गांधी छात्रों की गूंज कार्यक्रम कर रहे हैं तो अखिलेश यादव अपने राज्य के चुनाव में लगे हैं। ममता बनर्जी अपने राज्य में फंसी हैं तो तेजस्वी यादव को किसी बात से मतलब नहीं है। झारखंड में हेमंत सोरेन सत्ता में हैं तो उनकी चिंताएं अलग हैं। एमके स्टालिन गठबंधन से अलग हो गए हैं तो शरद पवार की पोजिशन स्पष्ट नहीं है कि वे इंडिया ब्लॉक में हैं या तटस्थ हैं और एनडीए में जाने की तैयारी कर रहे हैं। रही बात उद्धव ठाकरे की तो उनके पास बहुत ताकत नहीं बची है। आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल के पास ताकत है और नैरेटिव बनाने की क्षमता भी है लेकिन उनको पंजाब में कांग्रेस से चुनाव लड़ना है और गोवा में कांग्रेस को नुकसान पहुंचाने की राजनीति करनी है।

जानकार सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस के कुछ नेता चाहते हैं कि विपक्षी पार्टियों के साथ बात हो और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर आई रिपोर्ट के आधार पर राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन छेड़ा जाए। मुश्किल यह है कि साझा आंदोलन का चेहरा कौन होगा? पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी के मामले में जैसे राहुल गांधी अभियान चला रहे हैं उसी आधार पर कांग्रेस चाहेगी कि इस आंदोलन का चेहरा भी राहुल हों। दूसरी ओर आम आदमी पार्टी के नेता चाहते हैं कि केजरीवाल आंदोलन का नेतृत्व करें। आप और ममता बनर्जी की पार्टी ने इस मामले में सबसे दो टूक स्टैंड लिया है। दोनों ने हाल के सभी चुनावों को रद्द करने और एसआईआऱ को भी रद्द करने की मांग की है। अगर कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियां इन दो मांगों को लेकर एकजुट होती हैं और देशव्यापी आंदोलन शुरू होता है तो उसका बड़ा असर होगा। एसआईआर के बाद मसौदा सूची में 13 करोड़ लोगों के नाम कटे हैं। हालांकि बाद में कुछ लोगों के नाम जुड़े लेकिन फिर भी करोड़ों लोगों के नाम कटे हैं। सो, एसआईआर को रद्द करना एक बड़े आंदोलन का मुद्दा हो सकता है। लेकिन मुश्किल यह है कि जून में बैठक के बाद ‘इंडिया’ ब्लॉक की फिर दोबारा बैठक नहीं हुई है। कौन बैठक की पहल करे, कौन एजेंडा तय करे, खर्च कौन जुटाए और कौन नेतृत्व करे ये ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब ‘इंडिया’ ब्लॉक के नेताओं के पास नहीं है। इसलिए ऐसा लग रहा है कि सब अपनी अपनी लड़ाई लड़ेंगे और संसद सत्र का इंतजार करेंगे कि उसमें इस मुद्दे को उठा कर जवाब मांगेंगे। सिर्फ संसद में विरोध प्रदर्शन करने की राजनीति से विपक्ष को कोई लाभ नहीं हो रहा है।

क्‍या राहुल गांधी ‘अंधभक्‍तों’ को भविष्‍य में अपने वोटर्स में तब्‍दील नहीं करना चाहते?

क्‍या राहुल गांधी ‘अंधभक्‍तों’ को भविष्‍य में अपने वोटर्स में तब्‍दील नहीं करना चाहते?

Rahul Gandhi

इंदौर में आयोजित छात्रों की गूंज कार्यक्रम में राहुल गांधी ने करीब 27 बार ‘अंधभक्‍त’ शब्‍द का इस्‍तेमाल किया। या शायद इससे भी ज्‍यादा बार। इस आयोजन को गैर-राजनीतिक कहकर प्रचारित किया जा रहा है, कांग्रेस इसे छात्रों से सीधा संवाद करना कहती है। अगर ऐसा है तो फिर राहुल गांधी अपनी स्‍पीच और इस पूरे संवाद में ‘अंधभक्‍त’ शब्‍द का इस्‍तेमाल क्‍यों करते हैं, यह शब्‍द तो पूरी तरह से सोशल मीडिया पर लड़ी जाने वाली पॉलिटिकल लड़ाई से निकलकर आया शब्‍द है।

दूसरी बात यह कि ‘अंधभक्‍त’ की श्रेणी में तो बहुत से ऐसे छात्र भी हैं जो अभी कॉलेज और यूनिवर्सिटीज में पढ़ रहे हैं और मोदी समर्थक हैं या किसी न किसी मुद्दे पर सरकार से अपनी सहमति रखते हैं। जबकि दूसरे कई ऐसे मुद्दें हैं, जिन पर सरकार से उनकी सहमति नहीं है, मसलन देश का एजुकेशन सिस्‍टम, बेरोगजारी और नीट घोटाला इत्‍यादि।

