Nirjala Ekadashi 2026: आज निर्जला एकादशी और गायत्री जयंती पर बन रहे 5 शुभ संयोग, आज इन 5 चीजों का दान माना जाता है सबसे शुभ

Nirjala Ekadashi 2026: आज ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी का व्रत है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गायत्र माता भी ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन प्रकट हुई थीं। इसलिए हर साल इस दिन गायत्री जयंती का पर्व मनाया जाता है। माना जाता है कि इस व्रत को करने से पाप मिटते हैं, मोक्ष के साथ सालभर की सभी 24 एकादशी व्रतों का पुण्य लाभ मिलता है। इस व्रत में जल और अन्न का सेवन नहीं करते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार पांडु पुत्र भीम ने सिर्फ निर्जला एकादशी का व्रत किया था, इसलिए इस एकादशी को भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं। इस साल निर्जला एकादशी और गायत्री जयंती के मौके पर 5 बेहद शुभ संयोग बन रहे हैं। इस दिन गुरु अपनी उच्च राशि कर्क में गोचर कर रहे हैं और हंस महापुरुष राजयोग का निर्माण कर रहे हैं। माना जा रहा है कि यह शुभ योग 200 साल बाद बना है।

निर्जला एकादशी 2026 मुहूर्त

ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी तिथि का प्रारंभ : 24 जून, शाम 06:12 बजे से

ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी तिथि का समापन : 25 जून, रात 08:09 बजे पर

निर्जला एकादशी पूजा मुहूर्त : सुबह 05:25 बजे से 07:10 बजे तक, 10:39 बजे से दोपहर 02:09 बजे तक

निर्जला एकादशी पारण समय : 26 जून, सुबह 05:25 बजे से सुबह 08:13 बजे तक

द्वादशी का समापन : 26 जून, रात 10:22 बजे

निर्जला एकादशी पर बन रहे 5 शुभ और दुर्लभ महासंयोग

निर्जला एकादशी पर इस बार ज्योतिषीय गणना के अनुसार 5 बेहद शुभ और दुर्लभ महासंयोग बन रहे हैं। इन शुभ योगों की वजह से इस दिन की गई पूजा, व्रत और दान का महत्व कई गुना बढ़ गया है।

हंस राजयोग : इस बार ग्रहों की विशेष स्थिति के कारण कुंडली में हंस महापुरुष राजयोग जैसे बड़े और शुभ राजयोग का निर्माण हो रहा है। यह योग जातकों के जीवन में सुख, वैभव और भाग्य की वृद्धि करने वाला माना जाता है।

शिव योग : पंचांग के अनुसार, इस दिन शिव योग का निर्माण हो रहा है, जो सुबह से शुरू होकर पूरे दिन प्रभावी रहेगा। शिव योग को साधना, मंत्र जाप और धार्मिक कार्यों के लिए बेहद मंगलकारी माना जाता है। इसमें किए गए कार्यों से मानसिक शांति मिलती है।

सिद्ध योग : शिव योग के साथ ही इस दिन सिद्ध योग भी बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र में सिद्ध योग को बेहद शुभ माना गया है। इस योग में शुरू किया गया कोई भी कार्य या किया गया व्रत-अनुष्ठान निश्चित रूप से सफलता और सिद्धि प्रदान करता है।

रवि योग : 25 जून को सूर्योदय से लेकर दोपहर तक रवि योग का प्रभाव रहेगा। रवि योग को सभी प्रकार के दोषों को नष्ट करने वाला और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने वाला माना जाता है। इस योग में पूजा करने से मान-सम्मान और आरोग्य की प्राप्ति होती है।

लक्ष्मी नारायण राजयोग : निर्जला एकादशी के दिन कर्क राशि में बुध और शुक्र ग्रह गोचर कर रहे हैं, जिससे लक्ष्मी नारायण राजयोग का निर्माण हो रहा है। यह योग कुछ विशेष राशियों के लिए भाग्य बदलने वाला साबित होगा।

आज इन 5 चीजों का दान माना जाता है बेहद शुभ

जल से भरा घड़ा : ज्येष्ठ मास की भीषण गर्मी में प्यासे लोगों को राहत देने के उद्देश्य से जल से भरा घड़ा दान करना अत्यंत शुभ माना गया है। यह दान जीवन में शांति और पुण्य प्रदान करने वाला माना जाता है।

