माँ की Spinal Injury के बाद बेटे ने संभाली माँ और घर की जिम्मेदारी | Life With Ammi | Moeen Raza

माँ की Spinal Injury के बाद बेटे ने संभाली माँ और घर की जिम्मेदारी | Life With Ammi | Moeen Raza

जिस माँ ने कभी उंगली पकड़कर मुझे चलना सिखाया था, आज मैं उनका हाथ पकड़कर उन्हें चलना सिखा रहे हैं।
रायपुर, छत्तीसगढ़ के Moeen Raza ने माँ की Spinal Injury के बाद उनकी देखभाल के लिए अपनी जिंदगी बदल दी।
उन्होंने घर पर रहकर सारी जिम्मेदारी उठाई जब बाहर जाकर काम करना मुश्किल हुआ,
घर पर पैसों की समस्या आई तो उन्होंने सोशल मीडिया के ज जरिए अपनी कहानी लोगों तक पहुँचाई और यही उनकी कमाई का जरिया भी बन गया।
आज दो साल बाद अम्मी पहले से काफी बेहतर हैं। अब बस उनकी एक ही ख्वाहिश है – उन्हें फिर अपने पैरों पर खड़ा देखना।

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बेटे के Cancer से जूझते हुए इमरान हाशमी ने सीखी जिंदगी की नई परिभाषा | Life changed after son cancer diagnosis | Emraan Hashmi In Awarapan 2#thebetterindia #goodnews #positivestories #indianews #thebetterindiahindi #hindi

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खुद की पहचान के लिए लड़ीं, बनीं Trans Woman Scientist — सूरी | Trans woman | Haryana | STEM

खुद की पहचान के लिए लड़ीं, बनीं Trans Woman Scientist — सूरी | Trans woman | Haryana | STEM

बचपन में अपने ही अस्तित्व को समझने की जद्दोजहद से लेकर आज जर्मनी में Brain Cancer Research पर PhD करने तक, सूरी का सफर कभी आसान नहीं था।
हरियाणा के एक छोटे से गांव से निकलीं, 3 साल की उम्र में माता-पिता को खो दिया, अपनी पहचान को समझने और अपनाने के लिए संघर्ष किया और फिर समाज की पुरानी सोच से भी लड़ीं। लेकिन उन्होंने अपनी पहचान को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।
आज वह Scientist हैं और अपनी कहानी खुलकर साझा करती हैं, ताकि उनके जैसा कोई भी बच्चा यह न सोचे कि उसके सपनों की कोई सीमा है।
जो मानते हैं की Trans लोग बड़ी सफलता हासिल नहीं कर सकते, ये कहानी उनके साथ शेयर करें। 

@suri_not_sorryy

[Trans Woman in STEM, From India to Germany, Fighting gender norms, Breaking Stereotypes]

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बचपन में अपने ही अस्तित्व को समझने की जद्दोजहद से लेकर आज जर्मनी में Brain Cancer Research पर PhD करने तक, सूरी का सफर कभी आसान नहीं था।
हरियाणा के एक छोटे से गांव से निकलीं, 3 साल की उम्र में माता-पिता को खो दिया, अपनी पहचान को समझने और अपनाने के लिए संघर्ष किया और फिर समाज की पुरानी सोच से भी लड़ीं। लेकिन उन्होंने अपनी पहचान को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।
आज वह Scientist हैं और अपनी कहानी खुलकर साझा करती हैं, ताकि उनके जैसा कोई भी बच्चा यह न सोचे कि उसके सपनों की कोई सीमा है।
जो मानते हैं की Trans लोग बड़ी सफलता हासिल नहीं कर सकते, ये कहानी उनके साथ शेयर करें। 

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क्या लगातार खांसी फेफड़ों के कैंसर का संकेत है? ऑन्कोलॉजिस्ट ने बताए चेतावनी वाले ये लक्षण

भागदौड़ भरी जिंदगी, बढ़ता प्रदूषण और बदलती जीवनशैली का असर हमारी सेहत पर साफ दिखाई देने लगा है। छोटी-छोटी स्वास्थ्य समस्याओं को अक्सर लोग रोजमर्रा की थकान या मौसम का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। खांसी भी ऐसी ही एक आम परेशानी है, जिसे लोग सामान्य समझकर टाल देते हैं। लेकिन जब यही खांसी लंबे समय तक बनी रहे, तो यह शरीर में छिपी किसी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों के कई शुरुआती लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि लोग समय पर ध्यान नहीं दे पाते।

