Hartalika Teej puja samagri list: 14 सितंबर को हरतालिका तीज व्रत करने से पहले पूजा के लिए जरूरी सामग्री जुटा लें, इनके बिना अधूरा है अटल सुहाग का व्रत

Hartalika Teej puja samagri list: हरतालिका तीज भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र व अखंड सौभाग्य के लिए और अविवाहित कन्याएं सुयोग्य वर पाने के लिए निर्जला व्रत (बिना अन्न-जल का उपवास) रखती हैं। इस व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विधान है। ‘हरतालिका’ शब्द ‘हरत’ यानी हरण करना और ‘आलिका’ यानी सखी से मिलकर बना है। मान्यता है कि माता पार्वती की सखियां उन्हें घने जंगल में ले गई थीं, ताकि उनके पिता हिमालय किसी और के साथ उनका विवाह न कर पाएं। यहां उन्होंने कठोर तपस्या करके भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया था।

हिंदू धर्म के इस प्रमुख व्रत में पूजा के लिए जरूरी समाग्री का भी अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। इसलिए व्रत करने वाली महिलाएं इस उपवास की सभी सामग्री बहुत ध्यान से अर्जित करती हैं। आप भी यह व्रत करने जा रही हैं, तो सोमवार को व्रत शुरू करने से पहले एक बार यहां दी जा रही सामग्री सूची से अपनी सूची का मिलान कर लें। ताकि पूजा करते समय आपको कोई असुविधा न हो। आइए जानें पूजा की संपूर्ण सामग्री लिस्ट और पूजा विधि

हरतालिका व्रत 2026 तारीख और समय

वर्ष 2026 में उदया तिथि के अनुसार हरतालिका तीज 14 सितंबर 2026, सोमवार को मनाई जाएगी।

तृतीया तिथि प्रारंभ : 13 सितंबर 2026 को सुबह 07:08 बजे से

तृतीया तिथि समाप्त : 14 सितंबर 2026 को सुबह 07:06 बजे तक

प्रातःकाल पूजा मुहूर्त : 14 सितंबर 2026 को सुबह 06:05 से 07:06 बजे तक

हरतालिका तीज पूजन सामग्री लिस्ट

बालू या मिट्टी से बनी शिव, पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमाएं

सुहाग सामग्री (लाल चुनरी, बिंदी, चूड़ियां, आलता, मेहंदी, सिंदूर, कुमकुम, काजल, कंघी, बिछिया, पायल और अन्य श्रृंगार वस्तुएं)

रोली, चावल, कपूर, रुई, माचिस, मौली, हल्दी, चंदन, घी का दीपक, अगरबत्ती या धूपबत्ती, फल और मिठाइयां, खीर और हलवा, भिगोए हुए चने, पूजा के लिए कलश, जल और गंगाजल, पंचामृत बनाने के लिए दूध, दही, शहद, शक्कर और घी, 1 नारियल, दूर्वा घास, बेलपत्र, शमी पत्र, कच्ची हल्दी की गांठें, गेहूं या चावल, एक चौकी या आसन, मंडप बनाने के लिए केले के पत्ते, फूलों की माला और फूल, पान के पत्ते और सुपारी, कच्चा सूत

हरतालिका तीज 2026 पूजा विधि

प्रतिमा निर्माण : प्रातः स्नान के बाद संकल्प लें। इसके बाद काली मिट्टी या बालू से शिव-पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा बनाएं।

शृंगार व अर्पण : भगवान शिव को चंदन, बेलपत्र, धतूरा, अक्षत और वस्त्र अर्पित करें। माता पार्वती को सुहाग की सामग्री (सिंदूर, चूड़ी, बिंदी, चुनरी आदि) चढ़ाएं।

कथा व आरती : हरतालिका तीज की व्रत कथा सुनें या पढ़ें और अंत में शिव-पार्वती की आरती करें।

रात का जागरण : इस व्रत में रात भर जागरण कर भजन-कीर्तन करने की परंपरा है।

पारण : अगले दिन सुबह विधिवत पूजा के बाद पंडित या बुजुर्गों को दान-दक्षिणा देकर व्रत खोलें।

Hartalika Teej 2026: अखंड सौभाग्य के व्रत हरतालिका तीज में ये 5 गलतियां खंडित कर सकती हैं व्रत, जानें किन चीजों को करने से बचें

Hartalika Teej 2026: अखंड सौभाग्य के व्रत हरतालिका तीज में ये 5 गलतियां खंडित कर सकती हैं व्रत, जानें किन चीजों को करने से बचें

Hartalika Teej 2026: हिंदू धर्म के अत्यंत कठिन और प्रभावशाली उपवासों में से एक है हरतालिका तीज का व्रत। यह व्रत हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को किया जाता है। इस साल यह व्रत 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के पर्व के साथ किया जाएगा। इसे हिंदू धर्म में विवाहित महिलाओं के महत्वपूर्ण व्रतों में से एक माना जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि के लिए निर्जला उपवास रखती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था, तभी से इस व्रत की परंपरा चली आ रही है। इस व्रत का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए शास्त्र सम्मत नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है। इस व्रत के कुछ ऐसे नियम हैं, जिनकी अनदेखी अखंड सौभाग्य के लिए होने वाले इस व्रत को खंडित कर सकती है। आइए जानते हैं कि हरतालिका तीज के दिन कौन से काम भूलकर भी नहीं करने चाहिए:

