चारधाम यात्रा: अटूट आस्था, VIP संस्कृति और व्यवस्थाओं की अग्निपरीक्षा

चारधाम यात्रा: अटूट आस्था, VIP संस्कृति और व्यवस्थाओं की अग्निपरीक्षा

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यात्राएँ केवल पर्यटन नहीं, बल्कि स्वयं को जानने, जन-आस्था को अनुभव करने और प्रकृति के निकट पहुँचने का अवसर होती हैं। धार्मिक यात्रा मनुष्य को सांसारिक भागदौड़ से दूर कर आत्मचिंतन और ईश्वर के सान्निध्य में जाने का मार्ग दिखाती है। इसी भावना के साथ 26 सितंबर को मध्य प्रदेश के देवास से उत्तराखंड की चारधाम यात्रा प्रारंभ हुई। 15 दिनों के इस सफर ने मुझे आध्यात्मिक संतोष तो दिया, लेकिन धार्मिक स्थलों की व्यवस्थाओं और श्रद्धालुओं की कठिनाइयों ने कई गंभीर प्रश्न भी खड़े किए।

 

माँ गंगा की आरती से हिमालय की दिव्यता तक

हरिद्वार में माँ गंगा की भव्य आरती, मंत्रोच्चार और दीपों से जगमगाती जलधारा ने मन को भावविभोर कर दिया। ऋषिकेश के आध्यात्मिक वातावरण से होते हुए यात्रा माँ यमुनोत्री पहुँची। लगभग छह से सात किलोमीटर के दुर्गम पहाड़ी मार्ग पर पैदल चढ़ाई, थकान और हल्की बारिश के बीच माँ यमुना के दर्शन हुए। इसके बाद उत्तरकाशी में श्री काशी विश्वनाथ महादेव और गंगोत्री में माँ गंगा के दर्शन किए। हिमालय की विशालता ने अनुभव कराया कि प्रकृति के सामने मनुष्य का अहंकार कितना छोटा है।

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केदारनाथ: आस्था अटूट, लेकिन व्यवस्था पर सवाल

यात्रा का सबसे कठिन पड़ाव बाबा केदारनाथ धाम रहा। लगभग 20 से 22 किलोमीटर के दुर्गम मार्ग पर चढ़ाई, घोड़े-खच्चरों की आवाजाही और यात्रियों की भीड़ के बीच आगे बढ़ना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था। लगभग 12 घंटे की मशक्कत के बाद रात करीब दो बजे धाम पहुँचना संभव हुआ, जबकि दर्शन का सौभाग्य अगले दिन शाम लगभग छह बजे मिला। बाबा केदारनाथ के सम्मुख पहुँचते ही मन श्रद्धा से भर गया और सारी थकान मानो क्षणभर में मिट गई।

 

लेकिन घंटों की प्रतीक्षा ने सवाल भी खड़ा किया कि क्या श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन उपलब्ध कराना सरकार और प्रशासन की प्राथमिकता नहीं होनी चाहिए?

 

देश के कोने-कोने से लोग धन, समय और शारीरिक सामर्थ्य खर्च करके अपने आराध्य तक पहुँचते हैं। इनमें बुजुर्ग, महिलाएँ और अस्वस्थ लोग भी होते हैं। कठिन यात्रा के बाद घंटों कतार में खड़े रहना और अंततः कुछ सेकंड के दर्शन पाना उनकी पीड़ा को बढ़ाता है। इस समस्या के बीच VIP संस्कृति भी चिंता का विषय है। विशेष व्यक्तियों को प्राथमिकता देने से यदि आम श्रद्धालुओं को अतिरिक्त प्रतीक्षा करनी पड़े, तो यह व्यवस्था उनकी आस्था और सम्मान दोनों को ठेस पहुँचाती है।

 

ईश्वर के दरबार में हर भक्त बराबर है; किसी की विशेष सुविधा आम श्रद्धालु की परेशानी का कारण नहीं बननी चाहिए। हिमालय की कठिन भौगोलिक परिस्थितियाँ सरकार और प्रशासन के सामने चुनौती अवश्य हैं, लेकिन बेहतर योजना और जवाबदेही की आवश्यकता को नकारा नहीं जा सकता। श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ना उपलब्धि हो सकती है, पर उनकी परेशानियाँ बढ़ना व्यवस्था की सफलता नहीं है।

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त्रियुगीनारायण से बद्रीनाथ तक

केदारनाथ के बाद त्रियुगीनारायण मंदिर में दर्शन का अवसर मिला। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी स्थल पर भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। मंदिर की अखंड धूनी तथा भगवान विष्णु की उपस्थिति इस स्थान की आध्यात्मिक महत्ता बढ़ाती है। इसके बाद बद्रीनाथ धाम में भगवान बद्रीविशाल के दर्शन के साथ यात्रा पूर्ण हुई। इन पवित्र स्थलों ने श्रद्धा, समर्पण और भारतीय संस्कृति की गहराई का अनुभव कराया।

 

आस्था या सोशल मीडिया का प्रदर्शन?

यात्रा के दौरान धार्मिक स्थलों पर तस्वीरें लेने और रील बनाने की बढ़ती प्रवृत्ति भी दिखाई दी। अनुभव साझा करना गलत नहीं है, लेकिन जब कैमरा श्रद्धा पर हावी हो जाए, तो तीर्थयात्रा का वास्तविक उद्देश्य पीछे छूटने लगता है। प्रश्न यह है कि हम ईश्वर के दर्शन करने जाते हैं या दुनिया को यह दिखाने कि हम दर्शन करने गए थे? भक्ति का वास्तविक आनंद लाइक और कमेंट में नहीं, बल्कि उस क्षण में है जब मन बिना किसी दिखावे के अपने आराध्य के सामने झुकता है।

 

सरकार और प्रशासन के लिए स्पष्ट संदेश

चारधाम यात्रा में उमड़ती भीड़ सरकार और प्रशासन के लिए अवसर से अधिक जिम्मेदारी है। दर्शन व्यवस्था, यातायात, पार्किंग, पेयजल, स्वच्छता, चिकित्सा और आपातकालीन सहायता को मजबूत करना अनिवार्य है। बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए विशेष सुविधाएँ सुनिश्चित की जानी चाहिए तथा VIP व्यवस्था के कारण आम श्रद्धालुओं का आवागमन और दर्शन बाधित नहीं होने चाहिए।

 

