जंतर-मंतर पर ही क्यों होता है प्रदर्शन? कब और कैसे मिलती है प्रोटेस्ट की मंजूरी? नियमों के साथ जानिए कल का लेटेस्ट अपडेट

Delhi Jantar Mantar Protest Rules Explained: कल 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ा प्रदर्शन होने वाला है। इस प्रदर्शन का ऐलान ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) और देश के तमाम छात्र संगठनों ने किया है। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित किया जा रहा है। इससे पहले दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार, 9 अक्टूबर को ही इस प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। पुलिस ने अनुमति न देने के पीछे आवेदन देने में हुई देरी और पुराने प्रदर्शनों के दौरान नियमों के उल्लंघन की वजह बताई है।

अनुमति खारिज होने के बावजूद राजधानी में समर्थकों की भारी भीड़ जुटने की आशंका है। इसे देखते हुए प्रशासन ने पूरी दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। ऐसे में आइए आसान भाषा में समझते हैं कि जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने के क्या नियम हैं और पुलिस का इस पर क्या कहना है।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की शुरुआत कैसे हुई?

1980 के दशक के उत्तरार्ध से पहले दिल्ली में इंडिया गेट के पास बॉट क्लब किसी भी प्रदर्शन का मुख्य ठिकाना हुआ करता था। उस समय किसानों के एक विशाल आंदोलन के कारण बॉट क्लब के आसपास का पूरा इलाका ठप हो गया था। इसके बाद सरकार को प्रदर्शन का स्थान बदलना पड़ा। साल 1993 में जंतर-मंतर को प्रदर्शनों के लिए नए स्थान के रूप में चुना गया। तब से लोग अपनी मांगें उठाने और सरकार से सवाल पूछने के लिए यहां जुटते आए हैं।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने के क्या नियम हैं?

दिल्ली पुलिस के नए दिशानिर्देशों के अनुसार, प्रदर्शन की इजाजत के लिए कम से कम 10 दिन पहले डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (DCP, नई दिल्ली जिला) को आवेदन देना होता है। जंतर-मंतर पर एक समय में अधिकतम 1,000 लोग ही प्रदर्शन में शामिल हो सकते हैं।

साथ ही आयोजकों को भीड़ प्रबंधन, सार्वजनिक सुरक्षा और शांति बनाए रखने की शर्तों का पालन करना अनिवार्य है। सेंट्रल विस्टा, इंडिया गेट और इसके आसपास के लॉन पूरी तरह प्रतिबंधित क्षेत्र हैं। यहां प्रदर्शन की अनुमति नहीं है।

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अगर 1,000 से ज्यादा लोग हों, तो कहां होगा प्रदर्शन?

अगर प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों की संख्या 1,000 से अधिक और 50,000 तक है, तो इसके लिए रामलीला मैदान तय किया गया है। भीड़ अगर 50,000 से भी अधिक होती है, तो प्रदर्शन केवल बुराड़ी के मैदान में ही आयोजित किया जा सकता है।

दिल्ली पुलिस ने अनुमति क्यों नहीं दी?

नई दिल्ली रेंज की जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस नूपुर प्रसाद ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्थिति साफ की। उन्होंने बताया कि CJP ने प्रदर्शन के लिए 7 अक्टूबर को आवेदन किया था, जो कार्यक्रम से सिर्फ 3 दिन पहले मिला। नियमों के अनुसार आवेदन कम से कम 10 दिन पहले मिलना चाहिए था। इसके अलावा, संगठन द्वारा पिछले प्रदर्शनों में नियमों का उल्लंघन भी किया गया था। इसी कारण सुरक्षा और समय सीमा के नियमों के तहत इस प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई।

क्या है आज की स्थिति? ट्रेन और मेट्रो को लेकर ये आदेश जारी

10 अक्टूबर, शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन और सुरक्षा स्थिति को देखते हुए राजधानी में कड़े प्रशासनिक आदेश लागू किए गए हैं। रेलवे बोर्ड के आदेशानुसार, शनिवार सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पहुंचने वाली कई प्रमुख मेल, एक्सप्रेस व लोकल ट्रेनों को उनके शुरुआती स्टेशनों से ही रद्द कर दिया गया है।

दिल्ली पुलिस के निर्देश पर DMRC ने 9 अक्टूबर रात 9 बजे से राजीव चौक, कश्मीरी गेट, नई दिल्ली और केंद्रीय सचिवालय सहित करीब 57 प्रमुख मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश व निकास गेट बंद रखने और ट्रेनों की फ्रीक्वेंसी घटाने का फैसला किया है।

दिल्ली से UP-बिहार जाने वालों को मिलेगी राहत? दिवाली-छठ पर चलेगी वंदे भारत स्पेशल, जानें पूरा शेड्यूल

Vande Bharat Special Train: दिवाली और छठ महापर्व के दौरान दिल्ली से उत्तर प्रदेश आने-जाने वाले यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। दरअसल, भारतीय रेलवे ने त्योहारों पर बढ़ती भीड़ को देखते हुए अतिरिक्त ट्रेन चलाने की तैयारी शुरू कर दी है। वहीं, उत्तर रेलवे ने नई दिल्ली-पटना के बीच वंदे भारत स्पेशल ट्रेन चलाने का प्रस्ताव भी रेलवे बोर्ड को भेज दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रस्तावित ट्रेन करीब 994 किलोमीटर का सफर लगभग 13 घंटे में पूरा कर सकती है। हालांकि, अभी ट्रेन के संचालन को लेकर अंतिम फैसला नहीं हुआ है। रेलवे बोर्ड की मंजूरी मिलने के बाद ही इसके चलने की तारीख, समय और अन्य जानकारी साफ होगी।

यूपी के कई स्टेशनों पर रुकेगी ट्रेन

अगर इस वंदे भारत स्पेशल को मंजूरी मिलती है, तो दिल्ली से यूपी और बिहार जाने वाले यात्रियों को कई प्रमुख शहरों के लिए सीधी ट्रेन का विकल्प मिल सकता है। प्रस्ताव के मुताबिक, ट्रेन नई दिल्ली से चलकर अलीगढ़, कानपुर सेंट्रल, प्रयागराज और पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पर रुकेगी। इसके बाद ट्रेन बक्सर और आरा होते हुए पटना पहुंचेगी। यानी दिल्ली से कानपुर, प्रयागराज, अलीगढ़ और आसपास के इलाकों में आने-जाने वाले यात्रियों के लिए यह ट्रेन काफी काम की हो सकती है।