सत्तू का दान : निर्जला एकादशी पर सत्तू का दान विशेष फलदायी बताया गया है। गर्मी के मौसम में सत्तू शरीर को शीतलता प्रदान करता है और जरूरतमंदों की सहायता का माध्यम बनता है।

गुड़ का दान : धार्मिक ग्रंथों में गुड़ दान को सुख-समृद्धि और शुभ फल देने वाला माना गया है। निर्जला एकादशी के दिन गुड़ दान करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।

छाता और पंखा : भीषण गर्मी से राहत दिलाने वाली वस्तुओं जैसे छाता और हाथ का पंखा दान करना भी इस दिन अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। यह दान सेवा और परोपकार का प्रतीक माना जाता है।

वस्त्र और अन्न : गरीब और जरूरतमंद लोगों को वस्त्र, फल और अन्न का दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यता है कि इससे जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

Nirjala Ekadashi 2026 Vrat Katha: निर्जला एकादशी व्रत आज, व्रत के संपूर्ण फल के लिए पूजा में जरूर पढ़ें ये व्रत कथा

Nirjala Ekadashi 2026 Vrat Katha: निर्जला एकादशी व्रत आज, व्रत के संपूर्ण फल के लिए पूजा में जरूर पढ़ें ये व्रत कथा

Nirjala Ekadashi 2026 Vrat Katha: हिंदू धर्म में निर्जला एकादशी का व्रत सभी एकादशी व्रतों में सबसे कठिन और महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के भक्त बिना और जल के श्री हरि की भक्ति में लीन रहते हैं। हर साल निर्जला एकादशी का यह व्रत ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की संपूर्ण विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए और कथा कहनी या सुननी चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूरे दिन व्रत करने के बावजूद एकादशी व्रत की कथा नहीं सुनने पर व्रत का संपूर्ण फल प्राप्त नहीं हो पाता है। इसलिए श्री हरि के सभी भक्तों के लिए निर्जला एकादशी की ये व्रत कथा अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

निर्जला एकादशी व्रत तारख और मुहूर्त

इस साल ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी तिथि 24 जून को शाम 6:12 बजे से लेकर 25 जून को रात 8:09 बजे तक है। 25 जून को प्रात:काल में स्नान आदि करके व्रत और पूजा का संकल्प करें। निर्जला एकादशी पर विष्णु पूजा शुभ-उत्तम मुहूर्त 05:25 ए एम से 07:10 ए एम के बीच कर सकते हैं।

निर्जला एकादशी व्रत कथा

निर्जला एकादशीकी व्रत कथा के अनुसार, एक बार भीम ने व्यास जी से कहा कि उनकी मां कुंती और अन्य 4 भाई व्रत, स्नान, दान, पुण्य आदि करते हैं, लेकिन वे उपवास नहीं करते हैं। यदि ऐसा ही चलता रहा तो उनको मोक्ष कैसे प्राप्त होगा? उन्होंने जब वेद व्यास जी को अपनी चिंता बताई तो व्रत न रखने का कारण भी बताया। उन्होंने कहा कि वे बिना भोजन के नहीं रख सकते हैं क्योंकि उनको भूख बहुत लगती है।

इस पर व्यास जी ने कहा कि तुमको हर मास की दोनों एकादशी का व्रत रखना चाहिए। तब भीम ने कहा कि उनके पेट में वृक नामक आग है, जो भोजन से ही शांत होती है। उसे शांत करने के लिए दिनभर में कई बार भोजन करना पड़ता है। ऐसे व्रत रखना कैसे संभव है?

उन्होंने दोनों हाथ जोड़कर व्यास जी से निवेदन किया कि आप कोई ऐसा व्रत बता दें, जिसे सालभर में एक बार ही करना हो और उससे सभी पाप खत्म हो जाएं। व्यास जी ने कहा कि साल भर में 24 एकादशी व्रत होते हैं, जिसमें भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। ये बातें सुनकर भीम और चिंतित हो गए कि वे बिना भोजन 24 एकादशी व्रत कैसे करेंगे। क्या वे पाप मुक्त नहीं हो पाएंगे, उनको मोक्ष नहीं मिलेगा? उन्होंने व्यास जी से मुक्ति का मार्ग पूछा, लेकिन यह भी कहा कि वे साल की सभी एकादशी का उपवास नहीं कर सकते हैं। कोई एक ऐसा व्रत बताएं, जो एक ही बार करने से मोक्ष की प्राप्ति हो।

