रुद्रनाथ मंदिर क्यों है खास? भगवान शिव की मुखाकृति के दर्शन और मंदिर से जुड़ी अद्भुत मान्यताएं

रुद्रनाथ मंदिर क्यों है खास? भगवान शिव की मुखाकृति के दर्शन और मंदिर से जुड़ी अद्भुत मान्यताएं

rudranath temple chamoli

उत्तराखंड के चमोली में स्थित पंच केदार के चौथे केदार श्री रुद्रनाथ मंदिर की महिमा, धार्मिक मान्यताओं और दर्शन के महत्व के बारे में जानें। यहां भगवान शिव की मुखाकृति के दर्शन होते हैं। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने सावन मास के तीसरे सोमवार को शिव भक्तों को चमोली के श्री रुद्रनाथ मंदिर के संबंध में जानकारी दी। ALSO READ: सावन में उत्तराखंड के नीलकंठ महादेव के दर्शन क्यों हैं खास? जानें समुद्र मंथन और भगवान शिव से जुड़ी पौराणिक मान्यता

 

सीएम धामी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि पंच केदार में से चतुर्थ केदार श्री रुद्रनाथ मंदिर जनपद चमोली की मनमोहक वादियों के मध्य स्थित है। यहां का शांत वातावरण और प्राकृतिक सौंदर्य श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराता है। चमोली जनपद के भ्रमण के दौरान आप भी श्री रुद्रनाथ मंदिर के दर्शन कर भगवान शिव का आशीर्वाद अवश्य प्राप्त करें।

क्या है मंदिर का रहस्य?

रुद्रनाथ मंदिर में भगवान शिव के मुखाकृति के दर्शन होते हैं। इसे पितरों का तारण करने वाला श्रेष्ठ तीर्थ माना जाता है। कहा जाता है कि रुद्रनाथ तीर्थ में ही देवर्षि नारद ने भगवान शंकर को कनखल (हरिद्वार) में दक्ष प्रजापति द्वारा यज्ञ कराने के दौरान देवी सती के दाह की सूचना दी थी। भगवान रुद्रनाथ यहां गुफा में विराजते हैं। ALSO READ: उत्तराखंड आध्यात्मिक राजधानी बनने की ओर अग्रसर, जागेश्वर से कैंची धाम तक श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड बढ़ोतरी

 

जानिए पंच केदार के बारे में

उत्तराखंड पंचबद्री के अलावा पंचकेदार और पंचप्रयाग की महिमा का वर्णन मिलता है। हिमालय में स्थित शिव को समर्पित पांच मंदिरों के समूह को पंच केदार कहा गया है। इनमें पहला श्री केदारनाथ मंदिर, दूसरा मदमहेश्वर, तीसरा तुंगनाथ, चौथा रुद्रनाथ और 5वां कल्पेश्वर हैं। मान्यता है कि इनका निर्माण पांडव व उनके वंशजों ने करवाया था। पंच केदार में महादेव के विभिन्न विग्रहों की पूजा की जाती है। हर केदार की अपनी विशेषता है। 

 

रुद्रनाथ जाने के 4 रास्ते

रुद्रनाथ पहुंचने के लिए पहला मार्ग गोपेश्वर के ग्राम ग्वाड़-देवलधार, किन्नखोली-किन महादेव होते हुए, दूसरा मार्ग मण्डल चट्टी-अत्रि अनुसूइया आश्रम होते हुए, तीसरा मार्ग गोपेश्वर सगर ज्यूरागली-पण्डार होते हुए, चौथा मार्ग ग्राम देवर मौनाख्य- नौलाख्य पर्वत पंडार खर्क होते हुए जाता है।

Palamu Jyotirlinga Temple: झारखंड के इस मंदिर में एक साथ कर सकते हैं 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन, उज्जैन की मिट्टी से बनी है महाकाल की प्रतिमूर्ति

Palamu Jyotirlinga Temple: शिव भक्तों के लिए महादेव के 12 ज्योतिर्लिंगों की यात्रा बेहद पावन और पवित्र यात्रा है। लेकिन, इनमें से कुछ बेहद दुर्गम स्थानों पर स्थित हैं, जहां हर किसी के लिए पहुंचना संभव नहीं है। इसके बावजूद, हर शिवभक्त द्वादश ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने की इच्छा अपने मन में जरूर रखता है। शायद झारखंड के पलामू स्थिति भगवती भवन मंदिर का निर्माण भी इसी सोच के साथ किया गया होगा। इस मंदिर के परिसर में एक ही छत के नीचे सभी 12 ज्योतिर्लिंग विराजमान हैं। यानी श्रद्धालु एक यात्रा में द्वादश ज्योतिर्लिंगों की यात्रा का पुण्य पा सकते हैं।

उज्जैन की मिट्टी से बनी महाकाल की प्रतिमूर्ति

अपनी इस अनोखी विशेषता के कारण यह शिवभक्तों के बीच दिलचस्पी का केंद्र है। खासतौर से उन भक्तों के लिए, जो कम भीड़-भाड़ वाली धार्मिक जगहों पर घूमना पसंद करते हैं। भगवती भवन मंदिर का सबसे बड़ा आकर्षण परिसर में 12 ज्योतिर्लिंगों प्रतिरूप होने के साथ ही यहां स्थित महाकाल की प्रतिमूर्ति भी है। मंदिर के मुख्य पुजारी शिबुल पंडित ने लोकल18 को बताया कि यहां महाकाल की प्रतिमूर्ति को उज्जैन से लाई गई मिट्टी से बनाया गया है। पारंपरिक रूप से, भक्त 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने के लिए भारत के अलग-अलग हिस्सों की यात्रा करते हैं। हालांकि, भगवती भवन में, इन पवित्र रूपों का अनुभव एक ही परिसर में किया जा सकता है।

