Vishwakarma Puja Kab Hai 2026: सिद्ध योग आज की जाएगी देवताओं के शिल्पी भगवान विश्वकर्मा की पूजा, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त

Vishwakarma Puja Kab Hai 2026: विश्वकर्मा पूजा को विश्वकर्मा जयंती भी कहा जाता है। यह हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है, जो देवताओं के शिल्पी भगवान विश्वकर्मा को समर्पित है। भगवान विश्वकर्मा को ब्रह्मांड का पहला शिल्पकार, वास्तुकार और इंजीनियर माना जाता है। यह पर्व हर साल मुख्य रूप से 17 सितंबर कन्या संक्रांति के अवसर पर मनाया जाता है। इस दिन निर्माण कार्य से जुड़ी मशीनों, औजारों, गाड़ियों, कारखानों और इलेक्ट्रॉनिक्स की साफ-सफाई की जाती है और उनकी पूजा की जाती है। माना जाता है कि भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने से व्यापार में उन्नति होती है, मशीनों में खराबी नहीं आती और कार्यक्षेत्र में सफलता मिलती है।

विश्वकर्मा पूजा 2026 सही तारीख

विश्वकर्मा की पूजा कन्या संक्रांति के दिन की जाती है। सूर्य देव जब कन्या राशि में प्रवेश करते हैं तो उस समय कन्या संक्रांति होती है। वैदिक पंचांग के अनुसार, सूर्य देव 17 सितंबर को कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। कन्या में सूर्य का गोचर 17 सितंबर को सुबह 7:58 बजे होगा और इसी दिन कन्या संक्रांति मनाई जाएगी। इसलिए विश्वकर्मा पूजा भी 17 सितंबर गुरुवार को ही मनाई जाएगी।

विश्वकर्मा पूजा 2026 मुहूर्त

विश्वकर्मा पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 7:58 बजे से होगा क्योंकि इस समय ही कन्या संक्रांति का क्षण है। सुबह 10:43 ए एम से लेकर दोपहर 01:48 पी एम के बीच भी पूजा कर सकते हैं।

इसमें आपको चर-सामान्य मुहूर्त 10:43 ए एम से 12:15 पी एम और लाभ-उन्नति मुहूर्त दोपहर 12:15 पी एम से 01:48 पी एम प्राप्त हो जाएगा। शाम के समय में शुभ-उत्तम मुहूर्त 04:52 पी एम से 06:24 पी एम तक रहेगा। कन्या संक्रांति का पुण्य काल भी सुबह 7:58 बजे से लेकर दोपहर 02:31 बजे तक रहेगा।

पंचांग के अनुसार, विश्वकर्मा पूजा के दिन भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि है। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त 04:33 ए एम से 05:20 ए एम तक है, वहीं दिन का शुभ समय यानि अभिजीत मुहूर्त 11:51 ए एम से 12:40 पी एम तक है। विश्वकर्मा पूजा के दिन राहुकाल दोपहर में 01 बजकर 48 मिनट से दोपहर 03 बजकर 20 मिनट तक है।

विश्वकर्मा पूजा पर रहेंगे दो शुभ योग

इस साल विश्वकर्मा पूजा पर सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग विराजमान रहेंगे। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 06:07 ए एम से बनेगा और शाम 07:53 पी एम तक रहेगा। इस समय में ही रवि योग भी बन रहा है। ये दोनों ही शुभ योग फलदायी हैं।

विश्वकर्मा पूजा को प्रात:काल में विष्कम्भ योग बनेगा, जो दोपहर 12:50 पी एम तक है, उसके बाद से प्रीति योग का निर्माण होगा, जो रात्रि तक है। इस दिन अनुराधा नक्षत्र प्रात:काल से लेकर शाम 07:53 पी एम तक है, फिर ज्येष्ठा नक्षत्र है।

Kanya Sankranti 2026 Date: सूर्य के कन्या राशि में प्रवेश पर होगी कन्या संक्रांति कल, सूर्य दोष और करियर में उड़ान के लिए महापुण्यकाल में करें ये 4 उपाय

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Kanya Sankranti 2026 Date: ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को ग्रहों का राजा माना जाता है। ज्योतिष में सूर्य को पिता, अच्छी सेहत और करियर का कारक माना जाता है। सूर्य के राशि परिवर्तन का राशि चक्र की सभी 12 राशियों पर असर पड़ता है। यह ग्रह हर 30 दिनों में राशि परिवर्तन करता है। इस हिसाब से हर माह सूर्य का राशि परिवर्तन होता है, जिसे संक्रांति कहते हैं। सितंबर माह में सूर्य देव एक बार फिर राशि बदलने जा रहे हैं। इस बार सूर्य देव अपने मित्र बुध की राशि कन्या में प्रवेश करेंगे। इस समय अपनी उच्च राशि सिंह में गोचर कर रहे सूर्य देव जिस समय कन्या राशि में गोचर करेंगे, उस समय सूर्य की कन्या संक्रांति होगी।