श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सम्मान कोई सरकारी एहसान नहीं, बल्कि प्रशासन की बुनियादी जिम्मेदारी है। सरकार को घोषणाओं से आगे बढ़कर धरातल पर सुधार दिखाना होगा। समय रहते व्यवस्थाएँ नहीं सुधारी गईं, तो बढ़ती भीड़ भविष्य में गंभीर कठिनाइयाँ पैदा कर सकती है। विकास के साथ हिमालय के नाजुक पर्यावरण की रक्षा भी उतनी ही आवश्यक है।

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आस्था का सम्मान, व्यवस्था की जवाबदेही

10 अक्टूबर को लौटते समय मन में चारधाम के दर्शन का संतोष था, लेकिन व्यवस्थाओं में सुधार की आवश्यकता भी स्पष्ट थी। सरकार को जवाबदेही निभानी होगी, प्रशासन को संवेदनशील बनना होगा और यात्रियों को अनुशासन तथा पर्यावरण संरक्षण का पालन करना होगा।

 

आस्था अटूट है, लेकिन श्रद्धालुओं की सहनशीलता को व्यवस्था की कमजोरियों का विकल्प नहीं बनाया जा सकता। ईश्वर के दरबार में समानता तभी सार्थक होगी, जब प्रत्येक भक्त को समान सम्मान और यथासंभव सुविधाजनक दर्शन मिलें। क्योंकि चारधाम की यात्रा पैरों से जितनी पूरी होती है, उससे कहीं अधिक हृदय और आत्मा से पूरी होती है।

 

हर हर महादेव! जय बद्रीविशाल! जय माँ गंगे! जय माँ यमुना!

काशी विश्वनाथ मंदिर के शिखर से सोना गायब? PMO तक पहुंची शिकायत, मंडलायुक्त ने बताई सच्चाई

Kashi Vishwanath Temple Gold Controversy: अयोध्या स्थित राम मंदिर से चंदा चोरी के बाद अब वाराणसी के श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के शिखर से सोना गायब होने के आरोप ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस मामले में अधिवक्ता नित्यानंद राय ने शिकायत दर्ज कराते हुए दावा किया है कि मंदिर के शिखर पर लगे सोने के कई कलश गायब हो गए हैं। उनका आरोप है कि यह मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है और कथित तौर पर हर दूसरे दिन सोना निकाला जा रहा है। अधिवक्ता ने यह भी दावा किया है कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने उनकी शिकायत पर संज्ञान लिया है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

29 सितंबर को की थी PMO से शिकायत

वाराणसी के तेलियाबाग निवासी अधिवक्ता नित्यानंद राय ने बताया कि 29 सितंबर को उन्होंने मंडल आयुक्त समेत प्रधानमंत्री कार्यालय को एक पत्र भेज कर शिकायत की थी। पत्र में उन्‍होंने बताया कि मंदिर के उत्तरी द्वार के ठीक ऊपर दो स्थानों पर स्वर्ण कलश गायब है। उसकी जगह वहां पर कुछ पेंट किया गया है। नित्यानंद राय ने बताया कि यह तकरीबन 2 से लेकर 3 फीट की चौड़ाई का था। पहले भी मंदिर से सोना चांदी की चोरी हो चुकी है, इसलिए इस प्रकरण की गंभीरता से जांच किए जाने की आवश्यकता है। ऐसा पैच करीब दो से तीन जगहों पर है।

श्वेत पत्र जारी करने और वेबसाइट पर जानकारी देने की मांग

अधिवक्ता नित्यानंद राय ने मांग की है कि मंदिर के शिखर से सोना गायब होने के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उनका कहना है कि मंदिर में सोना कब से गायब हो रहा है और अब तक कितनी मात्रा में सोना या चांदी गायब हुआ है, इसकी पूरी जानकारी सामने आनी चाहिए।

उन्होंने मंदिर प्रशासन से इस मामले में श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है। साथ ही, मंदिर के अंदर और शिखर पर लगे सोने-चांदी का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करने की बात कही है। नित्यानंद राय चाहते हैं कि यह जानकारी मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराई जाए, ताकि लोग इसे आसानी से देख सकें। शिकायतकर्ता के मुताबिक, मंदिर प्रशासन की ओर से अब तक जो जवाब दिया गया है, उससे वह संतुष्ट नहीं हैं।

ओलावृष्टि में टूटा था कलश का हिस्सा, मंदिर प्रशासन ने सुरक्षित रखा

दूसरी ओर, वाराणसी के मंडलायुक्त एस. राजलिंगम ने मंदिर से सोना गायब होने के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने इन खबरों को भ्रामक और बेबुनियाद बताया। मंडलायुक्त के मुताबिक, करीब तीन महीने पहले ओलावृष्टि के दौरान मंदिर के प्रवेश द्वार के ठीक ऊपर बने गुंबद या कलश का एक हिस्सा टूटकर गिर गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि टूटे हुए हिस्से को मंदिर प्रशासन ने सुरक्षित रख लिया है।

IIT मद्रास की तकनीकी टीम करेगी सर्वे

मंडलाआयुक्त ने बताया कि गिरा हुआ कलश जिसे विश्वनाथ धाम में सुरक्षित रखा गया है, पुनर्स्थापना के लिए IIT मद्रास से सर्वे कराया गया है। उसकी मदद से जल्द ही फिर से कलश स्थापित कराया जाएगा। बिना किसी तकनीकी परीक्षण के कलश को दोबारा लगाना वैज्ञानिक दृष्टि से उचित नहीं है। इसके लिए IIT मद्रास से संपर्क किया गया है और वहां की टीम प्राथमिक सर्वे का काम कर चुकी है।

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आवा गुरु चाय पीला… वाराणसी रोपवे प्रोजेक्ट में हवा में भी मिलेगा खास बनारसी अहसास, नगर निगम की ये है तैयारी

धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी में देश का पहला अर्बन रोपवे ट्रांसपोर्ट बनकर लगभग तैयार हो चुका है। जल्द ही देश और दुनिया भर से आने वाले पर्यटक और श्रद्धालु इस रोपवे के जरिए आसमान से बनारस के विहंगम दृश्यों का आनंद लेते हुए रोमांचक सफर कर सकेंगे। लेकिन इस सफर की सबसे दिलचस्प बात यह होगी कि जब यात्री हवा में रोपवे की ट्रॉली में सफर कर रहे होंगे, तब नीचे छतों से उनका स्वागत एकदम खास और ठेठ बनारसी अंदाज में होगा। वाराणसी नगर निगम ने इस रोमांचक सफर को और यादगार बनाने के लिए एक बेहद धांसू और खूबसूरत प्लान तैयार किया है, जिससे हवा में तैरते यात्रियों को हर पल काशी में होने का अहसास मिलता रहेगा।

