पटना से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का सफर होगा आसान, 6500 करोड़ से जेपी गंगापथ के विस्तार को मिली हरी झंडी, कुछ ऐसा रहेगा रूट

राजधानी पटना में रहने वाले लोगों को अगर बिहटा या कोईलवर जाना हो, तो अक्सर जाम और लंबी दूरी की परेशानी से गुजरना पड़ता है। उस दिशा में जाने का नाम सुनते ही लोग गहरी चिंता में चले जाते हैं। कोई न कोई बहाना ढूंढ़ने लग जाते हैं लेकिन आने वाले समय में इसी रूट पर लोग लॉन्ग ड्राइव पर जाएंगे। ऐसा इसीलिए, क्योंकि पटना के दीघा से कोईलवर तक जेपी गंगा पथ का विस्तार होने वाला है। अभी जो दूरी डेढ़ से दो घंटे में तय होती है, वही आने वाले समय में महज 30-35 मिनट में पूरा हो सकेगी। इस सड़क के विस्तार से पटना और पश्चिमी क्षेत्र के बीच मजबूत कनेक्टिविटी स्थापित होगी।

पूरा पटना जिला हो जाएगा कवर

अब तक दीघा से दीदारगंज तक फैला जेपी गंगापथ पटना के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों के बीच आवागमन का एक अहम ऑप्शन बन चुका है। अब इसे पश्चिम दिशा में कोईलवर तक ले जाने की तैयारी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत दीघा से कोईलवर तक 35.65 किमी यानी लगभग 36 किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़क बनाई जानी है। इसका निर्माण हैदराबाद की कंपनी विश्व समुद्रा करेगी।

दो हिस्सों में बनेगी सड़क, बांध पर भी सड़क

जेपी गंगापथ के इस विस्तार में सबसे खास बात इसकी बनावट होगी। पूरी सड़क को दो हिस्सों में विकसित किया जाएगा। परियोजना के तहत दीघा से शेरपुर तक करीब 18 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड फोरलेन सड़क बनाई जाएगी। इसके बाद शेरपुर से कोईलवर तक लगभग 18 किलोमीटर सड़क बांध पर बनेगी। इस तरह शहर से निकलने के बाद वाहनों को लंबे समय तक ट्रैफिक और संकरी सड़कों की समस्या से जूझने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह सड़क दीघा जेपी सेतु से शुरू होकर दानापुर, शाहपुर, शेरपुर और बिहटा होते हुए कोईलवर के नए पुल से जुड़ेगी।

6500 करोड़ रुपये की परियोजना, चार साल में पूरा करने का लक्ष्य

जेपी गंगापथ का विस्तार सिर्फ एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि पटना की भविष्य की यातायात व्यवस्था को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है। इसके निर्माण पर 6495.78 करोड़ यानी करीब 6500 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसका निर्माण हाइब्रिड एनुइटी मॉडल (HAM) के तहत किया जाएगा। इस मॉडल में निर्माण एजेंसी और सरकार दोनों की वित्तीय भागीदारी होगी।

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे तक पहुंचेगा पटना का रास्ता

इस परियोजना का असर केवल पटना और कोईलवर के बीच यात्रा तक सीमित नहीं रहेगा। इसके पूरा होने से राजधानी की पश्चिमी दिशा में कनेक्टिविटी मजबूत होगी और आगे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे तक पहुंचने का रास्ता भी अधिक सुविधाजनक बन सकता है। इसके जरिए पटना से बक्सर और फिर उत्तर प्रदेश की ओर यात्रा करने वाले लोगों को फायदा मिलने की उम्मीद है। बक्सर के रास्ते गंगा नदी पार कर उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल एक्सप्रेसवे तक पहुंचने से अयोध्या और दिल्ली की दिशा में सफर भी आसान हो सकता है।

पटना से सच्चिदानंद की रिपोर्ट

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दिवाली-छठ पर नहीं होगी टिकट की मारामारी से राहत देने के लिए उत्तर रेलवे चलाएगा 11 जोड़ी विशेष ट्रेनें, देखिए पूरी लिस्ट

नई दिल्ली। दिवाली और छठ पर घर जाने वाले पैसेंजर के लिए रेलवे ने स्पेशल ट्रेनों का इंतजाम किया है। उत्तर रेलवे अलग-अलग रूट पर 11 जोड़ी स्पेशल ट्रेनें चलाने वाला है। जिससे दिवाली और छठ के दौरान घर जाने वाले पैसेंजर को सफर में आसानी हो सकती है।

वाराणसी-जम्मू के बीच चलेगी स्पेशल ट्रेन

वाराणसी-जम्मू तवी स्पेशल ट्रेन (04610/04609) वीकली चलेगी। जम्मू तवी से यह ट्रेन 1 अक्टूबर से 26 नवंबर तक और वाराणसी से 2 अक्टूबर से 27 नवंबर तक चलेगी। रास्ते में पठानकोट कैंट, जालंधर कैंट, लखनऊ और सुल्तानपुर के साथ ही कई स्टेशनों पर इसका हाल्ट भी होगा। श्री माता वैष्णो देवी कटरा के लिए भी स्पेशल ट्रेन चलाई जाएगी। इस ट्रेन (04604/04603) के 18 ट्रिप लेकर चलेगी। यह कटरा से 4 अक्टूबर से 29 नवंबर और वाराणसी से 5 अक्टूबर से 30 नवंबर तक चलने वाली है।

नई दिल्ली और श्री माता वैष्णो देवी कटरा के बीच भी स्पेशल ट्रेन (04081/04082) चलेगी। इसकी 28 ट्रिप होगी। यह ट्रेन नई दिल्ली से 12 से 25 अक्टूबर और कटरा से 13 से 26 अक्टूबर तक रोज चलने वाली है।

बिहार और पूर्वी भारत के लिए भी ट्रेनें

बिहार और पूर्वी भारत जाने वाले पैसेंजर के लिए भी कई स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएंगी। शकूरबस्ती-दरभंगा स्पेशल ट्रेन (04098/04097) की सबसे ज्यादा 104 ट्रिप होगी। इसके अलावा श्रीगंगानगर-समस्तीपुर स्पेशल ट्रेन के 14, मालदा टाउन-आनंद विहार स्पेशल ट्रेन के 16 और न्यू जलपाईगुड़ी-गोमती नगर स्पेशल ट्रेन 18 ट्रिप लगाएगी।

हरिद्वार और प्रयागराज के लिए भी ट्रेनें

उत्तर रेलवे ने हरिद्वार और प्रयागराज रूट पर भी स्पेशल ट्रेनें चलाने का फैसला किया है। जबलपुर-हरिद्वार-जबलपुर स्पेशल ट्रेन (01703/01704) के 10 फेरे होंगे। यह ट्रेन 22 अक्टूबर से 19 नवंबर तक चलेगी।

