Sawan Purnima 2026: जीवन में लाना चाहते हैं सुख-समृद्धि तो सावन के अंतिम दिन करें ये 7 उपाय, मां लक्ष्मी की कृपा से नहीं होगी किसी चीज की कमी

Sawan Purnima 2026: सावन का महीना अब समापन की ओर बढ़ रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार, उत्तर भारत में मुख्य रूप से प्रचलित पूर्णिमान्त कैलेंडर में श्रावण मास का समापन श्रावण पूर्णिमा के दिन होता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र यानी राखी बांधती हैं और भाई उनकी रक्षा का वचन देते हैं। इसी दिन ब्राह्मण और द्विज समाज के लोग पुराना यज्ञोपवीत उतार कर नया धारण करते हैं। साथ ही, श्रावण पूर्णिमा को ‘विश्व संस्कृत दिवस’ के रूप में भी मनाया जाता है।

सावन पूर्णिमा के दिन सिर्फ रक्षाबंधन का पर्व ही नहीं, गायत्री जयंती, वरलक्ष्मी व्रत और नारली पूर्णिमा भी मनाई जाती है। इस साल सावन का अंतिम दिन और भी खास है, क्योंकि इस दिन चंद्र ग्रहण भी लग रहा है। हालांकि ये ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, जिस कारण से इसका यहां कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। बता दें, हर हिंदू माह में पूर्णिमा का दिन माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा के लिए भी खास माना जाता है। सावन की पूर्णिमा पर भगवान शिव की भी पूजा की जाती है। इसलिए इस दिन को जीवन में खुशहाली और सुख समृद्धि लाने के लिए बेहद अहम माना जाता है। अगर आप इस दिन कुछ खास उपाय करते हैं तो घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है।

कब है श्रावण पूर्णिमा 2026?

सावन महीना 28 अगस्त 2026 को खत्म हो रहा है। इस दिन श्रावण पूर्णिमा है, जो 27 अगस्त 2026 की सुबह 09:08 बजे से 28 अगस्त 2026 की सुबह 09:48 बजे तक रहेगी।

सावन पूर्णिमा के उपाय

  • श्रावण पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि विधान पूजा जरूर करें, उन्हें मखाने की खीर का भोग लगाएं। साथ ही कनकधारा स्तोत्र या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। कहते हैं ऐसा करने से धन-धान्य में वृद्धि के रास्ते खुलते हैं।
  • सावन के आखिरी दिन मां लक्ष्मी के चरणों में 5 साबुत पीली कौड़ियां और थोड़ा अक्षत अवश्य चढ़ाएं। पूजा के बाद इन कौड़ियों और चावल को एक लाल रेशमी कपड़े में बांधकर घर की तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रख दें। मान्यता है इस उपाय को करने से घर में धन-धान्य की कभी कमी नहीं होती।
  • सावन के अंतिम दिन शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक करें। इसके बाद शिवलिंग पर शुद्ध जल भी जरूर चढ़ाएं। इसके बाद शिवजी को बेलपत्र और शमी के पत्ते चढ़ाएं। मान्यता है कि सावन के आखिरी दिन भक्तिभाव से यह उपाय करने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।
  • सावन के अंतिम दिन यानी श्रावण पूर्णिमा की रात में चंद्र देव की पूजा भी जरूर करें। रात में चांदी के पात्र में साफ जल, थोड़ा सा कच्चा दूध, अक्षत और सफेद फूल मिलाकर चंद्र देव को अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय चंद्र देव के मंत्र को 3 बार जरूर बोलें। मंत्र है ‘ॐ चंद्राय नमः’।
  • सावन के आखिरी दिन पीपल के वृक्ष पर जल अर्पित करना अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है। साथ ही पीपल के पेड़ पर सरसों के तेल का दीपक भी जलाएं। कहते हैं इससे सभी देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त हो जाता है।
  • सावन के अंतिम दिन किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को तिल, सफेद वस्त्र, चावल, दूध या भोजन का दान जरूर करें। कहते हैं इससे माता लक्ष्मी की असीम कृपा प्राप्त होती है।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई सामग्री जानकारी मात्र है। हम इसकी सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता का दावा नहीं करते। कृपया किसी भी कार्रवाई से पहले विशेषज्ञ से संपर्क करें

Rakshabandhan 2026: इस रक्षाबंधन पर एक नहीं बल्कि 7 शुभ योग बन रहे हैं, जानें रक्षाबंधन की तारीख और राखी बांधने के शुभ मुहूर्त

मेरे पास 5 गाय हैं और भी रखने के लिए जगह… सीतापुर की पूनम देवी की ये बात सुनते ही CM योगी ने पशुधन विभाग को दिया ये आदेश

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दिनचर्या कितनी भी व्यस्त क्यों न हो, जनता से सीधे संवाद का सिलसिला जारी रहता है। सोमवार को लखनऊ में अपने सरकारी आवास पर सीएम योगी ने जनता दर्शन कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में लोगों से मुलाकात की। उन्होंने लोगों की समस्याएं और शिकायतें सुनीं और मौके पर मौजूद संबंधित अधिकारियों को इनके जल्द और प्रभावी समाधान के निर्देश दिए।

इस दौरान सीतापुर के हरगांव की रहने वाली पूनम देवी भी सीएम योगी आदित्यनाथ के जनता दरबार में पहुंचीं। उन्होंने मुख्यमंत्री से मिलकर गाय पालन के जरिए अपने परिवार को आत्मनिर्भर बनाने की इच्छा जाहिर की। पूनम के पास पहले से ही पांच गायें हैं और उन्होंने और गायें उपलब्ध कराने की मांग की। पूनम ने बताया की उनके पास अन्य गोवंश रखने के लिए पर्याप्त जगह भी हैं।

इस पर मुख्यमंत्री ने अतिरिक्त मुख्य सचिव (पशुपालन) को निर्देश दिया कि उन्हें बेसहारा गायें उपलब्ध कराई जाएं और यह सुनिश्चित किया जाए कि उन्हें ‘मुख्यमंत्री सहभागिता योजना’ का लाभ मिले, ताकि वह गोसेवा के साथ दूथ की बिक्री से परिवार की आय बढ़ा सकें।