‘का हो गुरु…’ और ‘आवा गुरु चाय पीला’: छतों पर उकेरे जा रहे बनारसी स्लोगन

नगर निगम की इस अनोखी पहल के तहत रोपवे के पूरे 4 किलोमीटर लंबे रूट के नीचे आने वाले मकानों की छतों पर खास थीम बेस्ड पेंटिंग्स बनाई जा रही हैं। जब यात्री ऊपर ट्रॉली से नीचे देखेंगे तो उन्हें छतों पर ठेठ बनारसी बोली वाले स्लोगन लिखे दिखाई देंगे। इन पेंटिंग्स में ‘का हो गुरु का हाल चाल बा…’ और ‘आवा गुरु चाय पीला…’ जैसे बेहद लोकप्रिय बनारसी संवादों को खूबसूरत रंगों में उकेरा गया है। इसके अलावा कई मकानों की छतों पर बनारस के प्रसिद्ध घाटों के मनमोहक चित्र और पारंपरिक रंगोलियां भी बनाई जा रही हैं।

वाराणसी नगर निगम के जनसंपर्क अधिकारी संदीप श्रीवास्तव ने बताया कि इस थीम बेस्ड पेंटिंग के जरिए रोपवे के सफर को और ज्यादा आकर्षक और जीवंत बनाने की कोशिश की जा रही है। अभी अलग-अलग छतों पर करीब दो दर्जन पेंटिंग्स बनाने का काम तेजी से चल रहा है।

15 नवंबर तक निर्माण पूरा करने का लक्ष्य, 3 स्टेशनों का 96% काम पूरा

वाराणसी में 807 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस अर्बन रोपवे का निर्माण कार्य अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। इसे बनाने वाली कार्यदायी संस्था नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड ने 15 नवंबर तक निर्माण कार्य पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य रखा है। प्रोजेक्ट के तहत कुल 5 स्टेशन बनाए जा रहे हैं, जिनमें से कैंट, विद्यापीठ और रथयात्रा स्टेशन का लगभग 96 फीसदी काम पूरा हो चुका है। वहीं, गोदौलिया और गिरजाघर स्टेशन का निर्माण कार्य भी अंतिम दौर में है। कैंट रेलवे स्टेशन से रथयात्रा के बीच अलग-अलग चरणों में रोपवे का टेस्टिंग) का काम सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है, जबकि रथयात्रा से गोदौलिया के बीच फिलहाल ट्रायल रन चल रहा है।

पीएम मोदी कर सकते हैं उद्घाटन, रोजाना 90 हजार यात्री करेंगे सफर

तैयारियों को देखते हुए उम्मीद जताई जा रही है कि बहुत जल्द प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काशी की इस महत्वाकांक्षी और देश की पहली अर्बन रोपवे परियोजना का उद्घाटन कर इसे जनता को समर्पित कर सकते हैं। इस रोपवे ट्रांसपोर्ट के शुरू होने से वाराणसी आने वाले पर्यटकों और स्थानीय लोगों को सीधे कैंट स्टेशन से काशी विश्वनाथ धाम पहुंचना बेहद आसान हो जाएगा। अनुमान के मुताबिक, इस रोपवे से रोजाना करीब 90 हजार यात्री सफर करेंगे। इसके शुरू होते ही रथयात्रा, लक्सा और गिरजाघर जैसे बेहद व्यस्त मार्गों पर गाड़ियों का दबाव काफी कम हो जाएगा, जिससे इस इलाके में दशकों से लग रहे ‘जाम के झाम’ से लोगों को हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी।

वाराणसी से अभिषेक जायसवाल की रिपोर्ट

‘जनसेवा से राष्ट्रसेवा’ तक PM मोदी के 25 साल, वाराणसी से वडनगर सेवा यात्रा का भव्य समापन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनसेवा और समर्पण के 25 साल पूरे होने के मौके पर ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत निकाली गई ‘वाराणसी से वडनगर सेवा यात्रा’ का बुधवार को वडनगर में समापन हुआ। इस अवसर पर वडनगर में गौरवपूर्ण समापन समारोह आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी मौजूद रहे। इस दौरान अलग-अलग राज्यों से पहुंचे बाइकर्स और सेवा यात्रियों का स्वागत किया गया और उन्हें सम्मानित भी किया गया।

सीएम ने क्या कहा

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने ‘वाराणसी से वडनगर सेवा यात्रा’ के समापन अवसर पर कहा कि, “7 अक्टूबर, 2001 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर सेवा दायित्व संभाला था। आज प्रधानमंत्री ने लगातार 25 वर्षों तक जनसेवा और सुशासन का दायित्व निभाकर देश में सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले जननायक बनने का गौरव हासिल किया है। ” सीएम ने आगे कहा, “प्रधानमंत्री ने सत्ता को पद के बजाय सेवा का माध्यम माना और गरीबों, मध्यम वर्ग, किसानों, महिलाओं और युवाओं के विकास पर जोर दिया।”

भारत की ताकत दुनिया के सामने मजबूत

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने आगे कहा कि, “गुजरात में वाइब्रेंट गुजरात समिट, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, बुलेट ट्रेन, GIFT City और सेमीकंडक्टर हब जैसे बड़े प्रोजेक्ट मोदी के विकास के विजन को दिखाते हैं। पीएम मोदी के नागरिक-केंद्रित शासन के चलते देश में करीब 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं और भारत दुनिया की पांच बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो गया है।” उन्होंने कहा कि, “कोरोना के दौरान वैक्सीन की मदद, ग्रीन एनर्जी के लक्ष्यों, अनुच्छेद 370 हटाने, आतंकवाद के खिलाफ सख्त नीति और अंतरिक्ष व रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता जैसे कदमों से भारत की ताकत दुनिया के सामने मजबूत हुई है। पटेल ने प्रधानमंत्री को जनसेवा के 25 साल पूरे होने पर बधाई दी और कहा कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को पूरा करने में गुजरात की युवा शक्ति अहम भूमिका निभाएगी।”

देश की सेवा में एक भी दिन नहीं किया आराम

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 7 अक्टूबर को ऐतिहासिक दिन बताते हुए कहा कि इसी दिन 2001 में नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपनी जनसेवा की शुरुआत की थी। उन्होंने कहा कि, “पीएम मोदी ने पिछले 25 वर्षों में बिना एक भी दिन आराम किए देश के विकास और गरीबों के कल्याण के लिए काम किया।” चौहान ने कोरोना संकट और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई के दौरान प्रधानमंत्री के नेतृत्व की भी सराहना की।” उन्होंने कहा कि, “नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेजी से दुनिया में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है और विश्वगुरु बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। वाराणसी से वडनगर तक बाइक रैली के जरिए पहुंचे युवाओं की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि देश के युवाओं में देशभक्ति और राष्ट्रसेवा की भावना होनी चाहिए और उन्हें विकास के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहिए।”

