Sarva Pitru Amavasya 2026: कल शनि अमावस्या के साथ विदा होंगे पितृ, जानें सर्व पितृ अमावस्या पर तर्पण और श्राद्ध का मुहूर्त

Sarva Pitru Amavasya 2026: अश्विन अमावस्या से पितरों श्राद्ध और तर्पण की अवधि, जिसे पितृ पक्ष कहते हैं, समाप्त हो जाती है। सर्व पितृ अमावस्या के दिन उन पूर्वजों का श्राद्ध और तर्पण किया जाता है, जिनका निधन किसी भी माह की अमावसया तिथि को हुआ था और जिनकी मृत्यु की तारीख ज्ञात नहीं है। इस दिन श्राद्ध, तर्पण और दान के बाद पितृ लोक से आए पितृ विदा हो जाते हैं।

सर्व पितृ अमावस्या तारीख और समय?

आश्विन अमावस्या तिथि शुक्रवार, 9 अक्टूबर रात 9 बजकर 35 मिनट से शनिवार रात 9 बजकर 19 मिनट तक रहेगी। पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध कार्य दोपहर के समय करते हैं। उदयातिथि के आधार पर सर्व पितृ अमावस्या 10 अक्टूबर शनिवार को है। शनिवार की अमावस्या होने की वजह से यह शनि अमावस्या भी है और आश्विन अमावस्या भी।

सर्व पितृ अमावस्या 2026 मुहूर्त

सर्व पितृ अमावस्या पर ज्ञात और अज्ञात सभी पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध होता है। सर्व पितृ अमावस्या पर पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध कुतुप मुहूर्त या रौहिण मुहूर्त में कर देते हैं।

कुतुप मुहूर्त : 11:45 ए एम से 12:31 पी एम

रौहिण मुहूर्त : 12:31 पी एम से 01:18 पी एम

अपराह्न काल : 01:18 पी एम से 03:37 पी एम

सर्व पितृ अमावस्या पर पितरों को विदा करने की विधि

सर्व पितृ अमावस्या को आप विधि विधान से सही मुहूर्त में पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध कर लें। उसके बाद जब सूर्यास्त हो तो पितरों की विदाई का कार्यक्रम करें। उनके लिए चार मुख वाला तेल का एक दीप जलाएं। यह दीपक दक्षिण दिशा में रखना है। जब पितर धरती से विदा होंगे तो उस दीपक की वजह से उनके मार्ग में उजाला रहेगा।

पितरों को विदा करें मोक्ष प्राप्ति की कामना

दीपक जलाने के बाद आप पितरों को स्मरण करें और दोनों हाथों को जोड़कर उनको प्रणाम करते हुए कहें— हे सभी पितृ देव! पितृ पक्ष के समय में आपके लिए तर्पण, श्राद्ध, पंचबलि कर्म, दान, ब्राह्मण भोज आदि अपनी क्षमता के अनुसार किया, आप सभी मेरे इन कार्यों से तृप्त और संतुष्ट हों। भगवान विष्णु की कृपा से आप सभी को मोक्ष की प्राप्ति हो। आप सभी अपने मार्ग से अपनी दिशा की ओर प्रस्थान करें और पूरे परिवार को सुख, समृद्धि और उन्नति का आशीर्वाद दें।

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Sarva Pitru Amavasya 2026: सर्व पितृ अमावस्या कब है? जानें कुतुप और रौहिण मुहूर्त का समय और गजच्छाया योग का संयोग

