सावन मास में अयोध्या में श्रद्धालुओं का सैलाब, अब तक 35 लाख से ज्यादा लोग पहुंचे

सावन मास में अयोध्या में श्रद्धालुओं का सैलाब, अब तक 35 लाख से ज्यादा लोग पहुंचे

Shravan month Ayodhya Ramlala Darshan: श्रावण मास में श्रीराम की पावन नगरी अयोध्या धाम में आस्था और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। देश के विभिन्न राज्यों एवं जनपदों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु अयोध्या पहुंचकर श्री रामलला के दर्शन-पूजन के साथ ही प्रमुख मंदिरों में पूजा-अर्चना कर रहे हैं तथा भगवान शिव के मंदिरों में जलाभिषेक कर रहे हैं। श्रावण मास के दौरान अब तक 35 लाख से अधिक श्रद्धालु अयोध्या धाम पहुंचकर दर्शन-पूजन कर चुके हैं।

 

इस वर्ष श्री रामलला के दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भी लगातार वृद्धि हो रही है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार 10 प्रतिशत से अधिक श्रद्धालुओं ने श्री रामलला के दर्शन किए हैं। प्रत्येक शनिवार एवं रविवार को भी एक लाख से अधिक श्रद्धालु अयोध्या धाम पहुंच रहे हैं।

 

श्रावण मास के प्रथम सोमवार को लगभग 3 लाख श्रद्धालुओं ने अयोध्या पहुंचकर दर्शन-पूजन किया, जबकि द्वितीय सोमवार को श्रद्धालुओं की संख्या बढ़कर लगभग 6 लाख तक पहुंच गई। लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए जिला प्रशासन एवं पुलिस द्वारा भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा, यातायात एवं श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर व्यापक स्तर पर व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।

भीड़ प्रबंधन एवं यातायात व्यवस्था पर विशेष फोकस

जिला प्रशासन द्वारा प्रमुख मंदिरों, घाटों एवं भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में लगातार निगरानी की जा रही है। श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन के लिए यातायात व्यवस्था को व्यवस्थित रखने के साथ ही आवश्यकता के अनुसार रूट डायवर्जन, बैरिकेडिंग एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। भीड़ के दबाव वाले क्षेत्रों में अधिकारियों एवं पुलिस बल की तैनाती कर स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। इसके लिए उच्च अधिकारी स्वयं रात्रि में भी मेला क्षेत्र का भ्रमण कर स्थिति का अवलोकन कर रहे है।

 

श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पेयजल, चिकित्सा, स्वच्छता, शौचालय, प्रकाश एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। घाटों एवं प्रमुख धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था को भी सुदृढ़ रखा गया है।

नोटों की गिनती के लिए नई व्यवस्था

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर मे विगत दिनों हुए चढ़ावा व दान चोरी की घटना ने सभी को हिला कर रख दिया हालांकि जांच अभी चल रही है। दोषी पाए गए आरोपियों को रिमांड पर लिया जा चुका है। इस बीच, SBI प्रबंधन राम मंदिर में नोटों की गिनती के लिए अपनी व्यवस्था मे बड़ा परिवर्तन करते हुए सेना के सेवानिवृत 10 कर्मियों का चुनाव किया है साथ ही इनका एक प्रभारी भी नियुक्त किया गया है।

 

वहीं दूसरी तरफ राम मंदिर में सिक्योरिटी सर्विस की सेवा समाप्ति के लिए सरकूलर जारी कर दिया गया है। जानकारी दे दें कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर ने दान व चढ़ावे चोरी की घटना के बाद SBI प्रबंधन ने सेक्युरिटी सेवा की समाप्ति के लिए एक सरकूलर भी जारी कर दिया है क्योंकि जेल मे बंद आठ आरोपियों मे से छह आरोपी इसी सिक्योरिटी एजेंसी के ही हैं। 

चलो बुलावा आया है! सावन में ऐसे बनाएं 12 ज्योतिर्लिंग दर्शन का परफेक्ट प्लान

सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की भक्ति और आस्था के लिए खास माना जाता है। इस महीने में देशभर के 12 ज्योतिर्लिंगों में दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ होती है। हर ज्योतिर्लिंग की अपनी अलग महिमा और धार्मिक महत्व होता है, जहां सावन में जलाभिषेक और पूजा-अर्चना का विशेष महत्व होता है। ऐसे ही है ये ज्योतिर्लिंग जहां सावन में भक्तों की धूम मची होती है:

Somnath Jyotirlinga (सोमनाथ ज्योतिर्लिंग) – गुजरात

Somnath Temple:हवा में तैरता था शिवलिंग और 8 करोड़ साल पुराना है मंदिर, क्या है सोमनाथ मंदिर का रहस्य? - Somnath Temple Facts A Jyotirlinga Full Of Miracles And Mysteries Somnath Temple -