इसके साथ ही जबलपुर-हजरत निजामुद्दीन स्पेशल ट्रेन (01707/01708) भी 10 ट्रिप लगाएगी। वहीं प्रयागराज-हजरत निजामुद्दीन स्पेशल ट्रेन (04183/04184) के 14 ट्रिप लगाएगी। यह ट्रेन 20 अक्टूबर से 1 दिसंबर तक चलेगी।

स्वराज्य प्राप्ति में गणपति उत्सव का योगदान

युगों युगों से गणेश उत्सव का आयोजन होता आ रहा है। उत्सव के प्रमाण हमें सातवाहन, राष्ट्रकूट तथा चालुक्य वंश के काल से मिलते है। गणेश उत्सव को मराठा शासक छत्रपति शिवाजी महाराज ने राष्ट्रधर्म और संस्कृति से जोड़कर एक नई शुरुआत की थी। मराठा शासकों के दौर से उत्सव के इस क्रम को जारी रखा गया है, जिसके बाद पेशवा राजवंशों ने गणेश उत्सव को व्यापक स्तर पर मनाए जाने का क्रम शुरू किया।

श्रीगणेश चतुर्थी पर विशेष

श्रीगणेश जी सनातन परंपरा में प्रथम पूज्य देवता हैं। उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत, पूर्वी और पश्चिमी भारत में गणेश उत्सब की अलग अलग परंपराएं हैं। मगर सभी परंपराओं में श्रीगणेश जी का स्थान सबसे महत्वपूर्ण पूज्य और आदरणीय है। इन्हीं परंपराओं में महाराष्ट्र के पुणे में शुरू हुई दस दिवसीय उत्सव परंपरा आज पूरे भारत ही नहीं, बल्कि विश्व के अनेक देशों में बड़ी ही उमंग और उल्लास से मनाई जाती है।

गणेश चतुर्थी कब मनाई जाएगी? कैसे मनाई जाएगी? कैसे पूजा होगा इस बारे में हम सभी जानते हैं। मगर आपको शायद पता नहीं होगा कि कानून की धारा 144 से भी श्री गणेश जी का संबंध रहा है, कैसे संबंध है,क्या संबंध है? आईए आपको बताते हैं।

सन् 1857 की क्रांति के बाद घबरा कर अंग्रेजों ने 1894 में एक बडा कानून लागू किया, जिसे धारा 144 कहते थे, जो अब समाप्त हो चुकी है। अंग्रेजी हुकूमत द्वारा इस कठोर कानून की धारा लागू किए जाने के बाद से किसी भी स्थान पर पांच से अधिक लोग इकठ्ठा नहीं हो सकते थे। सरल शब्दों में कहें तो सार्वजनिक आयोजनों की मनाही थी। यदि कोई ब्रिटिश अधिकारी उनको इकठ्ठा देख लेता तो इतनी कड़ी सजा दी जाती थी कि जिसे सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते है। उनको कोड़े से मारा जाता था और उनके हाथों से नाखूनों को नोंच लिया जाता था।

ब्रिटिश हुकूमत के इस कड़े कानून के कारण गुलाम भारतीयों में भय व्याप्त हो गया था। लोगों में अंगेजो के प्रति व्याप्त भय को ख़त्म करने तथा इस कानून का विरोध करने के लिए लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जी ने गणेश उत्सव को सार्वजनिक रूप से मनाने की शुरुआत की। शुरुआत पुणे के शनिवारबाडा में गणेश उत्सव के आयोजन को वृह्द स्तर पर मनाकर हुई। सन् 1894 के पूर्व तक गणेश उत्सव को लोग घरों में ही मनाया करते थे। पुणे के शनिवारबाडा में वर्तमान समय में भी हजारों लोगो की भीड़ उमड़ती है। तिलक जी ने अंग्रेजों को चेतावनी दी थी कि अंग्रेज पुलिस उन्हें गिरफ्तार करके दिखाएं। असल में कानून के हिसाब से अंग्रेज पुलिस सिर्फ राजनीतिक समारोह में उमड़ी भीड़ को ही जेल में डाल सकती थी, धार्मिक समारोह में उमड़ी भीड़ को नही।

तिलक जी द्वारा शुरू की गई पहल के बाद पूरे 10 दिन 20 से 30 अक्टूबर 1894 के बीच पुणे के शनिवारबाड़ा में गणपति उत्सव मनाया गया। प्रतिदिन लोकमान्य तिलक भारतीयों को उद्बोधन देने के लिए किसी बड़े क्रांतिकारी को आमंत्रित करते थे। 20 तारीख को बंगाल के सबसे बड़े नेता बिपिन चन्द्र पाल तथा 21 तारीख को उत्तर भारत के लाला लाजपत राय वहां पहुंचे। इसी प्रकार चापेकर बंधू भी वहा पहुंचे। वहां 10 दिनों तक इन महान नेताओं के उद्बोधन होते रहे। सभी भाषणों का मुख्य आधार यही होता था कि हम भारत को अंग्रेजो से आजाद कराएं। गणपति जी हमें इतनी शक्ति दें की हम स्वराज्य लाएं।

दूसरे वर्ष यानी वर्ष 1895 में पुणे में 11 गणपति स्थापित किए गए। इसी प्रकार संख्या को बढ़ाते हुए अगले साल 31 और अगले साल यह संख्या एक सौ पार कर गई, जिसके बाद से गणेश उत्सव के कार्यक्रम ने मंच और पंडालों का रुप ले लिया। धीरे-धीरे पुणे के नजदीकी बड़े शहरो जैसे अहमदनगर, मुंबई, नागपुर आदि तक गणपति उत्सव फैलता गया। हर गणपति उत्सव पर लाखों लोगों की भीड़ जमा होती थी। उत्सव में आमंत्रित नेता उनमें देश प्रेम के भाव जाग्रत करने का कार्य करते थे। इस प्रकार का प्रयास सफल हुआ और लोगों के मन में देशभक्ति के प्रति भावना बढने लगी.स्वतंत्रता आन्दोलन में लोगों को एकजुट करने में इस प्रयास ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सन् 1904 में लोकमान्य तिलक ने अपने भाषणों में लोगों से कहा था कि गणपति उत्सव का मुख्य उद्देश्य आजादी हासिल करना है, स्वराज्य हासिल करना है, देश से अंग्रेजों को भगाना है। बिना स्वराज्य के गणपति उत्सव का कोई औचित्य नही है।