ऐसे में सवाल यह है कि क्‍या राहुल गांधी ऐसे ‘छात्रों’ को भविष्‍य में अपने वोटर्स में तब्‍दील नहीं करना चाहते हैं जो अभी किसी न किसी लिहाज से ‘अंधभक्‍त’ कहे या माने जा सकते हैं? क्‍या राहुल गांधी ने ऐसे ‘अंधभक्‍तों’ को हमेशा के लिए ‘अंधभक्‍त’ मान लिया है, जो आगे चलकर कभी अपना माइंडसेट बदल सकते हैं। क्‍या राहुल गांधी ऐसे लोगों को बार-बार अंधभक्‍त कहकर उन्‍हें और ज्‍यादा अपना विरोधी नहीं बना रहे हैं, जिनमें आगे चलकर राहुल का वोटर्स होने की संभावना छिपी है?

यहां राहुल गांधी की समझ और दूरदृष्‍टि को लेकर कुछ संशय पैदा होता है, वे यह मानकर चलते हैं कि जो ‘अंधभक्‍त’ हैं वो हमेशा ‘अंधभक्‍त’ रहेंगे, जबकि निजी-तौर पर मेरा यह मानना है और मैंने यह देखा है कि पिछले कुछ वक्‍त में मेरे इर्द-गिर्द सैकड़ों प्रो-बीजेपी लोगों का माइंडसेट बहुत हद तक बदला है और वे राहुल गांधी को एक दूसरा पक्ष या एक दूसरे विकल्‍प के तौर पर देखना चाहते हैं, बशर्ते वो विकल्‍प उनकी सोच पर खरा उतरता हो।

वे चाहते हैं कि सत्‍ता के सामने एक ऐसी दूसरी सोच उभरकर आए जो वर्तमान सरकार के ‘एल्‍गोरिदम’ का मुकाबला कर सके और वेलफेयर के मामलों में सरकार को चुनौती दे सके, लेकिन राहुल गांधी की तरफ से वो ‘फोर्स’ नहीं बन पा रहा है, जिसकी अनुभूति कर के वे राहुल गांधी नाम के दूसरे विकल्‍प को मन ही मन चाहने लगे और जब वोटिंग की कतार में खड़े हों तो न चाहते हुए भी उनका हाथ कमल के सामने ठप्‍पा लगाने के लिए मजबूर न हो।

हर मनुष्‍य के मन में एक गहरी लालसा दबी पड़ी होती है, ठीक ऐसे ही वोटर के मन में भी एक ऐसी ‘अनभिज्ञ’ इच्‍छा होती है, जिसे खंगालकर उसकी पड़ताल राहुल गांधी नहीं कर पा रहे हैं। संभवत: मोदी भक्‍त या प्रो-बीजेपी वोटर्स राहुल गांधी को वोट देने का पाप अपने सिर नहीं लेना चाहते हैं, वे चाहते हैं कि यह पाप करने का मौका उन्‍हें राहुल गांधी खुद दें, किंतु राहुल की तरफ से वो फिसलन नहीं बन पा रही है, जिसका इस्‍तेमाल प्रो-बीजेपी वोटर्स अपने और अपने बच्‍चों के फायदे के लिए कर सकें। इस पर भी राहुल गांधी सरकार के समर्थन में पोस्‍ट करने वाले लोगों को ‘अंधभक्‍त’ कहकर पहले से ही अपने लिए वोटर्स के तौर पर खारिज कर देते हैं। वे यह सीख ही नहीं पा रहे हैं कि जिस सच्‍चाई के साथ मंच पर ग्राफिक्‍स के जरिए वे एजुकेशन सिस्‍टम के फैल्‍योर, देश में बढ़ती बेराजगारी, नीट घोटाला, व्‍यापम स्‍कैम, स्‍कॉलरशिप की दिक्‍कतें, होस्‍टल की परेशानियां, बंद होते सरकारी स्‍कूल, विभागों में नियुक्‍तियां, नौकरी में भर्तियां और यूनिवर्सिटियों में भेदभाव के आकड़ें दिखा रहे हैं, वे बदलाव लाने के लिए काफी हैं। ये मुद्दें आम लोगों की नब्‍ज दबाने के लिए पर्याप्‍त हैं, लेकिन इनसे प्रभावित जनता का भरोसा जीतने की बजाए उन्‍हें ‘अंधभक्‍त’ कहकर उन्‍हें पहले से ही अपने से दूर कर रहे हैं, इस बात को पुख्‍ता मानते हुए कि ये अंधभक्‍त हैं तो कभी कांग्रेस को वोट नहीं देंगे। कभी बीजेपी समर्थकों ने भी तो कांग्रेस को वोट दिया होगा।

राहुल गांधी ये क्‍यों सोचते हैं कि जो अंधभक्‍त हैं, उनके बच्‍चे नीट की तैयारी नहीं कर रहे होंगे, आईआईटी के लिए नहीं जा रहे होंगे या किसी यूनिवर्सिटी में उनके साथ भेदभाव नहीं हुआ होगा, या ऐसे लोगों के बच्‍चों को किसी संस्‍थान में एडमिशन लेने या हॉस्‍टल में किसी तरह की दिक्‍कत नहीं हो रही होगी?