सावन में सोमनाथ मंदिर में सुबह से ही भक्तों की लाइन लग जाती है। यहां रुद्राभिषेक, शिव आरती और मंत्र जाप के साथ सावन सोमवार का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है।

Mahakaleshwar Jyotirlinga (महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग) – उज्जैन, मध्य प्रदेश

Somnath Temple Shivling Images HD | First Jyotirlinga Wallpapers

सावन में बाबा महाकाल की भस्म आरती और श्रृंगार दर्शन भक्त करते हैं। हर सोमवार को भगवान महाकाल की सवारी निकाली जाती है।

Kedarnath Jyotirlinga (केदारनाथ ज्योतिर्लिंग) – उत्तराखंड

केदारनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर, रुद्रप्रयाग (उत्तराखंड) | दर्शन जानकारी | Reviving Cultures

सावन में केदारनाथ धाम में शिव भक्त हर-हर महादेव के जयकारों के साथ पूजा करते हैं। मंदिर में अभिषेक और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। हिमालय की गोद में बसे इस पवित्र धाम में सावन में ऊर्जा और भक्ति का माहौल देखने को मिलता है।

Kashi Vishwanath Jyotirlinga (काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग) – वाराणसी, उत्तर प्रदेश

काशी विश्वनाथ, केदारनाथ और बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग | भारत के 12 ज्योतिर्लिंग: शिवभक्तों के लिए पवित्र यात्रा – Sadhana Shop

सावन में काशी विश्वनाथ मंदिर में कांवड़ियों और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहती है। भक्त गंगाजल से बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक करते हैं। सावन सोमवार के दिन यहां आरती और पूजा में शामिल होने के लिए देशभर से भक्त पहुंचते हैं।

Trimbakeshwar Jyotirlinga (त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग) – नासिक, महाराष्ट्र

काशी विश्वनाथ मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है - A Great Hindu Temple kashi vishvanath temple-Varanasi

सावन में यहां रुद्र पूजा, अभिषेक और मंत्रों का जाप किया जाता है। भक्त भगवान शिव से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। गोदावरी नदी के उद्गम स्थल के कारण सावन में इस धाम का महत्व और भी बढ़ जाता है।

Baidyanath Jyotirlinga (बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग) – देवघर, झारखंड

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सावन में बैद्यनाथ धाम में कांवड़ यात्रा की धूम रहती है। भक्त दूर-दूर से गंगाजल लाकर बाबा का जलाभिषेक करते हैं। सावन के पूरे महीने मंदिर परिसर में शिव भक्तों की आस्था और भक्ति का अनोखा रूप दिखाई देता है।

Rameshwaram Jyotirlinga (रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग) – तमिलनाडु

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सावन में रामेश्वरम मंदिर में विशेष पूजा और अभिषेक होते हैं। भक्त पवित्र कुंडों में स्नान कर शिव आराधना करते हैं। समुद्र किनारे स्थित यह ज्योतिर्लिंग सावन में धार्मिक आस्था और शांति का खास केंद्र बन जाता है।

Nageshwar Jyotirlinga (नागेश्वर ज्योतिर्लिंग) – गुजरात

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर - स्थान, वास्तुकला, तस्वीरें

सावन में मंदिर में रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र का जाप किया जाता है। भक्त भगवान शिव जी से आशीर्वाद लेते है और प्रार्थना करते हैं। सावन में यहां भक्तों की भीड़ और शिव भक्ति की धूम देखने लायक होता है।

Bhimashankar Jyotirlinga (भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग) – महाराष्ट्र

Gallery - Jyotirlinga Bhimashankar

सावन में यहां शिव भक्तों की लंबी लाइन लगती हैं। पूजा, आरती और भक्ति कार्यक्रम किए जाते हैं। हरियाली से घिरे इस धाम में सावन के दौरान श्रद्धालु शिव भक्ति में नजर आते हैं।

Grishneshwar Jyotirlinga (घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग) – महाराष्ट्र

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर, संभाजीनगर (Maharashtra) | दर्शन जानकारी | Reviving Cultures

सावन के महीने में मंदिर को सजाया जाता है और भक्त जलाभिषेक व पूजा करके भगवान शिव का आशीर्वाद लेते हैं। सावन सोमवार के दिन यहां दर्शन और पूजा का महत्व और भी बढ़ जाता है।

Omkareshwar Jyotirlinga (ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग) – मध्य प्रदेश

सावन ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग विशेष! उत्तम स्वास्थ्य, नज़र दोष और नकारात्मक ऊर्जाओं से रक्षा के लिए भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करें।

सावन में नर्मदा नदी के किनारे स्थित ओंकारेश्वर में विशेष आरती और धार्मिक आयोजन होते हैं। भक्त नर्मदा जल से शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। नर्मदा तट पर होने वाली शिव आरती भक्तों को आध्यात्म की अनुभूति देती है।

Mallikarjuna Jyotirlinga (मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग) – आंध्र प्रदेश