प्रकृति की गोद में बसा है झारखंड का पलामु

शिव भक्तों के लिए, भगवती भवन एक अलग तरह का तीर्थ अनुभव देता है। कई राज्यों में घूमने के बजाय, श्रद्धालु एक ही जगह पर 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कर सकते हैं। पलामू अपने जंगलों, जंगली जानवरों और खूबसूरत नजारों के लिए ज्यादा जाना जाता है। हालांकि इस इलाके में कई धार्मिक और ऐतिहासिक जगहें भी हैं। जिला प्रशासन के अथक प्रयासोंक की बदौलत यह क्षेत्र अपनी प्राकृतिक जगहों के साथ-साथ अन्य टूरिस्ट आकर्षण का केंद्र बन रहा है।

कैसे पहुंचें पलामु

पलामू का जिला हेडक्वार्टर मेदिनीनगर (डाल्टनगंज) है, जो सड़क और रेल से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। सबसे पास का एयरपोर्ट रांची में बिरसा मुंडा एयरपोर्ट है, जो मेदिनीनगर से लगभग 165 km दूर है।

ट्रेन से यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए डाल्टनगंज रेलवे स्टेशन जिले का मुख्य रेलवे स्टेशन है। यहां पर रेगुलर पैसेंजर और एक्सप्रेस सर्विस हैं, जिनमें नई दिल्ली, कोलकाता, रांची और पटना जैसे शहरों के लिए सीधे ट्रेनें शामिल हैं।

पलामू रांची, पटना, वाराणसी और आस-पास के दूसरे शहरों से सड़क के रास्ते भी पहुंचा जा सकता है। जिला प्रशासन का कहना है कि डाल्टनगंज रांची से लगभग 165 km दूर है, और रांची और झारखंड के दूसरे बड़े शहरों और पड़ोसी राज्यों से रेगुलर बस सर्विस उपलब्ध हैं।

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Second Mangla Gauri Vrat 2026: सुखी दांपत्य के लिए दूसरे मंगला गौरी व्रत पर करें ये 5 उपाय, जानें मुहूर्त और पूजा विधि

Second Mangla Gauri Vrat 2026: सावन के महीने में सोमवार व्रत के साथ ही मंगलवार को मंगला गौरी व्रत भी किया जाता है। कल यानी 11 अगस्त को इस साल का दूसरा मंगला गौरी व्रत किया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन का महीना शिव भक्ति के साथ मां पार्वती की असीम कृपा प्राप्त करने के लिए भी जाना जाता है। इसमें आने वाले हर मंगलवार को महिलाएं और कुंवारी कन्याएं दांपत्य जीवन में खुशहाली और अखंड सौभाग्य के लिए यह व्रत करती हैं। इस दिन सुखी दांपत्य और जीवन में खुशहाली के लिए 5 खास उपाय विशेष रूप से फलदायी माने जाते हैं।

पूजन के शुभ मुहूर्त (11 अगस्त 2026)

पूजा के लिए सावन के इस पावन दिन पर निम्नलिखित शुभ मुहूर्त रहेंगे:

ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः साधना): सुबह 04:49 बजे से 05:34 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त (सर्वश्रेष्ठ समय): दोपहर 12:18 बजे से 01:09 बजे तक

विजय मुहूर्त (शुभ कार्य हेतु): दोपहर 02:52 बजे से 03:43 बजे तक

गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:09 से 07:31 तक

संध्या पूजा: शाम 07:09 से 08:16 तक

पूजन विधि

ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ व लाल/पीले वस्त्र धारण करें। इसके बाद हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर निम्न मंत्र से व्रत का संकल्प लें।

एक साफ चौकी पर लाल या सफेद वस्त्र बिछाकर मां मंगला गौरी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। मां के समक्ष आटे से बना 16 बत्तियों वाला घी का दीपक प्रज्वलित करें।

माँ का ध्यान करते हुए इस मंत्र का उच्चारण करें: “कुंकुमागुरुलिप्तांगा सर्वाभरणभूषिताम्। नीलकण्ठप्रियां गौरीं वन्देहं मंगलाह्वयाम्॥”

इसके बाद मां का विधि-विधान से षोडशोपचार पूजन करें।

मां मंगला गौरी की पूजा में 16 की संख्या का विशेष महत्व है। मां को 16 मालाएं, 16 लौंग, 16 सुपारियां, 16 इलायची, 16 चूड़ियां, सुहाग की 16 सामग्रियां, फल, पान, लड्डू और मिठाई अर्पित करें। साथ ही 5 प्रकार के सूखे मेवे और 7 प्रकार के अनाज (गेहूँ, उड़द, मूँग, चना, जौ, चावल और मसूर) अर्पित करें।

व्रत कथा का पाठ करें या श्रद्धापूर्वक सुनें। अंत में आरती करें। इस व्रत में एक ही समय शुद्ध सात्विक अन्न ग्रहण करने का विधान है।

भाग्य बदलने वाले 5 अचूक उपाय

16 श्रृंगार का दान : विवाह में रही बाधाएं दूर करने के लिए अविवाहित कन्याएं इस दिन मां मंगला गौरी को सुहाग की 16 वस्तुएं अर्पित करें और पूजा के बाद इन्हें किसी सुहागिन स्त्री को दान कर दें।

लाल पुष्प और शहद : यदि दांपत्य जीवन में तनाव या अनबन रहती है, तो मां मंगला गौरी को 16 लाल गुड़हल के फूल और शहद अर्पित करें। इसके बाद “ॐ ह्रीं मंगला गौर्यै नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें।

