जापान ने आज 20 अक्टूबर को मंगल ग्रह के सबसे बड़े चांद ‘फोबोस’ के लिए मिशन लॉन्च किया है। मार्शियन मून्स एक्सप्लोरेशन मिशन के तहत तानेगाशिमा स्पेस सेंटर से H3 रॉकेट के जरिए करीब 5 टन का स्पेसक्राफ्ट अंतरिक्ष में भेजा गया है। मिशन का मकसद फोबोस पर लैंड करना, वहां की मिट्टी-धूल के नमूने जुटाना और उन्हें साल 2031 तक धरती पर वापस लेकर आना है। मंगल के दोनों चांद फोबोस और डीमॉस पर आज तक दुनिया का कोई भी देश नहीं पहुंच पाया है। मंगल या उसके चांद से मिट्टी का एक टुकड़ा भी अब तक धरती पर नहीं लाया जा सका है। अगर जापान यह कर लेता है, तो यह इतिहास में पहली बार होगा। स्पेसक्राफ्ट मंगल पर अगले साल पहुंचेगा, 2031 में वापस लौटेगा सतह पर गेंद की तरह कुछ देर उछलता रहेगा रोवर फोबोस पर उतरने वाले रोवर का नाम ‘इडेफिक्स’ है। यह एक छोटे माइक्रोवेव ओवन जितना बड़ा है और इसमें 4 पहिए लगे हैं। फोबोस पर ग्रैविटी बहुत ही कम है, इसलिए रोवर सतह पर गिरते ही गेंद की तरह कुछ मिनट तक उछलता रहेगा और फिर जाकर टिकेगा। अगर यह उल्टा गिरता है, तो खुद को सीधा कर लेगा। पर एक बार इसके सोलर पैनल खुल गए, तब यह खुद सीधा नहीं हो पाएगा। किसी गड्ढे या ढीली मिट्टी में फंसने से बचने के लिए यह बहुत संभलकर महज 1 मिलीमीटर प्रति सेकंड की धीमी चाल से चलेगा। रोवर 100 दिनों तक फोबोस की जमीन पर घूमेगा इडेफिक्स रोवर करीब 100 दिनों तक फोबोस की जमीन पर घूमेगा। उसका काम मुख्य लैंडर के लिए एक सुरक्षित जगह तलाशना है, ताकि लैंडर किसी रेतीले दलदल या नुकीले पत्थरों में न फंसे। सुरक्षित जगह मिलने पर चार पैरों वाला लैंडर सतह पर उतरेगा। वह वहां सिर्फ 2 घंटे रुकेगा। ड्रिल और वैक्यूम सिस्टम से कम से कम 10 ग्राम मिट्टी-पत्थर बटोरेगा और फौरन अंतरिक्ष में लौट जाएगा। दो सवालों का जवाब तलाश रहे वैज्ञानिक 1. क्या यह चांद मंगल से किसी उल्कापिंड के टकराने के बाद टूटे टुकड़ों से बना? 2. यह अंतरिक्ष में भटकता हुआ कोई एस्टेरॉयड था, जिसे मंगल के गुरुत्वाकर्षण ने पकड़ लिया? इसके अलावा, फोबोस की धूल में मंगल के पुराने कण भी मिल सकते हैं। इससे एक ही बार में मंगल और उसके चांद दोनों की जानकारी मिल जाएगी, जिससे यह समझने में मदद मिलेगी कि ग्रह कैसे बने और क्या वहां कभी जीवन पनपने के हालात थे। रूस फोबोस पर जाने की 3 बार कोशिश कर चुका रूस ने फोबोस पर जाने के लिए 3 बार कोशिश की, लेकिन तीनों ही मिशन फेल हो गए। जापान का भी पिछला मंगल मिशन नाकाम रहा था, हालांकि उसने दो बार एस्टेरॉयड से नमूने लाकर अपनी काबिलियत साबित की है। नासा के भी मंगल से जुड़े कई मिशन पहले असफल हो चुके हैं। चीन-अमेरिका भी मंगल से सैंपल लाने की तैयारी में इस रेस में चीन भी शामिल है। चीन 2028 में मंगल की सतह से सैंपल लाने का मिशन शुरू करेगा और वह भी 2031 तक सैंपल लाने का टारगेट बना रहा है। उधर अमेरिका का पर्सिवियरेंस रोवर मंगल की सतह पर 30 से ज्यादा ट्यूब्स में मिट्टी भर चुका है, लेकिन उसे धरती पर लाया जायेगा यह तय नहीं है।
