Krishna Janmotsav 2026: आज आधी रात में पधारेंगे मुरलीधर श्याम, जानें आज निशिता काल पूजा विधि, महत्व और पारण का सही समय

Krishna Janmotsav 2026: आज भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है और आज के दिन ही द्वापर युग में देवकी और वासुदेव के आठवें पुत्र श्रीकृष्ण के रूप में भगवान विष्णु ने अवतार लिया था। इसलिए हर साल इस दिन भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस दिन मध्यरात्रि में भक्त वत्सल मनमोहन श्याम अपने लाखों करोड़ों भक्तों के बीच जन्म लेते हैं। निशिता काल में जब यह पल आता है, तब शंख और घंटों की आवाज और कृष्ण कन्हैया लाल की जय के साथ भगवान के अवतरण का उत्सव मनाया जाता है।

इस साल 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को भगवान श्रीकृष्ण का 5253वीं जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। बहुत से भक्त आज के दिन व्रत करते हैं, घर और मंदिर में भगवान कृष्ण के जन्म और लीलाओं की झाकियां सजाते हैं। आइए कृष्ण जन्माष्टमी पर जानते हैं तिथि, समय, महत्व, पूजा विधि, नियम, व्रत के प्रकार और पारण का समय।

जन्माष्टमी 2026: मध्यरात्रि निशिता काल पूजा विधि

  • भगवान कृष्ण की मूर्ति को धोकर साफ चौकी पर एक नया या साफ कपड़ा बिछाएं।
  • इसके बाद फलों, मोर पंख, तुलसी के पत्तों और पालकी को सजाएं।
  • भगवान कृष्ण की लड्डू गोपाल मूर्ति को पंचामृत से स्नान कराएं। इसके बाद साफ जल और आखिर में गंगाजल की कुछ बूंदें डालें।
  • मूर्ति को साफ कपड़े से सुखाएं, इसके बाद नए कपड़े पहनाएं, आभूषण लगाएं, मुकुट में मोर पंख और हाथ में बांसुरी दें। चंदन और रोली का तिलक और अक्षत लगाएं।
  • इसके बाद भगवान कृष्ण को पंजीरी, तुलसी पत्ते, फल-फूल, माखन-मिश्री और पंचमेवा का भोग अर्पित करें।
  • इसके बाद भगवान कृष्ण को पालने में बिठाएं और ‘नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल’ की गीत गाते हुए धीरे से झुलाएं।
  • इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ा मंत्र ‘ऊं’ नमो भगवते वासुदेवाय नम: मंत्र का जाप करें। संभव हो तो कृष्ण अष्टकम का जाप करें।
  • भगवान कृष्ण की जन्म घोषणा करने के लिए शंख बजाएं फिर घी के दीये और कपूर से आरती करें। प्रसाद और चरणामृत सभी में बांटें।
  • पारण व्रत से जुड़े नियम

कई भक्त जाने-अनजाने में आधी रात की आरती के फौरन बाद ही व्रत तोड़ देते हैं। जबकि जन्माष्टमी व्रत का पारणा अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र दोनों के समाप्त होने के बाद ही किया जाता है।

अष्टमी तिथि 5 सितंबर को सुबह 11 बजकर 23 मिनट तक रहेगा, इसलिए सही मायने में पारण शनिवार की सुबह ही करनी चाहिए।

जन्माष्टमी पूजा सामग्री

दूध, दही, शुद्ध देसी घी, शहद, चीनी, तिलक के लिए रोली और चंदन पाउडर, अक्षत (साबुत चावल) मौली या कलावा, अभिषेक करने के लिए तांबे का लोटा, शंख, आरती के लिए भीमसेनी कपूर और सूती बत्तियां, भोग के लिए पंचमेवा, माखन-मिश्री और धनिया पंजीरी आरती की थाली, घी का दीया, अगरबत्ती, तुलसी पत्ता, मोर पंख, बांसुरी, मूर्ति के लिए वस्त्र।

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नेपाल की टनल से 9 दिन बाद जिन संजय शाह को निकाला गया क्या वो मंत्र के सहारे जिंदा रहे?

नेपाल में आई तबाही के असर अब तक वहां दिख रहा है। इस विनाशकारी बाढ़ में अब तक एक हजार से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है और 2000 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं। वहीं इस भीषण तबाही के बीच ऐसी भी कहानियां भी सामने आ रही हैं, जिससे लोगों को हौसला मिल रहा है। ऐसी ही कहानी नेपाल के एक पावर प्लांट में काम करने वाले संजय साह की सामने आई है। संजय साह को नौ दिनों बाद टनल से रेस्क्यू किया गया है।

कमाल की है संजय साह की कहानी 

बता दें कि, पावर प्लांट में काम करने वाले संजय साह के सामने उस वक्त मुश्किल फैसला था, जब प्लांट के पास पहाड़ का बड़ा हिस्सा टूटकर गिर गया। वह चाहते तो अपनी जान बचाने के लिए वहां से निकल सकते थे, लेकिन उन्होंने रुककर दूसरे लोगों की मदद करने का फैसला किया। करीब नौ दिन तक बर्फ, पत्थरों और मलबे के बीच फंसे रहने के बाद शुक्रवार को संजय और एक अन्य कर्मचारी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस बचाव से इस बड़ी आपदा के बाद लापता लोगों की तलाश कर रही टीमों को भी नई उम्मीद मिली है।