ऋग्वेद में आया सोमनाथ मंदिर का जिक्र, चंद्रमा से सीधा कनेक्शन; जानें कैसे बना ज्योतिर्लिंग

सावन में मंदिर में विशेष श्रृंगार, पूजा और अभिषेक किए जाते हैं। भक्त शिव-पार्वती की आराधना कर मनोकामनाएं मांगते हैं। सावन के दौरान यह धाम भगवान शिव और माता पार्वती की भक्ति का प्रमुख केंद्र बन जाता है।

Kanwar Yatra 2026: कांवड़ यात्रा से पहले दिल्ली में सख्ती! इन रूट पर मीट की दुकानों को बंद करने के आदेश, MCD ने सभी 12 जोन को दिए निर्देश

Kanwar Yatra 2026: श्रावण मास की शुरुआत के साथ ही आज यानी गुरुवार (30 जुलाई) से विश्व की सबसे बड़ी धार्मिक यात्राओं में शामिल कांवड़ यात्रा शुरू हो चुकी है। इस दौरान विभिन्न राज्यों से करोड़ों शिवभक्त गंगाजल लेने के लिए उत्तराखंड के हरिद्वार और आसपास के क्षेत्रों में पहुंचेंगे। इस बीच, कांवड़ यात्रा शुरू होने से पहले दिल्ली नगर निगम (MCD) ने बड़ा फैसला लेते हुए सभी 12 जोनों को कांवड़ यात्रा रूट्स और कांवड़ शिविरों के आसपास संचालित अवैध मीट की दुकानों को बंद कराने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही लाइसेंस वाले मीट की दुकानों की भी जांच की जाएगी। लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारियों के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी में 30 जुलाई से 11 अगस्त तक 308 कांवड़ शिविर लगाए जाएंगे। इसे देखते हुए एमसीडी ने सभी नागरिक सुविधाओं की तैयारियां यात्रा शुरू होने से पहले पूरी करने के निर्देश जारी किए हैं। अधिकारियों ने बताया कि MCD ने अधिकारियों से यात्रा से पहले सभी सिविक इंतजाम पूरे करने को भी कहा है, जिसके दौरान 30 जुलाई से 11 अगस्त तक पूरे देश में 308 कांवड़ कैंप चलने वाले हैं।

कांवड़ कैंप साइट्स से अतिक्रमण हटाने के आदेश

एक ऑफिस मेमोरेंडम में सभी जोनल डिप्टी कमिश्नरों को यह पक्का करने का आदेश दिया गया है कि तीर्थयात्रा शुरू होने से पहले पहचाने गए कांवड़ कैंप साइट्स से अतिक्रमण हटा दिया जाए। मेमोरेंडम में कहा गया है कि MCD को यात्रा से काफी पहले कैंप साइट्स से अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। जोनल अधिकारियों को पहले ही पहचानी गई जगहों की जानकारी दे दी गई है। जबकि जरूरत पड़ने पर और कैंप लगाने की भी इजाजत दी जा सकती है।

सिविक बॉडी ने अधिकारियों को यह पक्का करने का निर्देश दिया है कि यात्रा के रास्तों पर या कांवड़ कैंप के आस-पास कोई भी बिना इजाजत या बिना लाइसेंस वाली मीट की दुकान न चले। यह भी कहा गया है कि अगर लाइसेंस वाली मीट की दुकानें अपने लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन करती पाई जाती हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

साफ-सफाई के आदेश

सख्ती बरतने के अलावा, MCD ने सभी जोन से कैंप साइट और आस-पास के इलाकों में बड़े पैमाने पर सफाई अभियान चलाने को कहा है। इनमें गहरी सफाई, उगी हुई घास-फूस को हटाना और रेगुलर कचरा इकट्ठा करना शामिल है। अधिकारियों ने कहा कि यात्रा के दौरान चौबीसों घंटे सफाई बनाए रखने के लिए सफाई कर्मचारी और मशीनरी तीन शिफ्ट में तैनात रहेंगी। हर साल आयोजित होने वाली कांवड़ यात्रा में शिवभक्त सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय कर हरिद्वार पहुंचते हैं। यहां से गंगाजल लेकर अपने गांव या शहर के शिवालयों में भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं।

चार करोड़ से अधिक कांवड़ियों के हरिद्वार पहुंचने की उम्मीद

अखाड़ा परिषद और मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत रविंद्रपुरी ने बताया कि भगवान शिव को जल अत्यंत प्रिय है। इसी कारण शिवभक्त हरिद्वार से गंगाजल ले जाकर अपने-अपने शिवालयों में उनका जलाभिषेक करते हैं। अधिकारियों के अनुसार, लगभग पखवाड़े भर चलने वाली इस यात्रा के दौरान चार करोड़ से अधिक कांवड़ियों के हरिद्वार पहुंचने का अनुमान है। इसे देखते हुए प्रशासन ने उनकी सुरक्षा और सुविधाओं के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं।