कन्या संक्रांति के दिन लोग गंगा आदि पवित्र नदियों में स्नान के बाद अपनी क्षमता के अनुसार दान पुण्य करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इससे पाप मिटते हैं और पुण्य लाभ होता है। इस दिन पितरों को जल से तर्पण देना शुभ माना जाता है। कहते हैं ऐसा करने से पितृ तृप्त होते हैं और आशीर्वाद प्रदान करते हैं, जिससे जीवन में खुशहाली आती है। इस साल कन्या संक्रांति कल यानी 17 सितंबर को होगी। इस बार कन्या संक्रांति के साथ विश्वकर्मा पूजा का भी संयोग बन रहा है। कन्या संक्रांति के दिन कुछ ज्योतिष उपायों को करने से कुंडली का सूर्य दोष मिट जाता है और करियर में आने वाली रुकावटें भी दूर होती हैं।

कन्या संक्रांति 2026 तारीख

वैदिक पंचांग क अनुसार, कन्या राशि में सूर्य का प्रवेश 17 सितंबर को सुबह में 7 बजकर 58 मिनट पर होगा। उस समय कन्या संक्रांति का क्षण होगा। कन्या संक्रांति के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग बनेगा। इन दोनों ही शुभ योगों में किए गए कार्य सफल सिद्ध होंगे।

कन्या संक्रांति 2026 महापुण्य काल

कन्या संक्रांति का महापुण्य काल 2 घंटे 3 मिनट का होगा। महापुण्य काल सुबह में सुबह में 07 बजकर 58 मिनट से सुबह 10 बजकर 01 मिनट तक रहेगा।

वहीं कन्या संक्रांति का पुण्य काल सुबह में 07 बजकर 58 मिनट से दोपहर 02 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। इस आधार पर पुण्य काल का कुल समय 6 घंटे 33 मिनट का होगा। जो लोग किसी कारणवश महापुण्य काल में स्नान और दान न कर पाएं, वे पुण्य काल में ये काम कर सकते हैं।

कन्या संक्रांति 2026 पर करें सूर्य दोष के उपाय

कन्या संक्रांति पर अपनी कुंडली के सूर्य दोष को दूर करने के लिए महापुण्य काल में स्नान करें, पितरों को जल अर्पित करें और सूर्य देव को जल से अर्घ्य दें। इसके लिए एक लोटे में जल भरकर उसमें लाल रंग के फूल, लाल चंदन और थोड़ा सा गुड़ डालें। ओम सूर्य देवाय नम: मंत्र का जाप करते हुए भगवान भास्कर को अर्पित करें। फिर आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ और आरती करें।

कन्या संक्रांति पर सूर्य के शुभ प्रभाव की प्राप्ति के लिए सूर्य से संबंधित वस्तुओं का दान करें। सामर्थ्यानुसार गुड़, गेहूं, लाल चंदन, लाल रंग के वस्त्र, लाल फूल, तांबे के बर्तन आदि का दान किसी ब्राह्मण को कर सकते हैं।

सूर्य देव के बीज मंत्र ॐ घृणि: सूर्याय नम: का जाप लाल चंदन या रुद्राक्ष की माला से कर सकते हैं।

कन्या संक्रांति के अवसर पर अपने माता पिता और घर के वरिष्ठ लोगों की सेवा करें। पिता तुल्य किसी व्यक्ति की सेवा करके आशीर्वाद लें, आपकी उन्नति होगी।

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Anant Chaturdashi 2026 Date: अनंत चतुर्दशी पर 10 दिन वाले बप्पा लौटेंगे अपने धाम, जानें अनंत चतुर्दशी की सही तारीख और विसर्जन का मुहूर्त

Anant Chaturdashi 2026 Date: हिंदू धर्म में गणेश उत्सव बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। भाद्रपद माह शुक्ल चतुर्थी के दिन भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र गणेश भगवान धरती पर अपने भक्तों के बीच आते हैं। इसे गणेश चतुर्थी पर्व के नाम से जाना जाता है। बप्पा 10 दिन अपने भक्तों के बीच अतिथि बन कर रहते हैं और अनंत चतुर्दशी के दिन वापस अपने धाम लौट जाते हैं। लोग गणेश जी का विसर्जन करने से पूर्व उनसे अगले साल फिर आने का निवेदन करते हैं। ताकि उनके शुभ चरणों के आगमन से उनके जीवन में खुशहाली, शुभता और उन्नति आए।

हालांकि, भक्त अपनी सामर्थ्य और श्रद्धा के अनुसार गणेश जी का विसर्जन डेढ़ दिन, तीसरे दिन, पांचवे दिन, सातवें दिन और दसवें दिन करते हैं। 10 दिनों तक चलने वाले गणेशोत्सव का समापन अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश जी की मूर्तियों के विसर्जन के साथ होता है। पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को अनंत चतुर्दशी मनाते हैं। इस साल अनंत चतुर्दशी के दिन रवि योग बन रहा है। रवि योग में किए गए कार्य शुभ फलदायी होते हैं।