श्रावण मास में मुख्यमंत्री से आश्वासन मिलने पर जताया आभार

अपने जनता दर्शन कार्यक्रम में सीएम योगी आदित्यनाथ ने गोसेवा के महत्व का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, गोमाता में 33 कोटि देवताओं का वास माना गया है। सीएम योगी ने पूनम से कहा कि मन से गोसेवा करें, क्योंकि श्रद्धा और मन से की गई गोसेवा से जीवन की बाधाएं और कष्ट दूर होते हैं। पूनम देवी ने भी अपनी इच्छा पूरी करने की दिशा में मुख्यमंत्री की ओर से मिले भरोसे के लिए आभार जताया। उन्होंने कहा कि श्रावण मास में मुख्यमंत्री के सामने अपनी बात रखने और मदद का आश्वासन मिलने से उन्हें खुशी हुई है।

दिव्यांग की जमीन पर कब्जे की शिकायत

बता दें कि जनता दर्शन के दौरान अलग-अलग जिलों से पहुंचे लोगों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने अपनी समस्याएं रखीं। इसी दौरान एक दिव्यांग व्यक्ति ने अपनी जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायत मुख्यमंत्री से की। योगी आदित्यनाथ ने उसकी बात गंभीरता से सुनी और संबंधित अधिकारियों को मामले की जांच कराकर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने पीड़ित को हर संभव मदद दिलाने और उसकी समस्या का उचित समाधान सुनिश्चित करने को कहा।

यह भी पढ़ें: Delhi Rains: दिल्ली-NCR में भारी बारिश से हवाई सेवा प्रभावित! 250 से ज्यादा उड़ानें लेट, 15 फ्लाइट डायवर्ट

Shravan Putrada Ekadashi Vrat Katha: सावन की अंतिम एकादशी का व्रत आज, इस व्रत में जरूर सुनें महिष्मती पुरी के राजा महीजित की ये कथा

Shravan Putrada Ekadashi Vrat Katha: आज श्रावण मास की अंतिम एकादशी पुत्रदा या पवित्रा एकादशी का व्रत है। यह व्रत हर साल श्रावण शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। पूरे साल में आज वाले सभी एकादशी व्रतों में इसका विशेष स्थान है, क्योंकि यह व्रत संतान के सुखी और स्वस्थ जीवन की कामना के लिए किया जाता है। साथ ही, नि:संतान दंपति इसे संतान प्राप्ति की कामना से भी करते हैं। हिंदू धर्म में यह अकेला ऐसा एकादशी व्रत है, जो साल में दो बार किया जाता है। एक बार सावन में और फिर पौष के महीने में। पुत्रदा एकादशी हिंदू धर्म में भगवान विष्णु को समर्पित एक अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत है। इस दिन भगवान विष्णु और उनके कृष्ण रूप की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस साल सावन पुत्रदा एकादशी पर मूल नक्षत्र के साथ सिद्धि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और रवियोग का संयोग बन रहा है।

एकादशी तिथि रात 3:56 बजे तक

एकादशी की तिथि रात 3:56 बजे तक रहेगी। इस दिन चर-लाभ-अमृत मुहूर्त सुबह 7:03 बजे से 11:52 बजे तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त दोपहर 11:26 बजे से 12:18 बजे तक रहेगा। इसके अलावा शुभ योग मुहूर्त दोपहर 1:28 बजे से 3:04 बजे तक रहेगा।

श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत कथा

द्वापर युग में महिष्मती पुरी के राजा महीजित अत्यंत धर्मात्मा, दानवीर और प्रजापालक थे। उनके राज्य में प्रजा हर तरह से सुख-समृद्धि से परिपूर्ण थी, लेकिन राजा महीजित की कोई संतान नहीं थी। संतान न होने के कारण राजा और उनकी पत्नी अत्यंत दुःखी और चिंतित रहते थे।

जब राजा वृद्धावस्था की ओर बढ़ने लगे, तो उन्होंने राज्य के ऋषि-मुनियों और पंडितों को बुलाकर अपनी इस व्यथा का समाधान मांगा। उन्होंने ऋषियों से कहा, “मैंने जीवन में कभी कोई अधर्म नहीं किया, प्रजा को पुत्र समान माना, फिर भी मुझे संतान सुख क्यों नहीं मिला?”

राजा की व्यथा सुनकर सभी ऋषि-मुनि जंगल में लोमश ऋषि के आश्रम पहुंचे। लोमश ऋषि परम ज्ञानी और त्रिकालदर्शी थे। ऋषियों के निवेदन पर लोमश ऋषि ने ध्यान लगाकर राजा के पूर्व जन्म का वृत्तांत देखा और बताया कि राजा महीजित पूर्व जन्म में एक निर्धन वैश्य थे। एक बार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को वे दो दिनों से भूखे-प्यासे भटक रहे थे।

रास्ते में एक जलाशय देखकर वे पानी पीने पहुंचे। उसी समय एक प्यासी गाय भी वहां पानी पीने आई। वैश्य ने उस गाय को हटाकर स्वयं पहले पानी पी लिया। अनजाने में एकादशी के दिन प्यासी गाय को जल से वंचित करने के कारण उन्हें इस जन्म में राजा बनने का सुख तो मिला, परंतु संतानहीन रहने का श्राप भी मिला।

ऋषि लोमश ने इस पाप के निवारण का उपाय बताते हुए कहा कि यदि राजा और उनकी प्रजा श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी का विधिवत व्रत रखें और उसका पुण्य फल राजा को अर्पित करें, तो उन्हें निश्चित ही संतान की प्राप्ति होगी।

राजा महीजित, उनकी पत्नी और समस्त प्रजाजनों ने ऋषियों के बताए अनुसार श्रावण पुत्रदा एकादशी का निष्ठापूर्वक व्रत रखा और उसका संपूर्ण पुण्य राजा को दे दिया। इस व्रत के प्रभाव से रानी गर्भवती हुईं और समय आने पर उन्होंने एक सुंदर, तेजस्वी तथा योग्य पुत्र को जन्म दिया। तभी से इस एकादशी का नाम ‘पुत्रदा एकादशी’ पड़ा।

Putrada Ekadashi 2026: कल किया जाएगा सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत, जानें साल में 2 बार क्यों किया जाता है पुत्रदा एकादशी व्रत

Putrada Ekadashi 2026: कल किया जाएगा सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत, जानें साल में 2 बार क्यों किया जाता है पुत्रदा एकादशी व्रत

Putrada Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में पुत्रदा एकादशी व्रत का विशेष स्थान है। यह व्रत संतान की सुख-समृद्धि, खुशहाली और अच्छी सेहत के लिए किया जाता है। पूरे साल में आने वाली सभी एकादशी व्रतों में यह अकेला उपवास है, जो साल में दो बार किया जाता है। एक बार श्रावण शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि और फिर पौष शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नि:संतान दंपति इस व्रत को संतान प्राप्ति की कामना से कर सकते हैं। इस एकादशी में भगवान विष्णु की बाल रूप में या श्री कृष्ण की पूजा जाती है।

पुत्रदा एकादशी 2026 में कब?

