हर किसी को नहीं रास आता नीलम! जानें किन 6 भाग्यशाली राशियों को बनाता है राजा

रत्न शास्त्र (Ratna Shastra) में नीलम (Neelam) को शनि ग्रह का प्रमुख रत्न माना गया है। ऐसी मान्यता है कि सही व्यक्ति और सही विधि से धारण किया गया नीलम जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। हालांकि यह रत्न (gemstone) सभी राशियों के लिए परफेक्ट नहीं माना जाता, इसलिए इसे पहनने से पहले इसकी पूरी जानकारी होना जरूरी है:

क्यों माना जाता है इतना खास?

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ज्योतिष शास्त्र (astrology) के अनुसार नीलम शनि ग्रह का प्रतिनिधि रत्न है। इसे प्रभावशाली रत्नों में गिना जाता है और माना जाता है कि यह शनि की शुभता को बढ़ाने में सहायक हो सकता है। इसलिए इसे बिना सलाह के धारण करने की सलाह नहीं दी जाती।

पहनने से पहले जान लें इसके फायदे

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मान्यता है कि यदि नीलम सही हो, तो यह नौकरी, व्यवसाय (business) और आर्थिक क्षेत्र में पॉजिटिव रिजल्ट देने में सहायक हो सकता है। कई लोग इसे कॉन्फिडेंस और काम करने की योग्यता बढ़ाने वाला रत्न भी मानते हैं।

इन 6 राशियों के लिए माना जाता है शुभ

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार मकर और कुंभ राशि वालों के लिए नीलम सबसे ज्यादा सही माना जाता है। वहीं वृषभ (Taurus), मिथुन (Gemini), कन्या (Libra) और तुला (Libra) राशि के लोग भी किसी योग्य ज्योतिषी की सलाह के बाद इसे धारण कर सकते हैं।

हर व्यक्ति के लिए सही नहीं

नीलम का प्रभाव तेज माना जाता है। इसलिए बिना कुंडली का विश्लेषण (horoscope) कराए इसे पहनना उचित नहीं माना जाता। यदि यह रत्न सही न हो, तो इसके विपरीत प्रभाव पड़ने की भी मान्यता है।

इन रत्नों के साथ पहनने से बचें

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार नीलम को मूंगा (Moonga), पुखराज (Moonga) और मोती (Pearl) जैसे रत्नों के साथ एक साथ धारण नहीं करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इन ग्रहों के आपस में विरोधी प्रभाव के कारण लाभ की बजाय नुकसान हो सकता है।

धारण करने का सही समय और तरीका

मान्यता है कि नीलम को शनिवार के दिन शुद्ध करके पहनना शुभ माना जाता है। इसे धारण करने से पहले गंगाजल से शुद्धि, शनिदेव की पूजा और मंत्र जाप करने की परंपरा बताई जाती है। इसके बाद इसे दाहिने हाथ की मध्यमा उंगली में पहना जाता है।

विशेषज्ञ की सलाह लेना क्यों जरूरी है?

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हर व्यक्ति की जन्म कुंडली अलग होती है। इसलिए नीलम पहनने से पहले किसी अनुभवी ज्योतिषी से कुंडली (horoscope) का विश्लेषण कराना उचित माना जाता है। इससे यह पता लगाया जा सकता है कि यह रत्न आपके लिए लाभकारी रहेगा या नहीं।

डिस्क्लेमर: यह लेख ज्योतिषीय मान्यताओं और पारंपरिक विश्वासों पर आधारित है। किसी भी रत्न को धारण करने से पहले संबंधित क्षेत्र के एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें।

Yogini Ekadashi Vrat 2026: कब है योगिनी एकादशी व्रत? इस दिन धन का मार्ग खोलने और कष्टों से मुक्ति के लिए जरूर करें ये आसान उपाय

Yogini Ekadashi Vrat 2026: हिंदू धर्म एकादशी व्रत का विशेष स्थान है। इसे भगवान विष्णु की कृपा पाने का सबसे सरल उपाय माना जाता है। हर माह में कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को यह व्रत किया जाता है। इस तरह पूरे हिंदू वर्ष में 24 एकादशी व्रत करने का सौभाग्य प्राप्त होता है। इनमें से एक है योगिनी एकादशी का व्रत। यह एकादशी व्रत हर साल आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना और व्रत करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। योगिनी एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है और इस दिन कुछ विशेष उपाय करने से धन लाभ और कष्टों से मुक्ति मिल सकती है। आइए जानें इसके बारे में

योगिनी एकादशी व्रत और पारण की तारीख

एकादशी तिथि प्रारंभ : 10 जुलाई 2026, शुक्रवार को सुबह 08:10 बजे से

एकादशी तिथि समाप्त : 11 जुलाई 2026, शनिवार को सुबह 05:23 बजे तक

व्रत पारण का समय (11 जुलाई): दोपहर 01:50 बजे से शाम 04:36 बजे के बीच

योगिनी एकादशी के दिन करें ये 3 उपाय

विष्णु जी का पूजन करें : योगिनी एकादशी के दिन माता लक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु की पूजा और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से जीवन में धन लाभ के योग बन सकते हैं। इस उपाय से श्री हरि की संपूर्ण कृपा दृष्टि बनी रहेगी। इस एकादशी के दिन व्रत का पालन करना और ज्यादा फलदायी हो सकता है। इस दिन व्रत करके फलाहार करें और विष्णु जी को भोग में पीले फल अथवा पीली मिठाई अर्पित करें।

जरूरतमंदों को धन का दान : योगिनी एकादशी के दिन किसी जरूरतमंद को धन का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन आप प्रातः जल्दी उठकर स्नान आदि से मुक्त हो जाएं और विष्णु जी का पूजन करने के बाद किसी गरीब व्यक्ति को अन्न-धन दान स्वरूप दें। इस दिन पीले वस्त्रों का दान भी बहुत शुभ हो सकता है। इस उपाय से सभी बाधाएं दूर होंगी और जीवन में कभी भी अन्न और धन की कमी नहीं होगी।

तुलसी की पूजा : तुलसी के पौधे को विष्णु प्रिया के रूप में पूजा जाता है। योगिनी एकादशी के दिन तुलसी की पूजा विधि-विधान से करने पर भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की कृपा दृष्टि भी बनी रहेगी। लेकिन इस दिन तुलसी में भूलकर भी जल अर्पित न करें।

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