16 बत्तियों का दीपक : इस दिन संध्या समय घर के मंदिर में आटे का 16 बत्तियों वाला दीपक जलाएं और उसमें थोड़ा-सा कपूर डाल दें। इससे घर की दरिद्रता दूर होती है और धन वृद्धि के योग बनते हैं।

अन्न व वस्त्र दान : पूजा के पश्चात 7 प्रकार के अनाज का मिश्रण बनाकर किसी जरूरतमंद को दान करें। साथ ही किसी वृद्ध सुहागिन स्त्री के चरण छूकर उनका आशीर्वाद लें।

मंगल दोष शांत करने का उपाय : यदि आपकी कुंडली में मंगल दोष के कारण जीवन में परेशानियां आ रही हैं, तो मंगला गौरी पूजा के समय मां को 16 छोटी इलायची और 16 बताशे चढ़ाएं और बाद में इसे प्रसाद स्वरूप परिवार में बांट दें।

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Sawan Shivratri 2026: सावन की शिवरात्रि पर रहेगा भद्रा का साया, जानें तारीख और क्या भद्रा में कर सकते हैं शिव-शंभु का जलाभिषेक

Sawan Shivratri 2026: इस समय भगवान शिव का अति प्रिय श्रावण मास चल रहा है। यूं तो, सावन के सभी दिन भगवान शिव का जलाभिषेक करने पर पुण्य मिलता है। लेकिन कुछ खास दिन ऐसे हैं, जब भगवान शिव की विशेष पूजा, उपवास और जलाभिषेक करने पर भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं। शिवरात्रि का दिन भी इनमें से एक है। वैसे तो, हिंदू कैलेंडर के हर माह में शिवरात्रि मनाई जाती है, लेकिन सावन में आने वाली शिवरात्रि तिथि का विशेष महत्व है। शिवरात्रि का पर्व श्रावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को किया जाता है।

इस साल यह पर्व 11 अगस्त को मनाया जाएगा। इस दिन सुबह से ही शिवालयों में शिव भक्तों की धूम रहेगी, कांवड़िये महादेव का जलाभिषेक करेंगे, कुछ लोग उपवास और विशेष पूजा या रुद्राभिषक का भी आयोजन करेंगे। पंचांग के अनुसार, माना जा रहा है कि इस साल शिवरात्रि पर भद्र लग रही है। ऐसे में श्रद्धालुओं के मन में सवाल उठ रहा है कि भद्रा काल में देवाधिदेव का जलाभिषेक किया जाएगा या नहीं? सावन शिवरात्रि की तिथि, शुभ मुहूर्त, जलाभिषेक का समय, भद्रा काल और पूजा विधि से जुड़ी संपूर्ण जानकारी नीचे दी गई है:

सावन शिवरात्रि 2026 तिथि

व्रत एवं पूजन तिथि : मंगलवार, 11 अगस्त 2026

चतुर्दशी तिथि प्रारंभ : 11 अगस्त 2026, प्रातः 04:43 AM

चतुर्दशी तिथि समाप्त : 12 अगस्त 2026, रात्रि 01:51 AM

भद्रा काल का समय

भद्रा का समय : 11 अगस्त 2026, प्रातः 04:56 AM से दोपहर 03:24 PM तक।

मान्यता : शास्त्रों के अनुसार भद्राकाल में शुभ या मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं, लेकिन भगवान शिव की पूजा, मंत्र जाप और भक्ति में भद्रा का दोष नहीं लगता। इसलिए भक्त पूरे दिन श्रद्धापूर्वक जलाभिषेक और पूजा-अर्चना कर सकते हैं।

जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त

आप पूरे दिन चतुर्दशी तिथि के दौरान जलाभिषेक कर सकते हैं। विशेष फलदाई मुहूर्त इस प्रकार हैं:

ब्रह्म मुहूर्त : प्रातः 05:23 AM से 06:00 AM

अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 12:06 PM से 12:58 PM

गोधूलि मुहूर्त : सायं 09:13 PM से 09:32 PM

निशिता काल (मुख्य मध्यरात्रि पूजा): 11-12 अगस्त की रात्रि 12:05 AM से 12:48 AM तक

चार प्रहर की पूजा का समय

प्रथम प्रहर : सायं 07:04 PM से रात्रि 09:45 PM

द्वितीय प्रहर : रात्रि 09:45 PM से मध्यरात्रि 12:26 AM

तृतीय प्रहर : मध्यरात्रि 12:26 AM से तड़के 03:07 AM (12 अगस्त)

चतुर्थ प्रहर : तड़के 03:07 AM से प्रातः 05:49 AM (12 अगस्त)

शिव पूजा विधि

  • सावन शिवरात्रि के दिन प्रातः स्नान के बाद स्वच्छ कपड़े पहनें और व्रत का संकल्प लें।
  • मंदिर या घर पर शिवलिंग पर गंगाजल व शुद्ध जल अर्पित करें। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शक्कर (पंचामृत) से अभिषेक करें।
  • शिवलिंग पर बेलपत्र (अखंडित), धतूरा, भांग, शमी पत्र, सफेद आंकड़े के फूल, चंदन और भस्म चढ़ाएं।
  • पूजा करते समय ॐ नमः शिवाय” या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते रहें।
  • अंत में धूप-दीप जलाकर शिव जी की आरती करें और सात्विक भोग या फल अर्पित करें।
  • शिवलिंग पर तुलसी के पत्ते, सिंदूर, रोली, हल्दी और केतकी के फूल न चढ़ाएं।

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ये कैसी आस्‍था, कांवड़ियों के दो गुट आपस में भिड़े, लाठी-डंडों और खून-खराबे से सिहर उठा माहौल, पुलिस के सामने हंगामा

