अजय राय की छुट्टी! कांग्रेस ने आराधना मिश्रा ‘मोना’ को सौंपी यूपी की कमान, जानिए कौन हैं ये, क्यों बनाया गया इन्हें अध्यक्ष?

उत्तर प्रदेश में संगठन को नए सिरे से मजबूत करने और यूपी विधानसभा चुनाव 2027 की राजनीतिक चुनौतियों से निपटने के लिए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने बड़ा संगठनात्मक बदलाव किया है। कांग्रेस आलाकमान ने अजय राय को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाते हुए उत्तर प्रदेश विधानमंडल दल की नेता और वरिष्ठ विधायक आराधना मिश्रा ‘मोना’ को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष बनाया है। लंबे समय से उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय और लगातार तीन बार विधायक चुनकर विधानसभा पहुंचने वाली आराधना मिश्रा को यह जिम्मेदारी सौंपकर कांग्रेस ने प्रदेश में अपने पारंपरिक वोट बैंक और महिला नेतृत्व दोनों को एक साथ साधने का बड़ा राजनीतिक दांव खेला है।

कौन हैं आराधना मिश्रा ‘मोना’? जानिए पारिवारिक और व्यक्तिगत पृष्ठभूमि

20 अप्रैल 1974 को प्रयागराज (तत्कालीन इलाहाबाद) में जन्मी आराधना मिश्रा ‘मोना’ उत्तर प्रदेश के दिग्गजों में गिने जाने वाले वरिष्ठ कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी की बेटी हैं। प्रमोद तिवारी का नाम उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक मिसाल माना जाता है। प्रमोद तिवारी ने प्रतापगढ़ जिले की ऐतिहासिक रामपुर खास विधानसभा सीट से लगातार 9 बार चुनाव जीतकर रिकॉर्ड कायम किया था। आराधना मिश्रा की शुरुआती और उच्च शिक्षा प्रयागराज में ही हुई। उन्होंने 1997 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बी.कॉम की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन किया और मानवाधिकार विषय की पढ़ाई भी पूरी की। चुनावी हलफनामे के मुताबिक वह एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं और उनकी कुल घोषित संपत्ति लगभग 34.1 करोड़ रुपये है। इसमें 6.1 करोड़ रुपये की चल संपत्ति और 28 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति शामिल है।

त्रिस्तरीय पंचायत से विधानमंडल तक: ऐसा रहा राजनीतिक सफर

आराधना मिश्रा को राजनीति विरासत में जरूर मिली, लेकिन उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत धरातल से की। उन्होंने वर्ष 2001 से लगातार तीन कार्यकाल के लिए ब्लॉक प्रमुख के रूप में काम किया और स्थानीय निकायों में काम करने का लंबा अनुभव हासिल किया। वह ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत मनरेगा की उत्तर प्रदेश राज्य निगरानी एवं सतर्कता समिति की सदस्य भी मनोनीत की गईं। इसके अलावा 2012 के विधानसभा चुनाव में वह कांग्रेस की मीडिया कैंपेन कमेटी की सक्रिय सदस्य रहीं।

वर्ष 2014 में जब उनके पिता प्रमोद तिवारी राज्यसभा के लिए चुने गए, तब रामपुर खास सीट पर हुए उपचुनाव में आराधना मिश्रा ने जीत दर्ज कर पहली बार उत्तर प्रदेश विधानसभा में कदम रखा। वर्ष 2017 की प्रचंड बीजेपी लहर में भी उन्होंने रामपुर खास सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा। वह उन चुनिंदा 7 कांग्रेस विधायकों में शामिल थीं जो उस चुनाव में जीत दर्ज कर पाए थे। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने फिर से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार को 14000 से अधिक वोटों से हराकर लगातार तीसरी बार जीत हासिल की।

2019 से संभाल रही हैं विधानमंडल दल की नेता की कमान

आराधना मिश्रा ‘मोना’ की सांगठनिक क्षमता को देखते हुए कांग्रेस आलाकमान ने अक्टूबर 2019 में उन्हें उत्तर प्रदेश विधानमंडल दल का नेता नियुक्त किया था। इसके बाद से वह उत्तर प्रदेश विधानसभा के भीतर कांग्रेस की मुख्य रणनीतिकार बनी हुई हैं। इसके अलावा वह ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) के प्रमुख पैनलों की सदस्य हैं और राष्ट्रीय टीवी बहसों में पार्टी का मजबूती से पक्ष रखती रही हैं।

क्यों बनाया गया उत्तर प्रदेश कांग्रेस का नया अध्यक्ष?

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस द्वारा आराधना मिश्रा ‘मोना’ को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के पीछे कई अहम रणनीतिक और राजनीतिक समीकरण काम कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण मतदाताओं का एक बड़ा प्रभाव रहा है। आराधना मिश्रा एक प्रमुख और स्थापित ब्राह्मण चेहरा हैं। कांग्रेस लंबे समय से अपने पारंपरिक ब्राह्मण वोट बैंक को वापस जोड़ने की कोशिश कर रही है, ऐसे में उन्हें कमान सौंपना एक बड़ा राजनीतिक कदम माना जा रहा है।

महिला नेतृत्व को बढ़ावा

कांग्रेस पार्टी उत्तर प्रदेश में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर लगातार जोर देती रही है। आराधना मिश्रा राज्य की अग्रिम पंक्ति की महिला नेताओं में शामिल हैं। इसके अलावा प्रतापगढ़ और आसपास के इलाकों में प्रमोद तिवारी का मजबूत जनाधार रहा है। आराधना मिश्रा ने उस विरासत को न सिर्फ संभाला है बल्कि तीन बार लगातार चुनाव जीतकर अपनी खुद की मजबूत जनस्वीकार्यता भी साबित की है। ब्लॉक स्तर से लेकर केंद्रीय नेतृत्व तक काम करने का उनका लंबा अनुभव पार्टी संगठन को नए सिरे से खड़ा करने में मददगार साबित हो सकता है। कांग्रेस आलाकमान को उम्मीद है कि आराधना मिश्रा के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में पार्टी एक नए उत्साह और मजबूत रणनीति के साथ जमीन पर उतरेगी।

Vande Bharat Update: क्या वाराणसी-नई दिल्ली वंदे भारत ट्रेन को सप्ताह में सातों दिन चलाया जाएगा? अब इस नई तैयारी में उत्तर रेलवे

वाराणसी। वंदे भारत से सफर करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। वाराणसी और नई दिल्ली के बीच चलने वाली देश की पहली वंदे भारत एक्सप्रेस (22435/22436) को अब हफ्ते के सातों दिन चलाने की तैयारी है। उत्तर रेलवे ने दोनों ट्रेनों के ऑफ-डे खत्म करने का प्रपोजल तैयार किया है। इसका मकसद ट्रेनों को पूरे सप्ताह चलाना है, ताकि पैसेंजर को किसी एक दिन सर्विस बंद होने की परेशानी न हो।

अभी यह ट्रेन सप्ताह में 6 दिन चलती है और गुरुवार को इसका संचालन नहीं होता। अगर उत्तर रेलवे के प्रपोजल को मंजूरी मिलती है तो गुरुवार को भी यात्रियों को इस ट्रेन की सर्विस मिल सकेगी।

हफ्ते में एक दिन क्यों रुकती है वंदे भारत?