अनंत चतुर्दशी 2026 तारीख

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर को रात 11 बजकर 18 मिनट पर शुरू हो रही है और इस तिथि का समापन 25 सितंबर को रात 11 बजकर 6 मिनट पर होगा। उदयातिथि के आधार पर अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर दिन शुक्रवार को है।

अनंत चतुर्दशी 2026 श्री हरि की पूजा का शुभ मुहूर्त

अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा करने की विधान है। उस दिन पूजा के लिए आपको 16 घंटे 55 मिनट का शुभ मुहूर्त प्राप्त होता है। पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 11 मिनट से लेकर रात 11 बजकर 6 मिनट तक है।

अनंत चतुर्दशी 2026 पर रवि योग और शूल योग

इस साल अनंत चतुर्दशी पर रवि योग सुबह में 06 बजकर 11 मिनट से प्रारंभ होगा और सुबह 11 बजकर 22 मिनट तक रहेगा। इस योग में सूर्य का प्रभाव होने से सभी दोष मिट जाते हैं। उस दिन शूल योग सुबह से लेकर दोपहर 02 बजकर 51 मिनट तक है, उसके बाद से गण्ड योग बन रहा है। शतभिषा नक्षत्र प्रात:काल से लेकर सुबह 11 बजकर 22 मिनट तक रहेगा। उसके बाद से पूर्व भाद्रपद नक्षत्र है।

गणेश विसर्जन का शुभ मुहूर्त

अनंत चतुर्दशी पर सुबह में गणेश विसर्जन का समय 6 बजकर 11 मिनट से सुबह 10 बजकर 42 मिनट तक है। इसमें सुबह के चर, लाभ और अमृत मुहूर्त शामिल हैं।

अपराह्न के समय शुभ चौघड़िया मुहूर्त दोपहर में 12 बजकर 13 मिनट से दोपहर 01 बजकर 43 मिनट तक है। वहीं चर चौघड़िया मुहूर्त शाम में 04 बजकर 44 मिनट से शाम 06 बजकर 14 मिनट तक है।

रात के समय में गणेश विसर्जन का मुहूर्त 9 बजकर 14 मिनट से रात 10 बजकर 43 मिनट तक है। देर रात चौघड़िया मुहूर्त 12:13 ए एम से लेकर 26 सितंबर को 04:42 ए एम तक है। इसमें शुभ, अमृत और चर मुहूर्त शामिल हैं।

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Hartalika Teej Kab Hai 2026: 13 या 14 सितंबर, कब हरतालिका तीज व्रत करना होगा सही? जानिए तिथि के कंफ्यूजन पर क्या है शास्त्रानुसार समाधान

Hartalika Teej Kab Hai 2026: पति की लंबी उम्र और सुखी जीवन के लिए किया जाने हरतालिका व्रत हिंदू धर्म के अत्यंत पवित्र व्रत में से एक है। यह व्रत हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को किया जाता है। इस साल इस व्रत की तारीख को लेकर व्रतियों में काफी कंफ्यूजन है, क्योंकि इस साल हरतालिका तीज के लिए जरूरी भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 13 सितंबर और 14 सितंबर को दोनों दिन है। हरतालिका तीज की पूजा जहां प्रदोष काल और प्रात:काल सूर्योदय के समय भी की जाती है। प्रदोष और सूर्योदय पूजा मुहूर्त के आधार पर देखा जाए तो हरतालिका तीज का व्रत और पूजन 13 सितंबर को होना उचित रहेगा। लेकिन उदयातिथि के आधार पर गणना करें तो हरतालिका तीज 14 सितंबर को होना चाहिए। ऐसे में आइए जानें इस साल हरतालिका तीज कब है, 13 या 14 सितंबर को? शास्त्रों में इस समस्या का क्या समाधान मिलता है?

हरतालिका तीज 13 या 14 सितंबर?

पंचांग के अनुसार, इस साल भाद्रपद शुक्ल तृतीया तिथि 13 सितंबर को सुबह 7:08 बजे से लेकर 14 सितंबर को सुबह 7:06 बजे तक है। न्यूज 18 हिंदी की रिपोर्ट के अनुसार, भविष्योत्तर पुराण के अनुसार, भाद्रस्य कजली कृष्णा शुक्ला च हरतालिका यानि भाद्रपद शुक्ल तृतीया को हरतालिका तीज का व्रत रखना चाहिए। इसमें भी द्वितीया युक्त तृतीया तिथि में हरतालिका तीज नहीं मनाते हैं, तृतीया चतुर्थी युक्त हो तो ज्यादा उत्तम है। दरअसल द्वितीया तिथि का संबंध पितामह यानि दादा से होता है और चतुर्थी तिथि का संबंध पुत्र से होता है।