कथा सुनना न भूलें : हरतालिका तीज की पूजा बिना कथा सुने अधूरी मानी जाती है। इसलिए पूजा के दौरान हरतालिका तीज की व्रत कथा का पाठ अवश्य करें या सुनें, जिससे व्रत का पूरा पुण्य प्राप्त हो सके।

काले या सफेद वस्त्र पहनने से बचें : हरतालिका तीज के व्रत में महिलाओं के शुभ रंगों के वस्त्र पहनने चाहिए। इस दिन काले, नीले या सफेद रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए। तीज के पावन पर्व पर हरे या लाल रंग के वस्त्र पहनना सबसे उत्तम और अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना गया है। इसके साथ ही सुहाग की सभी वस्तुएं पूरी निष्ठा के साथ मां पार्वती को अर्पित करें।

अन्न और जल का सेवन न करें : हरतालिका तीज का व्रत मुख्य रूप से निर्जला किया जाता है। एक बार व्रत का संकल्प लेने के बाद दिनभर जल या अन्न ग्रहण करना वर्जित माना जाता है। हालांकि, यदि स्वास्थ्य कारणों से या गर्भावस्था की स्थिति में डॉक्टर की सलाह से फलाहार का विकल्प चुना जा सकता है, लेकिन सामान्य स्थिति में अन्न-जल का त्याग ही नियम है।

क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूरी : व्रत के दिन मन, वाणी और कर्म से पवित्रता बनाए रखना अनिवार्य है। किसी पर भी गुस्सा न करें, अपशब्द न बोलें। घर में वाद-विवाद की स्थिति से दूर रहें। इस दिन पूरी तरह से सात्विक आचरण करते हुए भगवान का ध्यान करना चाहिए।

दिन में सोना वर्जित : धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हरतालिका तीज के दिन दिन में सोने से बचना चाहिए। इस पूरे दिन और रात के समय भगवान शिव और माता पार्वती के भजन-कीर्तन व जागरण का विधान है। मान्यता है कि इस दिन व्रत के दौरान सोने से व्रत का पूर्ण फल नहीं मिलता है।

Hartalika Teej Kab Hai 2026: 13 या 14 सितंबर, कब हरतालिका तीज व्रत करना होगा सही? जानिए तिथि के कंफ्यूजन पर क्या है शास्त्रानुसार समाधान

Hartalika Teej Kab Hai 2026: 13 या 14 सितंबर, कब हरतालिका तीज व्रत करना होगा सही? जानिए तिथि के कंफ्यूजन पर क्या है शास्त्रानुसार समाधान

Hartalika Teej Kab Hai 2026: पति की लंबी उम्र और सुखी जीवन के लिए किया जाने हरतालिका व्रत हिंदू धर्म के अत्यंत पवित्र व्रत में से एक है। यह व्रत हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को किया जाता है। इस साल इस व्रत की तारीख को लेकर व्रतियों में काफी कंफ्यूजन है, क्योंकि इस साल हरतालिका तीज के लिए जरूरी भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 13 सितंबर और 14 सितंबर को दोनों दिन है। हरतालिका तीज की पूजा जहां प्रदोष काल और प्रात:काल सूर्योदय के समय भी की जाती है। प्रदोष और सूर्योदय पूजा मुहूर्त के आधार पर देखा जाए तो हरतालिका तीज का व्रत और पूजन 13 सितंबर को होना उचित रहेगा। लेकिन उदयातिथि के आधार पर गणना करें तो हरतालिका तीज 14 सितंबर को होना चाहिए। ऐसे में आइए जानें इस साल हरतालिका तीज कब है, 13 या 14 सितंबर को? शास्त्रों में इस समस्या का क्या समाधान मिलता है?

हरतालिका तीज 13 या 14 सितंबर?

पंचांग के अनुसार, इस साल भाद्रपद शुक्ल तृतीया तिथि 13 सितंबर को सुबह 7:08 बजे से लेकर 14 सितंबर को सुबह 7:06 बजे तक है। न्यूज 18 हिंदी की रिपोर्ट के अनुसार, भविष्योत्तर पुराण के अनुसार, भाद्रस्य कजली कृष्णा शुक्ला च हरतालिका यानि भाद्रपद शुक्ल तृतीया को हरतालिका तीज का व्रत रखना चाहिए। इसमें भी द्वितीया युक्त तृतीया तिथि में हरतालिका तीज नहीं मनाते हैं, तृतीया चतुर्थी युक्त हो तो ज्यादा उत्तम है। दरअसल द्वितीया तिथि का संबंध पितामह यानि दादा से होता है और चतुर्थी तिथि का संबंध पुत्र से होता है।

