Chandra Grahan 2026: 28 अगस्त को सावन पूर्णिमा पर लगेगा चंद्र ग्रहण, जानें इसका समय, कहां दिखेगा और इसके बुरे प्रभाव से बचने के उपाय

Chandra Grahan 2026: अगस्त के महीने के साथ ही सावन का महीना भी अब समापन की ओर बढ़ रहा है। यह महीना धार्मिक महत्व के साथ ही खगोलीय कारणों से भी खास रहा है। इस अगस्त में हरियाली अमावस्या के दिन साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण लगा था। इसके बाद अब सावन माह की पूर्णिमा तिथि एक और खगोलीय घटना की गवाह बनेगी।

सावन की पूर्णिमा 28 अगस्त को होगी और इसी दिन साल का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण भी होगा। यह एक गहरा आंशिक चंद्र ग्रहण होगा, जिसमें चांद का ज्यादातर हिस्सा पृथ्वी की गहरी छाया में चला जाएगा। यह पूरी घटना लगभग 5 घंटे 38 मिनट तक चलेगी। साल का अंतिम आंशिक चंद्र ग्रहण लगभग 3 घंटे 18 मिनट तक चलेगा।

भारत में चंद्र ग्रहण 2026 शुरू और खत्म होने का समय

साल का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण दिन में होगा, इसलिए भारत के ज्यादातर लोग इसे नहीं देख पाएंगे, लेकिन इसके खगोलीय समय को इंडियन स्टैंडर्ड टाइम में बदला जा सकता है। 28 अगस्त 2026 को IST के हिसाब से ग्रहण का शेड्यूल इस तरह है:

पेनमब्रल ग्रहण शुरू : 6:53 AM

पार्शियल लूनर एक्लिप्स शुरू : 8:03 AM

मैक्सिमम एक्लिप्स : 9:42 AM

पार्शियल एक्लिप्स खत्म : 11:21 AM

पेनमब्रल एक्लिप्स खत्म : 12:31 PM

चंद्र ग्रहण 2026 कितने समय तक रहेगा?

ग्रहण तब शुरू होता है जब चांद पृथ्वी की पेनमब्रल शैडो के बिल्कुल किनारे पर आता है, और तब खत्म होता है जब चांद उस शैडो से निकलता है, लगभग साढ़े पांच घंटे बाद – ठीक-ठीक कहें तो पांच घंटे और 38 मिनट।

जो हिस्सा ज्यादा दिखाई देता है वह बहुत छोटा है। चांद IST के हिसाब से सुबह 8.03 am पर पृथ्वी की अम्ब्रा में आना शुरू करेगा और 11.21 am पर अम्ब्रा से बाहर निकलेगा। आंशिक “चंद्र ग्रहण” लगभग 3 घंटे और 18 मिनट तक रहेगा। इसका मुख्य हिस्सा सुबह करीब 9:42 बजे IST पर होगा। इस समय, पृथ्वी की अम्ब्रल शैडो चांद की सतह का लगभग 96.2% हिस्सा ढक लेगी।

क्या यह पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा?

नहीं। 28 अगस्त को होने वाली यह घटना सिर्फ नाम का आंशिक चंद्र ग्रहण है। चंद्रमा के आकार का बहुत बड़ा भाग गहरी छाया में चला जाएगा, इसलिए यह लगभग पूर्ण ग्रहण जैसा लग सकता है।

अगस्त 2026 का चंद्र ग्रहण कहां दिखेगा?

अगस्त 2026 का चंद्र ग्रहण की सबसे अच्छी दृश्यता उत्तर अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में होगी। एशिया के कुछ पश्चिमी हिस्सों में भी घटना के कुछ हिस्से देखे जा सकते हैं। दृश्यता इस बात पर निर्भर करती है कि ग्रहण के हर चरण पर चंद्रमा स्थानीय क्षितिज से ऊपर है या नहीं।

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Sun Transit 2026: सूर्य इस दिन करने वाले हैं स्वराशि सिंह में गोचर, 4 राशियों के करियर और कारोबार में लगाएंगे चार चांद

Sun Transit 2026: ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को यश, पिता और स्वास्थ्य का कारक माना जाता है। किसी भी जातक की कुंडली में सूर्य की स्थिति विशेष रूप से देखी जाती है। यह ग्रह जब राशि या नक्षत्र परिवर्तन करता है, तो उसका असर सभी 12 राशियों पर पड़ता है। हर माह राशि परिवर्तन करने वाले इस ग्रह के गोचर को संक्रांति कहा जाता है। अगस्त माह में सूर्य की सिंह संक्रांति होगी यानी सूर्य सिंह राशि में प्रवेश करेंगे।