वाराणसी-नई दिल्ली रूट पर अभी दो वंदे भारत ट्रेनें चलती हैं।

– 22435/22436 – गुरुवार को बंद

– 22415/22416 – मंगलवार को बंद

ये दोनों ट्रेनें प्रयागराज होकर जाती हैं, इसलिए प्रयागराज के यात्रियों को भी इन दो दिनों में वंदे भारत नहीं मिलती। बंद रहने की वजह मेंटेनेंस है।

मेंटेनेंस के लिए तैयार किया गया नया प्लान

गुरुवार को भी ट्रेन चलाने के लिए मेंटेनेंस की समस्या को दूर करना जरूरी था। इसके लिए उत्तर रेलवे ने 20 कोच वाले एक अतिरिक्त रैक के रोटेशन की प्लानिंग बनाई है।

प्लान के मुताबिक, जिस दिन रैक की मेंटेनेंस होगी, उस दिन अतिरिक्त रैक को रूट पर चला दिया जाएगा। इससे मेंटेनेंस भी होता रहेगा और यात्रियों को ट्रेन की सर्विस भी बंद नहीं करनी पड़ेगी।

दिवाली से पहले मिल सकती है हरी झंडी

इस प्रपोजल की समीक्षा उत्तर रेलवे के दिल्ली मंडल में चल रही है। रेलवे के सूत्रों के मुताबिक, त्योहारों के सीजन और दिवाली से पहले इस पर फैसला लिया जा सकता है। मंजूरी मिलते ही वाराणसी-प्रयागराज-नई दिल्ली रूट पर वंदे भारत पूरे हफ्ते दौड़ेगी।

दिवाली-छठ पर नहीं होगी टिकट की मारामारी से राहत देने के लिए उत्तर रेलवे चलाएगा 11 जोड़ी विशेष ट्रेनें, देखिए पूरी लिस्ट

नई दिल्ली। दिवाली और छठ पर घर जाने वाले पैसेंजर के लिए रेलवे ने स्पेशल ट्रेनों का इंतजाम किया है। उत्तर रेलवे अलग-अलग रूट पर 11 जोड़ी स्पेशल ट्रेनें चलाने वाला है। जिससे दिवाली और छठ के दौरान घर जाने वाले पैसेंजर को सफर में आसानी हो सकती है।

वाराणसी-जम्मू के बीच चलेगी स्पेशल ट्रेन

वाराणसी-जम्मू तवी स्पेशल ट्रेन (04610/04609) वीकली चलेगी। जम्मू तवी से यह ट्रेन 1 अक्टूबर से 26 नवंबर तक और वाराणसी से 2 अक्टूबर से 27 नवंबर तक चलेगी। रास्ते में पठानकोट कैंट, जालंधर कैंट, लखनऊ और सुल्तानपुर के साथ ही कई स्टेशनों पर इसका हाल्ट भी होगा। श्री माता वैष्णो देवी कटरा के लिए भी स्पेशल ट्रेन चलाई जाएगी। इस ट्रेन (04604/04603) के 18 ट्रिप लेकर चलेगी। यह कटरा से 4 अक्टूबर से 29 नवंबर और वाराणसी से 5 अक्टूबर से 30 नवंबर तक चलने वाली है।

नई दिल्ली और श्री माता वैष्णो देवी कटरा के बीच भी स्पेशल ट्रेन (04081/04082) चलेगी। इसकी 28 ट्रिप होगी। यह ट्रेन नई दिल्ली से 12 से 25 अक्टूबर और कटरा से 13 से 26 अक्टूबर तक रोज चलने वाली है।

बिहार और पूर्वी भारत के लिए भी ट्रेनें

बिहार और पूर्वी भारत जाने वाले पैसेंजर के लिए भी कई स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएंगी। शकूरबस्ती-दरभंगा स्पेशल ट्रेन (04098/04097) की सबसे ज्यादा 104 ट्रिप होगी। इसके अलावा श्रीगंगानगर-समस्तीपुर स्पेशल ट्रेन के 14, मालदा टाउन-आनंद विहार स्पेशल ट्रेन के 16 और न्यू जलपाईगुड़ी-गोमती नगर स्पेशल ट्रेन 18 ट्रिप लगाएगी।

हरिद्वार और प्रयागराज के लिए भी ट्रेनें

उत्तर रेलवे ने हरिद्वार और प्रयागराज रूट पर भी स्पेशल ट्रेनें चलाने का फैसला किया है। जबलपुर-हरिद्वार-जबलपुर स्पेशल ट्रेन (01703/01704) के 10 फेरे होंगे। यह ट्रेन 22 अक्टूबर से 19 नवंबर तक चलेगी।

इसके साथ ही जबलपुर-हजरत निजामुद्दीन स्पेशल ट्रेन (01707/01708) भी 10 ट्रिप लगाएगी। वहीं प्रयागराज-हजरत निजामुद्दीन स्पेशल ट्रेन (04183/04184) के 14 ट्रिप लगाएगी। यह ट्रेन 20 अक्टूबर से 1 दिसंबर तक चलेगी।

Sleeper Vande Bharat में सफर का सपना होगा पूरा? जानें दिल्ली-वाराणसी रूट, टाइमिंग और स्टॉपेज की पूरी जानकारी