इस आधार पर देखा जाए तो 13 सितंबर को द्वितीया युक्त तृतीया तिथि मिल रही है, क्योंकि उस दिन उदयातिथि के अनुसार द्वितीया तिथि सुबह 7:08 बजे तक है, फिर तृतीया प्रारंभ हो रही है। ऐसे में हरतालिका तीज के लिए द्वितीया युक्त तृतीया तिथि का निषेध है। वहीं, 14 सितंबर को तृतीया की उदयातिथि सुबह 7:06 बजे तक है। उसके बाद से चतुर्थी तिथि का प्रारंभ हो जा रही है। ऐसे में 14 सितंबर को चतुर्थी युक्त तृतीया तिथि मिल रही है। ऐसे में 14 सितंबर को ही हरतालिका तीज का व्रत रखना और पूजा करना शास्त्र सम्मत है।

हरतालिका तीज मुहूर्त 2026

14 सितंबर को ब्रह्म मुहूर्त 04:32 ए एम से 05:19 ए एम के बीच उठकर स्नान आदि से निवृत होकर हरतालिका तीज व्रत और गौरी-शिव पूजा का संकल्प करें। उस दिन का शुभ समय यानि अभिजीत मुहूर्त 11:52 ए एम से 12:41 पी एम तक है। सुबह में हरतालिका तीज की पूजा के लिए सुबह 06:05 बजे से सुबह 07:06 बजे के बीच शुभ होगा। इस समय में आपको अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त भी प्राप्त होगा, जो सुबह 06:05 ए एम से लेकर 07:38 ए एम तक है। सुबह की पूजा ब्रह्म योग और चित्रा नक्षत्र में होगी। ब्रह्म योग दोपहर 12:47 पी एम तक है।

प्रदोष काल में हरतालिका तीज की पूजा सूर्यास्त के बाद शाम 06:28 बजे के बाद से कर सकते हैं। प्रदोष पूजा के समय रवि योग, इंद्र योग और स्वाति नक्षत्र मिल जाएगा, जो उस दिन दोपहर में 1 बजकर 55 मिनट से प्रारंभ होगा और 15 सितंबर को सुबह 6 बजकर 6 मिनट तक रहेगा। इंद्र योग दोपहर में 12:47 पी एम से प्रारंभ है।

हरतालिका तीज 2026 राहुकाल

तीज वाले दिन राहुकाल सुबह में ही प्रारंभ हो रहा है। राहुकाल सुबह 07 बजकर 38 मिनट से सुबह 09 बजकर 11 मिनट तक है। अपनी पूजा की तैयारी इस समय को ध्यान में रखते हुए करें।

Ganesh Chaturthi 2026 Kalash Sthapana: बप्पा के स्वागत में जरूर रखें कलश, स्थापना से पहले कलश में जरूर डालें ये चीजें

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Ganesh Chaturthi 2026 Kalash Sthapana: देश में इस समय गौरी पुत्र गणेश के स्वागत की तैयारियां चल रही हैं। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विघ्नहर्ता गणेश अपने भक्तों के बीच धरती पर पधारते हैं और अनंत चतुर्दशी तक रहते हैं। भगवान गणेश के जन्मोत्सव का पर्व पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन घरों और पंडालों में विधि-विधान से गणपति बप्पा की स्थापना की जाती है। इस बार गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर दिन सोमवार को मनाया जाएगा। गणपति स्थापना की पूजा में मूर्ति के साथ कलश स्थापना का भी विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कलश शुभता, समृद्धि और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। आप अगर गणेशजी की स्थापना करने जा रहे हैं, तो पहले यह जान लें कि गणेश चतुर्थी के पर्व में कलश क्यों जरूरी है और इसमें किन 7 चीजों को रखा जाता है

गणेश चतुर्थी 2026: कलश स्थापना

हिंदू पूजा पद्धति में कलश को देवताओं का प्रतीक माना जाता है। गणेशजी की स्थापना से पहले पूजा स्थल की शुद्धि करके कलश स्थापित किया जाता है। सामान्यतः मिट्टी, तांबे या पीतल के कलश में जल भरकर उसके ऊपर आम या अशोक के पत्ते और नारियल रखा जाता है। मान्यता है कि कलश में जल जीवन और ऊर्जा का प्रतीक है, जबकि नारियल पूर्णता और शुभता का प्रतीक माना जाता है। गणेश चतुर्थी पर गणपति स्थापना के दौरान कलश को भगवान गणेश के समीप रखा जाता है।

गणेश चतुर्थी 2026 पर कलश स्थापना विधि

गणेश स्थापना के समय पूजा स्थल को साफ करके चौकी पर कलश रखें। कलश में शुद्ध जल भरें और उसमें अक्षत, गंगाजल, सुपारी व सिक्का डालें। कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते रखें और ऊपर नारियल स्थापित करें। कलश के पास भगवान गणेश की मूर्ति रखें। इसके बाद कलश और गणपति का विधिवत पूजन करें। हालांकि कलश स्थापना की विधि और उसमें रखी जाने वाली सामग्री अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों की धार्मिक परंपराओं के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती है।

कलश में रखी जाने वाली 7 चीजें

  • स्वच्छ जल
  • अक्षत यानी चावल
  • सुपारी
  • सिक्का
  • गंगाजल
  • आम या अशोक के पत्ते
  • नारियल