इस आधार पर देखा जाए तो 13 सितंबर को द्वितीया युक्त तृतीया तिथि मिल रही है, क्योंकि उस दिन उदयातिथि के अनुसार द्वितीया तिथि सुबह 7:08 बजे तक है, फिर तृतीया प्रारंभ हो रही है। ऐसे में हरतालिका तीज के लिए द्वितीया युक्त तृतीया तिथि का निषेध है। वहीं, 14 सितंबर को तृतीया की उदयातिथि सुबह 7:06 बजे तक है। उसके बाद से चतुर्थी तिथि का प्रारंभ हो जा रही है। ऐसे में 14 सितंबर को चतुर्थी युक्त तृतीया तिथि मिल रही है। ऐसे में 14 सितंबर को ही हरतालिका तीज का व्रत रखना और पूजा करना शास्त्र सम्मत है।

हरतालिका तीज मुहूर्त 2026

14 सितंबर को ब्रह्म मुहूर्त 04:32 ए एम से 05:19 ए एम के बीच उठकर स्नान आदि से निवृत होकर हरतालिका तीज व्रत और गौरी-शिव पूजा का संकल्प करें। उस दिन का शुभ समय यानि अभिजीत मुहूर्त 11:52 ए एम से 12:41 पी एम तक है। सुबह में हरतालिका तीज की पूजा के लिए सुबह 06:05 बजे से सुबह 07:06 बजे के बीच शुभ होगा। इस समय में आपको अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त भी प्राप्त होगा, जो सुबह 06:05 ए एम से लेकर 07:38 ए एम तक है। सुबह की पूजा ब्रह्म योग और चित्रा नक्षत्र में होगी। ब्रह्म योग दोपहर 12:47 पी एम तक है।

प्रदोष काल में हरतालिका तीज की पूजा सूर्यास्त के बाद शाम 06:28 बजे के बाद से कर सकते हैं। प्रदोष पूजा के समय रवि योग, इंद्र योग और स्वाति नक्षत्र मिल जाएगा, जो उस दिन दोपहर में 1 बजकर 55 मिनट से प्रारंभ होगा और 15 सितंबर को सुबह 6 बजकर 6 मिनट तक रहेगा। इंद्र योग दोपहर में 12:47 पी एम से प्रारंभ है।

हरतालिका तीज 2026 राहुकाल

तीज वाले दिन राहुकाल सुबह में ही प्रारंभ हो रहा है। राहुकाल सुबह 07 बजकर 38 मिनट से सुबह 09 बजकर 11 मिनट तक है। अपनी पूजा की तैयारी इस समय को ध्यान में रखते हुए करें।

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Parivartini Ekadashi 2026 2026 Date: योग निद्रा में जब करवट लेंगे भगवान विष्णु तब होगा परिवर्तनी एकादशी का व्रत, जानें तारीख और समय

Parivartini Ekadashi 2026 2026 Date: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष स्थान है। यह तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है। श्रीहरि के भक्त इस दिन उपवास करते हैं और विधि-विधान से भगवान की पूजा करते हैं। पूरे साल में हर माह दो एकादशी आती है। इन्हीं में से एक है भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि, जिसे परिवर्तनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। यह दिन चातुर्मास में विशेष स्थान रखता है, क्योंकि इस समय भगवान विष्णु योग निद्रा में रहते हैं और परिवर्तिनी एकादशी के दिन करवट बदलते हैं। माना जाता है कि हरि कृपा से इस दिन व्रत करने वाले भक्तों के सभी पाप और कष्ट मिट जाते हैं। परिवर्तनी एकादशी का व्रत करने पर वाजपेय यज्ञ के समान पुण्य फल प्राप्त होता है।

परिवर्तिनी एकादशी 2026 तारीख

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 21 सितंबर को रात में 8 बजे से प्रारंभ हो रही है। यह तिथि अगले दिन 22 सितंबर को रात 9 बजकर 43 मिनट तक रहेगी। ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, परिवर्तिनी एकादशी का व्रत 22 सितंबर मंगलवार को रखा जाएगा। इस दिन पाताल लोक की भद्रा भी रहेगी।

परिवर्तिनी एकादशी 2026 पर रहेगा रवि योग

परिवर्तिनी एकादशी के दिन रवि योग बन रहा है। उस दिन रवि योग सुबह 6 बजकर 9 मिनट पर प्रारंभ होगा और सुबह 7 बजकर 6 मिनट तक रहेगा। इस योग में सूर्य का प्रभाव अधिक होने से कोई दोष नहीं रह जाता है। इस दिन रवि योग के अलावा अतिगंड और सुकर्मा योग भी बनेंगे। अतिगंड योग प्रात:काल से शुरू होकर शाम 04 बजकर 29 पी एम तक रहेगा। इसे शुभ योग नहीं मान जाता है, लेकिन अतिगंड योग के बाद सुकर्मा योग प्रारंभ होगा। सुकर्मा योग पूरी रात तक रहेगा। यह एक शुभ योग है, इसमें कोई भी शुभ काम कर सकते हैं। व्रत के दिन उत्तराषाढ़ा नक्षत्र प्रात:काल से सुबह 07:06 ए एम तक है, उसके बाद से श्रवण नक्षत्र प्रांरभ है।

