2-5 सितंबर के बीच दिल्ली, यूपी-बिहार से MP तक इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, मौसम के अगले 48 घंटे इन इलाकों में पड़ेंगे भारी!

Weather Update: उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश और उसके आसपास बने वेल मार्क्ड लो-प्रेशर एरिया और कई एक्टिव वेदर सिस्टम के चलते देश के बड़े हिस्से में मानसून एक बार फिर काफी आक्रामक रूप दिखा रहा है। इसे देखते हुए भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 2 से 5 सितंबर के दौरान दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।

खासकर अगले 48 घंटों के अंदर मध्य प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में बेहद भारी बारिश की संभावना जताई गई है। दूसरी ओर दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में अगले एक सप्ताह तक बारिश की गतिविधियां धीमी रहेंगी।

मध्य प्रदेश में अगले 48 घंटे भारी, 02 और 03 सितंबर को अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट

मध्य भारत में बारिश का दौर सबसे ज्यादा परेशानी की वजह बन सकता है। मौसम विभाग के मुताबिक उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश पर बना गहरा कम दबाव का क्षेत्र अगले 24 घंटों में पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में दक्षिण उत्तर प्रदेश और उत्तरी मध्य प्रदेश की ओर बढ़ेगा। इस वजह से पूर्वी मध्य प्रदेश में 2 और 3 सितंबर को कुछ जगहों पर बेहद भारी बारिश (20 सेमी से अधिक) हो सकती है।

पूर्वी मध्य प्रदेश में 2 से 5 सितंबर तक और पश्चिमी मध्य प्रदेश में 2 से 7 सितंबर तक मूसलाधार बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। इसके अलावा विदर्भ में 3 सितंबर को बहुत भारी बारिश और छत्तीसगढ़ में 2 सितंबर को भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है।

यूपी, उत्तराखंड और दिल्ली-एनसीआर में 2 से 5 सितंबर तक कैसा रहेगा मौसम?

उत्तर-पश्चिम भारत के राज्यों के लिए भी मौसम अलर्ट जारी किया गया है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 2 सितंबर को बहुत भारी बारिश होने का अनुमान है। वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 2 से 4 सितंबर के दौरान भारी से बहुत भारी बारिश देखने को मिल सकती है। राजधानी दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ में 3 और 4 सितंबर को काफी बारिश होगी और 2 से 5 सितंबर तक अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।

पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में 2 से 8 सितंबर के बीच लगातार बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। यहां भी 2 सितंबर को भारी से अत्यंत भारी बारिश का अनुमान है। हिमाचल प्रदेश और पंजाब में भी 2 से 5 सितंबर के बीच भारी बारिश दर्ज की जा सकती है।

बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में भारी बारिश का अनुमान

पूर्वी भारत के राज्यों पर भी मानसून मेहरबान रहेगा। बिहार और गांगेय पश्चिम बंगाल में 2 सितंबर को बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इसके बाद 3 और 4 सितंबर को भी बिहार में भारी बारिश जारी रहेगी। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 2 और 3 सितंबर को बहुत भारी बारिश होने की संभावना है।

वहीं, झारखंड में 2 और 8 सितंबर को भारी बारिश के साथ 2 से 4 सितंबर तक बादलों की गरज और बिजली कड़कने की चेतावनी दी गई है। इसके साथ ही पूर्वोत्तर भारत के असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 2 से 8 सितंबर तक लगातार तेज बारिश का दौर जारी रहेगा।

पिछले 24 घंटों का हाल और चक्रवातीय प्रणालियां

बीते 24 घंटों की बात करें तो उत्तराखंड, झारखंड और गांगेय पश्चिम बंगाल के अलग-अलग जगहों पर बेहद भारी बारिश (20 सेमी से ज्यादा) दर्ज की गई है। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पूर्वी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और बिहार में 12 से 20 सेमी तक बारिश हुई। मौसम प्रणालियों की बात करें तो मानसून ट्रफ सामान्य स्थिति में है।

ये भी पढ़ें- Indus Waters Treaty: पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने SCO में उठाया सिंधु जल संधि का केस फिर क्या हुआ?

इसके साथ ही उत्तर-पश्चिम उत्तर प्रदेश से बांग्लादेश तक एक ट्रफ रेखा फैली हुई है। वहीं उत्तर-पूर्वी अरब सागर और सौराष्ट्र के ऊपर एक साइक्लॉनिक सर्कुलेशन बना हुआ है। इन मौसमी प्रणालियों की वजह से देश के उत्तरी, मध्य और पूर्वी राज्यों में अगले 3-4 दिनों तक मौसमी गतिविधियां काफी तेज रहने वाली हैं।

Indus Waters Treaty: पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने SCO में उठाया सिंधु जल संधि का केस फिर क्या हुआ?