साल में दो बार पौष और सावन माह में पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जाता है। दोनों ही व्रत संतान प्राप्ति या संतान की सुख-शांति के उद्देश्य से रखा जाता है। इस साल श्रावण मास की पुत्रदा एकादशी का व्रत 23 अगस्त 2026 को रखा जाएगा।

श्रावण पुत्रदा एकादशी का धार्मिक महत्व

श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को श्रावण पुत्रदा एकादशी के नाम से जाना जाता है। कई हिस्सों में इसे पवित्रा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसे पापों का नाश करने वाली और पुण्य प्रदान करने वाली एकादशी बताया जाता है। श्रावण मास में इस एकादशी का महत्व इसलिए भी और बढ़ जाता है क्योंकि इस महीने में भगवान शिव की भी पूजा होती है। ऐसे में भगवान विष्णु के साथ-साथ भगवान शिव की पूजा करने से भक्तों को खास लाभ मिलता है।

साल में 2 बार पुत्रदा एकादशी क्यों?

साल में दो बार पुत्रदा एकादशी व्रत होने का मुख्य कारण यह है कि, विभिन्न धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में दोनों ही खास तिथियों का फल संतान प्राप्ति और संतान की सुरक्षा के लिए बताया गया है। दोनों ही एकादशियों का उद्देश्य और फल की समानता होने के कारण ही दोनों को पुत्रदा एकादशी (संतान प्रदान करने वाली) कहा जाता है।

दोनों एकादशियों का अलग-अलग महत्व

श्रावण एकादशी : यह विशेष रूप से संतान के स्वास्थ्य, दीर्घायु और संकटों से रक्षा के लिए रखी जाती है।

पौष एकादशी : यह मुख्य रूप से योग्य, ज्ञानी और तेजस्वी संतान की प्राप्ति तथा उसकी उन्नति के लिए मानी जाती है।

Raksha Bandhan 2026 Bhadra timing: इस बार रक्षा बंधन पर नहीं होगा भद्रा का साया, जानें कौन हैं भद्रा और इसमें क्यों नहीं बांधनी चाहिए राखी

2017 के पहले सपाई हड़प लेते थे गरीबों का राशन कार्ड, अब 15 करोड़ लोगों को निरंतर निशुल्क मिल रहा राशन : CM योगी

2017 के पहले सपाई हड़प लेते थे गरीबों का राशन कार्ड, अब 15 करोड़ लोगों को निरंतर निशुल्क मिल रहा राशन : CM योगी

CM Yogi Adityanath

UP Free Ration Scheme: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकारी राशन वितरण के उचित दर विक्रेताओं से अपील की कि वह कार्य करिए, जिसमें सम्मान हो। जिसमें सम्मान न हो, वह कार्य कभी नहीं करना चाहिए। इससे पीढ़ियां खराब होती हैं, उन पर दुष्प्रभाव पड़ता है। उन्होंने 2017 के बाद आए बदलाव का जिक्र किया और कहा कि अब कोई आप पर अंगुली नहीं उठा सकता। 2017 के पहले सपाई गरीब का राशन कार्ड अपने घर में रख लेता था, जिससे वह भूख से मरता था परंतु अब ऐसी स्थिति नहीं है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के जरिए प्रदेश के 15 करोड़ लोगों को लगातार निःशुल्क राशन मिल रहा है। निराश्रितों/दिव्यांगों का राशन घर तक पहुंचाने की व्यवस्था हो रही है। 2 करोड़ परिवारों को फ्री में रसोई गैस के कनेक्शन, 1.53 करोड़ परिवारों को फ्री में बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराए गए। राशन की 10 हजार दुकानों को अन्नपूर्णा भवन के रूप में स्थापित किया गया है। यह परिणाम राज्य की उन्नति को बताते हैं। 

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रावण मास के तीसरे सोमवार की शुभकामना दी और राशन कोटेदारों की आस पूरी करते हुए सोमवार को लोकभवन में सिंगल स्टेज डोर-स्टेप डिलीवरी के अंतर्गत ई-पॉस आधारित उचित दर विक्रेता फीडबैक प्रणाली का शुभारंभ किया। सीएम ने बटन दबाकर उत्तर प्रदेश के 78 हजार से अधिक उचित दर विक्रेताओं के लाभांश में हुई वृद्धि (90 रुपए से बढ़ाकर 125 रुपए प्रति क्विंटल) का उपहार दिया। सीएम ने कहा कि मार्जिन मनी में 35 रुपए की वृद्धि (10 रुपए केंद्र सरकार व 25 रुपए राज्य सरकार) से आपने लंबी छलांग लगाई है। हमने 25 रुपए और बढ़ाने के लिए भारत सरकार को पत्र लिखा है। समय लगेगा, लेकिन यह कार्य हो गया तो आपके लिए और भी अच्छी व्यवस्था होगी।

शासन व जनता के बीच सेतु का काम करते हैं फेयरप्राइस शॉप के संचालक

मुख्यमंत्री ने कहा कि हर व्यक्ति काम करके आजीविका चलाता है, लेकिन उचित मूल्य विक्रेता निराश्रित, गरीब, दिव्यांगजन समेत समाज के अन्य जरूरतमंदों के हित को ध्यान में रखते हुए उन्हें शासन की योजना से जोड़ रहे हैं। उचित मूल्य विक्रेता से जुड़े फेयरप्राइस शॉप के संचालक दुनिया की सबसे बड़ी योजना (राशन वितरण) के जरिए शासन व जनता के बीच सेतु का काम करते हैं। 