Sarva Pitru Amavasya 2026: हिंदू कैलेंडर में हर साल अश्विन माह के कृष्ण पक्ष में पितृ पक्ष मनाया जाता है। 15-16 दिनों की यह अवधि स्वर्गवासी हो चुके परिजनों की आत्मा की शांति के पूजा, पाठ, हवन, श्राद्ध और तर्पण के लिए निश्चित होती है। इस अवधि का समापन अश्विन अमावस्या के दिन सर्व पितृ विसर्जन के साथ होता है। सर्व पितृ अमावस्या पर पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध करते हैं। जिन पितरों का निधन किसी भी माह की अमावस्या तिथि को हुआ है, उन सभी का श्राद्ध इस दिन किया जाता है। साथ ही, जिन पितरों के निधन की तिथि नहीं पता है, उनके लिए तर्पण और श्राद्ध कर्म सर्व पितृ अमावस्या को होगा। इस साल सर्व पितृ अमावस्या के दिन शनि अमावस्या और गजच्छाया योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है।

सर्व पितृ अमावस्या 2026 कब है?

आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 9 अक्टूबर दिन शुक्रवार को रात 9:35 बजे से शुरू होगी। यह तिथि अगले दिन 10 अक्टूबर रविवार को रात 09:19 बजे तक उपस्थित रहेगी। उदयातिथि के अनुसार, सर्व पितृ अमावस्या 10 अक्टूबर, शनिवार को होगी। उस दिन सूर्योदय सुबह में 06:19 ए एम पर है। पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध कर्म दिन के समय में करते हैं। उसके लिए कुतुप मुहूर्त और रौहिण मुहूर्त होता है।

सर्व पितृ अमावस्या 2026 तर्पण-श्राद्ध मुहूर्त

सर्व पितृ अमावस्या के दिन तर्पण और श्राद्ध दिन में किया जाएगा। इस साल कुतुप मुहूर्त और रौहिण मुहूर्त 47-47 मिनट का होगा, वहीं अपराह्न काल 2 घंटे 20 मिनट का होगा।

कुतुप मुहूर्त : दिन में 11:45 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक

रौहिण मुहूर्त : दोपहर 12:31 बजे से लेकर दोपहर 01:18 बजे तक

अपराह्न काल : दोपहर 01:18 बजे से लेकर दोपहर 03:37 बजे तक

शनिश्चरी अमावस्या का संयोग

सर्व पितृ अमावस्या के दिन शनिश्चरी अमावस्या का संयोग बना है। इस दिन स्नान और दान के बाद शनिदेव की पूजा करने से साढ़ेसाती और ढैय्या के कष्ट दूर होते हैं।

आश्विन अमावस्या 2026 स्नान-दान मुहूर्त

आश्विन अमावस्या पर स्नान के लिए ब्रह्म मुहूर्त सबसे अच्छा माना जाता है। उस दिन का ब्रह्म मुहूर्त 04:40 ए एम से 05:29 ए एम तक है, वहीं अभिजीत मुहूर्त दिन में 11:45 ए एम से दोपहर 12:31 पी एम तक है। जो लोग ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और दान न कर पाएं, वे सूर्योदय के बाद कर सकते हैं।

सर्व पितृ अमावस्या 2026 गजच्छया योग

गजच्छाया योग हर साल नहीं मिलता है। लेकिन इस योग का निर्माण आमतौर से पितृ पक्ष के समय ही होता है। इसे श्राद्ध कर्म, दान-पुण्य आदि गतिविधियों के लिये अत्यधिक शुभ माना जाता है। पितृ पक्ष की अमावस्या तिथि पर, जब सूर्य और चंद्रमा हस्त नक्षत्र में होते हैं, तो इस संयोग को गजच्छया योग के रूप में जाना जाता है। इसीलिये, पितृ पक्ष की समयावधि में एक अथवा दो गजच्छया योग भी हो सकते हैं। यह शुभ संयोग त्रयोदशी तिथि या अमावस्या तिथि को निर्मित होता है।

10 अक्टूबर गजच्छाया योग समय

गजच्छाया योग प्रारंभ : अक्टूबर 9, 2026, शुक्रवार को 21:35 बजे

गजच्छाया योग समाप्त : अक्टूबर 10, 2026, शनिवार को 21:19 बजे

अवधि – 23 घण्टे 44 मिनट

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Bhadrapada Amavasya Kab Hai 2026: 10 या 11 सितंबर, कब होगी भाद्रपद अमावस्या, जानें इस दिन कुशा को जमा करने का क्या है महत्व

