Muhurat Trading: दिवाली पर मुहूर्त ट्रेडिंग की टाइमिंग का हुआ ऐलान, दोपहर 2:20 बजे से खुलेगा बाजार

Diwali Muhurat Trading 2026: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने दिवाली के दिन होने वाले विशेष ‘मुहूर्त ट्रेडिंग’ सत्र की टाइमिंग का ऐलान कर दिया है। इस साल रविवार, 8 नवंबर 2026 को विशेष लाइव ट्रेडिंग सत्र आयोजित किया जाएगा। इस दिन भारतीय शेयर बाजार नए हिंदू वर्ष विक्रम संवत 2083 का स्वागत करेगा।

भारतीय शेयर बाजार में दिवाली के दिन मुहूर्त ट्रेडिंग की परंपरा दशकों पुरानी है। मान्यता है कि इस शुभ मुहूर्त में शेयर बाजार में निवेश करने से पूरे वर्ष सुख-समृद्धि और वित्तीय उन्नति बनी रहती है। आइए जानते हैं NSE द्वारा जारी मुहूर्त ट्रेडिंग का मिनट-टू-मिनट पूरा शेड्यूल।

मेन ट्रेडिंग सेशन

मुहूर्त ट्रेडिंग के दौरान मुख्य बाजार में कारोबार की समय-सारणी इस प्रकार रहेगी:

प्री-ओपन ऑर्डर एंट्री: दोपहर 2:05 बजे से 2:15 बजे तक (इसमें ऑर्डर दर्ज, संशोधित या रद्द किए जा सकते हैं)।

ऑर्डर मैचिंग व ट्रेड कन्फर्मेशन: दोपहर 2:15 बजे से 2:17 बजे तक।

प्री-ओपन बफर टाइम: दोपहर 2:17 बजे से 2:20 बजे तक।

कंटीन्यूअस ट्रेडिंग: दोपहर 2:20 बजे से शुरू होगा।

मार्केट क्लोजिंग टाइम: नॉन-क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) प्रतिभूतियों के लिए बाजार दोपहर 3:30 बजे बंद होगा, जबकि CAS सिक्योरिटीज के लिए सामान्य बाजार 3:15 बजे समाप्त होगा।

CAS और पोस्ट-क्लोज सेशन का शेड्यूल

क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) और उसके बाद के सत्रों की समय-सारणी इस प्रकार निर्धारित की गई है:

  • रेफरेंस प्राइस कैलकुलेशन: दोपहर 3:15 बजे से 3:20 बजे तक।
  • CAS ऑर्डर एंट्री पीरियड: दोपहर 3:20 बजे से 3:30 बजे तक।
  • ऑर्डर मैचिंग व ट्रेड कन्फर्मेशन: दोपहर 3:30 बजे से 3:35 बजे तक।
  • CAS ट्रांजिशन टाइम: दोपहर 3:35 बजे से 3:50 बजे तक।
  • पोस्ट-क्लोज सेशन: दोपहर 3:50 बजे से शाम 4:00 बजे तक।
  • ट्रेड मॉडिफिकेशन कट-ऑफ टाइम: शाम 4:15 बजे तक।

नोट: प्री-ओपन और CAS ऑर्डर एंट्री पीरियड के अंतिम 2 मिनट में सिस्टम-ड्रिवन रैंडम क्लोजर लागू रहेगा।

ब्लॉक डील, IPO और अन्य विशेष सत्र

ब्लॉक डील विंडो: दोपहर 1:50 बजे से 2:05 बजे तक खुलेगी।

IPO और री-लिस्टेड सिक्योरिटीज के लिए स्पेशल प्री-ओपन: दोपहर 2:05 बजे से 2:50 बजे तक (अंतिम 10 मिनट में रैंडम क्लोजर)।

स्पेशल प्री-ओपन वाली कंपनियों का नॉर्मल मार्केट: दोपहर 3:05 बजे से 3:30 बजे तक चलेगा।

कॉल ऑक्शन इलिक्विड सेशन: दोपहर 2:25 बजे से 3:10 बजे तक रहेगा।

NSE ने स्पष्ट किया है कि इस विशेष दिवाली मुहूर्त ट्रेडिंग सत्र के दौरान एग्जिक्यूटेड सभी सौदों के लिए सेटलमेंट दायित्व अनिवार्य रूप से लागू होंगे।