वैदिक ज्योतिष में सूर्य को नवग्रहों का राजा माना गया है। उज्जैन के ज्योतिष आचार्य आनंद भारद्वाज ने लोकल 18 को बताया कि 17 अगस्त 2026 को सूर्य कर्क राशि से निकलकर अपनी स्वराशि सिंह में प्रवेश करेंगे। सूर्य का यह गोचार विशेष रूप से चार राशि के जातकों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। इससे उनके करियर और कारोबार में जबरदस्त उछाल आ सकता है। आत्मविश्वास, व्यक्तित्व और नेतृत्व क्षमता पर पड़ सकता है। आर्थिक स्थिति मजबूत होने और आय के नए रास्ते खुलने की संभावना है।

चार राशियों को होगा लाभ

मिथुन राशि : इस राशि के जातकों को यह परिवर्तन बड़ा ही शुभ परिणाम देने वाला रहेगा। इस दौरान व्यक्तित्व में निखार, आकर्षण और आत्मविश्वास बढ़ेगा। नौकरीपेशा जातकों को नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं, साथ ही प्रमोशन और वेतनवृद्धि के अवसर बनेंगे। व्यापारियों के लिए नई योजनाएं लाभदायक साबित हो सकती हैं।

सिंह राशि : ग्रहों के राजा सूर्य का यह परिवर्तन इस राशि के जातकों के लिए बड़ा शुभ परिणाम लेकर आया है। आय के नए स्रोत खुलने की संभावना है और लंबे समय से रुके हुए कार्यों में गति आ सकती है। अचानक धन लाभ के योग भी बन सकते हैं, जिससे आर्थिक मजबूती मिलेगी।

तुला राशि : इस राशि के जातकों के लिए सूर्य ग्रह का यह गोचर सकारात्मक बदलाव लेकर आ सकता है। इस दौरान मानसिक तनाव कम होगा और शांति और संतुलन बना रहेगा। किस्मत का साथ मिलने के संकेत हैं। कार्य आसानी से पूरे हो सकते हैं। अविवाहित लोगों के रिश्तों में शुभ प्रगति होने की संभावना बन सकती है।

वृश्चिक राशि : इस राशि के जातकों के लिए आने वाला समय शुभ संकेत लेकर आ सकता है। नौकरी से जुड़ी परेशानियां दूर होने के योग बन रहे हैं और कार्यक्षेत्र में पदोन्नति के अवसर भी मिल सकते हैं। व्यापार से जुड़े लोगों के लिए यह समय बदलाव और प्रगति का साबित हो सकता है।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई सामग्री जानकारी मात्र है। हम इसकी सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता का दावा नहीं करते। कृपया किसी भी कार्रवाई से पहले विशेषज्ञ से संपर्क करें

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सूर्य ग्रहण को लेकर बड़ी खबर, 12 अगस्त को इन देशों में कुछ देर के लिए सूरज हो जाएगा पूरी तरह गायब

आसमान में जल्द ही एक बेहद खास खगोलीय घटना देखने को मिलने वाली है। 12 अगस्त को सूर्य ग्रहण के दौरान चंद्रमा कुछ समय के लिए सूर्य के सामने आ जाएगा और उसकी रोशनी को ढक देगा। इस नजारे को लेकर दुनिया के कई हिस्सों में लोगों के बीच उत्सुकता है। खास बात यह है कि करीब 1.5 करोड़ लोग उस इलाके में होंगे, जहां सूर्य पूरी तरह चंद्रमा के पीछे छिपा दिखाई देगा। स्पेन, आइसलैंड के साथ ग्रीनलैंड, रूस और पुर्तगाल के कुछ हिस्सों में पूर्ण सूर्य ग्रहण देखा जा सकेगा।

वहीं, यूरोप और उत्तरी अफ्रीका के कई इलाकों में इसका आंशिक प्रभाव नजर आएगा। कुछ शहरों में सूर्य का 90 फीसदी से ज्यादा हिस्सा ढका रहेगा, जिससे आसमान का नजारा काफी अलग दिखाई देगा। हालांकि, ग्रहण देखने के लिए आंखों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना जरूरी होगा।

स्पेन में मिलेगा सबसे शानदार नजारा

पूर्ण सूर्य ग्रहण देखने के लिए उत्तरी और पूर्वी स्पेन को सबसे बेहतर जगहों में माना जा रहा है। लियोन, वलाडोलिड, जारागोजा, तेरुएल और वेलेंसिया पूर्ण ग्रहण के दायरे में आएंगे। पश्चिमी स्पेन में पूर्ण ग्रहण की शुरुआत करीब 18:27 GMT यानी स्थानीय समयानुसार रात 8:27 बजे होगी। अलग-अलग स्थानों के आधार पर पूर्ण ग्रहण करीब 110 सेकंड तक रह सकता है। हालांकि स्पेन की राजधानी मैड्रिड और बार्सिलोना पूर्ण ग्रहण की पट्टी से थोड़ा बाहर रहेंगे। इसके बावजूद वहां रहने वाले लोग सूर्य का 99 फीसदी से ज्यादा हिस्सा ढका हुआ देख सकेंगे।