ऐसे में अपनी दिनचर्या, खानपान और शरीर में होने वाले बदलावों को समझना बेहद जरूरी हो जाता है। सही समय पर जांच और सावधानी से कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा कम किया जा सकता है।

लगातार रहने वाली खांसी हो सकती है शुरुआती चेतावनी

रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट ज्योति मेहता के अनुसार, लंबे समय तक बनी रहने वाली खांसी फेफड़ों के कैंसर का शुरुआती संकेत हो सकती है। हालांकि हर पुरानी खांसी कैंसर नहीं होती, लेकिन कई हफ्तों तक इसे नजरअंदाज करने से बीमारी की पहचान में देरी हो सकती है, जिससे इलाज के विकल्प प्रभावित हो सकते हैं। डॉक्टर के मुताबिक, फेफड़ों में मौजूद कुछ कोशिकाएं जब अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं, तो ट्यूमर बन सकता है और यही आगे चलकर कैंसर का कारण बन सकता है।

सिर्फ धूम्रपान करने वालों को ही नहीं होता खतरा

आम धारणा है कि फेफड़ों का कैंसर केवल धूम्रपान करने वालों को होता है, लेकिन ऐसा नहीं है। डॉक्टरों के अनुसार, धूम्रपान इसका सबसे बड़ा कारण जरूर है, लेकिन इसके अलावा कई दूसरी चीजें भी जोखिम बढ़ा सकती हैं।

इनमें शामिल हैं:

  • दूसरे लोगों के धुएं के संपर्क में आना (सेकेंड हैंड स्मोक)
  • बढ़ता वायु प्रदूषण
  • रेडॉन गैस
  • एस्बेस्टस जैसे खतरनाक पदार्थ
  • कुछ हानिकारक केमिकल्स

इसके अलावा, जिन लोगों के परिवार में कैंसर का इतिहास रहा है या कुछ जेनेटिक बदलाव हैं, उनमें भी खतरा हो सकता है।

इन लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज

फेफड़ों के कैंसर के शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य बीमारियों जैसे लग सकते हैं। यही वजह है कि लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं।

डॉक्टरों के अनुसार, इन संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है:

  • 3 हफ्ते से ज्यादा समय तक रहने वाली खांसी
  • खांसी के साथ खून आना
  • सीने में लगातार दर्द रहना
  • सांस लेने में परेशानी या घरघराहट
  • बार-बार छाती में संक्रमण होना
  • बिना वजह वजन कम होना
  • भूख कम लगना
  • लगातार थकान या कमजोरी महसूस होना
  • आवाज में भारीपन या बदलाव लंबे समय तक रहना

इनमें से कोई भी लक्षण दिखने का मतलब हमेशा कैंसर नहीं होता, लेकिन अगर ये लंबे समय तक बने रहें तो डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है।

इलाज में देरी से बढ़ सकता है खतरा

अगर फेफड़ों के कैंसर का समय पर इलाज न हो, तो यह शरीर के दूसरे हिस्सों जैसे दिमाग, हड्डियों, लीवर और एड्रिनल ग्लैंड तक फैल सकता है। इससे तेज दर्द, सांस लेने में ज्यादा परेशानी, हड्डियों में फ्रैक्चर और जीवन की गुणवत्ता में गिरावट जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

समय पर जांच से बच सकती है जिंदगी

मेडिकल क्षेत्र में हुई प्रगति के कारण अब फेफड़ों के कैंसर के इलाज के कई बेहतर विकल्प मौजूद हैं। मरीज की स्थिति के अनुसार सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी, टारगेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है।

डॉक्टरों का कहना है कि अगर बीमारी का पता शुरुआती चरण में चल जाए, तो इलाज के सफल होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें

फेफड़ों के कैंसर से बचाव के लिए कुछ सावधानियां बेहद जरूरी हैं:

  • धूम्रपान से दूरी बनाएं
  • दूसरों के धुएं से बचें
  • प्रदूषण और खतरनाक केमिकल्स से बचाव करें
  • जरूरत पड़ने पर मास्क और सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल करें
  • संतुलित भोजन लें
  • समय-समय पर स्वास्थ्य जांच करवाते रहें

एक सामान्य सी लगने वाली खांसी कभी-कभी शरीर का बड़ा संकेत हो सकती है। इसलिए लंबे समय तक रहने वाली खांसी को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर जांच करवाना बेहतर है।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य स्वास्थ्य सुझावों पर आधारित है। इसे किसी योग्य चिकित्सा राय का विकल्प न मानें। किसी भी नए व्यायाम को शुरू करने से पहले विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