परिवर्तिनी एकादशी 2026 मुहूर्त

परिवर्तिनी एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त 04:35 ए एम से 05:22 ए एम के बीच है। इसमें स्नान आदि से निवृत होकर व्रत और पूजा का संकल्प करना उत्तम माना जाता है। पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 09:11 ए एम से दोपहर 01:45 पी एम के बीच हैं।

एकादशी को लाभ-उन्नति मुहूर्त सुबह में 10:43 ए एम से दोपहर 12:14 पी एम तक है, उसके बाद अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त दोपहर 12:14 पी एम से 01:45 पी एम तक रहेगा। उस दिन का अभिजीत मुहूर्त 11 बजकर 49 ए एम से लेकर दोपहर 12 बजकर 38 पी एम तक रहेगा।

परिवर्तिनी एकादशी 2026 पारण

परिवर्तिनी एकादशी व्रत का पारण 23 सितंबर बुधवार को होगा। श्रद्धालु सुबह 06:10 ए एम से लेकर 08:35 ए एम के बीच कभी भी पारण करके व्रत को पूरा कर सकते हैं। उस दिन द्वादशी तिथि का समापन रात में 10 बजकर 50 मिनट पर होगा।

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Radha ashtami 2026 Date: 3 शुभ योगों में 19 सितंबर को मनाई जाएगी राधाष्टमी, जानें लाडली जी की पूजा का शुभ मुहूर्त और व्रत पारण समय

Radha ashtami 2026 Date: हिंदू धर्म में भाद्रपद का महीना कई धार्मिक वजहों से खास माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, द्वापर युग में इसी माह में भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। और इसके 15 दिनों के बाद, यानी भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान कृष्ण की आल्हादिनी शक्ति और प्राणप्रिया राधा रानी का भी जन्म हुआ था। प्रतिवर्ष भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा रानी के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व कृष्ण जन्माष्टमी के ठीक 15 दिन बाद आता है।

शास्त्रों के अनुसार राधा रानी की आराधना के बिना भगवान श्रीकृष्ण की पूजा अधूरी मानी जाती है। इस दिन व्रत रखने और राधारानी की उपासना करने से सुख, समृद्धि, अखंड सौभाग्य और निष्काम प्रेम की प्राप्ति होती है। उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में बरसाना और वृंदावन में यह पर्व विशेष हर्षोल्लास और धूमधाम से मनाया जाता है। बरसाना के लाडली जी मंदिर में इस दिन विशेष अभिषेक, पूजन और भव्य उत्सव होता है। इस साल राधाष्टमी का पर्व शनिवार, 19 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन 3 शुभ योग बनने से इसका महत्व और बढ़ गया है।

राधाष्टमी 2026 तारीख

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 18 सितंबर को दोपहर 1 बजे से प्रारंभ होगी। इस तिथि का समापन 19 सितंबर को दोपहर 3 बजकर 26 मिनट पर होगा। उदयातिथि के आधार पर राधाष्टमी 19 सितंबर दिन शनिवार को है। राधाष्टमी की पूजा की जाती है। राधाष्टमी के दिन भक्त व्रत रखते हैं और श्री राधाजी की पूजा करते हैं।

राधाष्टमी 2026 में बन रहे 3 शुभ योग

इस साल राधाष्टमी के दिन आयुष्मान् योग, सौभाग्य योग और रवि योग, 3 शुभ योग बन रहे हैं। इस दिन आयुष्मान् योग प्रात:काल से लेकर दोपहर 2 बजकर 29 पी एम तक रहेगा। इस योग में आयु में वृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। दोपहर 2:29 बजे से सौभाग्य योग बनेगा, जो भाग्य को बढ़ाने वाला है।

इनके अलावा रवि योग राधाष्टमी की मध्य रात्रि यानि 20 सितंबर को 01:43 ए एम से बनेगा और सुबह 06:08 ए एम तक रहेगा। इस योग में सूर्य का प्रभाव अधिक होता है, जिसकी वजह से इस योग में कोई दोष नहीं रह जाता। राधाष्टमी के दिन मूल नक्षत्र प्रात:काल से लेकर 20 सितंबर को 01:43 ए एम तक रहेगा। उसके बाद से पूर्वाषाढा नक्षत्र होगा।

राधाष्टमी 2026 पूजा के शुभ मुहूर्त

इस बार राधाष्टमी की पूजा का शुभ मुहूर्त दिन में 11 बजकर 1 मिनट से शुरू है और दोपहर 1 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। राधाष्टमी को लाडली जी की पूजा के लिए आपको 2 घंटे 27 मिनट का शुभ समय प्राप्त होगा। राधाष्टमी पर ब्रह्म मुहूर्त 04:34 ए एम से लेकर 05:21 ए एम तक है, वहीं अभिजीत मुहूर्त दिन में 11 बजकर 50 मिनट से दोपहर 12 बजकर 39 मिनट तक रहेगा। राधारानी जी की पूजा के समय अभिजीत मुहूर्त भी विद्यमान रहेगा।