Bhadrapada Amavasya Kab Hai 2026: हिंदू धर्म में भाद्रपद माह की अमावस्या तिथि को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे कुशोत्पाटिनी अमावस्या या पिठोरी अमावस्या भी कहा जाता है। पूरे साल में आने वाली 12 अमावस्या तिथियों में भाद्रपद अमावस्या का विशेष स्थान है। शास्त्रानुसार, इस दिन पूरे वर्ष भर के धार्मिक अनुष्ठानों, पूजा-पाठ, पिंडदान और तर्पण के लिए इस दिन पवित्र ‘कुश’ (एक विशेष प्रकार की घास) को जड़ सहित तोड़कर जमा किया जाता है। इस दिन तोड़ी गई कुश पूरे एक वर्ष तक पवित्र और उपयोग योग्य मानी जाती है।

हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। यह तिथि पितरों को समर्पित है और इस दिन गंगा आदि पवित्र नदियों में स्नान के बाद पितृ तर्पण और श्राद्ध किया जाता है। भाद्रपद अमावस्या के दिन तोड़ी जाने वाली कुशा घास का विशेष धार्मिक महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुश घास की जड़ में भगवान ब्रह्मा, मध्य में भगवान विष्णु और अग्रभाग नोक में भगवान शिव का वास माना गया है। यह अमावस्या पितरों की शांति, तर्पण और श्राद्ध कर्म के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। इसके ठीक बाद पितृ पक्ष (श्राद्ध) का आगमन होता है।

भाद्रपद अमावस्या 2026 सही तारीख

पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या 10 सितंबर को सुबह 10:33 बजे से शुरू हो रही है और यह 11 सितंबर को सुबह 8:56 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर देखा जाए तो 11 सितंबर को भाद्रपद की अमावस्या तिथि में सूर्योदय सुबह में 06:04 ए एम पर होगा, इसलिए भाद्रपद अमावस्या 11 सितंबर को होगी। लेकिन उस दिन पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान आदि नहीं होगा क्योंकि अमावस्या तिथि सुबह 8:56 बजे ही खत्म हो जा रही है।

ऐसे में भाद्रपद की दर्श अमावस्या 10 सितंबर को है। दर्श अमावस्या के दिन पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान आदि किया जाएगा। इस दिन कुशा ग्रहण करने की परंपरा को धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया है। 11 सितंबर को भाद्रपद अमावस्या का स्नान और दान होगा।

पितरों के तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान का समय

10 सितंबर को दर्श अमावस्या पर पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान आदि कार्य सुबह में 11:30 बजे से करें और दोपहर 02:30 बजे तक उसे पूर्ण कर लें। इस दिन ही पितरों के लिए पंचबलि कर्म, ब्राह्मण भोज आदि किया जा सकता है।

भाद्रपद अमावस्या 2026 स्नान मुहूर्त

11 सितंबर को भाद्रपद अमावस्या को ब्रह्म मुहूर्त में स्नान सबसे उत्तम समय होता है। भाद्रपद अमावस्या पर ब्रह्म मुहूर्त 04:32 ए एम से 05:18 ए एम तक है। इसके बाद अपनी क्षमता के अुनसार दान करें।

अमावस्या के दिन अपने सामर्थ्य अनुसार करें दान

अमावस्या के दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, तिल, गुड़ आदि का दान करने की परंपरा है। शाम के समय घर की साफ-सफाई कर दीपक जलाने और मां लक्ष्मी का स्मरण करने की भी मान्यता है। धार्मिक विश्वास के अनुसार साफ-सुथरा और सात्त्विक वातावरण घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