यूरोप के कई शहरों में दिखेगा आंशिक ग्रहण

पूर्ण सूर्य ग्रहण का नजारा भले ही सीमित इलाकों में दिखे, लेकिन आंशिक ग्रहण का दायरा काफी बड़ा होगा। यूरोप के ज्यादातर हिस्सों में शाम के समय सूर्य आंशिक रूप से ढका नजर आएगा। पेरिस में करीब 92 फीसदी, लंदन में 91 फीसदी और बर्लिन में लगभग 85 फीसदी सूर्य ढका रहेगा। यूरोप के पूर्वी हिस्सों में समस्या यह होगी कि कई जगह सूर्य ग्रहण के अपने अधिकतम स्तर पर पहुंचने से पहले ही सूरज डूब जाएगा। यानी वहां लोग ग्रहण का सबसे गहरा चरण नहीं देख पाएंगे।

उत्तरी अफ्रीका में भी दिखेगा ग्रहण

उत्तरी अफ्रीका के कुछ हिस्सों में भी आंशिक सूर्य ग्रहण दिखाई देगा। अल्जीयर्स में करीब 98 फीसदी और कैसाब्लांका में लगभग 87 फीसदी सूर्य ढका नजर आएगा। हालांकि इन दोनों शहरों में भी सूर्य के पूरी तरह अस्त होने के कारण ग्रहण का आखिरी हिस्सा दिखाई नहीं देगा।

अमेरिका और कनाडा में कितना दिखेगा?

अटलांटिक के दूसरी तरफ स्थिति कुछ अलग होगी। वहां ग्रहण सुबह और दोपहर के समय दिखाई देगा, लेकिन उत्तरी अमेरिका पूर्ण ग्रहण की मुख्य पट्टी से काफी दूर रहेगा। कनाडा के सेंट जॉन्स में करीब 53 फीसदी, मॉन्ट्रियल में 18 फीसदी और टोरंटो में लगभग 8 फीसदी सूर्य ढका दिखाई देगा। अमेरिका में अलास्का के कुछ हिस्सों में करीब 37 फीसदी तक ग्रहण देखा जा सकेगा। वहीं बाकी इलाकों में इसका असर काफी कम रहेगा। उत्तर-पूर्वी मेन में करीब 28 फीसदी, न्यूयॉर्क में लगभग 10 फीसदी और मिडवेस्ट के कई हिस्सों में लगभग नगण्य ग्रहण दिखाई देगा।

अगला पूर्ण सूर्य ग्रहण कब?

अगर 12 अगस्त का ग्रहण आपके इलाके में दिखाई नहीं देता, तो अगला बड़ा मौका ज्यादा दूर नहीं है। 2 अगस्त 2027 को अगला पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा, जिसकी पट्टी दक्षिणी स्पेन, उत्तरी अफ्रीका और यमन से होकर गुजरेगी। सूर्य ग्रहण के दौरान सीधे सूर्य की ओर देखना आंखों के लिए खतरनाक हो सकता है, इसलिए इसे देखने के लिए उचित प्रमाणित सोलर-व्यूइंग चश्मे या सुरक्षित उपकरण का इस्तेमाल करना जरूरी है।

12 अगस्त को आसमान में दिखेगा अद्भुत नजारा! पूर्ण सूर्य ग्रहण में दिन में छा जाएगा अंधेरा, जानें कहां-कहां दिखेगा 

12 अगस्त 2026 को पूर्ण सूर्य ग्रहण लगेगा। इस दौरान कुछ समय के लिए दिन में अंधेरा छा जाएगा। ऐसा तब होता है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है और सूर्य की रोशनी को कुछ समय के लिए ढक देता है। यह पूर्ण सूर्य ग्रहण पृथ्वी के केवल कुछ हिस्सों से ही दिखाई देगा। वहीं, इससे कहीं बड़े इलाके में लोगों को सूर्य का केवल कुछ हिस्सा ही चंद्रमा के पीछे छिपता हुआ नजर आएगा।

इस सूर्य ग्रहण का रास्ता ग्रीनलैंड, आइसलैंड, उत्तरी स्पेन, पुर्तगाल के कुछ हिस्सों और उत्तरी रूस से होकर गुजरेगा। इन इलाकों की एक संकरी पट्टी में रहने वाले लोग पूर्ण सूर्य ग्रहण देख सकेंगे। इस दौरान चंद्रमा पूरी तरह सूर्य को ढक लेगा और सूर्य के बाहरी हिस्से यानी कोरोना को देखा जा सकेगा।