Kanwariya

यह कांवड़ यात्रा का दौर है। देशभर में जगह जगह कांवड़ यात्राएं निकल रही हैं। इसी बीच मेरठ में एक कांवड़ यात्रा के दौरान जमकर हिंसा की खबर आ रही है। दिल्ली-दून हाईवे के कांवड़ मार्ग पर बाइक से कांवड़ टकराने को लेकर कांवड़ियों के बीच जमकर विवाद हो गया।

कहासुनी मारपीट में बदल गई। बीच-बचाव करने सादी वर्दी में पुलिस के सिपाही पहुंचे। कांवडिये इतने आक्रोशित थे कि उन्होंने जीप में सवार एक व्यक्ति को खींचकर पिटाई कर दी।

दोनों समूह में हिंसा चल रही थी। NH58 पर देखते ही देखते अफरा-तफरी मच गई। मिली जानकारी के मुताबिक 3 अगस्त की मध्यरात्रि में लगभग 2.30 बजे के आसपास कांवड़ियों की दो बाइक आपस में भिड गई। दोनों पक्षों में कहासुनी के बाद मारपीट हो गई। इसी बीच कांवड़ मार्ग पर पैदल आ रहे कांवड़ियों ने भी एक का साथ देते हुए हाथापाई और डंडे चला दिये।

मौके पर पहुंची पुलिस ने मामले को शांत करवाया और दोनों पक्षों को थाने ले आई। पुलिस के मुताबिक, नोएडा का सोनू अपने साथी गुड्डू के साथ बाइक से गंगाजल लेने के लिए हरिद्वार जा रहा था। जैसे ही वह NH 58 पर मेरठ दौराला पहुंचा तो सामने की तरफ यानी हरिद्वार से गंगाजल लेकर एक बाइक सवार कांवड़ियां आ रहा था। दोनों बाइकों में टक्कर के बाद कहासुनी हो गई, बात मारपीट की नौबत तक पहुंच गई। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, पुलिस जीप में सादी वर्दी में पुलिसकर्मी थे, जिन्होंने भीड़ से बचाते हुए सोनू और गुड्डू कै जीप में बैठाया। 

Kanwar Yatra UP 2026

इसी बीच सड़क पर पैदल अन्य शिव भक्त कांवडियें आ रहे थे, उन्हें जैसे ही पता चला कि पुलिस जीप में टक्कर मारने वाले पुलिस जीप में है। पुलिस उन्हें बचाकर ले जाने का प्रयास कर रही है तो वह उग्र हो गये। भीड़ ने जीप से एक शख्स को खींचकर थप्पड़, लात और डंडे से पीटा, वही दूसरे जीप सवार को गाड़ी के अंदर जमकर पीटा। इसी बीच जीप में सवार कांवडियां अपने साथियों को फोन पर बुलाता नजर आ रहा है। पुलिस के मुताबिक जीप में सवार किसी सिपाही के साथ मारपीट नहीं हुई है और न ही इस घटना में कोई पुलिसकर्मी घायल हुआ है। जीप में सवार कांवडियें को भीड़ ने खींचकर पीटा है। पुलिस ने दोनों पक्षों के कांवड़ियों को अपने साथ ले जाकर मेडिकल करवाया है।

वीडियो वायरल : मेरठ एसएसपी अविनाश पांडे के मुताबिक सोशल मीडिया पर कांवडियों द्वारा मारपीट का वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो के कथित प्रचार किया जा रहा है कि पुलिस जीप से बाहर निकाल कर पुलिसकर्मियों को पीटा गया है। जबकि जीप से बाहर निकाल कर जिसकी पिटाई की जा रही है, वह कांवडियें सोनू और गुड्डू है। बाइक टक्कर से कांवड़ खंडित होने पर भोले गुस्साए और उन्होंने मारपीट कर दी। इस मामले में पुलिस ने मारपीट कंट्रोल करते हुए जीप में बैठे हुए सोनू और.गुड्डू को बचाने का प्रयास किया, जिसमें एक पुलिस कर्मी के हाथ और कंधे पर चोट आई है। पुलिस ने हंगामा करने वाले लोगों पर मुकदमा दर्ज करते हुए वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है।

आस्था और अनुशासन का अद्भुत संगम है कांवड़ यात्रा

-डॉ. रंगनाथ त्रिपाठी

सावन के इस महीने में उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर भारत में कांवड़ियों के झुंड कंधों पर गंगाजल लिए शिवत्व को आत्मसात करते हुए अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं तो यह सनातन परंपरा की उस अनंत धारा का साक्षात प्रकटीकरण है जो प्राचीन काल से भारतीय चेतना में प्रवाहित होती रही है। यह महीना शिव-आराधना का सबसे पवित्र काल है। यही वह समय है जब पौराणिक मान्यता के अनुसार समुद्र-मंथन से निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने कंठ में धारण किया था और सृष्टि को विनाश से बचाया था।

 

कांवड़िए गंगाजल लेकर शिवलिंग पर अभिषेक करते हैं तो यह उस देवता के प्रति कृतज्ञता ज्ञापन है, जिसने संसार के कल्याण के लिए विष पिया। यह त्याग और भक्ति के शाश्वत सिद्धांत की जीवंत अभिव्यक्ति है। आस्था के इसी धरातल पर, यदि हम इस यात्रा को सामाजिक और मनोवैज्ञानिक रूप में देखें, तो ऐसी संरचना उभरती है जिसमें मनुष्य की सामूहिक चेतना, अनुशासन और सामाजिक सहयोग की गहरी परतें हैं। यही गहराई उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पूर्ण समर्पण से इन तपस्वियों के प्रति सेवा भाव के लिए प्रेरित करती है।

 