Muhurat Trading: क्या इस दिवाली भी दोपहर में होगी मुहूर्त ट्रेडिंग? ब्रोकर्स और अन्य मार्केट पार्टिसिपेंट्स ने स्टॉक एक्सचेंजों से की अपील

पिछले साल की तरह इस बार भी दिवाली पर ‘मुहूर्त ट्रेडिंग’ का आयोजन दिन के समय किया जाए। ऐसा अनुरोध स्टॉक ब्रोकरों और अन्य मार्केट पार्टिसिपेंट्स ने एक बार फिर स्टॉक एक्सचेंजों से किया है। ब्रोकरों ने ‘ब्रोकर्स इंडस्ट्री स्टैंडर्ड्स फोरम’ (BISF) के माध्यम से एक्सचेंजों को एक प्रस्ताव सौंपा है। पिछले साल दिवाली पर मुहूर्त ट्रेडिंग को शाम के पारंपरिक समय के बजाय दोपहर 1:45 बजे से 2:45 बजे के बीच आयोजित किया गया था। इससे पहले भी साल 2012 में एक बार मुहूर्त ट्रेडिंग सेशन दोपहर 3:45 बजे से शाम 5:00 बजे के बीच रखा गया था। ऐसा शुभ समय को देखते हुए किया गया था।

मनीकंट्रोल को ब्रोकरों से पता चला है कि इस साल 8 नवंबर को दिवाली पर शुभ मुहूर्त का समय दोपहर 1:47 बजे से 3:12 बजे के बीच है। उन्होंने दोपहर 2 बजे से 3 बजे के बीच ट्रेडिंग सत्र आयोजित करने का प्रस्ताव दिया है। भारतीय शेयर बाजारों में दिवाली पर मुहूर्त ट्रेडिंग की परंपरा कई सालों से चली आ रही है।

निवेशक इस विशेष सत्र में एक प्रतीकात्मक शुरुआत के तौर पर हिस्सा लेते हैं, जिसे हिंदू परंपरा में देवी लक्ष्मी की पूजा से जोड़कर देखा जाता है और यह धन-समृद्धि लाने का प्रतीक माना जाता है। यह सत्र विक्रम संवत कैलेंडर के अनुसार नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत का भी प्रतीक है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) ने 1957 में ‘मुहूर्त ट्रेडिंग’ की परंपरा शुरू की थी।

दोपहर 2:20 बजे से 3:20 बजे के बीच हो सकती है मुहूर्त ट्रेडिंग

आमतौर पर, ट्रेडिंग शेड्यूल और छुट्टियों को अंतिम रूप देने से पहले एक्सचेंज आपस में परामर्श करते हैं। इन चर्चाओं के पूरा होने के बाद ही मुहूर्त ट्रेडिंग के फाइनल शेड्यूल की घोषणा होने की उम्मीद है। सूत्रों के अनुसार, एक्सचेंज इस अनुरोध पर विचार कर रहे हैं। शुरुआती योजना के तहत, मुहूर्त ट्रेडिंग दोपहर 2:20 बजे से 3:20 बजे के बीच हो सकती है। इससे पहले दोपहर 1:50 बजे से 2:05 बजे तक ‘ब्लॉक डील विंडो’ और उसके बाद 2:05 बजे से 2:20 बजे तक ‘प्री-ओपनिंग सेशन’ हो सकता है। हालांकि, अभी तक कोई आधिकारिक सर्कुलर जारी नहीं किया गया है।

ब्रोकरों का तर्क है कि दोपहर में मुहूर्त ट्रेडिंग सत्र होने से ब्रोकरेज फर्मों, स्टॉक एक्सचेंजों, क्लियरिंग कॉरपोरेशंस, डिपॉजिटरीज, कस्टोडियंस, बैंकों और बाजार से जुड़े अन्य संस्थानों में काम करने वाले हजारों कर्मचारी अपना काम समय पर पूरा कर सकेंगे। इससे वे शाम के शुभ समय में अपने परिवारों के साथ दिवाली मना सकेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य नियमों में कोई ढील मांगना नहीं है, बल्कि मार्केट प्रोफेशनल्स को अपने परिवारों के साथ त्योहार मनाने में मदद करना है। साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि बाजार का कामकाज सुचारू रूप से चलता रहे।