राधाष्टमी 2026 पारण

जो लोग राधाष्टमी का व्रत रखेंगे, वे पारण 20 सितंबर को सुबह 06:08 ए एम के बाद से कर सकते हैं।

Hartalika Teej 2026: कई दुर्लभ संयोगों में इस साल मनेगा हरतालिका तीज व्रत, जानें इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त

Hartalika Teej 2026: कई दुर्लभ संयोगों में इस साल मनेगा हरतालिका तीज व्रत, जानें इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त

Hartalika Teej 2026: हिंदू धर्म में हरतालिका तीज का व्रत विशेष स्थान रखता है। यह व्रत हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को किया जाता है। पंचांग के अनुसार, इस साल 14 सितंबर 2026 को यह व्रत किया जाएगा। इस साल हरतालिका तीज के व्रत में कई दुर्लभ संयोग बन रहे हैं, जैसे इसी दिन गणेश चतुर्थी भी मनाई जाएगी। साथ ही इस दिन सोमवार का दिन है, जो भगवान शिव को समर्पित है। हरतालिका तीज का व्रत अखंड सौभग्य और सुख-समृद्धि के लिए किया जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं और कुंवारी कन्याएं दोनों ही निर्जला उपवास करती हैं। इस साल हरतालिका तीज व्रत के दिन रवि योग के साथ 3 शुभ योगों का भी निर्माण होगा। इससे यह दिन और भी शुभ फलदायी माना जा रहा है। आइए जानते हैं हरतालिका तीज पर बनने वाले शुभ संयोग और पूजा मुहूर्त के बारे में।

3 शुभ योग में हरतालिका तीज व्रत

हरतालिका तीज के दिन ब्रह्म योग, रवि योग और इंद्र योग बन रहे हैं। उस दिन ब्रह्म योग प्रात:काल से लेकर दोपहर 12:47 पी एम तक है, उसके बाद से इंद्र योग बनेगा। तीज और चतुर्थी पर रवि योग दोपहर में 01:55 पी एम से बनेगा और 15 सितंबर को सुबह 06:06 ए एम तक रहेगा।

हरतालिका तीज पर 4 अद्भुत संयोग

हरतालिका तीज की भाद्रपद शुक्ल तृतीया तिथि 14 सितंबर को सुबह 07 बजकर 06 मिनट तक है। उसके बाद से भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि प्रारंभ हो जाएगी, जो 15 सितंबर को सुबह 7 बजकर 44 मिनट तक रहेगी। इस तरह 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी का उत्सव और हरतालिका तीज दोनों एक साथ मनाए जाएंगे। इस दिन सोमवार भी है, जो भगवान शिव की कृपा प्राप्ति का सुंदर अवसर है। इस दिन दक्षिण भारत का प्रमुख स्वर्ण गौरी व्रत भी है, जिसे गौरी हब्बा कहते हैं। यह व्रत कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में रखा जाता है, जिसमें देवी पार्वती की पूजा करते हैं।

हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी मुहूर्त

हरतालिका तीज की पूजा जहां प्रदोष काल में होगी। वहीं गणेश चतुर्थी की मूर्ति स्थापना और पूजा उससे पहले ही दिन में हो जाएगी।

हरतालिका तीज पूजा का समय : इस दिन सुबह भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा 06:05 बजे से 07:38 बजे के बीच होगी। जिनके यहां शाम की पूजा होती है, वे प्रदोष काल में 06:28 पी एम से पूजा करेंगे।

गणेश चतुर्थी पूजा का समय : गणेश चतुर्थी पूजा मुहूर्त 11:02 एम से लेकर दोपहर 1:31 पीएम तक है। इस समय में आप विधिपूर्वक गणेश जी की पूजा कर लें।

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Putrada Ekadashi 2026: आज सावन पुत्रदा एकादशी पर 3 बेहद शुभ योगों का दुर्लभ संयोग, 5 राशियों के जातक धन और करियर में पाएंगे बड़ा लाभ

Putrada Ekadashi 2026: हिंदू धर्म पुत्रदा एकादशी का विशेष स्थान है। यह व्रत साल में दो बार सावन और पौष माह में किया जाता है। आज सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत है। यह व्रत सावन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। हिंदू धर्म में भगवान विष्णु को समर्पित एक अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्रत विशेष रूप से संतान प्राप्ति, संतान के सुख-समृद्धि और उसकी दीर्घायु की कामना के लिए रखा जाता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जो दंपत्ति निसंतान हैं या जिन्हें संतान सुख प्राप्त करने में बाधाएं आ रही हैं, वे यदि इस व्रत को विधि-विधान से रखते हैं, तो उन्हें योग्य संतान की प्राप्ति होती है। इस दिन भगवान विष्णु और उनके कृष्ण रूप की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस बार पुत्रदा एकादशी पर सिद्धि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग का संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन शुभ योगों में पूजा-पाठ और धार्मिक कार्य करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। सर्वार्थ सिद्धि योग को कार्यों में सफलता और मनोकामना पूर्ति के लिए विशेष शुभ माना जाता है।