दीपावली और छठ के दौरान घर जाने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ने से दिल्ली से यूपी और बिहार जाने वाली ट्रेनों में काफी दबाव रहता है। ऐसे में अगर रेलवे बोर्ड से मंजूरी मिलती है, तो यह वंदे भारत स्पेशल त्योहार के समय यात्रियों को भीड़ से राहत देने और सफर के लिए एक अतिरिक्त विकल्प देने में मदद कर सकती है।

21 अक्टूबर से संचालन का प्रस्ताव, त्योहार में बढ़ेंगे विकल्प

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पहली ट्रेन जोड़ी 02252/02251 को नई दिल्ली से 21 अक्टूबर से 25 नवंबर तक सोमवार, बुधवार और शनिवार को चलाने का प्रस्ताव है। वापसी में पटना से यह ट्रेन 22 अक्टूबर से 26 नवंबर तक मंगलवार, गुरुवार और रविवार को चल सकती है। इसके अलावा, 02253/02254 ट्रेन जोड़ी चलाने का भी प्रस्ताव है। मंजूरी मिलने पर त्योहारों के दौरान दिल्ली से यूपी और बिहार जाने वाले यात्रियों को एक अतिरिक्त ट्रेन का विकल्प मिलेगा। हालांकि, अंतिम फैसला रेलवे बोर्ड की मंजूरी के बाद ही होगा।

कब-कब चलेगी वंदे भारत स्पेशल?

प्रस्ताव के मुताबिक, वंदे भारत स्पेशल नई दिल्ली से सुबह 8:35 बजे रवाना होकर दोपहर करीब 2:45 बजे प्रयागराज पहुंच सकती है। इसके बाद पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन, बक्सर और आरा होते हुए ट्रेन रात करीब 9:30 बजे पटना पहुंचने का प्रस्ताव है।

वापसी में ट्रेन पटना से सुबह 10 बजे चलकर दोपहर 3:35 बजे प्रयागराज और रात करीब 11:30 बजे नई दिल्ली पहुंच सकती है। मंजूरी मिलने पर यह टाइमिंग दिल्ली और यूपी के बीच सफर करने वालों के लिए एक और विकल्प दे सकती है।

दिल्ली-यूपी सफर के लिए कितना देना होगा किराया

प्रस्ताव के मुताबिक, नई दिल्ली से पटना तक एसी चेयर कार का किराया भोजन सहित करीब 2,575-2,600 रुपये हो सकता है। वहीं, एग्जीक्यूटिव चेयर कार का किराया करीब 4,650-4,680 रुपये रहने का अनुमान है।

हालांकि, यह अभी प्रस्तावित किराया है। अंतिम किराया रेलवे बोर्ड की मंजूरी के बाद तय होगा। वहीं, दिल्ली से कानपुर या प्रयागराज तक जाने वालों का किराया अलग होगा, जिसकी सही जानकारी बुकिंग शुरू होने पर IRCTC पर मिलेगी।

बेंगलुरु से मुंबई जाना होगा आसान, पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन! जाने स्टॉपेज और टाइम टेबल

बेंगलुरु और मुंबई के बीच सफर करने वाले पैसेंजर के लिए नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन शुरू होने की तैयारी है। रेलवे बोर्ड ने KSR बेंगलुरु और मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) के बीच इस ट्रेन को चलाने की मंजूरी दे दी है। ट्रेन के इस महीने शुरू होने की संभावना है।

इन 6 दिन चलेगी ट्रेन

  • यह ट्रेन हफ्ते में छह दिन चलेगी। बेंगलुरु से चलने वाली सर्विस सोमवार को नहीं चलेगी, जबकि मुंबई से बेंगलुरु आने वाली सर्विस मंगलवार को नहीं चलेगी।
  • इस रूट पर दो वंदे भारत स्लीपर रेक लगाए जाएंगे। शुरुआत में उद्घाटन वाली ट्रेन को स्पेशल सर्विस के तौर पर चलाया जा सकता है। इसके बाद इसे रेगुलर शेड्यूल में चलाया जाएगा।

इन स्टेशनों पर रुकेगी वंदे भारत

इस ट्रेन के रूट में वंदे भारत स्लीपर ट्रेन अनंतपुर, गुंटकल, रायचूर, कलबुर्गी, सोलापुर, पुणे और कल्याण स्टेशन पर रुकेगी।

रेलवे के प्लान के मुताबिक सोलापुर और पुणे में ट्रेन के लिए पानी भरने और कोच मेंटेनेंस से जुड़ी फैसिलिटी भी मिलेगी।

अब सिर्फ 16 घंटे में पूरा होगा सफर

बताए गए समय के अनुसार, ट्रेन बेंगलुरु से रात करीब 10 बजे चल सकती है। अगले दिन दोपहर करीब 1:50 बजे यह मुंबई पहुंच सकती है।

वहीं मुंबई से वापसी की ट्रेन रात करीब 10:30 बजे चल सकती है और अगले दिन दोपहर करीब 2:50 बजे बेंगलुरु पहुंच सकती है। रेलवे ने अभी इन टाइम का ऑफिशियल अनाउंसमेंट नहीं किया है। ट्रेन की टाइमिंग के हिसाब से दोनों शहरों के बीच सफर करीब 16 घंटे का हो सकता है।

फिलहाल बेंगलुरु और मुंबई के बीच वंदे भारत या दुरंतो जैसी प्रीमियम ट्रेन नहीं चलती है। दोनों शहरों के बीच रोज चलने वाली सीधी ट्रेन उद्यान एक्सप्रेस है। यह करीब 1,134 किलोमीटर का रेल सफर लगभग 22 घंटे में पूरा करती है। सड़क से दोनों शहरों के बीच दूरी करीब 984 किलोमीटर है और सामान्य तौर पर इस सफर में 15 से 17 घंटे लग सकते हैं। ऐसे में नई स्लीपर ट्रेन से रात में सफर करने वाले पैसेंजर को एक और रेल ऑप्शन मिल सकता है।

Vande Bharat Depot: टाटानगर में बनेगा वंदे भारत मेंटेनेंस डिपो, जानिए ₹383 करोड़ के प्रोजेक्ट से क्या बदलेगा