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ANMI ने भी किया अनुरोध

‘एसोसिएशन ऑफ NSE मेंबर्स ऑफ इंडिया’ (ANMI) ने भी अलग से एक्सचेंजों से दोपहर में मुहूर्त ट्रेडिंग कराने के प्रस्ताव पर विचार करने का आग्रह किया है। उन्होंने इसके पीछे ‘परंपरा, समावेशिता और वर्क-लाइफ बैलेंस’ का तर्क दिया है। ANMI के नेशनल प्रेसिडेंट कमलेश श्रॉफ का कहना है, “इससे हमारी बाजार की पुरानी परंपरा भी बनी रहेगी और ब्रोकरों, कर्मचारियों व उनके परिवारों को देर शाम तक चलने वाले ट्रेडिंग सत्र के दबाव के बिना, साथ में दिवाली मनाने का मौका मिलेगा।”

ब्रोकरों ने ‘मुहूर्त ट्रेडिंग’ के बाद पूरी की जाने वाली अनुपालन (Compliance) जरूरतों का भी जिक्र किया है। उन्होंने सुझाव दिया है कि कुछ प्रक्रियाओं, जैसे कि सिक्योरिटीज के ‘अर्ली पे-इन’ और फंड एलोकेशन को अगले कारोबारी दिन पूरा करने की इजाजत दी जाए। अन्य सुझावों में इस स्थिति के कारण होने वाली ‘पीक मार्जिन’ की कमी पर लगने वाले जुर्माने को माफ करना, और ‘एंड-ऑफ-डे’ (EOD) एलोकेशन को अगले कारोबारी दिन सुबह 9 बजे से पहले पूरा करने की छूट देना शामिल है। मौजूदा शेड्यूल के कारण स्टॉक एक्सचेंज और क्लियरिंग कॉर्पोरेशन जैसी संस्थाओं के कर्मचारियों को अपने परिवारों के साथ त्योहार मनाने के लिए बहुत कम समय मिल पाता है।

अनुपालन की बढ़ती जरूरतों और रिपोर्टिंग की सख्त समय-सीमाओं के कारण, कर्मचारियों को अक्सर फंड एलोकेशन और सिक्योरिटीज के ‘अर्ली पे-इन’ जैसी पोस्ट-ट्रेड प्रक्रियाओं को पूरा करने के लिए देर तक रुकना पड़ता है। जब तक वे अपना काम खत्म करके घर पहुंचते हैं, तब तक दिवाली मनाने का आनंद खत्म हो चुका होता है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Yes Bank Share Price: AT-1 बॉन्ड्स पर कोर्ट के फैसले पर दूसरे दिन भी शेयर धड़ाम, City ने घटाया टारगेट प्राइस

Yes Bank Share Price: दिग्गज प्राइवेट सेक्टर लेंडर येस बैंक के शेयर आज भी बिकवाली की आंधी में फंस गए। एक कारोबारी दिन तो पहले इंट्रा-डे में यह छह साल में सबसे बड़ी गिरावट के साथ टूटकर एक साल के निचले स्तर ₹16.98 पर आ गया था। इसके शेयरों को यह शॉक ₹8415 करोड़ के AT-1 (एडीशनल टियर-1) बॉन्ड्स पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के चलते लगा है। इस झटके में शेयर एक कारोबारी दिन पहले इंट्रा-डे में 20% टूटे थे और निचले स्तर पर हल्की रिकवरी के बावजूद 14% से अधिक की गिरावट के साथ बंद हुए थे। अब आज की बात करें तो फिलहाल बीएसई पर यह 1.98% की गिरावट के साथ ₹17.79 पर है। इंट्रा-डे में आज यह 3.86% फिसलकर ₹17.45 तक आ गया था। कुछ महीने पहले 18 जून 2026 को यह एक साल के हाई ₹25.77 पर था।

क्या है Yes Bank के AT-1 बॉन्ड्स का मामला?

सुप्रीम कोर्ट ने साल 2020 में बैंक के AT-1 बॉन्ड्स को राइट ऑफ करने यानी बट्टे खाते में डालने के फैसले को गलत ठहराया है। बता दें कि बैंक की रीस्ट्रक्चरिंग के दौरान ₹8400 करोड़ के इन बॉन्ड्स को राइट-ऑफ कर दिया गया था, जिसके चलते बॉन्ड होल्डर्स को अपना मूलधन भी गंवाना पड़ा था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक यस बैंक को अब इन AT-1 बॉन्ड्स पर 9.5% और 9% की तय कूपन दर के हिसाब से पेमेंट करना होगा। बैंक ने साल 2016 और साल 2017 में इन बॉन्ड्स के जरिए ₹8,415 करोड़ जुटाए थे। यह रकम कितनी है, इसका अंदाजा इससे लगा सकते हैं कि यह वित्त वर्ष 2026 में बैंक के ₹3476 के शुद्ध मुनाफे के दोगुने से भी अधिक है।