वर्ष 2017 के पहले कोटेदार नाम से लोगों को होती थी चिढ़ 

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 से पहले उचित दर मूल्य के विक्रेताओं का दर्द बयां किया। कहा कि आप तब भी मेहनत करते थे लेकिन शासन राशन नहीं भेजता था तो गाली आपको खानी पड़ती थी। उनकी लूट का खामियाजा आपको भुगतना पड़ता था। लोग शक की निगाहों से देखते थे। कोटेदार शब्द से ही लोगों को चिढ़ सी होने लग गई थी। गलती आपकी नहीं थी। पाप कोई करता था, भुक्तभोगी कोई और होता था। 

 

योगी ने कहा कि उस समय सत्तासीन लोगों की नीयत में खोट था। उनके भ्रष्ट आचरण की आंच से चाहकर भी आप स्वयं को बचा नहीं सकते थे, जिससे उस समय यूपी की 20-22 करोड़ की आबादी शक की निगाहों से देखी जाती थी। नौजवान, व्यापारी, बेटियां समेत आमजन अन्य प्रदेश में जाते थे तो कोई सम्मान नहीं करता था। 2017 के पहले जो लोग यूपी से दूरी बनाते थे, पिछले साढ़े 9 वर्ष के भीतर वही लोग अब यूपीवालों को गले लगाते हैं। उत्तर प्रदेश के बारे में ओवरऑल धारणा बदली है। यह परिवर्तन डबल इंजन सरकार की ताकत है, जिसे पीएम मोदी जी के नेतृत्व/मार्गदर्शन में प्रदेश ने सामूहिक रूप से अर्जित किया है। 

CM yogi

वीडियो बनाने की धमकी देने वाले स्कूलों में जाकर देखें सकारात्मक बदलाव 

सीएम ने बेसिक शिक्षा परिषद का जिक्र किया। कहा कि कुछ लोग कहते हैं कि स्कूल का वीडियो बनाएंगे, अरे! जरूर बनाओ। हमने ऑपरेशन कायाकल्प के माध्यम से हर स्कूल की अच्छी फ्लोरिंग कराई। सरकार बालक-बालिकाओं के लिए अलग टॉयलेट, पेयजल, स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी, फर्नीचर, 1.60 करोड़ बच्चों को बैग, किताबें, दो यूनिफॉर्म, जूता-मोजा, स्वेटर आदि सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। साल 2017 के पहले स्कूल का भवन नहीं होता था। यदि भवन था तो शिक्षक नहीं, शिक्षक थे तो छात्र नहीं। पेयजल, टॉयलेट न होने से सत्र पूरा होने से पहले ही आधे बच्चे पहले ही स्कूल छोड़कर चले जाते थे। अब निपुण भारत अभियान के तहत यूपी के स्कूली बच्चे अक्षर ज्ञान के साथ ही वाक्य विन्यास में भी पारंगत हुए हैं। विज्ञान, अंग्रेजी, गणित की शिक्षा भी स्कूल में लेते हैं। बच्चे अब अच्छा कर रहे हैं। 

जो कुछ नहीं कर पाए, वे आरोप-प्रत्यारोप लगाते हैं 

मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी का नाम लिए बिना निशाना साधा। कहा कि जो लोग कुछ कर नहीं पाए, वे आरोप-प्रत्यारोप लगाते हैं। ऐसे लोग परिवर्तन को नकारात्मकता में बदलना चाहते हैं। यही स्थिति आप सभी के साथ भी हुई। उचित दर विक्रेताओं के बारे में लोगों की धारणा ठीक हो, इसके लिए सरकार ने वर्ष 2017 में ई-पॉस मशीन लगाना शुरू किया। हमने कहा कि सिंगल डोर स्टेप होगा यानी एफसीआई के गोदाम से सीधे फेयरप्राइस शॉप तक राशन पहुंचाया जाएगा। सरकार व उचित मूल्य विक्रेता के बीच में कोई बैरियर नहीं रहेगा। हम सीधे संवाद बनाएंगे, इससे परिणाम भी सकारात्मक आए। 

39 प्रकार के आइटम की कर सकते हैं बिक्री

सीएम ने कहा कि पारदर्शिता आई तो अब गांव में लोग आपका सम्मान भी करते हैं और आपके सुख-दुख में खड़े होते हैं। आपके प्रति विश्वास में वृद्धि हुई। पीएम के आदेश पर उचित दर विक्रेता से जुड़ी दुकान को अन्नपूर्णा भवन के रूप में निर्मित किया जा रहा है। इस वर्ष इस मद में 500 करोड़ रुपए दिए गए हैं। वहां दुकान व गोदाम की भी व्यवस्था होगी। पहले आप केवल राशन की ही बिक्री कर पाते थे, लेकिन अब 39 ऐसे आइटम हैं, जिन्हें आप अपनी दुकानों से बेच सकते हैं बशर्ते वह नशीले/ज्वलनशील पदार्थ या देश/समाज के प्रतिकूल आचरण से जुड़े सामान न हों। 

2017 में जनता दर्शन में 1000 में से 300 शिकायतें राशन से जुड़ी आती थीं, अब एक भी नहीं आतीं 

सीएम ने कहा कि पहले सरकार ही लूट मचाती थी तो परिवर्तन कैसे हो पाता। फेयर प्राइस शॉप संचालकों को कोसने भर से परिवर्तन नहीं होता। प्रदेश में अब खाद्य व रसद विभाग में भी व्यापक रिफॉर्म हुआ है। 2017 में जनता दर्शन में यदि हजार प्रार्थना पत्र आते थे तो इसमें से लगभग 300 अप्लीकेशन राशन से जुड़ी विसंगतियों को लेकर होती थी लेकिन अब राशन वितरण की एक भी शिकायत नहीं आती है। यही आपका सम्मान है। अब आपको कोई कटघरे में नहीं खड़ा कर सकता और न ही कोई ऊल-जुलूल बातें करता है। 

कोरोना के दौरान भी कोटेदारों की नहीं आई एक भी शिकायत

मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन की स्कीम को आपने धऱातल पर उतारने का कार्य किया। हमें प्रसन्नता होती है कि हमने गरीब के लिए जो चीज उपलब्ध कराई थी, वह उस तक पहुंच गई है। सीएम ने कोटेदारों की पीठ थपथपाते हुए कहा कि कोरोना संक्रमण के दौरान भी आप राशन वितरित कर रहे थे। जब सारा काम-धंधा बंद हुआ तो हमने दाल, नमक और तेल का वितरण शुरू किया। सभी जगह सुचारु वितरण हुआ, कहीं से एक भी शिकायत नहीं आई और हर गरीब तक सामान पहुंचा। इसका मतलब पूर्ववर्ती सरकार की नीयत खराब थी। वे आपका इंसेंटिव भी नहीं बढ़ाते थे।  