भारत में नहीं दिखाई देगा सूर्य ग्रहण

भारत इस सूर्य ग्रहण के दिखाई देने वाले क्षेत्र में शामिल नहीं है। इसलिए 12 अगस्त का यह पूर्ण सूर्य ग्रहण भारत के किसी भी शहर या देश के दूसरे हिस्सों से नहीं देखा जा सकेगा। यानी भारत में रहने वाले लोगों को इस खगोलीय घटना का न तो पूर्ण और न ही आंशिक सूर्य ग्रहण दिखाई देगा।

पूर्ण सूर्य ग्रहण 2026: इन देशों में दिखेगा पूरा ग्रहण

जो लोग 2026 का पूर्ण सूर्य ग्रहण देखना चाहते हैं, उन्हें उस संकरे इलाके में मौजूद होना होगा, जहां चंद्रमा की पूरी छाया पड़ेगी। इसी क्षेत्र में सूर्य कुछ समय के लिए पूरी तरह चंद्रमा के पीछे छिप जाएगा।

पूर्ण सूर्य ग्रहण देखने वाले प्रमुख देश और इलाके हैं:

  • ग्रीनलैंड
  • आइसलैंड
  • उत्तरी स्पेन
  • उत्तरी रूस
  • पुर्तगाल के कुछ हिस्से

इनमें स्पेन सूर्य ग्रहण देखने वालों के लिए खास जगह बन सकता है। यहां कई ऐसे स्थान हैं, जहां से ग्रहण के पूर्ण चरण वाले रास्ते तक आसानी से पहुंचा जा सकता है। पूर्ण ग्रहण के दौरान चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक लेगा और कुछ समय के लिए सूर्य का बाहरी हिस्सा यानी कोरोना दिखाई देगा।

पूर्ण सूर्य ग्रहण 2026: कब होगा ग्रहण?

पूर्ण सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026, बुधवार को होगा। इस दौरान चंद्रमा सूर्य के सामने आ जाएगा और कुछ समय के लिए सूर्य की रोशनी को ढक देगा। यह ग्रहण कई घंटों तक चलेगा, क्योंकि चंद्रमा की छाया अलग-अलग इलाकों से होकर आगे बढ़ेगी। हालांकि, किसी एक जगह से देखने वालों के लिए ग्रहण का सबसे खास चरण, जिसे ‘पूर्णता’ (टोटैलिटी) कहा जाता है, बहुत कम समय के लिए दिखाई देगा।

पूर्णता कितनी देर तक दिखाई देगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि आप ग्रहण के रास्ते में किस जगह मौजूद हैं। सबसे अच्छी जगहों पर पूर्ण ग्रहण करीब दो मिनट तक दिखाई देने की उम्मीद है। यानी पूरे ग्रहण की अवधि लंबी होगी, लेकिन किसी एक स्थान से सूर्य के पूरी तरह ढकने का नजारा सिर्फ थोड़ी देर के लिए ही देखने को मिलेगा।

पूर्ण सूर्य ग्रहण 2026: ग्रहण के दौरान क्या दिखाई देगा?

जब चंद्रमा पूरी तरह सूर्य को ढक लेगा, तो दिन के समय आसमान अचानक काफी अंधेरा हो जाएगा। इस दौरान चंद्रमा के चारों ओर सूर्य का कोरोना, यानी सूर्य का बाहरी वायुमंडल, दिखाई देगा। यही पूर्ण सूर्य ग्रहण की सबसे खास बात है। आंशिक सूर्य ग्रहण में सूर्य का कुछ हिस्सा दिखाई देता रहता है, जबकि पूर्ण ग्रहण के दौरान कुछ समय के लिए सूर्य पूरी तरह चंद्रमा के पीछे छिप जाता है।

सूर्य ग्रहण को सुरक्षित तरीके से कैसे देखें?

