ना भिगोने की झंझट, ना चिपकने का डर! सिर्फ 15 मिनट में बनाए उपवास वाली परफेक्ट साबूदाना खिचड़ी

सावन के व्रत में साबूदाना खिचड़ी हर घर में पसंद की जाने वाली खास डिश है। लेकिन कई बार जल्दबाजी में साबूदाना भिगोना भूल जाते है। लेकिन कुकर ट्रिक से बिना लंबे समय तक भिगोए भी साबूदाना खिचड़ी को बिल्कुल खिली-खिली और स्वादिष्ट बनाया जा सकता है। कुछ आसान स्टेप्स फॉलो करके आप कम समय में व्रत के लिए परफेक्ट और टेस्टी साबूदाना खिचड़ी तैयार कर सकते हैं।

 सबसे पहले साबूदाना को 2–3 बार साफ पानी से अच्छी तरह धो लें, ताकि उसका स्टार्च निकल जाए। इसके बाद पानी पूरी तरह निकालकर साबूदाना को एक स्टील के डिब्बे में रखें। इसमें थोड़ा सा देसी घी, स्वादानुसार सेंधा नमक, चुटकी भर चीनी और थोड़ा सा पानी डालकर हल्के हाथ से मिला दें। इससे स्टीम होने के बाद साबूदाना का स्वाद और टेक्सचर अच्छा बनता है।

This may contain: a bowl filled with corn and garnished with cilantro on a table

कुकर में स्टीम

अब प्रेशर कुकर में थोड़ा पानी डालें और उसके अंदर साबूदाने वाला डिब्बा रख दें। चाहें तो साथ में दो आलू भी रख सकते हैं, ताकि वे भी एक साथ उबल जाएं। कुकर का ढक्कन बंद करें और मध्यम आंच पर 3 सीटी आने तक पकाएं। इसके बाद गैस बंद कर दें और कुकर का प्रेशर अपने आप निकलने दें। इस तरीके से साबूदाना बिना भिगोए भी अच्छी तरह पक जाता है।

ठंडे पानी की ट्रिक

स्टीम होने के बाद साबूदाना थोड़ा चिपचिपा लग सकता है। इसे छलनी में निकालकर ऊपर से ठंडा पानी डालें और बहुत हल्के हाथ से धो लें। यह आसान ट्रिक साबूदाने के दानों को अलग-अलग कर देती है, जिससे खिचड़ी बनाते समय वह चिपकती नहीं और बिल्कुल खिली-खिली बनती है।

 

तड़का लगाएं

अब एक कड़ाही में देसी घी गर्म करें और उसमें जीरा डालें। इसके बाद बारीक कटी हरी मिर्च, कद्दूकस किया हुआ अदरक और व्रत में खाते हैं तो थोड़ा बारीक कटा टमाटर डालकर हल्का भून लें। फिर उबले हुए आलू के टुकड़े डालें। अब तैयार किया हुआ साबूदाना, सेंधा नमक, दरदरी काली मिर्च, चुटकी भर चीनी और भुनी हुई मूंगफली डालकर हल्के हाथ से मिलाएं, ताकि दाने टूटें नहीं। खिचड़ी तैयार होने के बाद ऊपर से बारीक कटा हरा धनिया, थोड़ा नींबू का रस और चाहें तो भुना जीरा पाउडर छिड़क दें। इससे खिचड़ी का स्वाद और खुशबू दोनों बढ़ जाते हैं। ध्यान रखें कि खिचड़ी को ज्यादा देर तक न चलाएं, वरना साबूदाना टूट सकता है और चिपचिपा हो सकता है।

 

पौष्टिक आहार

साबूदाना शरीर को जल्दी एनर्जी देने वाला सोर्स है। जब इसमें मूंगफली, आलू और देसी घी मिलाया जाता है, तो यह ज्यादा पौष्टिक और पेट भरने वाला भोजन बन जाता है। इसलिए सावन, एकादशी या अन्य व्रत के दौरान यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ लंबे समय तक पेट भरा रखने में भी मदद करता है।