इस फैसले को लेकर बैंक ने एक्सचेंज फाइलिंग में कहा कि वह फिलहाल सभी कानूनी विकल्पों पर गौर कर रहा है। बैंक ने यह भी कहा कि उसके पास कैपेटिल मैनेजमेंट के बेहतर रास्ते हैं, जिससे उसे अपने ग्रोथ के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए अतिरिक्त पूंजी से जुड़े फैसलों को लेकर फ्लेक्सिबिलिटी बनी रहेगी। यस बैंक के मुताबिक AT-1 बॉन्ड्स से जुड़े फैसले से 30 जून 2026 तक के CET-1 रेश्यो (मुनाफा समेत) पर लगभग 250 बेसिस पॉइंट्स का असर पड़ सकता है तो प्रो-फॉर्मा आधार पर टियर-1 रेश्यो 14% पर ही बना रहेगा।

क्या है ब्रोकरेज फर्म का रुझान

वैश्विक इंवेस्टमेंट बैंकिंग फर्म सिटी ने येस बैंक की सेल रेटिंग को बरकरार रखा है लेकिन टारगेट प्राइस को ₹22 से घटाकर ₹17.5 कर दिया। सिटी के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट का फैसला येस बैंक के लिए झटका है और इससे सीईटी-1 कम हो सकता है। सिटी का कहना है कि एटी-1 बॉन्ड्स को स्पष्ट रूप से बैंक की पूंजी बढ़ाने के लिए राइट ऑफ किया गया था। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि येस बैंक के CET-1 रेश्यो में 250 बेसिस पॉइंट की कमी आएगी और कूपन पेमेंट को स्वैच्छिक और नॉन-कम्युलेटिव मानते हुए यह गिरकर 11.5% (सिर्फ मूलधन के आधार पर) रह जाएगा। इससे बैंक की बुक वैल्यू में 13% से 14% की गिरावट आएगी, जिसके चलते बफर को फिर से बहाल करने के लिए बैंक को अतिरिक्त पूंजी जुटाने की जरूरत पड़ेगी।

Muhurat Trading 2026: दशहरा को क्लोजिंग के बाद रविवार को दिवाली, 10 साल में चौथी बार छुट्टी के दिन मुहूर्त ट्रेडिंग!

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Agniveer Retirement Benefits: अग्निवीरों का पहला बैच इस दिन होगा रिटायर, 10 लाख रुपये और सरकारी नौकरी में आरक्षण के साथ जानिए मिलेंगी क्या सुविधाएं

Agniveer Retirement Benefits: देश की तीनों सेनाओं में अग्निपथ योजना के तहत अग्निवीरों की भर्ती 4 साल पहले हुई थी। इस योजना के तहत भर्ती अग्निवीरों का पहला बैच भारतीय नौसेना में चार साल की सेवा पूरी करके 21 नवंबर 2026 को रिटायर होने जा रहा है। यह ऐतिहासिक पल होने के साथ ही बेहद अहम भी होगा, क्योंकि अब सभी का ध्यान सेना से सेवा निवृत्त होने वाले इन युवाओं के भविष्य पर होगा। सरकार ने इनके पुनर्वास और भविष्य को सुरक्षित करने के लिए क्या पुख्ता इंतजाम किए हैं।

अग्निपथ योजना के तहत देश की सेनाओं में 4 साल पहले अग्निवीरों की भर्ती के समय देशभर में इसको लेकर भारी चर्चा और बहस छिड़ी थी। भारतीय नौसेना से अग्निवीरों का पहला बैच 21 नवंबर 2026 को 4 साल की सेवा पूरी करके रिटायर होगा। अग्निपथ योजना के तहत लगभग 75% अग्निवीर सेवा मुक्त हो जाएंगे। बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले 25% युवाओं को सेना में स्थायी (Permanent) कर लिया जाएगा। खबर है कि तीनों सेनाएं रिटेंशन रेट को बढ़ाने पर विचार कर रही हैं। इस संबंध में सरकार को नया प्रस्ताव भेजने की तैयारी है।