जापान ने आज 20 अक्टूबर को मंगल ग्रह के सबसे बड़े चांद ‘फोबोस’ के लिए मिशन लॉन्च किया है। मार्शियन मून्स एक्सप्लोरेशन मिशन के तहत तानेगाशिमा स्पेस सेंटर से H3 रॉकेट के जरिए करीब 5 टन का स्पेसक्राफ्ट अंतरिक्ष में भेजा गया है। मिशन का मकसद फोबोस पर लैंड करना, वहां की मिट्टी-धूल के नमूने जुटाना और उन्हें साल 2031 तक धरती पर वापस लेकर आना है। जापान का पिछला मंगल मिशन नाकाम रहा था, हालांकि उसने दो बार एस्टेरॉयड से नमूने लाकर काबिलियत साबित की है। मंगल के दोनों चांद फोबोस और डीमॉस पर आज तक दुनिया का कोई भी देश नहीं पहुंच पाया है। मंगल या उसके चांद से मिट्टी का एक टुकड़ा भी अब तक धरती पर नहीं लाया जा सका है। अगर जापान यह कर लेता है, तो यह इतिहास में पहली बार होगा। स्पेसक्राफ्ट मंगल पर अगले साल पहुंचेगा, 2031 में वापस लौटेगा सतह पर गेंद की तरह कुछ देर उछलता रहेगा रोवर फोबोस पर उतरने वाले रोवर का नाम ‘इडेफिक्स’ है। यह एक छोटे माइक्रोवेव ओवन जितना बड़ा है और इसमें 4 पहिए लगे हैं। फोबोस पर ग्रैविटी बहुत ही कम है, इसलिए रोवर सतह पर गिरते ही गेंद की तरह कुछ मिनट तक उछलता रहेगा और फिर जाकर टिकेगा। अगर यह उल्टा गिरता है, तो खुद को सीधा कर लेगा। पर एक बार इसके सोलर पैनल खुल गए, तब यह खुद सीधा नहीं हो पाएगा। किसी गड्ढे या ढीली मिट्टी में फंसने से बचने के लिए यह बहुत संभलकर महज 1 मिलीमीटर प्रति सेकंड की धीमी चाल से चलेगा। रोवर 100 दिनों तक फोबोस की जमीन पर घूमेगा इडेफिक्स रोवर करीब 100 दिनों तक फोबोस पर घूमेगा। उसका काम मुख्य लैंडर के लिए एक सुरक्षित जगह तलाशना है, ताकि लैंडर किसी रेतीले दलदल या नुकीले पत्थरों में न फंसे। सुरक्षित जगह मिलने पर चार पैरों वाला लैंडर सतह पर उतरेगा। वह वहां सिर्फ 2 घंटे रुकेगा। ड्रिल और वैक्यूम सिस्टम से 10 ग्राम मिट्टी-पत्थर बटोरेगा और फौरन अंतरिक्ष में लौट जाएगा। दो सवालों का जवाब तलाश रहे वैज्ञानिक 1. क्या यह चांद मंगल से किसी उल्कापिंड के टकराने के बाद टूटे टुकड़ों से बना? 2. यह अंतरिक्ष में भटकता हुआ कोई एस्टेरॉयड था, जिसे मंगल के गुरुत्वाकर्षण ने पकड़ लिया? इसके अलावा, फोबोस की धूल में मंगल के पुराने कण भी मिल सकते हैं। इससे एक ही बार में मंगल और उसके चांद दोनों की जानकारी मिल जाएगी, जिससे यह समझने में मदद मिलेगी कि ग्रह कैसे बने और क्या वहां कभी जीवन पनपने के हालात थे। चीन-अमेरिका भी मंगल से सैंपल लाने की तैयारी में इस रेस में चीन भी शामिल है। चीन 2028 में मंगल की सतह से सैंपल लाने का मिशन शुरू करेगा और वह भी 2031 तक सैंपल लाने का टारगेट बना रहा है। उधर अमेरिका का पर्सिवियरेंस रोवर मंगल की सतह पर 30 से ज्यादा ट्यूब्स में मिट्टी भर चुका है, लेकिन उसे धरती पर लाया जायेगा यह तय नहीं है।
Mangal Nakshatra Gochar: ज्योतिष शास्त्र में मंगल ग्रह को उग्र और अग्नितत्व वाला ग्रह माना जाता है। इस ग्रह से प्रभावित जातक साहसी, पराक्रमी और बलवान माने जाते हैं। यह ग्रह जब किसी राशि या नक्षत्र में प्रवेश करता है, तब इसका असर सभी 12 राशियों के जातकों पर देखने को मिलता है। लेकिन ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, ग्रह-नक्षत्रों की चाल का प्रभाव सभी राशियों पर एक जैसा नहीं रहता है। कुछ के लेकिन बहुत अच्छा, तो कुछ के सामान्य, जबकि कुछ अन्य के लिए ग्रहों की चाल बदलना कष्टकारी साबित होता है।
ऐसा ही एक बदलाव ग्रहों के सेनापति मंगल की चाल में 24 सितंबर 2026 को होने वाला है। मंगल ग्रह इस दिन पुष्य नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। पुष्य नक्षत्र के स्वामी शनि हैं, जबकि देवगुरु बृहस्पति इसके अधिष्ठाता देवता माने जाते हैं। मंगल का इस नक्षत्र में प्रवेश कुछ राशियों के लिए आर्थिक और करियर के लिहाज से शुभ साबित हो सकता है।
मंगल ग्रह का पुष्य नक्षत्र में प्रवेश कब?