अगर इसके धार्मिक, सांस्कृतिक व ऐतिहासिक संदर्भ की बात करें तो भारत में गणेश उत्सव भाद्रपद मास की चतुर्थी से चतुर्दशी तक मनाया जाता है। यह दस दिनों तक चलने वाला हिंदू धर्म का पौराणिक पर्व है। युगों युगों से गणेश उत्सव का आयोजन होता आ रहा है। उत्सव के प्रमाण हमें सातवाहन, राष्ट्रकूट तथा चालुक्य वंश के काल से मिलते है। गणेश उत्सव को मराठा शासक छत्रपति शिवाजी महाराज ने राष्ट्रधर्म और संस्कृति से जोड़कर एक नई शुरुआत की थी। मराठा शासकों के दौर से उत्सव के इस क्रम को जारी रखा गया है, जिसके बाद पेशवा राजवंशों ने गणेश उत्सव को व्यापक स्तर पर मनाए जाने का क्रम शुरू किया।

चूंकि गणेशजी पेशवाओं के कुलदेवता थे इसी कारण उनके शासन में गणेशजी को राष्ट्रदेव के रूप में दर्जा प्राप्त हो गया था। पेशवा वंशजों के बाद ब्रिटिश हुकूमत के दौर में सन् 1892 तक गणेश उत्सव केवल हिन्दू घरों तक ही सीमित था। संविधान के अनुसार भारत एक गण राज्य है और जो देवता गण यानी जनता जनार्दन का प्रतीक बनकर पूजे जाएं ऐसे ही देवता का नाम गणपति है, गणेश है। इस तरह कहा जा सकता है भारत के धार्मिक व सांस्कृतिक जीवन में गणपति का जितना महत्व है उतना ही अंग्रेजों को भगाने और भारत के स्वराज की प्राप्ति के अभियान में भी उनका महत्व है। (लेखक भोजपुरी समाज (दिल्ली) के अध्यक्ष एवं मैथिली भोजपुरी अकादमी दिल्ली सरकार के पूर्व उपाध्यक्ष हैं।)

 

Hartalika Teej puja samagri list: 14 सितंबर को हरतालिका तीज व्रत करने से पहले पूजा के लिए जरूरी सामग्री जुटा लें, इनके बिना अधूरा है अटल सुहाग का व्रत

Hartalika Teej puja samagri list: हरतालिका तीज भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र व अखंड सौभाग्य के लिए और अविवाहित कन्याएं सुयोग्य वर पाने के लिए निर्जला व्रत (बिना अन्न-जल का उपवास) रखती हैं। इस व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विधान है। ‘हरतालिका’ शब्द ‘हरत’ यानी हरण करना और ‘आलिका’ यानी सखी से मिलकर बना है। मान्यता है कि माता पार्वती की सखियां उन्हें घने जंगल में ले गई थीं, ताकि उनके पिता हिमालय किसी और के साथ उनका विवाह न कर पाएं। यहां उन्होंने कठोर तपस्या करके भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया था।

हिंदू धर्म के इस प्रमुख व्रत में पूजा के लिए जरूरी समाग्री का भी अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। इसलिए व्रत करने वाली महिलाएं इस उपवास की सभी सामग्री बहुत ध्यान से अर्जित करती हैं। आप भी यह व्रत करने जा रही हैं, तो सोमवार को व्रत शुरू करने से पहले एक बार यहां दी जा रही सामग्री सूची से अपनी सूची का मिलान कर लें। ताकि पूजा करते समय आपको कोई असुविधा न हो। आइए जानें पूजा की संपूर्ण सामग्री लिस्ट और पूजा विधि

हरतालिका व्रत 2026 तारीख और समय

वर्ष 2026 में उदया तिथि के अनुसार हरतालिका तीज 14 सितंबर 2026, सोमवार को मनाई जाएगी।

तृतीया तिथि प्रारंभ : 13 सितंबर 2026 को सुबह 07:08 बजे से

तृतीया तिथि समाप्त : 14 सितंबर 2026 को सुबह 07:06 बजे तक

प्रातःकाल पूजा मुहूर्त : 14 सितंबर 2026 को सुबह 06:05 से 07:06 बजे तक

हरतालिका तीज पूजन सामग्री लिस्ट

बालू या मिट्टी से बनी शिव, पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमाएं

सुहाग सामग्री (लाल चुनरी, बिंदी, चूड़ियां, आलता, मेहंदी, सिंदूर, कुमकुम, काजल, कंघी, बिछिया, पायल और अन्य श्रृंगार वस्तुएं)

रोली, चावल, कपूर, रुई, माचिस, मौली, हल्दी, चंदन, घी का दीपक, अगरबत्ती या धूपबत्ती, फल और मिठाइयां, खीर और हलवा, भिगोए हुए चने, पूजा के लिए कलश, जल और गंगाजल, पंचामृत बनाने के लिए दूध, दही, शहद, शक्कर और घी, 1 नारियल, दूर्वा घास, बेलपत्र, शमी पत्र, कच्ची हल्दी की गांठें, गेहूं या चावल, एक चौकी या आसन, मंडप बनाने के लिए केले के पत्ते, फूलों की माला और फूल, पान के पत्ते और सुपारी, कच्चा सूत

हरतालिका तीज 2026 पूजा विधि

प्रतिमा निर्माण : प्रातः स्नान के बाद संकल्प लें। इसके बाद काली मिट्टी या बालू से शिव-पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा बनाएं।

शृंगार व अर्पण : भगवान शिव को चंदन, बेलपत्र, धतूरा, अक्षत और वस्त्र अर्पित करें। माता पार्वती को सुहाग की सामग्री (सिंदूर, चूड़ी, बिंदी, चुनरी आदि) चढ़ाएं।

कथा व आरती : हरतालिका तीज की व्रत कथा सुनें या पढ़ें और अंत में शिव-पार्वती की आरती करें।

रात का जागरण : इस व्रत में रात भर जागरण कर भजन-कीर्तन करने की परंपरा है।

पारण : अगले दिन सुबह विधिवत पूजा के बाद पंडित या बुजुर्गों को दान-दक्षिणा देकर व्रत खोलें।

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Ganesh Chaturthi 2026 Kalash Sthapana: बप्पा के स्वागत में जरूर रखें कलश, स्थापना से पहले कलश में जरूर डालें ये चीजें