सेवा पूरी होने पर अग्निवीरों को मिलेंगी ये सुविधाएं

सेवा निधि पैकेज : रिटायर हो रहे हर अग्निवीर को एकमुश्त लगभग 10.04 लाख रुपये का सेवा निधि पैकेज मिलेगा. यह रकम टैक्स-फ्री होगी। इसमें युवा का अपना योगदान, सरकार का बराबर का हिस्सा और उस पर मिलने वाला ब्याज शामिल होता है।

जीवन बीमा कवर : सेवा काल के दौरान अग्निवीरों को 48 लाख रुपये का बीमा कवर मिलता है। यह उनके और उनके परिवार के लिए बड़ा सुरक्षा कवच साबित होगा।

स्किल सर्टिफिकेट : रिटायर होने वाले अग्निवीरों को स्किल सर्टिफिकेट (कौशल प्रमाण पत्र) दिया जाता है। इससे उन्हें आगे प्राइवेट या सरकारी नौकरी में इंटरव्यू के दौरान प्राथमिकता मिल सकेगी। हालांकि, इन्हें ग्रेच्युटी, पेंशन या मेडिकल और कैंटीन की आजीवन सुविधाएं नहीं मिलेंगी।

रिटायर अग्निवीरों के भविष्य के लिए सरकार का प्लान

सरकार के साथ कई मंत्रालय सेवानिवृत्त होने वाले अग्निवीरों का सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने के लिए कई विकल्प तैयार किए हैं। आइए जानें :

अर्धसैनिक बलों (CAPF) में 50% आरक्षण : बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी और असम राइफल्स जैसी सुरक्षा बलों में कॉन्स्टेबल (जनरल ड्यूटी) और राइफलमैन के पदों पर पूर्व अग्निवीरों के लिए 50 फीसदी सीटें आरक्षित कर दी गई हैं। इनके लिए ‘पूर्व-अग्निवीर’ नाम से नई कैटेगरी भी बनाई गई है।

गृह मंत्रालय का नया पोर्टल : पूर्व अग्निवीरों को कॉरपोरेट और सरकारी सेक्टर में आसानी से एडजस्ट करने के लिए गृह मंत्रालय विशेष पोर्टल तैयार कर रहा है। इसके जरिए इन्हें नौकरी के ढेरों विकल्प मिलेंगे।

राज्य सरकारों का कोटा और आयु में छूट : उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों की सरकारों ने पुलिस और अन्य विभागों में पूर्व अग्निवीरों के लिए 10 से 20 प्रतिशत तक पद रिजर्व किए हैं। साथ ही, आयु सीमा में 3 से 5 साल तक की छूट का ऐलान भी किया गया है, जिससे ये युवा आसानी से सरकारी नौकरी पा सकें।

फिजिकल और लिखित परीक्षा से छूट : इन सुरक्षा बलों में भर्ती के दौरान पूर्व अग्निवीरों को फिजिकल स्टैंडर्ड टेस्ट (PST), फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट (PET) और लिखित परीक्षा से छूट दी जाएगी।

Shardiya Navratri 2026 Muhurat: कल गज वाहन पर वैधृति योग और चित्रा नक्षत्र में होगा मां दुर्गा का आगमन, जानें कलश स्थापना का मुहूर्त

Shardiya Navratri 2026 Muhurat: कल गज वाहन पर वैधृति योग और चित्रा नक्षत्र में होगा मां दुर्गा का आगमन, जानें कलश स्थापना का मुहूर्त

Shardiya Navratri 2026 Muhurat: हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि का पर्व विशेष महत्व रखता है। यह हिंदू कैलेंडर में आने वाली चार नवरात्रि पर्वों में से एक है, जिसमें मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। चार में से दो नवरात्रि, माघ और आषाढ़ में साधक गुप्त रूप से नौ सिद्धियों की उपासना करते हैं। जबकि चैत्र और शारदीय नवरात्रि का पर्व गृहस्थ भक्तों समेत सभी अन्य विशेष उत्साह और धूमधाम से मनाते हैं। शारदीय नवरात्रि की शुरुआत अश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से होती है और दशमी तिथि को इस पर्व का समापन होता है।

इस साल शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ 11 अक्टूबर दिन रविवार से हो रहा है। रविवार को मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर धरती पर आएंगी। हाथी पर माता की सवारी भक्तों के लिए सुख, समृद्धि और उन्नति देने वाली मानी जाती है। शारदीय नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना से नवदुर्गा की पूजा शुरू होती है। इस बार कलश स्थापना के लिए दो शुभ मुहूर्त मिल रहे हैं। पंचांग के अनुसार, पहले दिन यानी प्रतिपदा पर वैधृति योग और द्विपुष्कर योग बन रहा है। इसके साथ ही चित्रा नक्षत्र भी विद्यमान रहेगा। आइए जानें प्रतिपदा के दिन कलश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त क्या है?