Indus Waters Treaty: सिंधु जल संधि को स्थगित रखने के भारत के कड़े रुख से पाकिस्तान को बड़ा झटका लगा है। पिछले दिनों भारत ने इस मामले में आर्बिट्रेशन बॉडी को ही गैर कानूनी बताते हुए इसके फैसले को खारिज कर दिया। इससे आहत होकर पाकिस्तान ने अब शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO की बैठक में इस मामले को उठाया है। पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने भारत के साथ इस मसले को लेकर चल रहे विवाद पर कहा कि शेयर्ड वॉटर रिसोर्स का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ उठाने के हथियार के रूप में नहीं किया जाना चाहिए।

शहबाज शरीफ ने इसे अपने इलाके की जीवनरेखा से जोड़ते हुए कहा कि यह करोड़ों लोगों के जीवन, खेती और आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहद जरूरी है। शहबाज शरीफ ने यहां तक कहा कि इसके लिए जो संधियां हैं, उन्हें दोनों पक्षों द्वारा माना जाना चाहिए।

‘द हेग’ के फैसले पर भारत ने दिखाया सख्त रुख तो बिलबिलाया पाकिस्तान

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी भारत द्वारा ‘द हेग’ स्थित पर्मानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के सिंधु जल संधि से जुड़े फैसले को खारिज करने के ठीक एक दिन बाद आई है। मध्यस्थता अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि 1960 की सिंधु जल संधि पूरी तरह से लागू है। भारत को इस समझौते के तहत अपने दायित्वों को पूरा करना जारी रखना चाहिए। मध्यस्थता फोरम के मुताबिक इसमें पश्चिमी नदियों पर जलविद्युत परियोजनाओं को नियंत्रित करने वाले नियम भी शामिल हैं।

इसका तगड़ा जवाब देते हुए भारत ने इस मध्यस्थता निकाय को ही गैर-कानूनी रूप से गठित बता दिया। इस कदम के साथ ही साथ भारत ने साफ और स्पष्ट लहजे में दुनिया को बता दिया कि ऐसे मध्यस्थता निकाय के पास भारत के संप्रभु निर्णयों के ऊपर कोई क्षेत्राधिकार नहीं है। भारत के विदेश मंत्रालय ने यह भी साफ कहा कि संधि को स्थगित रखने का भारत का फैसला अभी भी पूरी तरह से लागू है।

क्यों स्थगित की गई थी सिंधु जल संधि?

अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में 26 लोगों की जान जाने के बाद भारत ने 1960 की इस संधि को स्थगित कर दिया था। भारत का कहना है कि यह संधि तब तक स्थगित रहेगी जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को अपना समर्थन देना पूरी तरह से बंद नहीं कर देता। पाकिस्तान ने इस हमले में अपनी किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया था।

ये भी पढ़ें- क्या है सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत का केस जिसकी अब CBI करेगी जांच? 2020 से अबतक ये सब हुआ

यह विवाद तब और तेज हो गया जब भारत ने जम्मू और कश्मीर में अपनी जलविद्युत परियोजनाओं पर काम की रफ्तार बढ़ा दी। पाकिस्तान सिंधु जल संधि का हवाला देकर भारत की इन परियोजनाओं का लगातार विरोध करता रहा है।

भागलपुर से आनंद विहार के बीच चलेगी स्लीपर वंदे भारत, ईस्टर्न रेलवे ने बोर्ड को भेजी रिपोर्ट, जानें इसका संभावित रूट और सारी डिटेल

Bhagalpur-Delhi Sleeper Vande Bharat: बिहार के भागलपुर से दिल्ली के आनंद विहार टर्मिनल के बीच स्लीपर कोच वाली वंदे भारत एक्सप्रेस चलाने की तैयारी तेज हो गई है। रेलवे बोर्ड की अंतिम मंजूरी मिलते ही इस ट्रेन के संचालन की तारीख, समय, रूट और स्टॉपेज की जानकारी आधिकारिक तौर पर जारी की जा सकती है। अगर इस प्रस्ताव को हरी झंडी मिलती है, तो दुर्गा पूजा, दिवाली और छठ जैसे बड़े त्योहारों से पहले दिल्ली आने-जाने वाले बिहार के यात्रियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

भागलपुर से दिल्ली के बीच त्योहारों के दौरान ट्रेनों में यात्रियों की संख्या काफी बढ़ जाती है। नियमित ट्रेनों में सीटों की मांग बढ़ने के कारण लंबी वेटिंग लिस्ट रहती है और यात्रियों को कंफर्म टिकट के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसी समस्या को देखते हुए रेलवे बोर्ड ने ईस्टर्न रेलवे से इस रूट पर यात्रियों की भीड़ और ट्रेनों की उपलब्धता को लेकर रिपोर्ट मांगी थी।