इस पर व्यास जी ने कहा कि ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी का व्रत एक मात्र ऐसा व्रत है, जो साल में एक बार पड़ता है, इसे निर्जला एकादशी कहते हैं। इस व्रत में न जल पीना है और न ही अन्न ग्रहण करना है। यदि गलती से भी जल ग्रहण कर लिया तो व्रत टूट जाएगा, निष्फल हो जाएगा, उसका कोई पुण्य लाभ नहीं मिलेगा। निर्जला एकादशी को सूर्योदय से लेकर द्वादशी के सूर्योदय तक अन्न और जल ग्रहण नहीं करते हैं। द्वादशी को सूर्योदय के बाद दान-पुण्य करें और पारण करके व्रत को पूरा करें। जो यह व्रत इस नियम और विधि से करता है, उसे साल की सभी 24 एकादशी व्रतों का पुण्य मिलता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

यह सुनकर भीम प्रसन्न हो गए कि साल में केवल निर्जला एकादशी का व्रत करके मोक्ष पाया जा सकता है। जब निर्जला एकादशी का व्रत आया तो भीम ने विधि विधान से व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा की। द्वादशी को दान के बाद पारण किया और व्रत पूरा किया। इससे उन पर श्रीहरि की कृपा हुई और उनके पाप मिट गए, उनको स्वर्ग की प्राप्ति हुई।

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Jyeshtha Purnima 2026: जून में इस दिन होगी ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा, जानें सही तारीख, समय और शुभ मुहूर्त

Jyeshtha Purnima 2026: हिंदू कैलेंडर के अनुसार, पूरे साल में 12 पूर्णिमा तिथियां आती हैं। मुख्य रूप से यह तिथि माता लक्ष्मी को समर्पित है और माना जाता है कि इस दिन मां अपने भक्तों का हाल जानने के लिए स्वयं धरती पर आती हैं। इस दिन चंद्रमा की पूजा का भी विशेष महत्व है। पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपने पूरे स्वरूप में सभी 16 कलाओं से युक्त होते हैं। इसलिए पूर्णिमा की रात को चंद्रमा की पूजा और उन्हें अर्घ्य देने से चंद्र दोष में राहत मिलती है। पूर्णिमा तिथि पर सत्यनारायण की कथा कहना या सुनना बहुत शुभ माना जाता है।

इस साल ज्येष्ठ माह में अधिक माह लगा था, जिसकी पूर्णिमा 31 मई 2026 को थी। इस वजह से बहुत से भक्त भ्रम में हैं कि अब जो पूर्णिमा आ रही है, वो किस माह की है। इन सभी जातकों की जानकारी के लिए बता दें, वो ज्येष्ठ अधिक मास की पूर्णिमा थी और अब जो आएगी वो शुद्ध ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा होगी। ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि इसी दिन देश के कुछ हिस्सों में वट पूर्णिमा का व्रत किया जाता है। इसी दिन कबीर दास जयंती और बटुक भैरव जयंती भी मनाई जाती है। आइए जानें इस साल ज्येष्ठ पूर्णिमा किस दिन होगी?

ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि और समय

वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा तिथि का समय कुछ इस प्रकार है :

पूर्णिमा तिथि प्रारंभ : 29 जून 2026 को सुबह 03:06 बजे से

पूर्णिमा तिथि समाप्त : 30 जून 2026 को सुबह 05:26 बजे तक

उदयातिथि के अनुसार : 29 जून 2026 (सोमवार) को ही मुख्य पर्व और व्रत रखा जाएगा।

ज्येष्ठ पूर्णिमा 2026 के शुभ मुहूर्त

इस विशेष दिन पर पूजा और शुभ कार्यों के लिए निम्नलिखित मुहूर्त बेहद उत्तम रहेंगे:

ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 04:06 बजे से 04:46 बजे तक (स्नान के लिए सर्वोत्तम)

अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 11:57 बजे से दोपहर 12:52 बजे तक

गोधूलि मुहूर्त : शाम 07:22 बजे से शाम 07:42 बजे तक

अमृत काल (रात्रि): रात 08:53 बजे से रात 10:40 बजे तक

चंद्रोदय का समय

पूर्णिमा के दिन चंद्र देव की पूजा और उन्हें अर्घ्य देने का विशेष महत्व होता है।

चंद्रोदय का समय : 29 जून 2026 को शाम 07:16 बजे होगा।

भद्रा का समय

इस दिन भद्रा का साया भी रहेगा, जिसमें शुभ व मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं:

