Sawan Amavasya 2026 Date: हरियाली अमावस्या पर पुष्य नक्षत्र में होगा स्नान-दान, जानें तारीख और पितरों को तर्पण देने का समय

Sawan Amavasya 2026 Date: सावन के महीने का हिंदू धर्म में विशेष स्थान है। यह भगवान विष्णु के चार माह की योगनिद्रा में जानें के बाद पहला हिंदू माह होता है। इस अवधि में भगवान शिव सृष्टि का कार्यभार संभालते हैं। सावन भगवान शिव का प्रिय माह है। इस माह में आने वाली अमावस्या को हरियाली अमावस्या कहते हैं, क्योंकि इस समय चारों तरफ हरियाली छायी रहती है और मानसून की फुहारों से वातावरण सराबोर रहता है।

हरियाली अमावस्या के दिन गंगा आदि पवित्र नदियों में स्नान और उसके बाद दान करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन स्नान करने से पापों से मुक्ति मिलती है और पुण्य की प्राप्ति होती है। अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित होती है। इसलिए हरियाली अमावस्या पर तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करने से पितृ प्रसन्न होते हैं। इस दिन पितृ दोष से मुक्ति के लिए विशेष उपाय भी किए जाते हैं। शाम के समय में पितरों के लिए दीपक जलाते हैं, ताकि पितृ लोक लौटते समय उनका मार्ग अंधकार में न रहे। इस साल की सावन अमावस्या पर पुष्य नक्षत्र रहेगा। आइए जानते हैं कि हरियाली अमावस्या कब है और पितृ तर्पण कब कर सकते हैं?

सावन अमावस्या 2026 तारीख

वैदिक पंचांग के आधार पर देखा जाए तो इस बार श्रावण कृष्ण अमावस्या तिथि 12 अगस्त को 01:52 बजे से शुरू हो रही है और यह 12 अगस्त को रात 11:06 बजे तक रहेगी। उदयातिथि को देखते हुए सावन अमावस्या 12 अगस्त बुधवार का है।

सावन अमावस्या 2026 स्नान-दान मुहूर्त

सावन अमावस्या पर स्नान और दान के लिए ब्रह्म मुहूर्त प्रात: 04 बजकर 23 ए एम से लेकर प्रात: 05 बजकर 06 मिनट तक है। जो लोग ब्रह्म मुहूर्त में स्नान न कर पाएं, वे लोग सूर्योदय के बाद स्नान, दान कर सकते हैं। उस दिन लाभ-उन्नति मुहूर्त 05:49 ए एम से 07:28 ए एम तक और अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त 07:28 ए एम से 09:07 ए एम तक रहेगा। इन दोनों समयों में भी स्नान और दान किया जा सकता है। सावन अमावस्या पर साल का अंतिम सूर्य ग्रहण लगने वाला है।

सावन अमावस्या पर तर्पण कब करें?

सावन अमावस्या के दिन स्नान के बाद पितरों के लिए तर्पण कर सकते हैं। हाथ में जल, सफेद फूल और काले तिल लेकर कुशा की मदद से पितरों को तर्पण दे सकते हैं। तर्पण देने से पितर प्रसन्न होते हैं।

व्यतीपात योग और पुष्य नक्षत्र में सावन अमावस्या

इस साल की सावन अमावस्या पर व्यतीपात योग और पुष्य नक्षत्र का योग है। व्यतीपात योग प्रात:काल से लेकर दोपहर 3 बजकर 26 मिनट तक रहेगा, उसके बाद वरीयान् योग बनेगा। व्यतीपात योग में किसी नए या शुभ कार्य की शुरूआत नहीं करते हैं।

पुष्य नक्षत्र प्रात:काल से लेकर सुबह 7 बजकर 59 मिनट तक रहेगा, उसके बाद अश्लेषा नक्षत्र है। पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रों का राजा कहा जाता है। यह एक शुभ नक्षत्र है, इसमें आप शुभ कार्य कर सकते हैं, जिसमें सफलता प्राप्त होती है। स्थिर कार्य भी इस नक्षत्र में कर सकते हैं।

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Hariyali Amavasya 2026 Date: हरियाली अमावस्या पर गौरी और गजकेसरी योग का दुर्लभ संयोग, जानें सही तारीख और शुभ मुहूर्त

Hariyali Amavasya 2026 Date: हरियाली अमावस्या श्रावण मास में मनाई जाती है। यह पर्व भगवान शिव की भक्ति और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का विशेष अवसर है। सावन का महीना शिव जी को अति प्रिय है। ऐसे में हरियाली अमावस्या के दिन शिव-पार्वती की पूजा करने से सुख, समृद्धि और वैवाहिक जीवन में खुशहाली आती है। बारिश के इस मौसम में धरती पर चारों ओर हरियाली छा जाती है। इस दिन पौधे (जैसे नीम, पीपल, बरगद, तुलसी, आंवला आदि) लगाना बेहद शुभ माना जाता है और इसे पुण्य कर्म माना गया है। हरियाली अमावस्या को पितरों की शांति के लिए स्नान, दान और तर्पण करना बहुत फलदायी होता है।

हरियाली अमावस्या कब है ?