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इन राशियों के लोग प्यार में निभाते हैं पूरी ईमानदारी, क्या आपका पार्टनर भी है इनमें?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हर राशि का अपना अलग नेचर और पर्सनालिटी होता है, जिसका असर रिलेशनशिप पर भी पड़ता है। मान्यता है कि कुछ राशियों के लोग प्यार और वैवाहिक जीवन में ज्यादा ईमानदार, भरोसेमंद और समर्पित होते हैं। ये अपने पार्टनर के साथ हर सुख-दुख में खड़े रहने की कोशिश करते हैं और रिश्ते को पूरी निष्ठा से निभाने में विश्वास रखते हैं। आइए जानते हैं उन राशियों के बारे में, जिन्हें ज्योतिषीय मान्यताओं में सबसे वफादार माना जाता है:

कन्या राशि (Virgo) – रिश्तों में समझदारी और भरोसे को देती है महत्व

कन्‍या राशि वालों के शादीशुदा जीवन पर एक नज़र | Marriage compatibility test of Virgo with zodiac signs - Hindi Oneindia

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कन्या राशि के स्वामी ग्रह बुध माने जाते हैं। बुध को बुद्धि, तर्क, संवाद और समझदारी का कारक माना गया है, इसलिए इस राशि के जातक रिश्तों में सोच-समझकर कदम उठाते हैं। ये लोग भावनाओं के साथ-साथ व्यवहारिकता को भी महत्व देते हैं। कन्या राशि के लोग ऐसा पार्टनर पसंद करते हैं, जो ईमानदार, जिम्मेदार और उनका साथ निभाने वाला हो। मान्यता है कि जब ये किसी रिश्ते को दिल से स्वीकार कर लेते हैं, तो पूरी निष्ठा के साथ उसे निभाने की कोशिश करते हैं और पार्टनर का विश्वास बनाए रखते हैं।

 

 

कर्क राशि (Cancer) – प्यार और देखभाल करने वाले स्वभाव के लिए जानी जाती है

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कर्क राशि के जातकों का स्वभाव भावुक और संवेदनशील माना जाता है। ज्योतिष के अनुसार, इस राशि के स्वामी चंद्रमा हैं, जो मन और भावनाओं से जुड़े माने जाते हैं। इसी कारण कर्क राशि के लोग अपने रिश्तों को लेकर काफी गंभीर रहते हैं। ये अपने पार्टनर की भावनाओं को समझने और उनकी जरूरतों का ध्यान रखने की कोशिश करते हैं। मान्यता है कि कर्क राशि के लोग रिश्तों में भरोसे और अपनापन को सबसे ज्यादा महत्व देते हैं और अपने साथी को खुश रखने का प्रयास करते हैं।

 

 

मकर राशि (Capricorn) – जिम्मेदारी और समर्पण निभाने वाली राशि

मकर राशि प्रेम: कौन है मकर राशि वालो के सच्चे साथी, पढ़िए यहां

मकर राशि पर शनि ग्रह का प्रभाव माना जाता है, जो अनुशासन, जिम्मेदारी और धैर्य का प्रतीक माना जाता है। इस राशि के जातक रिश्तों में भी स्थिरता और भरोसे को महत्व देते हैं। ये लोग जल्दी किसी पर भरोसा नहीं करते, लेकिन जब किसी को अपना मान लेते हैं तो पूरी ईमानदारी से रिश्ता निभाने की कोशिश करते हैं। मकर राशि के लोग अपने पार्टनर के प्रति जिम्मेदार रहते हैं और मुश्किल समय में साथ खड़े रहने को प्रायोरिटी देते हैं।

 

 

वृषभ राशि (Taurus) – स्थिर और भरोसेमंद रिश्तों को देती है महत्व

Capricorn Marriage Compatibility:इन 3 राशि वाले लोगों से हो गई शादी, तो बदल जाएगी मकर राशि वालों का किस्मत - Capricorn Marriage Compatibility Know Best Match For Makar Rashi Girl Or Boy

वृषभ राशि के स्वामी ग्रह शुक्र माने जाते हैं, जिन्हें प्रेम, आकर्षण और सुख-सुविधाओं का कारक माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस राशि के लोग प्यार और रिश्तों में स्थिरता पसंद करते हैं। ये अपने पार्टनर के साथ मजबूत और लंबे समय तक चलने वाला रिश्ता बनाना चाहते हैं। वृषभ राशि के जातक भरोसेमंद स्वभाव के माने जाते हैं और एक बार किसी रिश्ते को स्वीकार करने के बाद उसे पूरी लगन से निभाने की कोशिश करते हैं। उन्हें अपने रिश्ते में प्यार, सम्मान और विश्वास सबसे ज्यादा जरूरी लगता है।