सूर्य ग्रहण के आंशिक चरण को देखते समय आंखों की सुरक्षा का खास ध्यान रखना जरूरी है। इसके लिए सोलर व्यूइंग ग्लास या मंजूरशुदा सोलर फिल्टर का इस्तेमाल करना चाहिए। सामान्य धूप के चश्मे से सूर्य ग्रहण नहीं देखना चाहिए। ये आंखों को सूर्य की हानिकारक किरणों से पर्याप्त सुरक्षा नहीं देते। हालांकि, पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान एक खास स्थिति होती है। जो लोग पूर्ण ग्रहण के रास्ते में मौजूद हैं, वे उस समय बिना सुरक्षा के चश्मे के पूरी तरह ढके हुए सूर्य को देख सकते हैं। लेकिन जैसे ही सूर्य की चमकदार डिस्क का थोड़ा सा हिस्सा भी दोबारा दिखाई देने लगे, आंखों की सुरक्षा के लिए सोलर ग्लास या फिल्टर तुरंत लगा लेना चाहिए।

Sawan Amavasya 2026 Date: हरियाली अमावस्या पर पुष्य नक्षत्र में होगा स्नान-दान, जानें तारीख और पितरों को तर्पण देने का समय

Sawan Amavasya 2026 Date: सावन के महीने का हिंदू धर्म में विशेष स्थान है। यह भगवान विष्णु के चार माह की योगनिद्रा में जानें के बाद पहला हिंदू माह होता है। इस अवधि में भगवान शिव सृष्टि का कार्यभार संभालते हैं। सावन भगवान शिव का प्रिय माह है। इस माह में आने वाली अमावस्या को हरियाली अमावस्या कहते हैं, क्योंकि इस समय चारों तरफ हरियाली छायी रहती है और मानसून की फुहारों से वातावरण सराबोर रहता है।

हरियाली अमावस्या के दिन गंगा आदि पवित्र नदियों में स्नान और उसके बाद दान करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन स्नान करने से पापों से मुक्ति मिलती है और पुण्य की प्राप्ति होती है। अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित होती है। इसलिए हरियाली अमावस्या पर तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करने से पितृ प्रसन्न होते हैं। इस दिन पितृ दोष से मुक्ति के लिए विशेष उपाय भी किए जाते हैं। शाम के समय में पितरों के लिए दीपक जलाते हैं, ताकि पितृ लोक लौटते समय उनका मार्ग अंधकार में न रहे। इस साल की सावन अमावस्या पर पुष्य नक्षत्र रहेगा। आइए जानते हैं कि हरियाली अमावस्या कब है और पितृ तर्पण कब कर सकते हैं?

सावन अमावस्या 2026 तारीख

वैदिक पंचांग के आधार पर देखा जाए तो इस बार श्रावण कृष्ण अमावस्या तिथि 12 अगस्त को 01:52 बजे से शुरू हो रही है और यह 12 अगस्त को रात 11:06 बजे तक रहेगी। उदयातिथि को देखते हुए सावन अमावस्या 12 अगस्त बुधवार का है।

सावन अमावस्या 2026 स्नान-दान मुहूर्त

सावन अमावस्या पर स्नान और दान के लिए ब्रह्म मुहूर्त प्रात: 04 बजकर 23 ए एम से लेकर प्रात: 05 बजकर 06 मिनट तक है। जो लोग ब्रह्म मुहूर्त में स्नान न कर पाएं, वे लोग सूर्योदय के बाद स्नान, दान कर सकते हैं। उस दिन लाभ-उन्नति मुहूर्त 05:49 ए एम से 07:28 ए एम तक और अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त 07:28 ए एम से 09:07 ए एम तक रहेगा। इन दोनों समयों में भी स्नान और दान किया जा सकता है। सावन अमावस्या पर साल का अंतिम सूर्य ग्रहण लगने वाला है।

सावन अमावस्या पर तर्पण कब करें?

सावन अमावस्या के दिन स्नान के बाद पितरों के लिए तर्पण कर सकते हैं। हाथ में जल, सफेद फूल और काले तिल लेकर कुशा की मदद से पितरों को तर्पण दे सकते हैं। तर्पण देने से पितर प्रसन्न होते हैं।

व्यतीपात योग और पुष्य नक्षत्र में सावन अमावस्या

इस साल की सावन अमावस्या पर व्यतीपात योग और पुष्य नक्षत्र का योग है। व्यतीपात योग प्रात:काल से लेकर दोपहर 3 बजकर 26 मिनट तक रहेगा, उसके बाद वरीयान् योग बनेगा। व्यतीपात योग में किसी नए या शुभ कार्य की शुरूआत नहीं करते हैं।

पुष्य नक्षत्र प्रात:काल से लेकर सुबह 7 बजकर 59 मिनट तक रहेगा, उसके बाद अश्लेषा नक्षत्र है। पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रों का राजा कहा जाता है। यह एक शुभ नक्षत्र है, इसमें आप शुभ कार्य कर सकते हैं, जिसमें सफलता प्राप्त होती है। स्थिर कार्य भी इस नक्षत्र में कर सकते हैं।

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August 12 Total Solar Eclipse: इस देश में 100 साल बाद दिखेगा सूर्य ग्रहण का दुर्लभ नजारा, भारत में नहीं दिखेगा ग्रहण