मुख्यमंत्री ने फेयर प्राइस शॉप संचालकों की हौसलाअफजाई की

सीएम ने कहा कि औसतन हर विक्रेता को 100 कुंतल अनाज का आवंटन होता है। अब तक 90 रुपए के हिसाब से फेयरप्राइस शॉप के संचालक की प्रतिमाह आय लगभग 12,750 होती थी। अब 125 रुपए की दर से 100 कुंतल वितरण पर 16,250 रुपए प्राप्त होंगे। इसके अलावा दुकान का मुनाफा अलग से है। जो जितना अधिक बिक्री करेगा, उतना अधिक लाभांश कमाएगा। उचित मूल्य के विक्रेताओं के लिए पहली बार 30 प्रतिशत की मार्जिन मनी की बढ़ोतरी हो रही है। 

2017 के पहले किसानों से खरीदे जाने वाले खाद्यान्न में भी होती थी व्यापक हेराफेरी

सीएम ने कहा कि 2017 से पहले किसानों से लिए जाने वाले खाद्यान्न में व्यापक हेराफेरी होती थी। सीधे किसान से खरीदारी नहीं होती थी, बिचौलिए के कारण किसान को एमएसपी का लाभ नहीं मिल पाता था। 2017 से हम किसानों से सीधे धान, गेहूं, दलहन-तिलहन, मिलेट्स आदि की खरीद कर रहे हैं। डीबीटी के माध्यम से किसानों के खाते में पैसा जा रहा है। किसान, नौजवान, महिला समेत हर तबके का व्यक्ति सीधे शासन की योजनाओं का लाभ प्राप्त कर रहा है। सीएम ने कहा कि यदि बीच की दीवार हट गईं तो बहुत सी चीजें पारदर्शी हो जाएंगी, जो विश्वास का कारक भी बनती हैं और लोकतंत्र विश्वास के कारण मजबूत होता है। 

विदेश जाने वाले पैसे का एक हिस्सा भारत के अस्थिर करने में होता है खर्च 

सीएम ने अपील की कि उचित मूल्य विक्रेता भी विश्वास के प्रतीक के रूप में अपनी पहचान बनाएं। आप सभी अन्नपूर्णा भवन के निर्माण की कार्रवाई तेजी से बढ़वाइए। सरकार धनराशि आवंटित करेगी। अच्छे भवन, वेयरहाउस अच्छे बनेंगे। राशन वितरण 7-10 दिन करेंगे, शेष 20 दिन वेयरहाउस का उपयोग अन्य कार्यों के लिए करके अतिरिक्त आय भी कर सकते हैं। ओडीओपी के सामान रखकर होली-दीवाली समेत अन्य त्योहारों पर भी स्थानीय उत्पाद को प्राथमिकता देंगे तो स्थानीय कारीगर, हस्तशिल्पी भी प्रोत्साहित होगा। साथ ही भारत की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

 

उन्होंने कहा कि जब हमारा धन विदेशों में जाता है तो उसका एक हिस्सा हमारे खिलाफ ही आतंकवाद को भड़काने और भारत को अस्थिर करने में खर्च होता है। सीएम ने अपील की कि स्वदेशी को प्राथमिकता दें, लोकल को ग्लोबल बनाने की दिशा में प्रयास करें। यह अभियान गांव में भी प्रारंभ हो सकता है। सीएम ने कहा ग्राम पंचायत का जो अन्नपूर्णा भवन बनेगा, वहां उचित मूल्य संचालकों (अन्नपूर्णा भवन संचालक) को मिला सम्मान आपके कार्यों, परिश्रम व प्रयासों का परिणाम है। 

 

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, खाद्य व रसद विभाग के कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय, राज्यमंत्री सतीश चंद्र शर्मा, राज्यसभा सांसद ब्रजलाल, महापौर सुषमा खर्कवाल, विधायक नीरज बोरा, योगेश शुक्ल, विधान परिषद सदस्य लालजी प्रसाद निर्मल, रामचंद्र प्रधान, मुकेश शर्मा आदि मौजूद रहे। 

मुख्यमंत्री को सौंपा धन्यवाद पत्र 

इस उपहार के लिए कोटेदारों ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया। उप्र सस्ता गल्ला विक्रेता परिषद के अध्यक्ष अशोक कुमार मेहरोत्रा, ऑल इंडिया फेयर प्राइस शॉप डीलर एसोसिएशन के राजेश तिवारी, आदर्श कोटेदार कमलेश कुमार मिश्र, उपभोक्ता वेलफेयर एसोसिएशन के लोगों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धन्यवाद पत्र प्रदान किया तो सीएम ने भी मंच से आभार जताया।

Nag Panchami 2026: नाग पंचमी के त्योहार पर बन रहा ये खास संयोग, भूल कर भी न करें ये गलतियां

Nag Panchami 2026: हर साल की तरह इस बार भी नाग पंचमी सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को होगी। 17 अगस्त 2026 दिन सोमवार को नाग पंचमी मनाई जाएगी। यह और भी खास हो गई है, क्योंकि इसी दिन सावन का तीसरा सोमवार पड़ रहा है। ऐसे शुभ दिन पर नाग पंचमी और सावन सोमवार का यह संयोग पर्व के महत्व और ज्यादा बढ़ा देता है। माना जाता है कि इस विशेष संयोग में शुभ मुहूर्त पर नाग देवता की विधि-विधान से पूजा करने से भक्तों को 4 गुना ज्यादा फल मिलता है। पूजा मन लगाकर विधि विधान से करनी चाहिए।

