Nail care Astrology: आज ही बदल लें किसी भी दिन नाखून काटने की आदत, जानें ज्योतिष में क्या हैं नाखून काटने के नियम

Nail care Astrology: नाखून काटने के लिए इतना क्या सोचना, जब बढ़े हुए दिखें तभी काट लो। अगर आप भी ऐसा ही सोचते हैं, तो आप गलत हैं। हमारे शास्त्रों में यानी हिंदू धर्म में साफ-सफाई से जुड़े इस तरह के कामों के लिए कुछ नियम निर्धारित किए गए हैं। इनकी अनदेखी करना जातक के लिए कई तरह की मुश्किलें खड़ी कर देता है। इसका असर आपकी किस्मत, पैसे और पॉजिटिविटी पर पड़ सकता है। हिंदू ज्योतिष और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, नाखून काटने के लिए कुछ दिन शुभ माने जाते हैं जबकि कुछ दिनों का बुरा असर होता है। नाखून काटने के लिए सबसे अच्छे और बुरे दिनों के बारे में ज्योतिषी क्या कहते हैं, आइए जानें।

नाखून काटने के लिए ये दिन चुनें

हिंदू ज्योतिष और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, सोमवार, बुधवार और शुक्रवार नाखून काटने के लिए सबसे सही दिन माने जाते हैं। ज्योतिषी प्रशांत ने न्यूज 18 को बताया कि सोमवार, बुधवार और शुक्रवार नाखून काटने के लिए अच्छे माने जाते हैं। इन दिनों में नाखून काटने से सकारात्मक ऊर्जा, खुशी और समृद्धि बढ़ती है। माना जाता है कि ये दिन ग्रहों के बुरे असर को दूर रखते हैं।

अच्छा नहीं इन दिनों में नाखून काटना

ज्योतिष में मंगलवार और गुरुवार के दिन भूलकर भी नाखून नहीं काटने चाहिए। इन दिनों को इस काम के लिए वर्जित माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इससे आर्थिक स्थिति कमजोर हो सकती है और वैवाहिक जीवन में झगड़े बढ़ सकते हैं।

मंगलवार मंगल ग्रह से जुड़ा दिन है। पारंपरिक रूप से इसे भगवान हनुमान से जोड़ा जाता है। इस दिन नाखून काटने से गुस्सा, बहस, पैसे की परेशानी और जीवन में दूसरी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। वहीं, गुरुवार का स्वामी बृहस्पति है और इसे भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी के लिए शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताएं इस दिन नाखून काटने से मना करती हैं, क्योंकि इससे धन, पैसे की स्थिरता और छात्रों की एकाग्रता पर असर पड़ता है।

इसी तरह, हिंदू परंपराओं में शनिवार को नाखून काटना अशुभ माना जाता है, क्योंकि ऐसा करने से मन की शांति भंग हो सकती है और मेहनत का फल मिलने में देरी हो सकती है। शनिवार का दिन कर्म और न्याय के देवता भगवान शनि से जुड़ा है।

इन दिनों का भी रखें ध्यान

रविवार का दिन सूर्य का होता है और इस दिन छुट्टी होती है। हालांकि, पारंपरिक ज्योतिष इस दिन नाखून काटने की सलाह नहीं देता है। माना जाता है कि इससे आत्मविश्वास, सम्मान और पेशेवर तरक्की में कमी आती है।

इसके अलावा, हिंदू परंपरा में अमावस्या का भी खास आध्यात्मिक महत्व है। कुछ लोग इस दिन नाखून काटना ठीक नहीं मानते हैं। इनके अनुसार, ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है, पूर्वज नाराज होते हैं और मानसिक चिंताएं बढ़ती हैं।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई सामग्री जानकारी मात्र है। हम इसकी सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता का दावा नहीं करते। कृपया किसी भी कार्रवाई से पहले विशेषज्ञ से संपर्क करें