भारतीय रेलवे यात्रियों के लिए एक बड़ी सुविधा लाने की तैयारी कर रहा है। नई दिल्ली और वाराणसी के बीच Sleeper Vande Bharat Express चलाने की योजना बनाई जा रही है। प्रस्तावित ट्रेन रात में सफर कर यात्रियों को सुबह मंजिल तक पहुंचा सकती है। इस रूट में प्रयागराज और कानपुर जैसे बड़े शहर भी शामिल होंगे। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, ट्रेन का ट्रायल जल्द शुरू होने की संभावना है और इसे दिवाली के आसपास चलाने का लक्ष्य रखा गया है। अगर योजना समय पर पूरी होती है, तो दिल्ली, प्रयागराज, कानपुर और वाराणसी के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को तेज और आरामदायक सफर का नया विकल्प मिल सकता है।

दिल्ली-वाराणसी के साथ प्रयागराज और कानपुर भी जुड़ेंगे

प्रस्तावित ट्रेन सिर्फ दिल्ली और वाराणसी के बीच नहीं दौड़ेगी। इसके रास्ते में प्रयागराज और कानपुर भी शामिल होंगे। उत्तर प्रदेश के इन प्रमुख शहरों से बड़ी संख्या में यात्री दिल्ली और वाराणसी की यात्रा करते हैं। ऐसे में ट्रेन का रूट चार बड़े शहरों को एक साथ जोड़ने वाला होगा।

रात में चलेगी ट्रेन, सुबह पहुंचाएगी मंजिल तक

प्रस्तावित टाइमिंग के अनुसार, वाराणसी कैंट से ट्रेन रात 9:20 बजे रवाना होकर करीब 10:45 बजे प्रयागराज और 12:35 बजे कानपुर सेंट्रल पहुंचेगी। इसके बाद सुबह करीब 5 बजे नई दिल्ली पहुंचने का प्रस्ताव है। वापसी में भी नई दिल्ली से ट्रेन रात 9:20 बजे चलकर सुबह 5 बजे वाराणसी पहुंच सकती है। यानी यात्रियों को रात में सफर करने और सुबह अपनी मंजिल पर पहुंचने का विकल्प मिलेगा।

160 kmph तक पहुंच सकती है रफ्तार

Sleeper Vande Bharat को 130 से 160 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलाने की योजना है। हालांकि वास्तविक स्पीड ट्रैक की स्थिति, ट्रायल और जरूरी मंजूरियों पर निर्भर करेगी। रेलवे के Mission Raftaar के तहत ट्रैक और इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार होने पर इस रूट पर सफर का समय कम करने में मदद मिल सकती है।

823 यात्रियों के लिए होगी जगह

प्रस्तावित ट्रेन में कुल 16 कोच होंगे और इनमें करीब 823 यात्रियों के बैठने-सोने की क्षमता होगी। कोच की संभावित संरचना में 11 AC 3-टियर, चार AC 2-टियर और एक First AC कोच शामिल होंगे। ट्रेन के रखरखाव की जिम्मेदारी Northern Railway संभाल सकती है।

किराया कितना होगा? अभी इंतजार

ट्रेन की चर्चा और प्रस्तावित टाइमिंग सामने आने के बावजूद अभी किराया, ट्रेन नंबर और नियमित संचालन की आधिकारिक तारीख तय नहीं हुई है। ट्रेन की अंतिम गति और शेड्यूल भी ट्रायल के बाद स्पष्ट होगा। इसलिए यात्रियों को आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना होगा।

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UP Weather Update: यूपी में अगले कुछ घंटे आसमान से होगी आफत की बारिश! IMD का इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

UP Weather Update: उत्तर प्रदेश में एक बार फिर मौसम का मिजाज बिगड़ने वाला है। मानसून की विदाई से पहले बादल एक बार फिर जमकर बरसने वाले हैं। मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के लखनऊ स्थित क्षेत्रीय मौसम केंद्र ने 25 सितंबर 2026 को जारी पूर्वानुमान में प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की चेतावनी दी है। आईएमडी के मुताबिक, 25 और 27 सितंबर को प्रदेश के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। वहीं कुछ इलाकों में अत्यधिक भारी बारिश की भी संभावना जताई गई है। इसके साथ ही आंधी जैसी तेज हवाएं और बिजली गिरने का खतरा भी बना रहेगा। बारिश से लोगों को उमसभरी गर्मी से राहत मिलेगी।

मौसम विभाग के मुताबिक, 28 और 29 सितंबर को प्रदेश में कहीं-कहीं बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। वहीं इन दोनों दिनों के लिए मौसम विभाग ने कोई विशेष चेतावनी जारी नहीं की है।

इन शहरों में होगी ज्यादा बारिश

मौसम विभाग के अनुसार, 25 सितंबर को सिद्धार्थनगर, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती और बहराइच में बहुत भारी से अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है। वहीं बांदा, प्रयागराज, लखनऊ, अयोध्या, सीतापुर, बस्ती, सुल्तानपुर समेत कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान है। वहीं 26 सितंबर को भी उत्तर प्रदेश में बारिश का दौर जारी रहेगा। श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, रामपुर, बरेली, पीलीभीत और शाहजहांपुर में बहुत भारी बारिश हो सकती है। वहीं लखनऊ, बस्ती, गोंडा, बाराबंकी, मुरादाबाद, संभल और बदायूं समेत कई जिलों में भी भारी बारिश का अनुमान है।

कई जिलों में फ्लैश फ्लड का खतरा

यूपी के कई जगहों पर गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। हवा की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। ऐसे में लोगों को खुले स्थानों पर जाने से बचने की सलाह दी गई है। लगातार बारिश के चलते कुछ इलाकों में अचानक बाढ़ यानी फ्लैश फ्लड का खतरा है। आजमगढ़, गोरखपुर, लखनऊ, अयोध्या, बहराइच, सीतापुर, बांदा, चित्रकूट समेत कई जिलों में मध्यम जोखिम बताया गया है। ऐसे में निचले इलाकों में पानी भरने, सड़कों पर जलभराव और कुछ स्थानों पर यातायात प्रभावित होने की स्थिति बन सकती है।

27 सितंबर को भी बारिश और तेज हवा

27 सितंबर को बारिश का असर कुछ कम हो सकता है, लेकिन कई जिलों में भारी बारिश का खतरा बना रहेगा। श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, संभल और बदायूं में भारी बारिश की संभावना है। इन इलाकों में गरज-चमक और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की हवाओं के झोंके 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं। मौसम विभाग ने लोगों को बारिश और गरज-चमक के दौरान घर में रहने, पेड़ों के नीचे न जाने और वाहन चलाते समय सावधानी बरतने की सलाह दी है। जलभराव वाली सड़कों और नालों से भी दूर रहने को कहा गया है।