Vande Bharat Depot: बीजेपी सांसद विद्युत बरन महतो ने शुक्रवार को बताया कि रेलवे बोर्ड ने जमशेदपुर के टाटानगर रेलवे स्टेशन पर वंदे भारत ट्रेन कोच के लिए 383.78 करोड़ रुपये के मेंटेनेंस डिपो को मंज़ूरी दे दी है। इस प्रोजेक्ट से स्टेशन के मौजूदा मेंटेनेंस इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार होगा और हाई-स्पीड ट्रेन ऑपरेशन के लिए सपोर्ट मजबूत होगा।

महतो ने कहा कि रेलवे बोर्ड के डायरेक्टर (प्रोजेक्ट्स एंड डेवलपमेंट) सुमित कुमार ने एक औपचारिक सूचना के जरिए यह मंज़ूरी दी। यह डिपो लोको कॉलोनी इलाके में टाटानगर के मौजूदा कोचिंग डिपो का विस्तार करके बनाया जाएगा। रेलवे अधिकारियों को उम्मीद है कि इस सुविधा से मेंटेनेंस क्षमता में काफी बढ़ोतरी होगी।

महतो ने बताया कि साउथ ईस्टर्न रेलवे के चक्रधरपुर डिवीजन द्वारा जमा किए गए टेक्निकल प्रपोजल की रेलवे बोर्ड द्वारा समीक्षा के बाद इस प्रोजेक्ट को मंज़ूरी दी गई। इस सुविधा में वंदे भारत चेयर कार और स्लीपर रेक के टेक्निकल इंस्पेक्शन, रूटीन मेंटेनेंस और जल्दी धुलाई के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल होगा।

अभी वंदे भारत एक्सप्रेस सर्विस टाटानगर से बिहार में पटना और ओडिशा में बेरहामपुर के लिए चलती हैं। प्रस्तावित डिपो इन ट्रेनों के लिए खास मेंटेनेंस इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराएगा और भविष्य में टाटानगर से हाई-स्पीड सर्विस के विस्तार में मदद कर सकता है।

रोजगार और क्षमता में बढ़ोतरी

महतो ने कहा कि इस प्रोजेक्ट से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के मौके पैदा होंगे और इलाके में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश से ट्रेनों के रखरखाव और संचालन से जुड़ी सेवाओं को भी मदद मिलने की उम्मीद है।

इसके अलावा स्टेशन पर बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए महतो ने ‘पीएम गति शक्ति’ योजना के तहत टाटानगर में चार और प्लेटफॉर्म और एक लूप लाइन बनाने का प्रस्ताव दिया है। 482 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रस्तावित प्रोजेक्ट पर अभी रेलवे बोर्ड विचार कर रहा है।

Vande Bharat News: ‘वंदे भारत’ एक्सप्रेस पर 10 बड़े अपडेट! काशी को मिलेगी स्लीपर ट्रेन, सूरत-उदयपुर रूट को भी मंजूरी; माल ढुलाई का भी हुआ ट्रायल

Indian Railways News: ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ अब अपने विस्तार के एक नए दौर में एंट्री कर रही है। भारतीय रेलवे स्लीपर वंदे भारत सेवाओं, नए रूटों और तेज रफ्तार माल ढुलाई जैसी कई योजनाओं पर तेजी से काम कर रहा है। देश के अलग-अलग हिस्सों में कई नए बदलाव और प्रस्ताव सामने आ रहे हैं, जिन पर यात्रियों की नजर बनी हुई है। आने वाले समय में वंदे भारत नेटवर्क का विस्तार सिर्फ यात्रियों की यात्रा को तेज करने तक सीमित नहीं रहेगा। बल्कि लंबी दूरी की रात की यात्रा और तेज माल परिवहन में भी इसकी भूमिका बढ़ सकती है।

वाराणसी से नई दिल्ली के बीच संभावित स्लीपर वंदे भारत से लेकर सूरत-उदयपुर वंदे भारत और 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से मालगाड़ी के ट्रायल तक, रेलवे का फोकस अब सिर्फ दिन में चलने वाली चेयर-कार वंदे भारत ट्रेनों तक सीमित नहीं रह गया है।

आइए जानते हैं वंदे भारत से जुड़े 10 बड़े अपडेट

1. वाराणसी को मिल सकती है दिल्ली के लिए स्लीपर वंदे भारत

  • वाराणसी के यात्रियों की लंबे समय से चली आ रही मांग पर अब आगे बढ़ने की उम्मीद है। रेलवे बोर्ड ने वाराणसी जंक्शन (कैंट) और नई दिल्ली के बीच स्लीपर वंदे भारत शुरू करने की दिशा में कदम उठाए हैं। हालांकि, ट्रेन का अंतिम रूट अभी तय नहीं हुआ है।
  • उम्मीद जताई जा रही है कि यह सेवा त्योहारी सीजन से पहले शुरू हो सकती है। इससे दशहरा और दिवाली के दौरान बढ़ने वाली यात्रियों की भीड़ को राहत मिल सकती है।
  • वाराणसी से पहले से ही काशी विश्वनाथ, शिवगंगा और बनारस-नई दिल्ली सुपरफास्ट एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें चलती हैं। इसके अलावा वाराणसी जंक्शन से दो वंदे भारत और तीन महामना एक्सप्रेस सेवाएं भी साप्ताहिक आधार पर संचालित होती हैं। इसके बावजूद यात्रियों की मांग काफी अधिक बनी हुई है।
  • खासकर रविवार शाम को दिल्ली जाने वाली ट्रेनों में भारी भीड़ देखने को मिलती है। ऐसे में स्लीपर वंदे भारत काशी और राष्ट्रीय राजधानी के बीच लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए एक अतिरिक्त विकल्प बन सकती है।

2. नई दिल्ली-पटना स्लीपर वंदे भारत की भी चर्चा

  • नई दिल्ली और पटना के बीच स्लीपर वंदे भारत ट्रेन को लेकर भी काफी चर्चा हो रही है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इस सेवा की शुरुआत को लेकर कोई अंतिम मंजूरी या आधिकारिक कार्यक्रम नहीं दिया गया है।
  • स्लीपर वंदे भारत के विस्तार की चर्चाओं के बीच नई दिल्ली-पटना जैसे व्यस्त रूट पर ऐसी ट्रेन की संभावना यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।