व्रत और मानसून का डबल असर! सावन में फिट रहने के लिए अपनाएं ये 7 आदतें

सावन (Sawan) हिंदू धर्म का सबसे पवित्र महीना माना जाता है, जिसमें भगवान शिव की पूजा, व्रत और धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व होता है। यह महीना मानसून (monsoon) के बीच आता है, जब मौसम सुहावना तो होता है, लेकिन इंफेक्शन, वायरल फीवर और पेट संबंधी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। कई लोग इस दौरान व्रत रखते हैं और डाइट में बदलाव करते हैं, इसलिए शरीर की सही देखभाल करना बेहद जरूरी हो जाता है। अगर कुछ आसान आदतों को अपनाया जाए, तो आप पूरे सावन भर खुद को फिट और एनर्जेटिक रख सकते हैं। आइए जानते हैं ऐसे जरूरी हेल्थ टिप्स:

Drink clean and boiled water (साफ और उबला हुआ पानी ही पिएं)

This may contain: several jars filled with different types of fruit and vegetables

सावन (Saawan)और बारिश के मौसम (monsoon season) में दूषित पानी से टाइफाइड (typhoid), डायरिया (diarrhea) और पेट के इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए हमेशा फिल्टर या उबला (boiled water) हुआ पानी ही पिएं। घर से बाहर निकलते समय अपनी पानी की बोतल साथ रखें और रोड साइड मिलने वाले खुले हुए खाने से बचें।

Eat fresh, light, and balanced meals (ताजा, हल्का और संतुलित भोजन)

Story pin image

बारिश के मौसम में डाइजेस्टिव सिस्टम (digestive system) थोड़ा कमजोर हो सकता है। ऐसे में बासी, तला-भुना और ज्यादा मसालेदार भोजन खाने से बचें। घर का ताजा खाना, मौसमी फल, दाल, हरी सब्जियां और हल्का भोजन शरीर को जरूरी पोषण देने के साथ इम्यूनिटी (immunity) भी मजबूत रखने में मदद करता है।

Prevent nutritional deficiencies (व्रत में शरीर में पोषण की कमी न होने दें)

सावन (Saawan) में कई लोग सोमवार का व्रत (fast) रखते हैं। ऐसे में सिर्फ भूखे रहने के बजाय फल, दूध, दही, मखाना, मेवे, नारियल पानी और पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ (adequate fluid) लें। इससे शरीर में एनर्जी बनी रहती है और कमजोरी, चक्कर या डिहाइड्रेशन जैसी प्रॉब्लम से बचाव होता है।

Yoga, Pranayama or light exercise (रोज योग, प्राणायाम या हल्की एक्सरसाइज)

बारिश के कारण बाहर टहलना संभव न हो, तब भी घर पर 20–30 मिनट योग, स्ट्रेचिंग (stretching) या प्राणायाम जरूर करें। इससे शरीर एक्टिव रहता है, ब्लड सर्कुलेशन (blood circulation) बेहतर होता है और इम्यूनिटी (immunity) मजबूत होती है। रेगुलर एक्सरसाइज मेंटल स्ट्रेस कम करने में भी मदद करता है।

Adequate Sleep and Rest (पर्याप्त नींद और शरीर का आराम)

Story pin image

हेल्दी रहने के लिए अच्छी नींद उतनी ही जरूरी है जितना अच्छा खानपान (nutritious diet)। रोज 7–8 घंटे की नींद लेने से शरीर खुद को रिपेयर करता है और इम्यून सिस्टम मजबूत होती है। अगर आप व्रत रख रहे हैं या एक्टिविटीज में बिजी हैं, तो बीच-बीच में आराम करना भी जरूरी है, ताकि शरीर पर अधिक थकान न पड़े।

cleanliness and personal hygiene (साफ-सफाई और पर्सनल हाइजीन का ध्यान)

This may contain: a woman washing tomatoes in a kitchen sink next to a window with potted plants

बारिश के मौसम में बैक्टीरिया (Bacteria) और वायरस (viruses) तेजी से फैलते हैं। इसलिए खाना खाने से पहले और बाहर से आने के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोएं। गीले कपड़े ज्यादा देर तक न पहनें और पैरों को साफ व सूखा रखें, ताकि फंगल इंफेक्शन का खतरा कम हो।

Protect mosquitoes and infections (मच्छरों और इंफेक्शन से बचे)

This may contain: a blue vase sitting on top of a tile floor next to a potted plant

मानसून (monsoon) में जगह-जगह पानी जमा होने से मच्छरों की संख्या बढ़ जाती है, जिससे डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का खतरा रहता है। घर के आसपास पानी जमा न होने दें, पूरी बाजू के कपड़े पहनें और जरूरत पड़ने पर मच्छर भगाने वाली क्रीम या रिपेलेंट का इस्तेमाल करें।