लोगों को सावधानी बरतने की सलाह

मौसम विभाग ने किसानों को भी बारिश के दौरान खेतों में जलभराव से बचाने के लिए पानी की निकासी की व्यवस्था करने की सलाह दी है। फसल के हिसाब से अलग-अलग सावधानियां बताई गई हैं। खासकर गन्ना, अरहर, मक्का, धान, मूंगफली, तिल और सब्जियों की फसलों पर ज्यादा बारिश का असर पड़ सकता है। कुल मिलाकर उत्तर प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक बारिश का दौर जारी रहने वाला है। 26 सितंबर को सबसे ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि इन दिनों कई जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश, तेज हवाओं, बिजली गिरने और कुछ इलाकों में अचानक बाढ़ का खतरा बताया गया है।

UP IMD Rain Alert: यूपी में 4 दिन तक होगी आफत वाली मूसलाधार बारिश! इन जिलों में 60 KM की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

UP IMD Rain Alert: उत्तर प्रदेश में अगले चार दिनों तक मौसम का मिजाज बिगड़ा रहने वाला है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) लखनऊ के पूर्वानुमान के मुताबिक, 24 से 27 सितंबर के बीच UP के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश होगी। इस दौरान कुछ इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवाएं चल सकती हैं। इनके झोंकों की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है। मौसम विभाग ने बिजली गिरने और तेज हवाओं को लेकर भी चेतावनी जारी की है।

आज से बदलेगा मौसम, इन जिलों में भारी बारिश की आशंका

मौसम विभाग के मुताबिक, 24 सितंबर को पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। इस दौरान कुछ इलाकों में भारी बारिश हो सकती है। तेज सतही हवाएं 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती हैं। इस दौरान झोंकों में इनकी गति 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।

24 सितंबर को प्रयागराज, सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, वाराणसी, संत रविदास नगर, जौनपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, देवरिया, गोरखपुर, संत कबीर नगर, बस्ती, कुशीनगर, महराजगंज, सिद्धार्थनगर, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच और अंबेडकर नगर में भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

25 सितंबर को बढ़ेगा बारिश का असर

25 सितंबर को मौसम और एक्टिव हो सकता है। बांदा, चित्रकूट, कौशांबी, फतेहपुर, प्रतापगढ़, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बाराबंकी, रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर और अयोध्या समेत आसपास के इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है।

वहीं, प्रयागराज, सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, वाराणसी, जौनपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, गोरखपुर, बस्ती, कुशीनगर, महराजगंज, सिद्धार्थनगर, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, हरदोई, कानपुर, उन्नाव, लखनऊ, अंबेडकर नगर समेत कई जिलों में भारी बारिश हो सकती है।

इस दौरान गरज-चमक के साथ तेज झोंकेदार हवाएं चलने की आशंका है। मौसम विभाग ने बताया कि हवाओं की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक रह सकती है। जबकि झोंकों में गति 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।

26 सितंबर को भी नहीं मिलेगी राहत

  • 26 सितंबर को बस्ती, सिद्धार्थनगर, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर और बाराबंकी में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है।
  • इसके अलावा आजमगढ़, मऊ, बलिया, देवरिया, गोरखपुर, संत कबीर नगर, कुशीनगर, महराजगंज, हरदोई, लखनऊ, अमेठी, सुल्तानपुर, अयोध्या, अंबेडकर नगर, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, संभल और बदायूं समेत कई इलाकों में भारी बारिश हो सकती है।
  • इस दिन भी गरज-चमक और बिजली के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज हवाएं चलने की संभावना है। झोंकों में हवाओं की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।

27 सितंबर को पश्चिमी यूपी की ओर बढ़ेगा असर

  • 27 सितंबर को बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सहारनपुर, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, संभल और बदायूं में भारी बारिश की संभावना है।
  • इस दौरान देवरिया, गोरखपुर, संत कबीर नगर, बस्ती, कुशीनगर, महराजगंज, सिद्धार्थनगर, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ, बिजनौर, अमरोहा और मुरादाबाद समेत कई जिलों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं।

28 सितंबर से राहत के संकेत

  • मौसम विभाग के पूर्वानुमान में 28 सितंबर को किसी विशेष चेतावनी का उल्लेख नहीं है। हालांकि कुछ इलाकों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना बनी रह सकती है। यानी लगातार कई दिनों की बारिश के बाद मौसम में धीरे-धीरे सुधार की उम्मीद है।

बिजली और तेज हवाओं को लेकर भी अलर्ट

  • बारिश के साथ सबसे बड़ी चिंता आकाशीय बिजली और तेज हवाओं को लेकर है। 24 से 27 सितंबर के बीच कई जिलों में मेघगर्जन और वज्रपात के साथ 30 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक की झोंकेदार हवाओं की संभावना जताई गई है।
  • तेज हवाओं से पेड़, कमजोर ढांचे, कच्चे मकान और झोपड़ियां प्रभावित हो सकती हैं। बिजली व्यवस्था और सड़क यातायात पर भी असर पड़ सकता है। मौसम विभाग ने लोगों को खुले स्थानों, पेड़ों और बिजली के खंभों के आसपास जाने से बचने की सलाह दी है।

बारिश से इन इलाकों में बढ़ सकता है जलभराव

  • भारी बारिश के कारण निचले इलाकों और अंडरपास में पानी भरने, स्थानीय नदियों-नालों का जलस्तर बढ़ने और सड़कों पर जलभराव की स्थिति बन सकती है। लगातार बारिश की स्थिति में कमजोर और पुरानी इमारतों को भी नुकसान का खतरा बढ़ सकता है। सड़क और रेल यातायात पर भी स्थानीय स्तर पर असर पड़ने की संभावना है।
  • मौसम विभाग ने लोगों को जलभराव वाले इलाकों, उफनते नालों और नदियों के आसपास जाने से बचने की सलाह दी है। भारी बारिश के दौरान वाहन चलाते समय दृश्यता कम होने और सड़क पर फिसलन को देखते हुए विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है।

किसानों के लिए भी खास सलाह

  • लगातार बारिश और तेज हवाओं का असर खरीफ फसलों पर पड़ सकता है। गन्ना, धान, मक्का, अरहर, मूंगफली, तिल, उड़द-मूंग और सब्जियों समेत कई फसलों में जलभराव और तेज हवा से नुकसान की आशंका है।
  • किसानों को खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने, जलनिकासी की व्यवस्था दुरुस्त रखने और तेज हवाओं के दौरान सिंचाई रोकने की सलाह दी गई है। केले, पपीते और आम के नए पौधों को सहारा देने तथा लंबी फसलों को गिरने से बचाने के उपाय करने को कहा गया है।

