Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी पर 9 साल बाद बना अनोखा संयोग, 10 नहीं इस बार 12 दिनों के लिए पधारेंगे बप्पा

Ganesh Chaturthi 2026: भगवान गणेश को बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य का देवता माना जाता है। किसी भी शुभ काम की शुरुआत से पहले उनकी पूजा की जाती है, इसलिए गणेश चतुर्थी का पर्व नए कार्यों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। गणेश चतुर्थी हिंदू धर्म का एक प्रमुख और पवित्र त्योहार है, जो भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह त्योहार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को शुरू होता है और 10 दिनों तक चलता है। अनन्त चतुर्दशी के दिन भगवान गणेश की प्रतिमा के विसर्जन के साथ इसका समापन होता है। गणेश चतुर्थी के दिन बप्पा के भक्त गणेश की मिट्टी की प्रतिमा स्थापित करते हैं। घरों से लेकन सार्वजनिक पांडालों में गजानन की भक्ती की धूम रहती है।

बप्पा के भक्तों को गणेश चतुर्थी का साल भर इंतजार रहता है। ये उत्सव पूरे 10 दिनों तक चलता है। 10 दिनों तक गणेश जी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है, आरती उतारी जाती है और उनका प्रिय भोग ‘मोदक’ चढ़ाया जाता है। यह त्योहार मुख्य रूप से महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस साल गणेश चतुर्थी के पर्व पर 9 साल के बाद अनोखा संयोग बन रहा है। पंचांग की गणनाओं के अनुसार, इस साल गणेश चतुर्थी का पर्व 10 नहीं 12 दिनों का होगा।

गणेश चतुर्थी तिथि

हिंदू पंचांग के मुताबिक, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को ही गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। अधिकांश हिंदू व्रत सूर्योदय के समय ही किए जाते हैं लेकिन गणेश स्थापना दोपहर के समय की जाती है। माना जाता है कि भगवान गणेश का जन्म दोपहर में ही हुआ था। दोपहर के समय मूर्ति स्थापित करना काफी शुभ माना जाता है।

गणेश चतुर्थी- सोमवार, 14 सितंबर 2026

चतुर्थी तिथि का प्रारंभ- सुबह 7 बजकर 6 मिनट

चतुर्थी तिथि समाप्त- सुबह 7 बजकर 44 मिनट, 15 सितंबर 2026

मुख्य विसर्जन की तिथि- 25 सितंबर 2026, शुक्रवार

इस साल 12 दिनों तक रहेंगे बप्पा

गणेश चतुर्थी पारंपरिक रूप से, चंद्र पखवाड़े के 14वें दिन यानी अनंत चतुर्दशी को प्रतिमा विसर्जन के साथ समाप्त होती है। गणेशोत्सव की अवधि दिनों की निश्चित संख्या के बजाय हिंदू चंद्र कैलेंडर से जुड़ी होती है। तिथि और स्थानीय परंपराओं के आधार पर, यह त्योहार अलग-अलग अवधि के लिए मनाया जाता है, जिसमें डेढ़, तीन, पांच, सात या 10 दिन शामिल हैं। 2026 में, चंद्र तिथियों के दुर्लभ संयोग के कारण यह त्योहार 12 दिनों तक चलेगा। गणेश चतुर्थी पर्व की शुरुआत 14 सितंबर को गणेश स्थापना के साथ होगी और 25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी विसर्जन के साथ इसका समापन होगा। इस साल, गणेश चतुर्थी भाद्रपद शुक्ल की तृतीया तिथि के साथ पड़ेगी। 12 दिनों का गणेशोत्सव 2017 के नौ साल बाद हो रहा है। यह किसी तय 9 साल के गणितीय नियम की वजह से नहीं है। बल्कि, यह हिंदू पंचांग में तिथियों की गणना पर निर्भर करता है।

बप्पा का विसर्जन भक्तों के विघ्न का विसर्जन है

उत्सव के अंतिम दिन यानी अनंत चतुर्दशी के दिन प्रतिमा को ढोल-नगाड़ों और जुलूस के साथ नदी, तालाब या समुद्र में विसर्जित किया जाता है। विसर्जन इस बात का प्रतीक है कि भगवान गणेश अपने लोक (कैलाश) लौट रहे हैं और भक्तों के सभी विघ्न अपने साथ ले जा रहे हैं।