टनल से नौ दिन बाद किया गया रेस्क्यू

नेपाल के अधिकारियों की ओर से जारी किए गए एक वीडियो में 30 वर्षीय संजय साह स्ट्रेचर पर लेटे नजर आए। उनके चेहरे पर ऑक्सीजन मास्क लगा हुआ था। उन्होंने सेना के अधिकारियों को बताया, “मैं टनल के कंट्रोल रूम में था। आमतौर पर वहां चार से छह लोग रहते हैं, लेकिन उस दिन करीब 40 से 45 लोग मौजूद हो सकते थे। मेरी जिम्मेदारी सभी की जान बचाना थी। जब इतना बड़ा हादसा हुआ, तब मेरा वहां से भागना सही नहीं होता।”

लगातार किया मंत्रों का जाप

उन्होंने बताया कि जैसे ही उन्हें ऊपर पहाड़ पर हादसा होने की जानकारी मिली, उन्होंने सुरंग में मौजूद लोगों को तुरंत सतर्क किया और बाहर निकलने के लिए कहा। हालांकि, खुद बाहर जाने का मौका उन्हें नहीं मिल पाया और जब तक उन्होंने निकलने की कोशिश की, तब तक रास्ता बंद हो चुका था। अधिकारियों के मुताबिक, त्रिशूली नदी के किनारे बने छह हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में करीब 900 लोगों के फंसे होने की आशंका है। साह ने बताया कि उन्होंने सुरंग में बिताए उन नौ दिनों के दौरान हिम्मत बनाए रखने के लिए मंत्रों का जाप किया।

फिलहाल हॉस्पिटल में कराया गया भर्ती 

सुरंग के अंदर तीन-चार अन्य मजदूरों से संपर्क बनाए रखा और बताया कि कुछ लोग अभी भी पहाड़ के अंदर फंसे हो सकते हैं। साह और उनके साथ बचाए गए कबीर महारजन, जो मैकेनिकल सुपरवाइजर हैं, इस हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट से सुरक्षित निकाले गए पहले मजदूर हैं। हादसे के कुछ घंटे बाद कुछ मजदूर दूसरी सुरंग से बाहर निकलने में सफल रहे थे। नेपाली सेना की ओर से जारी वीडियो में साह को एक मजदूर की पीठ पर ले जाकर बाहर लाते हुए देखा गया, इस दौरान उनका चेहरा मिट्टी और कीचड़ से भरा हुआ था। बचाए गए संजय साह और कबीर महारजन को इलाज के लिए काठमांडू के एक आर्मी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां दोनों को आईसीयू में रखा गया है।

 

Happy Krishna Janmashtami Wishes 2026: नंद के घर आनंद भयो, 50+ शानदार मैसेज के साथ अपनों को भेजें जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं

Happy Krishna Janmashtami Wishes 2026: जन्माष्टमी हिंदू धर्म के प्रमुख और बेहद पावन त्योहारों में से एक है। यह दिन भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। भक्त इस खास अवसर पर पूरे श्रद्धाभाव से कान्हा की पूजा-अर्चना करते हैं और उनके बाल स्वरूप की झांकियां सजाकर उत्सव का आनंद लेते हैं। हर साल की तरह इस वर्ष भी जन्माष्टमी का पर्व पूरे देश में उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाएगा। वर्ष 2026 में यह पावन त्योहार 04 सितंबर को मनाया जाएगा। जन्माष्टमी केवल पूजा-पाठ और उत्सव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अपने प्रियजनों के साथ प्रेम और खुशियां बांटने का भी अवसर है। इस दिन दोस्तों, रिश्तेदारों और परिवार के सदस्यों को शुभकामनाएं भेजकर आप उनके चेहरे पर मुस्कान ला सकते हैं। त्योहारों के मौके पर भेजे गए प्यार भरे संदेश रिश्तों में अपनापन बढ़ाने और उन्हें और मजबूत बनाने का काम करते हैं।

अगर आप भी इस जन्माष्टमी पर अपनों को खास अंदाज में बधाई देना चाहते हैं, तो भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और प्रेम से भरे खूबसूरत संदेश भेजें। “हैप्पी कृष्ण जन्माष्टमी” कहकर अपने प्रियजनों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना जरूर करें।

जन्माष्टमी के 25 संदेश

1.श्री कृष्ण की कृपा आप और आपके परिवार पर सदैव बनी रहे। श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ।

2. नटखट नंदलाल आपके जीवन में खुशियों की बहार लाएँ और हर दुख दूर करें। जय श्री कृष्ण!

3. मुरली की धुन आपके जीवन को प्रेम और आनंद से भर दे। हैप्पी जन्माष्टमी!