लोगों से सावधानी बरतने की अपील

  • मौसम विभाग के अनुसार, आकाशीय बिजली के दौरान खुले मैदान, पेड़, जलस्रोत और बिजली का संचालन करने वाली वस्तुओं से दूरी बनाए रखना जरूरी है। तेज बारिश या गरज-चमक के दौरान सुरक्षित पक्के भवन के अंदर रहना बेहतर है।
  • बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें और जलभराव वाली सड़कों या पुलों को पार करते समय विशेष सावधानी बरतें।

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लखनऊ में 4, गाजियाबाद में 3… यूपी RERA ने 12 नए रियल एस्टेट प्रोजेक्ट को मंजूरी दी, जानिए कहां कहां घर खरीदने के मौके बनेंगे

लोकल 18 के रिपोर्टर राजीव के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के अलग-अलग शहरों में घर और प्रॉपर्टी से जुड़े काम लगातार बढ़ रहे हैं। इसी बीच कई नए रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिलने से आगे का काम आसान हो गया है। इन प्रोजेक्ट्स में लोगों के रहने के साथ-साथ कारोबार और दूसरी जरूरतों की सुविधाएं भी हैं।

लखनऊ में सबसे ज्यादा प्रोजेक्ट

लखनऊ में सबसे ज्यादा चार प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिली है। इनमें दो रेजिडेंशियल, एक कमर्शियल और एक मिक्स्ड-यूज प्रोजेक्ट शामिल है। इन सभी में करीब 609.35 करोड़ रुपये का इन्वेस्टमेंट प्रस्तावित है और कुल 1,972 यूनिट्स तैयार की जाएंगी।

गाजियाबाद और हापुड़ में भी नए प्रोजेक्ट

गाजियाबाद में तीन रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिली है। इन पर करीब 605.06 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है और 574 यूनिट्स शामिल होंगी। हापुड़ में दो रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिली है, जिनमें करीब 123.45 करोड़ रुपये का इन्वेस्टमेंट और 192 यूनिट्स प्रस्तावित हैं।

तीन शहरों में एक-एक प्रोजेक्ट

कानपुर, अयोध्या और प्रयागराज में भी एक-एक प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली है। कानपुर में करीब 201.72 करोड़ रुपये के इन्वेस्टमेंट से 158 यूनिट्स तैयार होंगी। अयोध्या के प्रोजेक्ट में 72.61 करोड़ रुपये के इन्वेस्टमेंट से 85 यूनिट्स बनाई जाएंगी। वहीं प्रयागराज के प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 51.66 करोड़ रुपये है और इसमें 109 यूनिट्स होंगी।

इन प्रोजेक्ट्स में क्या शामिल है?

प्रोजेक्ट्स में अलग तरह के डेवलपमेंट शामिल हैं। कुछ जगहों पर रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट होंगे और कुछ में कमर्शियल और मिक्स्ड-यूज डेवलपमेंट भी किया जाएगा। यानी इनका इस्तेमाल रहने के साथ कारोबार और दूसरी सुविधाओं के लिए भी किया जा सकेगा।

इन मंजूरियों से अलग-अलग शहरों में प्रॉपर्टी के नए काम शुरू हो सकेंगे। इससे लोगों को घर और दूसरी प्रॉपर्टी के नए ऑप्शन मिल सकते हैं। प्रोजेक्ट्स का काम शुरू होने के बाद इसका असर दिखाई दे सकता है।

UP-EDGE Project: योगी सरकार का पूर्वांचल पर मेगा प्लान! 28 जिलों की बदलने वाली है किस्मत, ₹2,500 करोड़ से होगा ये बदलाव

UP-EDGE Project: उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में आर्थिक गतिविधियों को रफ्तार देने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा प्लान तैयार किया है। विश्व बैंक (World Bank) के सहयोग से ₹2,500 करोड़ की UP-EDGE प्रोजेक्ट प्रस्तावित की गई है। पांच साल तक चलने वाली इस परियोजना का मकसद पूर्वांचल के जिलों में स्थानीय क्षमता के आधार पर रोजगार, आय और निवेश के नए अवसर तैयार करना है। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने मंगलवार (22 सितंबर) को कहा कि वह पूर्वांचल क्षेत्र के 28 जिलों को समर्पित एक परियोजना शुरू करेगी।

इसका उद्देश्य स्थानीय संसाधनों को निवेश, रोजगार, उद्यमिता और निर्यात के अवसरों में बदलना है। विश्व बैंक के सहयोग से शुरू की जाने वाली उत्तर प्रदेश सक्षम जिला-आधारित आर्थिक विकास (UP-EDGE) परियोजना पूर्वांचल क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को गति देने के साथ-साथ स्थानीय प्रशासन को भी मजबूत करेगी।

28 जिलों को मिलेगा फायदा

UP-EDGE यानी UP Enabling District-Led Economic Growth Project के तहत फिलहाल पूर्वांचल के 28 जिलों को शामिल करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा बुंदेलखंड के सात जिलों को भी परियोजना में शामिल किए जाने की संभावना है। इस प्रोजेक्ट को विश्व बैंक के सहयोग से लागू किया जाना प्रस्तावित है।

बैठक में परियोजना की प्रारंभिक रिपोर्ट यानी PPR को भारत सरकार को भेजने समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। राज्य सरकार की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और विश्व बैंक के अधिकारियों के बीच हुई बैठक में परियोजना के विभिन्न प्रस्तावित घटकों पर चर्चा की गई। इनमें प्रारंभिक परियोजना रिपोर्ट (PPR) को भारत सरकार को भेजना भी शामिल है।

बुंदेलखंड के सात जिले शामिल

विश्व बैंक के प्रैक्टिस मैनेजर हून सोह, लीड इकोनॉमिस्ट ऑरेलियन क्रॉस, सीनियर इकोनॉमिस्ट विंसेंट बेलिंगा और सीनियर स्पेशलिस्ट नेहा गुप्ता के साथ हुई बैठक में बताया गया कि यूपी-एज प्रोजेक्ट पूर्वांचल के 28 जिलों के लिए तैयार की गई है। बयान के मुताबिक, बुंदेलखंड के सात जिलों को भी इस परियोजना में शामिल किए जाने का प्रस्ताव है। करीब 2,500 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना की अवधि पांच साल होगी।