मद् भगवद् गीता के श्लोकों का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री के व्यक्तित्व की सराहना करते हुए कहा कि गीता में बताए गए ‘सात्विक कर्ता’ के सभी गुण प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी में दिखाई देते हैं। वे राग-द्वेष और अहंकार से परे रहकर धैर्य के प्रतीक बन गए हैं।

पश्चिम बंगाल के सीएम ने क्या कहा

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने वडनगर पहुंचने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जन्मभूमि को नमन करते हुए कहा कि, इस धरती ने देश को एक दूरदर्शी नेता दिया है। उन्होंने कहा कि, प्रधानमंत्री के नेतृत्व में ‘राष्ट्र प्रथम’ और गरीब कल्याण को ध्यान में रखते हुए देश में विकास और सुशासन को बढ़ावा मिला। अधिकारी के मुताबिक, किसान कल्याण, ग्रामीण विकास, सड़क और रेलवे के विस्तार, पीएम आवास योजना, पीएम किसान सम्मान निधि और उड़ान योजना जैसी योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंच रहा है।

उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित भारत बनाने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए देशभर के लोग एकजुट होकर आगे बढ़ रहे हैं। अधिकारी ने वाराणसी से वडनगर तक निकाली गई सेवा यात्रा को देश की एकता, सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक जुड़ाव को मजबूत करने वाला प्रयास बताया।

सेवा यात्रा के समापन कार्यक्रम में गुजरात बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और निकोल विधायक जगदीश विश्वकर्मा ने देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे बाइकर्स और युवाओं का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि, “7 अक्टूबर 2001 को नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी और अब उनकी जनसेवा के 25 साल पूरे हो गए हैं। इस यात्रा के दौरान युवाओं को सरकार की अलग-अलग योजनाओं के लाभार्थियों से सीधे बातचीत करने का मौका मिला।” विश्वकर्मा ने कहा कि, “मोदी का 25 साल का सार्वजनिक जीवन ‘जनसेवा और राष्ट्रसेवा’ के प्रति समर्पण का उदाहरण है। उनके नेतृत्व में देश के विकास, सुशासन और आर्थिक मजबूती के लिए कई महत्वपूर्ण काम हुए हैं, जिससे भारत की वैश्विक पहचान भी मजबूत हुई है।

पीएम मोदी के 25 साल के जनसेवा का सफर

‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 साल के जनसेवा के सफर को लोगों तक पहुंचाने के लिए वाराणसी से वडनगर तक सेवा यात्रा निकाली गई। इस यात्रा में 500 बाइकर्स और कई युवा शामिल हुए, जिन्होंने 10 राज्यों के गांवों और शहरों में पहुंचकर सफाई अभियान, पौधारोपण, नशामुक्ति और लोगों से संवाद जैसे सामाजिक काम किए। अभियान से बड़ी संख्या में लोग जुड़े और पीएम नरेंद्र मोदी ने भी ऑनलाइन युवाओं का उत्साह बढ़ाया। यात्रा के दौरान वडनगर के शर्मिष्ठा तालाब का जल काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचाया गया, जबकि वाराणसी से लाए गए पवित्र जल से वडनगर के हाटकेश्वर महादेव मंदिर में अभिषेक किया गया। इस पहल के जरिए वाराणसी और वडनगर के बीच आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जुड़ाव को भी दर्शाया गया।

कौन-कौन था मौजूद

सेवा यात्रा के समापन समारोह में राज्य सरकार के मंत्री सर्व ऋषिकेशभाई पटेल, कौशिकभाई वेकरिया, प्रवीणभाई माली, कमलेशभाई पटेल, गुजरात प्रदेश प्रभारी तरुण चुग, सांसद सर्व हरिभाई पटेल, मयंक नायक, राजेंद्रभाई शुक्ल, मध्य प्रदेश के सांसद वी.डी. शर्मा, मेहसाणा जिला पंचायत अध्यक्ष नितिनभाई पटेल, विधायक सर्व किरीटभाई पटेल, मुकेशभाई पटेल, सरदारभाई चौधरी, सुखाजी ठाकोर, राजेश चावड़ा, पूर्व उप मुख्यमंत्री नितिनभाई पटेल, मेहसाणा दूध सागर डेयरी के चेयरमैन अशोकभाई चौधरी, मेहसाणा डिस्ट्रिक्ट बैंक के चेयरमैन विनोदभाई पटेल, वडनगर नगर पालिका अध्यक्ष, सेवा संकल्प अभियान गुजरात प्रदेश प्रभारी और पूर्व मंत्री ब्रिजेश मेरजा, भाजपा प्रदेश महामंत्री प्रशांतभाई कोराट, उपाध्यक्ष नटुजी ठाकोर, अग्रणी भरतभाई पंड्या, सीताबेन पटेल, गिरीशभाई राजगोर, मेहसाणा जिला प्रभारी भरतभाई डांगर सहित बाइकर्स, प्रबुद्ध नागरिक और बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

प्रधानमंत्री मोदी का 25 अक्टूबर को काशी में जेन-जी संवाद प्रस्तावित

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 25 अक्टूबर को काशी में हजारों युवाओं के साथ जेन-जी संवाद कार्यक्रम प्रस्तावित है। इसके आयोजन की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। सूत्रों के अनुसार, कार्यक्रम काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) अथवा संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के परिसर में आयोजित किए जाने की तैयारी है।

प्रस्तावित कार्यक्रम में 18 से 25 वर्ष आयु वर्ग के करीब 30 हजार युवाओं के शामिल होने की संभावना है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जिला और महानगर इकाइयों के साथ ही क्षेत्रीय संगठन भी आयोजन की तैयारियों में जुटे हैं। काशी में 22, 24 और 25 अक्टूबर को भव्य एयर शो भी प्रस्तावित है।

नमो घाट पर आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई गणमान्य लोगों के शामिल होने की संभावना है। एयर शो की तैयारियों के तहत नमो घाट पर छह बेड का अस्थायी अस्पताल बनाया जा रहा है, जबकि सुरक्षा व्यवस्था के दृष्टिगत डोमरी में वॉच टावर भी बनाया जा रहा है।