भद्रा प्रारंभ : 29 जून को सुबह 05:26 बजे से

भद्रा समाप्त : शाम 04:16 बजे तक

ज्येष्ठ पूर्णिमा पर जरूर करें ये 3 काम

  • ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा के साथ-साथ सत्यनारायण भगवान की कथा सुनने से घर में सुख-समृद्धि आती है।
  • इस दिन गर्मी से राहत देने वाली वस्तुएं जैसे- छाता, तरबूज, पानी से भरा घड़ा, पंखा और अन्न-वस्त्र का दान करना अनंत पुण्यदायी माना जाता है।
  • शाम के समय चंद्रोदय के बाद तांबे या चांदी के पात्र में जल, दूध, और थोड़े से अक्षत मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें। इसके बाद “ॐ सोमाय नमः” या “ॐ क्षीरोदार्णव सम्भवाय अत्रिममुद्भव। सोमन्गृहाण सद्भावं गृहाणार्ग्यं नमो नमः।। मंत्र का जाप करें।

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Nirjala Ekadashi 2026 Date: निर्जला एकादशी के व्रत में भगवान विष्णु के भक्त व्रत करते हैं और इसके लिए वे पूरे 24 घंटों के लिए अन्न के साथ-साथ जल का भी त्याग करते हैं। इसलिए इसे सबसे कठिन एकादशी व्रत माना जाता है। यह व्रत ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है, जब भीषण गर्मी पड़ती है। इस एकादशी को भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। शास्त्रों में निर्जला एकादशी के व्रत को पूरे साल में आने वाली सभी 24 एकादशी व्रतों में श्रेष्ठ और पवित्र माना गया है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस एकादशी व्रत को करने से सभी एकादशी व्रतों के बराबर पुण्य फल की प्राप्ति होती है। पद्म पुराण में इस व्रत की महिमा के बारे में बताया गया है। इसके अनुसार, इस दिन पानी के नियम का पालन करने और विष्णुजी की श्रद्धा पूर्वक पूजा करने वाले भक्त को मेरु पर्वत के समान पापों से भी मुक्ति मिल जाती है और मोक्ष प्राप्त होता है। इस दिन किए स्नान, दान, जप का अक्षय फल मिलता है। आइए जानें इस साल निर्जला एकादशी का व्रत कब है और क्यों इस सभी एकादशियों में श्रेष्ठ माना जाता है?

निर्जला एकादशी 2026 कब है?

पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ 24 जून, बुधवार के दिन शाम को 6 बजकर 13 मिनट पर होगा। वहीं, अगले दिन यानी 25 जून, गुरुवार को शाम के समय 8 बजकर 10 मिनट तक एकादशी तिथि व्याप्त रहेगी। इसके उपरांत द्वादशी तिथि का आरंभ होगा। ऐसे में उदया तिथि की गणना के अनुसार, 25 जून को ही निर्जला एकादशी का व्रत किया जाएगा।

क्यों श्रेष्ठ माना जाता है निर्जला एकादशी व्रत

पद्म पुराण के अनुसार, एक बार पांचों पांडवों में से भीमसेन ने वेद व्यासजी से पूछा कि मैंने एक भी व्रत नहीं किया है क्योंकि मेरे उदर में वृक नामक अग्नि सदा प्रज्वलित रहती है। जिसके कारण मुझे सदैव भूख महसूस होती है। ऐसे में मुझे कोई ऐसा व्रत बताइए जो केवल एक बार करने से मेरा भी उद्धार हो सके और मुझे स्वर्ग लोक की प्राप्ति हो।

तब व्यासजी ने भीमसेन को ज्येष्ठ मास में पड़ने वाली एकादशी को निर्जल रहकर व्रत करने को कहा। एक ऐसा महीना जो अधिक गर्म होता उसमें निर्जल रहना अत्यंत कठिन है। इसीलिए इस एकादशी के व्रत को अत्यंत कठिन माना जाता है। व्यासजी ने बताया केवल इस एक एकादशी के व्रत को करने से वर्ष भर में पड़ने वाली सभी एकादशियों का फल प्राप्त हो जाता है।

Gayatri Jayanti 2026 Date: 3 शुभ योग और भद्रा के साये में मनाई जाएगी गायत्री जयंती, जानें गायत्री जयंति की तारीख और पूजा का मुहूर्त