पूर्वांचल में उत्तर प्रदेश की करीब 40% आबादी

बैठक में बताया गया कि पूर्वांचल में यूपी की करीब 40 प्रतिशत आबादी रहती है। लेकिन उत्तर प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में इस क्षेत्र का योगदान लगभग 27.6 प्रतिशत है। क्षेत्र की प्रति व्यक्ति आय राज्य के औसत से करीब 45 फीसदी कम है। लगभग 80 प्रतिशत कार्यबल कृषि क्षेत्र से जुड़ा है। ऐसे में यह परियोजना जिलों की जरूरतों और स्थानीय संभावनाओं के आधार पर आर्थिक गतिविधियों का विस्तार करेगी।

कृषि के साथ मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर पर जोर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पूर्वांचल में विकास की काफी संभावनाएं हैं। उन्होंने जिलेवार बड़े निवेश प्रोजेक्ट के लिए स्थानीय जरूरतों और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर योजनाएं तैयार करने पर जोर दिया। सरकार के मुताबिक, इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। इससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सकती है। सीएम योगी ने कृषि के साथ-साथ मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर की भूमिका बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने स्थानीय उत्पादों को बेहतर डिजाइन, पैकेजिंग और वैश्विक बाजारों से जोड़ने पर भी जोर दिया।

इस प्रोजेक्ट के तहत करीब एक लाख नए उद्यम विकसित करने और महिला उद्यमियों की भागीदारी बढ़ाने का भी प्रस्ताव है। पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, ई-कॉमर्स, डेटा सेंटर और डिजिटल जिलों जैसे क्षेत्रों में भी नए अवसर विकसित किए जाएंगे। वाराणसी, गोरखपुर और प्रयागराज जैसे प्रमुख शैक्षणिक केंद्रों में कौशल विकास और ट्रेनिंग को बढ़ावा देने के साथ स्वास्थ्य क्षेत्र में मेडिसिटी और स्वास्थ्य पर्यटन की संभावनाओं पर भी काम किया जाएगा।

ODOP को ग्लोबल मार्केट से जोड़ने की तैयारी

मुख्यमंत्री ने ‘एक जिला, एक उत्पाद (ODOP)’ समेत अन्य स्थानीय उत्पादों को नए बाजारों से जोड़ने पर विशेष ध्यान देने की बात कही। बेहतर बाजार व्यवस्था और वैश्विक पहुंच के जरिए इन उत्पादों के निर्यात की संभावनाएं बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। UP-EDGE प्रोजेक्ट के जरिए सरकार का फोकस सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर तक सीमित रखने के बजाय जिले की स्थानीय आर्थिक क्षमता के हिसाब से विकास मॉडल तैयार करने पर है। प्रोजेक्ट के अगले चरण में प्रस्तावित PPR को केंद्र सरकार के समक्ष भेजने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा, “पूर्वांचल में विकास की अपार संभावनाएं हैं। स्थानीय जरूरतों, उपलब्ध संसाधनों और आर्थिक अवसरों को ध्यान में रखते हुए जिलेवार बड़े निवेश परियोजनाओं की कार्ययोजना तैयार की जानी चाहिए। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के नए अवसर पैदा होंगे तथा क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।”

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उन्होंने कहा कि पूर्वांचल के विकास में कृषि के साथ-साथ मैन्युफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्र की भूमिका भी बढ़ानी होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय उत्पादों को बेहतर डिजाइन, पैकेजिंग और वैश्विक बाजारों से जोड़कर निर्यात के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं। आदित्यनाथ ने एक जिला एक उत्पाद (ODOP) और अन्य स्थानीय उत्पादों को नए बाजार तंत्र से जोड़ने पर विशेष ध्यान देने को कहा।

Bharat Taxi in UP: यूपी के सभी 75 जिलों में ‘भारत टैक्सी’ सुविधा शुरू! इसे चलाने वाले ड्राइवरों को 5 लाख रुपये तक का कवर, सारी डिटेल जानिए

Bharat Taxi in UP: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार (23 सितंबर) को यूपी में ‘भारत टैक्सी’ सेवा और ‘मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना’ का शुभारंभ कर दिया। एक तरफ ‘भारत टैक्सी’ के जरिए ड्राइवरों को कमीशन से राहत और सामाजिक सुरक्षा देने की बात कही गई है। वहीं, दूसरी तरफ छोटे और सीमांत किसानों के लिए दीर्घकालिक कर्ज की ब्याज दर घटाकर 6 प्रतिशत कर दी गई है। देश के पहले सहकारिता आधारित प्लेटफॉर्म ‘भारत टैक्सी; का परिचालन सहकार टैक्सी सहकारिता लिमिटेड द्वारा किया जाएगा। ‘Bharat Taxi’ पहले से ही लखनऊ, गोरखपुर, वाराणसी और प्रयागराज में चल रही है।

ड्राइवरों को नहीं देना होगा कमीशन

सीएम योगी ने अपने संबोधन में कहा, “‘भारत टैक्सी’ देश का पहला सहकारी मॉडल पर आधारित राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म है, जिसे सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड संचालित करता है।” CM ने बताया कि ‘भारत टैक्सी’ फिलहाल लखनऊ, गोरखपुर, वाराणसी और प्रयागराज में संचालित हो रही है। उन्होंने कहा कि इस सेवा से जुड़ने वाले ड्राइवरों से कमीशन नहीं लिया जाएगा। इसके साथ ही उन्हें ₹5 लाख तक की सामाजिक सुरक्षा कवरेज मिलेगी। सीएम योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि अब तक टैक्सी ड्राइवरों के लिए सामाजिक सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। उन्होंने कहा कि भारत टैक्सी के जरिए ड्राइवरों को सुरक्षा के साथ सम्मान और गरिमा देने का प्रयास किया जा रहा है।

‘ये पूरे भारत की टैक्सी है’

सीएम योगी ने कहा, “जब व्यक्ति अपनी गाड़ी पर भारत टैक्सी लिखाएगा और जो भी उस कार का चालक होगा, भारत टैक्सी के ब्रांड को संचालित करने का कार्य करेगा, तो उसको इस बात पर गौरव की अनुभूति होगी कि ये टैक्सी केवल एक यात्री को ढोने की नहीं, ये पूरे भारत की टैक्सी है। भारत को संचालित करने की भारत की गति को प्रगति में बदलने की टैक्सी है। उसके मन में इस बात की निश्चिंतता भी होगी कि मुझे यह सुविधा 5,00,000 रुपए की सामाजिक सुरक्षा की गारंटी भी दे रही है…जब किसी को सामाजिक सुरक्षा की गारंटी मिलती है तो उसमें एक निश्चिंतता होती है और फिर वह व्यक्ति पूरी तन्मयता के साथ, पूरी जिम्मेदारी के साथ अपने कार्य को कर पाता है…आज यह टैक्सी लखनऊ, गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज में संचालित हो रही है।”