नीलम चमकाएगा किस्मत या बढ़ाएगा परेशानी! पहनने से पहले जान लें ये 5 जरूरी नियम

SpaceX आया रिकॉर्ड हाई से 50% नीचे, इस कारण कमजोर हो रहा Elon Musk का शेयर

Elon Musk’s SpaceX Big Fall: एलॉन मस्क की स्पेस कंपनी स्पेसएक्स ने स्टॉक मार्केट में धांसू एंट्री की। इसने निवेशकों को मालामाल कर दिया और दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलॉन मस्क और अमीर हो गए और वह दुनिया के इकलौते ट्रिलेनियनर यानी कि एक ट्रिलियन डॉलर यानी $1 लाख करोड़ की दौलत वाले शख्स बन गए। हालांकि अब स्पेसएक्स के शेयरों की भारी गिरावट ने मस्क की दौलत गिरा दी और अब वह ट्रिलेनियनर नहीं रह गए। 24 जुलाई को एलॉन मस्क ने X (पूर्व नाम Twitter) पर मजाकिया अंदाज में लिखा, पूर्व ट्रिलेनियर।

इसके शेयर आईपीओ निवेशकों को $135 के भाव पर जारी हुए थे। 12 जून को मार्केट में इसकी $150 के भाव पर एंट्री हुई थी और पहले ही कारोबारी दिन $176.52 के हाई पर पहुंचने के बाद $160.95 के भाव पर बंद हुआ। इसके दो ही दिन बाद 16 जून को यह $225.64 के रिकॉर्ड हाई पर पहुंचा था लेकिन अब नास्डाक पर यह $113.50 पर यानी कि हाई लेवल से यह 49.70% नीचे आ चुका है। वैसे इसका रिकॉर्ड निचला स्तर $108.66 है जो इसने 27 जुलाई को इंट्रा-डे में छुआ।

क्यों टूट रहा SpaceX का शेयर?

स्पेसएक्स के आईपीओ फाइलिंग में सामने आया था कि कंपनी कितना खर्च कर रही है और इसका टारगेट क्या है। अब जून 2026 तिमाही के कारोबारी नतीजे से लेटेस्ट तस्वीर सामने आई है जैसे कि कंपनी को जून तिमाही में करीब $430 करोड़ का नेट लॉस हुआ, $470 करोड़ का रेवेन्यू हासिल हुआ, कैपिटल एक्सपेंडिचर $1010 करोड़ रहा जिसमें से $772 करोड़ सिर्फ एआई पर खर्च हुए। जब शेयर चढ़ रहे थे तो निवेशकों ने इन खर्चों पर ध्यान नहीं दिया और इसे एलॉन मस्क के उस अनुमान से भी सपोर्ट मिला जिसमें उन्होंने कहा था कि साल 2030 के आखिरी तक स्पेसएक्स सालाना $1 ट्रिलियन रेवेन्यू हासिल कर सकती है जोकि साल 2025 के $1870 करोड़ के रेवेन्यू से 50 गुना से भी अधिक है।

हालांकि निवेशक अब इसके खर्चों पर ध्यान दे रहे हैं जिसके चलते शेयरों पर दबाव दिखा। इसके अलावा स्टारशिप की 13वीं टेस्ट फ्लाइट रद्द होने से इसके मार्केट कैप में करीब $10 हजार करोड़ की गिरावट आई। स्पेसएक्स के लिए स्टारशिप काफी महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है, क्योंकि इसी से कंपनी की भविष्य की एआई और मंगल ग्रह से जुड़ी योजनाओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

अब आगे कैसी रहेगी चाल?