जब राहुल गांधी ऐसे मंच को गैर-राजनीतिक बताकर सिर्फ छात्रों की बात करते हैं तो उन्‍हें अंधभक्‍त जैसे राजनीतिक और दोयम दर्जे के शब्‍दों के इस्‍तेमाल से बचना चाहिए, तभी वो ऐसे परिजनों के दिलों पर भी दस्‍तक दे सकेंगे, जो अभी इस वक्‍त कहीं न कहीं वर्तमान सरकार से इत्‍तेफाक तो रखते हैं, लेकिन बेहतर भविष्‍य के लिए भी उम्‍मीदमंद भी हैं।

यह ठीक है कि राहुल गांधी के नाम पर इंदौर में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ में करीब एक लाख से ज्‍यादा लोग पहुंच थे। जिस इंदौर में कांग्रेस का एक भी विधायक नहीं जीता, उस शहर में इतने बड़े जनसैलाब की उम्‍मीद कांग्रेस को भी नहीं थी। यह जरूर है कि जगह की अनुमति देने के नाम पर बीजेपी ने अड़ंगे लगाकर जो खेल खेला उससे कांग्रेस को बहुत हद तक फायदा हुआ, लेकिन आयोजन स्‍थल पर जो दृश्‍य था, उसका पूरा श्रेय सिर्फ बीजेपी को ही नहीं जाता, इस भीड़ के पीछे राहुल गांधी एक बड़ी वजह है, क्‍योंकि वे जेन-जी या युवाओं से बेहद आसानी से जुड़ जाते हैं, युवा उनके आसपास बेहद कंफर्ट महसूस करते हैं। कुछ ऐसा ही नजारा भारत जोड़ो यात्रा के दौरान देखा गया था।

अब सवाल यह नहीं है कि बेहद विपरीत परिस्‍थितयों में भी राहुल की सभा में लाखों लोग उमड़ पड़े, सवाल यह है कि जब राहुल को देखने-सुनने के लिए इतनी संख्‍या में युवा पहुंच रहे हैं ये भीड़ वोटर्स में तब्‍दील क्‍यों नहीं होती। यहां तक तो राहुल ठीक ठीक पहुंच गए हैं, अब उन्‍हें इस ‘क्‍यों’ के आगे सोचना चाहिए।

जंतर मंतर बेअसर नहीं रहा है

दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ यानी डूसू के चुनाव में कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई के बुरी तरह से हारने और राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के चार में से तीन सीटों पर जीत जाने के बाद ऐसी व्याख्या की जा रही है, जैसे जंतर मंतर पर हुआ छात्रों का आंदोलन बेअसर रहा और देश का ‘जेन जी’ भाजपा और संघ के साथ है। लेकिन यह असली तस्वीर नहीं है। जंतर मंतर का आंदोलन बेअसर नहीं हुआ है और न छात्रों का गुस्सा शांत हुआ है। उन्होंने अलग तरह से अपने गुस्से को जाहिर किया है। यह साफ दिख रहा है कि एबीवीपी के लिए कोई लहर नहीं थी। वह प्रबंधन और विपक्ष के वोटों के बंटवारे की वजह से जीत गई। यह कोई निर्णायक जीत नहीं है। अगर कोई लहर होती तो ऐसा नहीं होता कि उपाध्यक्ष के पद पर उसका उम्मीदवार 16 हजार वोट से हारता। एबीवीपी ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव का चुनाव भी गिर पड़ के जैसे तैसे ही जीता है।

तभी इस पूरे मामले में कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियों की बड़ी जिम्मेदारी बनती है। अगर विपक्ष ने तालमेल कर लिया होता और एक होकर लड़ते तो डूसू की सभी चार सीटों पर विपक्ष की जीत होती। सोचें, कांग्रेस के सुप्रीम लीडर राहुल गांधी इन दिनों ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम कर रहे हैं लेकिन देश की छात्र राजनीति का प्रतिनिधित्व करने वाले दिल्ली यूनिवर्सिटी के चुनाव में दिलचस्पी नहीं ली। उन्होंने सीपीआई माले के छात्र संगठन आईसा की नेहा बोरा के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। उनसे तालमेल की बात वे कर सकते थे। वे सीधे दीपांकर भट्टाचार्य से भी बात कर सकते थे। लेकिन लेफ्ट को गठबंधन बना कर अलग लड़ने दिया गया। तभी खराब माहौल के बावजूद एबीवीपी जीती।