फिलहाल, ईस्टर्न रेलवे ने रेलवे बोर्ड को रूट से जुड़ी तकनीकी और परिचालन संबंधी रिपोर्ट भेज दी है। अब इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला रेलवे बोर्ड को लेना है। मंजूरी मिलने के बाद ट्रेन के संचालन से जुड़ी पूरी जानकारी सामने आएगी।

ईस्टर्न रेलवे जोन हेडक्वार्टर, कोलकाता के प्रिसिंपल चीफ कमर्शियल मैनेजर (PCCM) डॉ. उदय शंकर झा के मुताबिक, भागलपुर से आनंद विहार टर्मिनल के बीच स्लीपर वंदे भारत चलाने की पूरी तैयार कर ली गई है। रेलवे बोर्ड की ओर से मांगी गई सभी जानकारियां भेज दी गई हैं। बोर्ड से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ट्रेन के शुभारंभ की तारीख और समय की आधिकारिक घोषणा की जाएगी।

भागलपुर समेत इन जिलों को मिलेगा फायदा

नई स्लीपर वंदे भारत शुरू होने से भागलपुर के साथ बांका, मुंगेर और आसपास के जिलों के यात्रियों को दिल्ली आने-जाने के लिए एक और बेहतर विकल्प मिल सकता है। लंबी दूरी के सफर के लिए तेज रफ्तार और बेहतर सुविधाओं वाली इस ट्रेन से यात्रियों की यात्रा पहले के मुकाबले ज्यादा आरामदायक होने की उम्मीद है। खासकर दुर्गा पूजा, दिवाली और छठ जैसे त्योहारों के दौरान।

इस ट्रेन के शुरू होने से नियमित ट्रेनों में बढ़ने वाली भीड़ को कम करने में भी मदद मिल सकती है। हालांकि, ट्रेन का रूट क्या होगा और किन-किन स्टेशनों पर इसका ठहराव रहेगा, इस पर अंतिम फैसला रेलवे बोर्ड की मंजूरी के बाद ही होगा।

ईस्टर्न रेलवे को मिल सकती है नई स्लीपर वंदे भारत

ईस्टर्न रेलवे के तहत अभी हावड़ा-जमालपुर रूट पर चेयर कार वाली वंदे भारत चल रही है। ऐसे में अगर भागलपुर से आनंद विहार के बीच स्लीपर वंदे भारत शुरू होती है, तो यह इस जोन के लिए एक नई और अहम सुविधा होगी। लंबी दूरी के यात्रियों को ध्यान में रखते हुए रेलवे देश के व्यस्त रूटों पर स्लीपर वंदे भारत चलाने की तैयारी कर रहा है। इसी वजह से भागलपुर-दिल्ली रेल मार्ग को भी इस ट्रेन के लिए संभावित रूट के तौर पर देखा जा रहा है।

नई वंदे भारत आधुनिक सुविधाओं से होगी लैस

रेलवे की योजना के अनुसार, नई स्लीपर वंदे भारत में यात्रियों के आराम के साथ-साथ उनकी सुरक्षा पर भी खास जोर दिया जाएगा। एसी स्लीपर कोच में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी, ताकि लंबी दूरी का सफर ज्यादा आरामदायक बनाया जा सके। वहीं, लोको पायलटों के लिए भी आधुनिक केबिन तैयार किया जाएगा, जिसमें एडवांस कंट्रोल पैनल और बेहतर सुरक्षा तकनीक मौजूद होगी।

यह भी पढ़ें: Indus Waters Treaty: भारत ने सिंधु के पानी पर पाकिस्तान को फिर दिया बड़ा झटका! ये बोल खारिज किया कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन का फैसला

Indus Waters Treaty: भारत ने सिंधु के पानी पर पाकिस्तान को फिर दिया बड़ा झटका! ये बोल खारिज किया कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन का फैसला

Indus Waters Treaty Update: सिंधु जल संधि को लेकर भारत ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाते हुए पाकिस्तान को बड़ा झटका दिया है। भारत ने सोमवार को तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (CoA) द्वारा अंतरिम उपायों और सिंधु जल संधि की स्थिति को लेकर जारी किए गए फैसले को सिरे से खारिज कर दिया है। भारत ने कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन को ही गैर-कानूनी रूप से गठित बताते हुए साफ कहा है कि इस मंच का भारत पर कोई क्षेत्राधिकार नहीं है।

भारत के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि वर्ल्ड बैंक द्वारा इस कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन का गठन सिंधु जल संधि की शर्तों का प्रत्यक्ष उल्लंघन करके किया गया था। भारत ने इस निकाय द्वारा जारी हालिया फैसले के साथ-साथ इसके सभी पिछले बयानों और आदेशों को भी स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है।