 

 

मीन राशि (Pisces) – भावनाओं और समर्पण को देती है महत्व

Makar/capricorn Rashifal 2021: नौकरी-कारोबार सुस्त-सेहत को फायदे, मकर राशि वालों के लिए कैसा रहेगा 2021? - Rashiphal AajTak

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, मीन राशि के जातक भावुक और संवेदनशील स्वभाव के माने जाते हैं। ये रिश्तों में प्यार, विश्वास और भावनात्मक जुड़ाव को काफी महत्व देते हैं। जब ये किसी को अपना मान लेते हैं, तो पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ रिश्ता निभाने की कोशिश करते हैं। अपने पार्टनर की भावनाओं को समझना और उनका साथ देना इनके स्वभाव की खासियत मानी जाती है।

 

WHO की डरावनी रिपोर्ट : दुनिया की 92% आबादी पर कैंसर का खतरा, जानें पुरुषों-महिलाओं में कौन सा कैंसर है सबसे आम

क्या आप और आपका परिवार कैंसर की ज़द में हैं? विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की लेटेस्ट रिपोर्ट कहती है कि दुनिया की 92% आबादी सीधे या परोक्ष रूप से कैंसर से प्रभावित होने वाली है। यानी या तो आप खुद, या आपके परिवार का कोई बेहद करीबी सदस्य इस जानलेवा बीमारी का शिकार बनेगा। जानिए डब्ल्यूएचओ ने इस वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल पर क्या चेताया है।”

'डाउन टू अर्थ' की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कैंसर को लेकर अब तक की सबसे भयानक चेतावनी जारी की है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, कैंसर अब सिर्फ एक बीमारी नहीं, बल्कि एक तेज़ी से बढ़ता हुआ सामाजिक, स्वास्थ्य और आर्थिक संकट बन चुका है। रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि दुनिया की लगभग 92 प्रतिशत आबादी अपने जीवनकाल में किसी न किसी रूप में कैंसर के प्रभाव में आएगी।

1. हर 5 में से 1 व्यक्ति को कैंसर : क्या कहते हैं आंकड़े?

आंकड़े बेहद डरावने हैं। दुनिया में हर पांच में से एक व्यक्ति अपने जीवनकाल में कैंसर की चपेट में आ रहा है।

WHO Cancer Report 2026

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2. पुरुषों और महिलाओं में सबसे आम कैंसर कौन से हैं?

डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जेंडर के आधार पर कौन से कैंसर सबसे ज्यादा पैर पसार रहे हैं:

WHO Cancer Report 2026

नोट: बड़ी आंत और मलाशय का कैंसर (Colorectal Cancer) पुरुषों और महिलाओं दोनों में तीसरा सबसे अधिक पाया जाने वाला कैंसर बन चुका है। इसके अलावा, बच्चों में भी यह बोझ बढ़ रहा है, जहां हर साल 19 वर्ष तक के लगभग 4 लाख बच्चे और किशोर इसका शिकार हो रहे हैं।

3. मासूमों पर दोहरी मार : लाखों बच्चे हो रहे अनाथ

कैंसर सिर्फ जान नहीं लेता, बल्कि हंसते-खेलते परिवारों को उजाड़ देता है।

WHO Cancer Report 2026

  • वर्ष 2020 के आंकड़ों के अनुसार, माता या पिता की कैंसर से मृत्यु के कारण दुनिया भर में लगभग 24.5 लाख बच्चे अनाथ हो गए।
  • स्तन कैंसर और गर्भाशय ग्रीवा (Cervical Cancer) के कारण सबसे ज्यादा माताओं की मौत हुई।
  • चौंकाने वाली बात यह है कि ऐसे अनाथ होने वाले बच्चों के 40% मामले अकेले भारत, चीन, नाइजीरिया, इंडोनेशिया, इथियोपिया और पाकिस्तान से आते हैं।

4. जेब पर वार : परिवारों को कंगाल बना रहा है इलाज

कैंसर का मानसिक और आर्थिक असर किसी भी परिवार को तोड़कर रख देता है। डब्ल्यूएचओ के सर्वेक्षण में सामने आया कि: 

