Putrada Ekadashi 2026: आज सावन पुत्रदा एकादशी पर 3 बेहद शुभ योगों का दुर्लभ संयोग, 5 राशियों के जातक धन और करियर में पाएंगे बड़ा लाभ

Putrada Ekadashi 2026: हिंदू धर्म पुत्रदा एकादशी का विशेष स्थान है। यह व्रत साल में दो बार सावन और पौष माह में किया जाता है। आज सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत है। यह व्रत सावन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। हिंदू धर्म में भगवान विष्णु को समर्पित एक अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्रत विशेष रूप से संतान प्राप्ति, संतान के सुख-समृद्धि और उसकी दीर्घायु की कामना के लिए रखा जाता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जो दंपत्ति निसंतान हैं या जिन्हें संतान सुख प्राप्त करने में बाधाएं आ रही हैं, वे यदि इस व्रत को विधि-विधान से रखते हैं, तो उन्हें योग्य संतान की प्राप्ति होती है। इस दिन भगवान विष्णु और उनके कृष्ण रूप की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस बार पुत्रदा एकादशी पर सिद्धि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग का संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन शुभ योगों में पूजा-पाठ और धार्मिक कार्य करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। सर्वार्थ सिद्धि योग को कार्यों में सफलता और मनोकामना पूर्ति के लिए विशेष शुभ माना जाता है।

इन 5 राशियों के लिए शुभ रह सकता है समय

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार पुत्रदा एकादशी पर बनने वाले शुभ योगों का असर कुछ राशियों के लिए सकारात्मक रह सकता है। इस दौरान धन, करियर और कारोबार में अच्छे अवसर मिलने के योग बन सकते हैं।

वृषभ राशि : वृषभ राशि वालों के लिए आर्थिक स्थिति मजबूत होने के संकेत हैं। आय के नए स्रोत बन सकते हैं। रुका हुआ धन वापस मिलने की संभावना है.नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारी मिल सकती है।

मिथुन राशि : मिथुन राशि वालों के लिए करियर में तरक्की के अवसर बन सकते हैं। नया प्रोजेक्ट या कारोबार से जुड़ी कोई अच्छी डील मिल सकती है। प्रभावशाली लोगों से संपर्क भविष्य में लाभ दिला सकता है।

सिंह राशि : सिंह राशि वालों को भाग्य का साथ मिल सकता है। नौकरी में प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिलने के योग हैं। कारोबारियों को अच्छा मुनाफा मिल सकता है। आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा।

तुला राशि : तुला राशि वालों के लिए यह समय आर्थिक मामलों में शुभ रह सकता है। कारोबार विस्तार की योजना आगे बढ़ सकती है। परिवार की ओर से कोई शुभ समाचार मिल सकता है।

मीन राशि : मीन राशि के जातकों के लिए अटके हुए काम पूरे होने के योग हैं। नौकरी और कारोबार में नए अवसर मिल सकते हैं। आर्थिक स्थिति में सुधार के साथ मानसिक शांति भी प्राप्त हो सकती है।

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Putrada Ekadashi 2026: कल किया जाएगा सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत, जानें साल में 2 बार क्यों किया जाता है पुत्रदा एकादशी व्रत

Putrada Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में पुत्रदा एकादशी व्रत का विशेष स्थान है। यह व्रत संतान की सुख-समृद्धि, खुशहाली और अच्छी सेहत के लिए किया जाता है। पूरे साल में आने वाली सभी एकादशी व्रतों में यह अकेला उपवास है, जो साल में दो बार किया जाता है। एक बार श्रावण शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि और फिर पौष शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नि:संतान दंपति इस व्रत को संतान प्राप्ति की कामना से कर सकते हैं। इस एकादशी में भगवान विष्णु की बाल रूप में या श्री कृष्ण की पूजा जाती है।

पुत्रदा एकादशी 2026 में कब?