3. तेज रफ्तार माल ढुलाई के लिए वंदे भारत ट्रेन

  • न्यूज 18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वंदे भारत का इस्तेमाल सिर्फ यात्रियों को तेज गति से सफर कराने तक सीमित नहीं रहने वाला है। चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) द्वारा बनाई गई 16 कोच वाली ट्रेन को पार्सल और अन्य सामान को अधिक रफ्तार से पहुंचाने के लिए तैयार किया गया है।
  • इस ट्रेन का संभावित ग्राहक आधार पारंपरिक माल ढुलाई से आगे बढ़कर ई-कॉमर्स, कूरियर सेवाओं, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्युटिकल्स और कोल्ड-चेन लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों तक फैला हुआ है।
  • अगर तेज रफ्तार मालगाड़ियों को बड़े स्तर पर सफलतापूर्वक चलाया जाता है, तो समय के प्रति संवेदनशील सामान को देश के प्रमुख बाजारों तक पहुंचाने के लिए कारोबारियों को परिवहन का एक और विकल्प मिल सकता है।

4. सूरत को मिली पहली वंदे भारत सेवा की मंजूरी

  • सूरत को अपनी पहली वंदे भारत सेवा मिलने का रास्ता साफ हो गया है। रेलवे बोर्ड ने सूरत और उदयपुर सिटी के बीच नई वंदे भारत ट्रेन को मंजूरी दी है।
  • प्रस्तावित ट्रेन का नंबर 26903/26904 बताया गया है। यह ट्रेन करीब 690 किलोमीटर की दूरी लगभग 7 घंटे 30 मिनट में तय करेगी।
  • ट्रेन सप्ताह में छह दिन चलाने की योजना है और मंगलवार को इसका विकली ऑफ रहेगा।
  • ट्रेन सूरत से सुबह 6:10 बजे रवाना होकर दोपहर 1:40 बजे उदयपुर सिटी पहुंचेगी। जबकि वापसी में उदयपुर से ट्रेन दोपहर 3:35 बजे चलेगी और रात 11 बजे सूरत पहुंचेगी।

5. सूरत-उदयपुर वंदे भारत के रास्ते में 9 प्रमुख ठहराव

  • आठ कोच वाली इस वंदे भारत ट्रेन के रास्ते में कुल 9 कमर्शियल स्टॉप प्रस्तावित हैं। इनमें शामिल हैं:-

भरूच

वडोदरा

आनंद

मणिनगर

असारवा

हिम्मतनगर

शामलाजी रोड

डूंगरपुर

जावर

  • यह ट्रेन गुजरात और राजस्थान के कई महत्वपूर्ण शहरों को तेज रेल कनेक्टिविटी से जोड़ेगी। इससे दोनों राज्यों के बीच सफर करने वाले यात्रियों को फायदा मिलने की उम्मीद है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, नई सूरत-उदयपुर वंदे भारत मौजूदा उदयपुर सिटी-असारवा वंदे भारत की जगह ले सकती है। यह ट्रेन फरवरी 2026 में शुरू हुई थी।
  • रेलवे बोर्ड की 31 अगस्त की मंजूरी के बाद नई सर्विस नवरात्रि से पहले शुरू होने की उम्मीद है। इस साल नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू हो रही है।

6. मंगलुरु-बेंगलुरु वंदे भारत के समय पर उठे सवाल

  • बेंगलुरु और मंगलुरु के बीच प्रस्तावित वंदे भारत का रनिंग टाइम ट्रायल पूरा हो चुका है। लेकिन ट्रायल के दौरान सामने आए समय को लेकर कर्नाटक के तटीय इलाकों के यात्री संगठनों ने चिंता जताई है।
  • दक्षिण पश्चिम रेलवे के ट्रायल में सुबह बेंगलुरु से ट्रेन चलाने और बाद में उसी दिन वापसी का कार्यक्रम शामिल था।
  • हालांकि, यात्री प्रतिनिधियों का कहना है कि अंतिम समय-सारिणी ऐसी होनी चाहिए, जिससे तटीय क्षेत्र से बेंगलुरु आने वाले कामकाजी और कारोबारी यात्रियों को वास्तविक फायदा मिल सके।
  • पश्चिम करावली रेलवे यात्री अभिवृद्धि समिति के अध्यक्ष जी. हनुमंथ कामथ ने मांग की है कि ट्रेन सुबह मंगलुरु से रवाना हो और उसी रात वापस लौटे।
  • यात्रियों की चिंता यह है कि अगर ट्रेन बेंगलुरु बहुत देर से पहुंचेगी, खासकर आधी रात के करीब, तो सरकारी या कारोबारी काम से राजधानी आने वाले यात्रियों के लिए इसका उपयोग सीमित हो जाएगा।
  • यात्री संगठनों ने मंगलुरु सेंट्रल-तिरुवनंतपुरम सेंट्रल वंदे भारत का उदाहरण देते हुए कहा है कि सुबह मंगलुरु से प्रस्थान और रात में वापसी का शेड्यूल यात्रियों के लिए बेहतर काम करता है।

7. बलांगीर से वंदे भारत की मांग पर रेलवे बोर्ड का जवाब

  • ओडिशा के बलांगीर से वंदे भारत ट्रेन शुरू करने की मांग पर भी रेलवे बोर्ड ने जवाब दिया है। सांसद निरंजन बिशी ने 30 मार्च 2026 को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर बलांगीर से नई दिल्ली, वाराणसी, बेंगलुरु और जम्मू जैसे प्रमुख शहरों के लिए वंदे भारत कनेक्टिविटी की मांग की थी।
  • रेलवे बोर्ड ने अपने जवाब में कहा कि बलांगीर के पास पहले से 66 ट्रेन सेवाएं हैं। इनमें बेंगलुरु और वाराणसी की ओर जाने वाली कई ट्रेनें शामिल हैं। दिल्ली की ओर मौजूदा कनेक्टिविटी के लिए रेलवे ने समता एक्सप्रेस और टिटलागढ़ की कनेक्टिविटी का भी जिक्र किया।
  • हालांकि, रेलवे बोर्ड का जवाब नई वंदे भारत ट्रेन को मंजूरी नहीं माना जा सकता। बोर्ड ने संकेत दिया है कि किसी नई ट्रेन सेवा की शुरुआत ट्रैफिक सर्वे, परिचालन की व्यवहार्यता और कोचों की उपलब्धता जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगी।