4. कान्हा की कृपा से आपके घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहे। जन्माष्टमी की शुभकामनाएँ।

5. राधे-राधे बोलो, कृष्ण नाम में डूब जाओ। भगवान श्री कृष्ण आपका जीवन खुशियों से भर दें।

6. माखन चुराने वाले कान्हा आपके सभी दुख चुरा लें। जय श्री कृष्ण!

7. जिसके सिर पर हाथ हो कान्हा का, उसे डर कैसा संसार का। जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ।

8. कृष्ण की भक्ति में जो रंग जाए, उसका जीवन खुशियों से भर जाए। शुभ जन्माष्टमी!

9. श्री कृष्ण आपके जीवन में प्रेम, शांति और सफलता का प्रकाश भरें।

10. नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की! आप सभी को जन्माष्टमी की शुभकामनाएँ।

11. कान्हा की बंसी की मधुर धुन आपके जीवन में नई उमंग और नई खुशियाँ लेकर आए।

12. हर पल हो कृष्ण का नाम, हर दिन हो खुशियों की सौगात। शुभ जन्माष्टमी!

13. कृष्ण की लीला अपरंपार, उनकी कृपा से हो जीवन खुशहाल।

14. राधा के प्रेम और कृष्ण की भक्ति से आपका जीवन हमेशा महकता रहे।

15. कान्हा आपके जीवन की हर परेशानी को दूर कर खुशियों से भर दें। जय श्री कृष्ण!

16. जन्माष्टमी का यह पावन पर्व आपके परिवार के लिए सुख-समृद्धि लेकर आए।

17. मन में कृष्ण, हृदय में प्रेम और जीवन में खुशियाँ यही हो जन्माष्टमी का संदेश।

18. श्री कृष्ण के चरणों में श्रद्धा रखिए, हर मुश्किल आसान हो जाएगी। शुभ जन्माष्टमी!

19. कान्हा की मुस्कान आपके जीवन की सारी उदासी मिटा दे। जन्माष्टमी की शुभकामनाएँ।

20. कृष्ण नाम का दीप आपके जीवन से अंधकार मिटाकर उजाला भर दे।

21. प्रेम हो राधा जैसा, भक्ति हो मीरा जैसी और विश्वास हो कृष्ण जैसा। शुभ जन्माष्टमी!

22. श्री कृष्ण की कृपा से आपके जीवन में हर दिन उत्सव जैसा हो।

23. मुरली वाले की मुरली आपके जीवन में प्रेम की मिठास घोल दे। जय श्री कृष्ण!

24. नंदलाल की कृपा से हर मनोकामना पूरी हो और हर घर में खुशियाँ आएँ।

25. नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की! आप सभी को श्री कृष्ण जन्माष्टमी की ढेरों शुभकामनाएँ।

जन्माष्टमी की 30 शायरियाँ

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1.मुरली की धुन और राधा का प्यार,

मुबारक हो आपको जन्माष्टमी का त्योहार।

2. माखन चुराकर जिसने सबके दिल चुराए,

वो नंदलाल आपके जीवन में खुशियाँ लाए।

3. राधा के दिल में कृष्ण, कृष्ण के दिल में राधा,

इनके प्रेम जैसा सुंदर हो जीवन हमारा।

4. नटखट कान्हा की प्यारी मुस्कान,

कर दे हर दिल को खुशहाल और महान।

5. बंसी की धुन सुनकर मन हो जाए मगन,

कृष्ण नाम से रोशन हो जीवन का हर क्षण।

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6. कृष्ण की भक्ति में रंग जाओ,

सारे गम भूलकर मुस्कुराओ।

7. नंद के घर जब कान्हा आए,

हर ओर खुशियों के दीप जलाए।

8. जिसके सिर पर हाथ कन्हैया का,

उसका क्या बिगाड़े जमाना।

9. राधा का प्रेम, कृष्ण की मुरली,

दोनों लगें दुनिया में सबसे प्यारी।

10. कान्हा की बंसी की धुन निराली,

उनकी भक्ति दुनिया से प्यारी।

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11. दिल में बसाओ श्री कृष्ण का नाम,

हर मुश्किल होगी आसान तमाम।

12. मुरली वाला आया है,

खुशियों की सौगात लाया है।

13. कृष्ण की लीला सबसे न्यारी,

उनकी भक्ति सबसे प्यारी।

14. जहाँ कृष्ण का नाम होता है,

वहाँ हर दुख तमाम होता है।

15. कान्हा तेरी भक्ति में ऐसा रंग जाएँ,

दुनिया भूलकर बस तुझे ही पाएँ।

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16. राधे-राधे नाम पुकारो,

कृष्ण के चरणों में मन हारो।

17. माखन मिश्री का भोग लगाएँ,

कान्हा को दिल से याद मनाएँ।

18. श्याम की बंसी जब बजती है,

हर धड़कन कृष्ण नाम कहती है।

19. कृष्ण हैं प्रेम की पहचान,

कृष्ण हैं भक्ति की शान।

20. नंदलाल की प्यारी छवि,

हर लेती है मन की सभी कमी।

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21. कृष्ण नाम का जाप करो,

मन से सारे पाप हरो।

22. राधा-कृष्ण का प्रेम निराला,

इनसे सुंदर जग में क्या है उजाला।

23. कान्हा की कृपा हो जिस पर अपार,

उसके जीवन में रहे खुशियाँ हजार।

24. मुरली वाले की मुरली बजे,

हर मन में प्रेम के फूल सजे।

25. कृष्ण आएँ बनकर उजाला,

हर जीवन हो खुशियों वाला।

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26. गोविंद के नाम से सुबह हो,