कर्क राशि में गोचर कर रहे मंगल 24 सितंबर को सुबह 5 बजकर 50 मिनट पर पुष्य नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। 17 अक्टूबर 2026 तक इसी नक्षत्र में रहेंगे। कर्क राशि मंगल की नीच राशि मानी जाती है। इसी राशि में गुरु पहले से मौजूद हैं और उनकी मौजूदगी के कारण मंगल के नकारात्मक प्रभाव में कमी और शुभ प्रभाव में वृद्धि का अनुमान जताया जा रहा है।
इन राशियों के शुरू होंगे अच्छे दिन
मेष राशि : मंगल का नक्षत्र परिवर्तन मेष राशि के जातकों के लिए राहत और प्रगति लेकर आ सकता है। लंबे समय से अटके काम पूरे होने की संभावना है। संपत्ति से जुड़े मामलों में लाभ मिल सकता है। कारोबारियों के लिए यह समय अनुकूल रह सकता है। परिवार के लोगों का सहयोग मिलेगा।
सिंह राशि : सिंह राशि वालों के लिए यह नक्षत्र परिवर्तन नए अवसरों के दरवाजे खोल सकता है। नौकरी बदलने की योजना बना रहे लोगों को कोई अच्छा मौका मिल सकता है। कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारी मिलने की संभावना है। आपकी कार्यक्षमता और आत्मविश्वास में बढ़ोतरी हो सकती है।
कन्या राशि : कन्या राशि के जातकों के लिए मंगल का पुष्य नक्षत्र में प्रवेश मान-सम्मान और करियर में प्रगति का संकेत दे रहा है। नौकरी या व्यापार में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। अटके हुए कामों को गति मिल सकती है। रोजी-रोजगार के क्षेत्र में तरक्की के अवसर बनेंगे।
धनु राशि : धनु राशि के लोगों के लिए मंगल का यह नक्षत्र परिवर्तन आर्थिक रूप से लाभकारी रह सकता है। आमदनी में सुधार और व्यापार में मुनाफे के योग बन सकते हैं। लंबे समय से रुके किसी काम में तेजी आ सकती है। नौकरी से जुड़ी परेशानियां कम होने की संभावना है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई सामग्री जानकारी मात्र है। हम इसकी सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता का दावा नहीं करते। कृपया किसी भी कार्रवाई से पहले विशेषज्ञ से संपर्क करें
Mangal Neech Bhang Rajyog: ज्योतिष शास्त्र में मंगल ग्रह को साहस और पराक्रम का कारक माना जाता है। यह ग्रह 18 सितंबर को शाम 4.44 बजे कर्क राशि में प्रवेश करने वाला है। कर्क राशि में मंगल नीच के होते हैं, यानी कम प्रभावशाली होते हैं। लेकिन इस राशि में गुरु पहले से विराजमान हैं और यह उनकी स्वराशि है और इसमें वह उच्च के होते हैं। इस राशि में 18 सितंबर को मंगल और गुरु की युति बनेगी। साथ ही, अपनी नीच राशि में पहुंचते ही मंगल नीचभंग राजयोग का निर्माण करेंगे। ज्योतिषशास्त्र में यह एक अत्यंत शुभ और शक्तिशाली स्थिति मानी जाती है। जब कुंडली में मंगल अपनी नीच राशि (कर्क राशि) में स्थित हो, लेकिन कुछ विशेष नियमों के कारण उसका नीचत्व (कमजोरी) समाप्त होकर वह राजयोग में परिवर्तित हो जाता है, तो इसे नीचभंग राजयोग कहते हैं।
मंगल के कर्क राशि में होने पर नीचभंग की स्थिति मुख्य रूप से कई परिस्थितियों में बनती है। कर्क राशि का स्वामी चंद्रमा यदि मंगल के साथ बैठा हो या मंगल पर दृष्टि डाल रहा हो। इसके अलावा, यदि बृहस्पति अपनी उच्च राशि कर्क में मंगल के साथ हो या उस पर अपनी शुभ दृष्टि डाल रहा हो। जैसा कि 18 सितंबर को हो रहा है। मंगल का नीचत्व भंग होने से जातक में अद्भुत इच्छाशक्ति, निडरता और प्रशासनिक या नेतृत्व क्षमता आ जाती है। मंगल भूमि और अचल संपत्ति का कारक है, इसलिए इस योग के प्रभाव से व्यक्ति बड़ी मात्रा में संपत्ति, मकान या रियल एस्टेट में सफलता प्राप्त करता है।
इन राशियों को मिलेगा शुभ फल
मेष राशि : मेष राशि के स्वामी मंगल हैं, इसलिए मंगल का यह गोचर आपके लिए विशेष महत्व रखता है। नौकरी में नई जिम्मेदारी मिलने या कार्यक्षेत्र में प्रभाव बढ़ने के योग बन सकते हैं। कारोबार से जुड़े लोगों को किसी पुराने प्रोजेक्ट से लाभ मिल सकता है। आर्थिक दृष्टि से भी समय सकारात्मक रह सकता है।
वृषभ राशि : वृषभ राशि के जातकों के लिए मंगल का गोचर आर्थिक मामलों में सक्रियता बढ़ा सकता है। लंबे समय से अटका हुआ पैसा वापस मिलने की संभावना बन सकती है। नौकरी में आय बढ़ाने या अतिरिक्त कमाई का कोई रास्ता सामने आ सकता है। कारोबारी जातकों को नई डील से फायदा मिल सकता है।