8. वंदे भारत के TTE का वीडियो 1 करोड़ व्यूज के पार

  • नई ट्रेनों और रेलवे की योजनाओं से अलग वंदे भारत से जुड़ी एक घटना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई है। TTE अमित गुप्ता के अनुसार, दो लड़के एक रेलवे स्टेशन पर खड़ी वंदे भारत ट्रेन में सिर्फ अंदर से ट्रेन देखने के लिए चढ़ गए थे। ट्रेन में चढ़ने के बाद उसके दरवाजे बंद हो गए। वे तुरंत नीचे नहीं उतर सके।
  • इसके बाद उनकी मुलाकात TTE से हुई। शुरुआत में TTE को लगा कि दोनों बिना टिकट यात्रा कर रहे हैं। ऐसे में उन पर 4,840 रुपये का संभावित जुर्माना लग सकता था। लड़कों ने बताया कि उनके पास सिर्फ 300 रुपये हैं। बाद में TTE को पता चला कि दोनों ट्रेन में यात्रा करने के लिए नहीं बल्कि उसे अंदर से देखने के लिए चढ़े थे।
  • इसके बाद TTE ने कथित तौर पर 300 रुपये लेने से इनकार कर दिया और कहा कि उन्हें पैसे नहीं चाहिए। उन्होंने दोनों लड़कों को अगले स्टेशन पर उतरने के लिए कहा और दरवाजे के पास वाले हिस्से में बैठने को कहा।
  • अमित गुप्ता ने इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया। बताया गया है कि वीडियो को चार दिनों में 1 करोड़ से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं। वीडियो पर बड़ी संख्या में लाइक्स और सकारात्मक प्रतिक्रियाएं भी आई हैं।

9. वंदे भारत बनाम राजधानी: कौन सी ट्रेन बेहतर?

  • वंदे भारत नेटवर्क के विस्तार के साथ इसकी तुलना राजधानी एक्सप्रेस से भी लगातार की जा रही है। हालांकि, दोनों ट्रेनों को अलग-अलग यात्रा जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।
  • पहली राजधानी एक्सप्रेस 1969 में नई दिल्ली और हावड़ा के बीच शुरू हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य राजधानी और देश के प्रमुख शहरों के बीच तेज रात की यात्रा उपलब्ध कराना था।
  • वहीं, वंदे भारत ने फरवरी 2019 में नई दिल्ली-वाराणसी रूट से सेवा शुरू की और इसे मुख्य रूप से तेज दिन की इंटर-सिटी यात्रा के लिए तैयार किया गया।
  • दोनों के बीच सबसे बड़ा अंतर यात्रा के स्वरूप का है। सामान्य वंदे भारत में चेयर-कार यात्रा की सुविधा होती है, जबकि कई सेवाओं में एग्जीक्यूटिव चेयर कार भी उपलब्ध है।
  • वंदे भारत में ऑटोमैटिक दरवाजे, पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम और आधुनिक सीटिंग जैसी सुविधाएं भी दी गई हैं।
  • इसके मुकाबले राजधानी एक्सप्रेस में पारंपरिक रूप से फर्स्ट AC, सेकेंड AC और थर्ड AC में सोने की सुविधा होती है। इसलिए रातभर की यात्रा के लिए राजधानी अधिक उपयुक्त मानी जाती है।
  • हालांकि, स्लीपर वंदे भारत के आने के बाद दोनों ट्रेनों के बीच का यह अंतर धीरे-धीरे कम होता दिखाई दे रहा है।

10. स्लीपर वंदे भारत बदल सकती है लंबी दूरी की यात्रा का समीकरण

  • स्लीपर वंदे भारत में वंदे भारत की आधुनिक डिजाइन और तकनीक को रात की लंबी दूरी की यात्रा के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। इन ट्रेनों में सोने के लिए बर्थ, कुशन वाली बर्थ, शोर कम करने वाली तकनीक और सेंसर आधारित लाइटिंग जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
  • फर्स्ट AC सेक्शन में प्रीमियम यात्रियों के लिए अतिरिक्त सुविधाएं मिलने की भी उम्मीद है। इससे स्लीपर वंदे भारत कुछ चुनिंदा रूटों पर राजधानी एक्सप्रेस समेत प्रीमियम रात की ट्रेनों को सीधी टक्कर दे सकती है।
  • आखिरकार यात्रियों के लिए फैसला सिर्फ ट्रेन के नाम पर नहीं, बल्कि यात्रा का समय, कुल अवधि, सुविधा और किराए जैसे पहलुओं पर निर्भर करेगा। ताजा घटनाक्रम से साफ है कि वंदे भारत अब सिर्फ तेज रफ्तार वाली दिन की इंटर-सिटी ट्रेन तक सीमित नहीं रह गई है।
  • स्लीपर सेवाएं, नए रूट, तेज माल ढुलाई और मौजूदा सेवाओं में बदलाव इसके अगले विस्तार की दिशा तय कर रहे हैं। वाराणसी-नई दिल्ली स्लीपर वंदे भारत और सूरत-उदयपुर जैसी प्रस्तावित सेवाएं यात्रियों के लिए नई कनेक्टिविटी ला सकती हैं। जबकि तेज माल ढुलाई वाला मॉडल रेलवे के लिए एक नए कारोबारी क्षेत्र का रास्ता खोल सकता है।

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Unnamed Railway Station: भारत का एकमात्र रेलवे स्टेशन, जिसका नहीं है कोई नाम, वजह जान रह जाएंगे हैरान

भारतीय रेलवे को देश की लाइफलाइन भी कहा जाता है। हर दिन ट्रेन से हजारों लोग अपने मंजिल पर पहुंचते हैं। वहीं भारत में रेलवे का बहुत बड़ा नेटवर्क है, जहां हजारों से ज्यादा रेलवे स्टेशन हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि भारत में एक ऐसा भी रेलवे स्टेशन है, जिसका कोई नाम नहीं हैं। लेकिन यहां पर हर दिन कई ट्रेने भी रुकती है और बड़ी संख्या में यात्री सफर के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। ये रेलवे स्टेशन पश्चिम बंगाल के बांकुरा जिले में स्थित है। यहां लगे साइनबोर्ड पर स्टेशन का नाम ही नहीं है, जिसकी वजह से यात्रियों को स्टेशन की पहचान करने में परेशानी होती है। पहली बार इस स्टेशन पर पहुंचने वाले लोग खाली बोर्ड देखकर हैरान रह जाते हैं। आइए जानते हैं इस अनोखे रेलवे स्टेशन के बारे में