कांवड़ यात्रा की तैयारियों को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और वरिष्ठ अधिकारी कई बैठकें कर चुके हैं। यात्रा के शांतिपूर्ण और सुचारु संचालन के लिए पड़ोसी राज्यों के अधिकारियों के साथ भी समन्वय स्थापित किया गया है। हरिद्वार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) नवनीत सिंह ने बताया कि कांवड़ मेले को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन और पुलिस पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए अन्य जिलों से भी अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

एसएसपी ने बताया कि कांवड़ मेले के दौरान पहली बार सोशल मीडिया पर निगरानी के लिए साइबर कमांडो तैनात किए जाएंगे। ये भ्रामक, फर्जी और AI से तैयार किए गए वीडियो पर तत्काल कार्रवाई करेंगे। पुलिस अधिकारी ने बताया कि सामान्य भ्रामक वीडियो को 36 घंटे के भीतर, जबकि एआई से तैयार फर्जी वीडियो को लगभग तीन घंटे के भीतर हटाने की कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए सोशल मीडिया मंचों और संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित किया गया है। एसएसपी ने बताया कि दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को कांवड़ यात्रा के ट्रैफिक से अलग रखा जाएगा।

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हरिद्वार के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने बताया कि कांवड़ मेला शुरू होने से पहले ही बड़ी संख्या में शिवभक्त हरिद्वार पहुंचने लगे हैं। दीक्षित ने बताया कि कांवड़ मेले को लेकर सभी विभागों की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग को मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री रोकने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि 30 जुलाई से 11 अगस्त तक स्कूलों में अवकाश रहेगा। इस दौरान स्टूडेंट्स के लिए ऑनलाइन क्लासेस चलाने के निर्देश जारी किए गए हैं।

व्रत और मानसून का डबल असर! सावन में फिट रहने के लिए अपनाएं ये 7 आदतें

सावन (Sawan) हिंदू धर्म का सबसे पवित्र महीना माना जाता है, जिसमें भगवान शिव की पूजा, व्रत और धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व होता है। यह महीना मानसून (monsoon) के बीच आता है, जब मौसम सुहावना तो होता है, लेकिन इंफेक्शन, वायरल फीवर और पेट संबंधी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। कई लोग इस दौरान व्रत रखते हैं और डाइट में बदलाव करते हैं, इसलिए शरीर की सही देखभाल करना बेहद जरूरी हो जाता है। अगर कुछ आसान आदतों को अपनाया जाए, तो आप पूरे सावन भर खुद को फिट और एनर्जेटिक रख सकते हैं। आइए जानते हैं ऐसे जरूरी हेल्थ टिप्स:

Drink clean and boiled water (साफ और उबला हुआ पानी ही पिएं)

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सावन (Saawan)और बारिश के मौसम (monsoon season) में दूषित पानी से टाइफाइड (typhoid), डायरिया (diarrhea) और पेट के इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए हमेशा फिल्टर या उबला (boiled water) हुआ पानी ही पिएं। घर से बाहर निकलते समय अपनी पानी की बोतल साथ रखें और रोड साइड मिलने वाले खुले हुए खाने से बचें।

Eat fresh, light, and balanced meals (ताजा, हल्का और संतुलित भोजन)

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बारिश के मौसम में डाइजेस्टिव सिस्टम (digestive system) थोड़ा कमजोर हो सकता है। ऐसे में बासी, तला-भुना और ज्यादा मसालेदार भोजन खाने से बचें। घर का ताजा खाना, मौसमी फल, दाल, हरी सब्जियां और हल्का भोजन शरीर को जरूरी पोषण देने के साथ इम्यूनिटी (immunity) भी मजबूत रखने में मदद करता है।

Prevent nutritional deficiencies (व्रत में शरीर में पोषण की कमी न होने दें)

सावन (Saawan) में कई लोग सोमवार का व्रत (fast) रखते हैं। ऐसे में सिर्फ भूखे रहने के बजाय फल, दूध, दही, मखाना, मेवे, नारियल पानी और पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ (adequate fluid) लें। इससे शरीर में एनर्जी बनी रहती है और कमजोरी, चक्कर या डिहाइड्रेशन जैसी प्रॉब्लम से बचाव होता है।

Yoga, Pranayama or light exercise (रोज योग, प्राणायाम या हल्की एक्सरसाइज)

बारिश के कारण बाहर टहलना संभव न हो, तब भी घर पर 20–30 मिनट योग, स्ट्रेचिंग (stretching) या प्राणायाम जरूर करें। इससे शरीर एक्टिव रहता है, ब्लड सर्कुलेशन (blood circulation) बेहतर होता है और इम्यूनिटी (immunity) मजबूत होती है। रेगुलर एक्सरसाइज मेंटल स्ट्रेस कम करने में भी मदद करता है।

Adequate Sleep and Rest (पर्याप्त नींद और शरीर का आराम)