गैर-कानूनी निकाय को भारत ने कभी मान्यता नहीं दी- विदेश मंत्रालय

विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में दोहराया कि भारत ने कानूनी रूप से इस गैर-कानूनी और तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के अस्तित्व को कभी स्वीकार नहीं किया है। विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि इस मध्यस्थता निकाय की स्थापना स्वयं सिंधु जल संधि का एक गंभीर उल्लंघन है। भारत ने साफ किया कि वह इस निकाय के समक्ष कभी भी पेश नहीं हुआ है और उसने इसके किसी भी पिछले फैसलों या घोषणाओं का संज्ञान लेने से भी हमेशा इनकार किया है।

भारत की संप्रभुता और परियोजनाओं पर नहीं पड़ेगा कोई असर

विदेश मंत्रालय ने आगे कहा कि तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के पास भारत के संप्रभु निर्णयों पर फैसला सुनाने का कोई क्षेत्राधिकार नहीं है। भारत द्वारा शुरू की जा रही या चलाई जा रही परियोजनाओं से जुड़े कदमों पर इस निकाय के वर्तमान या भविष्य के किसी भी फैसले का कोई असर नहीं पड़ेगा। इसके साथ ही भारत सरकार ने एक बार फिर दोहराया है कि सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का उसका फैसला पूरी तरह से लागू रहेगा और प्रभाव में बना रहेगा।

आपको बता दें कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल समझौता को स्थगित करने का फैसला किया था। इसके बाद ही पाकिस्तान लगातार इसे लेकर धमकी देने के साथ तमाम तरह के पैंतरे दिखा रहा है। इसी क्रम में अब इसे लेकर कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के फैसले और खुद कोर्ट को ही खारिज कर भारत ने पाकिस्तान को एक और तगड़ा झटका दे दिया है।

Indus Waters Treaty: सिंधु जल समझौते में उलझा रहा पाकिस्तान उधर भारत ने चिनाब पर 4870 MW हाइड्रोपावर प्लान पर लगा दिया जोर!

Indus Waters Treaty: 1960 के सिंधु जल समझौते को स्थगित करने के करीब 15 महीने बाद भारत ने साफ कर दिया है कि अब यह समझौता अपने पुराने रूप में वापस नहीं लौटेगा। सूत्रों के हवाले से खबर आई है कि भारत सरकार पाकिस्तान के साथ इस संधि पर फिर से बातचीत करने के लिए तैयार है। लेकिन इसके मौजूदा स्वरूप को पूरी तरह खारिज कर दिया गया है।

वहीं, ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने पाकिस्तान को बड़ा रणनीतिक जवाब देते हुए चिनाब बेसिन में 4870 मेगावाट (MW) की कुल क्षमता वाली 5 बड़े हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पर काम बेहद तेज कर दिया है। सरकारी सूत्रों ने सोमवार को द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि मौजूदा स्वरूप में सिंधु जल समझौता दोबारा काम नहीं कर सकता। आइए जानते हैं भारत की इन 5 बड़े प्रोजेक्ट का पूरा विस्तृत ब्योरा और उनकी मौजूदा स्थिति।

चिनाब बेसिन पर भारत के 5 बड़े प्रोजेक्ट: जानिए किस प्रोजेक्ट में कितना हुआ काम

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार की मौजूदा प्राथमिकताओं में सावलकोट (1856 MW), पाकल दुल (1000 MW), रतले (850 MW), किरू (624 MW) और क्वार (540 MW) प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी NHPC की 18 मई 2026 की लेटेस्ट फाइनेंशियल और टेक्निकल अर्निंग कॉल्स के मुताबिक ये सभी परियोजनाएं इस समय अलग-अलग चरणों में हैं।

इनमें सबसे पहले पाकल दुल जलविद्युत परियोजना की बात करें तो 1000 मेगावाट क्षमता वाले इस प्रोजेक्ट का मार्च 2026 तक 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और NHPC ने इसे वित्त वर्ष 2027 की चौथी तिमाही यानी जनवरी से मार्च 2027 के बीच चालू करने का लक्ष्य रखा है। 624 मेगावाट क्षमता वाली किरू परियोजना का काम भी तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसका 82 प्रतिशत निर्माण काम पूरा कर लिया गया है। इसे भी जनवरी से मार्च 2027 के बीच ही शुरू करने की समयसीमा तय की गई है।

तीसरी प्रमुख परियोजना 540 मेगावाट की क्वार हाइड्रोपावर परियोजना है, जिसका अब तक 33 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और इसे मार्च 2028 तक चालू करने का शेड्यूल निर्धारित किया गया है। चौथे प्रोजेक्ट के रूप में 850 मेगावाट की रतले जलविद्युत परियोजना पर काम चल रहा है। इसका मार्च 2026 तक 29 प्रतिशत निर्माण काम पूरा हो चुका है और इससे नवंबर 2028 में व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है।