Ganesh Chaturthi 2026 Kalash Sthapana: देश में इस समय गौरी पुत्र गणेश के स्वागत की तैयारियां चल रही हैं। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विघ्नहर्ता गणेश अपने भक्तों के बीच धरती पर पधारते हैं और अनंत चतुर्दशी तक रहते हैं। भगवान गणेश के जन्मोत्सव का पर्व पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन घरों और पंडालों में विधि-विधान से गणपति बप्पा की स्थापना की जाती है। इस बार गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर दिन सोमवार को मनाया जाएगा। गणपति स्थापना की पूजा में मूर्ति के साथ कलश स्थापना का भी विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कलश शुभता, समृद्धि और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। आप अगर गणेशजी की स्थापना करने जा रहे हैं, तो पहले यह जान लें कि गणेश चतुर्थी के पर्व में कलश क्यों जरूरी है और इसमें किन 7 चीजों को रखा जाता है

गणेश चतुर्थी 2026: कलश स्थापना

हिंदू पूजा पद्धति में कलश को देवताओं का प्रतीक माना जाता है। गणेशजी की स्थापना से पहले पूजा स्थल की शुद्धि करके कलश स्थापित किया जाता है। सामान्यतः मिट्टी, तांबे या पीतल के कलश में जल भरकर उसके ऊपर आम या अशोक के पत्ते और नारियल रखा जाता है। मान्यता है कि कलश में जल जीवन और ऊर्जा का प्रतीक है, जबकि नारियल पूर्णता और शुभता का प्रतीक माना जाता है। गणेश चतुर्थी पर गणपति स्थापना के दौरान कलश को भगवान गणेश के समीप रखा जाता है।

गणेश चतुर्थी 2026 पर कलश स्थापना विधि

गणेश स्थापना के समय पूजा स्थल को साफ करके चौकी पर कलश रखें। कलश में शुद्ध जल भरें और उसमें अक्षत, गंगाजल, सुपारी व सिक्का डालें। कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते रखें और ऊपर नारियल स्थापित करें। कलश के पास भगवान गणेश की मूर्ति रखें। इसके बाद कलश और गणपति का विधिवत पूजन करें। हालांकि कलश स्थापना की विधि और उसमें रखी जाने वाली सामग्री अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों की धार्मिक परंपराओं के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती है।

कलश में रखी जाने वाली 7 चीजें

  • स्वच्छ जल
  • अक्षत यानी चावल
  • सुपारी
  • सिक्का
  • गंगाजल
  • आम या अशोक के पत्ते
  • नारियल

गणेश महोत्सव की प्रमुख तिथियां

14 सितंबर 2026, सोमवार – गणपति स्थापना और गणेश चतुर्थी

15 सितंबर, मंगलवार – गणपति पूजा और दैनिक आरती

16 सितंबर, बुधवार – गणपति पूजा

17 सितंबर, गुरुवार – गणपति पूजा

18 सितंबर, शुक्रवार – गणपति पूजा

19 सितंबर, शनिवार – गणपति पूजा

20 सितंबर, रविवार – गणपति पूजा

21 सितंबर, सोमवार – गणपति पूजा

22 सितंबर, मंगलवार – गणपति पूजा

23 सितंबर, बुधवार – गणपति पूजा

24 सितंबर, गुरुवार – उत्सव का अंतिम दिन/विसर्जन की तैयारी

25 सितंबर 2026, शुक्रवार – अनंत चतुर्दशी और गणपति विसर्जन

गणेश चतुर्थी पर्व का महत्व

प्रथमपूज्य भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता कहा जाता है। हिंदू धर्म हर शुभ और मांगलिक कार्य गणेश भगवान की पूजा से शुरू होता है। माना जाता है, भगवान गणेश की पूजा करने से कार्य में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। गणेश चतुर्थी पर घर में गणपति की स्थापना करना श्रद्धालुओं के लिए भगवान के स्वागत का प्रतीक है। 10 दिन तक चलने वाले इस पर्व का समापन भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी तिथि यानी अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश विसर्जन के साथ हो जाता है। गणपति स्थापना केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि परिवार में सुख-शांति, सद्भाव और सकारात्मक ऊर्जा की कामना से जुड़ी परंपरा भी है।

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BRICS Summit 2026: ब्रिक्स समिट के चलते दिल्ली में 26 ट्रेनें कैंसिल, कई के रूट बदले; देखें पूरी लिस्ट

BRICS Summit 2026: राजधानी में 11 से 13 सितंबर तक होने वाली ब्रिक्स नेताओं की समिट के कारण दिल्ली में 26 ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं और एक दर्जन से ज्यादा ट्रेनों का रूट बदल दिया गया है। कई अन्य ट्रेनों के संचालन पर भी पाबंदियां रहेंगी, जिनमें 40 मिनट तक की देरी भी शामिल है।

रद्द की गई ज्यादातर ट्रेनें EMU ट्रेनें हैं, जो दिल्ली को गाजियाबाद, पलवल और शकूरबस्ती जैसे आसपास के इलाकों से जोड़ती हैं। इसके अलावा, राजधानी एक्सप्रेस और कई दूसरी लंबी दूरी की ट्रेनों को भी दिल्ली के कुछ महत्वपूर्ण रेलवे रूट से बचाने के लिए दूसरे रास्तों से भेजा जा रहा है।

नॉर्दर्न रेलवे ने BRICS Summit के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और VVIP व विदेशी डेलिगेशन की आवाजाही को सुचारू रखने के लिए दिल्ली डिवीजन के लिए ट्रेनों के संचालन की पूरी योजना जारी की है।

ऑपरेशनल बदलावों में ट्रेनों का कैंसिलेशन, रूट बदलना, शॉर्ट-ओरिजिनेशन, शॉर्ट-टर्मिनेशन और ट्रेनों का रेगुलेटेड संचालन शामिल है। ये पाबंदियां समिट के दौरान लागू रहेंगी और इनका असर अलग-अलग ट्रेनों और रूटों पर अलग-अलग होगा।

दिल्ली-NCR में कई EMU-MEMU ट्रेनें रद्द

गाजियाबाद, पलवल, शकूरबस्ती और नई दिल्ली को जोड़ने वाली कई EMU और MEMU सेवाएं रद्द कर दी गई हैं। रांची, डिब्रूगढ़, सियालदह, हावड़ा और भुवनेश्वर जाने वाली राजधानी सेवाओं सहित लंबी दूरी की ट्रेनों के रूट बदल दिए गए हैं। कुछ ट्रेनें गाजियाबाद, साहिबाबाद, दिल्ली शाहदरा और शकूरबस्ती जैसे स्टेशनों से शुरू या खत्म होंगी। NCR, पलवल और डुडिया सेक्शन में कई एक्सप्रेस, सुपरफास्ट और वंदे भारत ट्रेनों को भी 10-40 मिनट तक रेगुलेट किया जाएगा। बनारस-नई दिल्ली वंदे भारत को NCR में 35 मिनट तक रेगुलेट किया जाएगा।