निवेशकों की नजरें अब 4 अगस्त को आने वाले स्पेसएक्स के कारोबारी नतीजे पर हैं। यह पहली बार होगा, जब एक पब्लिक लिस्टेड कंपनी के तौर पर यह अपना रिजल्ट पेश करेगी। इसके अवावा 6 अगस्त को लॉक-अप एक्सपायरी होने को लेकर भी निवेशकों की नजर है। लॉक-अप एक्सपायरी से लाखों शेयर मार्केट में आ सकते हैं तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है।

ट्रेडिंगकी की रिपोर्ट के मुताबिक इसे कवर करने वाले 31 एनालिस्ट्स ने 12 महीने के लिए इसका औसत टारगेट प्राइस $235.18 तय किया है। एनालिस्ट्स के मुताबिक हाइएस्ट टारगेट प्राइस $800 और लोएस्ट टारगेट $115 का है। स्पेसएक्स में शुरुआती दौर में निवेश करने वाले और Atreides Management के सीआईओ गैविन बेकर ने सीएनबीसी पर कहा कि उन्हें कोई चिंता नहीं है, क्योंकि आईपीओ के बाद शुरुआती दौर में गिरावट सामान्य बात है।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Mangal gochar mithun rashi 2026: सावन में मंगल ग्रह का होगा मिथुन राशि में प्रवेश, 4 राशियों के जातक सफलता के साथ कमाएंगे फायदा भी

Mangal gochar mithun rashi 2026: ज्योतिष शास्त्र में मंगल ग्रह का साहस और पराक्रम का कारक माना जाता है। साथ ही, यह ग्रह अग्नि तत्व वाला है। इसलिए माना जाता है कि इसके प्रभाव वाले जातकों को गुस्सा अधिक आता है। यही वजह है कि इस ग्रह के गोचर और अवस्था में बदलाव को ज्योतिष में काफी अहम माना जाता है। यह ग्रह इस समय वृषभ राशि में गोचर कर रहा है।

साल 2026 में सावन का महीना जुलाई के अंत में शुरू होगा और इसके तुरंत बाद मंगल ग्रह का गोचर होगा। ग्रहों के सेनापति मंगल 02 अगस्त 2026 को रात 10.59 बजे वृषभ राशि से निकल कर मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। मंगल इस राशि में 18 सितंबर 2026 तक रहेंगे। मंगल ग्रह के इस गोचर से सभी 12 राशियों के जातक प्रभावित होंगे। लेकिन इस गोचर का सबसे ज्यादा फायदा 4 राशियों के जातकों को मिलेगा। सफलता इस राशि वालों के कदम चूमेगी और धन के मामले में भी बरक्कत होगी। आइए जानें कौन सी हैं ये 4 राशियां

ये 4 राशियां पाएंगी मंगल गोचर का फायदा

मेष राशि : मंगल का मिथुन राशि में गोचर मेष राशि के जातकों के लिए बहुत लाभदायक माना जा रहा है। इस अवधि में आपको अपना बैंक बैलेंस बढ़ाने के लिए नए मौके मिल सकते हैं। छात्रों के लिए विशेष तौर पर यह समय बेहद शुभ माना जा रहा है।

सिंह राशि : सिंह राशि के जातकों के लिए मंगल का मिथुन राशि में गोचर फायदेमंद साबित हो सकता है। इस दौरान आपका मन धार्मिक गतिविधियों में ज्यादा लगेगा। कुछ लोग एजुकेशनल ट्रिप पर भी जा सकते हैं। आप अपने दोस्तों के भरपूर सहयोग से सभी मुश्किलें आसानी से पार कर लेंगे।

मकर राशि : मंगल का मिथुन राशि में गोचर मकर राशि वालों के लिए शुभ परिणाम लेकर आ सकता है। आपको घर के सभी सदस्यों का पूरा समर्थन मिलेगा। इस दौरान अपनी सेहत का ध्यान रखें और कोशिश करें की वाद-विवाद में न उलझें।

धनु राशि : धनु राशि के जातकों के लिए मंगल का मिथुन राशि में गोचर बहुत सकारात्मक माना जा रहा है। इनकी लव लाइफ अच्छी रहने वाली है। आप कॉन्फिडेंस से भरपूर रहेंगे। प्रोफेशनल लाइफ में भी तरक्की के नए मार्ग खुलते दिखेंगे।