कृष्ण की भक्ति से शाम हो।

27. राधा की चाहत, कृष्ण का प्यार,

यही है जीवन का सच्चा श्रृंगार।

28. कान्हा की मुरली और राधा का साथ,

बना दे खुशियों से भरी हर रात।

29. नटखट कान्हा की जय-जयकार,

आपको मुबारक जन्माष्टमी का त्योहार।

30. नंद के घर आनंद भयो,

जय कन्हैया लाल की।

कृष्ण भक्ति में मन रम जाए,

यही शुभकामना जन्माष्टमी की।

जन्माष्टमी पर वृंदावन जाने से पहले पढ़ें यह गाइड! बांके बिहारी मंगला आरती का समय, रूट डायवर्जन और पार्किंग नियम

जन्माष्टमी के मौके पर वृंदावन में लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है, ऐसे में शहर में जाम और भीड़ को संभालने के लिए प्रशासन ने कई रास्तों पर वाहनों की एंट्री रोक दी है। 3 सितंबर की सुबह से 5 सितंबर की सुबह तक मथुरा और वृंदावन के कई प्रमुख रास्तों पर डायवर्जन और नो-एंट्री लागू रहेगी। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग जगहों पर पार्किंग की व्यवस्था भी की गई है। इसलिए सफर शुरू करने से पहले रूट और पार्किंग की जानकारी समझ लेना आपके लिए काफी फायदेमंद रहेगा।

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मंगला आरती का समय

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर बांके बिहारी मंदिर में मंगला आरती 4 और 5 सितंबर की मध्यरात्रि रात 1:45 बजे होगी। आरती के लिए सिर्फ 600 पासधारक भक्तों को मंदिर में प्रवेश मिलेगा। इस बार श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंगला आरती का लाइव टेलीकास्ट भी किया जाएगा। इससे मंदिर में एंट्री न मिलने वाले भक्त भी घर बैठे इस खास आरती के दर्शन कर सकेंगे। भीड़ को कंट्रोल करने के साथ ज्यादा से ज्यादा श्रद्धालुओं तक आरती का दर्शन पहुंचाने के लिए यह व्यवस्था की गई है।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि के ये रूट बंद

जन्माष्टमी के दौरान श्रीकृष्ण जन्मभूमि और आसपास के इलाकों में भारी भीड़ को देखते हुए कई प्रमुख रास्तों पर वाहनों की आवाजाही रोकी जाएगी। भूतेश्वर तिराहा, मसानी चौराहा, डीग गेट, गोकरण तिराहा, चौक बाजार, भरतपुर गेट, कृष्णापुरी, स्टेट बैंक चौराहा और महाविद्या कॉलोनी जैसे रास्तों से वाहनों को आगे जाने की अनुमति नहीं होगी। मसानी चौराहा से जन्मभूमि और चौक बाजार की तरफ भी वाहनों की एंट्री बंद रहेगी। डीग गेट से जन्मभूमि की ओर भी वाहन नहीं जा सकेंगे। वहीं गोवर्धन चौराहा और मंडी चौराहा से भूतेश्वर की तरफ भारी वाहन, रोडवेज बस और ट्रैक्टर नहीं जा पाएंगे।

मथुरा आने वालों के लिए पार्किंग व्यवस्था

शहर में वाहन लेकर जाने की बजाय श्रद्धालुओं को निर्धारित पार्किंग स्थलों पर गाड़ी खड़ी करनी होगी। यमुना एक्सप्रेसवे और वृंदावन की तरफ से आने वालों के लिए पीएमबी पॉलीटेक्निक स्कूल, जयसिंहपुरा, अनुज चौधरी के खाली प्लॉट और आरके ज्वैलर्स के सामने पार्किंग की व्यवस्था की गई है। गोकुल रेस्टोरेंट और हाईवे की तरफ से आने वाले वाहनों को आरएसएस संस्था के सामने, आईएसबीटी बस अड्डे और रामलीला मैदान में पार्क कराया जाएगा। वहीं धौलीप्याऊ की तरफ से आने वाले श्रद्धालु रेलवे ग्राउंड में वाहन खड़ा कर सकेंगे।