  • 45% से अधिक लोगों को इलाज के कारण भारी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा।
  • महंगे इलाज, दवाओं के खर्च और अस्पताल के चक्करों के कारण लाखों परिवार गरीबी रेखा के नीचे चले जाते हैं।
  • आधे से अधिक मरीजों और उनके तीमारदारों (Caregivers) ने गंभीर मानसिक तनाव, डिप्रेशन और सामाजिक अलगाव की बात स्वीकार की।

5. अमीर और गरीब देशों के बीच 'इलाज की खाई'

रिपोर्ट में सबसे चिंताजनक बात इलाज में मौजूद असमानता को लेकर कही गई है। दुनिया की 47% आबादी के पास आज भी कैंसर की बुनियादी जांच सुविधाएं नहीं हैं

यदि आप किसी अमीर देश में पैदा हुए हैं, तो आपके बचने की संभावना बहुत ज्यादा है, जबकि गरीब देशों में यह किस्मत के भरोसे है:

WHO Cancer Report 2026

2050 का भविष्य: 133% तक बढ़ सकते हैं मामले

डब्ल्यूएचओ का अनुमान है कि वर्ष 2050 तक दुनिया में हर साल कैंसर के नए मामलों की संख्या 66.7% बढ़कर 3.5 करोड़ तक पहुंच जाएगी। इसका सबसे बुरा असर निम्न और मध्यम आय वाले देशों (जिसमें भारत भी शामिल है) पर पड़ेगा, जहां मामलों में 133% की वृद्धि देखी जा सकती है। इसके पीछे बढ़ती आबादी, बदलती जीवनशैली और प्रदूषण जैसे कारक जिम्मेदार हैं।

आगे की राह क्या है?

बचाव ही सबसे बड़ा हथियार है! डब्ल्यूएचओ का स्पष्ट कहना है कि कैंसर से लड़ाई केवल महंगी दवाओं या रोबोटिक सर्जरी से नहीं जीती जा सकती। सरकार को हर नागरिक तक सस्ती और समय पर जांच (Early Detection) की सुविधा पहुंचानी होगी।

व्यक्तिगत स्तर पर सलाह : कैंसर के 40% मामलों को सिर्फ सही खान-पान, एक्सरसाइज, तंबाकू-सिगरेट से दूरी और समय पर स्क्रीनिंग (जैसे 30 साल की उम्र के बाद महिलाओं के लिए पैप स्मीयर और मैमोग्राफी) के ज़रिए रोका जा सकता है।

Saraswati Rajyog 2026: कर्क राशि में बनने जा रहा है सबसे पावरफुल योग, सरस्वती राजयोग चमकाएगा इन 4 राशियों को बंपर लाभ

Saraswati Rajyog 2026: ज्योतिष शास्त्रों में ग्रहों के कुछ संयोग अत्यंत पावरफुल और दुर्लभ माने जाते हैं। सरस्वति राजयोग भी ऐसा ही एक दुर्लभ संयोग है, जो सोमवार, 22 जून को कर्क राशि में बनने जा रहा है। ज्योतिष शास्त्र के इस सबसे शक्तिशाली राजयोग का प्रभाव 4 जुलाई तक रहेगा। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, जिन लोगों की कुंडली में यह योग बनता है, उन्हें जीवन में ज्ञान, सफलता और सम्मान की कमी नहीं रहती है। इस राजयोग के शुभ प्रभाव से कई लोगों के लिए प्रगति और सफलता के नए रास्ते खुल सकते हैं। खासकर शिक्षा, करियर या व्यापार से जुड़े लोगों के लिए यह बेहद प्रभावशाली होगा।

इस दुर्लभ राजयोग का निर्माण कर्क राशि में हो रहा है, जहां इस समय कई बड़े ग्रहों का जमावड़ा है। इस राशि में धन, एश्वर्य और प्रेम के दाता शुक्र मौजूद हैं। इससे पहले 02 जून को देवगुरु बृहस्पति ने इस राशि में गोचर कर चुके हैं। इस राशि में गुरु उच्च के होते हैं, इसलिए यह राजयोग और भी ज्यादा प्रभावशाली होगा। सोमवार 22 को ग्रहों के राजकुमार बुध भी कर्क राशि में गोचर करेंगे। गुरु, शुक्र और बुध के संयोग से सरस्वती राजयोग का निर्माण होगा।

सरस्वती राजयोग कैसे बनता है?

