Mangala Gauri Vrat 2026: 3 शुभ योगों में सावन का पहला मंगला गौरी व्रत आज, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और नियम

Mangala Gauri Vrat 2026: सावन का महीना सिर्फ भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए ही नहीं जाना जाता है। इस माह में जहां सोमवार का विशेष महत्व है, उसी तरह मंगलवार के दिन का भी विशेष स्थान है। सावन माह में आने वाले सभी मंगलवार को मंगला गौरी का व्रत किया जाता है। माना जाता है कि पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से मंगला गौरी व्रत से वैवाहिक जीवन सुखमय बनता है और रिश्तों में मधुरता आती है। इस दिन मां गौरी के साथ भगवान शिव और भगवान गणेश की भी पूजा की जाती है।

यह व्रत माता पार्वती की कृपा पाने और पति की लंबी उम्र के लिए किया जाता है। अविवाहित कन्याएं मंगला गौरी व्रत मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए करती हैं। साल 2026 में सावन माह का पहला मंगलवार आज है, इसलिए आज मंगला गौरी व्रत किया जा रहा है। पंचांग के अनुसार सावन के पहले मंगला गौरी व्रत में तीन शुभ योग बनने से यह दिन और भी पावन हो गया है।

3 शुभ योगों का संयोग

पंचांग के अनुसार, सावन का पहला मंगला गौरी व्रत कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को किया जाएगा, जो रात 10:03 बजे तक रहेगी। सावन के पहले मंगल गौरी व्रत पर एक साथ तीन शुभ योग बन रहे हैं। सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग और रवि योग बन रहे हैं। ये तीनों शुभ योग 4 अगस्त की रात 9:54 बजे से शुरू होकर 5 अगस्त की सुबह 5:45 बजे तक रहेंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसे संयोग में पूजा-पाठ और भगवान का स्मरण करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा सुबह से शाम 7:33 बजे तक धृति योग रहेगा और इसके बाद शूल योग शुरू होगा। वहीं रेवती नक्षत्र रात 9:54 बजे तक रहेगा, जिसके बाद अश्विनी नक्षत्र लग जाएगा।

मंगला गौरी व्रत शुभ मुहूर्त

मंगल गौरी के दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:20 बजे से 5:02 बजे तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:00 बजे से 12:54 बजे तक है, जबकि सामान्य पूजा का समय सुबह 9:06 बजे से दोपहर 2:08 बजे तक माना गया है। जो लोग प्रदोष काल में पूजा करते हैं, वे शाम 7:10 बजे के बाद पूजा शुरू कर सकते हैं।

भद्रा और पंचक का रखें ध्यान

पहले मंगल गौरी व्रत के दिन भद्रा और पंचक दोनों का संयोग भी बन रहा है। भद्रा 4 अगस्त रात 10:03 बजे से शुरू होकर 5 अगस्त सुबह 5:45 बजे तक रहेगी। मान्यता है कि इस दौरान भद्रा स्वर्ग लोक में रहेगी, इसलिए इसका शुभ कामों पर नकारात्मक असर नहीं माना जाता। वहीं, चोर पंचक सुबह 5:44 बजे से रात 9:54 बजे तक रहेगा। परंपरा के अनुसार, इस दौरान कीमती सामान का थोड़ा ज्यादा ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।

5 साल मंगला गौरी व्रत करने की परंपरा

मंगल गौरी व्रत विवाहित कन्याएं शादी के बाद 5 साल तक यह व्रत करती हैं। इस व्रत से जुड़ी पुरानी परंपरा के अनुसार, शादी के बाद जब पहला सावन आता है, तो महिला को पहला मंगल गौरी व्रत अपने मायके में रखना चाहिए। इसके बाद अगले चार साल तक यह व्रत ससुराल में रखा जाता है। यानी शादी के बाद लगातार पांच साल तक इस व्रत को करने की परंपरा बताई जाती है।

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First Sawan Somwar 2026 Shubh Yog: 04 शुभ योगों में 03 अगस्त को होगा सावन के पहले सोमवार का व्रत, जानें जलाभिषेक और शिव पूजन का शुभ मुहूर्त

First Sawan Somwar 2026 Shubh Yog: यूं तो हर सप्ताह सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित है। लेकिन सावन के महीने में आने वाले सोवमार का विशेष स्थान है। शिव भक्तों के लिए यह दिन अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस दिन वे अपने आराध्य के लिए खास पूजा, उपवास और अनुष्ठान करते हैं। साल 2026 में सावन के महीने में 4 सोमवार का सौभाग्य बन रहा है। सावन के सोमवार व्रत करने वाले श्रद्धालु इस व्रत का उद्यापन चौथे और अंतिम सोमवार को करते हैं।

सावन के पहले सोमवार पर बने रहे हैं 4 शुभ योग

इस साल पहले सावन सोमवार पर 4 शुभ योग बन रहे हैं, जो लोगों के लिए शुभ फलदायी हैं। वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन का पहला सोमवार श्रावण कृष्ण पंचमी तिथि को है। उस दिन हंसराज योग, सुकर्मा योग, धृति योग और सर्वार्थ सिद्धि योग बनेंगे।

हंसराज योग : पंच महापुरुष योगों में से एक होता है। इस समय गुरु ग्रह अपनी उच्च राशि कर्क में विराजमान हैं, जिसकी वजह से हंसराज योग बना है।

