LIC ने लॉन्च किया नया कैंसर कवर प्लान, जानिए इसकी सबसे जरूरी बातें

एलआईसी ने अपना नया कैंसर कवर प्लान 19 अक्तूबर को लॉन्च कर दिया। इस प्लान के तहत पॉलिसीहोल्डर को कैंसर के शुरुआती चरण और बाद के चरणों में फाइनेंशियल प्रोटेक्शन मिलेगा। कंपनी ने कैंसर के बढ़ते मामलों को देखते हुए यह प्लान पेश किया है। इस प्लान की पूरी अवधि में प्रीमियम फिक्स्ड रहेगा।

इलाज की एक्चुअल कॉस्ट की जगह फिक्स्ड फाइनेंशियल बेनेफिट्स

LIC New Cancer Cover एक नॉन-लिंक्ड प्लान है और प्योर रिस्क प्लान है। इस प्लान के तहत पॉलिसीहोल्डर को इलाज की एक्चुअल कॉस्ट की जगह फिक्स्ड फाइनेंशियल बेनेफिट्स मिलता है। सम एश्योर्ड के 25 फीसदी का पेमेंट अर्ली स्टेज कैंसर का पता चलते ही पॉलिसीहोल्डर को कर दिया जाता है।

बाद के स्टेज वाले कैंसर का पता चलने पर 100% सम एश्योरेंड का पेमेंट

बाद के स्टेज वाले कैंसर (Major-Stage Cancer) का पता चलने पर पॉलिसीहोल्डर को 100 फीसदी अप्लिकेबल सम एश्योर्ड का पेमेंट किया जाता है। पॉलिसी की शर्तों के मुताबिक, कैंसर का पता चलने के बाद पॉलिसीहोल्डर का प्रीमियम माफ हो जाता है।

प्लान को खरीदने की न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम उम्र 65 साल 

इस प्लान को खरीदने की न्यूनतम उम्र 18 साल है, जबकि अधिकतम उम्र 65 साल है। उम्र के कैलकुलेशन अंतिम बर्थडे के आधार पर होगा। इस प्लान में लेवल सम एश्योर्ड और इक्रिजिंग सम एश्योर्ड का विकल्प है। इसका मतलब है कि कोई व्यक्ति दोनों में से किसी एक विकल्प का चुनाव कर सकता है।

यह पॉलिसी 10 साल या 15 साल के टर्म के लिए ली जा सकती है

इस पॉलिसी का मिनिमम टर्म 10 साल है, जबकि मैक्सिमम टर्म 15 साल है। इसका मतलब है कि अगर 18 साल का कोई व्यक्ति 10 साल के टर्म के लिए पॉलिसी खरीदता है तो उसके 28 साल के होने पर पॉलिसी मैच्योर हो जाएगी।

उम्र की रेंज के आधार पर चार मिनिमम बेसिक सम एश्योर्ड के स्लैब

18 से 34 साल के पॉलिसीहोल्डर के लिए मिनिमम बेसिक सम एश्योर्ड 35,00,000 रुपये हैं। 35 से 40 साल के पॉलिसीहोल्डर के लिए यह 30,00,000 रुपये है। 41 से 50 साल के लिए यह 20,00,000 रुपये है। 51 से 65 साल के लिए 15,00,000 रुपये है।

प्योर रिस्क हेल्थ पॉलिसी होने की वजह से किसी तरह का डेथ बेनेफिट्स नहीं 

इस पॉलिसी में किसी तरह का डेथ बेनेफिट शामिल नहीं है, क्योंकि यह टर्म लाइफ इंश्योरेंस प्लान नहीं है। यह प्योर रिस्क हेल्थ इंश्योरेंस प्लान है। अगर पॉलिसीहोल्डर को पॉलिसी के टर्म के दौरान कैंसर की बीमारी का पता नहीं चलता है यानी इलाज की जरूरत नहीं पड़ती है तो मैच्योरिटी पर उसे किसी तरह का बेनेफिट नहीं मिलेगा।