इस पूरी पाइपलाइन में सबसे बड़ी परियोजना 1856 मेगावाट क्षमता वाली सावलकोट परियोजना है। इसका अभी कंस्ट्रक्शन चालू नहीं हो पाया है। NHPC के अनुसार यह प्रोजेक्ट फिलहाल केंद्र सरकार की वित्तीय और पर्यावरणीय मंजूरियों के चरण में है। केंद्र सरकार से औपचारिक निवेश मंजूरी मिलने की तारीख से इसके निर्माण में लगभग 96 महीने यानी 8 साल का समय लगेगा। सावलकोट अकेली परियोजना इस 5-प्रोजेक्ट पाइपलाइन की कुल 4870 मेगावाट क्षमता का लगभग 38 प्रतिशत हिस्सा कवर करती है। बाकी 4 निर्माणाधीन परियोजनाएं मिलकर 3014 मेगावाट क्षमता की हैं।

NHPC मार्च 2026 तक पाकल दुल, किरू, क्वार और रतले परियोजनाओं पर कुल 16024 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है जबकि इन चारों की कुल अनुमानित संयुक्त लागत लगभग 27945 करोड़ रुपये है। जब ये पांचों प्रोजेक्ट पूरी तरह चालू हो जाएंगे तो इनसे सालाना लगभग 18.61 अरब यूनिट स्वच्छ बिजली का उत्पादन होगा।

भारत का रुख साफ, पहले आतंकवाद खत्म करे पाकिस्तान

सरकारी सूत्रों के मुताबिक भविष्य में पानी के बंटवारे के प्रावधानों को दोबारा एक्टिव करने के लिए एक संशोधित संधि की आवश्यकता होगी। हालांकि यह इस शर्त पर निर्भर करेगा कि इस्लामाबाद भारत के खिलाफ प्रायोजित आतंकवाद को हमेशा के लिए खत्म करे। सरकारी सूत्रों ने बताया कि ये परियोजनाएं भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन, ग्रिड स्थिरता और क्षेत्रीय विकास को सपोर्ट करेंगी। इसके साथ ही सिंधु बेसिन में भारत के अधिकारों का अधिक उपयोग सुनिश्चित करेंगी।

सिंधु जल संधि स्थगित करने से लेकर अब तक की पूरी टाइमलाइन

1960 की संधि के अनुच्छेद III और अनुलग्नक D के तहत भारत को चिनाब और अन्य पश्चिमी नदियों पर जलविद्युत उत्पन्न करने की अनुमति संधि के दौरान भी प्राप्त थी। लेकिन पाकिस्तान द्वारा पैदा किए गए विवादों और आतंकवाद के कारण हालात बदलते गए-

पहला औपचारिक नोटिस- 25 जनवरी 2023

भारत ने किशनगंगा और रतले परियोजनाओं पर विवाद के बाद सिंधु जल समझौते में संशोधन की मांग करते हुए पाकिस्तान को पहला औपचारिक नोटिस भेजा।

व्यापक समीक्षा की मांग- 30 अगस्त 2024

भारत ने संधि के अनुच्छेद XII(3) के तहत व्यापक समीक्षा और संशोधन की मांग करते हुए दूसरा नोटिस जारी किया।

पहलगाम हमला और कठोर फैसला- 22-23 अप्रैल 2025

22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोग मारे गए। इसके ठीक अगले दिन (23 अप्रैल) सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति ने फैसला लिया कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद का समर्थन विश्वसनीय रूप से बंद नहीं करता, तब तक संधि को स्थगित रखा जाएगा।

पाकिस्तान का रुख- 02 जुलाई 2026

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने प्रेस ब्रीफिंग में भारत के एकतरफा फैसले को खारिज किया और आतंकवाद के आरोपों को नकारते हुए संधि को बाध्यकारी बताया।

मध्यस्थता अदालत का फैसला खारिज- 15 मई 2026

स्थायी मध्यस्थता अदालत (PCA) द्वारा गठित ट्रिब्यूनल ने भारतीय रन-ऑफ-द-रिवर परियोजनाओं में अधिकतम पॉन्डेज की गणना पर एक फैसला जारी किया। भारत के विदेश मंत्रालय ने इस मध्यस्थता अदालत को अवैध बताते हुए फैसले को पूरी तरह खारिज कर दिया।

ये भी पढ़ें- Indus Waters Treaty: ‘आतंकवाद छोड़े बिना नहीं होगी बहाली…’; सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान को भारत का सख्त संदेश