सर्वार्थ सिद्धि योग : पहले सावन सोमवार को सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। सर्वार्थ सिद्धि योग मध्यरात्रि 00:01 बजे से लेकर सुबह 05 बजकर 44 मिनट तक रहेगा। इस योग में पूजा, जप, तप, दान आदि का पुण्य फल प्राप्त होता है।

सुकर्मा योग : इस दिन सुकर्मा योग प्रात:काल से लेकर रात 9 बजकर 13 मिनट तक रहेगा। सुकर्मा योग के स्वामी देव इंद्र और ग्रह मंगल हैं। यह शुभता प्रदान करने वाला मंगलकारी योग है।

धृति योग : पहले सावन सोमवार पर धृति योग रात में 9:13 बजे से पूर्ण रात्रि तक है। इसमें नया बिजनेस, भूमि पूजन, मकान की नींव डालना, नई वस्तु की खरीदारी करना अच्छा रहता है।

चोर पंचक में सावन के पहले सोमवार का व्रत

पहले सावन सोमवार को पूरे दिन चोर पंचक रहेगा। उत्तर भाद्रपद नक्षत्र प्रात:काल से लेकर रात 10:00 पी एम तक है, उसके बाद रेवती नक्षत्र है।

पहला सावन सोमवार 2026 जलाभिषेक मुहूर्त

सावन के पहले सोमवार को जलाभिषेक के साथ ही शिव जी की पूजा की जाएगी।

ब्रह्म मुहूर्त: 04:19 ए एम से 05:01 ए एम

अभिजीत मुहूर्त: 12:00 पी एम से 12:54 पी एम

अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: 05:44 ए एम से 07:24 ए एम

शुभ-उत्तम मुहूर्त: 09:05 ए एम से 10:46 ए एम

चर-सामान्य मुहूर्त: 02:08 पी एम से 03:49 पी एम

लाभ-उन्नति मुहूर्त: 03:49 पी एम से 05:30 पी एम

अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: 05:30 पी एम से 07:11 पी एम

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Panchak 2026: जुलाई में ये 10 दिन होंगे भारी, दो बार लग रहे पंचक की जानें सही तारीख और नियम

Panchak 2026: जुलाई 2026 का महीना धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस महीने में हिंदी माह आषाढ़ रहेगा और इसमें कई प्रमुख व्रत और पर्व आएंगे। इसके अलावा इस माह में दो बार पंचक का संयोग भी बनेगा। हिंदू धमें में कुछ ऐसे दिन बताए गए हैं, जब कोई भी शुभ काम नहीं किया जाता है। इनमें से एक है पंचक, जो पांच दिनों तक रहता है। ज्योतिष के अनुसार, चंद्रमा जब कुंभ और मीन राशि में गोचर करते हुए धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती नक्षत्र में रहता है तो उसे पंचक कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जुलाई 2026 के महीने में दो बार पंचक लग रहा है। जुलाई 2026 में पंचक की सही तारीखें, समय और इसके नियम नीचे दिए गए हैं :

जुलाई 2026 में पंचक की तिथियां

पहला पंचक (मृत्यु पंचक): 04 जुलाई 2026, शनिवार से प्रारंभ होकर 08 जुलाई 2026, बुधवार तक रहेगा। इस पंचक की शुरुआत शनिवार से होने के कारण इसे ‘मृत्यु पंचक’ कहा जाता है। ज्योतिष में इसे बेहद संवेदनशील और अशुभ माना जाता है, इसलिए इस दौरान विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

दूसरा पंचक (चोर पंचक): 31 जुलाई 2026, शुक्रवार को प्रारंभ होकर अगले महीने यानि 04 अगस्त 2026 को समाप्त होगा। यह पंचक शुक्रवार से शुरू होगा, इसलिए ये ‘चोर पंचक’ कहा जाता है। इस दौरान धन हानि या चोरी का खतरा रहता है।

पंचक में ये न करें

शास्त्रों के अनुसार पंचक के दौरान 5 कार्यों को करने की सख्त मनाही होती है, क्योंकि माना जाता है कि इस दौरान किए गए गलत काम का प्रभाव 5 गुना बढ़ जाता है:

  • पंचक के दौरान दक्षिण दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए, क्योंकि इस दिशा को यमराज की दिशा माना जाता है।
  • पंचक काल में मकान का लेंटर या छत डलवाने का काम पूरी तरह वर्जित होता है। ऐसा करने से धन हानि और घर में अशांति हो सकती है।
  • इन 5 दिनों में घर के निर्माण के लिए लकड़ी खरीदना, काटना या घास-फूस और ईंधन इकट्ठा करना अशुभ माना जाता है। इससे आग का भय रहता है।
  • पंचक के दौरान नया पलंग, चारपाई बनाना या खरीदना शास्त्रों में मना है।
  • यदि पंचक काल में किसी की मृत्यु हो जाती है, तो शव के अंतिम संस्कार के समय किसी योग्य पंडित की सलाह पर पांच कुश (घास) या आटे के पुतले बनाकर साथ में जलाने का विधान है, ताकि पंचक दोष शांत हो सके।

दिन के अनुसार तय होता है पंचक का नाम

पंचक कुल पांच प्रकार का होता है और इसका नाम दिन के अनुसार तय होता है। ज्योतिष के अनुसार, रविवार के दिन शुरू होने वाला पंचक रोग पंचक कहलाता है। इसी तरह सोमवार से लग रहा पंचक राज पंचक, मंगलवार को शुरू होने वाला अग्नि पंचक, शुक्रवार से प्रारंभ होने वाला रोग पंचक और शनिवार को प्रारंभ होने वाला मृत्यु पंचक कहलाता है।

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