तुला राशि : तुला राशि वालों के लिए मंगल का यह गोचर करियर और कारोबार के लिहा ज से महत्वपूर्ण हो सकता है। कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारी का अवसर मिल सकता है। कारोबारियों के लिए नई डील, साझेदा री या विस्तार की योजना आगे बढ़ सकती है। आर्थिक मामलों में अचानक लाभ के अवसर भी बन सकते हैं।
वृश्चिक राशि : वृश्चिक राशि के स्वामी भी मंगल हैं। इसलिए कर्क राशि में मंगल का नीचभंग होना आपके लिए खास माना जा रहा है। नौकरी में पदोन्नति या बेहतर अवसर मिल सकता है। कारोबारियों को विदेश से जुड़े किसी काम से लाभ मिलने के योग बन सकते हैं। लंबे समय से रुका कोई काम गति पकड़ सकता है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई सामग्री जानकारी मात्र है। हम इसकी सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता का दावा नहीं करते। कृपया किसी भी कार्रवाई से पहले विशेषज्ञ से संपर्क करें
Bhaum pradosh vrat 2026: प्रदोष हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। यह तिथि भगवान शिव को अत्यंत प्रिय मानी जाती है। इस दिन सच्ची श्रद्धा से उपवास करने वाले भक्तों को भगवान शिव और माता पार्वती का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन प्रदोष काल में पूजा का विधान है, इसलिए इसे प्रदोष व्रत कहा जाता है। वहीं, त्रयोदशी तिथि जब मंगलवार के दिन पड़ती है, तो उसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है। ‘भौम’ का अर्थ मंगल ग्रह (या मंगलवार) से है। यह व्रत भगवान शिव, माता पार्वती और हनुमान जी की कृपा प्राप्त करने तथा कर्ज एवं मंगल दोष से मुक्ति पाने के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव को कुछ खास चीजें अर्पित करने से मंगल दोष का प्रभाव कम होता है।
सितंबर 2026 भौम प्रदोष व्रत एवं मुहूर्त
तिथि : मंगलवार, 8 सितंबर 2026
त्रयोदशी तिथि प्रारंभ : 8 सितंबर 2026, दोपहर 02:42 बजे
त्रयोदशी तिथि समाप्त : 9 सितंबर 2026, दोपहर 12:30 बजे
प्रदोष पूजा मुहूर्त : शाम 06:43 बजे से रात 09:01 बजे तक
मंगल दोष मुक्ति के लिए भौम प्रदोष पर करें ये उपाय
शिवलिंग पर लाल चीजें अर्पित करें: प्रदोष काल में शिवलिंग पर शुद्ध जल व दूध अर्पित करने के बाद लाल चंदन, लाल कनेर के फूल या गुलाल चढ़ाएं। भगवान शिव को 11 या 21 बेलपत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ या ‘श्री राम’ लिखकर अर्पित करें।
ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का पाठ : पूजन के दौरान ‘ऋणमोचक मंगल स्तोत्र’ या ‘मंगलाष्टक’ का पाठ करें। इससे मंगल के अशुभ प्रभाव समाप्त होते हैं।
हनुमान जी की उपासना : भौम प्रदोष पर हनुमान जी को चमेली का तेल और सिंदूर (चोला) चढ़ाएं। उन्हें गुड़, भुने चने या बूंदी का भोग लगाएं और हनुमान चालीसा अथवा सुंदरकांड का पाठ करें।
मंगल ग्रह के मंत्रों का जाप : मंगल दोष शांति के लिए कम से कम 108 बार `ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः` या `ॐ अं अंगारकाय नमः` मंत्र का जाप करें।
दान कार्य : पूजा के बाद किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को लाल रंग की वस्तुएं दान करें, जैसे— मसूर की दाल, गुड़, तांबे का बर्तन, लाल वस्त्र या अनार।
भौम प्रदोष व्रत पूजा विधि
- सुबह स्नान करके लाल या स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
- सूर्यास्त के समय पुन: स्नान या हाथ-पैर धोकर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- शिवलिंग का जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, अक्षत और चंदन से अभिषेक करें।
- हनुमान जी को गुड़-चने का भोग लगाएं और ‘ऋणमोचक मंगल स्तोत्र’ या सुंदरकांड का पाठ करें।
- अंत में धूप-दीप जलाकर शिव जी और हनुमान जी की आरती करें।