इन 5 राशियों के लिए शुभ रह सकता है समय

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार पुत्रदा एकादशी पर बनने वाले शुभ योगों का असर कुछ राशियों के लिए सकारात्मक रह सकता है। इस दौरान धन, करियर और कारोबार में अच्छे अवसर मिलने के योग बन सकते हैं।

वृषभ राशि : वृषभ राशि वालों के लिए आर्थिक स्थिति मजबूत होने के संकेत हैं। आय के नए स्रोत बन सकते हैं। रुका हुआ धन वापस मिलने की संभावना है.नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारी मिल सकती है।

मिथुन राशि : मिथुन राशि वालों के लिए करियर में तरक्की के अवसर बन सकते हैं। नया प्रोजेक्ट या कारोबार से जुड़ी कोई अच्छी डील मिल सकती है। प्रभावशाली लोगों से संपर्क भविष्य में लाभ दिला सकता है।

सिंह राशि : सिंह राशि वालों को भाग्य का साथ मिल सकता है। नौकरी में प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिलने के योग हैं। कारोबारियों को अच्छा मुनाफा मिल सकता है। आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा।

तुला राशि : तुला राशि वालों के लिए यह समय आर्थिक मामलों में शुभ रह सकता है। कारोबार विस्तार की योजना आगे बढ़ सकती है। परिवार की ओर से कोई शुभ समाचार मिल सकता है।

मीन राशि : मीन राशि के जातकों के लिए अटके हुए काम पूरे होने के योग हैं। नौकरी और कारोबार में नए अवसर मिल सकते हैं। आर्थिक स्थिति में सुधार के साथ मानसिक शांति भी प्राप्त हो सकती है।

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Bhauma Pradosh Vrat 2026 Date: सावन के दूसरे और अंतिम प्रदोष व्रत पर त्रिपुष्कर योग का संयोग, जानें कब होगा भौम प्रदोष व्रत और पूजा का मुहूर्त

Bhauma Pradosh Vrat 2026 Date: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का अहम स्थान है। यह तिथि भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। माना जाता है कि भगवान शिव इस दिन कैलाश पर्वत पर प्रदोष काल में प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते हैं। और इस समय भगवान की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। प्रदोष व्रत हिंदू कैलेंडर के हर माह की कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। इस व्रत में प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के बाद पूजा का विधान है। प्रदोष व्रत का नाम उस दिन से तय होता है, जब यह तिथि पड़ रही हो। जैसे सोमवार को त्रयोदशी तिथि लगने पर सोम प्रदोष व्रत किया जाता है।

सावन माह का अंतिम प्रदोष व्रत मंगलवार के पड़ रहा है। सावन शुक्ल त्रयोदशी तिथि मंगलवार के दिन पड़ने की वजह से यह भौम प्रदोष व्रत होगा। यह व्रत उन श्रद्धालुओं के लिए खासतौर से फलदायी होता है जिनकी कुंडली में मंगल दोष होता है। संतान की प्राप्ति के लिए भी प्रदोष व्रत रखा जाता है। इस दिन मंगला गौरी व्रत का भी सुंदर संयोग बनेगा। इस व्रत के दिन शिव पूजा के लिए करीब सवा दो घंटे का मुहूर्त है। सावन के भौम प्रदोष व्रत के दिन त्रिपुष्कर योग बन रहा है, जो तीन गुना फल प्रदान करने वाला माना जाता है।

भौम प्रदोष व्रत 2026 तारीख

श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 25 अगस्त को सुबह 6 बजकर 20 मिनट पर प्रारंभ होगी। इस तिथि की समाप्ति 26 अगस्त को सुबह में 7 बजकर 59 मिनट पर होगी। उदयातिथि के आधार पर त्रयोदशी तिथि 26 अगस्त को है, लेकिन सावन का अंतिम प्रदोष यानि भौम प्रदोष व्रत 25 अगस्त दिन मंगलवार को रखा जाएगा। क्योंकि प्रदोष काल का पूजा मुहूर्त 25 अगस्त को मिल रहा है।

भौम प्रदोष व्रत 2026 मुहूर्त

इस बार भौम प्रदोष व्रत की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त शाम को 6 बजकर 51 मिनट से है, जो रात 9 बजकर 4 मिनट तक रहेगा। शिव पूजा के लिए भक्तों को 2 घंटे 13 मिनट का शुभ समय प्राप्त होगा। इसके अलावा प्रदोष के दिन ब्रह्म मुहूर्त प्रात:काल 04:27 ए एम से 05:11 ए एम तक है, वहीं अभिजीत मुहूर्त दिन में 11 बजकर 57 मिनट से दोपहर 12 बजकर 49 मिनट तक रहेगा। उस दिन का निशिता मुहूर्त देर रात 12:01 ए एम से लेकर 26 अगस्त को 12:45 ए एम तक है।

