Shravan Putrada Ekadashi Vrat Katha: सावन की अंतिम एकादशी का व्रत आज, इस व्रत में जरूर सुनें महिष्मती पुरी के राजा महीजित की ये कथा

Shravan Putrada Ekadashi Vrat Katha: आज श्रावण मास की अंतिम एकादशी पुत्रदा या पवित्रा एकादशी का व्रत है। यह व्रत हर साल श्रावण शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। पूरे साल में आज वाले सभी एकादशी व्रतों में इसका विशेष स्थान है, क्योंकि यह व्रत संतान के सुखी और स्वस्थ जीवन की कामना के लिए किया जाता है। साथ ही, नि:संतान दंपति इसे संतान प्राप्ति की कामना से भी करते हैं। हिंदू धर्म में यह अकेला ऐसा एकादशी व्रत है, जो साल में दो बार किया जाता है। एक बार सावन में और फिर पौष के महीने में। पुत्रदा एकादशी हिंदू धर्म में भगवान विष्णु को समर्पित एक अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत है। इस दिन भगवान विष्णु और उनके कृष्ण रूप की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस साल सावन पुत्रदा एकादशी पर मूल नक्षत्र के साथ सिद्धि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और रवियोग का संयोग बन रहा है।

एकादशी तिथि रात 3:56 बजे तक

एकादशी की तिथि रात 3:56 बजे तक रहेगी। इस दिन चर-लाभ-अमृत मुहूर्त सुबह 7:03 बजे से 11:52 बजे तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त दोपहर 11:26 बजे से 12:18 बजे तक रहेगा। इसके अलावा शुभ योग मुहूर्त दोपहर 1:28 बजे से 3:04 बजे तक रहेगा।

श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत कथा

द्वापर युग में महिष्मती पुरी के राजा महीजित अत्यंत धर्मात्मा, दानवीर और प्रजापालक थे। उनके राज्य में प्रजा हर तरह से सुख-समृद्धि से परिपूर्ण थी, लेकिन राजा महीजित की कोई संतान नहीं थी। संतान न होने के कारण राजा और उनकी पत्नी अत्यंत दुःखी और चिंतित रहते थे।

जब राजा वृद्धावस्था की ओर बढ़ने लगे, तो उन्होंने राज्य के ऋषि-मुनियों और पंडितों को बुलाकर अपनी इस व्यथा का समाधान मांगा। उन्होंने ऋषियों से कहा, “मैंने जीवन में कभी कोई अधर्म नहीं किया, प्रजा को पुत्र समान माना, फिर भी मुझे संतान सुख क्यों नहीं मिला?”

राजा की व्यथा सुनकर सभी ऋषि-मुनि जंगल में लोमश ऋषि के आश्रम पहुंचे। लोमश ऋषि परम ज्ञानी और त्रिकालदर्शी थे। ऋषियों के निवेदन पर लोमश ऋषि ने ध्यान लगाकर राजा के पूर्व जन्म का वृत्तांत देखा और बताया कि राजा महीजित पूर्व जन्म में एक निर्धन वैश्य थे। एक बार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को वे दो दिनों से भूखे-प्यासे भटक रहे थे।

रास्ते में एक जलाशय देखकर वे पानी पीने पहुंचे। उसी समय एक प्यासी गाय भी वहां पानी पीने आई। वैश्य ने उस गाय को हटाकर स्वयं पहले पानी पी लिया। अनजाने में एकादशी के दिन प्यासी गाय को जल से वंचित करने के कारण उन्हें इस जन्म में राजा बनने का सुख तो मिला, परंतु संतानहीन रहने का श्राप भी मिला।

ऋषि लोमश ने इस पाप के निवारण का उपाय बताते हुए कहा कि यदि राजा और उनकी प्रजा श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी का विधिवत व्रत रखें और उसका पुण्य फल राजा को अर्पित करें, तो उन्हें निश्चित ही संतान की प्राप्ति होगी।

राजा महीजित, उनकी पत्नी और समस्त प्रजाजनों ने ऋषियों के बताए अनुसार श्रावण पुत्रदा एकादशी का निष्ठापूर्वक व्रत रखा और उसका संपूर्ण पुण्य राजा को दे दिया। इस व्रत के प्रभाव से रानी गर्भवती हुईं और समय आने पर उन्होंने एक सुंदर, तेजस्वी तथा योग्य पुत्र को जन्म दिया। तभी से इस एकादशी का नाम ‘पुत्रदा एकादशी’ पड़ा।

Putrada Ekadashi 2026: कल किया जाएगा सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत, जानें साल में 2 बार क्यों किया जाता है पुत्रदा एकादशी व्रत

Putrada Ekadashi 2026: कल किया जाएगा सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत, जानें साल में 2 बार क्यों किया जाता है पुत्रदा एकादशी व्रत

Putrada Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में पुत्रदा एकादशी व्रत का विशेष स्थान है। यह व्रत संतान की सुख-समृद्धि, खुशहाली और अच्छी सेहत के लिए किया जाता है। पूरे साल में आने वाली सभी एकादशी व्रतों में यह अकेला उपवास है, जो साल में दो बार किया जाता है। एक बार श्रावण शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि और फिर पौष शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नि:संतान दंपति इस व्रत को संतान प्राप्ति की कामना से कर सकते हैं। इस एकादशी में भगवान विष्णु की बाल रूप में या श्री कृष्ण की पूजा जाती है।

पुत्रदा एकादशी 2026 में कब?