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हेल्दी रहने के लिए अच्छी नींद उतनी ही जरूरी है जितना अच्छा खानपान (nutritious diet)। रोज 7–8 घंटे की नींद लेने से शरीर खुद को रिपेयर करता है और इम्यून सिस्टम मजबूत होती है। अगर आप व्रत रख रहे हैं या एक्टिविटीज में बिजी हैं, तो बीच-बीच में आराम करना भी जरूरी है, ताकि शरीर पर अधिक थकान न पड़े।

cleanliness and personal hygiene (साफ-सफाई और पर्सनल हाइजीन का ध्यान)

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बारिश के मौसम में बैक्टीरिया (Bacteria) और वायरस (viruses) तेजी से फैलते हैं। इसलिए खाना खाने से पहले और बाहर से आने के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोएं। गीले कपड़े ज्यादा देर तक न पहनें और पैरों को साफ व सूखा रखें, ताकि फंगल इंफेक्शन का खतरा कम हो।

Protect mosquitoes and infections (मच्छरों और इंफेक्शन से बचे)

This may contain: a blue vase sitting on top of a tile floor next to a potted plant

मानसून (monsoon) में जगह-जगह पानी जमा होने से मच्छरों की संख्या बढ़ जाती है, जिससे डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का खतरा रहता है। घर के आसपास पानी जमा न होने दें, पूरी बाजू के कपड़े पहनें और जरूरत पड़ने पर मच्छर भगाने वाली क्रीम या रिपेलेंट का इस्तेमाल करें।

Sawan 2026 Special: शुरू होने वाला है महादेव का प्रिय माह, जानें त्रिशूल से लेकर चांद और गंगा नदी तक शिव के हर चिह्न के हैं गहरे आध्यात्मिक अर्थ

Sawan 2026 Special: हिंदू कैलेंडर का पांचवां महीना सावन अब कुछ ही दिन दूर है। इस माह को देवाधिदेव महादेव का प्रिय मास माना जाता है। दुनियाभर के लाखों-करोड़ों शिवभक्त इस पूरे माह में शिवभक्ति में लीन रहते हैं। शिव की पूजा, उपवास के साथ-साथ भजन-कीर्तन भी करते हैं। शिव के प्रति अपनी अनन्य आस्था प्रकट करने के लिए बहुत से श्रद्धालु उनके प्रतीक चिह्न भी अपने साथ रखते हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि महादेव से जुड़े हर चिह्न सिर्फ उनके रूप का हिस्सा नहीं हैं, ये ज्ञान, संतुलन, साहस और भक्ति जैसे जरूरी जीवन के सबक दिखाते हैं। त्रिशूल और डमरू से लेकर चांद और गंगा नदी तक, हर प्रतीक के गहरे आध्यात्मिक अर्थ है।

त्रिशूल: त्रिशूल भगवान शिव का दिव्य अस्त्र है। माना जाता है कि इसके तीन कांटे बनाने, बचाने और नष्ट करने को दिखाते हैं। ये भूत, वर्तमान और भविष्य को भी दिखाते हैं। यह भक्तों को याद दिलाते हैं कि शिव समय से परे हैं।

डमरू : डमरू उस आवाज को दिखाता है जिससे माना जाता है कि सृष्टि की शुरुआत हुई है। यह बनाने, लय और जीवन के लगातार चलने वाले चक्र को दिखाता है, जो हमें याद दिलाता है कि बदलाव जीवन का एक स्वाभाविक हिस्सा है।

तीसरा नेत्र : भगवान शिव की तीसरी आंख ज्ञान, समझ और ऊंची चेतना का प्रतीक है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब शिव अपनी तीसरी आंख खोलते हैं, तो यह बुराई, अज्ञानता और नेगेटिविटी को खत्म कर देता है।

आधा चांद : शिव के सिर पर आधा चांद समय, शांति और भावनात्मक संतुलन का प्रतीक है। यह भक्तों को याद दिलाता है कि जैसे चांद अलग-अलग चरणों से गुजरता है, वैसे ही जिंदगी भी लगातार बदलती रहती है।

गंगा नदी : शिव की जटाओं से बहने वाली पवित्र गंगा नदी पवित्रता, जीवन और दया को दिखाती है। कहानी के अनुसार, शिव ने धरती पर पहुंचने से पहले इस शक्तिशाली नदी का ज़ोर कम करने के लिए इसे अपनी जटाओं में पकड़ लिया था।

गले में सांप : भगवान शिव के गले में कोबरा निडरता और डर और इच्छा पर काबू पाने का प्रतीक है। यह मुश्किल हालात में सजगता और शांत रहने की क्षमता को भी दिखाता है।

नीलकंठ : भगवान शिव का नीला कंठ समुद्र मंथन की कहानी से आया है, जब उन्होंने दुनिया को बचाने के लिए हलाहल विष पिया था। यह आत्म-बलिदान, हिम्मत और दूसरों की रक्षा करने का प्रतीक है।