सरकारी सूत्रों का कहना है कि भारत ने अतीत में युद्धों, सैन्य संकटों और लंबे समय की द्विपक्षीय शत्रुता के बावजूद भी 1960 की इस संधि का पालन किया था। हालांकि सीमा पार आतंकवाद को पाकिस्तान से मिल रहे लगातार समर्थन ने इस संधि को चलाए रखने के लिए जरूरी विश्वास को पूरी तरह से खत्म कर दिया है। इसी का नतीजा है कि भारत अब अपने अधिकार क्षेत्र की नदियों के पानी का भरपूर और कुशल उपयोग अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

Indus Waters Treaty: सिंधु जल समझौते पर भारत का सबसे बड़ा कानूनी ब्रह्मास्त्र, 15 पॉइंट में समझिए पाकिस्तान क्यों मुंह की ही खाएगा

Indus Waters Treaty Legal points: भारत और पाकिस्तान के बीच साल 1960 से चले आ रहे सिंधु जल समझौते को लेकर खड़े हुए विवाद के बीच कानूनी मोर्चे पर भारत का पक्ष मजबूत है। इसे लेकर विदेश मंत्रालय (MEA) के पूर्व अतिरिक्त सचिव और कानूनी सलाहकार डॉ. विष्णु दत्त शर्मा ने एक डिटेल्ड लीगल एनालिसिस किया है।

पीटीआई पर मौजूद इस एनालिसिस से साफ है कि अगर पाकिस्तान इस समझौते के नियमों का उल्लंघन कर एकतरफा कोई कदम उठाता है तो अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत भारत के पास उसे करारा जवाब देने का एक बड़ा कानूनी ब्रह्मास्त्र मौजूद है। यहां नीचे 15 पॉइंट में समझिए कि इस समझौते का कानूनी ढांचा क्या है और पाकिस्तान इसमें कैसे मुंह की खाएगा-

1- सिंधु नदी प्रणाली का विशाल दायरा

सिंधु नदी लगभग 1800 मील लंबी है। इसकी पश्चिमी सहायक नदियां (काबुल, कुर्रम) 700 मील से अधिक लंबी हैं जबकि पूर्वी सहायक नदियां (झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास, सतलुज) कुल मिलाकर 2800 मील से अधिक लंबी हैं। यह पूरा सिस्टम 450000 वर्ग मील क्षेत्र को कवर करता है। ये इसे दुनिया की सबसे बड़े नदी प्रणालियों में से एक बनाता है। इसका अधिकांश हिस्सा भारत और पाकिस्तान में स्थित है।

2- बंटवारे के बाद विवाद और दिल्ली समझौता

अगस्त 1947 में भारत के विभाजन के साथ ही सिंधु जल विवाद भी पैदा हो गया। दोनों देशों के बीच पानी के नियमन को लेकर पहला समझौता 4 मई 1948 को हुआ। इसे ‘इंटर-डोमिनियन एग्रीमेंट’ या ‘दिल्ली समझौता’ कहा जाता है। इसमें यह माना गया था कि पश्चिम पंजाब (पाकिस्तान) पूर्वी पंजाब (भारत) के पानी पर अधिकार के रूप में कोई दावा नहीं कर सकता। हालांकि पाकिस्तान ने बाद में 23 अगस्त 1950 को इस समझौते को मानने से इनकार कर दिया था।

3- वर्ल्ड बैंक की एंट्री और 1960 की संधि

1951 में टेनेसी वैली अथॉरिटी के पूर्व अध्यक्ष डेविड लिलिएंटथल ने वर्ल्ड बैंक की मदद से दोनों देशों को संयुक्त रूप से सिंधु बेसिन विकसित करने का प्रस्ताव दिया। वर्ल्ड बैंक के तत्कालीन अध्यक्ष यूजीन ब्लैक ने 6 सितंबर 1951 को दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों को पत्र लिखकर इसका प्रस्ताव दिया। इसे दोनों ने स्वीकार किया। बेहद उतार-चढ़ाव और टूटने की कगार पर पहुंचने के बावजूद आखिरकार 1960 में इस संधि पर हस्ताक्षर हो सके।

4- संधि की कानूनी संरचना और वर्ल्ड बैंक की भूमिका

सिंधु जल समझौते पर 19 सितंबर 1960 को कराची में हस्ताक्षर किए गए थे। यह 12 जनवरी 1961 को लागू हुआ लेकिन इसे 1 अप्रैल 1960 से ही लागू माना गया। इस संधि में 12 अनुच्छेदों के तहत कुल 79 पैराग्राफ और 8 एनेक्सचर शामिल हैं। वर्ल्ड बैंक ने सिर्फ विशिष्ट अनुच्छेदों (Articles V, X) और एनेक्सचर (F, G, H) के उद्देश्यों के लिए इस पर हस्ताक्षर किए थे।