इस यात्रा का मूल तत्व आस्था और अनुशासन है। आस्था मनुष्य की सहनशक्ति बढ़ा देती है। सैकड़ों किलोमीटर की पदयात्रा, वह भी भीषण गर्मी और मानसून की अनिश्चितता के बीच, किसी सामान्य शारीरिक क्षमता का काम नहीं। श्रद्धा के आवेग में शरीर धीरे-धीरे थकान की सीमाओं को पार करता जाता है। शिव भक्त को अपने शरीर की सीमाओं का नए सिरे से साक्षात्कार होता है। यह अनुभव दीर्घकालिक और सामूहिक है। यहां प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि सहभागिता केंद्र में होती है। शरीर की यह परीक्षा व्यक्ति को यह सिखाती है कि सीमाएं जितनी भौतिक होती हैं, उतनी ही मानसिक भी, और अक्सर मन शरीर से पहले हार मान लेता है।

इसी बिंदु से मानसिक अनुशासन का प्रश्न जुड़ता है। लंबी पदयात्रा में कांवड़ियों को एक निश्चित संयम और मर्यादा का पालन भी करना पड़ता है। समय पर विश्राम, भोजन में सादगी, और सबसे महत्वपूर्ण, कांवड़ को भूमि पर न रखने जैसे नियमों का निर्वहन। यह अनुशासन स्वेच्छा से स्वीकार किया गया प्रतिबंध है। जब कोई व्यक्ति किसी बड़े लक्ष्य के लिए स्वयं को संयमित करता है, तो उसमें आत्म-नियंत्रण की क्षमता विकसित होती है। अनेक कांवड़िए इस अनुभव को केवल धार्मिक कृत्य नहीं, बल्कि आत्म-परिष्करण की एक प्रक्रिया के रूप में वर्णित करते हैं। आध्यात्मिक दृष्टि से देखें तो कांवड़ को भूमि पर न रखने का नियम भी गहरा प्रतीकात्मक अर्थ रखता है। यह जल साक्षात गंगा का, स्वयं शिव की जटाओं से प्रवाहित पवित्रता का प्रतिनिधित्व करता है। भारतीय परंपरा में तप, व्रत और संयम को सदा मोक्ष के मार्ग के रूप में देखा गया है, और कांवड़ यात्रा इसी तपस्या-परंपरा का समकालीन रूप है।

 

समाजशास्त्रीय दृष्टि से देखें तो कांवड़ यात्रा ऐसी सामूहिकता है जो सामाजिक ढांचों, जाति, वर्ग और आर्थिक स्थिति की सीमाओं को अस्थायी रूप से धुंधला कर देती है। सड़क पर चलते समय एक मजदूर और एक व्यापारी, दोनों समान रूप से थकान और कष्ट साझा करते हैं। यह साझा अनुभव एक अस्थायी किंतु सशक्त बंधन उत्पन्न करता है। मनुष्य के सामाजिक स्वभाव में यह प्रवृत्ति गहराई से अंतर्निहित है कि साझा कष्ट और साझा उद्देश्य समुदाय को अधिक दृढ़ता से बांधते हैं। साझा सुख में यह दृढ़ता नहीं होती।

 

इसी सामूहिकता में सेवा शिविरों की व्यवस्था भी है। मार्ग में स्थान-स्थान पर स्थापित सेवा शिविर, जहां स्थानीय निवासी, सामाजिक संगठन और स्वयंसेवक निःशुल्क भोजन, विश्राम और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराते हैं, पूरी यात्रा का सामाजिक आधार बनाते हैं। यह स्वतःस्फूर्त सामुदायिक सहयोग का उदाहरण है। हजारों परिवार और संस्थाएं बिना किसी प्रत्यक्ष लाभ की अपेक्षा के इस व्यवस्था में योगदान देती हैं। आज के दौर में जहां आधुनिक शहरी जीवन व्यक्तिवाद और पारस्परिक अलगाव की ओर बढ़ रहा है, कांवड़ यात्रा वर्ष में एक बार ही सही, पारस्परिक निर्भरता और सामुदायिक दायित्व की भावना को पुनर्जीवित करती है।

 

राज्य की भूमिका पर विचार किए बिना यह विषय पूरा नहीं होगा। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने बीते वर्षों में इस यात्रा को व्यवस्थित, सुरक्षित और गरिमामय बनाने की दिशा में जो प्रयास किए हैं, वे एक स्पष्ट सांस्कृतिक दृष्टि का प्रतिबिंब हैं। मार्ग प्रकाश व्यवस्था, चिकित्सा शिविर, ड्रोन निगरानी, स्वच्छता अभियान, पुष्प वर्षा और यातायात प्रबंधन जैसे कदम यह दर्शाते हैं कि योगी सरकार श्रद्धालुओं को भीड़ के रूप में नहीं, सम्मानित आस्था-यात्रियों के रूप में देखती है।

 

योगी आदित्यनाथ स्वयं धर्माचार्य हैं और उनके नेतृत्व में यह प्रयास सांस्कृतिक पुनर्जागरण या 'सनातन गौरव की पुनर्स्थापना' के रूप में देखा जाता है। एक ऐसी दृष्टि जिसके अंतर्गत काशी विश्वनाथ धाम का भव्य पुनर्निर्माण, अयोध्या में राम मंदिर के आसपास के अवसंरचनात्मक कायाकल्प, और कुंभ जैसे आयोजनों की भव्यता को भी रखा जा सकता है। कांवड़ यात्रा मार्ग की हर सड़क, हर लाइट, हर सेवा शिविर, आस्था और शासन के बीच सम्मानजनक संबंध का प्रतीक है। स्वाभाविक है कि किसी भी बड़े सार्वजनिक विषय पर भिन्न मत भी होते हैं, और कुछ टिप्पणीकार इस विषय पर अलग दृष्टिकोण भी रखते हैं परंतु व्यापक जनसमर्थन और श्रद्धालुओं की निरंतर बढ़ती संख्या इस बात का प्रमाण है कि योगी सरकार उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप है।