रद्द की गई ट्रेनें

तारीखट्रेन नंबरट्रेन का नाम / रूटस्थिति / टिप्पणी
11.09.202664015पलवल – शकूरबस्ती EMUरद्द (लिंक ट्रेन 64910 पलवल से शॉर्ट-ओरिजिनेट होगी)
11.09.202664429गाजियाबाद – नई दिल्ली EMUरद्द (लिंक ट्रेन 64110 गाजियाबाद से शॉर्ट-ओरिजिनेट होगी)
11.09.202664433गाजियाबाद – नई दिल्ली EMUरद्द (लिंक ट्रेन 64114 गाजियाबाद से शॉर्ट-ओरिजिनेट होगी)
11.09.202664492नई दिल्ली – पलवल लेडीज EMUरद्द (लिंक ट्रेन 64491 भी रद्द)
11.09.202664491दिल्ली जंक्शन – शामली EMUरद्द
12.09.202664425गाजियाबाद – नई दिल्ली EMUरद्द
12.09.202664432नई दिल्ली – गाजियाबाद EMUरद्द
12.09.202664013पलवल – शकूरबस्ती EMUपहले से रद्द, फरीदाबाद में RLDA कार्य के कारण
12.09.202664015पलवल – शकूरबस्ती EMUपहले से रद्द, फरीदाबाद में RLDA कार्य के कारण
12.09.202664429गाजियाबाद – नई दिल्ली EMUरद्द (लिंक ट्रेन 64110 गाजियाबाद से शॉर्ट-ओरिजिनेट होगी)
12.09.202664433गाजियाबाद – नई दिल्ली EMUरद्द (लिंक ट्रेन 64114 गाजियाबाद से शॉर्ट-ओरिजिनेट होगी)
12.09.202664441गाजियाबाद – नई दिल्ली EMUरद्द (लिंक ट्रेन 64410 रद्द रहेगी)
12.09.202664492नई दिल्ली – पलवल लेडीज EMUरद्द (लिंक ट्रेन 64491 भी रद्द)
12.09.202664410नई दिल्ली – गाजियाबाद EMUरद्द
12.09.202664443गाजियाबाद – दिल्ली जंक्शन EMUरद्द (लिंक ट्रेन 64108 गाजियाबाद से शॉर्ट-ओरिजिनेट होगी)
12.09.202664418दिल्ली जंक्शन – गाजियाबाद MEMUरद्द (लिंक ट्रेन 64151 गाजियाबाद पर शॉर्ट-टर्मिनेट होगी)
12.09.202664445गाजियाबाद – दिल्ली जंक्शन EMUरद्द
12.09.202664412दिल्ली जंक्शन – गाजियाबाद EMUरद्द
12.09.202664406दिल्ली जंक्शन – गाजियाबाद EMUरद्द
13.09.202664053पलवल – गाजियाबाद EMUरद्द
13.09.202664439गाजियाबाद – दिल्ली जंक्शन EMUरद्द (लिंक ट्रेन 64406 रद्द रहेगी)
13.09.202664071बल्लभगढ़ – शकूरबस्ती EMUपहले से रद्द, फरीदाबाद में RLDA कार्य के कारण
13.09.202664078नई दिल्ली – पलवल EMUपहले से रद्द, फरीदाबाद में RLDA कार्य के कारण
13.09.202664411साहिबाबाद – दिल्ली जंक्शन EMUरद्द (लिंक ट्रेन 64408 रद्द रहेगी)
13.09.202664031गाजियाबाद – शकूरबस्ती EMUरद्द
13.09.202664426नई दिल्ली – गाजियाबाद EMUरद्द

डायवर्ट की गई ट्रेन

तारीखट्रेन नंबरट्रेन का नाम / रूटडायवर्जन रूट
11.09.202664419हजरत निजामुद्दीन – गाजियाबाद EMUहजरत निजामुद्दीन – तिलक ब्रिज – BPNL – साहिबाबाद
11.09.202620840नई दिल्ली – रांची राजधानी एक्सप्रेसनई दिल्ली – दिल्ली जंक्शन – साहिबाबाद
11.09.202612424नई दिल्ली – डिब्रूगढ़ राजधानी एक्सप्रेसनई दिल्ली – दिल्ली जंक्शन – साहिबाबाद
11.09.202612314नई दिल्ली – सियालदह राजधानी एक्सप्रेसनई दिल्ली – दिल्ली जंक्शन – साहिबाबाद
11.09.202612306नई दिल्ली – हावड़ा राजधानी एक्सप्रेसनई दिल्ली – दिल्ली जंक्शन – साहिबाबाद
11.09.202622812नई दिल्ली – भुवनेश्वर राजधानी एक्सप्रेसनई दिल्ली – दिल्ली जंक्शन – साहिबाबाद
11.09.202664904गाजियाबाद – मथुरा जंक्शन EMUसाहिबाबाद – तिलक ब्रिज – हजरत निजामुद्दीन जंक्शन
11.09.202612394संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेसनई दिल्ली – दिल्ली जंक्शन – साहिबाबाद
12.09.202612420गोमती एक्सप्रेस (नई दिल्ली – लखनऊ)नई दिल्ली – दिल्ली जंक्शन – दिल्ली शाहदरा – साहिबाबाद
12.09.202612392श्रमजीवी एक्सप्रेस (नई दिल्ली – राजगीर)नई दिल्ली – दिल्ली जंक्शन – दिल्ली शाहदरा – साहिबाबाद
12.09.202612314नई दिल्ली – सियालदह राजधानी एक्सप्रेसनई दिल्ली – दिल्ली जंक्शन – दिल्ली शाहदरा – साहिबाबाद
12.09.202612302नई दिल्ली – हावड़ा राजधानी एक्सप्रेसनई दिल्ली – दिल्ली जंक्शन – दिल्ली शाहदरा – साहिबाबाद
12.09.202664904गाजियाबाद – मथुरा जंक्शन EMUसाहिबाबाद – तिलक ब्रिज – हजरत निजामुद्दीन जंक्शन
12.09.202654411रेवाड़ी – मेरठ कैंट. पैसेंजरदिल्ली किशनगंज – दिल्ली जंक्शन – दिल्ली शाहदरा – साहिबाबाद
12.09.202611842कुरुक्षेत्र – खजुराहो एक्सप्रेसआदर्श नगर दिल्ली – दिल्ली सफदरजंग – ओखला
12.09.202664906गाजियाबाद – पलवल EMUसाहिबाबाद – तिलक ब्रिज – हजरत निजामुद्दीन जंक्शन
12.09.202654473दिल्ली जंक्शन – सहारनपुर पैसेंजरदिल्ली जंक्शन – दिल्ली शाहदरा – साहिबाबाद
12.09.202615566नई दिल्ली – ललितग्राम वैशाली एक्सप्रेसनई दिल्ली – दिल्ली जंक्शन – दिल्ली शाहदरा – साहिबाबाद
12.09.202620802मगध एक्सप्रेस (नई दिल्ली – इस्लामपुर)नई दिल्ली – दिल्ली जंक्शन – दिल्ली शाहदरा – साहिबाबाद
12.09.202612562स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेसनई दिल्ली – दिल्ली जंक्शन – दिल्ली शाहदरा – साहिबाबाद
12.09.202664472पानीपत – गाजियाबाद MEMUसब्जी मंडी – दिल्ली जंक्शन – दिल्ली शाहदरा – साहिबाबाद
12.09.202612581बनारस – नई दिल्ली सुपरफास्ट एक्सप्रेससाहिबाबाद – दिल्ली शाहदरा – दिल्ली जंक्शन
10.09.202620503डिब्रूगढ़ – नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेससाहिबाबाद – दिल्ली शाहदरा – दिल्ली जंक्शन
13.09.202654474सहारनपुर – दिल्ली जंक्शन पैसेंजरसाहिबाबाद – दिल्ली शाहदरा – दिल्ली जंक्शन
13.09.202612559बनारस – नई दिल्ली शिवगंगा एक्सप्रेससाहिबाबाद – दिल्ली शाहदरा – दिल्ली जंक्शन
13.09.202614030मेरठ कैंट. – श्री गंगानगर स्पेशलसाहिबाबाद – दिल्ली शाहदरा – दिल्ली जंक्शन – दिल्ली किशनगंज
13.09.202664903मथुरा जंक्शन – गाजियाबाद EMUहजरत निजामुद्दीन जंक्शन – तिलक ब्रिज – साहिबाबाद
13.09.202664055पलवल – गाजियाब हजरत निजामुद्दीन जंक्शन – तिलक ब्रिज – साहिबाबाद