आंकड़ों के हिसाब से देखें तो अध्यक्ष पद पर यश डबास को 24,576 और विजय शंकर मीणा को 22,523 वोट मिले। यश 2,053 वोट से जीते, जबकि लेफ्ट की अनन्या रतूड़ी को 5,377 वोट मिले। सचिव पद पर एबीवीपी की जीत सात हजार के करीब वोट से हुई है, जबकि लेफ्ट को 87 सौ वोट मिला। ऐसे ही संयुक्त सचिव पद पर एबीवीपी ने सपा के विशेष यादव को 837 वोट से हराया। एबीवीपी उम्मीदवार को 16,615 वोट मिले, जबकि कांग्रेस, सपा और लेफ्ट को मिला कर इसके दोगुने से ज्यादा करीब 37 हजार वोट मिले।

राहुल के इंदौर कार्यक्रम के बाद बढ़ा विवाद

नई दिल्ली। इंदौर में राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के बाद विवाद तेज हो गया है। भाजपा ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर बड़ा हमला किया है। राहुल गांधी के मंच पर एक कॉमेडियन की मौजूदगी और नरेंद्र मोदी का मजाक बनाए जाने को ल कर भाजपा हमलावर है।  भाजपा ने कांग्रेस को जोकरों की पार्टी कहा है। यहां तक कि भाजपा ने यह आरोप भी लगाया है कि राहुल के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी की मां का अपमान किया गया।

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, ‘कांग्रेस पार्टी कॉमेडियंस और जोकर्स की पार्टी बन गई है। वे हमेशा के लिए बाहर हो गए हैं… रेस्ट इन पीस’। केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने भी कांग्रेस पर हमला किया और एक्स पर लिखा, ‘राहुल और कांग्रेस पार्टी नैतिक दिवालियापन के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। छात्र संवाद का इस्तेमाल पीएम मोदी की दिवंगत मां का मजाक उड़ाने और उनका अपमान करने के लिए करना बुनियादी मानवीय संवेदना और राजनीतिक संस्कृति की चौंकाने वाली कमी दिखाता है’।

दूसरी ओर कांग्रेस ने इसका जवाब दिया और भाजपा व आरएसएस पर शिक्षा व्यवस्था को खोखला और भ्रष्ट करने का आरोप लगाया। कांग्रेस महासचिव और संचार विभाग के प्रमुख जयराम रमेश ने कहा कि राहुल गांधी छात्रों के साथ खड़े हैं, इसलिए सरकार से सवाल पूछ रहे हैं और जवाबदेही मांग रहे हैं। गौरतलब है कि राहुल गांधी ने शनिवार को इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम की थीम ‘सिस्टम बनाम स्टूडेंट्स’ रखी गई थी। यह कार्यक्रम इससे पहले कोटा, देहरादून, प्रयागराज और पुणे में हो चुका है। इंदौर में छात्रों ने शिक्षा, भर्ती, परीक्षा, आरक्षण, हॉस्टल और रोजगार से जुड़े मुद्दे उठाए।

इस कार्यक्रम में राहुल गांधी ने कहा कि शिक्षा बच्चों का अधिकार है, कोई अहसान या सुविधा नहीं। कार्यक्रम में स्टैंडअप कॉमेडियन पुलकित मणि ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अंदाज से मिलते जुलते हाव भाव और संवाद किए। राहुल गांधी भी उनके साथ हंसते नजर आए। वे राहुल से जबरदस्ती गले लगते दिखे, जिसक बाद राहुल ने परेशान होने की एक्टिंग की। गौरतलब है कि इस तरह का एक एक्ट राहुल गांधी और पूर्व सांसद संदीप दीक्षित पहले दिल्ली में भी कर चुके हैं। उसे इंदौर में एक स्टैंडअप कॉमेडियन के जरिए दोहराया गया। उसी एक्ट को लेकर भाजपा सबसे ज्यादा आहत है और कांग्रेस पर हमलावर है।

Mumbai Accident: मुंबई में दर्दनाक सड़क हादसा! तेज रफ्तार BMW ने पैदल चलने वालों को मारी टक्कर, 3 की मौत, 1 की हालत गंभीर

Mumbai Accident: मुंबई के कोस्टल रोड पर रविवार सुबह तेज रफ़्तार एक BMW कार के टक्कर मारने से तीन पैदल चलने वालों की मौत हो गई। जबकि एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया। यह हादसा रविवार तड़के कोस्टल रोड पर लाला कॉलेज के सामने लोटस जेटी के पास हुआ। कोस्टल रोड कंट्रोल रूम से मिली जानकारी के मुताबिक, BMW मरीन ड्राइव से हाजी अली की ओर जा रही थी, तभी यह हादसा हुआ। हादसे की वजह तेज रफ़्तार बताई जा रही है। घायल चार लोगों को इलाज के लिए नायर अस्पताल ले जाया गया। नायर अस्पताल के चीफ मेडिकल ऑफिसर (CMO) से मिली जानकारी के अनुसार, अस्पताल लाए गए चार लोगों में से तीन को मृत घोषित कर दिया गया।

