Bhadrapada Amavasya Kab Hai 2026: 10 या 11 सितंबर, कब होगी भाद्रपद अमावस्या, जानें इस दिन कुशा को जमा करने का क्या है महत्व

Bhadrapada Amavasya Kab Hai 2026: हिंदू धर्म में भाद्रपद माह की अमावस्या तिथि को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे कुशोत्पाटिनी अमावस्या या पिठोरी अमावस्या भी कहा जाता है। पूरे साल में आने वाली 12 अमावस्या तिथियों में भाद्रपद अमावस्या का विशेष स्थान है। शास्त्रानुसार, इस दिन पूरे वर्ष भर के धार्मिक अनुष्ठानों, पूजा-पाठ, पिंडदान और तर्पण के लिए इस दिन पवित्र ‘कुश’ (एक विशेष प्रकार की घास) को जड़ सहित तोड़कर जमा किया जाता है। इस दिन तोड़ी गई कुश पूरे एक वर्ष तक पवित्र और उपयोग योग्य मानी जाती है।

हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। यह तिथि पितरों को समर्पित है और इस दिन गंगा आदि पवित्र नदियों में स्नान के बाद पितृ तर्पण और श्राद्ध किया जाता है। भाद्रपद अमावस्या के दिन तोड़ी जाने वाली कुशा घास का विशेष धार्मिक महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुश घास की जड़ में भगवान ब्रह्मा, मध्य में भगवान विष्णु और अग्रभाग नोक में भगवान शिव का वास माना गया है। यह अमावस्या पितरों की शांति, तर्पण और श्राद्ध कर्म के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। इसके ठीक बाद पितृ पक्ष (श्राद्ध) का आगमन होता है।

भाद्रपद अमावस्या 2026 सही तारीख

पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या 10 सितंबर को सुबह 10:33 बजे से शुरू हो रही है और यह 11 सितंबर को सुबह 8:56 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर देखा जाए तो 11 सितंबर को भाद्रपद की अमावस्या तिथि में सूर्योदय सुबह में 06:04 ए एम पर होगा, इसलिए भाद्रपद अमावस्या 11 सितंबर को होगी। लेकिन उस दिन पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान आदि नहीं होगा क्योंकि अमावस्या तिथि सुबह 8:56 बजे ही खत्म हो जा रही है।

ऐसे में भाद्रपद की दर्श अमावस्या 10 सितंबर को है। दर्श अमावस्या के दिन पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान आदि किया जाएगा। इस दिन कुशा ग्रहण करने की परंपरा को धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया है। 11 सितंबर को भाद्रपद अमावस्या का स्नान और दान होगा।

पितरों के तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान का समय

10 सितंबर को दर्श अमावस्या पर पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान आदि कार्य सुबह में 11:30 बजे से करें और दोपहर 02:30 बजे तक उसे पूर्ण कर लें। इस दिन ही पितरों के लिए पंचबलि कर्म, ब्राह्मण भोज आदि किया जा सकता है।

भाद्रपद अमावस्या 2026 स्नान मुहूर्त

11 सितंबर को भाद्रपद अमावस्या को ब्रह्म मुहूर्त में स्नान सबसे उत्तम समय होता है। भाद्रपद अमावस्या पर ब्रह्म मुहूर्त 04:32 ए एम से 05:18 ए एम तक है। इसके बाद अपनी क्षमता के अुनसार दान करें।

अमावस्या के दिन अपने सामर्थ्य अनुसार करें दान

अमावस्या के दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, तिल, गुड़ आदि का दान करने की परंपरा है। शाम के समय घर की साफ-सफाई कर दीपक जलाने और मां लक्ष्मी का स्मरण करने की भी मान्यता है। धार्मिक विश्वास के अनुसार साफ-सुथरा और सात्त्विक वातावरण घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

कुश उखाड़ने के नियम

इस बार कुशाग्रहणी अमावस्या पर कुशा ग्रहण करने की विधि और उससे जुड़े नियमों का ध्यान रखना बेहद जरूरी माना गया है।