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Margi Budh 2026: मिथुन राशि में वक्री चल रहे बुध इस दिन से होंगे मार्गी, 5 राशियों के फिरेंगे दिन और भरेगी तिजोरी

Budh Mangal Dashank Yog 2026: बुध और मंगल ने बनाया दशांक योग, जानें किन राशियों के पैसों और करियर में लाएगा धांसु बदलाव

Budh Mangal Dashank Yog 2026: ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की एक-दूसरे के साथ युति के साथ ही दूरी भी काफी मायने रखती है। ग्रहों की एक-दूसरे से खास दूरी पर भी कुछ दुर्लभ और पावरफुल योगों का निर्माण होता है। ऐसा ही एक योग इस समय बुध और मंगल ग्रह की स्थिति ने बनाया है। इस योग का नाम दशांक योग है। इसे ज्योतिष के सबसे पावरफुल योगों में से एक माना जाता है। इस समय ग्रहों के राजकुमार बुध और सेनापति मंगल एक-दूसरे से 36 डिग्री के कोण पर स्थित होकर दशांक योग का निर्माण कर रहे हैं।

वैदिक ज्योतिष में बुध को बुद्धिमत्ता, वाणी, व्यापार, संचार, गणित और लेखन का कारक माना जाता है। वहीं, मंगल ऊर्जा, साहस, पराक्रम, नेतृत्व क्षमता, भूमि से जुड़े कार्यों और त्वरित निर्णय लेने की शक्ति का प्रतीक है। जब ये दोनों ग्रह किसी खास कोणीय स्थिति में आते हैं, तो व्यक्ति की सोच, निर्णय क्षमता और कार्य करने की शैली में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिलता है। इस योग के प्रभाव से 6 राशियों के पैसों की स्थिति और करियर में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।

दशांक योग क्या है?

जब दो ग्रह लगभग 36 डिग्री की दूरी पर होते हैं, तब दशांक योग बनता है। यह योग 16 जुलाई 2026 की रात 8:27 बजे बुध और मंगल के बीच 36 डिग्री का कोण बनने पर निर्मित हुआ है। यह संबंध रचनात्मकता, तेज दिमाग, नवाचार और अचानक मिलने वाले अवसरों का संकेत देता है। इस योग का प्रभाव लगभग तीन दिनों तक, यानी 19 जुलाई 2026 तक प्रमुख रूप से बना रहेगा। इस दौरान बुध अपनी ही राशि मिथुन में वक्री अवस्था में रहेंगे, जबकि मंगल वृषभ राशि में गोचर कर रहे होंगे।

6 राशियों के जातक पाएंगे बड़े अवसर

वृषभ राशि : मंगल आपकी राशि में होने से आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ेगी। बुध धन से जुड़े मामलों को मजबूत करेंगे, जिससे व्यापार में लाभ, नए क्लाइंट और आर्थिक अवसर मिल सकते हैं। रुके हुए कामों में भी प्रगति के संकेत हैं। हनुमान चालीसा का पाठ करें और गुड़ का दान करें।

मिथुन राशि : बुध के अपनी ही राशि में होने से यह योग आपके लिए विशेष रूप से लाभकारी रहेगा। आत्मविश्वास बढ़ेगा और रुके हुए कार्य पूरे होंगे। मीडिया, लेखन, आईटी, बैंकिंग और संचार से जुड़े लोगों को नए मौके मिल सकते हैं। भगवान गणेश की पूजा करें और ‘ॐ बुं बुधाय नमः’ मंत्र का जाप करें।

सिंह राशि : यह योग आय और लाभ के अवसर बढ़ाएगा। पुराने अटके हुए पैसे मिल सकते हैं और प्रभावशाली लोगों से संपर्क मजबूत होगा। व्यापार में नए प्रोजेक्ट मिलने की संभावना है। सूर्य को जल अर्पित करें और तांबे का दान करें।