5- नदियों का आवंटन और कानूनी मिसाल

इस संधि के तहत पूर्वी नदियों (रावी, ब्यास, सतलुज) का पानी भारत को और पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम, चिनाब) का पानी कुछ अपवादों को छोड़कर पाकिस्तान को आवंटित किया गया है। इस दस्तावेज में स्पष्ट लिखा है कि इस संधि की किसी भी बात को कानून का कोई सामान्य सिद्धांत या मिसाल नहीं माना जाएगा।

6- संधि का मुख्य उद्देश्य: सद्भावना और सहयोग

संधि की प्रस्तावना में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि भारत और पाकिस्तान सरकार सिंधु नदी प्रणाली के पानी का पूर्ण और संतोषजनक उपयोग करने की समान इच्छा रखती हैं। इसके तहत दोनों देशों को सद्भावना, मित्रता और सहयोग की भावना के साथ एक-दूसरे के अधिकारों और दायित्वों को तय करना था और भविष्य में उठने वाले किसी भी सवाल का निपटारा करना था।

विवाद निपटारे का त्रि-स्तरीय तंत्र

7- स्थायी सिंधु आयोग

संधि के तहत विवादों और मतभेदों के निपटारे के लिए एक स्थायी सिंधु आयोग का गठन किया गया है। इसमें दोनों देशों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। इसकी भूमिका मुख्य रूप से प्रशासनिक और परामर्शी होती है।

8- संधि में सवाल, मतभेद और विवाद में अंतर

अनुच्छेद IX विवाद निपटान ढांचे का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह किसी मुद्दे को तीन श्रेणियों में बांटता है, सवाल, मतभेद और विवाद, किसी भी सवाल की जांच सबसे पहले आयोग करता है। अगर आयोग में सहमति नहीं बनती तो उसे मतभेद माना जाता है। फिर इसे एक निष्पक्ष विशेषज्ञ के पास भेजा जाता है। कोई मुद्दा विवाद तभी बनता है जब वह निष्पक्ष विशेषज्ञ के अधिकार क्षेत्र से बाहर हो या विशेषज्ञ खुद आयोग को इसकी जानकारी दे।

9- मध्यस्थता अदालत के लिए कड़ी शर्तें

कोई भी मतभेद विवाद की श्रेणी में तभी आ सकता है जब आयोग के दोनों कमिश्नर इस पर सहमत हों। जब विवाद खड़ा हो जाता है तो आयोग दोनों सरकारों को रिपोर्ट करता है। इसके बाद मध्यस्थों की मदद ली जा सकती है। किसी मध्यस्थता अदालत का गठन सिर्फ दोनों देशों की आपसी सहमति या बातचीत और मध्यस्थता के पूरी तरह विफल होने के बाद ही किया जा सकता है।

पाकिस्तान क्यों खाएगा मुंह की? भारत का कानूनी पक्ष

10- एकतरफा अदालत जाने का कोई अधिकार नहीं

एनेक्सचर G (मध्यस्थता अदालत) की शुरुआती भाषा बेहद महत्वपूर्ण है। इसमें लिखा है कि, ‘अगर आवश्यकता पैदा होती है तो…’ इसका मतलब यह है कि यह चरण तभी आएगा जब सभी आवश्यक शर्तें पूरी होंगी। कोई भी पक्ष अपनी मर्जी से किसी भी सवाल को सीधे मध्यस्थता अदालत में नहीं घसीट सकता। इसके लिए पहले आपसी बातचीत और निष्पक्ष विशेषज्ञ के चरणों से गुजरना अनिवार्य है।

11- एकतरफा कदम पूरी तरह अवैध

कोई भी कमिश्नर मतभेद को निष्पक्ष विशेषज्ञ के पास ले जाने के लिए एकतरफा पहल तो कर सकता है लेकिन किसी मतभेद को विवाद घोषित करने या मध्यस्थता अदालत की प्रक्रिया को एकतरफा शुरू करने का कोई प्रावधान इस संधि में नहीं है। द्विपक्षीय संधियों में हमेशा आपसी निर्धारण का प्रावधान होता है और यही बात सिंधु जल समझौते पर भी लागू होती है।

12- पाकिस्तान की एकतरफा जिद संधि का उल्लंघन

अगर संधि के नियमों के तहत कोई विवाद आधिकारिक रूप से खड़ा ही नहीं हुआ है और उसके बिना ही पाकिस्तान मध्यस्थता अदालत गठित करने के लिए एकतरफा प्रक्रिया शुरू करता है तो यह संधि का सीधा उल्लंघन माना जाएगा और यह पूरी तरह से अवैध होगा। ऐसे में भारत के पास इसके खिलाफ सुधारात्मक कदम उठाने के कानूनी विकल्प मौजूद हैं।