Sawan 2026 Mangla Gauri Vrat: इस साल सावन में कब-कब किया जाएगा मंगला गौरी व्रत? तरीख सहित जानें पूजा विधि और उद्यापन के नियम

Sawan 2026 Mangla Gauri Vrat: सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। पूरी दुनिया में शिव भक्त बेसब्री से इस माह के शुरू होने का इंतजार करते हैं। हिंदू कैलेंडर के इस पांचवें महीने में भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद पाने के लिए श्रद्धालु पूजा और उपवास करते हैं। सावन के महीने में सोमवार के अलावा मंगलवार का भी विशेष महत्व है। हिंदू धर्म में सावन के महीने में आने वाले सभी मंगलवार माता पार्वती के स्वरूप मां मंगला गौरी को समर्पित होते हैं। यह व्रत विवाहित महिलाएं अपने अखंड सौभाग्य, वैवाहिक सुख और पति की लंबी आयु के लिए रखती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं अच्छे वर की प्राप्ति के लिए इसे करती हैं। इस व्रत में व्रती को एक समय ही अन्न, बिना नमक या फलाहार ग्रहण करना चाहिए।

सावन 2026 मंगला गौरी व्रत की तारीखें

इस साल सावन मास में मंगला गौरी व्रत की तिथियां, पूजा विधि और उद्यापन नियम नीचे दिए गए हैं :

मंगला गौरी व्रत 2026 की तिथियां

साल 2026 में सावन के महीने में कुल 4 मंगला गौरी व्रत रखे जाएंगे :

पहला मंगला गौरी व्रत : 04 अगस्त 2026 सावन का प्रथम मंगलवार

दूसरा मंगला गौरी व्रत : 11 अगस्त 2026 सावन का द्वितीय मंगलवार

तीसरा मंगला गौरी व्रत : 18 अगस्त 2026 सावन का तृतीय मंगलवार

चौथा मंगला गौरी व्रत : 25 अगस्त 2026 सावन का चतुर्थ (अंतिम) मंगलवार

मंगला गौरी व्रत 2026 पूजा विधि

प्रातः काल की तैयारी : व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ या नए वस्त्र धारण करें। इसके बाद व्रत का संकल्प लें।

चौकी की स्थापना : पूजा घर में एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं। उस पर माता पार्वती और भगवान शिव की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।

पूजा सामग्री : माता रानी को रोली, चंदन, अक्षत, फल, फूल और माला अर्पित करें। मंगला गौरी व्रत में मां गौरी को 16 श्रंगार की वस्तुएं और 16 माला, 16 लड्डू या नैवेद्य अर्पित करने का विधान है।

दीपक प्रज्वलित करना : आटे से बना एक चौमुखी दीपक जलाएं, जिसमें 16 तार की बत्तियां या सूत हो।

कथा व आरती : मंगला गौरी व्रत कथा का पाठ करें या श्रवण करें। इसके बाद पार्वती चालीसा का पाठ करें और अंत में मां गौरी और भगवान शिव की आरती करके प्रसाद वितरित करें।

मंगला गौरी व्रत उद्यापन विधि

शास्त्रों के अनुसार, महिलाएं मंगला गौरी व्रत शादी के शुरुआती 5 वर्ष या फिर 16 मंगलवार तक रखती हैं और सावन के आखिरी मंगलवार को इसका उद्यापन करती हैं:

  • उद्यापन के दिन भी सुबह सामान्य व्रतों की तरह ही मां मंगला गौरी की पूरी श्रद्धा से पूजा करें। इस दिन पूरे परिवार के साथ हवन-यज्ञ किया जाता है।
  • उद्यापन के मुख्य नियम के तहत 16 सुहागन महिलाओं को आदरपूर्वक घर पर आमंत्रित किया जाता है।
  • इन सभी महिलाओं को प्रेमपूर्वक भोजन कराया जाता है और उन्हें सुहाग की सामग्री भेंट किया जाता है।
  • अंत में सुहागिन महिलाओं और घर के बुजुर्गों के पैर छूकर आशीर्वाद लिया जाता है, जिससे व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

Bhadli Navami 2026 Date: कब है भड़ली नवमी और क्यों मनाई जाती है? इस दिन बिना अच्छा मुहूर्त देखे कर सकते हैं कोई भी शुभ कार्य