नियंत्रित ट्रेनें

तारीखट्रेन नंबरट्रेन/रूटकितनी देर की देरी/रोक
10 सितंबर 202612625तिरुवनंतपुरम–नई दिल्ली केरला SFNCR में 40 मिनट और NR में 20 मिनट
11 सितंबर 202664471गाजियाबाद–पानीपत MEMUसाहिबाबाद में 20 मिनट
11 सितंबर 202616032श्री माता वैष्णो देवी कटरा–चेन्नईनई दिल्ली में 15 मिनट
11 सितंबर 202620807विशाखापत्तनम–अमृतसर हिराकुंड एक्सप्रेसपलवल सेक्शन में 15 मिनट
11 सितंबर 202611077पुणे–जम्मू तवी एक्सप्रेसNCR में 40 मिनट और पलवल सेक्शन में 20 मिनट
11 सितंबर 202612137CSMT–फिरोजपुर पंजाब मेलNCR में 40 मिनट और पलवल सेक्शन में 20 मिनट
11 सितंबर 202612627बेंगलुरु–नई दिल्ली कर्नाटक एक्सप्रेसNCR में 40 मिनट और पलवल सेक्शन में 20 मिनट
12 सितंबर 202622415बनारस–नई दिल्ली वंदे भारतNCR में 35 मिनट
12 सितंबर 202612926पश्चिम एक्सप्रेस (अमृतसर–बांद्रा)दूदिया सेक्शन में 35 मिनट
12 सितंबर 20262455कानपुर सेंट्रल–नई दिल्ली स्पेशलसाहिबाबाद में 10 मिनट
12 सितंबर 202612556गोरखधाम एक्सप्रेस (बठिंडा–गोरखपुर)NWR में 30 मिनट और SPR सेक्शन में 20 मिनट
12 सितंबर 202612472स्वराज एक्सप्रेस (कटरा–बांद्रा टर्मिनस)दूदिया सेक्शन में 30 मिनट
12 सितंबर 202664073धौलपुर–नई दिल्ली EMUपलवल सेक्शन में 30 मिनट
12 सितंबर 202611905आगरा कैंट–होशियारपुर एक्सप्रेसपलवल सेक्शन में 15 मिनट
12 सितंबर 202620817भुवनेश्वर–नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेसगाजियाबाद और साहिबाबाद के बीच 20 मिनट
12 सितंबर 202612301हावड़ा–नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेसगाजियाबाद और साहिबाबाद के बीच 10 मिनट
13 सितंबर 202614211आगरा कैंट इंटरसिटी एक्सप्रेसNCR में 20 मिनट और पलवल सेक्शन में 20 मिनट
13 सितंबर 202664462कुरुक्षेत्र–हजरत निजामुद्दीन MEMUदूदिया सेक्शन में 30 मिनट

यात्रियों को क्या करना चाहिए?

11 से 13 सितंबर के बीच दिल्ली आने-जाने वाले यात्रियों को स्टेशन के लिए निकलने से पहले अपनी ट्रेन का लेटेस्ट स्टेटस चेक कर लेना चाहिए।

प्रभावित EMU, MEMU या लंबी दूरी की ट्रेनों से यात्रा करने वालों को यह भी देख लेना चाहिए कि उनकी ट्रेन कैंसिल, डाइवर्ट, शॉर्ट-टर्मिनेट, शॉर्ट-ऑरिजिनेट या रेगुलेट तो नहीं की गई है।

दिल्ली डिवीज़न में कई बदलाव किए जा रहे हैं, इसलिए यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी यात्रा के लिए अतिरिक्त समय लेकर चलें और उसी हिसाब से अपनी यात्रा की योजना बनाएं।

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Laddu Gopal Chatti 2026: जन्माष्टमी के छह दिन बाद आज मनाई जाएगी लड्डू गोपल की छठी, नोट करें छठी पर्व की पूरी विधि और भोग

Laddu Gopal Chatti 2026: हिंदू धर्म में बच्चे के जन्म के छह दिन बाद परिवारों में आमतौर पर एक उत्सव मनाया जाता है, जिसे छठी कहते हैं। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद भी मनाया जाता है। देश-दुनिया में भगवान श्रीकृष्ण के भक्तों ने 4 सितंबर को नटखट माखनचोर का जन्मोत्सव जन्माष्टमी पर्व के रूप में मनाया है। इसके पर्व के छह दिन बाद, यानी आज 9 सितंबर के दिन उनका छठी पर्व मनाया जा रहा है। भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव की तरह उनका छठी पर्व भी विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन उन्हें नए वस्त्र पहनाकर उनका श्रृंगार किया जाता है, छठी उत्सव रस्में निभाई जाती हैं और उन्हें काजल लगाया जाता है। लड्डू गोपाल की छठी उत्सव की विधि और भोग से जुड़ी जानकारी नीचे दी गई है:

तिथि और शुभ योग

तिथि : बुधवार, 9 सितंबर 2026

शुभ संयोग : इस दिन भद्रा राजयोग, मालव्य राजयोग और हंस राजयोग का विशेष संयोग बन रहा है।

लड्डू गोपाल छठी पर्व 2026 पूजन विधि

कान्हा की छठी मनाने के लिए सबसे पहले गाय के देसी घी से उनकी मालिश करें। इसके बाद दूध के कटोरे में उनका स्नान कराएं। इस दौरान कम से कम 3 बार दूध के पात्र में डुबकियां लगाएं। फिर गंगाजल से ठाकुर जी को स्नान कराएं।

ठाकुर जी को स्नान कराने के बाद लाल या पीले रंग के नए वस्त्र पहनाएं। इसके बाद ठाकुर जी को प्यार से काजल लगाएं। छठी वाले दिन उन्हें नजर का धागा जरूर पहनाना चाहिए।

छठी के दिन बाल गोपाल को काजल लगाने की भी परंपरा है। उनकी आंखों, तलवों और कान के पीछे काजल का छोटा सा टीका लगाया जाता है। मान्यता के अनुसार बचा हुआ काजल घर के सदस्यों की आंखों में भी लगाया जा सकता है।

इन सबके अलावा भोग में उन्हें 6 सबसे अधिक प्रिय अर्पित करनी चाहिए। इसमें कड़ी, चावल, मख्खन, खीर-पूरी और हलवा का भोग जरूर लगाएं। आखिर में 11, 21 या 51 रुपये लेकर ठाकुर जी की नजर उतारकर किन्नरों को जरूर दान करें। कान्हा की छठी मनाने के लिए इस विधि को अपनाएं।

लड्डू गोपाल की छठी खासतौर से शाम के समय मनाई जाती है। लड्डू गोपाल के झूले को सुंदर-सुंदर फूलों से सजाना चाहिए और उनके भजन को गाना चाहिए।

लड्डू गोपाल के छठी पर्व का विशेष भोग

कढ़ी, चावल, माखन-मिश्री, धनिया की पंजीरी, खीर और पूरी।

सभी भोजन बिना प्याज और लहसुन के बनाएं। लड्डू गोपाल को अर्पित किए जाने वाले प्रत्येक भोग में तुलसी दल जरूर शामिल करें।

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Delhi NCR Weather: दिल्ली-NCR में बदला मौसम, आंधी-तूफान के साथ कई इलाकों में हुई झमाझम बारिश, IMD ने जारी किया रेड अलर्ट

Delhi NCR Weather: दिल्ली-NCR में शुक्रवार को अचानक से तेज आंधी तुफान के साथ गरज-चमक और झमाझम बारिश से तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। ने लोगों को गर्मी से काफी राहत दी। मौसम विभाग ने राजधानी और आसपास के इलाकों में भारी बारिश की आशंका को देखते हुए रेड अलर्ट जारी कर दिया है। जिसके बाद दिल्ली और एनसीआर में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

मौसम विभाग के मुताबिक, दिल्ली के कई इलाकों के साथ-साथ ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में भी बारिश हुई है। मौसम विभाग ने कुछ इलाकों में मध्यम से तेज बारिश के साथ भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं, अगर बारिश की स्थिति लगातार बनती है तो निचले इलाकों में पानी भरने और सड़कों पर यातायात की रफ्तार धीमी पड़ने की संभावना है। हालांकि, राहत की बात यह है कि जन्माष्टमी के चलते स्कूल-कॉलेज और तमाम दफ्तरों में छुट्टी होने के चलते सड़कों पर ट्रैफिक का कम दबाव रहेगा।

IMD के ताजा अपडेट के अनुसार, राजधानी के ज्यादातर हिस्सों में मध्यम बारिश हो सकती है, जबकि कुछ इलाकों में भारी बारिश (50 से 100 मिमी) होने की आशंका है। बारिश के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने की भी संभावना जताई गई है। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं, जिनके झोंकों की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है।

मौसम विभाग ने लोगों को मौसम संबंधी अपडेट पर नजर रखने और बेहद जरूरी होने पर ही बारिश के दौरान बाहर निकलने की सलाह दी है।

राजस्थान से उत्तर प्रदेश तक भी मौसम विभाग का अलर्ट

मौसम विभाग ने बताया कि उत्तर मध्य प्रदेश और दक्षिणी उत्तर प्रदेश के ऊपर निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। इसके साथ ही मानसून की अक्षीय रेखा भी सक्रिय है, जो श्रीगंगानगर से होते हुए इस निम्न दबाव वाले क्षेत्र तक पहुंच रही है। इन मौसमी सिस्टम का असर उत्तर भारत के कई हिस्सों में देखने को मिल रहा है।

राजस्थान के पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी इलाकों में भी भारी से बहुत भारी बारिश होने का अनुमान है। पिछले 24 घंटों के दौरान पूर्वी राजस्थान के कई हिस्सों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। सवाई माधोपुर के खंडार में सबसे ज्यादा 130 मिमी बारिश हुई।

इसके अलावा अलवर, भरतपुर, डीग, दौसा, धौलपुर, जयपुर, सीकर, भीलवाड़ा, अजमेर, करौली, टोंक, बारां, कोटा और झालावाड़ में भी हल्की से मध्यम बारिश देखने को मिली।

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Krishna Janmotsav 2026: आज आधी रात में पधारेंगे मुरलीधर श्याम, जानें आज निशिता काल पूजा विधि, महत्व और पारण का सही समय

Krishna Janmotsav 2026: आज भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है और आज के दिन ही द्वापर युग में देवकी और वासुदेव के आठवें पुत्र श्रीकृष्ण के रूप में भगवान विष्णु ने अवतार लिया था। इसलिए हर साल इस दिन भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस दिन मध्यरात्रि में भक्त वत्सल मनमोहन श्याम अपने लाखों करोड़ों भक्तों के बीच जन्म लेते हैं। निशिता काल में जब यह पल आता है, तब शंख और घंटों की आवाज और कृष्ण कन्हैया लाल की जय के साथ भगवान के अवतरण का उत्सव मनाया जाता है।

