Janmashtami 2026 Vrat: 4 सितंबर को आप भी रखेंगे जन्माष्टमी का व्रत, पहले जान लें किन लोगों को नहीं रखना चाहिए उपवास

Janmashtami 2026 Vrat: हिंदू धर्म में कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व विशेष स्थान रखता है। यह पर्व हर साल भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, द्वापर युग में भगवान विष्णु ने इसी दिन माता देवकी और वासुदेव के आठवें पुत्र श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया था। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल यह पर्व 4 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा। इस साल भगवान कृष्ण की 5253वीं जयंती मनाई जाएगी।

इस दिन देश-दुनिया के कृष्ण मंदिरों में सुबह से ही कृष्ण जन्मात्सव की तैयारियां की जाती हैं। विशेष कार्यक्रम और सजावट होती है। बहुत से श्रद्धालु इस दिन उपवास भी करते हैं, अपने घरों में भगवान कृष्ण की लीलाओं की झांकी सजाते हैं और मध्यरात्रि में उनका जन्मोत्सव मनाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को विधिपूर्वक करने से भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं। शास्त्रों में इस व्रत को करने के नियमों के बारे में बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि कुछ लोगों को जन्माष्टमी का व्रत करने से बचना चाहिए।

इन्हें नहीं करना चाहिए जन्माष्टमी व्रत

  1. इसके अलावा गर्भवती महिलाओं को भी जन्माष्टमी का व्रत न करने की सलाह दी जाती है। अगर कोई गर्भवती महिला इस व्रत को करती है, तो यह उसकी सेहत और शिशु के लिए हानिकारक हो सकता है। ऐसी स्थिति में आप केवल भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना कर सकती हैं।
  2. जो लोग किसी गंभीर बीमारी का सामना कर रहे हैं, तो उन लोगों को भी जन्माष्टमी का व्रत नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में अगर आप जन्माष्टमी का व्रत करते हैं, तो इससे आपकी सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है, जिसकी वजह से आपको भारी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
  3. जन्माष्टमी का व्रत बड़े-बुजुर्गों को नहीं करना चाहिए, क्योंकि उनकी शारीरिक स्थिति कमजोर हो सकती है। ऐसी स्थिति में व्रत करने से सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है।

जन्माष्टमी व्रत के नियम

इस व्रत के दिन काले रंग के कपड़े न पहनें। ऐसा माना जाता है कि काले रंग के कपड़े धारण करने से नकारात्मक ऊर्जा आकर्षित होती है, जिसका बुरा प्रभाव पड़ता है।

पूजा के समय लड्डू गोपाल का अभिषेक करने के बाद देसी घी का दीपक जलाकर आरती करें और माखन-मिश्री, धनिए की पंजीरी आदि चीजों का भोग लगाएं। साथ ही भोग में तुलसी के पत्ते जरूर शामिल करें। ऐसा माना जाता है कि लड्डू गोपाल के भोग में तुलसी के पत्ते शामिल करने से प्रभु प्रसन्न होकर भोग को स्वीकार करते हैं।

जन्माष्टमी व्रत के दौरान गेहूं, चावल और दाल का सेवन भूलकर भी नहीं करना चाहिए। साथ ही तामसिक चीजों को भी नहीं खाना चाहिए।

इसके अलावा व्रत के दौरान ब्रह्मचर्य से जुड़े नियमों का पालन जरूर करना चाहिए। साथ ही क्रोध, झूठ और विवाद से दूरी बनाकर रखें।

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