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एसपीजी और एटीएस समेत विभिन्न सुरक्षा एजेंसियां तैयारियों में जुटी हैं। प्रस्तावित एयर शो में सेना के विभिन्न प्रकार के विमान और एयरक्राफ्ट करीब 90 मिनट तक हवाई करतब प्रस्तुत करेंगे। गंगा के दोनों तटों से इस भव्य आयोजन को देखने के लिए करीब 30 लाख दर्शकों के पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने अधिकारियों को भीड़ के दबाव वाले संभावित स्थानों को चिह्नित कर विस्तृत क्राउड मैनेजमेंट प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

पुलिस आयुक्त ने सभी प्रमुख घाटों और दर्शक स्थलों पर प्रवेश एवं निकास के लिए अलग-अलग मार्ग, बैरिकेडिंग, होल्डिंग एरिया, क्यू मैनेजमेंट तथा पैदल आवागमन के लिए निर्धारित मार्ग बनाने के निर्देश दिए हैं।

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प्रधानमंत्री मोदी के 25 वर्ष पूर्ण होने पर धामी ने काशी विश्वनाथ मंदिर में की विशेष पूजा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक जीवन और राष्ट्र सेवा में 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार सुबह उत्तरकाशी स्थित पौराणिक श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की।

उन्होंने बाबा विश्वनाथ से श्री मोदी के स्वस्थ, दीर्घायु एवं यशस्वी जीवन की कामना की। मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा कि श्री मोदी का 25 वर्षों का सार्वजनिक जीवन राष्ट्रसेवा, जनकल्याण और देश के विकास के प्रति समर्पण का काल रहा है। उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन में देश को नई दिशा और नई ऊर्जा देने का कार्य किया है।

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उन्होंने बाबा विश्वनाथ से प्रार्थना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत विकसित राष्ट्र के संकल्प की दिशा में निरंतर आगे बढ़ता रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की पवित्र धरती से श्री मोदी के दीर्घ एवं सफल सार्वजनिक जीवन के लिए बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद लेना उनके लिए सौभाग्य का विषय है।

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वाराणसी में देश के पहले अर्बन रोपवे का काम कहां तक पहुंचा? इसके स्टेशन, किराया और 15 मिनट वाले नए रूट की पूरी डिटेल जानिए

Varanasi Ropeway Project: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में देश का पहला अर्बन रोप वे ट्रांसपोर्ट तैयार हो रहा है। कैंट से गोदौलिया तक बन रहे इस रोप वे ट्रांसपोर्ट से 4 किलोमीटर का सफर आसान होगा। अब तक रोप वे ट्रांसपोर्ट का 95 फीसदी काम करीब पूरा हो चुका है। इस रोपवे ट्रांसपोर्ट से गोदौलिया-कैंट रूट पर गाड़ियों का प्रेशर कम होगा और इससे रोजाना करीब 90 हजार लोग सफर कर पायेंगे। इस रोप वे ट्रांसपोर्ट की शुरुआत के बाद काशी में टूरिज्म को नया आयाम भी मिले गा। रोपवे इस प्राचीन शहर में पर्यटकों को बिलकुल अलग अनुभूति कराएगा। अब तक पहाड़ी इलाकों में तो लोग रोपवे का सफर करते है लेकिन शहरी इलाके में पब्लिक ट्रांसपोर्ट के तौर पर पहली बार लोग ऐसे सफर का एक्सपीरियंस उठाया जा सकेगा।

वाराणसी में बन रहें रोप वे ट्रांसपोर्ट के लिए शहर में कुल 5 स्टेशन बनाए गए है। इसमें कैंट, विद्यापीठ, रथयात्रा, गिरजाघर और गोदौलिया शामिल हैं। हर एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन के बीच सफर के लिए स्थानीय लोगों और पर्यटकों को 10 रूपये प्रति व्यक्ति किराया देना होगा। जो लोग कैंट से सीधे गोदौलिया तक का सफर करेंगे उन्हें इसके लिए 50 रूपये खर्च करने होंगे। फिलहाल सड़क मार्ग से भी कैंट से गोदौलिया तक के सफर के लिए करीब इतना ही किराया लोगों को देना होता है। रोपवे से इस सफर को सिर्फ 15 से 16 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। फिलहाल सड़क मार्ग से इस सफर के लिए लोगों को अभी 35 से 45 मिनट का समय लगता है।

इस रोपवे को कौन बना रहा?

वाराणसी में नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक मैंनेजमेंट लिमिटेड इस काम को पूरा कर रही है। कैंट, विद्यापीठ और रथयात्रा के स्टेशन के साथ यहां रोप वे ट्राली के ट्रायल का काम भी लगभग पूरा हो चुका है। वहीं गिरजाघर और गोदौलिया स्टेशन का काम फिलहाल तेजी से जारी है। यहां तारों पर गंडोला की टेस्टिंग भी हो रही है। वाराणसी के कमिश्नर एस राजलिंगम ने बताया की रोपवे ट्रांसपोर्ट का 95 फीसदी काम पूरा हो चुका है। अगले महीने तक बाकी बचे काम को भी पूरा किया जा सकता है।

इस प्रोजेक्ट पर कितना हो रहा खर्च, ये भी जानिए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस ड्रीम प्रोजेक्ट पर कुल 807 करोड़ रूपये खर्च हो रहे हैं। वाराणसी में बन रहा देश का पहला अर्बन रोपवे ट्रांसपोर्ट को भी वाराणसी के थीम पर ही बनाया जा रहा है। यहां के स्टेशन पर आप भगवान शिव के साथ घाटों का खूबसूरत थीम भी दिखेगी। इसके अलावा जिस ट्राली (गंडोला) से यात्री सफर करेंगे उनमें भी घाट और मंदिर की झलक पर्यटकों को दिखेगी। रोप वे ट्रांसपोर्ट के लिए वाराणसी में 29 टॉवर बनाए गए है। इन टॉवर की ऊंचाई 55 मीटर तक है। यानी पर्यटक काशी की खूबसूरत छठा को 150 फीट की ऊंचाई से निहार सकेंगे।

पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

हर स्टेशन पर 2 से 3 मिनट के अंतराल पर रोपवे ट्राली मिलेगी। इसमें एक बार 10 यात्री सफर कर पाएंगे। हर घंटे करीब 6 हजार लोग इससे सफर करेंगे। पुरे दिन में करीब 16 घंटे इसका संचालन होगा। यानी एक दिन में करीब 90 हजार से ज्यादा लोग इससे सफर कर पाएंगे। रोप वे ट्रांसपोर्ट तैयार होने के बाद पर्यटक आसानी से काशी विश्वनाथ धाम पहुंच सकेंगे।