वृंदावन में इन रास्तों पर नो-एंट्री

जन्माष्टमी पर वृंदावन में भी ट्रैफिक रेगुलेशन काफी सख्त रहेगी। छटीकरा, रुक्मिणी विहार, पानीगांव, वृंदावन कट और सौ-शय्या जैसे रास्तों से भारी वाहनों की एंट्री पर रोक रहेगी। छटीकरा-वृंदावन रोड पर मल्टीलेवल पार्किंग से आगे वाहन नहीं जा सकेंगे। इसी तरह मथुरा-वृंदावन मार्ग पर सौ-शय्या से आगे भारी और चार पहिया वाहनों को रोक दिया जाएगा। वृंदावन आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आईटीआई, दारुक, मंडी, पवनहंस हेलीपैड, एमवीडीए, पशुपैठ, पैराग्लाइडिंग और शिवा ढाबा समेत कई जगहों पर पार्किंग की व्यवस्था की गई है।

यात्रा से पहले रखें ये सावधानी

जन्माष्टमी में भीड़ बहुत ज्यादा होने की वजह से कई जगहों पर पार्किंग से मंदिर तक पैदल जाना पड़ सकता है। इसलिए बुजुर्गों और बच्चों के साथ जर्नी कर रहे हैं तो पहले से इसकी तैयारी रखें। अपना फोन, पर्स, चश्मा और जरूरी सामान सेफ रखें, क्योंकि भीड़भाड़ वाले इलाकों में सामान संभालकर रखना जरूरी है।

इससे आप जाम और रास्ता बंद होने जैसी परेशानी से काफी हद तक बच सकते हैं। इस तरह आप जन्माष्टमी पर मथुरा-वृंदावन की ट्रिप को आसान और परेशानी-फ्री बना सकते हैं।

Janmashtami Laddu Gopal Puja Vidhi: इस जन्माष्टमी पर कैसे करें लड्डू गोपाल की पूजा और श्रृंगार? जानें कल पूजा की संपूर्ण विधि

Janmashtami Laddu Gopal Puja Vidhi: भगवान विष्णु के सभी अवतारों में कृष्णावतार सबसे लोकप्रिय और मोहक माना जाता है। यही वजह है कि भगवान के इस अवतार के जन्मोत्सव का पर्व भी अत्यंत उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को श्रीकृष्ण ने देवकी और वासुदेव के आठवें पुत्र के रूप में जन्म लिया था। माना जाता है कि श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इसलिए भगवान के भक्त हर साल भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाते हैं। इस साल जन्माष्टमी का पर्व कल यानी 4 सितंबर को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान कृष्ण के बाल रूप लड्डू गोपाल का श्रृंगार किया जाता है और निशिता काल में विशेष पूजा की जाती है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर निशिता काल में लड्डू गोपाल के जन्म, अभिषेक और श्रृंगार की प्रामाणिक पूजा विधि निम्न प्रकार है:

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तैयारी

पूजा स्थान : चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और उस पर फूलों व मोर पंख से झूला या आसन सजाएं।

सामग्री : पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल), खीरा (डंठल व पत्ती वाला), नए वस्त्र, आभूषण, चंदन, अक्षत, तुलसी दल, माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी और आरती की थाली तैयार रखें।

जन्मोत्सव और खीरा चीरने की विधि

  • मध्यरात्रि में खीरे के ऊपरी हिस्से को सिक्के या चाकू से काटकर बाल गोपाल का ‘नाल छेदन’ (जन्म का प्रतीक) करें।
  • ‘नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की’ के जयकारों के साथ शंख और घंटी बजाकर कान्हा के प्राकट्य का स्वागत करें।

पंचामृत और शुद्ध जल से अभिषेक

  • लड्डू गोपाल को एक बड़े पात्र (परात) में विराजमान करें।
  • सबसे पहले गंगाजल अर्पित करें, फिर क्रम से दूध, दही, शुद्ध देसी घी, शहद और शक्कर (या पंचामृत मिश्रण) से “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करते हुए स्नान कराएं।
  • अंत में हल्के गुनगुने या साफ जल से इत्र मिलाकर अच्छी तरह स्नान कराएं और साफ तौलिए से पोंछें।

इस तरह करें लड्डू गोपाल का श्रृंगार

  • कान्हा को नए सुंदर पीले या रंगीन वस्त्र (पीतांबर) पहनाएं।
  • माथे पर चंदन और रोली का तिलक लगाएं तथा अक्षत (चावल) चढ़ाएं।
  • मुकुट, वैजयंती माला, बाजूबंद, कड़े, कुंडल और कमरधनी पहनाएं।
  • उनके हाथ में बांसुरी सजाएं और मुकुट में मोर पंख अवश्य लगाएं।

भोग और आरती

  • कान्हा को प्रिय माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी, ऋतु फल और मिठाइयों का भोग लगाएं।
  • प्रत्येक भोग सामग्री में तुलसी दल (तुलसी का पत्ता) जरूर रखें, क्योंकि इसके बिना भगवान भोग स्वीकार नहीं करते।
  • कपूर और घी का दीपक जलाकर बाल गोपाल की आरती गाएं।
  • पूजा और आरती के बाद लड्डू गोपाल को प्रेमपूर्वक सजाए गए झूले पर विराजमान करें।
  • भक्ति भाव से उन्हें झूला झुलाएं, क्षमा प्रार्थना करें और परिवार के सुख-समृद्धि की कामना करते हुए सभी में प्रसाद बांटें।