Nail care Astrology: नाखून काटने के लिए इतना क्या सोचना, जब बढ़े हुए दिखें तभी काट लो। अगर आप भी ऐसा ही सोचते हैं, तो आप गलत हैं। हमारे शास्त्रों में यानी हिंदू धर्म में साफ-सफाई से जुड़े इस तरह के कामों के लिए कुछ नियम निर्धारित किए गए हैं। इनकी अनदेखी करना जातक के लिए कई तरह की मुश्किलें खड़ी कर देता है। इसका असर आपकी किस्मत, पैसे और पॉजिटिविटी पर पड़ सकता है। हिंदू ज्योतिष और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, नाखून काटने के लिए कुछ दिन शुभ माने जाते हैं जबकि कुछ दिनों का बुरा असर होता है। नाखून काटने के लिए सबसे अच्छे और बुरे दिनों के बारे में ज्योतिषी क्या कहते हैं, आइए जानें।
नाखून काटने के लिए ये दिन चुनें
हिंदू ज्योतिष और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, सोमवार, बुधवार और शुक्रवार नाखून काटने के लिए सबसे सही दिन माने जाते हैं। ज्योतिषी प्रशांत ने न्यूज 18 को बताया कि सोमवार, बुधवार और शुक्रवार नाखून काटने के लिए अच्छे माने जाते हैं। इन दिनों में नाखून काटने से सकारात्मक ऊर्जा, खुशी और समृद्धि बढ़ती है। माना जाता है कि ये दिन ग्रहों के बुरे असर को दूर रखते हैं।
अच्छा नहीं इन दिनों में नाखून काटना
ज्योतिष में मंगलवार और गुरुवार के दिन भूलकर भी नाखून नहीं काटने चाहिए। इन दिनों को इस काम के लिए वर्जित माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इससे आर्थिक स्थिति कमजोर हो सकती है और वैवाहिक जीवन में झगड़े बढ़ सकते हैं।
मंगलवार मंगल ग्रह से जुड़ा दिन है। पारंपरिक रूप से इसे भगवान हनुमान से जोड़ा जाता है। इस दिन नाखून काटने से गुस्सा, बहस, पैसे की परेशानी और जीवन में दूसरी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। वहीं, गुरुवार का स्वामी बृहस्पति है और इसे भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी के लिए शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताएं इस दिन नाखून काटने से मना करती हैं, क्योंकि इससे धन, पैसे की स्थिरता और छात्रों की एकाग्रता पर असर पड़ता है।
इसी तरह, हिंदू परंपराओं में शनिवार को नाखून काटना अशुभ माना जाता है, क्योंकि ऐसा करने से मन की शांति भंग हो सकती है और मेहनत का फल मिलने में देरी हो सकती है। शनिवार का दिन कर्म और न्याय के देवता भगवान शनि से जुड़ा है।
इन दिनों का भी रखें ध्यान
रविवार का दिन सूर्य का होता है और इस दिन छुट्टी होती है। हालांकि, पारंपरिक ज्योतिष इस दिन नाखून काटने की सलाह नहीं देता है। माना जाता है कि इससे आत्मविश्वास, सम्मान और पेशेवर तरक्की में कमी आती है।
इसके अलावा, हिंदू परंपरा में अमावस्या का भी खास आध्यात्मिक महत्व है। कुछ लोग इस दिन नाखून काटना ठीक नहीं मानते हैं। इनके अनुसार, ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है, पूर्वज नाराज होते हैं और मानसिक चिंताएं बढ़ती हैं।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई सामग्री जानकारी मात्र है। हम इसकी सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता का दावा नहीं करते। कृपया किसी भी कार्रवाई से पहले विशेषज्ञ से संपर्क करें
नीलम चमकाएगा किस्मत या बढ़ाएगा परेशानी! पहनने से पहले जान लें ये 5 जरूरी नियम
Elon Musk’s SpaceX Big Fall: एलॉन मस्क की स्पेस कंपनी स्पेसएक्स ने स्टॉक मार्केट में धांसू एंट्री की। इसने निवेशकों को मालामाल कर दिया और दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलॉन मस्क और अमीर हो गए और वह दुनिया के इकलौते ट्रिलेनियनर यानी कि एक ट्रिलियन डॉलर यानी $1 लाख करोड़ की दौलत वाले शख्स बन गए। हालांकि अब स्पेसएक्स के शेयरों की भारी गिरावट ने मस्क की दौलत गिरा दी और अब वह ट्रिलेनियनर नहीं रह गए। 24 जुलाई को एलॉन मस्क ने X (पूर्व नाम Twitter) पर मजाकिया अंदाज में लिखा, पूर्व ट्रिलेनियर।
इसके शेयर आईपीओ निवेशकों को $135 के भाव पर जारी हुए थे। 12 जून को मार्केट में इसकी $150 के भाव पर एंट्री हुई थी और पहले ही कारोबारी दिन $176.52 के हाई पर पहुंचने के बाद $160.95 के भाव पर बंद हुआ। इसके दो ही दिन बाद 16 जून को यह $225.64 के रिकॉर्ड हाई पर पहुंचा था लेकिन अब नास्डाक पर यह $113.50 पर यानी कि हाई लेवल से यह 49.70% नीचे आ चुका है। वैसे इसका रिकॉर्ड निचला स्तर $108.66 है जो इसने 27 जुलाई को इंट्रा-डे में छुआ।
क्यों टूट रहा SpaceX का शेयर?