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टूरिज्म वेलफेयर एसोशिसन के अध्यक्ष राहुल मेहता ने बताया की रोप वे ट्रांसपोर्ट से सफर करना यहां आने वाले लाखों पर्यटकों के लिए बिलकुल नया अनुभव होगा। इसलिए इसकी शुरुआत के बाद यहां टूरिज्म इंड्रस्टी को एक बार फिर बूस्टअप मिलेगा।

(वाराणसी से अभिषेक जायसवाल की रिपोर्ट)

Vande Bharat News: ‘वंदे भारत’ एक्सप्रेस पर 10 बड़े अपडेट! काशी को मिलेगी स्लीपर ट्रेन, सूरत-उदयपुर रूट को भी मंजूरी; माल ढुलाई का भी हुआ ट्रायल

Indian Railways News: ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ अब अपने विस्तार के एक नए दौर में एंट्री कर रही है। भारतीय रेलवे स्लीपर वंदे भारत सेवाओं, नए रूटों और तेज रफ्तार माल ढुलाई जैसी कई योजनाओं पर तेजी से काम कर रहा है। देश के अलग-अलग हिस्सों में कई नए बदलाव और प्रस्ताव सामने आ रहे हैं, जिन पर यात्रियों की नजर बनी हुई है। आने वाले समय में वंदे भारत नेटवर्क का विस्तार सिर्फ यात्रियों की यात्रा को तेज करने तक सीमित नहीं रहेगा। बल्कि लंबी दूरी की रात की यात्रा और तेज माल परिवहन में भी इसकी भूमिका बढ़ सकती है।

वाराणसी से नई दिल्ली के बीच संभावित स्लीपर वंदे भारत से लेकर सूरत-उदयपुर वंदे भारत और 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से मालगाड़ी के ट्रायल तक, रेलवे का फोकस अब सिर्फ दिन में चलने वाली चेयर-कार वंदे भारत ट्रेनों तक सीमित नहीं रह गया है।

आइए जानते हैं वंदे भारत से जुड़े 10 बड़े अपडेट

1. वाराणसी को मिल सकती है दिल्ली के लिए स्लीपर वंदे भारत

  • वाराणसी के यात्रियों की लंबे समय से चली आ रही मांग पर अब आगे बढ़ने की उम्मीद है। रेलवे बोर्ड ने वाराणसी जंक्शन (कैंट) और नई दिल्ली के बीच स्लीपर वंदे भारत शुरू करने की दिशा में कदम उठाए हैं। हालांकि, ट्रेन का अंतिम रूट अभी तय नहीं हुआ है।
  • उम्मीद जताई जा रही है कि यह सेवा त्योहारी सीजन से पहले शुरू हो सकती है। इससे दशहरा और दिवाली के दौरान बढ़ने वाली यात्रियों की भीड़ को राहत मिल सकती है।
  • वाराणसी से पहले से ही काशी विश्वनाथ, शिवगंगा और बनारस-नई दिल्ली सुपरफास्ट एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें चलती हैं। इसके अलावा वाराणसी जंक्शन से दो वंदे भारत और तीन महामना एक्सप्रेस सेवाएं भी साप्ताहिक आधार पर संचालित होती हैं। इसके बावजूद यात्रियों की मांग काफी अधिक बनी हुई है।
  • खासकर रविवार शाम को दिल्ली जाने वाली ट्रेनों में भारी भीड़ देखने को मिलती है। ऐसे में स्लीपर वंदे भारत काशी और राष्ट्रीय राजधानी के बीच लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए एक अतिरिक्त विकल्प बन सकती है।

2. नई दिल्ली-पटना स्लीपर वंदे भारत की भी चर्चा

  • नई दिल्ली और पटना के बीच स्लीपर वंदे भारत ट्रेन को लेकर भी काफी चर्चा हो रही है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इस सेवा की शुरुआत को लेकर कोई अंतिम मंजूरी या आधिकारिक कार्यक्रम नहीं दिया गया है।
  • स्लीपर वंदे भारत के विस्तार की चर्चाओं के बीच नई दिल्ली-पटना जैसे व्यस्त रूट पर ऐसी ट्रेन की संभावना यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।

3. तेज रफ्तार माल ढुलाई के लिए वंदे भारत ट्रेन

  • न्यूज 18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वंदे भारत का इस्तेमाल सिर्फ यात्रियों को तेज गति से सफर कराने तक सीमित नहीं रहने वाला है। चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) द्वारा बनाई गई 16 कोच वाली ट्रेन को पार्सल और अन्य सामान को अधिक रफ्तार से पहुंचाने के लिए तैयार किया गया है।
  • इस ट्रेन का संभावित ग्राहक आधार पारंपरिक माल ढुलाई से आगे बढ़कर ई-कॉमर्स, कूरियर सेवाओं, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्युटिकल्स और कोल्ड-चेन लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों तक फैला हुआ है।
  • अगर तेज रफ्तार मालगाड़ियों को बड़े स्तर पर सफलतापूर्वक चलाया जाता है, तो समय के प्रति संवेदनशील सामान को देश के प्रमुख बाजारों तक पहुंचाने के लिए कारोबारियों को परिवहन का एक और विकल्प मिल सकता है।

4. सूरत को मिली पहली वंदे भारत सेवा की मंजूरी

  • सूरत को अपनी पहली वंदे भारत सेवा मिलने का रास्ता साफ हो गया है। रेलवे बोर्ड ने सूरत और उदयपुर सिटी के बीच नई वंदे भारत ट्रेन को मंजूरी दी है।
  • प्रस्तावित ट्रेन का नंबर 26903/26904 बताया गया है। यह ट्रेन करीब 690 किलोमीटर की दूरी लगभग 7 घंटे 30 मिनट में तय करेगी।
  • ट्रेन सप्ताह में छह दिन चलाने की योजना है और मंगलवार को इसका विकली ऑफ रहेगा।
  • ट्रेन सूरत से सुबह 6:10 बजे रवाना होकर दोपहर 1:40 बजे उदयपुर सिटी पहुंचेगी। जबकि वापसी में उदयपुर से ट्रेन दोपहर 3:35 बजे चलेगी और रात 11 बजे सूरत पहुंचेगी।

5. सूरत-उदयपुर वंदे भारत के रास्ते में 9 प्रमुख ठहराव

  • आठ कोच वाली इस वंदे भारत ट्रेन के रास्ते में कुल 9 कमर्शियल स्टॉप प्रस्तावित हैं। इनमें शामिल हैं:-