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Janmashtami Krishna photo Vastu: जन्माष्टमी पर वास्तु अनुसार घर में लगाएं श्रीकृष्ण की तस्वीर, गलत दिश में लगी तस्वीर ला सकती है कंगाली

Janmashtami Krishna photo Vastu: हिंदू धर्म में जन्माष्टमी का पर्व विशेष उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, द्वापर युग में भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान विष्णु ने देवकी और वासुदेव के आठवें पुत्र श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया था। भगवान विष्णु के सभी अवतारों में श्रीकृष्ण अवतार सर्वाधिक प्रिय माना जाता है। भगवान कृष्ण के भक्त भारत ही नहीं दुनिया के कोने-कोने में हैं। इतना ही नहीं, कान्हा के मंदिर भी दुनिया के कई देशों में हैं।

हमारे देश में श्री कृष्ण के जन्म का उत्सव बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। मंदिरों से लेकर घरों में तक श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की रौनक रहती है। लोग उपवास करते हैं, घरों में कृष्ण जन्म और बाल कृष्ण की लीलाओं की झांकियां सजाते हैं। घरों को रोशनी और भगवान कृष्ण की तस्वीरों से सुशोभित करते हैं। माना जाता है कि जन्माष्टमी के मौर पर भगवान कृष्ण की तस्वीर घर में लगाने से सकारात्मकता बढ़ती है, समृद्धि आती है और दरिद्रता दूर होती है। लेकिन भगवान कृष्ण की तस्वीर को सही दिशा में लगाना भी बहुत जरूरी है, अन्यथा यह कंगाली का कारण भी बन सकती है। इसलिए तस्वीर घर में लाने पहले, वास्तु अनुसार उसे लगाने के नियम जानना जरूरी होता है।

कैसी तस्वीर लगानी चाहिए?

वैवाहिक जीवन में खुशहाली के लिए- धार्मिक मान्यता के अनुसार, घर में राधा-कृष्ण की तस्वीर लगाने से वैवाहिक जीवन में खुशियों का आगमन होता है और पति-पत्नी का रिश्ता मजबूत होता है।

संतान प्राप्ति के लिए- अगर आप संतान की प्राप्ति चाहते हैं, तो जन्माष्टमी के दिन घर में बाल गोपाल की तस्वीर लगाएं।

धन-धान्य में वृद्धि के लिए- समृद्धि के लिए भगवान श्रीकृष्ण की गायों के साथ वाली तस्वीर लगाएं। वास्तु शास्त्र के अनुसार, ऐसी तस्वीर लगाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिसका शुभ प्रभाव परिवार के सदस्यों पर पड़ता है।

सुख-शांति के लिए- जो लोग घर में सुख, शांति और सकारात्मक संचार चाहते हैं, तो वे लोग घर में श्रीकृष्ण की मुस्कुराती हुई तस्वीर लगाएं। मान्यता है कि प्रभु के इस स्वरूप की तस्वीर लगाने से व्यक्ति को शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं।

तस्वीर लगाने की सही और शुभ दिशा

वास्तु शास्त्र के नियमों के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण की तस्वीर लगाने के लिए उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा को सबसे सर्वोत्तम माना गया है, क्योंकि इस दिशा में ईश्वर और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। इसके अलावा पूर्व या उत्तर दिशा की दीवार भी तस्वीर लगाने के लिए उपयुक्त रहती है। तस्वीर को दीवार पर इतनी ऊंचाई पर लगाएं कि वह देखने वाले की आंखों की सीध में रहे, इसे बहुत ज्यादा ऊपर या बिल्कुल नीचे फर्श के पास न टांगें।

बेडरूम में राधा-कृष्ण की तस्वीर का नियम

बेडरूम में राधा-कृष्ण की तस्वीर लगाने के लिए उत्तर-पश्चिम दिशा की दीवार सबसे बेहतर होती है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि तस्वीर बिल्कुल बिस्तर के सिरहाने या पैरों की तरफ न लगी हो। साथ ही, दर्पण के ठीक सामने तस्वीर लगाने से बचना चाहिए।

इस दिशा में भूलकर भी न लगाएं तस्वीर

वास्तु शास्त्र में दक्षिण दिशा को पितरों की दिशा माना गया है। इसलिए इस दिशा में भगवान श्रीकृष्ण की तस्वीर लगाने से नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न हो सकती है।

यहां भी श्रीकृष्ण की तस्वीर लागने से बचें

इसके अलावा, शौचालय, रसोई के ठीक ऊपर या बहुत निचले स्थानों पर भी ईश्वर का चित्र न लगाएं।

Krishna Janmashtami 2026: जन्माष्टमी पर शुभ माना जाता है इन 5 चीजों को घर लाना, भगवान कृष्ण की कृपा से भर जाता है घर

Janmashtami 2026 Vrat: 4 सितंबर को आप भी रखेंगे जन्माष्टमी का व्रत, पहले जान लें किन लोगों को नहीं रखना चाहिए उपवास