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एलआईसी से सीधे पॉलिसी खरीदने पर प्रीमियम में रिबेट का फायदा 

इस पॉलिसी में प्रीमियम का पेमेंट सालाना या छमाही आधार पर किया जा सकता है। सीधे एलआईसी से यह पॉलिसी खरीदने पर प्रीमियम में रिबेट मिलता है। एजेंट, कॉर्पोरेट एजेंट या इंश्योरेंस मार्केटिंग फर्म से पॉलिसी खरीदने पर रिबेट नहीं मिलेगा। इस प्लान में लोन की फैसिलिटी उपलब्ध नहीं है। किसी तरह की सरेंडर वैल्यू भी नहीं होगी।

कैंसर की 137 दवाइयां हो सकती हैं 70% तक सस्ती, NPPA ने मुनाफे पर लगाई 30% की कैप

ड्रग प्राइसिंग रेगुलेटर NPPA ने शनिवार को 137 कैंसर-रोधी (Anti-Cancer) नॉन-शेड्यूल्ड दवाओं के ट्रेड मार्जिन यानि कि मुनाफे को 30 प्रतिशत तक सीमित कर दिया। रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने बयान में कहा कि यह फैसला 9 नवंबर से प्रभावी होगा। इससे इन दवाओं की खुदरा कीमतें मौजूदा प्राइस स्ट्रक्चर के आधार पर 70 प्रतिशत तक घटने की उम्मीद है।

नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) ने शनिवार को एक गजट नोटिफिकेशन जारी होने के बाद ड्रग्स (प्राइसेज कंट्रोल) ऑर्डर, 2013 के पैराग्राफ 19 के तहत ट्रेड मार्जिन रेशनलाइजेशन (TMR) व्यवस्था लागू की है। NPPA, डिपार्टमेंट ऑफ फार्मास्यूटिकल्स के तहत काम करता है।

मंत्रालय के अनुसार, यह कदम स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) के तहत गठित विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों पर बेस्ड है। इस समिति में देशभर के नामी कैंसर विशेषज्ञ, मेडिकल स्पेशलिस्ट्स, अस्पतालों के प्रतिनिधि और सरकारी अधिकारी शामिल थे। समिति ने ट्रेड मार्जिन को तर्कसंगत बनाने के लिए 137 दवाओं की सिफारिश की थी। इस लिस्ट को समय-समय पर अपडेट किया जाएगा।

2019 में भी की थी ऐसी पहल

यह पहल NPPA के 2019 के एक पायलट पर बेस्ड है। उस समय 42 कैंसर रोधी दवाओं पर ट्रेड मार्जिन 30 प्रतिशत तय किया गया था। इसके परिणामस्वरूप 526 ब्रांड्स की दवाओं के मैक्सिमम रिटेल प्राइस (MRP) में 90 प्रतिशत तक की कमी आई थी। मंत्रालय ने कहा है कि नई व्यवस्था के तहत अब कहीं अधिक संख्या में कैंसर की दवाओं को शामिल किया गया है।

दवा कंपनियों को दवाओं की रिवाइज्ड प्राइस लिस्ट अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर पब्लिश करने और खुदरा विक्रेताओं व अस्पतालों तक इसकी जानकारी व्यापक रूप से पहुंचाने का निर्देश दिया गया है। खुदरा विक्रेताओं और अस्पतालों को 9 नवंबर से संशोधित दरों पर ही दवाएं बेचनी होंगी और अपनी फार्मेसी में नई कीमतों को डिस्प्ले करना होगा। जो अस्पताल कैंसर की दवाओं का एक बड़ा हिस्सा सीधे खरीदते हैं, उन्हें अपनी वेबसाइट्स पर नई कीमतें प्रमुखता से दर्शानी होंगी। साथ ही यह सुनिश्चित करने की सीधी जिम्मेदारी भी उन्हीं की होगी कि इन संशोधित कीमतों को वास्तव में लागू किया जाए।

