व्रत और मानसून का डबल असर! सावन में फिट रहने के लिए अपनाएं ये 7 आदतें

सावन (Sawan) हिंदू धर्म का सबसे पवित्र महीना माना जाता है, जिसमें भगवान शिव की पूजा, व्रत और धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व होता है। यह महीना मानसून (monsoon) के बीच आता है, जब मौसम सुहावना तो होता है, लेकिन इंफेक्शन, वायरल फीवर और पेट संबंधी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। कई लोग इस दौरान व्रत रखते हैं और डाइट में बदलाव करते हैं, इसलिए शरीर की सही देखभाल करना बेहद जरूरी हो जाता है। अगर कुछ आसान आदतों को अपनाया जाए, तो आप पूरे सावन भर खुद को फिट और एनर्जेटिक रख सकते हैं। आइए जानते हैं ऐसे जरूरी हेल्थ टिप्स:

Drink clean and boiled water (साफ और उबला हुआ पानी ही पिएं)

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सावन (Saawan)और बारिश के मौसम (monsoon season) में दूषित पानी से टाइफाइड (typhoid), डायरिया (diarrhea) और पेट के इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए हमेशा फिल्टर या उबला (boiled water) हुआ पानी ही पिएं। घर से बाहर निकलते समय अपनी पानी की बोतल साथ रखें और रोड साइड मिलने वाले खुले हुए खाने से बचें।

Eat fresh, light, and balanced meals (ताजा, हल्का और संतुलित भोजन)

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बारिश के मौसम में डाइजेस्टिव सिस्टम (digestive system) थोड़ा कमजोर हो सकता है। ऐसे में बासी, तला-भुना और ज्यादा मसालेदार भोजन खाने से बचें। घर का ताजा खाना, मौसमी फल, दाल, हरी सब्जियां और हल्का भोजन शरीर को जरूरी पोषण देने के साथ इम्यूनिटी (immunity) भी मजबूत रखने में मदद करता है।

Prevent nutritional deficiencies (व्रत में शरीर में पोषण की कमी न होने दें)

सावन (Saawan) में कई लोग सोमवार का व्रत (fast) रखते हैं। ऐसे में सिर्फ भूखे रहने के बजाय फल, दूध, दही, मखाना, मेवे, नारियल पानी और पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ (adequate fluid) लें। इससे शरीर में एनर्जी बनी रहती है और कमजोरी, चक्कर या डिहाइड्रेशन जैसी प्रॉब्लम से बचाव होता है।

Yoga, Pranayama or light exercise (रोज योग, प्राणायाम या हल्की एक्सरसाइज)

बारिश के कारण बाहर टहलना संभव न हो, तब भी घर पर 20–30 मिनट योग, स्ट्रेचिंग (stretching) या प्राणायाम जरूर करें। इससे शरीर एक्टिव रहता है, ब्लड सर्कुलेशन (blood circulation) बेहतर होता है और इम्यूनिटी (immunity) मजबूत होती है। रेगुलर एक्सरसाइज मेंटल स्ट्रेस कम करने में भी मदद करता है।

Adequate Sleep and Rest (पर्याप्त नींद और शरीर का आराम)

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हेल्दी रहने के लिए अच्छी नींद उतनी ही जरूरी है जितना अच्छा खानपान (nutritious diet)। रोज 7–8 घंटे की नींद लेने से शरीर खुद को रिपेयर करता है और इम्यून सिस्टम मजबूत होती है। अगर आप व्रत रख रहे हैं या एक्टिविटीज में बिजी हैं, तो बीच-बीच में आराम करना भी जरूरी है, ताकि शरीर पर अधिक थकान न पड़े।

cleanliness and personal hygiene (साफ-सफाई और पर्सनल हाइजीन का ध्यान)

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बारिश के मौसम में बैक्टीरिया (Bacteria) और वायरस (viruses) तेजी से फैलते हैं। इसलिए खाना खाने से पहले और बाहर से आने के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोएं। गीले कपड़े ज्यादा देर तक न पहनें और पैरों को साफ व सूखा रखें, ताकि फंगल इंफेक्शन का खतरा कम हो।

Protect mosquitoes and infections (मच्छरों और इंफेक्शन से बचे)

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मानसून (monsoon) में जगह-जगह पानी जमा होने से मच्छरों की संख्या बढ़ जाती है, जिससे डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का खतरा रहता है। घर के आसपास पानी जमा न होने दें, पूरी बाजू के कपड़े पहनें और जरूरत पड़ने पर मच्छर भगाने वाली क्रीम या रिपेलेंट का इस्तेमाल करें।