पूजा विधि

इस साल नाग पंचमी 17 अगस्त को मनाई जाने वाली है। ज्योतिष के मुताबिक नाग पंचमी श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को होती है। इस दिन नाग देवताओं की पूजा होती है, जिससे सर्प दंश (काटने) का भय न हो, जीवन में सुख शांति समृद्धि बनी रहे, और प्रकृति तथा जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान करने का भी ये एक जरिया है। इस दिन यदि आप सावन सोमवार का व्रत कर रहे हैं, तो आपको नागव्रत का संकल्प नहीं कर सकते हैं। एक बार में एक व्रत किया जा सकता है। इसके बाद शिव जी की विधि विधान से पूजा करनी चाहिए। फिर नाग देवता की पूजा करनी चाहिए। जल अर्पित कर तिलक, चावल, फूल, भोग चढ़ाएं। वस्त्र अर्पित करें। वहीं दूध और खीर चढ़ाना न भूलें।

ये काम करने से बचें

1-सांपों का बिल जमीन के अंदर होता है। इसलिए नाग पंचमी के दिन गलती से भी जमीन, खेत वगैरह की खुदाई न करें। ऐसा करने से सांपों को चोट पहुंच सकती है, जो अशुभ होगा।

2-नाग पंचमी वाले दिन लोहे के बर्तनों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।

3-इस दिन नुकीलीं चीजें जैसे चाकू, सुई आदि का यूज करने से बचें।

4-नाग पंचमी वाले दिन भूलकर भी किसी जीव जंतु खासकर सापों को नुकसान न पहुंचाए।

5-इस दिन मदिरा और तामसिक भोजन करने से भी बचना चाहिए।

कथा

सबसे फेमस कथा के मुताबिक एक खेत जोतता किसान था। हल चलाते समय गलती से उसने नागिन के बच्चों को मार दिया ता। दुखी और क्रोधित नागिन ने किसान के पूरे परिवार को डंस लिया था। बाद में किसान की बेटी ने श्रद्धा से नाग देवता की पूजा की और उनसे क्षमा याचना की थी।

उसकी भक्ति को देख नागिन ने प्रसन्न होकर पूरे परिवार को जीवनदान दे दिया था। तभी से नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा करने की परंपरा की शुरुआत हो गई। मान्यता है कि इस दिन नाग देवता की पूजा करने से परिवार सुरक्षित रहता है और जीवन में आने वाले संकट कटते हैं।

सावन मास में अयोध्या में श्रद्धालुओं का सैलाब, अब तक 35 लाख से ज्यादा लोग पहुंचे

सावन मास में अयोध्या में श्रद्धालुओं का सैलाब, अब तक 35 लाख से ज्यादा लोग पहुंचे

Shravan month Ayodhya Ramlala Darshan: श्रावण मास में श्रीराम की पावन नगरी अयोध्या धाम में आस्था और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। देश के विभिन्न राज्यों एवं जनपदों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु अयोध्या पहुंचकर श्री रामलला के दर्शन-पूजन के साथ ही प्रमुख मंदिरों में पूजा-अर्चना कर रहे हैं तथा भगवान शिव के मंदिरों में जलाभिषेक कर रहे हैं। श्रावण मास के दौरान अब तक 35 लाख से अधिक श्रद्धालु अयोध्या धाम पहुंचकर दर्शन-पूजन कर चुके हैं।

 

इस वर्ष श्री रामलला के दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भी लगातार वृद्धि हो रही है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार 10 प्रतिशत से अधिक श्रद्धालुओं ने श्री रामलला के दर्शन किए हैं। प्रत्येक शनिवार एवं रविवार को भी एक लाख से अधिक श्रद्धालु अयोध्या धाम पहुंच रहे हैं।

 

श्रावण मास के प्रथम सोमवार को लगभग 3 लाख श्रद्धालुओं ने अयोध्या पहुंचकर दर्शन-पूजन किया, जबकि द्वितीय सोमवार को श्रद्धालुओं की संख्या बढ़कर लगभग 6 लाख तक पहुंच गई। लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए जिला प्रशासन एवं पुलिस द्वारा भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा, यातायात एवं श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर व्यापक स्तर पर व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।

भीड़ प्रबंधन एवं यातायात व्यवस्था पर विशेष फोकस

जिला प्रशासन द्वारा प्रमुख मंदिरों, घाटों एवं भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में लगातार निगरानी की जा रही है। श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन के लिए यातायात व्यवस्था को व्यवस्थित रखने के साथ ही आवश्यकता के अनुसार रूट डायवर्जन, बैरिकेडिंग एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। भीड़ के दबाव वाले क्षेत्रों में अधिकारियों एवं पुलिस बल की तैनाती कर स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। इसके लिए उच्च अधिकारी स्वयं रात्रि में भी मेला क्षेत्र का भ्रमण कर स्थिति का अवलोकन कर रहे है।

 

श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पेयजल, चिकित्सा, स्वच्छता, शौचालय, प्रकाश एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। घाटों एवं प्रमुख धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था को भी सुदृढ़ रखा गया है।

नोटों की गिनती के लिए नई व्यवस्था

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर मे विगत दिनों हुए चढ़ावा व दान चोरी की घटना ने सभी को हिला कर रख दिया हालांकि जांच अभी चल रही है। दोषी पाए गए आरोपियों को रिमांड पर लिया जा चुका है। इस बीच, SBI प्रबंधन राम मंदिर में नोटों की गिनती के लिए अपनी व्यवस्था मे बड़ा परिवर्तन करते हुए सेना के सेवानिवृत 10 कर्मियों का चुनाव किया है साथ ही इनका एक प्रभारी भी नियुक्त किया गया है।

 

वहीं दूसरी तरफ राम मंदिर में सिक्योरिटी सर्विस की सेवा समाप्ति के लिए सरकूलर जारी कर दिया गया है। जानकारी दे दें कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर ने दान व चढ़ावे चोरी की घटना के बाद SBI प्रबंधन ने सेक्युरिटी सेवा की समाप्ति के लिए एक सरकूलर भी जारी कर दिया है क्योंकि जेल मे बंद आठ आरोपियों मे से छह आरोपी इसी सिक्योरिटी एजेंसी के ही हैं। 

Kamika Ekadashi 2026 Katha: आज द्विपुष्कर योग में कामिका एकादशी का व्रत आज, पूजा में जरूर सुनें ये व्रत कथा और जानें आज पूजा का मुहूर्त

Kamika Ekadashi 2026 Katha: कामिका एकादशी व्रत भगवान विष्णु के योगनिद्रा में जाने के बाद पहला एकादशी व्रत होता है। यह उपवास सावन में कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से ब्रह्म हत्या की दोष से मुक्ति मिलती है, पाप मिटते हैं और श्री हरि की कृपा से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस व्रत की पूजा में भक्तों को कामिका एकादशी की व्रत कथा जरूर सुननी चाहिए।