August 12 Total Solar Eclipse: साल 2026 में दो सूर्य और दो चंद्र ग्रहण होने हैं। पहला सूर्य और चंद्र ग्रहण फरवरी और मार्च में हो चुका है। अब अगस्त के महीने में इस साल आखिरी सूर्य और चंद्र ग्रहण लगेगा। भारतीय पंचांग के अनुसार, इस साल का अंतिम सूर्य ग्रहण जहां सावन की अमावस्या के दिन 12 अगस्त को लगेगा, वहीं चंद्र ग्रहण सावन की पूर्णिमा को 28 अगस्त को होगा। यह दोनों ही ग्रहण भारत में नजर नहीं आएंगे, इसलिए इनका धार्मिक प्रभाव नहीं होगा। लेकिन ज्योतिष की दृष्टि से यह अहम होगा।

सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी जब एक सीध में आते हैं ग्रहण होता है। ग्रहण एक दुर्लभ खगोलीय घटना है, जो एक निश्चित अंतराल पर होती है। इस साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण में कुछ ही दिनों का समय बचा है। यह पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा और इसमें 2 मिनट के लिए सूर्य को चंद्रा पूरी तरह ढक लेगा। इस ग्रहण का सबसे दुर्लभ और दिलचस्प नजारा स्पेन में दिखाई देगा। यहां 1905 के बाद पहली बार पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा।

स्पेन में 100 साल पर दिन में पूरी तरह छाएगा अंधेरा

12 अगस्त को लग रहा सूर्य ग्रहण वर्ष 2026 का दूसरा और अत्यंत महत्वपूर्ण पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा। इस ग्रहण के दौरान मुख्य रूप से स्पेन में लगभग 100 साल (1905 के बाद) बाद दिन के समय ही पूरी तरह अंधेरा छा जाएगा। इस ग्रहण में डायमंड का रिंग का नजारा भी देखने को मिल सकता है।

सूर्य ग्रहण तिथि, समय और सूतक काल

तिथि : 12 अगस्त 2026 (अमावस्या तिथि)

शुरुआत : 12 अगस्त 2026, रात लगभग 09:04 बजे

समाप्ति : 13 अगस्त 2026, सुबह लगभग 04:25 बजे

पूर्ण सूर्य ग्रहण 2026 सूतक काल

सूर्य ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से 12 घंटे पहले प्रारंभ होकर ग्रहण समाप्ति तक रहता है। 12 अगस्त 2026 को लग रहा पूर्ण सूर्य ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं होगा, इसलिए भारत में इसका सूतक काल मान्य नहीं रहेगा। मंदिरों के कपाट खुले रहेंगे और नियमित पूजा-पाठ होगा।

कहां देखा जा सकता सूर्य ग्रहण

स्पेन (उत्तरी व मध्य हिस्से जैसे मैड्रिड, वालेंसिया, बेलिएरिक द्वीप समूह), आइसलैंड (पश्चिमी तट व रेक्याविक), ग्रीनलैंड, रूस के सुदूर उत्तरी/आर्कटिक क्षेत्र तथा उत्तरी अटलांटिक महासागर में पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखाई देगा। जबकि पश्चिमी यूरोप, कनाडा और उत्तरी अफ्रीका के कई देशों में आंशिक सूर्य ग्रहण का नजारा दिखाई देगा।

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दिन में दिखेगा रात जैसा नजारा! इस तारीख को कुछ मिनटों के लिए गायब हो जाएगा सूरज

12 अगस्त को आसमान एक ऐसे दुर्लभ नजारे का गवाह बनने वाला है, जिसे देखने के लिए दुनियाभर के लोग इंतजार कर रहे हैं। कुछ देशों में दिन के उजाले में कुछ मिनटों के लिए अंधेरा छा जाएगा। यही वजह है कि इस खगोलीय घटना को बेहद खास माना जा रहा है।

 

खगोलीय घटना

पूर्ण सूर्य ग्रहण तब होता है, जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आकर सूर्य को पूरी तरह ढक लेता है। इस दौरान कुछ समय के लिए दिन में भी शाम जैसा अंधेरा महसूस होता है। कई जगहों पर तापमान थोड़ा कम हो जाता है और वातावरण भी सामान्य दिनों से अलग दिखाई देता है। यह एक दुर्लभ खगोलीय घटना मानी जाती है।

 

 

दिखाई देने वाली जगहें

यह पूर्ण सूर्य ग्रहण सबसे पहले उत्तरी रूस में दिखाई देगा। इसके बाद ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन और पुर्तगाल के उत्तर-पूर्वी हिस्सों से होकर गुजरेगा। इसके अलावा यूरोप के कई देशों, कनाडा, अमेरिका के उत्तरी क्षेत्रों और उत्तर-पश्चिम अफ्रीका में सूर्य ग्रहण देखा जा सकेगा। भारत में यह सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा।