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उपभोक्ता ऐसे पता कर सकते हैं सही कीमतें

उपभोक्ता NPPA की वेबसाइट और ‘फार्मा सही दाम’ मोबाइल ऐप के जरिए दवाओं की अपडेटेड कीमतों की जांच कर सकते हैं। इन नियमों का सख्ती से पालन कराने के लिए राज्यों के ड्रग कंट्रोलरों को निर्देश दिया गया है कि वे मैन्युफैक्चरर्स, डीलर्स, खुदरा विक्रेताओं, अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों में इनका अनुपालन सुनिश्चित कराएं। दवा कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि वे नोटिफाइड दवाओं के अपने मौजूदा उत्पादन और आपूर्ति स्तर को बनाए रखें, ताकि देश भर के मरीजों को जरूरी दवाएं बिना किसी रुकावट के और समय पर मिलती रहें।

From Selling Vegetables to Dreaming of Becoming a Bodybuilder | The Better India Hindi

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सुबह मंडी में सब्जियां… दिनभर दुकान… और रात को अपने सपने के लिए मेहनत।

ऋषिकेश के 21 साल के दीपक के लिए जिंदगी सिर्फ अपने सपने तक पहुँचने की दौड़ नहीं है।

माँ कैंसर से लड़ रही हैं, पापा आज भी सब्जी का ठेला लगाते हैं, और दीपक का सपना है कि एक दिन इतना आगे बढ़े कि पापा से कह सके—“अब आप ठेला मत लगाइए।
”
जब लोगों ने मजाक उड़ाया, सोशल मीडिया पर वीडियोज नहीं चलीं।
फिर भी दीपक नहीं रुके, क्योंकि कुछ सपने सिर्फ अपने लिए नहीं होते, कुछ करना है जिंदगी में, तो शर्म मत करो। बस करते रहो।

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Sarva Pitru Amavasya 2026: कल शनि अमावस्या के साथ विदा होंगे पितृ, जानें सर्व पितृ अमावस्या पर तर्पण और श्राद्ध का मुहूर्त

Sarva Pitru Amavasya 2026: अश्विन अमावस्या से पितरों श्राद्ध और तर्पण की अवधि, जिसे पितृ पक्ष कहते हैं, समाप्त हो जाती है। सर्व पितृ अमावस्या के दिन उन पूर्वजों का श्राद्ध और तर्पण किया जाता है, जिनका निधन किसी भी माह की अमावसया तिथि को हुआ था और जिनकी मृत्यु की तारीख ज्ञात नहीं है। इस दिन श्राद्ध, तर्पण और दान के बाद पितृ लोक से आए पितृ विदा हो जाते हैं।

सर्व पितृ अमावस्या तारीख और समय?

आश्विन अमावस्या तिथि शुक्रवार, 9 अक्टूबर रात 9 बजकर 35 मिनट से शनिवार रात 9 बजकर 19 मिनट तक रहेगी। पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध कार्य दोपहर के समय करते हैं। उदयातिथि के आधार पर सर्व पितृ अमावस्या 10 अक्टूबर शनिवार को है। शनिवार की अमावस्या होने की वजह से यह शनि अमावस्या भी है और आश्विन अमावस्या भी।

सर्व पितृ अमावस्या 2026 मुहूर्त

सर्व पितृ अमावस्या पर ज्ञात और अज्ञात सभी पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध होता है। सर्व पितृ अमावस्या पर पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध कुतुप मुहूर्त या रौहिण मुहूर्त में कर देते हैं।