साल में दो बार पौष और सावन माह में पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जाता है। दोनों ही व्रत संतान प्राप्ति या संतान की सुख-शांति के उद्देश्य से रखा जाता है। इस साल श्रावण मास की पुत्रदा एकादशी का व्रत 23 अगस्त 2026 को रखा जाएगा।

श्रावण पुत्रदा एकादशी का धार्मिक महत्व

श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को श्रावण पुत्रदा एकादशी के नाम से जाना जाता है। कई हिस्सों में इसे पवित्रा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसे पापों का नाश करने वाली और पुण्य प्रदान करने वाली एकादशी बताया जाता है। श्रावण मास में इस एकादशी का महत्व इसलिए भी और बढ़ जाता है क्योंकि इस महीने में भगवान शिव की भी पूजा होती है। ऐसे में भगवान विष्णु के साथ-साथ भगवान शिव की पूजा करने से भक्तों को खास लाभ मिलता है।

साल में 2 बार पुत्रदा एकादशी क्यों?

साल में दो बार पुत्रदा एकादशी व्रत होने का मुख्य कारण यह है कि, विभिन्न धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में दोनों ही खास तिथियों का फल संतान प्राप्ति और संतान की सुरक्षा के लिए बताया गया है। दोनों ही एकादशियों का उद्देश्य और फल की समानता होने के कारण ही दोनों को पुत्रदा एकादशी (संतान प्रदान करने वाली) कहा जाता है।

दोनों एकादशियों का अलग-अलग महत्व

श्रावण एकादशी : यह विशेष रूप से संतान के स्वास्थ्य, दीर्घायु और संकटों से रक्षा के लिए रखी जाती है।

पौष एकादशी : यह मुख्य रूप से योग्य, ज्ञानी और तेजस्वी संतान की प्राप्ति तथा उसकी उन्नति के लिए मानी जाती है।

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Putrada Ekadashi 2026: सावन की पुत्रदा एकादशी पर इन 5 बातों का रखें खास ध्यान, वर्ना नहीं मिलेगा व्रत और पूजा का पूरा फल

Putrada Ekadashi 2026: सावन माह में आने वाली पुत्रदा एकादशी का सभी व्रत और पर्व में विशेष स्थान है। यह व्रत माताएं और अभिभावक अपनी संतान की सुख-समृद्धि, अच्छी सेहत और खुशहाली के लिए करते हैं। कुछ दंपति संतान की प्राप्ति की कामना से भी यह व्रत करते हैं। पुत्रदा एकादशी व्रत सावन के अलावा पौष माह में भी किया जाता है। सावन माह के शुल्क पक्ष की एकादशी तिथि को सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत होता है। एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है, लेकिन सावन का महीना होने की वजह से इस दिन भगवान शिव की पूजा का भी विशेष महत्व है।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी के दिन व्रत और पूजा करते समय कुछ बातों का खास ध्यान रखना चाहिए। आइए जानें इनके बारे में

कब है सावन पुत्रदा एकादशी 2026

पंचांग के अनुसार, सावन शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 23 अगस्त 2026 को रात 2 बजे से शुरू होकर 24 अगस्त सुबह 4:18 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर 23 अगस्त को पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। लेकिन सावन पुत्रदा एकादशी व्रत पारण के दिन हरिवासर सूर्योदय के बाद तक रहने की वजह से 24 अगस्त को भी पुत्रदा एकादशी व्रत होगा।

इन 5 नियमों को भूल कर भी अनदेखा न करें

काले कपड़े न पहनें : एकादशी व्रत में पीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। यह रंग भगवान विष्णु का प्रिय रंग है। पूजा-पाठ के दौरान काले रंग के कपड़े पहनने से बचने की सलाह दी जाती है।

तुलसी की पत्तियां न तोड़ें : इस दिन तुलसी की पत्तियां तोड़ने से बचना चाहिए। भगवान विष्णु की पूजा में पहले से रखी तुलसी की पत्तियों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

गुस्सा और विवाद न करें : उन्होंने कहा कि इस दिन किसी का अपमान करने, बहस करने या किसी का दिल दुखाने से बचें। शांत मन से भगवान का स्मरण करना शुभ माना जाता है।

चावल खाने से बचें : धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी व्रत के दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन सात्विक भोजन और फलाहार को प्राथमिकता दी जाती है।

तामसिक भोजन से दूरी रखें : एकादशी के दिन मांस-मदिरा और अन्य तामसिक चीजों से दूर रहने की सलाह दी जाती है। इससे पूजा और उपवास का पूरा फल नहीं मिलता है।

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