 

 

भारत पर असर

चूंकि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां सूतक काल मान्य नहीं माना जाएगा। ऐसे में भारत में सामान्य दिनचर्या पर इसका कोई प्रभाव नहीं रहेगा। जो लोग धार्मिक मान्यताओं का पालन करते हैं, वे अपनी आस्था के अनुसार नियमों का पालन कर सकते हैं।

 

 

ग्रहण का समय

स्पेन में पूर्ण सूर्य ग्रहण सूर्यास्त से ठीक पहले दिखाई देगा और इसकी अवधि दो मिनट से भी कम होगी। बर्गोस शहर में करीब 1 मिनट 48 सेकंड तक पूरा अंधेरा रहेगा। वहीं, कुछ अन्य देशों में भी पूर्ण ग्रहण ढाई मिनट से कम समय तक दिखाई देगा। लेकिन आंशिक सूर्य ग्रहण लगभग 1 घंटा 45 मिनट तक देखा जा सकेगा।

 

 

दुर्लभ नजारा

पूर्ण सूर्य ग्रहण हर साल हर जगह दिखाई नहीं देता। यह केवल पृथ्वी की एक संकरी पट्टी से ही गुजरता है। कई क्षेत्रों में ऐसा नजारा दोबारा देखने के लिए दशकों या सैकड़ों साल तक इंतजार करना पड़ सकता है। यही वजह है कि इसे बेहद दुर्लभ और खास खगोलीय घटना माना जाता है।

 

 

धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में सूर्य ग्रहण का विशेष महत्व माना जाता है। ग्रहण के समय कई लोग पूजा-पाठ, मंत्र जाप और भगवान का स्मरण करते हैं। कुछ लोग ग्रहण के दौरान भोजन बनाने या खाने से भी परहेज करते हैं। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान और घर की सफाई करने की परंपरा भी कई जगहों पर निभाई जाती है।

 

 

रखें ये सावधानियां

सूर्य ग्रहण को कभी भी नंगी आंखों से नहीं देखना चाहिए, क्योंकि इससे आंखों को गंभीर नुकसान हो सकता है। साधारण धूप का चश्मा, काला शीशा या एक्स-रे फिल्म भी सेफ नहीं माने जाते। ग्रहण देखने के लिए हमेशा सोलर व्यूइंग ग्लास या फिल्टर का ही इस्तेमाल करना चाहिए।

Janmashtami Date 2026: 4 या 5 सितंबर, कब मनाया जाएगा जन्माष्टमी का पर्व? जानें सही तारीख और निशिथ काल पूजा मुहूर्त

Janmashtami Date 2026: जन्माष्टमी का पर्व हिंदू धर्म के कई प्रमुख व्रत और त्योहारों में से एक माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, द्वापर युग में भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्रीकृष्ण ने वासुदेव और देवकी के पुत्र के रूप में जन्म लिया था। इस दिन को पूरी दुनिया में मौजूद कृष्ण भक्त बहुत धूमधाम से मनाते हैं। कृष्ण भक्त बेसब्री से इस पर्व के आने का इंतजार करते हैं। इस दिन देशभर में खास उत्साह देखने को मिलता है। जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण की विशेष पूजा-अर्चना होती है और 56 भोग लगाए जाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, लड्डू गोपाल की पूजा और व्रत करने से साधक के जीवन में खुशियों का आगमन होता है। साथ ही सुख-सृमद्धि में वृद्धि होती है। इस अवसर पर घरों और मंदिरो में लड्डू गोपाल की झांकियां निकाली जाती हैं और भजन-कीर्तन किया जाता है। आइए जानें इस साल कृष्ण जन्माष्टमी पर्व की सही तारीख क्या है और इस दिन निशिथ काल पूजा मूहूर्त क्या है?

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2026 तारीख और शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, इस साल भाद्रपद अष्टमी तिथि का प्रारंभ 4 सितंबर 2026, मध्यरात्रि 02:25 बजे से होगा। वहीं, अष्टमी तिथि का समापन 5 सितंबर 2026, रात 12:13 बजे होगा। उदयातिथि के अनुसार, इस साल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा।

रोहिणी नक्षत्र समय

रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ : 4 सितंबर 2026, रात 12:29 बजे

रोहिणी नक्षत्र समाप्त : 4 सितंबर 2026, रात 11:04 बजे

जन्माष्टमी का निशिथ काल शुभ मुहूर्त

भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मध्यरात्रि में मनाया जाता है :

निशिथ काल मुहूर्त : 4 सितंबर 2026, रात 11:57 बजे से 5 सितंबर 2026, रात 12:43 बजे तक