13- वियना कन्वेंशन का कानूनी आधार

अंतरराष्ट्रीय कानून में जब कोई एक पक्ष संधि के किसी महत्वपूर्ण हिस्से का उल्लंघन करता है तो वियना कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ ट्रीटीज 1969 को जरूरी डॉक्यूमेंट के रूप में देखा जाता है। हालांकि भारत और पाकिस्तान दोनों ही इस कन्वेंशन के पक्षकार नहीं हैं और सिंधु जल समझौता इससे पहले का है लेकिन इसके नियम अंतरराष्ट्रीय प्रथागत कानून को दर्शाते हैं।

14- मटेरियल ब्रीच का नियम

वियना कन्वेंशन का अनुच्छेद 60 संधि के उल्लंघन के परिणामों को स्पष्ट करता है। इसके तहत संधि के उद्देश्य या प्रयोजन को पूरा करने के लिए आवश्यक किसी भी प्रावधान का उल्लंघन करना मटेरियल ब्रीच यानी गंभीर उल्लंघन माना जाता है। यह भारत के लिए एक मजबूत कानूनी आधार तैयार करता है।

15- आतंकवाद के कारण भारत सस्पेंड कर सकता है संधि

डॉ विष्णु दत्त शर्मा के निष्कर्ष के मुताबिक इस पूरी संधि की मूल भावना सद्भावना और मित्रता पर आधारित है। ऐसे में यह दलील दी जा सकती है कि पाकिस्तान द्वारा लगातार सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देना संधि के तहत उसके दायित्वों को पूरा करने में विफलता है। ऐसे में पाकिस्तान की ओर से किया जा रहा यह कृत्य एक मटेरियल ब्रीच का रूप लेता है। इस आधार पर भारत को अंतरराष्ट्रीय प्रथागत कानून के तहत यह पूरा अधिकार है कि वह सिंधु जल समझौते को स्थगित कर दे। अगर पाकिस्तान जरूरी प्रक्रियाओं को दरकिनार कर भारत को एकतरफा मध्यस्थता अदालत में खींचने की कोशिश करता है तो वह खुद अपनी ही चाल में फंसकर मुंह की खाएगा।

‘हम हर फ्रंट पर तैयार…’, सिंधु के पानी पर बिलावल भुट्टो ने भारत के खिलाफ फिर उगला जहर

सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान में तनाव अपने चरम पर है। भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाक के खिलाफ सख्त एक्शन लेते हुए सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया था। इस मामले पर पाकिस्तान कई बार गीदड़भभकी दे चुका है। अब पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के चेयरमैन बिलावल भुट्टो जरदारी ने जहर उगला है। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के नेता बिलावल भुट्टो जरदारी ने भारत पर सिंधु नदी के पानी को “हथियार” की तरह इस्तेमाल करने का फिर वही पुराना राग अलापा है। भारत को गीदड़ भभकी देते हुए बिलावल ने कहा कि, “पाकिस्तान कभी भी सिंधु नदी पर अपने अधिकारों से समझौता नहीं करेगा। हम हर फ्रंट पर तैयार हैं।”

बिलावल ने भारत के खिलाफ फिर उगला जहर

बिलावल ने कहा किस पाकिस्तान हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है और सिंधु नदी के पानी पर अपने अधिकारों की रक्षा करेगा। हम इस मुद्दे पर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेंगे।” वहीं, पिछले सप्ताह भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि पाकिस्तान की ओर से सीमा पार आतंकवाद को लगातार समर्थन दिए जाने के कारण सिंधु जल संधि फिलहाल स्थगित रहेगी।

पाकिस्तान पहले भी दे चुका है धमकी 

बता दें कि, सिंधु जल समझौता, वर्ष 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई थी। यह समझौता भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी प्रणाली के पानी के बंटवारे के नियम तय करता है। पिछले सप्ताह इस्लामाबाद में आयोजित एक सेमिनार में पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने भारत के संधि को स्थगित रखने के फैसले पर यही पुराना राग अलापा था। उन्होंने कहा कि यह समझौता अब भी पूरी तरह वैध और लागू है। वहीं, बिलावल भुट्टो जरदारी ने भी इसी रुख का समर्थन करते हुए भारत पर निशाना साधने की कोशिश की है।

बता दें कि, यह पहले मौका नहीं है जब भारत के खिलाफ बिलावल भुट्टो की बौखलाहट सामने आई है। इससे पहले बिलावल भुट्टो ने कहा था कि अगर भारत सिंधु जल संधि को स्थगित रखता है और उसपर बांध बनाता है तो भारत के खिलाफ युद्ध होगा।