कुतुप मुहूर्त : 11:45 ए एम से 12:31 पी एम

रौहिण मुहूर्त : 12:31 पी एम से 01:18 पी एम

अपराह्न काल : 01:18 पी एम से 03:37 पी एम

सर्व पितृ अमावस्या पर पितरों को विदा करने की विधि

सर्व पितृ अमावस्या को आप विधि विधान से सही मुहूर्त में पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध कर लें। उसके बाद जब सूर्यास्त हो तो पितरों की विदाई का कार्यक्रम करें। उनके लिए चार मुख वाला तेल का एक दीप जलाएं। यह दीपक दक्षिण दिशा में रखना है। जब पितर धरती से विदा होंगे तो उस दीपक की वजह से उनके मार्ग में उजाला रहेगा।

पितरों को विदा करें मोक्ष प्राप्ति की कामना

दीपक जलाने के बाद आप पितरों को स्मरण करें और दोनों हाथों को जोड़कर उनको प्रणाम करते हुए कहें— हे सभी पितृ देव! पितृ पक्ष के समय में आपके लिए तर्पण, श्राद्ध, पंचबलि कर्म, दान, ब्राह्मण भोज आदि अपनी क्षमता के अनुसार किया, आप सभी मेरे इन कार्यों से तृप्त और संतुष्ट हों। भगवान विष्णु की कृपा से आप सभी को मोक्ष की प्राप्ति हो। आप सभी अपने मार्ग से अपनी दिशा की ओर प्रस्थान करें और पूरे परिवार को सुख, समृद्धि और उन्नति का आशीर्वाद दें।

NPPA Cancer Drug Pricing: कैंसर की दवाओं के दाम पर सरकार का बड़ा फैसला, 70% तक सस्ती हो सकती हैं दवाएं

NPPA Cancer Drug Pricing: कैंसर की दवाओं के दाम पर सरकार का बड़ा फैसला, 70% तक सस्ती हो सकती हैं दवाएं

NPPA Cancer Drug Pricing: कैंसर एक ऐसी बीमारी है, जिसकी चपेट में आने वाले मरीज के साथ-साथ उसका पूरा परिवार जूझता है। यह बीमारी शरीर ही नहीं, आत्मबल और आर्थिक स्थिति को भी चोट पहुंचाती है। बहुत से मरीज और उनके परिजन इसका इलाज तक पूरा नहीं कर पाते हैं। लेकिन सरकार के इस कदम से कैंसर की बीमारी से जूझ रहे मरीजों और उनके परिजनों को बड़ी राहत मिल सकती है। सरकार इस जानलेवा बीमारी की दवाओं के दाम 70% तक घटाने की तैयारी कर रही है। सरकार ने कुछ कैंसर दवाओं पर व्यापारिक मार्जिन अधिकतम 30% तक सीमित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।

कैंसर की अन्य दवाओं को मूल्य सुरक्षा देना

सरकार ने गैर सूचीबद्ध कैंसररोधी दवाओं की आपूर्ति और बिक्री में लगने वाले मार्जिन को सीमित करने को मंजूरी दे दी है। ये मार्जिन अधिकतम बिक्री मूल्य (MRP) के 30% तक सीमित होंगे। इस कदम से दवाओं की कीमतें 70% तक कम होने और कैंसर के मरीजों को हर साल ₹2,500 करोड़ बचाने में मदद मिलने की उम्मीद है। इससे उनकी जेब से चुकाने वाली रकम में काफी कमी आएगी।

शेड्यूल्ड लिस्ट में शामिल जरूरी कैंसर की दवाएं पहले से ही सरकार द्वारा तय की गई सख्त सीलिंग प्राइस के तहत हैं। लेकिन इस सूची से बाहर गैर सूचीबद्ध कैंसर दवाओं को सरकार के नए फैसले से मूल्य सुरक्षा मिलेगी। मरीजों तक पहुंचने से पहले दवाओं पर जोड़े जाने वाले मार्जिन को सीमित किया जाएगा।

डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DGHS) के तहत एक विशेषज्ञ समिति कवर की जाने वाली दवाओं की सूची को अंतिम रूप देगी। नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) फिर फैसला लेगी और अधिसूचना जारी करेगी।