गणेश महोत्सव की प्रमुख तिथियां

14 सितंबर 2026, सोमवार – गणपति स्थापना और गणेश चतुर्थी

15 सितंबर, मंगलवार – गणपति पूजा और दैनिक आरती

16 सितंबर, बुधवार – गणपति पूजा

17 सितंबर, गुरुवार – गणपति पूजा

18 सितंबर, शुक्रवार – गणपति पूजा

19 सितंबर, शनिवार – गणपति पूजा

20 सितंबर, रविवार – गणपति पूजा

21 सितंबर, सोमवार – गणपति पूजा

22 सितंबर, मंगलवार – गणपति पूजा

23 सितंबर, बुधवार – गणपति पूजा

24 सितंबर, गुरुवार – उत्सव का अंतिम दिन/विसर्जन की तैयारी

25 सितंबर 2026, शुक्रवार – अनंत चतुर्दशी और गणपति विसर्जन

गणेश चतुर्थी पर्व का महत्व

प्रथमपूज्य भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता कहा जाता है। हिंदू धर्म हर शुभ और मांगलिक कार्य गणेश भगवान की पूजा से शुरू होता है। माना जाता है, भगवान गणेश की पूजा करने से कार्य में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। गणेश चतुर्थी पर घर में गणपति की स्थापना करना श्रद्धालुओं के लिए भगवान के स्वागत का प्रतीक है। 10 दिन तक चलने वाले इस पर्व का समापन भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी तिथि यानी अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश विसर्जन के साथ हो जाता है। गणपति स्थापना केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि परिवार में सुख-शांति, सद्भाव और सकारात्मक ऊर्जा की कामना से जुड़ी परंपरा भी है।

Hartalika teej 2026 Puja Time: क्या हरतालिका तीज पर रहेगा भद्र का साया ? जानें सुबह-शाम की पूजा का शुभ मुहूर्त

Hartalika teej 2026 Puja Time: क्या हरतालिका तीज पर रहेगा भद्र का साया ? जानें सुबह-शाम की पूजा का शुभ मुहूर्त

Hartalika teej 2026 Puja Time: भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित हरतालिका तीज व्रत को सबसे कठिन उपवास माना जाता है, क्योंकि इसमें व्रती महिलाएं लगभग 24 घंटे निर्जला उपवास करती हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती भगवान शिव को अपने पति रूप में पाना चाहती थीं। इसलिए उन्होंने हिमालय पर बिना अन्न-जल हजारों वर्ष कठिन तप किया। माता पार्वती के पिता हिमालय उनका विवाह भगवान विष्णु से कराना चाहते थे। जब यह बात माता पार्वती को पता चली, तो उनकी सखियों ने उनका हरण कर लिया और उन्हें एक जंगल में छिपा दिया। इसी से इस व्रत का नाम हरतालिका पड़ा, क्योंकि संस्कृत में हरत का अर्थ हरण करने से है और आलिका का अर्थ सखी होता है। यानी सखियों द्वारा हरण किया जाना। माना जाता है कि माता पार्वती ने भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को जंगल में मिट्टी से शिवलिंग बनाकर पूजा की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया था।

हरतालिका तीज का व्रत पति की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और तरक्की के लिए किया जाता है। विवाहित महिलाएं और कुंवारी कन्याएं दोनों ही निर्जला व्रत करती हैं। यह व्रत हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को किया जाता है। इस साल यह व्रत सोमवार के दिन 14 सितंबर को किया जाएगा। लेकिन इस साल हरतालिका तीज के दिन भद्रा भी लग रही है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि इस दिन सुबह-शाम की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त कब से कब तक मिलेगा?

हरतालिका तीज व्रत तारीख

पंचांग के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 13 सितंबर 2026, रविवार को सुबह 07:09 मिनट पर प्रारंभ होगी और 14 सितंबर 2026, सोमवार को सुबह 07:07 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। उदया तिथि में प्रदोष व्रत 14 सितंबर को ही किया जाएगा।

हरतालिका तीज पर भद्रा का साया

ज्योतिष शास्त्र में भद्रा को अशुभ काल माना गया है। इस समय किसी भी शुभ या मांगलिक कार्य की मनाही होती है। कहा जाता है कि भद्रा काल में किए गए उत्तम फलों का नकारात्मक या अशुभ फल प्राप्त होता है। इस बार हरतालिका तीज के दिन भद्रा का साया रहने वाला है। इस दिन भद्राकाल शाम 07:20 बजे प्रारंभ होगी और अगले दिन 15 सितंबर को सुबह 07 बजकर 44 मिनट पर समाप्त होगी।

हरतालिका तीज पर सुबह-शाम के पूजन मुहूर्त

हरतालिका तीज के दिन प्रात: काल पूजा का समय सुबह 06:05 बजे से सुबह 07:06 बजे तक रहेगा। हिंदू धर्म में भगवान शिव के पूजन के लिए प्रदोष काल सबसे उत्तम मुहूर्त माना गया है। इस दिन प्रदोष काल शाम 05:43 बजे से शाम 07:13 बजे तक रहेगा।