स्पेसएक्स के आईपीओ फाइलिंग में सामने आया था कि कंपनी कितना खर्च कर रही है और इसका टारगेट क्या है। अब जून 2026 तिमाही के कारोबारी नतीजे से लेटेस्ट तस्वीर सामने आई है जैसे कि कंपनी को जून तिमाही में करीब $430 करोड़ का नेट लॉस हुआ, $470 करोड़ का रेवेन्यू हासिल हुआ, कैपिटल एक्सपेंडिचर $1010 करोड़ रहा जिसमें से $772 करोड़ सिर्फ एआई पर खर्च हुए। जब शेयर चढ़ रहे थे तो निवेशकों ने इन खर्चों पर ध्यान नहीं दिया और इसे एलॉन मस्क के उस अनुमान से भी सपोर्ट मिला जिसमें उन्होंने कहा था कि साल 2030 के आखिरी तक स्पेसएक्स सालाना $1 ट्रिलियन रेवेन्यू हासिल कर सकती है जोकि साल 2025 के $1870 करोड़ के रेवेन्यू से 50 गुना से भी अधिक है।
हालांकि निवेशक अब इसके खर्चों पर ध्यान दे रहे हैं जिसके चलते शेयरों पर दबाव दिखा। इसके अलावा स्टारशिप की 13वीं टेस्ट फ्लाइट रद्द होने से इसके मार्केट कैप में करीब $10 हजार करोड़ की गिरावट आई। स्पेसएक्स के लिए स्टारशिप काफी महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है, क्योंकि इसी से कंपनी की भविष्य की एआई और मंगल ग्रह से जुड़ी योजनाओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
अब आगे कैसी रहेगी चाल?
निवेशकों की नजरें अब 4 अगस्त को आने वाले स्पेसएक्स के कारोबारी नतीजे पर हैं। यह पहली बार होगा, जब एक पब्लिक लिस्टेड कंपनी के तौर पर यह अपना रिजल्ट पेश करेगी। इसके अवावा 6 अगस्त को लॉक-अप एक्सपायरी होने को लेकर भी निवेशकों की नजर है। लॉक-अप एक्सपायरी से लाखों शेयर मार्केट में आ सकते हैं तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है।
ट्रेडिंगकी की रिपोर्ट के मुताबिक इसे कवर करने वाले 31 एनालिस्ट्स ने 12 महीने के लिए इसका औसत टारगेट प्राइस $235.18 तय किया है। एनालिस्ट्स के मुताबिक हाइएस्ट टारगेट प्राइस $800 और लोएस्ट टारगेट $115 का है। स्पेसएक्स में शुरुआती दौर में निवेश करने वाले और Atreides Management के सीआईओ गैविन बेकर ने सीएनबीसी पर कहा कि उन्हें कोई चिंता नहीं है, क्योंकि आईपीओ के बाद शुरुआती दौर में गिरावट सामान्य बात है।
डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
Mangal gochar mithun rashi 2026: ज्योतिष शास्त्र में मंगल ग्रह का साहस और पराक्रम का कारक माना जाता है। साथ ही, यह ग्रह अग्नि तत्व वाला है। इसलिए माना जाता है कि इसके प्रभाव वाले जातकों को गुस्सा अधिक आता है। यही वजह है कि इस ग्रह के गोचर और अवस्था में बदलाव को ज्योतिष में काफी अहम माना जाता है। यह ग्रह इस समय वृषभ राशि में गोचर कर रहा है।