एयरपोर्ट, मेट्रो और पुलिस से भी समझौता

मुख्यमंत्री ने बताया कि भारत टैक्सी ने लखनऊ एयरपोर्ट, लखनऊ मेट्रो और लखनऊ पुलिस के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) किए हैं। उन्होंने इस पहल के विस्तार पर जोर देते हुए कहा कि ‘भारत टैक्सी’ से आने वाले समय में लाखों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में प्रस्तावित बस सर्विस को भी इसी तरह के सहकारी मॉडल से विकसित करने की संभावना जताई।

किसानों के लिए 11% से घटकर 6% हुआ ब्याज

सीएम योगी ने ‘मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना’ की भी शुरुआत की। इसके तहत उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम्य विकास बैंक से मिलने वाले दीर्घकालिक ऋण पर ब्याज दर 11 प्रतिशत से घटाकर 6 प्रतिशत कर दी गई है। इस योजना का उद्देश्य आने वाले वर्षों में करीब 5 लाख छोटे और सीमांत किसानों को कर्ज की सुविधा उपलब्ध कराना है। आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार ने किसानों के लिए ब्याज दर कम करने का फैसला किया और अब इसका परिणाम सामने है। उन्होंने कहा कि किसान समृद्ध होगा तो देश भी समृद्ध होगा।

पांच ड्राइवरों और पांच किसानों को मिला लाभ

कार्यक्रम के दौरान पांच भारत टैक्सी ड्राइवरों को शेयर सर्टिफिकेट दिए गए। वहीं, किसान योजना के पांच लाभार्थियों को लोन स्वीकृति पत्र सौंपे गए। मुख्यमंत्री ने सहकारिता विभाग का ‘उर्वरक सेतु’ मोबाइल ऐप और उत्तर प्रदेश सहकारी डेटाबेस सेंटर का मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया।

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सरकार के सहकारी मॉडल पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि मजबूत सहकारी क्षेत्र देश की मजबूती से जुड़ा है। सरकार और केंद्र की ओर से सहकारी सेवाओं के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। सरकार के अनुसार, भारत टैक्सी का उद्देश्य किसी निजी ऐप आधारित टैक्सी एग्रीगेटर को खत्म करना नहीं, बल्कि ड्राइवर-केंद्रित और लोगों के लिए किफायती परिवहन का एक वैकल्पिक प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराना है। सहकारी मॉडल में ड्राइवर सदस्य और हितधारक के रूप में जुड़े होंगे, ताकि उनके आर्थिक और सामाजिक हितों को बढ़ावा दिया जा सके।

वेबदुनिया के 27 साल: 23 सितंबर 1999 को शुरू हुआ हिंदी इंटरनेट का ऐतिहासिक सफर

वेबदुनिया के 27 साल: 23 सितंबर 1999 को शुरू हुआ हिंदी इंटरनेट का ऐतिहासिक सफर

webdunia  27th anniversary

वेबदुनिया डॉट कॉम केवल एक वेबसाइट या डिजिटल मंच भर नहीं है, बल्कि यह भारत में भाषाई डिजिटल क्रांति का वह अग्रदूत है जिसने वैश्विक पटल पर हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं का परचम लहराया। 23 सितंबर 1999 का दिन हिंदी इंटरनेट के इतिहास में एक मील का पत्थर और स्वर्णिम अध्याय सिद्ध हुआ, जब दुनिया के पहले हिंदी पोर्टल ‘वेबदुनिया’ का आधिकारिक आगाज हुआ। जिस दौर में इंटरनेट का दायरा केवल अंग्रेजी भाषा तक सीमित माना जाता था और भाषाई सीमाओं के कारण बहुसंख्यक भारतवासी सूचना-प्रौद्योगिकी के इस महामार्ग से कटे हुए थे, उस समय वेबदुनिया ने आकर भारतीय भाषाई समाज के लिए डिजिटल युग के नए द्वार खोल दिए।

 

तकनीकी नवाचार और फोंट की समस्या का ऐतिहासिक समाधान

शुरुआती दौर में हिंदी इंटरनेट के समक्ष सबसे बड़ी तकनीकी चुनौती फोंट की असमानता (Non-compatibility) थी। पाठक या उपयोगकर्ता तक हिंदी सामग्री तब तक नहीं पहुँच पाती थी जब तक उनके कंप्यूटर में संबंधित विशेष फोंट डाउनलोड न हो। वेबदुनिया ने इस बाधा को भांपते हुए ‘डायनैमिक फोंट’ (Dynamic Font) की क्रांतिकारी तकनीक विकसित की। इस नवाचार के माध्यम से पाठकों को बिना किसी अतिरिक्त फोंट को डाउनलोड किए सीधे हिंदी सामग्री पढ़ने की सुविधा मिली। इस एक तकनीकी छलांग ने हिंदी को सीधे वेब पेजों पर ला खड़ा किया और भारतीय भाषाई इंटरनेट के स्वप्न को पूर्ण यथार्थ में बदल दिया।

 

27 वर्षों की निर्बाध यात्रा और निरंतर विस्तार

वेबदुनिया ने 23 सितंबर 2026 को अपनी अनवरत और सफलतम यात्रा के 27 वर्ष पूरे कर लिए हैं। समय के साथ यह पोर्टल केवल हिंदी तक सीमित न रहकर तमिल, तेलुगु, मराठी, गुजराती, मलयालम, कन्नड़ और बांग्ला जैसी 8 प्रमुख भारतीय भाषाओं में अपनी सेवाएं देने लगा। भारत के सुदूर ग्रामीण इलाकों में रहने वाले आम नागरिकों से लेकर दुनिया भर में फैले अप्रवासी भारतीयों (NRIs) तक, वेबदुनिया आज भी प्रामाणिक, विश्वसनीय और तथ्यपरक सामग्री का सबसे विश्वसनीय माध्यम बनी हुई है।

 