कन्या राशि : कन्या राशि वालों के लिए करियर में उन्नति के संकेत हैं। नौकरी में नई जिम्मेदारी, प्रमोशन या बेहतर अवसर मिल सकते हैं। आपकी योजनाओं की सराहना होगी। हरी मूंग का दान करें और गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करें।

मकर राशि : यह योग प्रतियोगी परीक्षाओं, इंटरव्यू और कानूनी मामलों में सफलता दिला सकता है। शत्रुओं पर विजय और कार्यक्षेत्र में प्रशंसा मिलने के योग हैं। हनुमान जी की पूजा करें और मसूर दाल का दान करें।

कुंभ राशि : पंचम भाव सक्रिय होने से विद्यार्थियों और रचनात्मक क्षेत्रों से जुड़े लोगों को लाभ होगा। एकाग्रता बढ़ेगी और प्रेम संबंधों में भी सुधार आएगा। भगवान विष्णु की पूजा करें और जरूरतमंद छात्रों को पुस्तकें दान करें।

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Ashadha Amavasya Upay: आज भौमवती अमावस्या पर जानें स्नान–दान का मुहूर्त और किन चीजों का दान करने का मिलता है पुण्य फल

Ashadha Amavasya 2026: मंगलवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या को भौमवती अमावस्या भी कहा जाता है। इस बार भौमवती अमावस्या का संयोग आषाढ़ अमावस्या को बन रहा है। इसे हलहारिणी अमावस्या भी कहते हैं। हालांकि, यह साल 2026 की दूसरी भौमवती अमावस्या है। इससे पहले, मंगलवार, 17 फरवरी 2026 को फाल्गुन अमावस्या पर भौमवती अमावस्या का संयोग को हुआ था। इस साल, दूसरी बार भौमवती अमावस्या 14 जुलाई 2026 को आषाढ़ अमावस्या में हो रही है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भौमवती अमावस्या कहा जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य और विशेष रूप से पितरों के निमित्त तर्पण व पिंडदान करने का अत्यधिक महत्व है। इसके साथ ही इस दिन मंगल ग्रह के निमित्त पूजा या हनुमान जी की आराधना करने से कर्ज से मुक्ति और मंगल दोषों से राहत मिलती है।

आषाढ़ अमावस्या तिथि

द्रिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ अमावस्या की तिथि 13 जुलाई को शाम 6 बजकर 50 मिनट पर शुरू होगी और तिथि का समापन 14 जुलाई को दोपहर 3 बजकर 14 मिनट पर होगा। उदया तिथि को देखते हुए इस दिन आषाढ़ अमावस्या मानी जा रही है।

आषाढ़ अमावस्या शुभ मुहूर्त

इस दिन स्नान व दान का मुहूर्त सुबह 4 बजकर 30 मिनट से शुरू होगा और सुबह 5 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग जैसे अत्यंत शुभ संयोग बन रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन योगों में की गई पूजा, जप और दान का फल कई गुना बढ़ जाता है।

अमावस्या पर मिलता है दान का अक्ष्य पुण्य 

अमावस्या तिथि पर किया गया दान अक्षय पुण्य प्रदान करता है। इस दिन अन्न और जल जैसे गेहूं, चावल, सत्तू, या मौसमी फल। काले तिल, छाता, चप्पल या सूती वस्त्र जैसे चीजें दान की जा सकती हैं। कई श्रद्धालु इस दिन व्रत रखकर दिनभर भजन-कीर्तन और मंत्र जाप भी करते हैं।

आषाढ़ अमावस्या का महत्व

ग्रह दोष शांति : ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अमावस्या के स्वामी शनि देव हैं। इस दिन हनुमान जी की पूजा करने से शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव कम होता है। साथ ही, मंगलवार का संयोग होने से राहू-केतु और मंगल के अशुभ प्रभावों से राहत मिलती है।