कम होगा कैंसर के इलाज का भारी खर्च

भारत में कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं, हर एक लाख की आबादी पर लगभग 60 लोग कैंसर से प्रभावित हैं। इलाज से मरीजों और उनके परिवारों पर पैसे का भारी बोझ पड़ता है। एनपीपीए के मार्केट डेटा के एनालिसिस में पाया गया कि गैर सूचीबद्ध कैंसररोधी दवाओं की कीमत में औसतन लगभग 170% का मार्क-अप होता है। कुछ मामलों में यह 700% या उससे भी अधिक हो जाता है। आसान शब्दों में कहें तो, मरीज तक पहुंचने से पहले सप्लाई चेन से गुजरने वाली दवा की कीमत तेजी से बढ़ जाती है। रिटेल फार्मेसी, हॉस्पिटल फार्मेसी या ऑनलाइन फार्मेसी से खरीदी गई दवाओं की कीमतें भी काफी अलग-अलग होती हैं।

महाराष्ट्र, राजस्थान और कर्नाटक सहित राज्य अधिकारियों ने, मरीजों और सिविल सोसाइटी के साथ मिलकर दवाओं की बहुत ज्यादा कीमतों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। इन चिंताओं पर सार्वजनिक मंचों पर भी आवाज उठाई गई है। खासकर जिस कीमत पर दवाएं बेचने के लिए खरीदी जाती हैं और कंज्यूमर से ली जाने वाली MRP के बीच बड़े अंतर को लेकर।

महंगी कैंसर की दवाओं पर इतना अधिक मार्जिन मरीजों के इलाज का खर्च काफी बढ़ा देता है। नई लिमिट से बहुत ज्यादा मुनाफाखोरी पर रोक लगेगी, बाजार में गलत कीमत तय करने के तरीकों पर ध्यान दिया जाएगा और मरीजों के लिए सही कीमतें पक्का करने में मदद मिलेगी।

2019 के फैसले से मिली राहत को आगे बढ़ाना

फरवरी 2019 में, सरकार के निर्देश पर, एनपीपीए ने ड्रग्स (प्राइस कंट्रोल) ऑर्डर, 2013 के पैराग्राफ 19 के तहत 42 चुनी हुई नॉन-शेड्यूल्ड एंटी-कैंसर दवाओं पर ट्रेड मार्जिन की लिमिट लगा दी थी। सरकार के इस दखल से पता चलता है कि मार्जिन को सीमित करने से मरीजों को बड़ी राहत मिल सकती है।

उस फैसले से MRP 91% तक कम हो गई, जिससे 526 ब्रांड पर सालाना ₹984 करोड़ की बचत हुई। इससे कैंसर के मरीजों पर पैसे का बोझ काफी कम हुआ और उनकी जिंदगी आसान हुई। इससे सबक लेते हुए और सप्लाई चेन में कीमत की समस्याओं को दूर करते हुए, सरकार ने अब बड़ी लिमिट को मंजूरी दे दी है।

उत्पादन बनाए रखना और लगातार उपलब्धता पक्का करना

कैंसर की जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए नॉन-शेड्यूल्ड एंटी-कैंसर दवाओं के मैन्युफैक्चरर्स को अपने मौजूदा उत्पादन स्तर को बनाए रखना होगा। इस हस्तक्षेप में ब्रांडेड और जेनेरिक, देश में बनी और आयातित, पेटेंटेड और नॉन-पेटेंटेड, सभी श्रेणी की गैर सूचीबद्ध कैंसररोधी दवाएं शामिल होंगी। इससे मरीजों को कम कीमतों का काफी फायदा होगा। साथ ही, उन्हें जरूरी दवाएं लगातार मिलती रहेंगी।

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Viral Video: ‘अरे जया जी हंसती भी है’, गुलजार के साथ जया बच्चन को हंसता देख यूजर्स ने किए मजेदार कमेंट