सामग्री की विविधता और अनूठे आयाम

वेबदुनिया की लोकप्रियता का एक बड़ा आधार इसकी विषय-वस्तु की विविधता और हर वर्ग के पाठक की रुचि का ध्यान रखना है। यह पोर्टल समाचार और समसामयिक विषयों से आगे बढ़कर विभिन्न विषयों पर समृद्ध सामग्री उपलब्ध कराता है:

 

राजनीति और खेल: चुनावी हलचलों की बारीकियों से लेकर क्रिकेट के रोमांच तक, वेबदुनिया अपने विशेष कवरेज और तीव्र गति से सटीक जानकारी देने के लिए जानी जाती है।

 

धर्म, अध्यात्म और कुंभ कवरेज: आस्था और भारतीय संस्कृति को केंद्र में रखते हुए पोर्टल पर संपूर्ण ‘रामचरितमानस’, ‘श्रीमद्भगवद्गीता’, ‘रामशलाका प्रश्नावली’ और प्रयागराज/हरिद्वार कुंभ का व्यापक और सीधा कवरेज उपलब्ध कराया गया।

 

ज्योतिष और पारंपरिक विद्या: जन्म कुंडली निर्माण, गुण-मिलान (पत्रिका मिलान) से लेकर आधुनिक टैरो कार्ड रीडिंग और दैनिक राशिफल तक, ज्योतिष क्षेत्र में इसकी सामग्री बेहद लोकप्रिय है।

 

जीवनशैली और मनोरंजन: बॉलीवुड, साहित्य, पर्यटन, सेहत, महिला एवं बाल जगत, हास्य-व्यंग्य (चुटकुले) तथा संबंधों से जुड़ी ज्ञानवर्धक सामग्री इसके मुख्य आकर्षणों में से हैं।

 

अप्रवासी भारतीयों (NRIs) के लिए सांस्कृतिक सेतु

वेबदुनिया की सबसे विशिष्ट और विनम्र भूमिका विदेशों में बसे भारतीय समुदाय को अपनी जड़ों से जोड़े रखने की रही है। सात समंदर पार बैठे भारतीयों तक भारतीय कला, धर्म, व्रत-त्योहारों के सटीक मुहूर्त, परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों को उनकी अपनी भाषा में पहुँचाकर इस पोर्टल ने एक डिजिटल सांस्कृतिक सेतु का कार्य किया है।

 

इंटरनेट पर सत्यता और फैक्ट-चेक का माध्यम

आज के दौर में जहाँ इंटरनेट और सोशल मीडिया पर भ्रामक व गलत जानकारियों (Misinformation) की भरमार है, वहाँ वेबदुनिया ने विशेष रूप से धर्म, अध्यात्म, ज्योतिष और ऐतिहासिक तथ्यों को लेकर एक ‘फैक्ट-चेकर’ और प्रामाणिक संदर्भ-कोश की भूमिका निभाई है। करोड़ों पाठकों का भरोसा आज भी इसकी निष्पक्षता और शुद्धता पर कायम है।

 

वेबदुनिया से जुड़े कुछ अन्य ऐतिहासिक व महत्वपूर्ण तथ्य:

स्थापना का श्रेय: वेबदुनिया की शुरुआत इंदौर (मध्य प्रदेश) स्थित ‘नई दुनिया’ समाचार समूह के दूरदर्शी उद्यमियों और इसके संस्थापक विनय छजलानी जी की अथक मेहनत एवं सपर्मण से हुई थी। 

 

माइक्रोसॉफ्ट और वैश्विक कंपनियों के साथ साझेदारी: जब माइक्रोसॉफ्ट और अन्य वैश्विक टेक दिग्गजों ने भारत में अपनी भाषाई सेवाएं शुरू करने का विचार किया, तब वेबदुनिया उनके प्रमुख तकनीकी और कंटेंट पार्टनर्स में से एक बनी। वेबदुनिया ने याहू, गुगल और तमाम वैश्विक कंपनियों के साथ काम करके भारत में इंटरनेट क्रांति और लोकलाइजेशनन को जन्म दिया।

 

यूनिकोड (Unicode) दौर में सुगम परिवर्तन: डायनैमिक फोंट के दौर से निकलकर जब दुनिया ‘यूनिकोड’ मानक पर आई, तब भी वेबदुनिया ने सबसे पहले इस बदलाव को अपनाकर अपनी संपूर्ण सामग्री को यूनिकोड में स्थानांतरित किया, जिससे यह मोबाइल और आधुनिक सर्च इंजनों पर अधिक सुलभ हो गई।

 

सॉफ्टवेयर व सर्च इंजन विकास: वेबदुनिया ने शुरुआती दौर में हिंदी में सर्च इंजन, हिंदी ईमेल सेवा (‘पत्र’) और हिंदी चैट रूम जैसी सुविधाएं भी विकसित की थीं, जो उस समय के भारतीय इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के लिए एकदम नया अनुभव थीं।

 

वेबदुनिया डॉट कॉम केवल भारतीय भाषाओं का पहला इंटरनेट पोर्टल ही नहीं है, बल्कि यह भारत के डिजिटल पुनर्जागरण और भाषाई सशक्तिकरण की एक ऐतिहासिक गाथा है। 1999 से शुरू हुई इसकी 27 वर्षों की यह अनवरत यात्रा इस बात का प्रमाण है कि तकनीक जब अपनी संस्कृति, भाषा और जड़ों से जुड़ती है, तो वह कितनी व्यापक और सर्वस्पर्शी बन जाती है। ‘डायनैमिक फोंट’ जैसी क्रांतिकारी शुरुआत से लेकर 8 भारतीय भाषाओं में विस्तार करने और डिजिटल दौर में प्रामाणिक सामग्री के ‘फैक्ट-चेकर’ के रूप में उभरने तक, वेबदुनिया ने हर कदम पर भाषाई इंटरनेट को नई दिशा दी है।

 

सुदूर गाँवों के आम पाठकों से लेकर विदेश में बसे अप्रवासी भारतीयों तक को एक सांस्कृतिक और सूचनात्मक सूत्र में पिरोने का जो कार्य वेबदुनिया ने किया है, वह अविस्मरणीय है। आने वाले समय में भी जब-जब भारत में डिजिटल क्रांति और हिंदी इंटरनेट के इतिहास का मूल्यांकन होगा, वेबदुनिया को भाषाई तकनीक की बुनियाद रखने वाले एक युगांतरकारी पथप्रदर्शक (Pioneer) के रूप में सदैव याद रखा जाएगा।