हरतालिका तीज 2026 व्रत पारण का समय

हरतालिका तीज व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के पश्चात करना सबसे उत्तम माना गया है। हालांकि तीज व्रत पारण के दिन भी भद्रा विद्यमान रहेगी। इसलिए व्रत पारण के लिए भद्रा समाप्त होने का इंतजार करना पड़ेगा। तीज व्रत का पारण 15 सितंबर 2026 को सुबह 07:44 बजे के बाद किया जा सकेगा।

Parivartini Ekadashi 2026 2026 Date: योग निद्रा में जब करवट लेंगे भगवान विष्णु तब होगा परिवर्तनी एकादशी का व्रत, जानें तारीख और समय

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Parivartini Ekadashi 2026 2026 Date: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष स्थान है। यह तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है। श्रीहरि के भक्त इस दिन उपवास करते हैं और विधि-विधान से भगवान की पूजा करते हैं। पूरे साल में हर माह दो एकादशी आती है। इन्हीं में से एक है भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि, जिसे परिवर्तनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। यह दिन चातुर्मास में विशेष स्थान रखता है, क्योंकि इस समय भगवान विष्णु योग निद्रा में रहते हैं और परिवर्तिनी एकादशी के दिन करवट बदलते हैं। माना जाता है कि हरि कृपा से इस दिन व्रत करने वाले भक्तों के सभी पाप और कष्ट मिट जाते हैं। परिवर्तनी एकादशी का व्रत करने पर वाजपेय यज्ञ के समान पुण्य फल प्राप्त होता है।

परिवर्तिनी एकादशी 2026 तारीख

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 21 सितंबर को रात में 8 बजे से प्रारंभ हो रही है। यह तिथि अगले दिन 22 सितंबर को रात 9 बजकर 43 मिनट तक रहेगी। ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, परिवर्तिनी एकादशी का व्रत 22 सितंबर मंगलवार को रखा जाएगा। इस दिन पाताल लोक की भद्रा भी रहेगी।

परिवर्तिनी एकादशी 2026 पर रहेगा रवि योग

परिवर्तिनी एकादशी के दिन रवि योग बन रहा है। उस दिन रवि योग सुबह 6 बजकर 9 मिनट पर प्रारंभ होगा और सुबह 7 बजकर 6 मिनट तक रहेगा। इस योग में सूर्य का प्रभाव अधिक होने से कोई दोष नहीं रह जाता है। इस दिन रवि योग के अलावा अतिगंड और सुकर्मा योग भी बनेंगे। अतिगंड योग प्रात:काल से शुरू होकर शाम 04 बजकर 29 पी एम तक रहेगा। इसे शुभ योग नहीं मान जाता है, लेकिन अतिगंड योग के बाद सुकर्मा योग प्रारंभ होगा। सुकर्मा योग पूरी रात तक रहेगा। यह एक शुभ योग है, इसमें कोई भी शुभ काम कर सकते हैं। व्रत के दिन उत्तराषाढ़ा नक्षत्र प्रात:काल से सुबह 07:06 ए एम तक है, उसके बाद से श्रवण नक्षत्र प्रांरभ है।

परिवर्तिनी एकादशी 2026 मुहूर्त

परिवर्तिनी एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त 04:35 ए एम से 05:22 ए एम के बीच है। इसमें स्नान आदि से निवृत होकर व्रत और पूजा का संकल्प करना उत्तम माना जाता है। पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 09:11 ए एम से दोपहर 01:45 पी एम के बीच हैं।

एकादशी को लाभ-उन्नति मुहूर्त सुबह में 10:43 ए एम से दोपहर 12:14 पी एम तक है, उसके बाद अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त दोपहर 12:14 पी एम से 01:45 पी एम तक रहेगा। उस दिन का अभिजीत मुहूर्त 11 बजकर 49 ए एम से लेकर दोपहर 12 बजकर 38 पी एम तक रहेगा।

परिवर्तिनी एकादशी 2026 पारण

परिवर्तिनी एकादशी व्रत का पारण 23 सितंबर बुधवार को होगा। श्रद्धालु सुबह 06:10 ए एम से लेकर 08:35 ए एम के बीच कभी भी पारण करके व्रत को पूरा कर सकते हैं। उस दिन द्वादशी तिथि का समापन रात में 10 बजकर 50 मिनट पर होगा।

Hartalika Teej Puja 2026: हरतालिका तीज पर राशि के अनुसार पूजा करने से मिलेगा अखंड सौभाग्य और दांपत्य सुख, जानें आपकी राशि के लिए क्या है सही

Hartalika Teej Puja 2026: हरतालिका तीज पर राशि के अनुसार पूजा करने से मिलेगा अखंड सौभाग्य और दांपत्य सुख, जानें आपकी राशि के लिए क्या है सही

Hartalika Teej Puja 2026: हर साल हरतालिका तीज का व्रत भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को किया जाता है। इस साल यह व्रत 14 सितंबर, सोमवार को किया जाएगा। यह व्रत विवाहित महिलाओं के लिए प्रेम, समर्पण और दांपत्य सुख से जुड़ा प्रमुख पर्व है। इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं और पति की लंबी आयु, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की समृद्धि की कामना करती हैं। इस दिन पूजा के साथ ही दान का भी विशेष महत्व है। ज्योतिष मान्ताओं के अनुसार, हरतालिका तीज पर राशि अनुसार पूजा और दान करने से व्रत का पुण्य फल कई गुना बढ़ जाता है।