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Sawan 2026 Mangla Gauri Vrat: इस साल सावन में कब-कब किया जाएगा मंगला गौरी व्रत? तरीख सहित जानें पूजा विधि और उद्यापन के नियम

Sawan 2026 Mangla Gauri Vrat: सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। पूरी दुनिया में शिव भक्त बेसब्री से इस माह के शुरू होने का इंतजार करते हैं। हिंदू कैलेंडर के इस पांचवें महीने में भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद पाने के लिए श्रद्धालु पूजा और उपवास करते हैं। सावन के महीने में सोमवार के अलावा मंगलवार का भी विशेष महत्व है। हिंदू धर्म में सावन के महीने में आने वाले सभी मंगलवार माता पार्वती के स्वरूप मां मंगला गौरी को समर्पित होते हैं। यह व्रत विवाहित महिलाएं अपने अखंड सौभाग्य, वैवाहिक सुख और पति की लंबी आयु के लिए रखती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं अच्छे वर की प्राप्ति के लिए इसे करती हैं। इस व्रत में व्रती को एक समय ही अन्न, बिना नमक या फलाहार ग्रहण करना चाहिए।

सावन 2026 मंगला गौरी व्रत की तारीखें

इस साल सावन मास में मंगला गौरी व्रत की तिथियां, पूजा विधि और उद्यापन नियम नीचे दिए गए हैं :

मंगला गौरी व्रत 2026 की तिथियां

साल 2026 में सावन के महीने में कुल 4 मंगला गौरी व्रत रखे जाएंगे :

पहला मंगला गौरी व्रत : 04 अगस्त 2026 सावन का प्रथम मंगलवार

दूसरा मंगला गौरी व्रत : 11 अगस्त 2026 सावन का द्वितीय मंगलवार

तीसरा मंगला गौरी व्रत : 18 अगस्त 2026 सावन का तृतीय मंगलवार

चौथा मंगला गौरी व्रत : 25 अगस्त 2026 सावन का चतुर्थ (अंतिम) मंगलवार

मंगला गौरी व्रत 2026 पूजा विधि

प्रातः काल की तैयारी : व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ या नए वस्त्र धारण करें। इसके बाद व्रत का संकल्प लें।

चौकी की स्थापना : पूजा घर में एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं। उस पर माता पार्वती और भगवान शिव की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।

पूजा सामग्री : माता रानी को रोली, चंदन, अक्षत, फल, फूल और माला अर्पित करें। मंगला गौरी व्रत में मां गौरी को 16 श्रंगार की वस्तुएं और 16 माला, 16 लड्डू या नैवेद्य अर्पित करने का विधान है।

दीपक प्रज्वलित करना : आटे से बना एक चौमुखी दीपक जलाएं, जिसमें 16 तार की बत्तियां या सूत हो।

कथा व आरती : मंगला गौरी व्रत कथा का पाठ करें या श्रवण करें। इसके बाद पार्वती चालीसा का पाठ करें और अंत में मां गौरी और भगवान शिव की आरती करके प्रसाद वितरित करें।

मंगला गौरी व्रत उद्यापन विधि

शास्त्रों के अनुसार, महिलाएं मंगला गौरी व्रत शादी के शुरुआती 5 वर्ष या फिर 16 मंगलवार तक रखती हैं और सावन के आखिरी मंगलवार को इसका उद्यापन करती हैं:

  • उद्यापन के दिन भी सुबह सामान्य व्रतों की तरह ही मां मंगला गौरी की पूरी श्रद्धा से पूजा करें। इस दिन पूरे परिवार के साथ हवन-यज्ञ किया जाता है।
  • उद्यापन के मुख्य नियम के तहत 16 सुहागन महिलाओं को आदरपूर्वक घर पर आमंत्रित किया जाता है।
  • इन सभी महिलाओं को प्रेमपूर्वक भोजन कराया जाता है और उन्हें सुहाग की सामग्री भेंट किया जाता है।
  • अंत में सुहागिन महिलाओं और घर के बुजुर्गों के पैर छूकर आशीर्वाद लिया जाता है, जिससे व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

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