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Gayatri Jayanti 2026 Date: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, गायत्री माता की उत्पत्ति ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी को हुई थी। इसलिए गायत्री जयंती का पर्व हर साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। इस दिन निर्जला एकादशी का भी व्रत किया जाता है। गायत्री माता से ही 4 वेदों की उत्पत्ति हुई है। यही वजह है कि इन्हें वेदों की माता कहा जाता है। इनके शक्तिशाली मंत्र में चारों वेदों का सार है। माना जाता है कि गायत्री माता की पूजा स्वयं त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश भी करते हैं। पंचांग के अनुसार, इस साल गायत्री जयंती का पर्व 25 जून 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन तीन शुभ योग बन रहे हैं, लेकिन भद्र का भी प्रभाव रहेगा।

गायत्री जयंती 2026 तारीख

वैदिक पंचांग के अनुसार, 24 जून बुधवार को शाम 6:12 बजे से ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी तिथि की शुरूआत हो रही है। यह तिथि 25 जूर गुरुवार को रात 8:09 बजे तक रहेगी। उदयातिथि की मान्यता के अनुसार, गायत्री जयंती 25 जून गुरुवार को है।

3 शुभ योग में गायत्री जयंती 2026

इस साल की गायत्री जयंती पर रवि योग, शिव योग और सिद्ध योग बनेंगे। उस दिन स्वाति नक्षत्र है। गायत्री जयंती पर शिव योग प्रात:काल से लेकर सुबह 10 बजकर 54 मिनट तक है, उसके बाद से सिद्ध योग है। ये दोनों ही योग जप, तप, साधना के लिए श्रेष्ठ हैं। गायत्री जयंती पर रवि योग सुबह 05 बजकर 25 मिनट पर बनेगा और इसका समापन शाम को 04 बजकर 29 मिनट पर होगा। इस योग में सूर्य का प्रभाव अधिक होता है, इससे इस योग में सभी दोष मिट जाते हैं। गायत्री जयंती पर गुरुवार का दिन और एकादशी तिथि भगवान विष्णु से संबंधित हैं, हरि कृपा से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

गायत्री जयंती 2026 मुहूर्त

गायत्री जयंती पर ब्रह्म मुहूर्त 04:05 ए एम से लेकर 04:45 ए एम तक है. इस समय में स्नान करें। फिर सूर्योदय 05:25 ए एम पर सूर्य देव को अर्घ्य दें। शुभ-उत्तम मुहूर्त सुबह 05:25 ए एम से लेकर सुबह 07:10 ए एम तक है। इस मुहूर्त में गायत्री मंत्र का जाप करें। गायत्री जयंती पर अभिजीत मुहूर्त 11:56 ए एम से दोपहर 12:52 पी एम तक है।

गायत्री जयंती पर भद्रा काल

गायत्री जयंती के दिन भद्रा सुबह 07:08 ए एम से लगेगी और इसका समापन रात में 08:09 पी एम पर होगा। इस भद्रा का वास पाताल लोक में होगा। इससे धरती पर पूजा, जप-तप पर कोई असर नहीं होगा।

गायत्री मंत्र

ॐ भूर्भुवः स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्

Nirjala Ekadashi 2026: इस दिन किया जाएगा निर्जला एकाशी का व्रत, अभी नोट करें पूजा के लिए ये जरूरी व्रत सामग्री

Nirjala Ekadashi 2026: इस दिन किया जाएगा निर्जला एकाशी का व्रत, अभी नोट करें पूजा के लिए ये जरूरी व्रत सामग्री

Nirjala Ekadashi 2026: पूरे साल में हर हिंदू माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को व्रत किया जाता है। इस तरह साल में 24 एकादशी व्रत होते हैं। इन सभी में ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को सबसे अहम माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस एक व्रत को करने से पूरे साल की सभी एकादशी तिथियों का फल मिल जाता है। यह तिथि भगवान विष्णु को समर्पित होती है। एकादशी के दिन श्रद्धा भाव से और विधि-विधान से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से शुभ फल की प्रप्ति होती है। श्री हरि की कृपा से सभी परेशानियां दूर होती हैं और जीवन सुख-समृद्धि से भर जाता है।