राशि के अनुसार ऐसे करें शिव-पार्वती की पूजा

मेष राशि : मेष राशि के जातक भगवान शिव को पंचामृत से स्नान कराने के बाद रेशमी वस्त्र अर्पित करें। शिव-पार्वती की आराधना करते हुए सुखी दांपत्य जीवन की कामना करना शुभ माना गया है।

वृष राशि : वृष राशि वाले शिव-पार्वती की पूजा में गुलाब का पुष्प और इत्र अर्पित करें। इसके बाद धूप दिखाकर भगवान से परिवार में प्रेम, सौहार्द और सुख-शांति की प्रार्थना करें।

मिथुन राशि : मिथुन राशि के जातक हरे रंग के वस्त्र धारण कर पूजा कर सकते हैं। माता पार्वती को हल्दी और भगवान शिव को सफेद चंदन अर्पित करने की धार्मिक परंपरा बताई गई है।

कर्क राशि : कर्क राशि वालों के लिए पूजा के बाद भगवान शिव का श्रृंगार करना और ॐ नमः शिवाय का जाप करना शुभ माना गया है। श्रद्धा के साथ शिव-पार्वती की आराधना कर दांपत्य सुख की कामना करें।

सिंह राशि : सिंह राशि के जातक शिव-पार्वती को पीले पुष्पों की माला अर्पित करें। इसके बाद रुद्राष्टकम का पाठ करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह पूजा मनोकामना और पारिवारिक सुख के लिए शुभ मानी जाती है।

कन्या राशि : कन्या राशि वाले भगवान शिव को बेलपत्र और दूर्वा अर्पित करें। तीज के अवसर पर मेहंदी लगाना भी सुहाग और सौभाग्य से जुड़ी परंपरा मानी जाती है।

तुला राशि : तुला राशि के जातक भगवान महादेव का पंचामृत से अभिषेक करें। इसके साथ सुहाग की सामग्री का दान करने की परंपरा है। इससे अखंड सौभाग्य और दांपत्य जीवन में सुख की कामना की जाती है।

वृश्चिक राशि : वृश्चिक राशि वाले पीले वस्त्र धारण कर शिव-पार्वती की पूजा करें। भगवान शिव को दूर्वा अर्पित करना भी शुभ माना गया है। पूजा के दौरान परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।

धनु राशि : धनु राशि के जातक लाल वस्त्र धारण कर शिव-पार्वती की आराधना करें। पूजा में सुगंधित पुष्प अर्पित करना शुभ माना जाता है। श्रद्धा के साथ पति के स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करें।

मकर राशि : मकर राशि वाले भगवान शिव को सफेद चंदन अर्पित करें और घी का दीपक जलाएं। शिव-पार्वती की पूजा कर घर में सुख-शांति और दांपत्य जीवन में स्थिरता की प्रार्थना करें।

कुंभ राशि : कुंभ राशि के जातक गुलाबी वस्त्र धारण कर पूजा कर सकते हैं। महादेव को श्वेत पुष्प अर्पित कर शिव-पार्वती का ध्यान करें और सुखी दांपत्य जीवन की कामना करें।

मीन राशि : मीन राशि वालों के लिए हरे वस्त्र धारण कर पूजा करने की परंपरा बताई गई है। माता पार्वती को हल्दी और भगवान शिव को सफेद चंदन अर्पित करें। इसके बाद परिवार की सुख-समृद्धि और पति की दीर्घायु की कामना करें।

Radha ashtami 2026 Date: 3 शुभ योगों में 19 सितंबर को मनाई जाएगी राधाष्टमी, जानें लाडली जी की पूजा का शुभ मुहूर्त और व्रत पारण समय

Radha ashtami 2026 Date: हिंदू धर्म में भाद्रपद का महीना कई धार्मिक वजहों से खास माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, द्वापर युग में इसी माह में भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। और इसके 15 दिनों के बाद, यानी भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान कृष्ण की आल्हादिनी शक्ति और प्राणप्रिया राधा रानी का भी जन्म हुआ था। प्रतिवर्ष भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा रानी के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व कृष्ण जन्माष्टमी के ठीक 15 दिन बाद आता है।

शास्त्रों के अनुसार राधा रानी की आराधना के बिना भगवान श्रीकृष्ण की पूजा अधूरी मानी जाती है। इस दिन व्रत रखने और राधारानी की उपासना करने से सुख, समृद्धि, अखंड सौभाग्य और निष्काम प्रेम की प्राप्ति होती है। उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में बरसाना और वृंदावन में यह पर्व विशेष हर्षोल्लास और धूमधाम से मनाया जाता है। बरसाना के लाडली जी मंदिर में इस दिन विशेष अभिषेक, पूजन और भव्य उत्सव होता है। इस साल राधाष्टमी का पर्व शनिवार, 19 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन 3 शुभ योग बनने से इसका महत्व और बढ़ गया है।