Viral Video: मुंबई में हाल ही में हुई एक बुक लॉन्च इवेंट में गुलजार के साथ जया बच्चन का खुशनुमा पल इंटरनेट पर चर्चा का विषय बन गया है। इस अनुभवी अभिनेत्री को फिल्म निर्माता और गीतकार गुलजार के साथ खुलकर हंसते हुए देखा गया। इवेंट की तस्वीरों और वीडियो में उनकी यह छोटी सी बातचीत खास तौर पर लोगों का ध्यान खींच रही है।

इवेंट से जया बच्चन का हंसते हुए वीडियो वायरल

इस कार्यक्रम में अमिताभ बच्चन भी मौजूद थे, जहां बच्चन परिवार की गुलजार से मुलाकात हुई। डॉ. पी. जगन्नाथ की किताब ‘DR BLUE A Cancer Surgeon’s Journey into the Human Side of Healing’ के लॉन्च पर बिग बी और जया बच्चन मेहमानों में शामिल थे। इवेंट का एक वीडियो ऑनलाइन सामने आया है, जिसमें जया बहुत खुशमिजाज अंदाज में नजर आ रही हैं।

उनकी सहज मुस्कान और गुलजार के साथ उनकी दोस्ताना केमिस्ट्री को देखकर कई सोशल मीडिया यूजर्स ने उनके इस हल्के-फुल्के और खुशमिजाज अंदाज पर प्रतिक्रिया दी है। इवेंट के एक वीडियो में इन तीनों दिग्गजों के बीच एक प्यारी सी बातचीत कैद हुई है। वीडियो में देखा जा सकता है कि जब जया मंच की सीढ़ियां चढ़ रही थीं तो बिग बी ने उनकी मदद के लिए हाथ बढ़ाया।

उनके पास पहुंचने के बाद जया ने गुलजार से कुछ बातें कीं। गुलजार ने अपना हाथ उनके कंधे पर रखा और जल्द ही उन्हें हंसा दिया। उनकी इस सहज बातचीत से उनके बीच के स्नेह और दोस्ताना रिश्ते की झलक मिलती है। सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आते ही, लोग सीनियर एक्ट्रेस का एक अलग अंदाज देखकर खुश हो गए।

एक यूजर ने लिखा, “मुस्कुराती रहिए… मुस्कान आप पर अच्छी लगती है… गुलजार की ‘गुड्डी’… मुस्कान तो हर किसी पर अच्छी लगती है।” एक और यूजर ने लिखा, “पहली बार हंसते हुए देखा।” तीसरे यूजर ने कमेंट किया, “अरे, जया जी हंसती भी हैं।” एक कमेंट यह भी था, “मेरी ऑल-टाइम फेवरेट जया जी, बिना ज्यादा मेकअप के भी ग्रेसफ़ुली उम्र बढ़ रही है।”

जया बच्चन और गुलजार का साथ कई दशकों पुराना है। फिल्ममेकर और गीतकार गुलजार ने उनके साथ ‘गुड्डी’ जैसी बेहद पसंद की गई फिल्मों में काम किया है। अमिताभ बच्चन के साथ भी उनका प्रोफेशनल रिश्ता कई प्रोजेक्ट्स तक रहा है और सिनेमा में काम करने के अलावा भी दोनों के बीच लंबे समय से गहरा रिश्ता रहा है।

Video: 81 साल की उम्र में पत्नी के लिए 14 घंटे उठाता रहा भारी सामान, कहानी सामने आते ही लोगों ने जुटाए ₹2 करोड़