कुश उखाड़ने के नियम

इस बार कुशाग्रहणी अमावस्या पर कुशा ग्रहण करने की विधि और उससे जुड़े नियमों का ध्यान रखना बेहद जरूरी माना गया है।

  • सूर्योदय के समय स्नान करके हाथ जोड़कर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुंह करके कुश उखाड़ना चाहिए।
  • कुश को कभी भी लोहे या धातु के औजार (हंसिया/चाकू) से नहीं काटना चाहिए, केवल दाहिने हाथ से उखाड़ा जाता है।
  • कुश का अग्रभाग (नोक) टूटा हुआ या खंडित नहीं होना चाहिए।
  • कुश उखाड़ते समय पृथ्वी माता से अनुमति मांगने और “ॐ हूं फट् स्वाहा” अथवा “कुशाग्रवसते रुद्र…” मंत्र का जाप करने की परंपरा है।

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Sawan Amavasya 2026 Date: हरियाली अमावस्या पर पुष्य नक्षत्र में होगा स्नान-दान, जानें तारीख और पितरों को तर्पण देने का समय

Sawan Amavasya 2026 Date: सावन के महीने का हिंदू धर्म में विशेष स्थान है। यह भगवान विष्णु के चार माह की योगनिद्रा में जानें के बाद पहला हिंदू माह होता है। इस अवधि में भगवान शिव सृष्टि का कार्यभार संभालते हैं। सावन भगवान शिव का प्रिय माह है। इस माह में आने वाली अमावस्या को हरियाली अमावस्या कहते हैं, क्योंकि इस समय चारों तरफ हरियाली छायी रहती है और मानसून की फुहारों से वातावरण सराबोर रहता है।

हरियाली अमावस्या के दिन गंगा आदि पवित्र नदियों में स्नान और उसके बाद दान करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन स्नान करने से पापों से मुक्ति मिलती है और पुण्य की प्राप्ति होती है। अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित होती है। इसलिए हरियाली अमावस्या पर तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करने से पितृ प्रसन्न होते हैं। इस दिन पितृ दोष से मुक्ति के लिए विशेष उपाय भी किए जाते हैं। शाम के समय में पितरों के लिए दीपक जलाते हैं, ताकि पितृ लोक लौटते समय उनका मार्ग अंधकार में न रहे। इस साल की सावन अमावस्या पर पुष्य नक्षत्र रहेगा। आइए जानते हैं कि हरियाली अमावस्या कब है और पितृ तर्पण कब कर सकते हैं?

सावन अमावस्या 2026 तारीख

वैदिक पंचांग के आधार पर देखा जाए तो इस बार श्रावण कृष्ण अमावस्या तिथि 12 अगस्त को 01:52 बजे से शुरू हो रही है और यह 12 अगस्त को रात 11:06 बजे तक रहेगी। उदयातिथि को देखते हुए सावन अमावस्या 12 अगस्त बुधवार का है।

सावन अमावस्या 2026 स्नान-दान मुहूर्त

सावन अमावस्या पर स्नान और दान के लिए ब्रह्म मुहूर्त प्रात: 04 बजकर 23 ए एम से लेकर प्रात: 05 बजकर 06 मिनट तक है। जो लोग ब्रह्म मुहूर्त में स्नान न कर पाएं, वे लोग सूर्योदय के बाद स्नान, दान कर सकते हैं। उस दिन लाभ-उन्नति मुहूर्त 05:49 ए एम से 07:28 ए एम तक और अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त 07:28 ए एम से 09:07 ए एम तक रहेगा। इन दोनों समयों में भी स्नान और दान किया जा सकता है। सावन अमावस्या पर साल का अंतिम सूर्य ग्रहण लगने वाला है।

सावन अमावस्या पर तर्पण कब करें?