पूजा अवधि : 45 मिनट

मध्यरात्रि का मुख्य क्षण : रात 12:20 बजे (5 सितंबर)

व्रत पारण का समय

शास्त्रानुसार पारण : 5 सितंबर 2026, सुबह 06:01 बजे के बाद

तत्काल/जन्मोत्सव के बाद पारण : 5 सितंबर 2026, मध्यरात्रि 12:43 बजे के बाद (पूजा संपन्न होने पर)

जन्माष्टमी व्रत के नियम

  • व्रत के दिन प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान श्रीकृष्ण के समक्ष व्रत का संकल्प लें।
  • दिनभर फलाहार अथवा निर्जल व्रत रखें, जैसा भक्त की शक्ति एवं परंपरा हो।
  • दिनभर भगवान श्रीकृष्ण के भजन-कीर्तन, मंत्र जाप एवं श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करें।
  • निशिता काल में विधिवत पूजा करने के पश्चात ही व्रत का पारण करें।
  • व्रत के दौरान क्रोध, वाद-विवाद और तामसिक विचारों से दूर रहें, तथा मन को सात्विक बनाए रखें।

Surya Grahan 2026: साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण होगा इस दिन, जानें सूतक काल का समय और प्रभाव

Surya Grahan 2026: साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण होगा इस दिन, जानें सूतक काल का समय और प्रभाव

Surya Grahan 2026: सूर्य ग्रहण एक सामान्य लेकिन दिलचस्प खगोलीय घटना है। निश्चित अंतराल पर जब भी धरती, चंद्रमा और सूर्य एक सीधी रेखा में आते हैं, तब सूर्य और चंद्र ग्रहण लगते हैं। ग्रहण विभिन्न वैज्ञानिक अध्ययनों का आधार भी बनते हैं, तो तीनों खगोलीय पिंडों के बारे में जानकारी इकट्ठा करने का मौका भी देते हैं। विज्ञान के साथ-साथ इसके गहरे धार्मिक और ज्योतिषीय प्रभाव माने जाते हैं।

हिंदू धर्म में ग्रहण को अशुभ समय माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के दौरान नकारात्मक शक्तियां प्रभावी रहती हैं, इसलिए इस समय कोई शुभ या मांगलिक कार्य नहीं करना चाहिए। हर साल की तरह इस साल भी दो सूर्य और दो चंद्र ग्रहण लगेंगे। इनमें से पहला सूर्य और चंद्र ग्रहण फरवरी-मार्च में हो चुका है। इसके अब दूसरा और अंतिम सूर्य और चंद्र ग्रहण अगस्त के महीने में लगेगा। इस साल का अंतिम सूर्य ग्रहण हरियाली अमावस्या के दिन कर्क राशि में लगेगा।

अगस्त 2026 में दूसरा सूर्य ग्रहण

साल 2026 का दूसरा और आखिरी सू्र्य ग्रहण 12 अगस्त हरियाली अमावस्या के मौके पर लगेगा। यह पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा, लेकिन भारत में नहीं दिखाई देगा। इसलिए भारत में इसका सूतक काल नहीं माना जाएगा। भारतीय समयानुसार, ग्रहण 12 अगस्त की रात 9:04 बजे शुरू होगा और 13 अगस्त की सुबह 4:25 बजे समाप्त होगा।

कर्क राशि वाले रहें सतर्क

यह सूर्य ग्रहण कर्क राशि में लगने जा रहा है। इसलिए इस राशि पर इसका सबसे ज्यादा फर्क पड़ेगा। इस राशि के जातकों को सेहत, मानसिक तनाव और धन से जुड़ी समस्याओं से जूझना पड़ सकता है। इस सूर्य ग्रहण का प्रभाव कर्क राशि पर 12 अगस्त से 15 दिन पहले और 15 दिन बाद तक बना रहेगा। सभी 12 राशियों पर इसका कुछ न कुछ प्रभाव जरूर पड़ेगा।

किन-किन देशों में दिखाई देगा ग्रहण?

साल का आखिरी सूर्य ग्रहण अटलांटिक महासागर, आर्कटिक क्षेत्र, ग्रीनलैंड, आइसलैंड और उत्तरी स्पेन में देखा जाएगा। साथ ही फ्रांस, ब्रिटेन, इटली सहित यूरोप के कई देशों में भी यह आंशिक रूप से नजर आने वाला है।

ग्रहण काल में अशुभ प्रभाव से बचने के उपाय?

सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण के दौरान महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होने के साथ सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

ग्रहण काल के बाद पूजा-पाठ और इच्छा के अनुसार दान करना चाहिए।

ग्रहण काल के बाद नहाना चाहिए और शिवलिंग पर जला अर्पित करना चाहिए।

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