शारदीय नवरात्रि 2026 प्रतिपदा तिथि मुहूर्त

आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ : 10 अक्टूबर, शनिवार, रात 9:19 बजे

आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि का समापन : 11 अक्टूबर, रविवार, रात 9:30 बजे

कलश स्थापना मुहूर्त 2026

नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना का मुहूर्त सुबह में 06:19 ए एम से है और सुबह 10:12 ए एम तक रहेगा। दोपहर में कलश स्थापना मुहूर्त 11:44 ए एम से लेकर 12:31 पी एम तक है।

नवरात्रि के पहले दिन के मुहूर्त और योग

ब्रह्म मुहूर्त : प्रात: 04:40 बजे से लेकर 05:30 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त : 11:44 ए एम से दोपहर 12:31 बजे तक

द्विपुष्कर योग : रात 09:30 बजे से लेकर रात 10:32 बजे तक

वैधृति योग : प्रात:काल से लेकर रात 09:05 बजे तक

चित्रा नक्षत्र : प्रात:काल से लेकर रात 10:32 बजे तक

उदया तिथि के आधार पर 11 अक्तूबर यानी रविवार को नवरात्र का प्रथम दिवस मान्य होगा। इस दिन मां शैलपुत्री की पूजा होती है।

शारदीय नवरात्रि 2026 कलश स्थापना सामग्री

शारदीय नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के स्वागत और उनकी कृपा प्राप्ति के लिए घटस्थापना का विशेष विधान है। यह पूजा का सबसे महत्वपूर्ण आरंभिक चरण है। यहाँ कलश स्थापना के लिए जरूरी सामग्री दी गई है :

सामग्री सूची

मिट्टी का बर्तन/छोटा घड़ा या कलश : तांबे, पीतल या मिट्टी का कलश

शुद्ध जल : गंगा जल मिला हुआ साफ पानी

पंचरत्न या सिक्के : कलश में डालने के लिए

आम या अशोक के पत्ते : 5 या 7 पत्ते कलश के मुख पर रखने के लिए

जटा वाला नारियल : जिस पर लाल कपड़ा या कलावा बंधा हो

बुआई के लिए सामग्री : एक चौड़ा मिट्टी का पात्र और उसमें बोने के लिए साफ जौ या गेहूं, तथा शुद्ध मिट्टी

पूजन सामग्री : रोली, कलावा, अक्षत, सुपारी, और पुष्प

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Janmashtami Laddu Gopal Puja Vidhi: इस जन्माष्टमी पर कैसे करें लड्डू गोपाल की पूजा और श्रृंगार? जानें कल पूजा की संपूर्ण विधि

Janmashtami Laddu Gopal Puja Vidhi: भगवान विष्णु के सभी अवतारों में कृष्णावतार सबसे लोकप्रिय और मोहक माना जाता है। यही वजह है कि भगवान के इस अवतार के जन्मोत्सव का पर्व भी अत्यंत उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को श्रीकृष्ण ने देवकी और वासुदेव के आठवें पुत्र के रूप में जन्म लिया था। माना जाता है कि श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इसलिए भगवान के भक्त हर साल भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाते हैं। इस साल जन्माष्टमी का पर्व कल यानी 4 सितंबर को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान कृष्ण के बाल रूप लड्डू गोपाल का श्रृंगार किया जाता है और निशिता काल में विशेष पूजा की जाती है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर निशिता काल में लड्डू गोपाल के जन्म, अभिषेक और श्रृंगार की प्रामाणिक पूजा विधि निम्न प्रकार है:

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तैयारी

पूजा स्थान : चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और उस पर फूलों व मोर पंख से झूला या आसन सजाएं।

सामग्री : पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल), खीरा (डंठल व पत्ती वाला), नए वस्त्र, आभूषण, चंदन, अक्षत, तुलसी दल, माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी और आरती की थाली तैयार रखें।