सावन अमावस्या के दिन स्नान के बाद पितरों के लिए तर्पण कर सकते हैं। हाथ में जल, सफेद फूल और काले तिल लेकर कुशा की मदद से पितरों को तर्पण दे सकते हैं। तर्पण देने से पितर प्रसन्न होते हैं।

व्यतीपात योग और पुष्य नक्षत्र में सावन अमावस्या

इस साल की सावन अमावस्या पर व्यतीपात योग और पुष्य नक्षत्र का योग है। व्यतीपात योग प्रात:काल से लेकर दोपहर 3 बजकर 26 मिनट तक रहेगा, उसके बाद वरीयान् योग बनेगा। व्यतीपात योग में किसी नए या शुभ कार्य की शुरूआत नहीं करते हैं।

पुष्य नक्षत्र प्रात:काल से लेकर सुबह 7 बजकर 59 मिनट तक रहेगा, उसके बाद अश्लेषा नक्षत्र है। पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रों का राजा कहा जाता है। यह एक शुभ नक्षत्र है, इसमें आप शुभ कार्य कर सकते हैं, जिसमें सफलता प्राप्त होती है। स्थिर कार्य भी इस नक्षत्र में कर सकते हैं।

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Hariyali Amavasya 2026 Date: हरियाली अमावस्या पर गौरी और गजकेसरी योग का दुर्लभ संयोग, जानें सही तारीख और शुभ मुहूर्त

Hariyali Amavasya 2026 Date: हरियाली अमावस्या श्रावण मास में मनाई जाती है। यह पर्व भगवान शिव की भक्ति और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का विशेष अवसर है। सावन का महीना शिव जी को अति प्रिय है। ऐसे में हरियाली अमावस्या के दिन शिव-पार्वती की पूजा करने से सुख, समृद्धि और वैवाहिक जीवन में खुशहाली आती है। बारिश के इस मौसम में धरती पर चारों ओर हरियाली छा जाती है। इस दिन पौधे (जैसे नीम, पीपल, बरगद, तुलसी, आंवला आदि) लगाना बेहद शुभ माना जाता है और इसे पुण्य कर्म माना गया है। हरियाली अमावस्या को पितरों की शांति के लिए स्नान, दान और तर्पण करना बहुत फलदायी होता है।

हरियाली अमावस्या कब है ?

पंचांग के अनुसार, सावन मास की अमावस्या तिथि का आरंभ 11 अगस्त, मंगलवार के दिन रात में 1 बजकर 54 मिनट से होगा। वहीं, अगले दिन यानी 12 अगस्त, बुधवार को रात में 11 बजकर 7 मिनट तक अमावस्या तिथि व्याप्त रहेगी। उदया तिथि के अनुसार, 12 अगस्त के दिन हरियाली अमावस्या का व्रत व पितृकर्म करना शास्त्र सम्मत होगा। इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने के बाद दोपहर के समय पितरों की पूजा आदि कार्य किए जाते हैं।

हरियाली अमावस्या पर गौरी और गजकेसरी योग का संयोग

हरियाली अमावस्या के दिन पुष्य नक्षत्र का संयोग भी बन रहा है और साथ ही, इसी दिन चंद्रमा अपनी स्वराशि कर्क में रहेंगे। इसके चलते गौरी योग और गजकेसरी योग का शुभ संयोग भी बनेगा। इस शुभ संयोग में व्रत और पितृकर्म करने वाले श्रद्धालुओं के लिए हरियाली अमावस्या विशेष रूप से फलदायी रहने वाली है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन फल देने वाले वृक्ष लगाने से उत्तम फल प्राप्त होता है।

हरियाली अमावस्या शुभ मुहूर्त

सूर्योदय : सुबह 5 बजकर 48 मिनट पर

लाभ चौघड़िया : सुबह 5 बजकर 48 मिनट से लेकर 7 बजकर 27 मिनट तक

अमृत चौघड़िया : सुबह 7 बजकर 27 मिनट से लेकर 9 बजकर 7 मिनट तक

शुभ चौघड़िया : सुबह 10 बजकर 46 मिनट से लेकर दोपहर के 12 बजकर 26 मिनट तक

लाभ चौघड़िया : शाम को 5 बजकर 24 मिनट से लेकर 7 बजकर 3 मिनट तक

हरियाली अमावस्या 2026 पूजा विधि

स्नान व संकल्प : सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करें या घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।