विभूति : शिव के शरीर पर लगाई गई पवित्र राख भक्तों को याद दिलाती है कि दुनिया की हर चीज कुछ समय के लिए है। यह विनम्रता, वैराग्य और आध्यात्मिक विकास पर ध्यान देने के लिए बढ़ावा देती है।

बाघ की खाल : भगवान शिव को अक्सर बाघ की खाल पर बैठे हुए दिखाया जाता है, जो घमंड और बेकाबू इच्छाओं पर जीत का प्रतीक है। यह आत्म संतुलन से मिलने वाली ताकत को भी दिखाता है।

रुद्राक्ष की माला : माना जाता है कि रुद्राक्ष की माला भगवान शिव के आंसुओं से निकली है। ये शांति, भक्ति, सुरक्षा और आध्यात्मिक जागृति का प्रतीक हैं और भक्त इन्हें पूजा के दौरान बड़े पैमाने पर पहनते हैं।

नंदी : नंदी, भगवान शिव का वाहन, विश्वास, वफादारी, धैर्य और नेकी का प्रतीक है। यह ज्यादातर शिव मंदिरों में, नंदी शिवलिंग की ओर मुंह करके खड़े होते हैं, जो महादेव के प्रति अटूट भक्ति का प्रतीक है।

शिवलिंग : शिवलिंग भगवान शिव का सबसे पवित्र प्रतीक है। यह भगवान के अनंत और निराकार स्वरूप के साथ-साथ सृष्टि के अनंत चक्र और कॉस्मिक एनर्जी के मिलन को भी दिखाता है।

Aashadh 2026 Pradosh Vrat: आषाढ़ का अंतिम प्रदोष व्रत आज, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और प्रदोष काल पूजा विधि

इस सावन बरसने वाली है भोलेनाथ की असीम कृपा, बस जल चढ़ाते समय रखें इन बातों का ध्यान!

सावन (Sawan) का महीना भगवान शिव की पूजा के लिए सबसे शुभ माना जाता है। इस पूरे महीने भक्त शिवलिंग पर जल चढ़ाकर और विधि-विधान (rituals) से पूजा करके भोलेनाथ का आशीर्वाद लेते हैं। लेकिन कई लोगों को यह नहीं पता होता कि जल चढ़ाने का सही समय और पूजा के नियम क्या हैं। आइए जानते हैं सावन में भगवान शिव की पूजा से जुड़ी जरूरी बातें:

शिवलिंग (Shivling) पर जल चढ़ाने का सही समय

Shivling water offering benefits। शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं - News18 हिंदी

सावन में सुबह ब्रह्म मुहूर्त (Brahma Muhurat) से लेकर सूर्योदय के बाद तक का समय सबसे शुभ माना जाता है। अगर सुबह मंदिर नहीं जा सकते हैं, तो प्रदोष काल (Pradosh Kaal) (शाम) में भी भगवान शिव की पूजा की जा सकती है। पूजा करते समय “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है।

 

भगवान शिव को क्या चढ़ाएं?

Before Sawan Begins, Know The Right Way To Offer Belpatra On Shivling And Its Benefits | Spirituality News - News18

भगवान शिव को जल, गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद फूल, चंदन, अक्षत और मौसमी फल अर्पित किए जा सकते हैं। बेलपत्र चढ़ाते समय ध्यान रखें कि वह साफ और बिना कटे-फटे हों। श्रद्धा और सच्चे मन से चढ़ाया गया प्रसाद सबसे प्रिय माना जाता है।

 

 

सावन में पूजा के जरूरी नियम

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पूजा से पहले स्नान करके साफ कपड़े पहनें। शिवलिंग पर जल धीरे-धीरे अर्पित करें और पूजा के दौरान मन शांत रखें। बेलपत्र (Belpatra) चढ़ाते समय उसका चिकना हिस्सा शिवलिंग की ओर रखने की परंपरा मानी जाती है। पूजा के बाद शिव आरती और मंत्र जाप जरूर करें।

 

पूजा के दौरान किन बातों का रखें ध्यान?

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शिवलिंग पर हल्दी, सिंदूर, केतकी का फूल और तुलसी के पत्ते नहीं चढ़ाने चाहिए। पूजा में साफ-सफाई और शुद्धता का विशेष ध्यान रखें। अगर व्रत रखा है, तो दिनभर सात्विक भोजन करें और गलत आदतों से दूर रहें।

सावन में पूजा करने का महत्व

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मान्यता है कि सावन में सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस महीने की गई पूजा को विशेष फलदायी माना जाता है। इसलिए भक्त पूरे श्रद्धा भाव से शिव आराधना करते हैं।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य मान्य स्रोतों पर आधारित है। अलग-अलग जगहों और परंपराओं में पूजा के नियम अलग हो सकते हैं।