जन्मोत्सव और खीरा चीरने की विधि

  • मध्यरात्रि में खीरे के ऊपरी हिस्से को सिक्के या चाकू से काटकर बाल गोपाल का ‘नाल छेदन’ (जन्म का प्रतीक) करें।
  • ‘नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की’ के जयकारों के साथ शंख और घंटी बजाकर कान्हा के प्राकट्य का स्वागत करें।

पंचामृत और शुद्ध जल से अभिषेक

  • लड्डू गोपाल को एक बड़े पात्र (परात) में विराजमान करें।
  • सबसे पहले गंगाजल अर्पित करें, फिर क्रम से दूध, दही, शुद्ध देसी घी, शहद और शक्कर (या पंचामृत मिश्रण) से “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करते हुए स्नान कराएं।
  • अंत में हल्के गुनगुने या साफ जल से इत्र मिलाकर अच्छी तरह स्नान कराएं और साफ तौलिए से पोंछें।

इस तरह करें लड्डू गोपाल का श्रृंगार

  • कान्हा को नए सुंदर पीले या रंगीन वस्त्र (पीतांबर) पहनाएं।
  • माथे पर चंदन और रोली का तिलक लगाएं तथा अक्षत (चावल) चढ़ाएं।
  • मुकुट, वैजयंती माला, बाजूबंद, कड़े, कुंडल और कमरधनी पहनाएं।
  • उनके हाथ में बांसुरी सजाएं और मुकुट में मोर पंख अवश्य लगाएं।

भोग और आरती

  • कान्हा को प्रिय माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी, ऋतु फल और मिठाइयों का भोग लगाएं।
  • प्रत्येक भोग सामग्री में तुलसी दल (तुलसी का पत्ता) जरूर रखें, क्योंकि इसके बिना भगवान भोग स्वीकार नहीं करते।
  • कपूर और घी का दीपक जलाकर बाल गोपाल की आरती गाएं।
  • पूजा और आरती के बाद लड्डू गोपाल को प्रेमपूर्वक सजाए गए झूले पर विराजमान करें।
  • भक्ति भाव से उन्हें झूला झुलाएं, क्षमा प्रार्थना करें और परिवार के सुख-समृद्धि की कामना करते हुए सभी में प्रसाद बांटें।

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Rakhi Shubh Muhurat: सुबह का शुभ मुहूर्त चूक गए तो जानिए आज रक्षाबंधन पर कब-कब बांधी जा सकती है राखी और कब नहीं

Rakhi Shubh Muhurat: रक्षा बंधन का पर्व सावन माह की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। साल 2026 में 27 अगस्त को सुबह 9.08 बजे शुरू हुई पूर्णिमा तिथि आज यानी 28 अगस्त को सुबह 9.48 बजे तक ही व्याप्त थी। 27 अगस्त को सावन पूर्णिमा तिथि सूर्य व्यापिनी नहीं थी। साथ ही, पूर्णिमा तिथि लगने के साथ ही सुबह 9.08 बजे से भद्रा भी लग रही थी। भद्रा को हिंदू धर्म में सबसे अशुभ समय माना जाता है, जिसमें शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। रक्षा बंधन का पर्व भी भद्रा काल में करने की मनाही है।

वहीं, आज यानी 28 अगस्त को उदयातिथि में सावन पूर्णिमा होने और भद्रा रहित समय मिलने की वजह से रक्षा बंधन का पर्व आज मनाया जा रहा है। लेकिन पूर्णिमा तिथि सुबह जल्दी समाप्त होने के करण ऐसे बहुत से भाई-बहन हैं, जो इस समय में राखी नहीं बांध पाए होंगे। ऐसे में क्या अब वे अपना त्योहार नहीं मना पाएंगे? अगर आप भी ऐसा ही कुछ सोच रहे हैं, तो आज यानी 28 अगस्त को दिन के कुछ अन्य शुभ मुहूर्त हम आपको बता रहे हैं, जिसमें बहनें अपने भाइयों को बिना किसी दुविधा या संकोच के राखी बांध सकती हैं और धूमधाम से पर्व का आनंद ले सकती हैं।

राखी बांधने का शुभ मुहूर्त

सावन माह की पूर्णिमा तिथि 28 अगस्त 2026 को सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक थी। रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने का सबसे उत्तम मुहूर्त सुबह 6 बजकर 23 मिनट से सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 14 मिनट से दोपहर 1 बजकर 5 मिनट तक रहेगा।