साल 2026 में सावन का महीना जुलाई के अंत में शुरू होगा और इसके तुरंत बाद मंगल ग्रह का गोचर होगा। ग्रहों के सेनापति मंगल 02 अगस्त 2026 को रात 10.59 बजे वृषभ राशि से निकल कर मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। मंगल इस राशि में 18 सितंबर 2026 तक रहेंगे। मंगल ग्रह के इस गोचर से सभी 12 राशियों के जातक प्रभावित होंगे। लेकिन इस गोचर का सबसे ज्यादा फायदा 4 राशियों के जातकों को मिलेगा। सफलता इस राशि वालों के कदम चूमेगी और धन के मामले में भी बरक्कत होगी। आइए जानें कौन सी हैं ये 4 राशियां
ये 4 राशियां पाएंगी मंगल गोचर का फायदा
मेष राशि : मंगल का मिथुन राशि में गोचर मेष राशि के जातकों के लिए बहुत लाभदायक माना जा रहा है। इस अवधि में आपको अपना बैंक बैलेंस बढ़ाने के लिए नए मौके मिल सकते हैं। छात्रों के लिए विशेष तौर पर यह समय बेहद शुभ माना जा रहा है।
सिंह राशि : सिंह राशि के जातकों के लिए मंगल का मिथुन राशि में गोचर फायदेमंद साबित हो सकता है। इस दौरान आपका मन धार्मिक गतिविधियों में ज्यादा लगेगा। कुछ लोग एजुकेशनल ट्रिप पर भी जा सकते हैं। आप अपने दोस्तों के भरपूर सहयोग से सभी मुश्किलें आसानी से पार कर लेंगे।
मकर राशि : मंगल का मिथुन राशि में गोचर मकर राशि वालों के लिए शुभ परिणाम लेकर आ सकता है। आपको घर के सभी सदस्यों का पूरा समर्थन मिलेगा। इस दौरान अपनी सेहत का ध्यान रखें और कोशिश करें की वाद-विवाद में न उलझें।
धनु राशि : धनु राशि के जातकों के लिए मंगल का मिथुन राशि में गोचर बहुत सकारात्मक माना जा रहा है। इनकी लव लाइफ अच्छी रहने वाली है। आप कॉन्फिडेंस से भरपूर रहेंगे। प्रोफेशनल लाइफ में भी तरक्की के नए मार्ग खुलते दिखेंगे।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई सामग्री जानकारी मात्र है। हम इसकी सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता का दावा नहीं करते। कृपया किसी भी कार्रवाई से पहले विशेषज्ञ से संपर्क करें
Budh Mangal Dashank Yog 2026: ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की एक-दूसरे के साथ युति के साथ ही दूरी भी काफी मायने रखती है। ग्रहों की एक-दूसरे से खास दूरी पर भी कुछ दुर्लभ और पावरफुल योगों का निर्माण होता है। ऐसा ही एक योग इस समय बुध और मंगल ग्रह की स्थिति ने बनाया है। इस योग का नाम दशांक योग है। इसे ज्योतिष के सबसे पावरफुल योगों में से एक माना जाता है। इस समय ग्रहों के राजकुमार बुध और सेनापति मंगल एक-दूसरे से 36 डिग्री के कोण पर स्थित होकर दशांक योग का निर्माण कर रहे हैं।
वैदिक ज्योतिष में बुध को बुद्धिमत्ता, वाणी, व्यापार, संचार, गणित और लेखन का कारक माना जाता है। वहीं, मंगल ऊर्जा, साहस, पराक्रम, नेतृत्व क्षमता, भूमि से जुड़े कार्यों और त्वरित निर्णय लेने की शक्ति का प्रतीक है। जब ये दोनों ग्रह किसी खास कोणीय स्थिति में आते हैं, तो व्यक्ति की सोच, निर्णय क्षमता और कार्य करने की शैली में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिलता है। इस योग के प्रभाव से 6 राशियों के पैसों की स्थिति और करियर में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।
दशांक योग क्या है?