Sawan 2026 Mangla Gauri Vrat: इस साल सावन में कब-कब किया जाएगा मंगला गौरी व्रत? तरीख सहित जानें पूजा विधि और उद्यापन के नियम

Sawan 2026 Mangla Gauri Vrat: सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। पूरी दुनिया में शिव भक्त बेसब्री से इस माह के शुरू होने का इंतजार करते हैं। हिंदू कैलेंडर के इस पांचवें महीने में भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद पाने के लिए श्रद्धालु पूजा और उपवास करते हैं। सावन के महीने में सोमवार के अलावा मंगलवार का भी विशेष महत्व है। हिंदू धर्म में सावन के महीने में आने वाले सभी मंगलवार माता पार्वती के स्वरूप मां मंगला गौरी को समर्पित होते हैं। यह व्रत विवाहित महिलाएं अपने अखंड सौभाग्य, वैवाहिक सुख और पति की लंबी आयु के लिए रखती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं अच्छे वर की प्राप्ति के लिए इसे करती हैं। इस व्रत में व्रती को एक समय ही अन्न, बिना नमक या फलाहार ग्रहण करना चाहिए।

सावन 2026 मंगला गौरी व्रत की तारीखें

इस साल सावन मास में मंगला गौरी व्रत की तिथियां, पूजा विधि और उद्यापन नियम नीचे दिए गए हैं :

मंगला गौरी व्रत 2026 की तिथियां

साल 2026 में सावन के महीने में कुल 4 मंगला गौरी व्रत रखे जाएंगे :

पहला मंगला गौरी व्रत : 04 अगस्त 2026 सावन का प्रथम मंगलवार

दूसरा मंगला गौरी व्रत : 11 अगस्त 2026 सावन का द्वितीय मंगलवार

तीसरा मंगला गौरी व्रत : 18 अगस्त 2026 सावन का तृतीय मंगलवार

चौथा मंगला गौरी व्रत : 25 अगस्त 2026 सावन का चतुर्थ (अंतिम) मंगलवार

मंगला गौरी व्रत 2026 पूजा विधि

प्रातः काल की तैयारी : व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ या नए वस्त्र धारण करें। इसके बाद व्रत का संकल्प लें।

चौकी की स्थापना : पूजा घर में एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं। उस पर माता पार्वती और भगवान शिव की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।

पूजा सामग्री : माता रानी को रोली, चंदन, अक्षत, फल, फूल और माला अर्पित करें। मंगला गौरी व्रत में मां गौरी को 16 श्रंगार की वस्तुएं और 16 माला, 16 लड्डू या नैवेद्य अर्पित करने का विधान है।

दीपक प्रज्वलित करना : आटे से बना एक चौमुखी दीपक जलाएं, जिसमें 16 तार की बत्तियां या सूत हो।

कथा व आरती : मंगला गौरी व्रत कथा का पाठ करें या श्रवण करें। इसके बाद पार्वती चालीसा का पाठ करें और अंत में मां गौरी और भगवान शिव की आरती करके प्रसाद वितरित करें।

मंगला गौरी व्रत उद्यापन विधि

शास्त्रों के अनुसार, महिलाएं मंगला गौरी व्रत शादी के शुरुआती 5 वर्ष या फिर 16 मंगलवार तक रखती हैं और सावन के आखिरी मंगलवार को इसका उद्यापन करती हैं:

  • उद्यापन के दिन भी सुबह सामान्य व्रतों की तरह ही मां मंगला गौरी की पूरी श्रद्धा से पूजा करें। इस दिन पूरे परिवार के साथ हवन-यज्ञ किया जाता है।
  • उद्यापन के मुख्य नियम के तहत 16 सुहागन महिलाओं को आदरपूर्वक घर पर आमंत्रित किया जाता है।
  • इन सभी महिलाओं को प्रेमपूर्वक भोजन कराया जाता है और उन्हें सुहाग की सामग्री भेंट किया जाता है।
  • अंत में सुहागिन महिलाओं और घर के बुजुर्गों के पैर छूकर आशीर्वाद लिया जाता है, जिससे व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

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सावन में सोना खरीदने से पहले मुहूर्त के साथ रखें इन 5 बातों का ध्यान, वरना कर बैठेंगे ये गलती!

सावन (Sawan) का महीना भगवान शिव की भक्ति और पूजा के लिए सबसे खास माना जाता है। इस दौरान लोग सात्विक जीवन अपनाते हैं और कई धार्मिक नियमों का पालन करते हैं। इन्हीं मान्यताओं में एक धारणा यह भी है कि सावन में सोना (Gold) नहीं खरीदना चाहिए। लेकिन क्या यह बात शास्त्रों में लिखी गई है या सिर्फ एक परंपरा है? आइए जानते हैं इसके पीछे की वजह:

 

क्या शास्त्रों में सोना खरीदने की मनाही है?