भरूच

वडोदरा

आनंद

मणिनगर

असारवा

हिम्मतनगर

शामलाजी रोड

डूंगरपुर

जावर

  • यह ट्रेन गुजरात और राजस्थान के कई महत्वपूर्ण शहरों को तेज रेल कनेक्टिविटी से जोड़ेगी। इससे दोनों राज्यों के बीच सफर करने वाले यात्रियों को फायदा मिलने की उम्मीद है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, नई सूरत-उदयपुर वंदे भारत मौजूदा उदयपुर सिटी-असारवा वंदे भारत की जगह ले सकती है। यह ट्रेन फरवरी 2026 में शुरू हुई थी।
  • रेलवे बोर्ड की 31 अगस्त की मंजूरी के बाद नई सर्विस नवरात्रि से पहले शुरू होने की उम्मीद है। इस साल नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू हो रही है।

6. मंगलुरु-बेंगलुरु वंदे भारत के समय पर उठे सवाल

  • बेंगलुरु और मंगलुरु के बीच प्रस्तावित वंदे भारत का रनिंग टाइम ट्रायल पूरा हो चुका है। लेकिन ट्रायल के दौरान सामने आए समय को लेकर कर्नाटक के तटीय इलाकों के यात्री संगठनों ने चिंता जताई है।
  • दक्षिण पश्चिम रेलवे के ट्रायल में सुबह बेंगलुरु से ट्रेन चलाने और बाद में उसी दिन वापसी का कार्यक्रम शामिल था।
  • हालांकि, यात्री प्रतिनिधियों का कहना है कि अंतिम समय-सारिणी ऐसी होनी चाहिए, जिससे तटीय क्षेत्र से बेंगलुरु आने वाले कामकाजी और कारोबारी यात्रियों को वास्तविक फायदा मिल सके।
  • पश्चिम करावली रेलवे यात्री अभिवृद्धि समिति के अध्यक्ष जी. हनुमंथ कामथ ने मांग की है कि ट्रेन सुबह मंगलुरु से रवाना हो और उसी रात वापस लौटे।
  • यात्रियों की चिंता यह है कि अगर ट्रेन बेंगलुरु बहुत देर से पहुंचेगी, खासकर आधी रात के करीब, तो सरकारी या कारोबारी काम से राजधानी आने वाले यात्रियों के लिए इसका उपयोग सीमित हो जाएगा।
  • यात्री संगठनों ने मंगलुरु सेंट्रल-तिरुवनंतपुरम सेंट्रल वंदे भारत का उदाहरण देते हुए कहा है कि सुबह मंगलुरु से प्रस्थान और रात में वापसी का शेड्यूल यात्रियों के लिए बेहतर काम करता है।

7. बलांगीर से वंदे भारत की मांग पर रेलवे बोर्ड का जवाब

  • ओडिशा के बलांगीर से वंदे भारत ट्रेन शुरू करने की मांग पर भी रेलवे बोर्ड ने जवाब दिया है। सांसद निरंजन बिशी ने 30 मार्च 2026 को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर बलांगीर से नई दिल्ली, वाराणसी, बेंगलुरु और जम्मू जैसे प्रमुख शहरों के लिए वंदे भारत कनेक्टिविटी की मांग की थी।
  • रेलवे बोर्ड ने अपने जवाब में कहा कि बलांगीर के पास पहले से 66 ट्रेन सेवाएं हैं। इनमें बेंगलुरु और वाराणसी की ओर जाने वाली कई ट्रेनें शामिल हैं। दिल्ली की ओर मौजूदा कनेक्टिविटी के लिए रेलवे ने समता एक्सप्रेस और टिटलागढ़ की कनेक्टिविटी का भी जिक्र किया।
  • हालांकि, रेलवे बोर्ड का जवाब नई वंदे भारत ट्रेन को मंजूरी नहीं माना जा सकता। बोर्ड ने संकेत दिया है कि किसी नई ट्रेन सेवा की शुरुआत ट्रैफिक सर्वे, परिचालन की व्यवहार्यता और कोचों की उपलब्धता जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगी।

8. वंदे भारत के TTE का वीडियो 1 करोड़ व्यूज के पार

  • नई ट्रेनों और रेलवे की योजनाओं से अलग वंदे भारत से जुड़ी एक घटना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई है। TTE अमित गुप्ता के अनुसार, दो लड़के एक रेलवे स्टेशन पर खड़ी वंदे भारत ट्रेन में सिर्फ अंदर से ट्रेन देखने के लिए चढ़ गए थे। ट्रेन में चढ़ने के बाद उसके दरवाजे बंद हो गए। वे तुरंत नीचे नहीं उतर सके।
  • इसके बाद उनकी मुलाकात TTE से हुई। शुरुआत में TTE को लगा कि दोनों बिना टिकट यात्रा कर रहे हैं। ऐसे में उन पर 4,840 रुपये का संभावित जुर्माना लग सकता था। लड़कों ने बताया कि उनके पास सिर्फ 300 रुपये हैं। बाद में TTE को पता चला कि दोनों ट्रेन में यात्रा करने के लिए नहीं बल्कि उसे अंदर से देखने के लिए चढ़े थे।
  • इसके बाद TTE ने कथित तौर पर 300 रुपये लेने से इनकार कर दिया और कहा कि उन्हें पैसे नहीं चाहिए। उन्होंने दोनों लड़कों को अगले स्टेशन पर उतरने के लिए कहा और दरवाजे के पास वाले हिस्से में बैठने को कहा।
  • अमित गुप्ता ने इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया। बताया गया है कि वीडियो को चार दिनों में 1 करोड़ से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं। वीडियो पर बड़ी संख्या में लाइक्स और सकारात्मक प्रतिक्रियाएं भी आई हैं।

9. वंदे भारत बनाम राजधानी: कौन सी ट्रेन बेहतर?