मुंबई पुलिस ने एक बयान में कहा, “20 सितंबर को सुबह करीब 5:20 बजे मुंबई कोस्टल रोड पर लोटस जेटी के पास एक BMW कार के दुर्घटनाग्रस्त होने से तीन लोगों की मौत हो गई और एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस ने बताया कि कार मरीन ड्राइव से हाजी अली की ओर जा रही थी, तभी तेज रफ़्तार के कारण ड्राइवर ने कथित तौर पर गाड़ी पर से नियंत्रण खो दिया। चारों को नायर अस्पताल ले जाया गया।” मृतकों की पहचान शनाय गज्जल और धैर्य सेठ के तौर पर हुई है। एक अन्य 20 वर्षीय युवक को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हादसे के बारे में और जानकारी का इंतजार है।

गणपति पंडाल के पास करंट लगने से आठ वर्षीय लड़की समेत दो लोगों की मौत

इस बीच, मुंबई के लालबाग इलाके में शनिवार देर रात गणपति पंडाल के पास करंट लगने से आठ वर्षीय लड़की समेत दो लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। अधिकारियों ने बताया कि यह घटना रात करीब दो बजकर 20 मिनट पर कालाचौकी स्थित दत्ताराम लाड मार्ग पर कालाचौकी विभाग सार्वजनिक उत्सव मंडल के पास हुई। उस समय गणपति उत्सव के कारण लालबाग इलाके में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।

नगर निकाय के अधिकारियों ने बताया कि घटना की सूचना मुंबई दमकल विभाग (एमएफबी) को रात दो बजकर 42 मिनट पर मिली। इसके बाद दमकल विभाग, पुलिस, बेस्ट (बृहन्मुंबई विद्युत आपूर्ति और परिवहन) और महानगरपालिका के वार्ड कार्यालय के कर्मचारियों को मौके पर भेजा गया। पुलिसकर्मियों से मौके पर मिली जानकारी के अनुसार, पांच घायलों को भायखला स्थित मसीना अस्पताल ले जाया गया। जबकि अन्य घायलों को परेल स्थित ग्लोबल अस्पताल में भर्ती कराया गया।

मसीना अस्पताल में आठ वर्षीय राघनी घनश्याम यादव को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। 19 वर्षीय किरण अकबर नाइक, 19 वर्षीय तन्वी नरश हांडे, 19 वर्षीय साहिल संदीप तारे और 12 वर्षीय रूही सिंह का अस्पताल में उपचार हो रहा है। उनकी हालत के बारे में जानकारी अभी नहीं मिली है। बाद में एक अधिकारी ने एक अन्य मौत की भी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि ग्लोबल अस्पताल में भर्ती एक महिला ने भी चोटों के कारण दम तोड़ दिया। उसकी पहचान और अन्य डिटेल्स की जानकारी अभी नहीं मिल सकी है।

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छह लोगों का सिस्टम पर कब्जा

इंदौर। राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश के इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में नेता, उद्योगपति और अधिकारी के नेक्सस को सिस्टम बताते हुए कहा कि भारत के सिस्टम पर छह लोगों का कब्जा है। उन्होंने मंच पर बड़ी स्क्रीन के ऊपर छह लोगों की तस्वीर दिखाई और दावा किया कि ये छह लोग देश का सिस्टम चला रहे हैं। इनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल और दो कारोबारी गौतम अडानी व मुकेश अंबानी की तस्वीर थी।

कार्यक्रम के दौरान तीन छात्रों ने राहुल से सिस्टम की बात की। इसका हवाला देते हुए राहुल ने स्क्रीन पर स्लाइड दिखाई और कहा, तीन फ्रेंड्स ने सिस्टम की बात की। सिस्टम क्या है, सिस्टम में कई लेयर हैं, टॉप लेवल पर छह लोग बैठे हैं। इसे मोदी चलाते हैं’। उन्होंने सबके बारे में बताते हुए कहा, ‘धमकाने का काम, उन्हें मारने का काम, पैलेट गन मारने का काम शाह करते हैं। अजित डोवाल कहते हैं कि देश को कंट्रोल करना है तो पांच सौ लोगों को कंट्रोल करने की जरूरत है। ये देश के कम्युनिकेशन पर कब्जा किए हैं। ये फोन टैपिंग कराते हैं, ये मोदी व शाह को सूचना देते हैं। आपके फोन के अंदर डोवाल बैठे हैं’।