पश्चिम बंगाल के बांकुरा जिले में स्थित ये रेलवे स्टेशन बर्धमान से करीब 35 किलोमीटर दूर दक्षिण पूर्व रेलवे के बांकुरा-मैसग्राम ब्रॉड गेज रूट पर स्थित है। स्टेशन के बोर्ड पर नाम नहीं लिखा है, लेकिन यहां रोज करीब छह ट्रेनें रुकती हैं। इन ट्रेनों के जरिए आसपास के गांवों में रहने वाले लोग दूसरे शहरों और इलाकों तक आसानी से आ-जा पाते हैं।

जानें क्या है पूरा विवाद

इंडिया टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, स्टेशन का नाम न होने के पीछे रैना और रैनगर गांवों के बीच चल रहा पुराना विवाद बताया जाता है। पहले यहां नैरो-गेज रेलवे लाइन थी और स्टेशन का नाम रैनगर था। साल 2008 में नई ब्रॉड-गेज लाइन बनने के बाद स्टेशन की नई इमारत रैना गांव की जमीन पर बनाई गई। इसके बाद रैना के लोगों ने स्टेशन का नाम अपने गांव के नाम पर रखने की मांग की, जबकि रैनगर के लोगों का कहना था कि, स्टेशन का पुराना नाम ही बरकरार रखा जाए। इसी विवाद के कारण स्टेशन का नाम अब तक तय नहीं हो पाया है।

कोर्ट तक पहुंच गया मामला

रैना और रैनगर गांवों के बीच स्टेशन के नाम को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि मामला रेलवे बोर्ड और कोर्ट तक पहुंच गया। दोनों गांवों के लोग अपनी मांग पर अड़े रहे और कोई भी पीछे हटने को तैयार नहीं हुआ। इसके बाद रेलवे अधिकारियों ने बीच का रास्ता निकालते हुए स्टेशन पर पीले रंग के बोर्ड तो लगाए, लेकिन उन पर किसी भी गांव का नाम नहीं लिखा। इसी वजह से आज भी स्टेशन का साइनबोर्ड खाली नजर आता है। स्टेशन पर नाम न होने से बाहर से आने वाले यात्रियों को परेशानी होती है। उन्हें सही स्टेशन की पहचान के लिए आसपास के लोगों से पूछना पड़ता है। खाली पीले बोर्ड आज भी रैना और रैनगर गांवों के बीच चल रहे नाम के विवाद की याद दिलाते हैं।

रेलवे में दर्ज है ये नाम

वहीं इस स्टेशन की खास बात ये है कि स्टेशन के बोर्ड पर नाम भले ही नहीं लिखा हो, लेकिन रेलवे के रिकॉर्ड में इसे रायनगर (RNGR) के नाम से ही दर्ज किया गया है। यात्रियों के टिकट भी इसी नाम से जारी होते हैं। यानी कागजों में स्टेशन की पहचान मौजूद है, लेकिन जमीन पर लगे बोर्ड पर उसका नाम दिखाई नहीं देता। रैना और रैनगर गांवों के बीच नाम को लेकर विवाद अभी भी खत्म नहीं हुआ है, इसलिए स्टेशन बिना नाम के ही चल रहा है।

Vande Bharat Update: ‘वंदे भारत’ ट्रेन में बड़े बदलाव की आहट! एग्जीक्यूटिव क्लास से खत्म हो सकता है 180-डिग्री रोटेटिंग सीट का फीचर

Vande Bharat Update: देश की सबसे लोकप्रिय और प्रीमियम ट्रेनों में शामिल ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ के डिजाइन और फीचर्स में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। रेलवे के सीनियर इंजीनियरों ने वंदे भारत ट्रेनों के एग्जीक्यूटिव क्लास से 180-डिग्री रोटेटिंग सीट (घूमने वाली सीट) के फीचर को खत्म करने का प्रस्ताव दिया है। इस फीचर को हटाकर सीटों को फिक्स करने और अधिक मजबूत बनाने की सिफारिश की गई है ताकि ट्रेन की ऑपरेशनल दक्षता को बेहतर बनाया जा सके।

क्यों हटाया जा सकता है रोटेटिंग सीट का फीचर?

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक सीनियर रेलवे इंजीनियरों का तर्क है कि सीटों को घुमाने वाला ये मैकेनिज्म जरूरत से ज्यादा जगह लेता है। इसकी वजह से सीट के कलपुर्जे भी जल्दी घिसते या खराब होते हैं। एक सीनियर रेलवे अधिकारी ने बताया कि मौजूदा वंदे भारत के एग्जीक्यूटिव क्लास में सीटों में रोटेशन और रिक्लाइनिंग दोनों तरह के मैकेनिज्म दिए गए हैं।

इससे यात्री ट्रेन की गति की दिशा में, खिड़की की तरफ या उलटी दिशा में सीट का रुख मोड़ सकते हैं। इस सुविधा के लिए अतिरिक्त मैकेनिकल कंपोनेंट्स, क्लीयरेंस और एक्स्ट्रा जगह की जरूरत पड़ती है। इसके अलावा इस मैकेनिज्म की वजह से पुर्जे ढीले होने, खराब होने और बार-बार मेंटेनेंस की जरूरत पड़ती है।

प्रिंसिपल चीफ मैकेनिकल इंजीनियर्स की बैठक में उठा मुद्दा

इस प्रस्ताव पर हाल ही में आयोजित प्रिंसिपल चीफ मैकेनिकल इंजीनियर्स के एक सम्मेलन में चर्चा की गई। इस सम्मेलन में कोच उत्पादन इकाइयों ने एग्जीक्यूटिव क्लास के कोचों से रोटेटिंग सीट फीचर को हटाकर, पारंपरिक शताब्दी और अन्य ट्रेनों की तरह सीटों को पूरी तरह से फिक्स करने का विचार रखा।

रेलवे बोर्ड ने सम्मेलन को जो मिनट्स बनाए हैं उनमें लिखा गया है कि वंदे भारत के एग्जीक्यूटिव क्लास कोचों में सीटों को अधिक मजबूत बनाने के लिए उनके घूमने वाले फीचर को समाप्त किया जा सकता है। रेलवे बोर्ड ने इंटीग्रल कोच फैक्टरी, चेन्नई के प्रिंसिपल चीफ मैकेनिकल इंजीनियर को इस सुझाव पर आगे की कार्रवाई शुरू करने की जिम्मेदारी सौंपी है।