पितृ दोष से मुक्ति : जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष होता है, उनके लिए आषाढ़ अमावस्या पर पिंड दान, तर्पण और अन्नदान करना अमोघ उपाय माना गया है। इससे अतृप्त पितर प्रसन्न होकर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।

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Ashadha Amavasya 2026: आषाढ़ अमावस्या पर बन रहा ये दुर्लभ संयोग, हनुमान जी की कृपा पाने और शनि दोष निवारण के लिए है शुभ

Ashadha Amavasya 2026: आषाढ़ माह हिंदी कैलेंडर का चौथा महीना है। हर माह की तरह इस माह के कृष्ण पक्ष का समापन अमावस्या तिथि से होता है। इसे ही आषाढ़ अमावस्या के रूप में जाना जाता है। इस साल आषाढ़ अमावस्या पर एक ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिससे यह दिन संकटमोचन हनुमान की कृपा पाने और शनि दोष निवारण के लिए अत्यंत शुभ माना जा रहा है। यह अमावस्या तिथि मंगलवार के दिन पड़ रही है। इसलिए इसका महत्व और बढ़ गया है।

हर हिंदू माह में अमावस्या तिथि आती है, जो पितृ तर्पण और स्नान-दान के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करके पितरों की शांति के लिए प्रार्थना की जाती है। माना जाता है कि इस दिन पितरों की शांति के लिए तर्पण और श्राद्ध करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है और उनकी कृपा से जीवन सुखमय होता है। यह दिन जीवन से नकारात्मकता को दूर करने के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

आषाढ़ अमावस्या 2026 तारीख

पंचांग के अनुसार, इस साल आषाढ़ अमावस्या मंगलवार, 14 जुलाई, 2026 को मनाई जाएगी। अमावस्या तिथि की शुरुआत 13 जुलाई 2026 को शाम 06:50 बजे से होगी और इसका समापन 14 जुलाई 2026 को दोपहर 03:14 बजे होगा। उदयातिथि के नियमों के कारण स्नान-दान और व्रत की अमावस्या 14 जुलाई को ही रहेगी। इस दिन मंगलवार होने के कारण इसे भौमवती अमावस्या का विशेष संयोग भी मिल रहा है।

आषाढ़ अमावस्या का महत्व

हिंदू धर्म में आषाढ़ अमावस्या का बहुत गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। यह तिथि पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, पिंड दान और श्राद्ध कर्म करने के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

भौमवती अमावस्या का विशेष संयोग

इस साल आषाढ़ अमावस्या मंगलवार के दिन पड़ रही है। हिंदू धर्म में ‘भौम’ शब्द मंगल ग्रह के लिए प्रयोग किया जाता है, इसलिए मंगलवार और अमावस्या के इस विशेष संयोग का बहुत अधिक धार्मिक महत्व है। मंगवार के दिन अमावस्या पड़ने से मंगल जनित दोषों और कर्ज से मुक्ति के लिए इस दिन की गई पूजा विशेष फल देती है। साथ ही, यह दिन हनुमान जी की कृपा पाने और शनि दोष निवारण के लिए बहुत शुभ है।

आषाढ़ अमावस्या पूजा विधि

इस दिन पितरों की प्रसन्नता और भगवान विष्णु व शिव जी की कृपा पाने के लिए नीचे दी गई सरल विधि से पूजा करें :