राखी बांधने का मुहूर्त 28 अगस्त 2026

चल चौघड़िया : सुबह में 5 बजकर 57 मिनट से 7 बजकर 33 मिनट तक।

लाभ चौघड़िया : सुबह में 7 बजकर 33 मिनट से 9 बजकर 10 मिनट तक।

अमृत चौघड़िया : सुबह में 9 बजकर 10 मिनट से 10 बजकर 46 मिनट तक।

शुभ चौघड़िया : दोपहर में 12 बजकर 22 मिनट से 1 बजकर 58 मिनट तक।

आज इस समय भूलकर भी न बांधें राखी

ऊपर बताए गए मुहूर्त राखी बांधने के लिए शुभ रहेंगे। लेकिन, इस दौरान आपको कुछ बातों का विशेष ख्याल रखना होगा। जैसे की राहुकाल और रोग चौघड़िया जैसे अशुभ मुहूर्त में राखी न बांधे। 28 अगस्त को राहुकाल का समय सुबह 10 बजकर 30 मिनट से दोपहर 12 बजकर 00 मिनट तक है। वहीं, इस दिन रोग चौघड़िया का समय दोपहर में 1 बजकर 58 मिनट से 3 बजकर 35 मिनट तक है। इसके अलावा उद्वेग चौघड़िया दोपहर में 3 बजकर 35 मिनट से 7 बजकर 11 मिनट तक रहेगा।

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Rakhi Puja Thali Items: रक्षा बंधन पूजा की थाली में क्यों रखी जाती हैं ये 7 चीजें, जानें क्या हैं ये और इनका महत्व

Rakhi Puja Thali Items: भाई बहन के प्रेम का प्रतीक पर्व रक्षा बंधन कल धूमधाम से मनाया जाएगा। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र यानी राखी बांधती हैं। उन्हें तिलक कर आरती उतारती हैं। इस तरह वे अपने भाई पर आने वाले हर खतरे, हर परेशानी से सुरक्षा की कामना करती हैं और उन्हें जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।

भाई अपनी बहन की हमेशा देखभाल और सुरक्षा का वचन देते हैं। हर साल सावन माह की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह पर्व कल पूरे जोश और उल्लास के साथ संपन्न होगा। रक्षाबंधन पर भाई की कलाई पर राखी बांधने से पहले पूजा की थाली को सही तरीके से सजाना धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बहुत शुभ माना जाता है।

रक्षाबंधन का मुहूर्त 2026

श्रावण पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ : 27 अगस्त, गुरुवार, सुबह 9:08 बजे से

श्रावण पूर्णिमा तिथि का समापन : 28 अगस्त, शुक्रवार, सुबह 9:48 बजे पर

राखी बांधने का मुहूर्त : सुबह 05:57 बजे से लेकर सुबह 9:48 बजे तक

थाली में ये 7 चीजें जरूर होनी चाहिए

राखी (रक्षासूत्र): भाई की कलाई पर बांधने के लिए राखी थाली की सबसे मुख्य सामग्री है। यह भाई-बहन के पवित्र रिश्ते और रक्षा के वचन को दर्शाती है।

दीपक : आरती उतारने के लिए देसी घी या तेल का जलता हुआ दीपक थाली में रखें। भाई की आरती उतारकर उसकी लंबी उम्र और बुरी नजर से रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

अक्षत (साबुत चावल): तिलक लगाने के बाद उस पर अक्षत लगाया जाता है। ध्यान रखें कि चावल टूटे हुए न हों। अक्षत अखंड सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक है।

रोली या कुमकुम : रक्षाबंधन पर भाई के माथे पर तिलक लगाने के लिए रोली अनिवार्य है। इसे शुभता, विजय और आरोग्य का प्रतीक माना जाता है।

मिठाई : तिलक और आरती के बाद भाई का मुंह मीठा कराने के लिए मिठाई जरूर रखें। इससे रिश्ते में मिठास और स्नेह बना रहता है।

नारियल (श्रीफल): कई परंपराओं में राखी बांधते समय भाई के हाथ में नारियल दिया जाता है। नारियल को सुख-समृद्धि और शुभ कार्यों की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।

गंगाजल या थोड़ा पानी : तिलक बनाने (रोली घोलने) के लिए और हाथ धोने के लिए थाली में थोड़ा सा गंगाजल या जल का छोटा पात्र रखें।

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