Janmashtami 2026 Vrat: हिंदू धर्म में कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व विशेष स्थान रखता है। यह पर्व हर साल भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, द्वापर युग में भगवान विष्णु ने इसी दिन माता देवकी और वासुदेव के आठवें पुत्र श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया था। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल यह पर्व 4 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा। इस साल भगवान कृष्ण की 5253वीं जयंती मनाई जाएगी।

इस दिन देश-दुनिया के कृष्ण मंदिरों में सुबह से ही कृष्ण जन्मात्सव की तैयारियां की जाती हैं। विशेष कार्यक्रम और सजावट होती है। बहुत से श्रद्धालु इस दिन उपवास भी करते हैं, अपने घरों में भगवान कृष्ण की लीलाओं की झांकी सजाते हैं और मध्यरात्रि में उनका जन्मोत्सव मनाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को विधिपूर्वक करने से भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं। शास्त्रों में इस व्रत को करने के नियमों के बारे में बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि कुछ लोगों को जन्माष्टमी का व्रत करने से बचना चाहिए।

इन्हें नहीं करना चाहिए जन्माष्टमी व्रत

  1. इसके अलावा गर्भवती महिलाओं को भी जन्माष्टमी का व्रत न करने की सलाह दी जाती है। अगर कोई गर्भवती महिला इस व्रत को करती है, तो यह उसकी सेहत और शिशु के लिए हानिकारक हो सकता है। ऐसी स्थिति में आप केवल भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना कर सकती हैं।
  2. जो लोग किसी गंभीर बीमारी का सामना कर रहे हैं, तो उन लोगों को भी जन्माष्टमी का व्रत नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में अगर आप जन्माष्टमी का व्रत करते हैं, तो इससे आपकी सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है, जिसकी वजह से आपको भारी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
  3. जन्माष्टमी का व्रत बड़े-बुजुर्गों को नहीं करना चाहिए, क्योंकि उनकी शारीरिक स्थिति कमजोर हो सकती है। ऐसी स्थिति में व्रत करने से सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है।

जन्माष्टमी व्रत के नियम

इस व्रत के दिन काले रंग के कपड़े न पहनें। ऐसा माना जाता है कि काले रंग के कपड़े धारण करने से नकारात्मक ऊर्जा आकर्षित होती है, जिसका बुरा प्रभाव पड़ता है।

पूजा के समय लड्डू गोपाल का अभिषेक करने के बाद देसी घी का दीपक जलाकर आरती करें और माखन-मिश्री, धनिए की पंजीरी आदि चीजों का भोग लगाएं। साथ ही भोग में तुलसी के पत्ते जरूर शामिल करें। ऐसा माना जाता है कि लड्डू गोपाल के भोग में तुलसी के पत्ते शामिल करने से प्रभु प्रसन्न होकर भोग को स्वीकार करते हैं।

जन्माष्टमी व्रत के दौरान गेहूं, चावल और दाल का सेवन भूलकर भी नहीं करना चाहिए। साथ ही तामसिक चीजों को भी नहीं खाना चाहिए।

इसके अलावा व्रत के दौरान ब्रह्मचर्य से जुड़े नियमों का पालन जरूर करना चाहिए। साथ ही क्रोध, झूठ और विवाद से दूरी बनाकर रखें।

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Share Market Holiday: 4 सितंबर को कृष्ण जन्माष्टमी पर शेयर बाजार बंद या होगी ट्रेडिंग, क्या कहती है छुट्टियों की लिस्ट

इस साल देश में कृष्ण जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami 2026) शुक्रवार, 4 सितंबर की है। इस दिन पूरा देश भगवान श्रीकृष्ण के जन्मदिन को बड़ी ही धूमधाम से मनाएगा। इस त्योहार के चलते कई जगहों पर छुट्टी रहेगी। लेकिन शेयर बाजार में इस मौके पर कारोबार बंद नहीं होगा। BSE और NSE पर जन्माष्टमी के दिन भी बाकी कारोबारी दिनों की तरह ही शेयरों की ट्रेडिंग होगी। इसके अलावा कमोडिटीज में ट्रेडिंग का प्लेटफॉर्म MCX (Multi Commodity Exchange) भी खुला रहने वाला है।

वैसे तो शेयर बाजार और MCX हर शनिवार और रविवार को बंद रहते हैं। लेकिन इसके अलावा कुछ दूसरे खास मौकों और सार्वजनिक अवकाशों पर भी इनमें छुट्टी रहती है। शनिवार और रविवार के अलावा सितंबर महीने में अब शेयर बाजार में अगली छुट्टी 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के मौके पर होगी। BSE पर इक्विटी सेगमेंट, इक्विटी डेरिवेटिव सेगमेंट, करेंसी डेरिवेटिव्स सेगमेंट्स, NDS-RST, ट्राई पार्टी रेपो सेगमेंट्स में ट्रेडिंग हॉलिडे है।वहीं कमोडिटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट और इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीप्ट्स (EGR) सेगमेंट में शाम का सेशन (शाम 5 बजे से 11:30/11:55 बजे तक) ओपन रहने वाला है।