इस साल 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को भगवान श्रीकृष्ण का 5253वीं जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। बहुत से भक्त आज के दिन व्रत करते हैं, घर और मंदिर में भगवान कृष्ण के जन्म और लीलाओं की झाकियां सजाते हैं। आइए कृष्ण जन्माष्टमी पर जानते हैं तिथि, समय, महत्व, पूजा विधि, नियम, व्रत के प्रकार और पारण का समय।

जन्माष्टमी 2026: मध्यरात्रि निशिता काल पूजा विधि

  • भगवान कृष्ण की मूर्ति को धोकर साफ चौकी पर एक नया या साफ कपड़ा बिछाएं।
  • इसके बाद फलों, मोर पंख, तुलसी के पत्तों और पालकी को सजाएं।
  • भगवान कृष्ण की लड्डू गोपाल मूर्ति को पंचामृत से स्नान कराएं। इसके बाद साफ जल और आखिर में गंगाजल की कुछ बूंदें डालें।
  • मूर्ति को साफ कपड़े से सुखाएं, इसके बाद नए कपड़े पहनाएं, आभूषण लगाएं, मुकुट में मोर पंख और हाथ में बांसुरी दें। चंदन और रोली का तिलक और अक्षत लगाएं।
  • इसके बाद भगवान कृष्ण को पंजीरी, तुलसी पत्ते, फल-फूल, माखन-मिश्री और पंचमेवा का भोग अर्पित करें।
  • इसके बाद भगवान कृष्ण को पालने में बिठाएं और ‘नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल’ की गीत गाते हुए धीरे से झुलाएं।
  • इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ा मंत्र ‘ऊं’ नमो भगवते वासुदेवाय नम: मंत्र का जाप करें। संभव हो तो कृष्ण अष्टकम का जाप करें।
  • भगवान कृष्ण की जन्म घोषणा करने के लिए शंख बजाएं फिर घी के दीये और कपूर से आरती करें। प्रसाद और चरणामृत सभी में बांटें।
  • पारण व्रत से जुड़े नियम

कई भक्त जाने-अनजाने में आधी रात की आरती के फौरन बाद ही व्रत तोड़ देते हैं। जबकि जन्माष्टमी व्रत का पारणा अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र दोनों के समाप्त होने के बाद ही किया जाता है।

अष्टमी तिथि 5 सितंबर को सुबह 11 बजकर 23 मिनट तक रहेगा, इसलिए सही मायने में पारण शनिवार की सुबह ही करनी चाहिए।

जन्माष्टमी पूजा सामग्री

दूध, दही, शुद्ध देसी घी, शहद, चीनी, तिलक के लिए रोली और चंदन पाउडर, अक्षत (साबुत चावल) मौली या कलावा, अभिषेक करने के लिए तांबे का लोटा, शंख, आरती के लिए भीमसेनी कपूर और सूती बत्तियां, भोग के लिए पंचमेवा, माखन-मिश्री और धनिया पंजीरी आरती की थाली, घी का दीया, अगरबत्ती, तुलसी पत्ता, मोर पंख, बांसुरी, मूर्ति के लिए वस्त्र।

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Janmashtami Laddu Gopal Puja Vidhi: इस जन्माष्टमी पर कैसे करें लड्डू गोपाल की पूजा और श्रृंगार? जानें कल पूजा की संपूर्ण विधि

Janmashtami Laddu Gopal Puja Vidhi: भगवान विष्णु के सभी अवतारों में कृष्णावतार सबसे लोकप्रिय और मोहक माना जाता है। यही वजह है कि भगवान के इस अवतार के जन्मोत्सव का पर्व भी अत्यंत उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को श्रीकृष्ण ने देवकी और वासुदेव के आठवें पुत्र के रूप में जन्म लिया था। माना जाता है कि श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इसलिए भगवान के भक्त हर साल भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाते हैं। इस साल जन्माष्टमी का पर्व कल यानी 4 सितंबर को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान कृष्ण के बाल रूप लड्डू गोपाल का श्रृंगार किया जाता है और निशिता काल में विशेष पूजा की जाती है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर निशिता काल में लड्डू गोपाल के जन्म, अभिषेक और श्रृंगार की प्रामाणिक पूजा विधि निम्न प्रकार है:

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तैयारी

पूजा स्थान : चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और उस पर फूलों व मोर पंख से झूला या आसन सजाएं।

सामग्री : पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल), खीरा (डंठल व पत्ती वाला), नए वस्त्र, आभूषण, चंदन, अक्षत, तुलसी दल, माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी और आरती की थाली तैयार रखें।

जन्मोत्सव और खीरा चीरने की विधि

  • मध्यरात्रि में खीरे के ऊपरी हिस्से को सिक्के या चाकू से काटकर बाल गोपाल का ‘नाल छेदन’ (जन्म का प्रतीक) करें।
  • ‘नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की’ के जयकारों के साथ शंख और घंटी बजाकर कान्हा के प्राकट्य का स्वागत करें।

पंचामृत और शुद्ध जल से अभिषेक

  • लड्डू गोपाल को एक बड़े पात्र (परात) में विराजमान करें।
  • सबसे पहले गंगाजल अर्पित करें, फिर क्रम से दूध, दही, शुद्ध देसी घी, शहद और शक्कर (या पंचामृत मिश्रण) से “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करते हुए स्नान कराएं।
  • अंत में हल्के गुनगुने या साफ जल से इत्र मिलाकर अच्छी तरह स्नान कराएं और साफ तौलिए से पोंछें।

इस तरह करें लड्डू गोपाल का श्रृंगार

  • कान्हा को नए सुंदर पीले या रंगीन वस्त्र (पीतांबर) पहनाएं।
  • माथे पर चंदन और रोली का तिलक लगाएं तथा अक्षत (चावल) चढ़ाएं।
  • मुकुट, वैजयंती माला, बाजूबंद, कड़े, कुंडल और कमरधनी पहनाएं।
  • उनके हाथ में बांसुरी सजाएं और मुकुट में मोर पंख अवश्य लगाएं।

भोग और आरती

  • कान्हा को प्रिय माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी, ऋतु फल और मिठाइयों का भोग लगाएं।
  • प्रत्येक भोग सामग्री में तुलसी दल (तुलसी का पत्ता) जरूर रखें, क्योंकि इसके बिना भगवान भोग स्वीकार नहीं करते।
  • कपूर और घी का दीपक जलाकर बाल गोपाल की आरती गाएं।
  • पूजा और आरती के बाद लड्डू गोपाल को प्रेमपूर्वक सजाए गए झूले पर विराजमान करें।
  • भक्ति भाव से उन्हें झूला झुलाएं, क्षमा प्रार्थना करें और परिवार के सुख-समृद्धि की कामना करते हुए सभी में प्रसाद बांटें।

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