जब दो ग्रह लगभग 36 डिग्री की दूरी पर होते हैं, तब दशांक योग बनता है। यह योग 16 जुलाई 2026 की रात 8:27 बजे बुध और मंगल के बीच 36 डिग्री का कोण बनने पर निर्मित हुआ है। यह संबंध रचनात्मकता, तेज दिमाग, नवाचार और अचानक मिलने वाले अवसरों का संकेत देता है। इस योग का प्रभाव लगभग तीन दिनों तक, यानी 19 जुलाई 2026 तक प्रमुख रूप से बना रहेगा। इस दौरान बुध अपनी ही राशि मिथुन में वक्री अवस्था में रहेंगे, जबकि मंगल वृषभ राशि में गोचर कर रहे होंगे।
6 राशियों के जातक पाएंगे बड़े अवसर
वृषभ राशि : मंगल आपकी राशि में होने से आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ेगी। बुध धन से जुड़े मामलों को मजबूत करेंगे, जिससे व्यापार में लाभ, नए क्लाइंट और आर्थिक अवसर मिल सकते हैं। रुके हुए कामों में भी प्रगति के संकेत हैं। हनुमान चालीसा का पाठ करें और गुड़ का दान करें।
मिथुन राशि : बुध के अपनी ही राशि में होने से यह योग आपके लिए विशेष रूप से लाभकारी रहेगा। आत्मविश्वास बढ़ेगा और रुके हुए कार्य पूरे होंगे। मीडिया, लेखन, आईटी, बैंकिंग और संचार से जुड़े लोगों को नए मौके मिल सकते हैं। भगवान गणेश की पूजा करें और ‘ॐ बुं बुधाय नमः’ मंत्र का जाप करें।
सिंह राशि : यह योग आय और लाभ के अवसर बढ़ाएगा। पुराने अटके हुए पैसे मिल सकते हैं और प्रभावशाली लोगों से संपर्क मजबूत होगा। व्यापार में नए प्रोजेक्ट मिलने की संभावना है। सूर्य को जल अर्पित करें और तांबे का दान करें।
कन्या राशि : कन्या राशि वालों के लिए करियर में उन्नति के संकेत हैं। नौकरी में नई जिम्मेदारी, प्रमोशन या बेहतर अवसर मिल सकते हैं। आपकी योजनाओं की सराहना होगी। हरी मूंग का दान करें और गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करें।
मकर राशि : यह योग प्रतियोगी परीक्षाओं, इंटरव्यू और कानूनी मामलों में सफलता दिला सकता है। शत्रुओं पर विजय और कार्यक्षेत्र में प्रशंसा मिलने के योग हैं। हनुमान जी की पूजा करें और मसूर दाल का दान करें।
कुंभ राशि : पंचम भाव सक्रिय होने से विद्यार्थियों और रचनात्मक क्षेत्रों से जुड़े लोगों को लाभ होगा। एकाग्रता बढ़ेगी और प्रेम संबंधों में भी सुधार आएगा। भगवान विष्णु की पूजा करें और जरूरतमंद छात्रों को पुस्तकें दान करें।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई सामग्री जानकारी मात्र है। हम इसकी सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता का दावा नहीं करते। कृपया किसी भी कार्रवाई से पहले विशेषज्ञ से संपर्क करें
Ashadha Amavasya 2026: मंगलवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या को भौमवती अमावस्या भी कहा जाता है। इस बार भौमवती अमावस्या का संयोग आषाढ़ अमावस्या को बन रहा है। इसे हलहारिणी अमावस्या भी कहते हैं। हालांकि, यह साल 2026 की दूसरी भौमवती अमावस्या है। इससे पहले, मंगलवार, 17 फरवरी 2026 को फाल्गुन अमावस्या पर भौमवती अमावस्या का संयोग को हुआ था। इस साल, दूसरी बार भौमवती अमावस्या 14 जुलाई 2026 को आषाढ़ अमावस्या में हो रही है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भौमवती अमावस्या कहा जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य और विशेष रूप से पितरों के निमित्त तर्पण व पिंडदान करने का अत्यधिक महत्व है। इसके साथ ही इस दिन मंगल ग्रह के निमित्त पूजा या हनुमान जी की आराधना करने से कर्ज से मुक्ति और मंगल दोषों से राहत मिलती है।
आषाढ़ अमावस्या तिथि
द्रिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ अमावस्या की तिथि 13 जुलाई को शाम 6 बजकर 50 मिनट पर शुरू होगी और तिथि का समापन 14 जुलाई को दोपहर 3 बजकर 14 मिनट पर होगा। उदया तिथि को देखते हुए इस दिन आषाढ़ अमावस्या मानी जा रही है।
आषाढ़ अमावस्या शुभ मुहूर्त
इस दिन स्नान व दान का मुहूर्त सुबह 4 बजकर 30 मिनट से शुरू होगा और सुबह 5 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग जैसे अत्यंत शुभ संयोग बन रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन योगों में की गई पूजा, जप और दान का फल कई गुना बढ़ जाता है।
अमावस्या पर मिलता है दान का अक्ष्य पुण्य
अमावस्या तिथि पर किया गया दान अक्षय पुण्य प्रदान करता है। इस दिन अन्न और जल जैसे गेहूं, चावल, सत्तू, या मौसमी फल। काले तिल, छाता, चप्पल या सूती वस्त्र जैसे चीजें दान की जा सकती हैं। कई श्रद्धालु इस दिन व्रत रखकर दिनभर भजन-कीर्तन और मंत्र जाप भी करते हैं।
आषाढ़ अमावस्या का महत्व
ग्रह दोष शांति : ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अमावस्या के स्वामी शनि देव हैं। इस दिन हनुमान जी की पूजा करने से शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव कम होता है। साथ ही, मंगलवार का संयोग होने से राहू-केतु और मंगल के अशुभ प्रभावों से राहत मिलती है।
पितृ दोष से मुक्ति : जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष होता है, उनके लिए आषाढ़ अमावस्या पर पिंड दान, तर्पण और अन्नदान करना अमोघ उपाय माना गया है। इससे अतृप्त पितर प्रसन्न होकर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
- 1
- 2