शिव पूजन : शिवलिंग पर जल, दूध, शहद, बेलपत्र, धतूरा और सफेद फूल अर्पित करें। “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।

वृक्षारोपण : घर के आंगन या किसी सार्वजनिक स्थान/बगीचे में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं।

पीपल पूजा : पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं और सरसों के तेल का दीपक जलाकर परिक्रमा करें।

दान-पुण्य : गरीबों या जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या फल का दान करें।

Ashadha Amavasya Upay: आज भौमवती अमावस्या पर जानें स्नान–दान का मुहूर्त और किन चीजों का दान करने का मिलता है पुण्य फल

Ashadha Amavasya 2026: मंगलवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या को भौमवती अमावस्या भी कहा जाता है। इस बार भौमवती अमावस्या का संयोग आषाढ़ अमावस्या को बन रहा है। इसे हलहारिणी अमावस्या भी कहते हैं। हालांकि, यह साल 2026 की दूसरी भौमवती अमावस्या है। इससे पहले, मंगलवार, 17 फरवरी 2026 को फाल्गुन अमावस्या पर भौमवती अमावस्या का संयोग को हुआ था। इस साल, दूसरी बार भौमवती अमावस्या 14 जुलाई 2026 को आषाढ़ अमावस्या में हो रही है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भौमवती अमावस्या कहा जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य और विशेष रूप से पितरों के निमित्त तर्पण व पिंडदान करने का अत्यधिक महत्व है। इसके साथ ही इस दिन मंगल ग्रह के निमित्त पूजा या हनुमान जी की आराधना करने से कर्ज से मुक्ति और मंगल दोषों से राहत मिलती है।

आषाढ़ अमावस्या तिथि

द्रिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ अमावस्या की तिथि 13 जुलाई को शाम 6 बजकर 50 मिनट पर शुरू होगी और तिथि का समापन 14 जुलाई को दोपहर 3 बजकर 14 मिनट पर होगा। उदया तिथि को देखते हुए इस दिन आषाढ़ अमावस्या मानी जा रही है।

आषाढ़ अमावस्या शुभ मुहूर्त

इस दिन स्नान व दान का मुहूर्त सुबह 4 बजकर 30 मिनट से शुरू होगा और सुबह 5 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग जैसे अत्यंत शुभ संयोग बन रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन योगों में की गई पूजा, जप और दान का फल कई गुना बढ़ जाता है।

अमावस्या पर मिलता है दान का अक्ष्य पुण्य 

अमावस्या तिथि पर किया गया दान अक्षय पुण्य प्रदान करता है। इस दिन अन्न और जल जैसे गेहूं, चावल, सत्तू, या मौसमी फल। काले तिल, छाता, चप्पल या सूती वस्त्र जैसे चीजें दान की जा सकती हैं। कई श्रद्धालु इस दिन व्रत रखकर दिनभर भजन-कीर्तन और मंत्र जाप भी करते हैं।

आषाढ़ अमावस्या का महत्व

ग्रह दोष शांति : ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अमावस्या के स्वामी शनि देव हैं। इस दिन हनुमान जी की पूजा करने से शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव कम होता है। साथ ही, मंगलवार का संयोग होने से राहू-केतु और मंगल के अशुभ प्रभावों से राहत मिलती है।

पितृ दोष से मुक्ति : जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष होता है, उनके लिए आषाढ़ अमावस्या पर पिंड दान, तर्पण और अन्नदान करना अमोघ उपाय माना गया है। इससे अतृप्त पितर प्रसन्न होकर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।

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