बाकी तीन लोगों के बारे में राहुल ने कहा, ‘बीच में भागवत जी है जो विचारधारा की बात करते हैं, जिनके संगठन को हजारों करोड़ मिलते हैं। वहीं दूसरी तरफ अंबानी और अडानी हैं। ये लोग फाइनेंस करते हैं। पैसा घुमाकर भाजपा को दिया जाता है’। उन्होंने आगे कहा, ‘इस लेयर के नीचे हर संस्था को कैप्चर करके रखा है। इसमें मीडिया, एंटरनटेनमेंट, न्याय सभी में एक एक आदमी बिठा रखा है। जैसे देश में कई क्रिकेटर्स है लेकिन सिस्टम ने शाह के बेटे को क्रिकेट का ठेका दे दिया है। यहां डेमोक्रेसी की बात होती है लेकिन सिस्टम अपने आदमी को बिठा देता है’।

सिस्टम बनाम स्टूडेंट्स: राहुल

इंदौर। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की इंदौर में आखिरकार सभा हुई। बड़ी जद्दोजहद और बहुत सारी पाबंदियों के साथ राहुल को इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम करने की अनुमति मिली। शनिवार की शाम को उन्होंने बड़ी संख्या में मौजूद युवाओं और छात्रों को संबोधित किया। राहुल ने कहा कि उनके कार्यक्रम की थीम है, ‘सिस्टम बनाम स्टूडेंट्स’! राहुल ने अपने भाषण में कहा कि सिस्टम पर छात्रों को भरोसा नहीं है और सिस्टम भी छात्रों की बजाय अंधभक्तों पर ज्यादा ध्यान दे रहा है। राहुल ने अपने भाषण में असली छात्र और अंधभक्त के बीच का अंतर भी समझाया।

इंदौर के आईडीए मैदान पर राहुल के कार्यक्रम में करीब 25 हजार युवा पहुंचे थे। कांग्रेस का दावा है कि दो लाख से ज्यादा युवाओं और छात्रों ने इसके लिए पंजीकरण कराया था। कांग्रेस ने 35 साल से कम उम्र के युवाओं को ही इस कार्यक्रम में प्रवेश दिया था। उनके साथ सवाल-जवाब के दौरान राहुल ने कहा, ‘सिस्टम नहीं चाहता कि स्टूडेंट्स सवाल पूछें, इसलिए वह अंधभक्त पैदा करता है’। उन्होंने कहा, ‘छात्रों का सिस्टम से भरोसा उठ गया है, हालांकि कुछ जगह कैंडिडेट्स की भी गलती है’। इस पर सामने बैठे छात्रों ने जवाब दिया, ‘सर, हम सिस्टम से हार गए’।

राहुल इससे पहले राजस्थान से लेकर उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश सहित चार जगह ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम कर चुके हैं। इंदौर में उनका पांचवां कार्यक्रम था। इसमें उन्होंने सरकार को सिस्टम बताते हुए उस पर हमला किया। उन्होंने कहा, ‘सिस्टम को चलाने वालों के बच्चों को देखिए वे इंदौर में पढ़ रहे हें या विदेश में? ये देश के युवाओ को अंधभक्त बनाना चाहते हें। अपने बच्चों को बाहर भेजेंगे पढ़ने के लिए’। राहुल ने कहा, ‘हमने शुरुआत में कहा कि स्टूडेंट देश को बनाता है, शिक्षा देश की नींव है, यह हर स्टूडेंट का हक है। स्कूल मिडडे मील से लेकर कॉलेज और कॉलेज से रोजगार तक पहुंचाना, ये सरकार का काम है’।

राहुल गांधी ने आगे कहा, ‘अब इंटरेस्टिंग बात बताता हूं। सिस्टम को स्टूडेंट से खतरा है। क्यों खतरा है, क्योंकि स्टूडेंट सवाल पूछता है’। उन्होंने कहा, ‘स्टूडेंट सवाल करता है कि अमित शाह जी के बेटे क्रिकेट एसोसिएशन के चेयरमैन कैसे बन गए? स्टूडेंट पूछता है कि हिंदुस्तान के पूरे बिजनेस को दो लोगों ने कैसे कैप्चर कर लिया? स्टूडेंट यह भी पूछता है कि ज्यूडिशियरी और बाकी संस्थाएं अपना काम क्यों नहीं करतीं और इलेक्शन कमीशन अपना काम क्यों नहीं करता’?