NSE पर भी 14 सितंबर को इक्विटीज, इक्विटी डेरिवेटिव्स, कॉरपोरेट बॉन्ड्स, न्यू डेट सेगमेंट्स, निगोशिएटेड ट्रेड रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म, इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीप्ट्स, म्यूचुअल फंड्स, सिक्योरिटी लेंडिंग एंड बॉरोइंग स्कीम्स, करेंसी डेरिवेटिव्स और इंट्रेस्ट रेट डेरिवेटिव्स सेगमेंट्स में छुट्टी रहेगी। वहीं कमोडिटी डेरिवेटिव्स में सुबह के सेशन में ट्रेडिंग बंद रहेगी लेकिन शाम के सेशन (शाम 5 बजे से 11:30/11:55 बजे तक) में ट्रेडिंग चालू रहेगी।

बाकी बचे साल में शनिवार-रविवार के अलावा और कब बाजार रहेगा बंद

2 अक्टूबर: महात्मा गांधी जयंती

20 अक्टूबर: दशहरा

10 नवंबर: दिवाली-बलिप्रतिपदा

24 नवंबर: प्रकाश पर्व श्री गुरु नानक देव

25 दिसंबर: क्रिसमस

शनिवार/रविवार को पड़ रही छुट्टियां

8 नवंबर: दिवाली लक्ष्मी पूजन

दिवाली के मौके पर मुहूर्त ट्रेडिंग रविवार, 8 नवंबर 2026 को होगी। मुहूर्त ट्रेडिंग का समय बाद में घोषित किया जाएगा।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Janmashtami Date 2026: 4 या 5 सितंबर, कब मनाया जाएगा जन्माष्टमी का पर्व? जानें सही तारीख और निशिथ काल पूजा मुहूर्त

Janmashtami Date 2026: जन्माष्टमी का पर्व हिंदू धर्म के कई प्रमुख व्रत और त्योहारों में से एक माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, द्वापर युग में भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्रीकृष्ण ने वासुदेव और देवकी के पुत्र के रूप में जन्म लिया था। इस दिन को पूरी दुनिया में मौजूद कृष्ण भक्त बहुत धूमधाम से मनाते हैं। कृष्ण भक्त बेसब्री से इस पर्व के आने का इंतजार करते हैं। इस दिन देशभर में खास उत्साह देखने को मिलता है। जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण की विशेष पूजा-अर्चना होती है और 56 भोग लगाए जाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, लड्डू गोपाल की पूजा और व्रत करने से साधक के जीवन में खुशियों का आगमन होता है। साथ ही सुख-सृमद्धि में वृद्धि होती है। इस अवसर पर घरों और मंदिरो में लड्डू गोपाल की झांकियां निकाली जाती हैं और भजन-कीर्तन किया जाता है। आइए जानें इस साल कृष्ण जन्माष्टमी पर्व की सही तारीख क्या है और इस दिन निशिथ काल पूजा मूहूर्त क्या है?

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2026 तारीख और शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, इस साल भाद्रपद अष्टमी तिथि का प्रारंभ 4 सितंबर 2026, मध्यरात्रि 02:25 बजे से होगा। वहीं, अष्टमी तिथि का समापन 5 सितंबर 2026, रात 12:13 बजे होगा। उदयातिथि के अनुसार, इस साल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा।

रोहिणी नक्षत्र समय

रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ : 4 सितंबर 2026, रात 12:29 बजे

रोहिणी नक्षत्र समाप्त : 4 सितंबर 2026, रात 11:04 बजे

जन्माष्टमी का निशिथ काल शुभ मुहूर्त

भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मध्यरात्रि में मनाया जाता है :

निशिथ काल मुहूर्त : 4 सितंबर 2026, रात 11:57 बजे से 5 सितंबर 2026, रात 12:43 बजे तक

पूजा अवधि : 45 मिनट

मध्यरात्रि का मुख्य क्षण : रात 12:20 बजे (5 सितंबर)

व्रत पारण का समय

शास्त्रानुसार पारण : 5 सितंबर 2026, सुबह 06:01 बजे के बाद

तत्काल/जन्मोत्सव के बाद पारण : 5 सितंबर 2026, मध्यरात्रि 12:43 बजे के बाद (पूजा संपन्न होने पर)

जन्माष्टमी व्रत के नियम

  • व्रत के दिन प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान श्रीकृष्ण के समक्ष व्रत का संकल्प लें।
  • दिनभर फलाहार अथवा निर्जल व्रत रखें, जैसा भक्त की शक्ति एवं परंपरा हो।
  • दिनभर भगवान श्रीकृष्ण के भजन-कीर्तन, मंत्र जाप एवं श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करें।
  • निशिता काल में विधिवत पूजा करने के पश्चात ही व्रत का पारण करें।
  • व्रत के दौरान क्रोध, वाद-विवाद और तामसिक विचारों से दूर रहें, तथा मन को सात्विक बनाए रखें।

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