अमेरिका के टेक्सास में 81 साल के Don Johnson की कहानी इन दिनों लोगों के बीच चर्चा में है। उम्र के उस पड़ाव पर, जब इंसान आराम और परिवार के साथ सुकून के पल बिताना चाहता है, Johnson अपनी पत्नी के इलाज के लिए लगातार मेहनत कर रहे थे। उनकी पत्नी Josephine कैंसर से जूझ रही हैं और इलाज का खर्च लगातार बढ़ रहा था। ऐसे में Johnson ने उम्र की परवाह किए बिना काम करना जारी रखा। वह खोया हुआ सामान उसके मालिकों तक पहुंचाने का काम करते थे और कई-कई घंटे सड़क पर बिताते थे। उनकी जिंदगी की मुश्किलों का अंदाजा तब हुआ, जब एक ग्राहक के घर लगे कैमरे में वह भारी सूटकेस लेकर सीढ़ियां चढ़ते नजर आए।

थके हुए Johnson को देखकर ग्राहक Erin Howell भावुक हो गईं। इसके बाद उन्होंने उनकी मदद के लिए फंडरेजर शुरू किया। देखते ही देखते यह कहानी लोगों तक पहुंची और बड़ी संख्या में लोगों ने Johnson और उनकी पत्नी के लिए मदद का हाथ बढ़ाया।

सीढ़ियों पर भारी बैग उठाते दिखे Johnson

Johnson खोए हुए सामान को उसके मालिकों तक पहुंचाने का काम करते हैं। एक दिन वह Erin Howell के घर सामान पहुंचाने पहुंचे। घर के सिक्योरिटी कैमरे में वह भारी सूटकेस लेकर सीढ़ियां चढ़ते नजर आए। उनकी थकान और मेहनत देखकर Howell भावुक हो गईं और उन्होंने Johnson की कहानी लोगों के साथ साझा करने का फैसला किया।

पत्नी के इलाज के लिए चुना मुश्किल काम

Johnson और Josephine की शादी को 57 साल हो चुके हैं। Josephine को जानलेवा कैंसर का पता चलने के बाद परिवार की आर्थिक मुश्किलें बढ़ती गईं। मेडिकल बिल, दवाइयों और रोजमर्रा के खर्चों ने Johnson को काम करने के लिए मजबूर कर दिया।

उन्होंने कई जगह नौकरी तलाशने की कोशिश की, लेकिन उम्र के कारण उन्हें काम नहीं मिल पाया। आखिरकार उन्होंने सामान डिलीवर करने का काम शुरू किया। Johnson के मुताबिक, यही वह काम था जो उन्हें मिल सका।

14 घंटे की शिफ्ट और हजारों मील का सफर

Johnson कई बार दिन में करीब 14 घंटे तक काम करते थे। इस दौरान उन्हें लंबी दूरी तक गाड़ी चलाने के साथ भारी सामान भी उठाना पड़ता था। तीन साल में वह खोया हुआ सामान पहुंचाते हुए अपनी कार से 200,000 मील से ज्यादा दूरी तय कर चुके हैं। लगातार सफर और काम के कारण उनकी कार में भी कई तकनीकी परेशानियां आने लगीं, लेकिन पत्नी के इलाज का खर्च जुटाने के लिए उन्होंने काम जारी रखा।

एक वीडियो ने बदल दी जिंदगी

Howell ने जब कैमरे में रिकॉर्ड हुई Johnson की तस्वीरें देखीं तो उन्होंने उनके लिए फंडरेजर शुरू करने का फैसला किया। उनका मकसद Johnson और Josephine पर पड़े आर्थिक बोझ को कम करना था। 2 सितंबर को शुरू हुए इस अभियान में अब तक 2.44 लाख डॉलर से ज्यादा जुटाए जा चुके हैं, जबकि लक्ष्य 3 लाख डॉलर रखा गया है। भारतीय मुद्रा में जुटाई गई रकम करीब ₹2.87 करोड़ बैठती है।

अब शायद काम छोड़ पाएंगे Johnson

लोगों की मदद मिलने के बाद Johnson को उम्मीद जगी है कि अब उन्हें इतनी मेहनत नहीं करनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि वह काम करना बंद कर पाएंगे और यह उनके लिए बेहद खास एहसास है।