साल में दो बार पौष और सावन माह में पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जाता है। दोनों ही व्रत संतान प्राप्ति या संतान की सुख-शांति के उद्देश्य से रखा जाता है। इस साल श्रावण मास की पुत्रदा एकादशी का व्रत 23 अगस्त 2026 को रखा जाएगा।

श्रावण पुत्रदा एकादशी का धार्मिक महत्व

श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को श्रावण पुत्रदा एकादशी के नाम से जाना जाता है। कई हिस्सों में इसे पवित्रा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसे पापों का नाश करने वाली और पुण्य प्रदान करने वाली एकादशी बताया जाता है। श्रावण मास में इस एकादशी का महत्व इसलिए भी और बढ़ जाता है क्योंकि इस महीने में भगवान शिव की भी पूजा होती है। ऐसे में भगवान विष्णु के साथ-साथ भगवान शिव की पूजा करने से भक्तों को खास लाभ मिलता है।

साल में 2 बार पुत्रदा एकादशी क्यों?

साल में दो बार पुत्रदा एकादशी व्रत होने का मुख्य कारण यह है कि, विभिन्न धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में दोनों ही खास तिथियों का फल संतान प्राप्ति और संतान की सुरक्षा के लिए बताया गया है। दोनों ही एकादशियों का उद्देश्य और फल की समानता होने के कारण ही दोनों को पुत्रदा एकादशी (संतान प्रदान करने वाली) कहा जाता है।

दोनों एकादशियों का अलग-अलग महत्व

श्रावण एकादशी : यह विशेष रूप से संतान के स्वास्थ्य, दीर्घायु और संकटों से रक्षा के लिए रखी जाती है।

पौष एकादशी : यह मुख्य रूप से योग्य, ज्ञानी और तेजस्वी संतान की प्राप्ति तथा उसकी उन्नति के लिए मानी जाती है।

Raksha Bandhan 2026 Bhadra timing: इस बार रक्षा बंधन पर नहीं होगा भद्रा का साया, जानें कौन हैं भद्रा और इसमें क्यों नहीं बांधनी चाहिए राखी

Yogini Ekadashi Vrat 2026: कब है योगिनी एकादशी व्रत? इस दिन धन का मार्ग खोलने और कष्टों से मुक्ति के लिए जरूर करें ये आसान उपाय

Yogini Ekadashi Vrat 2026: हिंदू धर्म एकादशी व्रत का विशेष स्थान है। इसे भगवान विष्णु की कृपा पाने का सबसे सरल उपाय माना जाता है। हर माह में कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को यह व्रत किया जाता है। इस तरह पूरे हिंदू वर्ष में 24 एकादशी व्रत करने का सौभाग्य प्राप्त होता है। इनमें से एक है योगिनी एकादशी का व्रत। यह एकादशी व्रत हर साल आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना और व्रत करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। योगिनी एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है और इस दिन कुछ विशेष उपाय करने से धन लाभ और कष्टों से मुक्ति मिल सकती है। आइए जानें इसके बारे में

योगिनी एकादशी व्रत और पारण की तारीख

एकादशी तिथि प्रारंभ : 10 जुलाई 2026, शुक्रवार को सुबह 08:10 बजे से

एकादशी तिथि समाप्त : 11 जुलाई 2026, शनिवार को सुबह 05:23 बजे तक

व्रत पारण का समय (11 जुलाई): दोपहर 01:50 बजे से शाम 04:36 बजे के बीच

योगिनी एकादशी के दिन करें ये 3 उपाय

विष्णु जी का पूजन करें : योगिनी एकादशी के दिन माता लक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु की पूजा और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से जीवन में धन लाभ के योग बन सकते हैं। इस उपाय से श्री हरि की संपूर्ण कृपा दृष्टि बनी रहेगी। इस एकादशी के दिन व्रत का पालन करना और ज्यादा फलदायी हो सकता है। इस दिन व्रत करके फलाहार करें और विष्णु जी को भोग में पीले फल अथवा पीली मिठाई अर्पित करें।