ज्योतिष के अनुसार, गुरु, बुध और शुक्र एक साथ कुंडली के केंद्र या त्रिकोण भाव में मजबूत स्थिति में होते हैं, तब सरस्वती राजयोग बनता है। खासकर जब गुरु उच्च या अपनी ही राशि में हों, तब यह राजयोग अत्यंत प्रभावशाली हो जाता है। इस बार बनने वाला यह राजयोग 4 राशियों के लिए खास लाभ लेकर आ रहा है।

इन राशियों के लिए लकी होगा सरस्वती राजयोग

मेष राशि : मेष राशि वालों के लिए यह योग सुख-सुविधाओं में बढ़ोतरी करने वाला साबित होगा। पुराने निवेश से फायदा मिल सकता है और आर्थिक स्थिति बेहतर होगी। नौकरी करने वालों को प्रमोशन या मनचाही जगह ट्रांसफर मिलने के योग बन रहे हैं। पैतृक मामलों में भी राहत मिल सकती है।

मिथुन राशि : मिथुन राशि के लोगों के लिए यह समय कमाई के लिहाज से अच्छा रहेगा। खासकर मीडिया, मार्केटिंग, शिक्षा और कानून से जुड़े लोगों को फायदा मिल सकता है। अटका हुआ पैसा वापस मिलने की संभावना है। कमाई के नए रास्ते खुल सकते हैं।

कर्क राशि : इस राशि के लोगों के लिए यह समय बेहद खास रहने वाला है। करियर में तरक्की मिलेगी और काम की सराहना होगी। आर्थिक रूप से भी स्थिति मजबूत होगी। रुके हुए काम पूरे हो सकते हैं। बिजनेस करने वालों को अच्छा मुनाफा मिलने के संकेत हैं।

मीन राशि : मीन राशि वालों के लिए भाग्य का साथ मिलने वाला है। अचानक धन लाभ हो सकता है और समाज में सम्मान बढ़ेगा। नौकरी के नए अवसर मिल सकते हैं और व्यापार में भी अच्छा लाभ मिलने के संकेत हैं। लंबे समय से रुके काम पूरे हो सकते हैं।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई सामग्री जानकारी मात्र है। हम इसकी सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता का दावा नहीं करते। कृपया किसी भी कार्रवाई से पहले विशेषज्ञ से संपर्क करें

Trigrahi Yog 2026: कर्क राशि में 22 जून को एकसाथ मौजूद होंगे तीन बड़े ग्रह, 4 राशियों को मिलेगा मान-सम्मान, पैसा और तरक्की के मौके

रिंकू सिंह के पिता का हुआ निधन, अलीगढ़ पहुंचेंगें अंतिम संस्कार के लिए

Rinku Singh

भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी रिंकू सिंह के पिता खानचंद सिंह का शुक्रवार तड़के निधन हो गया।क्रिकेटर के पिता कैंसर से पीड़ित थे और काफी समय से ग्रेटर नोएडा के एक निजी अस्पताल में उनका इलाज हो रहा था। अस्पताल के चिकित्सकों ने यह जानकारी दी।

ग्रेटर नोएडा के यथार्थ हॉस्पिटल के प्रवक्ता डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि रिंकू सिंह के पिता खानचंद सिंह लिवर के कैंसर से जूझ रहे थे। हाल में उनकी तबीयत काफी बिगड़ गई थी, जिसके बाद 21 फरवरी से वह अस्पताल में ही भर्ती थे। उन्हें जीवन रक्षक प्रणाली वेंटिलेटर पर रखा गया था और आज तड़के उन्होंने अंतिम सांस ली।

पिता की गंभीर हालत होने के कारण रिंकू सिंह को टी20 विश्वकप को बीच में छोड़कर देश लौटना पड़ा था। हालांकि 26 फरवरी को जिम्‍बाब्वे से होने वाले मैच से पहले वह वापस भारतीय टीम के साथ जुड़ गए थे। हाल में वह अपने पिता से मिलने के लिए नोएडा भी पहुंचे थे।

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के रहने वाले 28 वर्षीय रिंकू सिंह की सफलता के पीछे उनके पिता का बहुत बड़ा हाथ रहा है। अलीगढ़ में गैस सिलेंडर आपूर्ति का काम करने वाले खानचंद सिंह ने तमाम अभावों के बावजूद रिंकू के क्रिकेटर बनने के सपने को पूरा करने में हरसंभव मदद की।

परिवार ने बताया कि खानचंद सिंह का अंतिम संस्कार अलीगढ़ में होगा और रिंकू सिंह भी अंतिम संस्कार में भाग लेने के लिए आ रहे हैं।