 

कांवड़ यात्रा को सिर्फ आस्था या अनुशासन के ही रूप में देखना उचित नहीं होगा। यह यात्रा वास्तव में इन दोनों तत्वों के संगम पर खड़ी है जहां आध्यात्मिक विश्वास शारीरिक कष्ट को अर्थ प्रदान करता है, और शारीरिक कष्ट उस विश्वास को अधिक सघन, अधिक प्रत्यक्ष और अधिक अनुभवजन्य बना देता है। आस्था के बिना यह यात्रा केवल एक कठिन शारीरिक परीक्षा रह जाती और अनुशासन के बिना यह केवल भावुक उन्माद बनकर रह जाती। किंतु, जब लाखों भक्त शिव के प्रति अपने प्रेम में एक साथ चलते हैं, कष्ट सहते हैं और फिर भी मुस्कुराते हुए 'बोल बम' का उद्घोष करते हैं, तब यह केवल सामाजिक व्यवहार नहीं रह जाता, यह सनातन धर्म की अजेय जीवंतता का प्रमाण बन जाता है।

 

जब राज्य स्वयं आगे बढ़कर इस आस्था को गरिमा, सुरक्षा और सम्मान देता है, तो यह सभ्यता की उस स्मृति के प्रति राजकीय कृतज्ञता है जिसने हमें सनातन पहचान दी है। इन दोनों के संतुलन में ही इस परंपरा की वास्तविक शक्ति निहित है। एक ऐसी शक्ति जो व्यक्ति को स्वयं से जोड़ती है, समुदाय को एक-दूसरे से जोड़ती है, और राष्ट्र को उसकी आध्यात्मिक जड़ों से जोड़ती है। (लेखक श्री गोरक्षनाथ संस्कृत विद्यापीठ स्नातकोत्तर महाविद्यालय, गोरखनाथ मंदिर, गोरखपुर में वेद विभागाध्यक्ष हैं) 

योगी सरकार ने महिला कावड़ियों के लिए किए विशेष प्रबंध, जलाभिषेक करने उमड़ पड़ी नारीशक्ति

Yogi government makes special arrangements for female Kanwariyas

– प्रयागराज में महिला शिवभक्तों के लिए संगम और गंगा के प्रमुख घाटों पर चेंजिंग रूम और महिला सहायता केंद्र बनाए गए

– सुविधा और सुरक्षा के वातावरण में नदियों का पवित्र जल लेकर काशी के लिए प्रस्थान कर रहीं हैं महिला शिवभक्त 

– आपदा सखियों ने भी महिला शिवभक्तों की मदद के लिए घाटों और मार्गों पर संभाला मोर्चा

– महिला शिव भक्तों के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम, महिला पुलिस फोर्स की हुई तैनाती

Uttar Pradesh News : कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा, उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की प्राथमिकता है। इसका असर श्रावण मास में चल रही कांवड़ यात्रा पर भी दिख रहा है। कांवड़ यात्रा कर रहे शिवभक्तों में महिला शिवभक्तों की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है। इन महिला शिव भक्तों की सुरक्षा और सुविधाओं को विशेष प्राथमिकता दी गई है। 

 

घाटों में महिला पुलिस कर्मियों की तैनाती

पवित्र श्रावण मास में शिवभक्त कावड़ियों की कांवड़ यात्रा को सुरक्षित, सुगम एवं सकुशल संपन्न कराने के योगी सरकार के निर्देश के क्रम में प्रयागराज में भी यात्रा मार्ग, कांवड शिविरों, भंडारों एवं श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के दृष्टिगत व्यवस्था की गई है।

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संगम नगरी प्रयागराज में कांवड़ लेकर चलने वाली शिवभक्त महिला कांवड़ियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन ने महिला शिवभक्तों के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। प्रयागराज में दशाश्वमेध और संगम घाट से सबसे अधिक महिला कांवड़ियां जल लेकर काशी के लिए निकलती हैं। डीएम प्रयागराज मनीष कुमार वर्मा बताते हैं कि महिला शिव भक्तों के लिए संगम और गंगा नदी के प्रमुख घाटों पर चेंजिंग रूम और महिला सहायता केंद्र बनाए गए हैं।

घाटों पर महिला पुलिस कर्मियों के दस्ते तैनात हैं। आजीविका मिशन की 44 आपदा सखियां भी महिला कांवड़ियों की मदद के लिए मुस्तैद हैं। इसके अलावा प्रयागराज से वाराणसी के बीच बनाए गए कांवड़ पथ में भी प्रमुख स्थानों में जगह-जगह महिला पुलिस एवं वॉलिंटियर्स मुस्तैद हैं। मनकामेश्वर, सोमेश्वर महादेव , ब्रह्मेश्वर महादेव सहित शहर के सभी प्रमुख शिव मंदिरों में महिला सुरक्षा कर्मी मुस्तैद हैं। 

 

नारी शक्ति ने उठाई कांवड़, निर्भय होकर कर रहीं जलाभिषेक

 भगवान शंकर की आराधना के लिए श्रावण मास में महिलाओं की जितनी लंबी कतारें शिवालयों में लगती थीं, अब उतनी ही उनकी भागीदारी अब कांवड़ यात्रा में भी दिख रही है। छोटे कस्बों और गांवों से बड़ी संख्या में महिला शिवभक्त घरों से निकल कर कांवड़ यात्रा पर जा रही हैं।