  • वंदे भारत नेटवर्क के विस्तार के साथ इसकी तुलना राजधानी एक्सप्रेस से भी लगातार की जा रही है। हालांकि, दोनों ट्रेनों को अलग-अलग यात्रा जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।
  • पहली राजधानी एक्सप्रेस 1969 में नई दिल्ली और हावड़ा के बीच शुरू हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य राजधानी और देश के प्रमुख शहरों के बीच तेज रात की यात्रा उपलब्ध कराना था।
  • वहीं, वंदे भारत ने फरवरी 2019 में नई दिल्ली-वाराणसी रूट से सेवा शुरू की और इसे मुख्य रूप से तेज दिन की इंटर-सिटी यात्रा के लिए तैयार किया गया।
  • दोनों के बीच सबसे बड़ा अंतर यात्रा के स्वरूप का है। सामान्य वंदे भारत में चेयर-कार यात्रा की सुविधा होती है, जबकि कई सेवाओं में एग्जीक्यूटिव चेयर कार भी उपलब्ध है।
  • वंदे भारत में ऑटोमैटिक दरवाजे, पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम और आधुनिक सीटिंग जैसी सुविधाएं भी दी गई हैं।
  • इसके मुकाबले राजधानी एक्सप्रेस में पारंपरिक रूप से फर्स्ट AC, सेकेंड AC और थर्ड AC में सोने की सुविधा होती है। इसलिए रातभर की यात्रा के लिए राजधानी अधिक उपयुक्त मानी जाती है।
  • हालांकि, स्लीपर वंदे भारत के आने के बाद दोनों ट्रेनों के बीच का यह अंतर धीरे-धीरे कम होता दिखाई दे रहा है।

10. स्लीपर वंदे भारत बदल सकती है लंबी दूरी की यात्रा का समीकरण

  • स्लीपर वंदे भारत में वंदे भारत की आधुनिक डिजाइन और तकनीक को रात की लंबी दूरी की यात्रा के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। इन ट्रेनों में सोने के लिए बर्थ, कुशन वाली बर्थ, शोर कम करने वाली तकनीक और सेंसर आधारित लाइटिंग जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
  • फर्स्ट AC सेक्शन में प्रीमियम यात्रियों के लिए अतिरिक्त सुविधाएं मिलने की भी उम्मीद है। इससे स्लीपर वंदे भारत कुछ चुनिंदा रूटों पर राजधानी एक्सप्रेस समेत प्रीमियम रात की ट्रेनों को सीधी टक्कर दे सकती है।
  • आखिरकार यात्रियों के लिए फैसला सिर्फ ट्रेन के नाम पर नहीं, बल्कि यात्रा का समय, कुल अवधि, सुविधा और किराए जैसे पहलुओं पर निर्भर करेगा। ताजा घटनाक्रम से साफ है कि वंदे भारत अब सिर्फ तेज रफ्तार वाली दिन की इंटर-सिटी ट्रेन तक सीमित नहीं रह गई है।
  • स्लीपर सेवाएं, नए रूट, तेज माल ढुलाई और मौजूदा सेवाओं में बदलाव इसके अगले विस्तार की दिशा तय कर रहे हैं। वाराणसी-नई दिल्ली स्लीपर वंदे भारत और सूरत-उदयपुर जैसी प्रस्तावित सेवाएं यात्रियों के लिए नई कनेक्टिविटी ला सकती हैं। जबकि तेज माल ढुलाई वाला मॉडल रेलवे के लिए एक नए कारोबारी क्षेत्र का रास्ता खोल सकता है।

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काशी में CM योगी का आध्यात्मिक अंदाज, कालभैरव से लेकर बाबा विश्वनाथ तक टेका माथा; की सुख-समृद्धि की कामना

काशी में CM योगी का आध्यात्मिक अंदाज, कालभैरव से लेकर बाबा विश्वनाथ तक टेका माथा; की सुख-समृद्धि की कामना

cm yogi

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने काशी कोतवाल बाबा कालभैरव और श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन कर देश और प्रदेशवासियों के सुख, शांति, समृद्धि और लोक कल्याण की कामना की।  मुख्यमंत्री शनिवार को 'काशी कोतवाल' बाबा कालभैरव मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना एवं आरती कर बाबा का आशीर्वाद प्राप्त किया।

बाबा कालभैरव के चरणों में शीश नवाकर उन्होंने लोक कल्याण और उत्तर प्रदेश की समृद्धि के लिए मंगल कामना की। इसके बाद मुख्यमंत्री श्री काशी विश्वनाथ धाम पहुंचे। यहां उन्होंने बाबा विश्वनाथ के गर्भगृह में विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया तथा प्रदेश और देशवासियों के सुख, शांति, समृद्धि एवं लोक कल्याण की प्रार्थना की।

द्वाराहाट का मां दूनागिरी मंदिर: 8,000 फीट की ऊंचाई पर विराजमान शक्तिपीठ

द्वाराहाट का मां दूनागिरी मंदिर: 8,000 फीट की ऊंचाई पर विराजमान शक्तिपीठ

Maa Dunagiri Temple

उत्तराखंड के अल्मोड़ा स्थित मां दूनागिरी मंदिर आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम है। करीब 8,000 फीट ऊंचाई पर स्थित इस प्राचीन मंदिर तक 365 सीढ़ियां चढ़कर पहुंचा जाता है। मुख्‍यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी लोगों से अल्मोड़ा आगमन पर इस दिव्य मंदिर के दर्शन करने की अपील की है। ALSO READ: कीर्तिखाल का भैरवगढ़ी मंदिर: गढ़वाल के रक्षक काल भैरव का धाम, जानें क्या है खास

 

सीएम धामी ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, जनपद अल्मोड़ा के द्वाराहाट क्षेत्र में स्थित मां दूनागिरी मंदिर आस्था, अध्यात्म और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम है। मां आदिशक्ति भगवती को समर्पित यह पावन धाम अनेक श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। नवरात्रि के पावन अवसर पर यहाँ विशेष पूजा-अर्चना एवं धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। जनपद अल्मोड़ा आगमन पर इस दिव्य मंदिर के दर्शन अवश्य करें।

 

उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में द्वाराहाट से लगभग 15-25 किलोमीटर दूर द्रोण पर्वत की चोटी पर स्थित एक प्रसिद्ध और प्राचीन शक्तिपीठ है। समुद्र तल से करीब 8,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को 365 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। ALSO READ: क्यों खास है उत्तरकाशी का काशी विश्वनाथ मंदिर? दक्षिण की ओर झुका है 56 सेमी ऊंचा स्वयंभू शिवलिंग

 

क्या है दूनागिरी का हनुमान जी और द्रोणाचार्य से कनेक्शन

कहा जाता है कि त्रेतायुग में जब लक्ष्मण को मेघनाथ के द्वारा शक्ति लगी थी, तब सुशेन वैद्य ने हनुमान जी से द्रोणाचल नाम के पर्वत से संजीवनी बूटी लाने को कहा था। हनुमान जी उस स्थान से पूरा पर्वत उठा रहे थे तो यहां पर पर्वत का एक छोटा सा टुकड़ा गिरा।


यह भी कहा जाता है कि इस स्थान पर गुरु द्रोणाचार्य ने तपस्या की थी। दूनागिरी में कत्यूरी शासक सुधारदेव ने 1318 ईसवी में मंदिर निर्माण कर दुर्गा मूर्ति स्थापित की। मंदिर में शिव व पार्वती की मूर्तियां विराजमान है।