इस साल ज्येष्ठ माह में अधिक मास का दुर्लभ संयोग बना था, जिसका समापन 15 जून 2026 को हुआ है। इसके बाद से शुद्ध ज्येष्ठ माह का शुक्ल पक्ष शुरू हुआ। अब ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी तिथि को निर्जला एकादशी का व्रत किया जाएगा। इस एकादशी को भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि भीम से भी इस एकादशी का व्रत किया था। जैसा कि नाम से ज्ञात होता है कि इस व्रत में भक्त अन्न के साथ-साथ जल का भी त्याग करते हैं। इसलिए इसे साल की सबसे कठिन एकादशी व्रत माना जाता है। इस व्रत में पूजा के लिए कुछ जरूरी सामग्री की आवश्यकता होती है, जिसके बिना यह व्रत पूर्ण नहीं माना जाता है। आइए जानें निर्जला एकादशी व्रत की तारीख और पूजा सामग्री की लिस्ट।

निर्जला एकादशी 2026 तारीख और शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष एकादशी तिथि का समय इस प्रकार है—

एकादशी तिथि प्रारंभ : 24 जून 2026, शाम 06:12 बजे से

एकादशी तिथि समाप्त : 25 जून 2026, रात 08:09 बजे तक

उदयातिथि के अनुसार व्रत : 25 जून 2026 (गुरुवार)

व्रत पारण का समय : 26 जून 2026, सुबह 05:25 बजे से 08:13 बजे के बीच

पूजा सामग्री

मुख्य आवश्यक सामग्री

  • भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर
  • चौकी पर बिछाने के लिए पीला कपड़ा
  • लकड़ी की चौकी
  • अभिषेक और तिलक के लिए
  • गंगाजल
  • कच्चा दूध
  • पंचामृत
  • रोली
  • गोपी चंदन या पीला चंदन

अर्पण हेतु सामग्री

  • तुलसी दल
  • पीले फूल
  • फूलों की माला
  • मौली
  • धूप-दीप के लिए
  • शुद्ध घी
  • मिट्टी या पीतल का दीपक
  • रुई की बत्ती
  • धूपबत्ती
  • माचिस
  • प्रसाद और भोग
  • मौसमी फल
  • मिठाई
  • घर का बना हुआ हलवा

निर्जला एकादशी 2026 पूजा विधि

निर्जला एकादशी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। संभव हो तो पीले रंग के वस्त्र पहनें। हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें। एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर उसे फूलों से सजाएं। भगवान विष्णु की मूर्ति का शुद्ध जल और पंचामृत से अभिषेक करें तथा उन्हें नए वस्त्र अर्पित करें। इसके बाद घी का दीपक जलाएं, चंदन का तिलक लगाएं और भगवान विष्णु को पीले फूल तथा तुलसी दल अर्पित करें। तुलसी दल एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें, एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। निर्जला एकादशी व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें। अंत में भगवान की आरती करें और जाने-अनजाने में हुई सभी भूलों के लिए क्षमा याचना करें।

Last Bada Mangal 2026: आज ज्येष्ठ के आखिरी बड़े मंगल पर राशि अनुसार बजरंग बली को अर्पित करें ये चीजें, जानें आज पूजा के शुभ मुहूर्त

8th Bada Mangal 2026: ज्येष्ठ माह का आखिरी बड़ा मंगल आज, हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए जरूर करें ये उपाय

8th Bada Mangal 2026: ज्येष्ठ माह हनुमान जी को अति प्रिय है। इस माह में उनकी पहली बार अपने आराध्य भगवान श्री राम से मुलाकात हुई थी। कुछ पौराणिक कथाओं के अनुसार, ज्येष्ठ माह में ही उन्हें अमरता का वरदान प्राप्त हुआ था। इसलिए इस माह में हनुमान जी की पूजा विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है। इस साल ज्येष्ठ माह में अधिक मास लगा था, जिससे 8 बड़े मंगल का दुर्लभ संयोग बना था। आज इस माह का 8वां और अंतिम बड़ा मंगल है।

यूं तो हर हफ्ते मंगलवार का दिन हनुमान जी को समर्पित है, लेकिन ज्येष्ठ माह में आने वाले मंगलवार का अधिक महत्व माना जाता है। ज्येष्ठ माह में हनुमान जी की पूजा विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है। इस दिन बजरंग बली की पूजा करने से जीवन के दुख, तकलीफें और बीमारियों से मुक्ति मिलती है। हनुमान जी संकटमोचन हैं, इसलिए इनकी विधि-विधान और श्रद्धा से पूजा करने पर संकट दूर होते हैं और सकारात्मकता आती है। आज ज्येष्ठ माह का आखिरी मंगल है, जब आप पवनपुत्र की विशेष कृपा प्राप्त कर सकते हैं।