राधाष्टमी 2026 तारीख

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 18 सितंबर को दोपहर 1 बजे से प्रारंभ होगी। इस तिथि का समापन 19 सितंबर को दोपहर 3 बजकर 26 मिनट पर होगा। उदयातिथि के आधार पर राधाष्टमी 19 सितंबर दिन शनिवार को है। राधाष्टमी की पूजा की जाती है। राधाष्टमी के दिन भक्त व्रत रखते हैं और श्री राधाजी की पूजा करते हैं।

राधाष्टमी 2026 में बन रहे 3 शुभ योग

इस साल राधाष्टमी के दिन आयुष्मान् योग, सौभाग्य योग और रवि योग, 3 शुभ योग बन रहे हैं। इस दिन आयुष्मान् योग प्रात:काल से लेकर दोपहर 2 बजकर 29 पी एम तक रहेगा। इस योग में आयु में वृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। दोपहर 2:29 बजे से सौभाग्य योग बनेगा, जो भाग्य को बढ़ाने वाला है।

इनके अलावा रवि योग राधाष्टमी की मध्य रात्रि यानि 20 सितंबर को 01:43 ए एम से बनेगा और सुबह 06:08 ए एम तक रहेगा। इस योग में सूर्य का प्रभाव अधिक होता है, जिसकी वजह से इस योग में कोई दोष नहीं रह जाता। राधाष्टमी के दिन मूल नक्षत्र प्रात:काल से लेकर 20 सितंबर को 01:43 ए एम तक रहेगा। उसके बाद से पूर्वाषाढा नक्षत्र होगा।

राधाष्टमी 2026 पूजा के शुभ मुहूर्त

इस बार राधाष्टमी की पूजा का शुभ मुहूर्त दिन में 11 बजकर 1 मिनट से शुरू है और दोपहर 1 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। राधाष्टमी को लाडली जी की पूजा के लिए आपको 2 घंटे 27 मिनट का शुभ समय प्राप्त होगा। राधाष्टमी पर ब्रह्म मुहूर्त 04:34 ए एम से लेकर 05:21 ए एम तक है, वहीं अभिजीत मुहूर्त दिन में 11 बजकर 50 मिनट से दोपहर 12 बजकर 39 मिनट तक रहेगा। राधारानी जी की पूजा के समय अभिजीत मुहूर्त भी विद्यमान रहेगा।

राधाष्टमी 2026 पारण

जो लोग राधाष्टमी का व्रत रखेंगे, वे पारण 20 सितंबर को सुबह 06:08 ए एम के बाद से कर सकते हैं।

Hartalika Teej 2026: कई दुर्लभ संयोगों में इस साल मनेगा हरतालिका तीज व्रत, जानें इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त

Hartalika Teej 2026: कई दुर्लभ संयोगों में इस साल मनेगा हरतालिका तीज व्रत, जानें इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त

Hartalika Teej 2026: हिंदू धर्म में हरतालिका तीज का व्रत विशेष स्थान रखता है। यह व्रत हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को किया जाता है। पंचांग के अनुसार, इस साल 14 सितंबर 2026 को यह व्रत किया जाएगा। इस साल हरतालिका तीज के व्रत में कई दुर्लभ संयोग बन रहे हैं, जैसे इसी दिन गणेश चतुर्थी भी मनाई जाएगी। साथ ही इस दिन सोमवार का दिन है, जो भगवान शिव को समर्पित है। हरतालिका तीज का व्रत अखंड सौभग्य और सुख-समृद्धि के लिए किया जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं और कुंवारी कन्याएं दोनों ही निर्जला उपवास करती हैं। इस साल हरतालिका तीज व्रत के दिन रवि योग के साथ 3 शुभ योगों का भी निर्माण होगा। इससे यह दिन और भी शुभ फलदायी माना जा रहा है। आइए जानते हैं हरतालिका तीज पर बनने वाले शुभ संयोग और पूजा मुहूर्त के बारे में।

3 शुभ योग में हरतालिका तीज व्रत

हरतालिका तीज के दिन ब्रह्म योग, रवि योग और इंद्र योग बन रहे हैं। उस दिन ब्रह्म योग प्रात:काल से लेकर दोपहर 12:47 पी एम तक है, उसके बाद से इंद्र योग बनेगा। तीज और चतुर्थी पर रवि योग दोपहर में 01:55 पी एम से बनेगा और 15 सितंबर को सुबह 06:06 ए एम तक रहेगा।

हरतालिका तीज पर 4 अद्भुत संयोग

हरतालिका तीज की भाद्रपद शुक्ल तृतीया तिथि 14 सितंबर को सुबह 07 बजकर 06 मिनट तक है। उसके बाद से भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि प्रारंभ हो जाएगी, जो 15 सितंबर को सुबह 7 बजकर 44 मिनट तक रहेगी। इस तरह 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी का उत्सव और हरतालिका तीज दोनों एक साथ मनाए जाएंगे। इस दिन सोमवार भी है, जो भगवान शिव की कृपा प्राप्ति का सुंदर अवसर है। इस दिन दक्षिण भारत का प्रमुख स्वर्ण गौरी व्रत भी है, जिसे गौरी हब्बा कहते हैं। यह व्रत कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में रखा जाता है, जिसमें देवी पार्वती की पूजा करते हैं।

हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी मुहूर्त

हरतालिका तीज की पूजा जहां प्रदोष काल में होगी। वहीं गणेश चतुर्थी की मूर्ति स्थापना और पूजा उससे पहले ही दिन में हो जाएगी।

हरतालिका तीज पूजा का समय : इस दिन सुबह भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा 06:05 बजे से 07:38 बजे के बीच होगी। जिनके यहां शाम की पूजा होती है, वे प्रदोष काल में 06:28 पी एम से पूजा करेंगे।

गणेश चतुर्थी पूजा का समय : गणेश चतुर्थी पूजा मुहूर्त 11:02 एम से लेकर दोपहर 1:31 पीएम तक है। इस समय में आप विधिपूर्वक गणेश जी की पूजा कर लें।

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Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी पर 9 साल बाद बना अनोखा संयोग, 10 नहीं इस बार 12 दिनों के लिए पधारेंगे बप्पा

Ganesh Chaturthi 2026: भगवान गणेश को बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य का देवता माना जाता है। किसी भी शुभ काम की शुरुआत से पहले उनकी पूजा की जाती है, इसलिए गणेश चतुर्थी का पर्व नए कार्यों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। गणेश चतुर्थी हिंदू धर्म का एक प्रमुख और पवित्र त्योहार है, जो भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह त्योहार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को शुरू होता है और 10 दिनों तक चलता है। अनन्त चतुर्दशी के दिन भगवान गणेश की प्रतिमा के विसर्जन के साथ इसका समापन होता है। गणेश चतुर्थी के दिन बप्पा के भक्त गणेश की मिट्टी की प्रतिमा स्थापित करते हैं। घरों से लेकन सार्वजनिक पांडालों में गजानन की भक्ती की धूम रहती है।

बप्पा के भक्तों को गणेश चतुर्थी का साल भर इंतजार रहता है। ये उत्सव पूरे 10 दिनों तक चलता है। 10 दिनों तक गणेश जी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है, आरती उतारी जाती है और उनका प्रिय भोग ‘मोदक’ चढ़ाया जाता है। यह त्योहार मुख्य रूप से महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस साल गणेश चतुर्थी के पर्व पर 9 साल के बाद अनोखा संयोग बन रहा है। पंचांग की गणनाओं के अनुसार, इस साल गणेश चतुर्थी का पर्व 10 नहीं 12 दिनों का होगा।

गणेश चतुर्थी तिथि

हिंदू पंचांग के मुताबिक, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को ही गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। अधिकांश हिंदू व्रत सूर्योदय के समय ही किए जाते हैं लेकिन गणेश स्थापना दोपहर के समय की जाती है। माना जाता है कि भगवान गणेश का जन्म दोपहर में ही हुआ था। दोपहर के समय मूर्ति स्थापित करना काफी शुभ माना जाता है।

गणेश चतुर्थी- सोमवार, 14 सितंबर 2026

चतुर्थी तिथि का प्रारंभ- सुबह 7 बजकर 6 मिनट

चतुर्थी तिथि समाप्त- सुबह 7 बजकर 44 मिनट, 15 सितंबर 2026

मुख्य विसर्जन की तिथि- 25 सितंबर 2026, शुक्रवार

इस साल 12 दिनों तक रहेंगे बप्पा

गणेश चतुर्थी पारंपरिक रूप से, चंद्र पखवाड़े के 14वें दिन यानी अनंत चतुर्दशी को प्रतिमा विसर्जन के साथ समाप्त होती है। गणेशोत्सव की अवधि दिनों की निश्चित संख्या के बजाय हिंदू चंद्र कैलेंडर से जुड़ी होती है। तिथि और स्थानीय परंपराओं के आधार पर, यह त्योहार अलग-अलग अवधि के लिए मनाया जाता है, जिसमें डेढ़, तीन, पांच, सात या 10 दिन शामिल हैं। 2026 में, चंद्र तिथियों के दुर्लभ संयोग के कारण यह त्योहार 12 दिनों तक चलेगा। गणेश चतुर्थी पर्व की शुरुआत 14 सितंबर को गणेश स्थापना के साथ होगी और 25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी विसर्जन के साथ इसका समापन होगा। इस साल, गणेश चतुर्थी भाद्रपद शुक्ल की तृतीया तिथि के साथ पड़ेगी। 12 दिनों का गणेशोत्सव 2017 के नौ साल बाद हो रहा है। यह किसी तय 9 साल के गणितीय नियम की वजह से नहीं है। बल्कि, यह हिंदू पंचांग में तिथियों की गणना पर निर्भर करता है।

बप्पा का विसर्जन भक्तों के विघ्न का विसर्जन है

उत्सव के अंतिम दिन यानी अनंत चतुर्दशी के दिन प्रतिमा को ढोल-नगाड़ों और जुलूस के साथ नदी, तालाब या समुद्र में विसर्जित किया जाता है। विसर्जन इस बात का प्रतीक है कि भगवान गणेश अपने लोक (कैलाश) लौट रहे हैं और भक्तों के सभी विघ्न अपने साथ ले जा रहे हैं।

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