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प्रयागराज के दारागंज के दशाश्वमेध घाट में गंगा जी से जल लेकर काशी के लिए कांवड़ यात्रा पर निकली ज्योति कहती हैं कि अब महिलाएं रास्ते में सुरक्षित हैं, किसी तरह का भय नहीं है इसलिए उनके कस्बे भरवारी से कई महिलाएं कांवड़ यात्रा में जा रही हैं। 
 

सदियापुर की मीरा देवी भी परिवार के आठ सदस्यों के साथ प्रयागराज के दशाश्वमेध घाट से जल लेकर बैजनाथ धाम कांवड़ यात्रा के लिए निकली हैं। मीरा देवी बताती हैं कि उनके साथ उनकी तीन पीढ़ियां इस बार यात्रा में जा रही है। उनके साथ उनकी दो बहुएं, एक बेटी और तीन नातिन भी जा रहीं हैं। इसके अलावा उनका बेटा भी साथ है। मीरा बताती हैं कि अब कांवड़ मार्गों में किसी तरह की असुरक्षा और असुविधा नहीं दिखती।

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योगी जी की सरकार आने के बाद महिला शिवभक्त हर स्थान पर सुरक्षित हैं। कांवड़ मार्ग में जगह -जगह महिला शिवभक्तों के विश्राम शिविर बनाए गए हैं। सामूहिक यात्रा में भोले बाबा का भजन और कीर्तन करते हुए पूरी उत्साह और हर्ष के साथ महिलाएं कांवड़ यात्रा में निकल रही हैं।

First Sawan Somwar 2026 Shubh Yog: 04 शुभ योगों में 03 अगस्त को होगा सावन के पहले सोमवार का व्रत, जानें जलाभिषेक और शिव पूजन का शुभ मुहूर्त

First Sawan Somwar 2026 Shubh Yog: यूं तो हर सप्ताह सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित है। लेकिन सावन के महीने में आने वाले सोवमार का विशेष स्थान है। शिव भक्तों के लिए यह दिन अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस दिन वे अपने आराध्य के लिए खास पूजा, उपवास और अनुष्ठान करते हैं। साल 2026 में सावन के महीने में 4 सोमवार का सौभाग्य बन रहा है। सावन के सोमवार व्रत करने वाले श्रद्धालु इस व्रत का उद्यापन चौथे और अंतिम सोमवार को करते हैं।

सावन के पहले सोमवार पर बने रहे हैं 4 शुभ योग

इस साल पहले सावन सोमवार पर 4 शुभ योग बन रहे हैं, जो लोगों के लिए शुभ फलदायी हैं। वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन का पहला सोमवार श्रावण कृष्ण पंचमी तिथि को है। उस दिन हंसराज योग, सुकर्मा योग, धृति योग और सर्वार्थ सिद्धि योग बनेंगे।

हंसराज योग : पंच महापुरुष योगों में से एक होता है। इस समय गुरु ग्रह अपनी उच्च राशि कर्क में विराजमान हैं, जिसकी वजह से हंसराज योग बना है।

सर्वार्थ सिद्धि योग : पहले सावन सोमवार को सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। सर्वार्थ सिद्धि योग मध्यरात्रि 00:01 बजे से लेकर सुबह 05 बजकर 44 मिनट तक रहेगा। इस योग में पूजा, जप, तप, दान आदि का पुण्य फल प्राप्त होता है।

सुकर्मा योग : इस दिन सुकर्मा योग प्रात:काल से लेकर रात 9 बजकर 13 मिनट तक रहेगा। सुकर्मा योग के स्वामी देव इंद्र और ग्रह मंगल हैं। यह शुभता प्रदान करने वाला मंगलकारी योग है।

धृति योग : पहले सावन सोमवार पर धृति योग रात में 9:13 बजे से पूर्ण रात्रि तक है। इसमें नया बिजनेस, भूमि पूजन, मकान की नींव डालना, नई वस्तु की खरीदारी करना अच्छा रहता है।

चोर पंचक में सावन के पहले सोमवार का व्रत

पहले सावन सोमवार को पूरे दिन चोर पंचक रहेगा। उत्तर भाद्रपद नक्षत्र प्रात:काल से लेकर रात 10:00 पी एम तक है, उसके बाद रेवती नक्षत्र है।

पहला सावन सोमवार 2026 जलाभिषेक मुहूर्त

सावन के पहले सोमवार को जलाभिषेक के साथ ही शिव जी की पूजा की जाएगी।

ब्रह्म मुहूर्त: 04:19 ए एम से 05:01 ए एम

अभिजीत मुहूर्त: 12:00 पी एम से 12:54 पी एम

अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: 05:44 ए एम से 07:24 ए एम

शुभ-उत्तम मुहूर्त: 09:05 ए एम से 10:46 ए एम

चर-सामान्य मुहूर्त: 02:08 पी एम से 03:49 पी एम

लाभ-उन्नति मुहूर्त: 03:49 पी एम से 05:30 पी एम

अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: 05:30 पी एम से 07:11 पी एम

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चलो बुलावा आया है! सावन में ऐसे बनाएं 12 ज्योतिर्लिंग दर्शन का परफेक्ट प्लान

सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की भक्ति और आस्था के लिए खास माना जाता है। इस महीने में देशभर के 12 ज्योतिर्लिंगों में दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ होती है। हर ज्योतिर्लिंग की अपनी अलग महिमा और धार्मिक महत्व होता है, जहां सावन में जलाभिषेक और पूजा-अर्चना का विशेष महत्व होता है। ऐसे ही है ये ज्योतिर्लिंग जहां सावन में भक्तों की धूम मची होती है:

Somnath Jyotirlinga (सोमनाथ ज्योतिर्लिंग) – गुजरात

Somnath Temple:हवा में तैरता था शिवलिंग और 8 करोड़ साल पुराना है मंदिर, क्या है सोमनाथ मंदिर का रहस्य? - Somnath Temple Facts A Jyotirlinga Full Of Miracles And Mysteries Somnath Temple -

सावन में सोमनाथ मंदिर में सुबह से ही भक्तों की लाइन लग जाती है। यहां रुद्राभिषेक, शिव आरती और मंत्र जाप के साथ सावन सोमवार का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है।

Mahakaleshwar Jyotirlinga (महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग) – उज्जैन, मध्य प्रदेश

Somnath Temple Shivling Images HD | First Jyotirlinga Wallpapers

सावन में बाबा महाकाल की भस्म आरती और श्रृंगार दर्शन भक्त करते हैं। हर सोमवार को भगवान महाकाल की सवारी निकाली जाती है।

Kedarnath Jyotirlinga (केदारनाथ ज्योतिर्लिंग) – उत्तराखंड

केदारनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर, रुद्रप्रयाग (उत्तराखंड) | दर्शन जानकारी | Reviving Cultures

सावन में केदारनाथ धाम में शिव भक्त हर-हर महादेव के जयकारों के साथ पूजा करते हैं। मंदिर में अभिषेक और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। हिमालय की गोद में बसे इस पवित्र धाम में सावन में ऊर्जा और भक्ति का माहौल देखने को मिलता है।

Kashi Vishwanath Jyotirlinga (काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग) – वाराणसी, उत्तर प्रदेश

काशी विश्वनाथ, केदारनाथ और बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग | भारत के 12 ज्योतिर्लिंग: शिवभक्तों के लिए पवित्र यात्रा – Sadhana Shop

सावन में काशी विश्वनाथ मंदिर में कांवड़ियों और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहती है। भक्त गंगाजल से बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक करते हैं। सावन सोमवार के दिन यहां आरती और पूजा में शामिल होने के लिए देशभर से भक्त पहुंचते हैं।

Trimbakeshwar Jyotirlinga (त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग) – नासिक, महाराष्ट्र

काशी विश्वनाथ मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है - A Great Hindu Temple kashi vishvanath temple-Varanasi

सावन में यहां रुद्र पूजा, अभिषेक और मंत्रों का जाप किया जाता है। भक्त भगवान शिव से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। गोदावरी नदी के उद्गम स्थल के कारण सावन में इस धाम का महत्व और भी बढ़ जाता है।

Baidyanath Jyotirlinga (बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग) – देवघर, झारखंड

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सावन में बैद्यनाथ धाम में कांवड़ यात्रा की धूम रहती है। भक्त दूर-दूर से गंगाजल लाकर बाबा का जलाभिषेक करते हैं। सावन के पूरे महीने मंदिर परिसर में शिव भक्तों की आस्था और भक्ति का अनोखा रूप दिखाई देता है।

Rameshwaram Jyotirlinga (रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग) – तमिलनाडु

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सावन में रामेश्वरम मंदिर में विशेष पूजा और अभिषेक होते हैं। भक्त पवित्र कुंडों में स्नान कर शिव आराधना करते हैं। समुद्र किनारे स्थित यह ज्योतिर्लिंग सावन में धार्मिक आस्था और शांति का खास केंद्र बन जाता है।

Nageshwar Jyotirlinga (नागेश्वर ज्योतिर्लिंग) – गुजरात

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर - स्थान, वास्तुकला, तस्वीरें

सावन में मंदिर में रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र का जाप किया जाता है। भक्त भगवान शिव जी से आशीर्वाद लेते है और प्रार्थना करते हैं। सावन में यहां भक्तों की भीड़ और शिव भक्ति की धूम देखने लायक होता है।

Bhimashankar Jyotirlinga (भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग) – महाराष्ट्र

Gallery - Jyotirlinga Bhimashankar

सावन में यहां शिव भक्तों की लंबी लाइन लगती हैं। पूजा, आरती और भक्ति कार्यक्रम किए जाते हैं। हरियाली से घिरे इस धाम में सावन के दौरान श्रद्धालु शिव भक्ति में नजर आते हैं।

Grishneshwar Jyotirlinga (घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग) – महाराष्ट्र

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर, संभाजीनगर (Maharashtra) | दर्शन जानकारी | Reviving Cultures

सावन के महीने में मंदिर को सजाया जाता है और भक्त जलाभिषेक व पूजा करके भगवान शिव का आशीर्वाद लेते हैं। सावन सोमवार के दिन यहां दर्शन और पूजा का महत्व और भी बढ़ जाता है।

Omkareshwar Jyotirlinga (ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग) – मध्य प्रदेश

सावन ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग विशेष! उत्तम स्वास्थ्य, नज़र दोष और नकारात्मक ऊर्जाओं से रक्षा के लिए भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करें।

सावन में नर्मदा नदी के किनारे स्थित ओंकारेश्वर में विशेष आरती और धार्मिक आयोजन होते हैं। भक्त नर्मदा जल से शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। नर्मदा तट पर होने वाली शिव आरती भक्तों को आध्यात्म की अनुभूति देती है।

Mallikarjuna Jyotirlinga (मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग) – आंध्र प्रदेश

ऋग्वेद में आया सोमनाथ मंदिर का जिक्र, चंद्रमा से सीधा कनेक्शन; जानें कैसे बना ज्योतिर्लिंग

सावन में मंदिर में विशेष श्रृंगार, पूजा और अभिषेक किए जाते हैं। भक्त शिव-पार्वती की आराधना कर मनोकामनाएं मांगते हैं। सावन के दौरान यह धाम भगवान शिव और माता पार्वती की भक्ति का प्रमुख केंद्र बन जाता है।