आखिरी बड़े मंगल पर जरूर करें ये उपाय

  • बड़ा मंगल की पूजा का पुण्यफल पाने के लिए साधक को हनुमान जी की पूजा में लाल रंग के पुष्प जैसे गुड़हल, गुलाब आदि और तुलसी दल अर्पित करना चाहिए। बड़ा मंगल की पूजा वाले दिन हनुमान जी की पूजा में चढ़ाई जाने वाली तुलसी को एक दिन पूर्व तोड़ लेना चाहिए।
  • आखिरी बड़ा मंगल वाले दिन साधक को हनुमान जी की पूजा में सिंदूर का चोला और लाल रंग की झंडी अवश्य चढ़ाना चाहिए।
  • बड़ा मंगल की पूजा के समय साधक को बूंदी, बेसन के लड्डू, चूरमा, गुड़-चना और मौसमी फल अर्पित करना चाहिए।
  • हनुमान जी की पूजा में अन्य चीजों के अलावा गुलकंद वाला मीठा पान जरूर चढ़ाना चाहिए। इस उपाय से साधक के जीवन में मिठास बनी रहती है और वह स्वस्थ और सुखी जीवन जीता है।
  • बड़ा मंगल वाले दिन हनुमान जी की पूजा के साथ उनके नाम का भंडारा करने का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है। मान्यता है कि भंडारा प्रसाद बांटने या सहयोग करने वाले साधक को बजरंग बली बल, बुद्धि, विद्या, विवेक और सुख-संपत्ति का आशीर्वाद देते हैं।
  • इस दिन हनुमान जी पूजा के साथ आम लोगों के लिए जल सेवा का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है। ऐसे में साधक को जून महीने की गर्मी से राहत दिलाने वाली जल सेवा करनी चाहिए।

Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी पर एक साथ बनेंगे 3 शुभ योग, जानें सही तारीख, पूजा का मुहूर्त और विधि

Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी पर एक साथ बनेंगे 3 शुभ योग, जानें सही तारीख, पूजा का मुहूर्त और विधि

Nirjala Ekadashi 2026: ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को निर्जला एकादशी का व्रत किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो लोग पूरे साल एकादशी का व्रत नहीं कर पाते हैं, वे अगर इस एक एकादशी का व्रत कर लें तो उन्हें सभी 24 एकादशियों के व्रत का फल मिल जाता है। इस एकादशी को भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, पांडु पुत्र भीम ने भी इस एकादशी का व्रत किया था।

निर्जला एकादशी का व्रत करने वाले भक्त अन्न के साथ-साथ जल का त्याग भी करते हैं। जैसा कि इस एकादशी का नाम है, यह व्रत निर्जला किया जाता है और इसकी शुरुआत एकादशी तिथि पर सुबह व्रत का संकल्प के साथ होती है। इसके बाद पूरे दिन व्रत करते हैं, रात्रि जागरण करने के बाद अगले दिन हरि वासर के बाद व्रत का पारण करते हैं और उसके बाद अन्न-जल ग्रहण करते हैं। जून के महीने में जब भीषण गर्मी पड़ती है, तब यह व्रत किया जाता है। इसलिए इसे सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। इस साल यह व्रत 25 जून को किया जाएगा। इस दिन गुरुवार है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है, साथ ही 3 अन्य शुभ योगों का भी निर्माण हो रहा है।

निर्जला एकादशी व्रत की तारीख

एकादशी तिथि 24 जून की शाम 6:14 बजे से शुरू होकर 25 जून की रात 8:10 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर व्रत और पूजा 25 जून को की जाएगी। संयोग से यह व्रत बृहस्पतिवार के दिन पड़ रहा है, जो भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और बढ़ गया है।

एकादशी व्रत पारण

व्रत रखने वाले श्रद्धालु अगले दिन यानी 26 जून 2026 को अपने व्रत का पारण करेंगे। पारण करने के लिए शुभ समय 5 बजकर 25 मिनट से लेकर 8 बजकर 13 मिनट तक है। धार्मिक परंपराओं के मुताबिक, निर्धारित पारणा अवधि के अंदर ही उपवास तोड़ना शुभ मान जाता है।