सीटें फिक्स होने से बढ़ेगी क्षमता और राजस्व

इंजीनियरों का सुझाव है कि सीटों को फिक्स करने से सीटों को घुमाने के लिए खाली छोड़ी जाने वाली जगह बच जाएगी। पंक्तियों के बीच की जगह को कम करके एग्जीक्यूटिव क्लास कोच में सीटों की एक एक्स्ट्रा पंक्ति जोड़ी जा सकती है।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर सीटों को फर्श के साथ स्थायी रूप से फिक्स कर दिया जाता है तो उनका स्ट्रक्चर और मजबूत होगा। इससे न सिर्फ यात्रियों की क्षमता बढ़ेगी बल्कि ट्रेन की राजस्व उत्पन्न करने की क्षमता में भी सुधार होगा। अधिकारियों के मुताबिक अगर कई कोचों और ट्रेन सेटों में एक-एक अतिरिक्त पंक्ति जुड़ती है तो इससे रेलवे की कमाई के मामले में बड़ा फायदा हो सकता है।

प्रीमियम सुविधा से मजबूती और रखरखाव पर ध्यान

हालांकि यह प्रस्ताव अभी शुरुआती चरण में है लेकिन अगर इसे मंजूरी मिलती है तो यह वंदे भारत एग्जीक्यूटिव क्लास के डिजाइन में एक बड़ा बदलाव होगा। यह कदम प्रीमियम फ्लेक्सिबिलिटी और सुविधाओं के बजाय ट्रेन की मजबूती, आसान रखरखाव और यात्री क्षमता बढ़ाने की दिशा में बदलाव लाने वाला साबित हो सकता है।

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Delhi Weather Today: दिल्ली में आज फिर बरसेंगे बादल! हल्की से मध्यम बारिश के आसार, 5 सितंबर से बदलेगा मौसम

Delhi Weather Today: दिल्ली में गुरुवार, 3 सितंबर को आसमान में बादल छाए रहने और मध्यम बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक, राजधानी में एक बार फिर बारिश का दौर देखने को मिल सकता है, जिससे अभी बनी हुई उमस और गर्मी से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

इस दौरान अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है, जबकि न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की उम्मीद है। दिनभर उमस बनी रह सकती है और नमी का स्तर 65 से 85 फीसदी के बीच रहने का अनुमान है।

दिन के समय में ज्यादातर बादल छाए रहने की उम्मीद है और शहर के कई हिस्सों में मध्यम बारिश हो सकती है। बारिश की संभावना के बावजूद, राजधानी के लिए मौसम से जुड़ी कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है।

बता दें कि 2 सितंबर, बुधवार को दिल्ली में गर्म और उमस भरा मौसम रहा। मौसम के पूर्वानुमान के मुताबिक, दिनभर आसमान में बादल छाए रहने और मध्यम बारिश होने की संभावना जताई गई थी। शहर में उमस काफी ज्यादा रही, जिससे गर्मी के कारण लोगों की परेशानी और बढ़ गई।

आने वाले दिनों के मौसम के अनुमान के मुताबिक, दिल्ली में मौसम धीरे-धीरे बदल सकता है। 4 सितंबर को अधिकतम तापमान लगभग 32 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान लगभग 25 डिग्री सेल्सियस रहने की उम्मीद है। साथ ही, दिन में आमतौर पर बादल छाए रहने और हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।

5 सितंबर से बदलेगा मौसम

5 सितंबर से मौसम के अपेक्षाकृत शुष्क होने की उम्मीद है। 5 और 6 सितंबर को आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं, इस दौरान अधिकतम तापमान लगभग 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान लगभग 24 डिग्री सेल्सियस रहेगा।

वहीं, 7 सितंबर को अधिकतम तापमान लगभग 32 डिग्री सेल्सियस रहने की उम्मीद है, जबकि न्यूनतम तापमान गिरकर लगभग 23 डिग्री सेल्सियस तक आ सकता है। आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहने की भी संभावना है। इसके अलावा, 8 सितंबर तक अधिकतम तापमान थोड़ा बढ़कर लगभग 33 डिग्री सेल्सियस हो सकता है, और न्यूनतम तापमान लगभग 24 डिग्री सेल्सियस रहने की उम्मीद है।

अगले कुछ दिनों में नमी के धीरे-धीरे कम होने की उम्मीद है, 3 और 4 सितंबर को यह लगभग 80-85 प्रतिशत थी, जो 8 सितंबर तक घटकर लगभग 70 प्रतिशत हो जाएगी।

हालांकि, गुरुवार को लोगों को बादल छाए रहने और मध्यम बारिश के लिए तैयार रहना चाहिए, खासकर तब जब बारिश तेज हो जाए। अभी तक दिल्ली के लिए कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है।

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रेलवे बोर्ड ने सूरत-उदयपुर वंदे भारत ट्रेन को दी मंजूरी, 9 स्टॉपेज के साथ जानें टाइमिंग और रूट

Surat-Udaipur Vande Bharat Express: रेल मंत्रालय ने गुजरात को राजस्थान से जोड़ने वाली एक नई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन सेवा को मंज़ूरी दे दी है। यह नई सेमी-हाई स्पीड ट्रेन सूरत और उदयपुर के बीच चलेगी। इस ट्रेन का रखरखाव और संचालन वेस्टर्न रेलवे (WR) जोन करेगा।

वेस्टर्न रेलवे और नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे के जनरल मैनेजर (ऑपरेटिंग) को 31 अगस्त को लिखे एक पत्र में, रेलवे बोर्ड ने बताया कि उसने 26903/26904 सूरत-उदयपुर सिटी वंदे भारत एक्सप्रेस शुरू करने को मंजूरी दे दी है।

इंडियन रेलवे एक वंदे भारत ट्रेन बंद करेगा

रेलवे बोर्ड ने ट्रेन नंबर 26963/26964 उदयपुर सिटी-असारवा वंदे भारत एक्सप्रेस को बंद करने की भी मंजूरी दी है। उदयपुर सिटी-असारवा (अहमदाबाद) वंदे भारत एक्सप्रेस फरवरी 2026 में शुरू की गई थी। अभी यह ट्रेन मंगलवार को छोड़कर हफ्ते में छह दिन चलती है।