Rahul Gandhi: ‘आप किसी की नहीं, खुद की हैं’, महिलाओं की पहचान और आजादी पर बोले राहुल गांधी

Rahul Gandhi: कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शनिवार को पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि महिलाएं भारत की सबसे बड़ी ताकत और संपत्ति हैं। उन्होंने तर्क दिया कि महिलाओं को केवल पुरुषों के साथ उनके रिश्तों के आधार पर परिभाषित नहीं किया जाना चाहिए या उन्हें पारंपरिक पारिवारिक भूमिकाओं तक ही सीमित नहीं रखा जाना चाहिए।

गांधी ने कहा कि महिलाएं पुरुषों की तुलना में “अधिक संवेदनशील, अधिक सौम्य, अधिक दयालु और अधिक दूरदर्शी” होती हैं और उन्होंने महिलाओं की व्यक्तिगत आकांक्षाओं, अनुभवों और महत्वाकांक्षाओं को देश की एक बड़ी ताकत बताया।

गांधी ने कहा, “भारत की सबसे बड़ी ताकत क्या है? मैं इस बारे में बिल्कुल स्पष्ट हूं। भारत की सबसे बड़ी ताकत देश की 70 करोड़ महिलाओं की अनूठी यात्राएं, अनूठी कल्पनाएं और अनूठे सपने हैं जिन्हें वे जी रही हैं।”

उन्होंने कहा कि महिलाओं को पुरुषों के साथ अपने रिश्तों से मिली पहचान से परे अपनी पहचान बनाने में सक्षम होना चाहिए, साथ ही उन्होंने यह भी माना कि बेटी, पत्नी या मां होना अपने आप में कोई समस्या नहीं है।

गांधी ने कहा, “जब भी मैं पुरुषों से बात करता हूं, तो पाता हूं कि महिलाओं को अक्सर सिर्फ तीन श्रेणियों में रखा जाता है: बेटी, पत्नी या मां।”

उन्होंने आगे कहा, “इनमें से किसी भी पहचान में कोई बुराई नहीं है। लेकिन ये आपकी एकमात्र पहचान नहीं हो सकतीं।”

रिश्तों से आगे महिलाओं की अपनी पहचान जरूरी: राहुल गांधी

गांधी ने कहा कि महिलाएं प्रोफेशनल, खिलाड़ी, लीडर, क्रिएटर और उद्यमी भी होती हैं, लेकिन अक्सर उनकी पहचान को पुरुषों के साथ उनके रिश्तों तक ही सीमित कर दिया जाता है।

उन्होंने आगे तर्क दिया कि परिवार से जुड़ी ये तीन आम पहचानें ही महिलाओं को किसी पुरुष के साथ उनके रिश्ते के जरिए परिभाषित करती हैं। यानी एक महिला को उसकी अपनी पहचान रखने वाले एक व्यक्ति के बजाय बेटी, पत्नी या मां के रूप में देखा जाता है।

कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर शेयर की राहुल गांधी की बातें

कांग्रेस ने भी ‘CONTROL’ (नियंत्रण) थीम के तहत X पर गांधी की ये बातें साझा कीं और महिलाओं से पूछा कि क्या उन्हें लगता है कि समाज उन पर नियंत्रण करने की कोशिश करता है।

राहुल गांधी ने कहा, “किसी को नियंत्रित करने के चार तरीके होते हैं- 1. हिंसा, 2. अपमान, 3. समय और 4. कंट्रोल।”

उन्होंने कहा कि महिलाओं को नियंत्रित करने की इस कोशिश को अक्सर उनकी सुरक्षा और भलाई की चिंता के नाम पर सही ठहराया जाता है।

राहुल गांधी ने कहा, “इस दबाव को चिंता का नाम दे दिया जाता है। कहा जाता है- ‘हमें आपकी बहुत चिंता है, इसलिए हमें आपको नियंत्रित करने की जरूरत है।’”

कांग्रेस ने अपनी पोस्ट में महिलाओं की आवाजाही, फैसले लेने की आजादी, आर्थिक स्थिति और अवसरों तक पहुंच से जुड़े कुछ आंकड़े भी शेयर किए।

पोस्ट के मुताबिक, 60% महिलाएं अकेले घर से बाहर नहीं जा सकतीं, जबकि 45% महिलाएं शादी या घर की जिम्मेदारियों के कारण अपनी पढ़ाई छोड़ देती हैं। पोस्ट में यह भी कहा गया कि सिर्फ 8% महिलाओं के पास जमीन का मालिकाना हक है।

राहुल गांधी ने गिनाए महिलाओं के खिलाफ हिंसा के तीन रूप

गांधी ने हिंसा के उन तीन रूपों के बारे में भी बात की जो महिलाओं को आगे बढ़ने से रोकते हैं – शारीरिक हिंसा, “मौके से जुड़ी हिंसा” (opportunity violence) और “आर्थिक हिंसा”।

शारीरिक हिंसा के तहत, कांग्रेस ने हर साल 4.5 लाख बेटियों के भ्रूण हत्या का शिकार होने, 80% महिलाओं के उत्पीड़न, 29% महिलाओं के खिलाफ शारीरिक हिंसा और 6% महिलाओं के साथ बलात्कार का जिक्र किया।