बरसात में कौन-सी सब्जियां खाएं और किनसे बनाएं दूरी? जानें एक्सपर्ट की सलाह

मानसून की पहली बारिश जहां तपती गर्मी से राहत देती है, वहीं ये मौसम सेहत के लिए कई नई चुनौतियां भी लेकर आता है। नमी बढ़ने के कारण बैक्टीरिया और फंगस तेजी से पनप सकते हैं, जिससे पेट की समस्या, संक्रमण और पाचन संबंधी परेशानियां बढ़ने लगती हैं। ऐसे में खानपान में थोड़ी सावधानी रखना बेहद जरूरी हो जाता है। खासकर सब्जियों का चुनाव करते समय ध्यान देना चाहिए, क्योंकि हर सब्जी बारिश के मौसम में शरीर के लिए फायदेमंद साबित नहीं होती।

आयुर्वेद भी इस मौसम में हल्के, ताजे और आसानी से पचने वाले भोजन को प्राथमिकता देने की सलाह देता है। सही सब्जियों का चयन और उन्हें अच्छी तरह साफ करके पकाना मानसून में स्वस्थ रहने का आसान तरीका हो सकता है।

पालक को दें थोड़े दिनों का ब्रेक

डॉ. नितिका कोहली के इंस्टाग्राम पोस्ट के अनुसार बारिश के मौसम में पालक खाने से पेट से जुड़ी समस्याओं और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए पालक का सूप, स्मूदी या पालक पनीर फिलहाल टालना बेहतर हो सकता है।

पत्तागोभी में छिप सकते हैं अनचाहे मेहमान

पत्तागोभी की परतों में बारिश के दौरान कीड़े या सूक्ष्म जीव छिपे होने की संभावना बढ़ जाती है। आयुर्वेद इसे भारी और ठंडी तासीर वाली सब्जी मानता है, जो पाचन शक्ति को कमजोर कर सकती है।

शिमला मिर्च भी बन सकती है परेशानी की वजह

नमी वाले मौसम में शिमला मिर्च जल्दी खराब हो सकती है और उसमें फंगस या कीट लगने का खतरा बढ़ जाता है। आयुर्वेद के मुताबिक इसकी ठंडी प्रकृति कुछ लोगों में गैस और एसिडिटी जैसी समस्याएं बढ़ा सकती है।

टमाटर हर मौसम में नहीं होता फायदेमंद

हालांकि टमाटर लगभग हर सब्जी का हिस्सा होता है, लेकिन मानसून में इसकी खट्टी तासीर एसिडिटी और पाचन संबंधी दिक्कतों को बढ़ा सकती है। आयुर्वेद इस मौसम में इसका सीमित सेवन करने की सलाह देता है।

फूलगोभी के पकौड़े खाने से पहले सोच लें

बरसात में फूलगोभी की ठंडी और अधिक पानी वाली प्रकृति पाचन अग्नि को कमजोर कर सकती है। इसलिए इसे कम मात्रा में या पूरी तरह पकाकर ही खाना बेहतर माना जाता है।

मशरूम में बढ़ सकता है संक्रमण का खतरा

मशरूम नमी वाली मिट्टी में उगते हैं और बारिश के दौरान इनमें बैक्टीरिया पनपने की संभावना अधिक रहती है। सही तरीके से साफ और पकाए बिना खाने पर फूड पॉइजनिंग या पेट की समस्या हो सकती है।

बैंगन खाते समय रखें अतिरिक्त सावधानी

बारिश के मौसम में बैंगन पर कीड़ों और बैक्टीरिया का हमला ज्यादा हो सकता है। कुछ लोगों में यह खुजली, एलर्जी या त्वचा संबंधी परेशानियां भी बढ़ा सकता है।

ये सब्जियां बरसात में हो सकती हैं बेहतर विकल्प

लौकी बन सकती है आपकी हेल्दी साथी

लौकी में पानी, फाइबर और जरूरी विटामिन भरपूर होते हैं, जो पाचन को बेहतर रखने और शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं। हालांकि इसे खरीदते समय कड़वी या खराब लौकी से बचें और हमेशा अच्छी तरह पकाकर ही खाएं।

खीरा खाना है तो पहले करें सही तैयारी

बारिश में खीरे की सतह पर कीटाणु जमा हो सकते हैं। इसे खाने से पहले 10–15 मिनट गुनगुने पानी में भिगोएं, अच्छी तरह धोएं, छिलका उतारें और फिर सेवन करें।

भिंडी बनाते समय न करें जल्दबाजी

भिंडी के अंदर छोटे कीड़े छिपे हो सकते हैं, इसलिए इसे लंबाई में काटकर अच्छी तरह जांचें। साफ पानी से धोकर पूरी तरह पकाने के बाद ही खाएं, ताकि बैक्टीरिया और फंगस का खतरा कम हो सके।

मानसून में याद रखें ये नियम

आयुर्वेद के अनुसार बारिश के मौसम में हल्का, ताजा, घर का बना और अच्छी तरह पका भोजन सबसे सुरक्षित माना जाता है। सब्जियों को अच्छी तरह धोना, साफ करना और पूरी तरह पकाकर खाना इस मौसम में संक्रमण और पाचन संबंधी समस्याओं से बचने का आसान तरीका है।

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