पंचांग के अनुसार, सावन मास की अमावस्या तिथि का आरंभ 11 अगस्त, मंगलवार के दिन रात में 1 बजकर 54 मिनट से होगा। वहीं, अगले दिन यानी 12 अगस्त, बुधवार को रात में 11 बजकर 7 मिनट तक अमावस्या तिथि व्याप्त रहेगी। उदया तिथि के अनुसार, 12 अगस्त के दिन हरियाली अमावस्या का व्रत व पितृकर्म करना शास्त्र सम्मत होगा। इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने के बाद दोपहर के समय पितरों की पूजा आदि कार्य किए जाते हैं।

हरियाली अमावस्या पर गौरी और गजकेसरी योग का संयोग

हरियाली अमावस्या के दिन पुष्य नक्षत्र का संयोग भी बन रहा है और साथ ही, इसी दिन चंद्रमा अपनी स्वराशि कर्क में रहेंगे। इसके चलते गौरी योग और गजकेसरी योग का शुभ संयोग भी बनेगा। इस शुभ संयोग में व्रत और पितृकर्म करने वाले श्रद्धालुओं के लिए हरियाली अमावस्या विशेष रूप से फलदायी रहने वाली है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन फल देने वाले वृक्ष लगाने से उत्तम फल प्राप्त होता है।

हरियाली अमावस्या शुभ मुहूर्त

सूर्योदय : सुबह 5 बजकर 48 मिनट पर

लाभ चौघड़िया : सुबह 5 बजकर 48 मिनट से लेकर 7 बजकर 27 मिनट तक

अमृत चौघड़िया : सुबह 7 बजकर 27 मिनट से लेकर 9 बजकर 7 मिनट तक

शुभ चौघड़िया : सुबह 10 बजकर 46 मिनट से लेकर दोपहर के 12 बजकर 26 मिनट तक

लाभ चौघड़िया : शाम को 5 बजकर 24 मिनट से लेकर 7 बजकर 3 मिनट तक

हरियाली अमावस्या 2026 पूजा विधि

स्नान व संकल्प : सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करें या घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।

शिव पूजन : शिवलिंग पर जल, दूध, शहद, बेलपत्र, धतूरा और सफेद फूल अर्पित करें। “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।

वृक्षारोपण : घर के आंगन या किसी सार्वजनिक स्थान/बगीचे में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं।

पीपल पूजा : पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं और सरसों के तेल का दीपक जलाकर परिक्रमा करें।

दान-पुण्य : गरीबों या जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या फल का दान करें।

Jyeshtha Purnima 2026: जून में इस दिन होगी ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा, जानें सही तारीख, समय और शुभ मुहूर्त

Jyeshtha Purnima 2026: हिंदू कैलेंडर के अनुसार, पूरे साल में 12 पूर्णिमा तिथियां आती हैं। मुख्य रूप से यह तिथि माता लक्ष्मी को समर्पित है और माना जाता है कि इस दिन मां अपने भक्तों का हाल जानने के लिए स्वयं धरती पर आती हैं। इस दिन चंद्रमा की पूजा का भी विशेष महत्व है। पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपने पूरे स्वरूप में सभी 16 कलाओं से युक्त होते हैं। इसलिए पूर्णिमा की रात को चंद्रमा की पूजा और उन्हें अर्घ्य देने से चंद्र दोष में राहत मिलती है। पूर्णिमा तिथि पर सत्यनारायण की कथा कहना या सुनना बहुत शुभ माना जाता है।

इस साल ज्येष्ठ माह में अधिक माह लगा था, जिसकी पूर्णिमा 31 मई 2026 को थी। इस वजह से बहुत से भक्त भ्रम में हैं कि अब जो पूर्णिमा आ रही है, वो किस माह की है। इन सभी जातकों की जानकारी के लिए बता दें, वो ज्येष्ठ अधिक मास की पूर्णिमा थी और अब जो आएगी वो शुद्ध ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा होगी। ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि इसी दिन देश के कुछ हिस्सों में वट पूर्णिमा का व्रत किया जाता है। इसी दिन कबीर दास जयंती और बटुक भैरव जयंती भी मनाई जाती है। आइए जानें इस साल ज्येष्ठ पूर्णिमा किस दिन होगी?

ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि और समय

वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा तिथि का समय कुछ इस प्रकार है :

पूर्णिमा तिथि प्रारंभ : 29 जून 2026 को सुबह 03:06 बजे से

पूर्णिमा तिथि समाप्त : 30 जून 2026 को सुबह 05:26 बजे तक

उदयातिथि के अनुसार : 29 जून 2026 (सोमवार) को ही मुख्य पर्व और व्रत रखा जाएगा।

ज्येष्ठ पूर्णिमा 2026 के शुभ मुहूर्त

इस विशेष दिन पर पूजा और शुभ कार्यों के लिए निम्नलिखित मुहूर्त बेहद उत्तम रहेंगे:

ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 04:06 बजे से 04:46 बजे तक (स्नान के लिए सर्वोत्तम)

अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 11:57 बजे से दोपहर 12:52 बजे तक

गोधूलि मुहूर्त : शाम 07:22 बजे से शाम 07:42 बजे तक

अमृत काल (रात्रि): रात 08:53 बजे से रात 10:40 बजे तक

चंद्रोदय का समय

पूर्णिमा के दिन चंद्र देव की पूजा और उन्हें अर्घ्य देने का विशेष महत्व होता है।

चंद्रोदय का समय : 29 जून 2026 को शाम 07:16 बजे होगा।

भद्रा का समय

इस दिन भद्रा का साया भी रहेगा, जिसमें शुभ व मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं:

भद्रा प्रारंभ : 29 जून को सुबह 05:26 बजे से

भद्रा समाप्त : शाम 04:16 बजे तक

ज्येष्ठ पूर्णिमा पर जरूर करें ये 3 काम

  • ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा के साथ-साथ सत्यनारायण भगवान की कथा सुनने से घर में सुख-समृद्धि आती है।
  • इस दिन गर्मी से राहत देने वाली वस्तुएं जैसे- छाता, तरबूज, पानी से भरा घड़ा, पंखा और अन्न-वस्त्र का दान करना अनंत पुण्यदायी माना जाता है।
  • शाम के समय चंद्रोदय के बाद तांबे या चांदी के पात्र में जल, दूध, और थोड़े से अक्षत मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें। इसके बाद “ॐ सोमाय नमः” या “ॐ क्षीरोदार्णव सम्भवाय अत्रिममुद्भव। सोमन्गृहाण सद्भावं गृहाणार्ग्यं नमो नमः।। मंत्र का जाप करें।

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Jyeshtha Purnima 2026: कब किया जाएगा ज्येष्ठ पूर्णिमा का व्रत, जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Jyeshtha Purnima 2026: पूर्णिमा तिथि पर चंद्रमा अपनी पूर्ण अवस्था में 16 कलाओं से युक्त होते हैं। माना जाता है कि इस दिन माता लक्ष्मी धरती पर अपने भक्तों का हाल जानने के लिए आती हैं। साथ ही इस दिन सत्यनारायण भगवान की कथा सुनने का भी विधान है। पूरे साल में 12 पूर्णिमा तिथियां आती हैं। लेकिन अधिक मास लगने से इनकी संख्या 13 हो जाती है। इस साल ज्येष्ठ माह में अधिक मास लगने से 31 मई 2026 को ज्येष्ठ अधिक मास की पूर्णिमा का व्रत किया गया था। अब शुद्ध ज्येष्ठ माह का शुक्ल पक्ष चल रहा है और इसका समापन ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन होगा।

हिंदू पंचांग के अनुसार, इस दिन का विशेष धार्मिक महत्व है। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की इस पूर्णिमा तिथि पर पवित्र नदियों में स्नान, दान और भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की पूजा का विधान है। इसी दिन शादीशुदा महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए वट सावित्री व्रत भी रखती हैं और बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूर्णिमा तिथि पर चंद्रमा को अर्घ्य देने और उनकी पूजा करने से चंद्र दोष में राहत मिलती है। आइए जानें इस साल ज्येष्ठ पूर्णिमा का व्रत किस दिन किया जाएगा

ज्येष्ठ पूर्णिमा 2026: तिथि और समय

ज्येष्ठ पूर्णिमा वर्ष 2026 में 29 जून को मनाई जाएगी।

पूर्णिमा तिथि प्रारंभ : 29 जून 2026 को सुबह 3:06 बजे

पूर्णिमा तिथि समाप्त : 30 जून 2026 को सुबह 5:26 बजे

चंद्रोदय का समय : 29 जून को शाम 7:16 बजे

ज्येष्ठ पूर्णिमा 2026 के शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 4:06 बजे से 4:46 बजे तक

प्रातः संध्या : सुबह 4:26 बजे से 5:26 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त : सुबह 11:57 बजे से दोपहर 12:52 बजे तक

विजय मुहूर्त : दोपहर 2:44 बजे से 3:40 बजे तक

गोधूलि मुहूर्त : शाम 7:22 बजे से 7:42 बजे तक

सायं संध्या : शाम 7:23 बजे से 8:23 बजे तक

अमृत काल : रात 8:53 बजे से 10:40 बजे तक

ज्येष्ठ पूर्णिमा पूजा विधि

पवित्र स्नान : ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करें। यदि ऐसा संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करें।

संकल्प : स्नान के बाद साफ या सफेद रंग के वस्त्र धारण करें और हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।

मुख्य पूजा : पूजा स्थान पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। उन्हें पीले फूल, पीले फल, अक्षत, चंदन और भोग अर्पित करें।

सत्यनारायण कथा : इस दिन भगवान सत्यनारायण की कथा पढ़ना या सुनना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

अर्घ्य और दान : शाम के समय चंद्रमा के उदय होने पर कच्चे दूध में गंगाजल मिलाकर चंद्रदेव को अर्घ्य दें। इसके बाद ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को अपनी क्षमता के अनुसार तिल, कपड़े, अन्न या धन का दान करें।

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