  • अमावस्या के दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर किसी पवित्र नदी, जलाशय या घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
  • स्नान के बाद साफ वस्त्र धारण करें और तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन और लाल फूल डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें।
  • इसके बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख करें और जल में काले तिल और कुशा मिलाकर अपने पितरों के निमित्त तर्पण करें। पितरों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें।
  • घर के मंदिर में दीपक जलाएं। भगवान विष्णु और भोलेनाथ की विधि-विधान से पूजा करें। चूंकि इस दिन भौमवती अमावस्या है, इसलिए हनुमान जी की पूजा करना और हनुमान चालीसा का पाठ करना भी बेहद शुभ रहेगा।
  • पूजा और तर्पण के बाद किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को अनाज, तिल, वस्त्र, छाता या सामर्थ्य के अनुसार धन का दान अवश्य करें।
  • शाम के समय पीपल के पेड़ के पास जाकर सरसों के तेल का दीपक जलाएं और परिक्रमा करें, इससे भी पितर और देव प्रसन्न होते हैं।

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8th Bada Mangal 2026: ज्येष्ठ माह का आखिरी बड़ा मंगल आज, हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए जरूर करें ये उपाय

8th Bada Mangal 2026: ज्येष्ठ माह हनुमान जी को अति प्रिय है। इस माह में उनकी पहली बार अपने आराध्य भगवान श्री राम से मुलाकात हुई थी। कुछ पौराणिक कथाओं के अनुसार, ज्येष्ठ माह में ही उन्हें अमरता का वरदान प्राप्त हुआ था। इसलिए इस माह में हनुमान जी की पूजा विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है। इस साल ज्येष्ठ माह में अधिक मास लगा था, जिससे 8 बड़े मंगल का दुर्लभ संयोग बना था। आज इस माह का 8वां और अंतिम बड़ा मंगल है।

यूं तो हर हफ्ते मंगलवार का दिन हनुमान जी को समर्पित है, लेकिन ज्येष्ठ माह में आने वाले मंगलवार का अधिक महत्व माना जाता है। ज्येष्ठ माह में हनुमान जी की पूजा विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है। इस दिन बजरंग बली की पूजा करने से जीवन के दुख, तकलीफें और बीमारियों से मुक्ति मिलती है। हनुमान जी संकटमोचन हैं, इसलिए इनकी विधि-विधान और श्रद्धा से पूजा करने पर संकट दूर होते हैं और सकारात्मकता आती है। आज ज्येष्ठ माह का आखिरी मंगल है, जब आप पवनपुत्र की विशेष कृपा प्राप्त कर सकते हैं।

आखिरी बड़े मंगल पर जरूर करें ये उपाय

  • बड़ा मंगल की पूजा का पुण्यफल पाने के लिए साधक को हनुमान जी की पूजा में लाल रंग के पुष्प जैसे गुड़हल, गुलाब आदि और तुलसी दल अर्पित करना चाहिए। बड़ा मंगल की पूजा वाले दिन हनुमान जी की पूजा में चढ़ाई जाने वाली तुलसी को एक दिन पूर्व तोड़ लेना चाहिए।
  • आखिरी बड़ा मंगल वाले दिन साधक को हनुमान जी की पूजा में सिंदूर का चोला और लाल रंग की झंडी अवश्य चढ़ाना चाहिए।
  • बड़ा मंगल की पूजा के समय साधक को बूंदी, बेसन के लड्डू, चूरमा, गुड़-चना और मौसमी फल अर्पित करना चाहिए।
  • हनुमान जी की पूजा में अन्य चीजों के अलावा गुलकंद वाला मीठा पान जरूर चढ़ाना चाहिए। इस उपाय से साधक के जीवन में मिठास बनी रहती है और वह स्वस्थ और सुखी जीवन जीता है।
  • बड़ा मंगल वाले दिन हनुमान जी की पूजा के साथ उनके नाम का भंडारा करने का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है। मान्यता है कि भंडारा प्रसाद बांटने या सहयोग करने वाले साधक को बजरंग बली बल, बुद्धि, विद्या, विवेक और सुख-संपत्ति का आशीर्वाद देते हैं।
  • इस दिन हनुमान जी पूजा के साथ आम लोगों के लिए जल सेवा का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है। ऐसे में साधक को जून महीने की गर्मी से राहत दिलाने वाली जल सेवा करनी चाहिए।

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