“मौके से जुड़ी हिंसा” के बारे में पोस्ट में कहा गया है कि सुरक्षा के नाम पर 50% महिलाओं को शिक्षा या नौकरी से वंचित कर दिया जाता है।

“आर्थिक हिंसा” के तहत, कांग्रेस ने महिलाओं के लिए सुरक्षित यात्रा के नाम पर हर साल 17,500 रुपये के अतिरिक्त खर्च का जिक्र किया।

राहुल गांधी ने मनुस्मृति का जिक्र किया

इसके बाद गांधी ने महिलाओं की आजादी पर अपनी बात रखते हुए मनुस्मृति का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “मनुस्मृति में लिखा है कि महिला को कभी भी आजाद नहीं होना चाहिए।”

अपनी मूल बातों में, गांधी ने मनुस्मृति के एक अंश का भी हवाला दिया: “बचपन में, महिला अपने पिता के अधीन होती है। जवानी में, वह अपने पति के अधीन होती है। पति की मृत्यु के बाद, वह अपने बेटों के अधीन होती है। महिला को कभी भी आजाद नहीं होना चाहिए।”

गांधी ने कहा, “यह मनुस्मृति का सीधा उद्धरण है, और ये शब्द शर्मनाक हैं, क्योंकि ये शब्द कभी भी नहीं कहे जाने चाहिए थे।”

इसके विपरीत, उन्होंने अपनी सोच रखते हुए कहा कि महिलाओं को स्वतंत्र होना चाहिए, अपने हक के लिए आवाज उठानी चाहिए और अपनी क्षमता पर भरोसा रखना चाहिए।

राहुल गांधी ने कहा, “मेरा मानना है कि इस देश की सबसे बड़ी ताकत यही है कि हमारी महिलाएं स्वतंत्र हों, अपने लिए खड़ी हों और खुद पर भरोसा रखें।”

राहुल गांधी ने साफ किया कि महिलाओं की आजादी का मतलब यह नहीं है कि उनके परिवार से रिश्ते नहीं हो सकते। उनका कहना था कि ये रिश्ते किसी महिला की पहचान तय नहीं करने चाहिए और न ही इसका मतलब यह होना चाहिए कि वह किसी दूसरे व्यक्ति की संपत्ति है।

उन्होंने कहा, “आपके पिता, भाई, पति या बेटे के साथ रिश्ते हो सकते हैं, लेकिन आप उनकी नहीं हैं। आप खुद की हैं।”

राहुल गांधी ने कहा कि महिलाएं अपने पिता, भाई, पति और बेटों के साथ रिश्ते निभाते हुए भी अपनी अलग पहचान बनाए रख सकती हैं और अपनी जिंदगी से जुड़े फैसले खुद ले सकती हैं।

महिलाओं को अपने फैसलों की आजादी

अपने संबोधन में राहुल गांधी ने महिला सशक्तिकरण को सिर्फ राजनीतिक प्रतिनिधित्व या पारिवारिक पहचान तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने महिलाओं की आने-जाने की आजादी, शिक्षा, रोजगार, आर्थिक अधिकार, सुरक्षा और अपनी पसंद से फैसले लेने की स्वतंत्रता को भी उतना ही जरूरी बताया।

उनकी बातों में सामाजिक नियंत्रण और सुरक्षा की भाषा के बीच संबंध भी दिखाया गया। कांग्रेस की पोस्ट में कहा गया कि महिलाओं को हिंसा, अनादर, समय की पाबंदी और नियंत्रण के जरिए सीमित किया जाता है, जबकि ऐसी पाबंदियों को उनकी सुरक्षा की चिंता के तौर पर पेश किया जा सकता है।

गांधी ने महिलाओं को पुरुषों की तुलना में “अधिक संवेदनशील, अधिक सौम्य, अधिक दयालु और अधिक दूरदर्शी” बताया और साथ ही यह भी कहा कि महिलाएं भारत की ताकत के सबसे महत्वपूर्ण स्रोतों में से एक हैं।

उन्होंने कहा कि उनकी 70 करोड़ महिलाओं की “अनोखी यात्राएं”, “अनोखी कल्पनाएं” और “अनोखे सपने” देश की सबसे बड़ी संपत्ति हैं। साथ ही, उन्होंने महिलाओं से आग्रह किया कि वे पारिवारिक रिश्तों या सामाजिक अपेक्षाओं को अपनी पहचान का एकमात्र आधार न बनने दें।

पुणे में राहुल गांधी के भाषण का मुख्य संदेश यह था कि महिलाएं बेटी, पत्नी और मां बने रहने के साथ-साथ प्रोफेशनल, खिलाड़ी, लीडर, क्रिएटर और उद्यमी भी हो सकती हैं – और राहुल गांधी के शब्दों में, आखिरकार “खुद की अपनी” हो सकती हैं।

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