निर्जला एकादशी पर बन रहे ये तीन शुभ योग

रवि योग : 25 जून सुबह 5:25 से शाम 4:29 बजे तक।

शिव योग : 24 जून सुबह 10:24 से 25 जून सुबह 10:54 बजे तक।

सिद्ध योग : 25 जून सुबह 10:55 से 26 जून सुबह 11:39 बजे तक।

निर्जला एकादशी व्रत पूजा विधि

  • इस व्रत में एकादशी तिथि के सूर्योदय से अगले दिन द्वादशी तिथि के सूर्योदय तक जल और भोजन ग्रहण नहीं किया जाता है।
  • एकादशी के दिन सुबह स्नान के बाद सर्वप्रथम भगवान विष्णु की विधि विधान से पूजा करें।
  • इसके बाद भगवान का ध्यान करते हुए “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
  • इस दिन भक्ति भाव से कथा सुनना और भगवान का कीर्तन करना चाहिए।
  • इस दिन व्रती को चाहिए कि वह जल से कलश भरे व सफेद वस्त्र को उस पर ढककर रखें और उस पर चीनी तथा दक्षिणा रखकर ब्राह्मण को दान दें।
  • इसके बाद दान, पुण्य आदि कर इस व्रत का विधान पूर्ण होता है।

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Nirjala Ekadashi 2026 Niyam: पानी पीने के ये नियम जानने के बाद ही करें निर्जला एकादशी व्रत करने का फैसला, जानें किन लोगों को है पानी पीने की छूट

Nirjala Ekadashi 2026 Niyam: निर्जला एकादशी को हिंदू धर्म की सबसे महत्वपूर्ण एकादशी व्रत माना जाता है। निर्जला एकादशी का व्रत ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को किया जाता है। जैसा कि नाम से ही समझ में आ रहा है कि इस व्रत को करने वाले भक्त बिना और जल के उपवास करते हैं। इसलिए यह व्रत पूरे साल आने वाली 24 एकादशियों में सबसे कठिन माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मात्र इस एकादशी का व्रत करने से सभी एकादशी का पुण्य मिल जाता है। आइए जानें इस व्रत में पानी से जुड़ा यह अहम नियम और किसे होती है निर्जला एकादशी में पानी पीने की छूट?

निर्जला एकादशी में इसलिए नहीं पीते पानी

निर्जला एकादशी व्रत में अन्न, जल, फल, दूध आदि कुछ नहीं लेते हैं। प्रात:काल में व्रत प्रारंभ के समय आचमन करते हैं, व्रत और पूजा का संकल्प करके उपवास प्रारंभ करते हैं तो अगले दिन सूर्योदय तक जल नहीं ग्रहण करते हैं। तभी आपको सालभर के सभी 24 एकादशी व्रतों का पुण्य लाभ और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोग पी सकते हैं पानी

निर्जला एकादशी के व्रत में बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोगों को छूट है। निर्जला एकादशी व्रत के समय आपको स्वास्थ्य से संबंधित कोई समस्या है तो आप जल ग्रहण कर सकते हैं। आप बिना जल के व्रत नहीं रख सकते हैं तो फलाहार करके व्रत रहें और पूजा करें।

निर्जला एकादशी में इस तरह पीएं पानी

निर्जला एकादशी का व्रत रखने वाले भक्तों के सामने कभी-कभी ऐसी स्थिति आ सकती है, जब बिना पानी के प्राणों पर संकट आ जाए या गला बिलकुल सूख जाए, तो इस स्थिति में क्या करें? पानी कैसे पिएं? इस मामले में धर्म विशेषज्ञों का मानना है कि निर्जला एकादशी के दिन भोर में आप उठकर स्नान आदि कर लें और विधि विधान से श्रीहरि की पूजा करें। सूर्यास्त हो जाए तो उसके 2 घंटे बाद जल पी लें। इससे आपको कम से कम 12 एकादशी व्रत का पुण्य मिल सकता है।

हालांकि कुछ जगहों पर यह बताया गया है कि निर्जला एकादशी के दिन प्राणों की संकट की स्थिति में आप पीतल या चांदी के बर्तन में गंगाजल और स्वच्छ जल भर दें। फिर अपने दोनों हाथों और घुटनों को जमीन पर टिकाकर पशु के समान जल पी सकते हैं। उससे पहले आपको ओम नमो नारायणाय मंत्रका जाप 21 बार करना होगा। इसमें दोष नहीं माना जाएगा। कुछ लोग निर्जला एकादशी को देर रात 12 बजे के बाद थोड़ा सा जल ग्रहण कर लेते हैं।

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