पत्नी को मिली नई उम्मीद

इस मदद का असर Josephine पर भी पड़ा है। बीमारी और आर्थिक परेशानियों के बीच लोगों की दुआओं और समर्थन ने उन्हें मानसिक रूप से मजबूत महसूस कराया है। उनका कहना है कि अब वह इस मुश्किल दौर का सामना कर सकती हैं और लोगों का प्यार उनके लिए खुशी का एहसास लेकर आया है।

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माँ की Spinal Injury के बाद बेटे ने संभाली माँ और घर की जिम्मेदारी | Life With Ammi | Moeen Raza

माँ की Spinal Injury के बाद बेटे ने संभाली माँ और घर की जिम्मेदारी | Life With Ammi | Moeen Raza

जिस माँ ने कभी उंगली पकड़कर मुझे चलना सिखाया था, आज मैं उनका हाथ पकड़कर उन्हें चलना सिखा रहे हैं।
रायपुर, छत्तीसगढ़ के Moeen Raza ने माँ की Spinal Injury के बाद उनकी देखभाल के लिए अपनी जिंदगी बदल दी।
उन्होंने घर पर रहकर सारी जिम्मेदारी उठाई जब बाहर जाकर काम करना मुश्किल हुआ,
घर पर पैसों की समस्या आई तो उन्होंने सोशल मीडिया के ज जरिए अपनी कहानी लोगों तक पहुँचाई और यही उनकी कमाई का जरिया भी बन गया।
आज दो साल बाद अम्मी पहले से काफी बेहतर हैं। अब बस उनकी एक ही ख्वाहिश है – उन्हें फिर अपने पैरों पर खड़ा देखना।

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बेटे के Cancer से जूझते हुए इमरान हाशमी ने सीखी जिंदगी की नई परिभाषा | Life changed after son cancer diagnosis | Emraan Hashmi In Awarapan 2#thebetterindia #goodnews #positivestories #indianews #thebetterindiahindi #hindi

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खुद की पहचान के लिए लड़ीं, बनीं Trans Woman Scientist — सूरी | Trans woman | Haryana | STEM

खुद की पहचान के लिए लड़ीं, बनीं Trans Woman Scientist — सूरी | Trans woman | Haryana | STEM

बचपन में अपने ही अस्तित्व को समझने की जद्दोजहद से लेकर आज जर्मनी में Brain Cancer Research पर PhD करने तक, सूरी का सफर कभी आसान नहीं था।
हरियाणा के एक छोटे से गांव से निकलीं, 3 साल की उम्र में माता-पिता को खो दिया, अपनी पहचान को समझने और अपनाने के लिए संघर्ष किया और फिर समाज की पुरानी सोच से भी लड़ीं। लेकिन उन्होंने अपनी पहचान को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।
आज वह Scientist हैं और अपनी कहानी खुलकर साझा करती हैं, ताकि उनके जैसा कोई भी बच्चा यह न सोचे कि उसके सपनों की कोई सीमा है।
जो मानते हैं की Trans लोग बड़ी सफलता हासिल नहीं कर सकते, ये कहानी उनके साथ शेयर करें। 

@suri_not_sorryy

[Trans Woman in STEM, From India to Germany, Fighting gender norms, Breaking Stereotypes]

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बचपन में अपने ही अस्तित्व को समझने की जद्दोजहद से लेकर आज जर्मनी में Brain Cancer Research पर PhD करने तक, सूरी का सफर कभी आसान नहीं था।
हरियाणा के एक छोटे से गांव से निकलीं, 3 साल की उम्र में माता-पिता को खो दिया, अपनी पहचान को समझने और अपनाने के लिए संघर्ष किया और फिर समाज की पुरानी सोच से भी लड़ीं। लेकिन उन्होंने अपनी पहचान को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।
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खुद की पहचान के लिए लड़ीं, बनीं Trans Woman Scientist — सूरी | Trans woman | Haryana | STEM#thebetterindia #goodnews #positivestories #indianews #thebetterindiahindi #hindi

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