जरूरतमंदों को धन का दान : योगिनी एकादशी के दिन किसी जरूरतमंद को धन का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन आप प्रातः जल्दी उठकर स्नान आदि से मुक्त हो जाएं और विष्णु जी का पूजन करने के बाद किसी गरीब व्यक्ति को अन्न-धन दान स्वरूप दें। इस दिन पीले वस्त्रों का दान भी बहुत शुभ हो सकता है। इस उपाय से सभी बाधाएं दूर होंगी और जीवन में कभी भी अन्न और धन की कमी नहीं होगी।

तुलसी की पूजा : तुलसी के पौधे को विष्णु प्रिया के रूप में पूजा जाता है। योगिनी एकादशी के दिन तुलसी की पूजा विधि-विधान से करने पर भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की कृपा दृष्टि भी बनी रहेगी। लेकिन इस दिन तुलसी में भूलकर भी जल अर्पित न करें।

Raksha Bandhan 2026 Date: इस साल कब मनाया जाएगा भाई-बहन के प्रेम का पर्व राखी? जानें सही तारीख, मुहूर्त और भद्रा रहेगी या नहीं

Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी पर एक साथ बनेंगे 3 शुभ योग, जानें सही तारीख, पूजा का मुहूर्त और विधि

Nirjala Ekadashi 2026: ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को निर्जला एकादशी का व्रत किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो लोग पूरे साल एकादशी का व्रत नहीं कर पाते हैं, वे अगर इस एक एकादशी का व्रत कर लें तो उन्हें सभी 24 एकादशियों के व्रत का फल मिल जाता है। इस एकादशी को भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, पांडु पुत्र भीम ने भी इस एकादशी का व्रत किया था।

निर्जला एकादशी का व्रत करने वाले भक्त अन्न के साथ-साथ जल का त्याग भी करते हैं। जैसा कि इस एकादशी का नाम है, यह व्रत निर्जला किया जाता है और इसकी शुरुआत एकादशी तिथि पर सुबह व्रत का संकल्प के साथ होती है। इसके बाद पूरे दिन व्रत करते हैं, रात्रि जागरण करने के बाद अगले दिन हरि वासर के बाद व्रत का पारण करते हैं और उसके बाद अन्न-जल ग्रहण करते हैं। जून के महीने में जब भीषण गर्मी पड़ती है, तब यह व्रत किया जाता है। इसलिए इसे सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। इस साल यह व्रत 25 जून को किया जाएगा। इस दिन गुरुवार है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है, साथ ही 3 अन्य शुभ योगों का भी निर्माण हो रहा है।

निर्जला एकादशी व्रत की तारीख

एकादशी तिथि 24 जून की शाम 6:14 बजे से शुरू होकर 25 जून की रात 8:10 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर व्रत और पूजा 25 जून को की जाएगी। संयोग से यह व्रत बृहस्पतिवार के दिन पड़ रहा है, जो भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और बढ़ गया है।

एकादशी व्रत पारण

व्रत रखने वाले श्रद्धालु अगले दिन यानी 26 जून 2026 को अपने व्रत का पारण करेंगे। पारण करने के लिए शुभ समय 5 बजकर 25 मिनट से लेकर 8 बजकर 13 मिनट तक है। धार्मिक परंपराओं के मुताबिक, निर्धारित पारणा अवधि के अंदर ही उपवास तोड़ना शुभ मान जाता है।

निर्जला एकादशी पर बन रहे ये तीन शुभ योग

रवि योग : 25 जून सुबह 5:25 से शाम 4:29 बजे तक।

शिव योग : 24 जून सुबह 10:24 से 25 जून सुबह 10:54 बजे तक।

सिद्ध योग : 25 जून सुबह 10:55 से 26 जून सुबह 11:39 बजे तक।

निर्जला एकादशी व्रत पूजा विधि

  • इस व्रत में एकादशी तिथि के सूर्योदय से अगले दिन द्वादशी तिथि के सूर्योदय तक जल और भोजन ग्रहण नहीं किया जाता है।
  • एकादशी के दिन सुबह स्नान के बाद सर्वप्रथम भगवान विष्णु की विधि विधान से पूजा करें।
  • इसके बाद भगवान का ध्यान करते हुए “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
  • इस दिन भक्ति भाव से कथा सुनना और भगवान का कीर्तन करना चाहिए।
  • इस दिन व्रती को चाहिए कि वह जल से कलश भरे व सफेद वस्त्र को उस पर ढककर रखें और उस पर चीनी तथा दक्षिणा रखकर ब्राह्मण को दान दें।
  • इसके बाद दान, पुण्य आदि कर इस व्रत का विधान पूर्ण होता है।

Vat Saptami 2026: आज हैं बड़ साते व्रत, जानें वट सप्तमी में पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और महत्व