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ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, किसी भी प्रमुख धर्मग्रंथ जैसे वेद, पुराण या अन्य शास्त्रों में सावन (Sawan)के महीने में सोना खरीदने पर स्पष्ट रोक नहीं बताई गई है। यानी अगर कोई व्यक्ति इस महीने सोना खरीदता है, तो इसे शास्त्रों के अनुसार अशुभ नहीं माना गया है। यह मान्यता अधिकतर लोक परंपराओं और सामाजिक विश्वासों से जुड़ी हुई है।

 

सावन में सोना न खरीदने की मान्यता क्यों बनी?

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पुराने समय में भारत कृषि प्रधान देश था। सावन के महीने में किसान खेती और बुआई में व्यस्त रहते थे, इसलिए उनकी बचत का बड़ा हिस्सा खेती के काम में खर्च हो जाता था। ऐसे समय में सोना जैसी महंगी चीज खरीदने से बचने की सलाह दी जाती थी। धीरे-धीरे यही बात एक परंपरा और मान्यता के रूप में प्रचलित हो गई।

 

 

सावन का आध्यात्मिक संदेश क्या है?

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सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति, तप, साधना और सादगी का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान लोगों को भौतिक सुख-सुविधाओं की बजाय पूजा, ध्यान और आत्मिक शांति पर ध्यान देने की प्रेरणा दी जाती है। इसलिए कई लोग इस महीने नई चीजें खरीदने के बजाय धार्मिक कार्यों में समय और धन लगाना बेहतर मानते हैं।

 

 

अगर सोना खरीदना हो तो क्या करें?

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अगर किसी जरूरी काम, शादी या निवेश (investment) के लिए सावन में सोना खरीदना जरूरी हो, तो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसमें कोई स्पष्ट मनाही नहीं है। हालांकि, कई लोग शुभ मुहूर्त देखकर ही खरीदारी करना पसंद करते हैं। अगर आपके मन में कोई संशय हो, तो किसी योग्य ज्योतिषी या पंडित से सलाह लेना बेहतर माना जाता है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारी पर आधारित है। किसी भी धार्मिक या ज्योतिष से जुड़े फैसले से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

सावन में सोना खरीदने से पहले मुहूर्त के साथ रखें इन 5 बातों का ध्यान, वरना कर बैठेंगे ये गलती!

सावन (Sawan) का महीना भगवान शिव की भक्ति और पूजा के लिए सबसे खास माना जाता है। इस दौरान लोग सात्विक जीवन अपनाते हैं और कई धार्मिक नियमों का पालन करते हैं। इन्हीं मान्यताओं में एक धारणा यह भी है कि सावन में सोना (Gold) नहीं खरीदना चाहिए। लेकिन क्या यह बात शास्त्रों में लिखी गई है या सिर्फ एक परंपरा है? आइए जानते हैं इसके पीछे की वजह:

क्या शास्त्रों में सोना खरीदने (Gold) की मनाही है?

ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, किसी भी प्रमुख धर्मग्रंथ जैसे वेद, पुराण या अन्य शास्त्रों में सावन (Sawan) के महीने में सोना खरीदने पर स्पष्ट रोक नहीं बताई गई है। यानी अगर कोई व्यक्ति इस महीने सोना खरीदता है, तो इसे शास्त्रों के अनुसार अशुभ नहीं माना गया है। यह मान्यता अधिकतर लोक परंपराओं और सामाजिक विश्वासों से जुड़ी हुई है।

सावन (Sawan) में सोना न खरीदने की मान्यता क्यों बनी?

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पुराने समय में भारत कृषि प्रधान देश था। सावन के महीने में किसान खेती और बुआई में व्यस्त रहते थे, इसलिए उनकी बचत का बड़ा हिस्सा खेती के काम में खर्च हो जाता था। ऐसे समय में सोना जैसी महंगी चीज खरीदने से बचने की सलाह दी जाती थी। धीरे-धीरे यही बात एक परंपरा और मान्यता के रूप में प्रचलित हो गई।

सावन का आध्यात्मिक संदेश क्या है?

सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति, तप, साधना और सादगी का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान लोगों को भौतिक सुख-सुविधाओं की बजाय पूजा, ध्यान और आत्मिक शांति पर ध्यान देने की प्रेरणा दी जाती है। इसलिए कई लोग इस महीने नई चीजें खरीदने के बजाय धार्मिक कार्यों में समय और धन लगाना बेहतर मानते हैं।

अगर सोना खरीदना हो तो क्या करें?

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अगर किसी जरूरी काम, शादी या निवेश (investment) के लिए सावन में सोना खरीदना जरूरी हो, तो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसमें कोई स्पष्ट मनाही नहीं है। हालांकि, कई लोग शुभ मुहूर्त देखकर ही खरीदारी करना पसंद करते हैं। अगर आपके मन में कोई संशय हो, तो किसी योग्य ज्योतिषी या पंडित से सलाह लेना बेहतर माना जाता है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारी पर आधारित है। किसी भी धार्मिक या ज्योतिष से जुड़े फैसले से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।