  • सूर्योदय के समय स्नान करके हाथ जोड़कर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुंह करके कुश उखाड़ना चाहिए।
  • कुश को कभी भी लोहे या धातु के औजार (हंसिया/चाकू) से नहीं काटना चाहिए, केवल दाहिने हाथ से उखाड़ा जाता है।
  • कुश का अग्रभाग (नोक) टूटा हुआ या खंडित नहीं होना चाहिए।
  • कुश उखाड़ते समय पृथ्वी माता से अनुमति मांगने और “ॐ हूं फट् स्वाहा” अथवा “कुशाग्रवसते रुद्र…” मंत्र का जाप करने की परंपरा है।

Radha ashtami 2026 Date: 3 शुभ योगों में 19 सितंबर को मनाई जाएगी राधाष्टमी, जानें लाडली जी की पूजा का शुभ मुहूर्त और व्रत पारण समय

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Radha ashtami 2026 Date: हिंदू धर्म में भाद्रपद का महीना कई धार्मिक वजहों से खास माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, द्वापर युग में इसी माह में भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। और इसके 15 दिनों के बाद, यानी भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान कृष्ण की आल्हादिनी शक्ति और प्राणप्रिया राधा रानी का भी जन्म हुआ था। प्रतिवर्ष भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा रानी के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व कृष्ण जन्माष्टमी के ठीक 15 दिन बाद आता है।

शास्त्रों के अनुसार राधा रानी की आराधना के बिना भगवान श्रीकृष्ण की पूजा अधूरी मानी जाती है। इस दिन व्रत रखने और राधारानी की उपासना करने से सुख, समृद्धि, अखंड सौभाग्य और निष्काम प्रेम की प्राप्ति होती है। उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में बरसाना और वृंदावन में यह पर्व विशेष हर्षोल्लास और धूमधाम से मनाया जाता है। बरसाना के लाडली जी मंदिर में इस दिन विशेष अभिषेक, पूजन और भव्य उत्सव होता है। इस साल राधाष्टमी का पर्व शनिवार, 19 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन 3 शुभ योग बनने से इसका महत्व और बढ़ गया है।

राधाष्टमी 2026 तारीख

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 18 सितंबर को दोपहर 1 बजे से प्रारंभ होगी। इस तिथि का समापन 19 सितंबर को दोपहर 3 बजकर 26 मिनट पर होगा। उदयातिथि के आधार पर राधाष्टमी 19 सितंबर दिन शनिवार को है। राधाष्टमी की पूजा की जाती है। राधाष्टमी के दिन भक्त व्रत रखते हैं और श्री राधाजी की पूजा करते हैं।

राधाष्टमी 2026 में बन रहे 3 शुभ योग

इस साल राधाष्टमी के दिन आयुष्मान् योग, सौभाग्य योग और रवि योग, 3 शुभ योग बन रहे हैं। इस दिन आयुष्मान् योग प्रात:काल से लेकर दोपहर 2 बजकर 29 पी एम तक रहेगा। इस योग में आयु में वृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। दोपहर 2:29 बजे से सौभाग्य योग बनेगा, जो भाग्य को बढ़ाने वाला है।

इनके अलावा रवि योग राधाष्टमी की मध्य रात्रि यानि 20 सितंबर को 01:43 ए एम से बनेगा और सुबह 06:08 ए एम तक रहेगा। इस योग में सूर्य का प्रभाव अधिक होता है, जिसकी वजह से इस योग में कोई दोष नहीं रह जाता। राधाष्टमी के दिन मूल नक्षत्र प्रात:काल से लेकर 20 सितंबर को 01:43 ए एम तक रहेगा। उसके बाद से पूर्वाषाढा नक्षत्र होगा।

राधाष्टमी 2026 पूजा के शुभ मुहूर्त

इस बार राधाष्टमी की पूजा का शुभ मुहूर्त दिन में 11 बजकर 1 मिनट से शुरू है और दोपहर 1 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। राधाष्टमी को लाडली जी की पूजा के लिए आपको 2 घंटे 27 मिनट का शुभ समय प्राप्त होगा। राधाष्टमी पर ब्रह्म मुहूर्त 04:34 ए एम से लेकर 05:21 ए एम तक है, वहीं अभिजीत मुहूर्त दिन में 11 बजकर 50 मिनट से दोपहर 12 बजकर 39 मिनट तक रहेगा। राधारानी जी की पूजा के समय अभिजीत मुहूर्त भी विद्यमान रहेगा।

राधाष्टमी 2026 पारण

जो लोग राधाष्टमी का व्रत रखेंगे, वे पारण 20 सितंबर को सुबह 06:08 ए एम के बाद से कर सकते हैं।

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