भौम प्रदोष व्रत में त्रिपुष्कर योग का संयोग

सावन का यह भौम प्रदोष व्रत त्रिपुष्कर योग में किया जाएगा। त्रिपुष्कर योग सुबह 5 बजकर 55 मिनट से सुबह 6 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। इस योग में किए गए शुभ कार्यों के तीन गुने फल प्राप्त होते हैं। प्रदोष के दिन रवि योग भी बन रहा है, जो रात में 10 बजकर 51 मिनट से 26 अगस्त को सुबह 5 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। रवि योग भी एक शुभ योग होता है। उस दिन सुबह में आयुष्मान् योग 07 बजकर 41 मिनट तक रहेगा। इस योग में आयु लंबी होती है, उत्तम सेहत का आशीर्वाद मिलता है। सुबह 7:41 बजे से सौभाग्य योग बनेगा, जो रात तक रहेगा। त्रयोदशी व्रत पर उत्तराषाढा नक्षत्र प्रात:काल से लेकर रात 10:51 पी एम तक रहेगा, फिर श्रवण नक्षत्र का प्रारंभ होगा।

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Mangala Gauri Vrat 2026: 3 शुभ योगों में सावन का पहला मंगला गौरी व्रत आज, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और नियम

Mangala Gauri Vrat 2026: सावन का महीना सिर्फ भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए ही नहीं जाना जाता है। इस माह में जहां सोमवार का विशेष महत्व है, उसी तरह मंगलवार के दिन का भी विशेष स्थान है। सावन माह में आने वाले सभी मंगलवार को मंगला गौरी का व्रत किया जाता है। माना जाता है कि पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से मंगला गौरी व्रत से वैवाहिक जीवन सुखमय बनता है और रिश्तों में मधुरता आती है। इस दिन मां गौरी के साथ भगवान शिव और भगवान गणेश की भी पूजा की जाती है।

यह व्रत माता पार्वती की कृपा पाने और पति की लंबी उम्र के लिए किया जाता है। अविवाहित कन्याएं मंगला गौरी व्रत मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए करती हैं। साल 2026 में सावन माह का पहला मंगलवार आज है, इसलिए आज मंगला गौरी व्रत किया जा रहा है। पंचांग के अनुसार सावन के पहले मंगला गौरी व्रत में तीन शुभ योग बनने से यह दिन और भी पावन हो गया है।

3 शुभ योगों का संयोग

पंचांग के अनुसार, सावन का पहला मंगला गौरी व्रत कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को किया जाएगा, जो रात 10:03 बजे तक रहेगी। सावन के पहले मंगल गौरी व्रत पर एक साथ तीन शुभ योग बन रहे हैं। सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग और रवि योग बन रहे हैं। ये तीनों शुभ योग 4 अगस्त की रात 9:54 बजे से शुरू होकर 5 अगस्त की सुबह 5:45 बजे तक रहेंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसे संयोग में पूजा-पाठ और भगवान का स्मरण करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा सुबह से शाम 7:33 बजे तक धृति योग रहेगा और इसके बाद शूल योग शुरू होगा। वहीं रेवती नक्षत्र रात 9:54 बजे तक रहेगा, जिसके बाद अश्विनी नक्षत्र लग जाएगा।

मंगला गौरी व्रत शुभ मुहूर्त

मंगल गौरी के दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:20 बजे से 5:02 बजे तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:00 बजे से 12:54 बजे तक है, जबकि सामान्य पूजा का समय सुबह 9:06 बजे से दोपहर 2:08 बजे तक माना गया है। जो लोग प्रदोष काल में पूजा करते हैं, वे शाम 7:10 बजे के बाद पूजा शुरू कर सकते हैं।

भद्रा और पंचक का रखें ध्यान

पहले मंगल गौरी व्रत के दिन भद्रा और पंचक दोनों का संयोग भी बन रहा है। भद्रा 4 अगस्त रात 10:03 बजे से शुरू होकर 5 अगस्त सुबह 5:45 बजे तक रहेगी। मान्यता है कि इस दौरान भद्रा स्वर्ग लोक में रहेगी, इसलिए इसका शुभ कामों पर नकारात्मक असर नहीं माना जाता। वहीं, चोर पंचक सुबह 5:44 बजे से रात 9:54 बजे तक रहेगा। परंपरा के अनुसार, इस दौरान कीमती सामान का थोड़ा ज्यादा ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।

5 साल मंगला गौरी व्रत करने की परंपरा

मंगल गौरी व्रत विवाहित कन्याएं शादी के बाद 5 साल तक यह व्रत करती हैं। इस व्रत से जुड़ी पुरानी परंपरा के अनुसार, शादी के बाद जब पहला सावन आता है, तो महिला को पहला मंगल गौरी व्रत अपने मायके में रखना चाहिए। इसके बाद अगले चार साल तक यह व्रत ससुराल में रखा जाता है। यानी शादी के बाद लगातार पांच साल तक इस व्रत को करने की परंपरा बताई जाती है।

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