सूरत-उदयपुर वंदे भारत ट्रेन: दूरी और यात्रा का समय

सूरत-उदयपुर वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन लगभग 690 किलोमीटर की दूरी 7 घंटे 30 मिनट में तय करती है। यह अधिकतम 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती है।

सूरत-उदयपुर वंदे भारत एक्सप्रेस: ​​स्टॉपेज और फ्रीक्वेंसी

सूरत-उदयपुर वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन मंगलवार को छोड़कर हफ्ते में 6 दिन चलेगी। सूरत और उदयपुर सिटी के बीच अपनी यात्रा के दौरान, यह ट्रेन 9 रेलवे स्टेशनों पर रुकेगी। ये स्टेशन हैं: भरूच, वडोदरा, आणंद, मणिनगर, असरवा, हिम्मतनगर, शामलाजी रोड, डूंगरपुर और जावर।

सूरत-उदयपुर सिटी वंदे भारत: कोच की संख्या और समय

सूरत-उदयपुर सिटी वंदे भारत एक्सप्रेस में 8 कोच होंगे। ट्रेन नंबर 26903 सूरत से सुबह 06:10 बजे चलेगी और दोपहर 13:40 बजे उदयपुर सिटी पहुंचेगी। वापसी में, ट्रेन नंबर 26904 उदयपुर सिटी से दोपहर 15:35 बजे चलेगी और रात 23:00 बजे सूरत पहुंचेगी।

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भागलपुर से आनंद विहार के बीच चलेगी स्लीपर वंदे भारत, ईस्टर्न रेलवे ने बोर्ड को भेजी रिपोर्ट, जानें इसका संभावित रूट और सारी डिटेल

Bhagalpur-Delhi Sleeper Vande Bharat: बिहार के भागलपुर से दिल्ली के आनंद विहार टर्मिनल के बीच स्लीपर कोच वाली वंदे भारत एक्सप्रेस चलाने की तैयारी तेज हो गई है। रेलवे बोर्ड की अंतिम मंजूरी मिलते ही इस ट्रेन के संचालन की तारीख, समय, रूट और स्टॉपेज की जानकारी आधिकारिक तौर पर जारी की जा सकती है। अगर इस प्रस्ताव को हरी झंडी मिलती है, तो दुर्गा पूजा, दिवाली और छठ जैसे बड़े त्योहारों से पहले दिल्ली आने-जाने वाले बिहार के यात्रियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

भागलपुर से दिल्ली के बीच त्योहारों के दौरान ट्रेनों में यात्रियों की संख्या काफी बढ़ जाती है। नियमित ट्रेनों में सीटों की मांग बढ़ने के कारण लंबी वेटिंग लिस्ट रहती है और यात्रियों को कंफर्म टिकट के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसी समस्या को देखते हुए रेलवे बोर्ड ने ईस्टर्न रेलवे से इस रूट पर यात्रियों की भीड़ और ट्रेनों की उपलब्धता को लेकर रिपोर्ट मांगी थी।

फिलहाल, ईस्टर्न रेलवे ने रेलवे बोर्ड को रूट से जुड़ी तकनीकी और परिचालन संबंधी रिपोर्ट भेज दी है। अब इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला रेलवे बोर्ड को लेना है। मंजूरी मिलने के बाद ट्रेन के संचालन से जुड़ी पूरी जानकारी सामने आएगी।

ईस्टर्न रेलवे जोन हेडक्वार्टर, कोलकाता के प्रिसिंपल चीफ कमर्शियल मैनेजर (PCCM) डॉ. उदय शंकर झा के मुताबिक, भागलपुर से आनंद विहार टर्मिनल के बीच स्लीपर वंदे भारत चलाने की पूरी तैयार कर ली गई है। रेलवे बोर्ड की ओर से मांगी गई सभी जानकारियां भेज दी गई हैं। बोर्ड से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ट्रेन के शुभारंभ की तारीख और समय की आधिकारिक घोषणा की जाएगी।

भागलपुर समेत इन जिलों को मिलेगा फायदा

नई स्लीपर वंदे भारत शुरू होने से भागलपुर के साथ बांका, मुंगेर और आसपास के जिलों के यात्रियों को दिल्ली आने-जाने के लिए एक और बेहतर विकल्प मिल सकता है। लंबी दूरी के सफर के लिए तेज रफ्तार और बेहतर सुविधाओं वाली इस ट्रेन से यात्रियों की यात्रा पहले के मुकाबले ज्यादा आरामदायक होने की उम्मीद है। खासकर दुर्गा पूजा, दिवाली और छठ जैसे त्योहारों के दौरान।

इस ट्रेन के शुरू होने से नियमित ट्रेनों में बढ़ने वाली भीड़ को कम करने में भी मदद मिल सकती है। हालांकि, ट्रेन का रूट क्या होगा और किन-किन स्टेशनों पर इसका ठहराव रहेगा, इस पर अंतिम फैसला रेलवे बोर्ड की मंजूरी के बाद ही होगा।

ईस्टर्न रेलवे को मिल सकती है नई स्लीपर वंदे भारत

ईस्टर्न रेलवे के तहत अभी हावड़ा-जमालपुर रूट पर चेयर कार वाली वंदे भारत चल रही है। ऐसे में अगर भागलपुर से आनंद विहार के बीच स्लीपर वंदे भारत शुरू होती है, तो यह इस जोन के लिए एक नई और अहम सुविधा होगी। लंबी दूरी के यात्रियों को ध्यान में रखते हुए रेलवे देश के व्यस्त रूटों पर स्लीपर वंदे भारत चलाने की तैयारी कर रहा है। इसी वजह से भागलपुर-दिल्ली रेल मार्ग को भी इस ट्रेन के लिए संभावित रूट के तौर पर देखा जा रहा है।

नई वंदे भारत आधुनिक सुविधाओं से होगी लैस

रेलवे की योजना के अनुसार, नई स्लीपर वंदे भारत में यात्रियों के आराम के साथ-साथ उनकी सुरक्षा पर भी खास जोर दिया जाएगा। एसी स्लीपर कोच में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी, ताकि लंबी दूरी का सफर ज्यादा आरामदायक बनाया जा सके। वहीं, लोको पायलटों के लिए भी आधुनिक केबिन तैयार किया जाएगा, जिसमें एडवांस कंट्रोल पैनल और बेहतर सुरक्षा तकनीक मौजूद होगी।

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