माना जाता है कि ऐसा करने वाले श्रद्धालुओं को वाजपेय यज्ञ के समान पुण्य फल मिलता है। इस साल कामिका एकादशी का व्रत 9 अगस्त रविवार को है। इस दिन द्विपुष्कर योग बन रहा है। इस योग में व्रत, पूजा पाठ, जप, तप और शुभ काम करने का आपको दोगुना फल प्राप्त होगा। आइए जानें कामिका एकादशी की व्रत कथा, मुहूर्त और पारण समय के बारे में।

कामिका एकादशी 2026 मुहूर्त और पारण समय

सावन कृष्ण एकादशी तिथि का प्रारंभ : 8 अगस्त, दोपहर 1:59 बजे से

सावन कृष्ण एकादशी तिथि का समापन : 9 अगस्त, 11:04 एम पर

कामिका एकादशी पूजा मुहूर्त : सुबह 07:27 बजे से दोपहर 12:26 बजे तक

लाभ-उन्नति मुहूर्त : सुबह 09:07 बजे से 10:47 बजे तक

अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त : सुबह 10:47 बजे से दोपहर 12:26 बजे तक

द्विपुष्कर योग : 11:04 ए एम से दोपहर 02:43 बजे तक

व्रत पारण समय : 10 अगस्त, सोमवार, सुबह 5:47 बजे से 8 बजे

द्वादशी तिथि का समापन : 10 अगस्त, सुबह 08:00 बजे

कामिका एकादशी व्रत कथा

एक बार धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी के बारे में बताने का निवेदन किया। तब भगवान श्रीकृष्ण ने उनसे कहा कि एक बार ब्रह्मदेव ने नारद जी को एक कथा सुनाई थी, वही कथा मैं आपको सुनाता हूं-

ब्रह्माजी ने नारद मुनि को बताया कि श्रावण कृष्ण एकादशी को कामिका एकादशी भी कहा जाता है। जो लोग यह व्रत रखते हैं, उनको सुदर्शन चक्र धारण करने वाले भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। इस व्रत की कथा के अनुसार, एक गांव में एक ठाकुर रहता था। वह बड़ा ही क्रोधी था। एक दिन वो अपने घर से किसी काम के लिए निकला, तो उसका गांव के ही एक ब्राह्मण से किसी बात को लेकर वाद विवाद हो गया।

देखते ही देखते बात इतनी बिगड़ गई कि उसने क्रोध में आकर उस ब्राह्मण की हत्या कर दी। जब उसका गुस्सा शांत हुआ तो उसे अपने किए गए पाप का एहसास हुआ। उस अपराध बोध से मुक्ति के लिए उसने उस ब्राह्मण का अंतिम संस्कार करना चाहा, लेकिन गांव के अन्य ब्राह्मणों ने उसे इसकी अनुमति नहीं दी।

उस ठाकुर पर ब्रह्म हत्या का दोष था। समय व्यतीत होने के साथ-साथ उसके मन पर ब्रह्म हत्या के दोष और आत्म ग्लानि का भार बढ़ने लगा। एक दिन उसकी मुलाकात एक ऋषि से हुई। उसने ब्रह्म हत्या की घटना बताई और उससे मुक्ति का उपाय पूछा। तब उस ऋषि मुनि ने उससे कहा कि ब्रह्म हत्या से मुक्ति के लिए तुमको सावन कृष्ण एकादशी यानि कामिका एकादशी का व्रत विधिपूर्वक करना चाहिए। भगवान विष्णु की कृपा से ही तुम ब्रह्म हत्या दोष से मुक्ति पा सकते हो। इससे तुम्हारे अन्य पाप भी मिट जाएंगे।

जब श्रावण कृष्ण एकादशी आई तो उस ठाकुर ने विधिपूर्वक कामिका एकादशी व्रत किया और भगवान विष्णु की पूजा की। रात्रि जागरण के समय वह भगवान विष्णु की मूर्ति के पास सो गया। स्वप्न में भगवान विष्णु ने उसे दर्शन दिए और उनकी कृपा से वह ब्रह्म हत्या दोष से मुक्त हो गया।

Sawan Shivratri 2026: सावन की शिवरात्रि पर रहेगा भद्रा का साया, जानें तारीख और क्या भद्रा में कर सकते हैं शिव-शंभु का जलाभिषेक

Sawan Shivratri 2026: इस समय भगवान शिव का अति प्रिय श्रावण मास चल रहा है। यूं तो, सावन के सभी दिन भगवान शिव का जलाभिषेक करने पर पुण्य मिलता है। लेकिन कुछ खास दिन ऐसे हैं, जब भगवान शिव की विशेष पूजा, उपवास और जलाभिषेक करने पर भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं। शिवरात्रि का दिन भी इनमें से एक है। वैसे तो, हिंदू कैलेंडर के हर माह में शिवरात्रि मनाई जाती है, लेकिन सावन में आने वाली शिवरात्रि तिथि का विशेष महत्व है। शिवरात्रि का पर्व श्रावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को किया जाता है।

इस साल यह पर्व 11 अगस्त को मनाया जाएगा। इस दिन सुबह से ही शिवालयों में शिव भक्तों की धूम रहेगी, कांवड़िये महादेव का जलाभिषेक करेंगे, कुछ लोग उपवास और विशेष पूजा या रुद्राभिषक का भी आयोजन करेंगे। पंचांग के अनुसार, माना जा रहा है कि इस साल शिवरात्रि पर भद्र लग रही है। ऐसे में श्रद्धालुओं के मन में सवाल उठ रहा है कि भद्रा काल में देवाधिदेव का जलाभिषेक किया जाएगा या नहीं? सावन शिवरात्रि की तिथि, शुभ मुहूर्त, जलाभिषेक का समय, भद्रा काल और पूजा विधि से जुड़ी संपूर्ण जानकारी नीचे दी गई है:

सावन शिवरात्रि 2026 तिथि

व्रत एवं पूजन तिथि : मंगलवार, 11 अगस्त 2026

चतुर्दशी तिथि प्रारंभ : 11 अगस्त 2026, प्रातः 04:43 AM

चतुर्दशी तिथि समाप्त : 12 अगस्त 2026, रात्रि 01:51 AM

भद्रा काल का समय

भद्रा का समय : 11 अगस्त 2026, प्रातः 04:56 AM से दोपहर 03:24 PM तक।

मान्यता : शास्त्रों के अनुसार भद्राकाल में शुभ या मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं, लेकिन भगवान शिव की पूजा, मंत्र जाप और भक्ति में भद्रा का दोष नहीं लगता। इसलिए भक्त पूरे दिन श्रद्धापूर्वक जलाभिषेक और पूजा-अर्चना कर सकते हैं।

जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त

आप पूरे दिन चतुर्दशी तिथि के दौरान जलाभिषेक कर सकते हैं। विशेष फलदाई मुहूर्त इस प्रकार हैं:

ब्रह्म मुहूर्त : प्रातः 05:23 AM से 06:00 AM

अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 12:06 PM से 12:58 PM

गोधूलि मुहूर्त : सायं 09:13 PM से 09:32 PM

निशिता काल (मुख्य मध्यरात्रि पूजा): 11-12 अगस्त की रात्रि 12:05 AM से 12:48 AM तक

चार प्रहर की पूजा का समय

प्रथम प्रहर : सायं 07:04 PM से रात्रि 09:45 PM

द्वितीय प्रहर : रात्रि 09:45 PM से मध्यरात्रि 12:26 AM

तृतीय प्रहर : मध्यरात्रि 12:26 AM से तड़के 03:07 AM (12 अगस्त)

चतुर्थ प्रहर : तड़के 03:07 AM से प्रातः 05:49 AM (12 अगस्त)

शिव पूजा विधि

  • सावन शिवरात्रि के दिन प्रातः स्नान के बाद स्वच्छ कपड़े पहनें और व्रत का संकल्प लें।
  • मंदिर या घर पर शिवलिंग पर गंगाजल व शुद्ध जल अर्पित करें। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शक्कर (पंचामृत) से अभिषेक करें।
  • शिवलिंग पर बेलपत्र (अखंडित), धतूरा, भांग, शमी पत्र, सफेद आंकड़े के फूल, चंदन और भस्म चढ़ाएं।
  • पूजा करते समय ॐ नमः शिवाय” या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते रहें।
  • अंत में धूप-दीप जलाकर शिव जी की आरती करें और सात्विक भोग या फल अर्पित करें।
  • शिवलिंग पर तुलसी के पत्ते, सिंदूर, रोली, हल्दी और केतकी के फूल न चढ़ाएं।

Sawan Second Somwar 2026: दूसरे सोमवार पर बन रहे प्रदोष व्रत समेत 7 शुभ संयोग, जानें किस समय किया जाएगा भगवान शिव का जलाभिषेक

Hariyali Amavasya 2026 Date: हरियाली अमावस्या पर गौरी और गजकेसरी योग का दुर्लभ संयोग, जानें सही तारीख और शुभ मुहूर्त

Hariyali Amavasya 2026 Date: हरियाली अमावस्या श्रावण मास में मनाई जाती है। यह पर्व भगवान शिव की भक्ति और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का विशेष अवसर है। सावन का महीना शिव जी को अति प्रिय है। ऐसे में हरियाली अमावस्या के दिन शिव-पार्वती की पूजा करने से सुख, समृद्धि और वैवाहिक जीवन में खुशहाली आती है। बारिश के इस मौसम में धरती पर चारों ओर हरियाली छा जाती है। इस दिन पौधे (जैसे नीम, पीपल, बरगद, तुलसी, आंवला आदि) लगाना बेहद शुभ माना जाता है और इसे पुण्य कर्म माना गया है। हरियाली अमावस्या को पितरों की शांति के लिए स्नान, दान और तर्पण करना बहुत फलदायी होता है।

हरियाली अमावस्या कब है ?

पंचांग के अनुसार, सावन मास की अमावस्या तिथि का आरंभ 11 अगस्त, मंगलवार के दिन रात में 1 बजकर 54 मिनट से होगा। वहीं, अगले दिन यानी 12 अगस्त, बुधवार को रात में 11 बजकर 7 मिनट तक अमावस्या तिथि व्याप्त रहेगी। उदया तिथि के अनुसार, 12 अगस्त के दिन हरियाली अमावस्या का व्रत व पितृकर्म करना शास्त्र सम्मत होगा। इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने के बाद दोपहर के समय पितरों की पूजा आदि कार्य किए जाते हैं।

हरियाली अमावस्या पर गौरी और गजकेसरी योग का संयोग

हरियाली अमावस्या के दिन पुष्य नक्षत्र का संयोग भी बन रहा है और साथ ही, इसी दिन चंद्रमा अपनी स्वराशि कर्क में रहेंगे। इसके चलते गौरी योग और गजकेसरी योग का शुभ संयोग भी बनेगा। इस शुभ संयोग में व्रत और पितृकर्म करने वाले श्रद्धालुओं के लिए हरियाली अमावस्या विशेष रूप से फलदायी रहने वाली है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन फल देने वाले वृक्ष लगाने से उत्तम फल प्राप्त होता है।

हरियाली अमावस्या शुभ मुहूर्त

सूर्योदय : सुबह 5 बजकर 48 मिनट पर

लाभ चौघड़िया : सुबह 5 बजकर 48 मिनट से लेकर 7 बजकर 27 मिनट तक

अमृत चौघड़िया : सुबह 7 बजकर 27 मिनट से लेकर 9 बजकर 7 मिनट तक

शुभ चौघड़िया : सुबह 10 बजकर 46 मिनट से लेकर दोपहर के 12 बजकर 26 मिनट तक

लाभ चौघड़िया : शाम को 5 बजकर 24 मिनट से लेकर 7 बजकर 3 मिनट तक

हरियाली अमावस्या 2026 पूजा विधि

स्नान व संकल्प : सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करें या घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।

शिव पूजन : शिवलिंग पर जल, दूध, शहद, बेलपत्र, धतूरा और सफेद फूल अर्पित करें। “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।

वृक्षारोपण : घर के आंगन या किसी सार्वजनिक स्थान/बगीचे में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं।

पीपल पूजा : पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं और सरसों के तेल का दीपक जलाकर परिक्रमा करें।

दान-पुण्य : गरीबों या जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या फल का दान करें।