भारत में नेपाल जैसी तबाही को उफन रहीं 88 झीलें:खतरे में 6 प्रदेश, ग्लेशियल लेक अचानक कैसे फट जाती हैं

26 अगस्त की सुबह 9 बजे। तिब्बत से सटे नेपाल के रसुवा जिले की भोटेकोशी नदी में अचानक तेज बाढ़ आ गई। कुछ ही मिनटों में सड़कें, इमारतें, गांव बह गए। सैकड़ों लोग लापता हैं, जिनमें भारत-अमेरिका समेत 26 देशों के नागरिक शामिल हैं। रात 9 बजे तक 95 मौतों की पुष्टि हो चुकी है। शुरुआती आकलन के मुताबिक, तबाही की वजह ‘ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड’ यानी GLOF है। करीब एक साल पहले, जुलाई 2025 में भी इसी इलाके में तिब्बत की एक ग्लेशियर झील तापमान बढ़ने से फट गई थी, जिसमें 9 लोगों की जान गई थी। ये एक पैटर्न-सा बनता जा रहा है। GLOF की जद में भारत के भी कई इलाके हैं। 5 गुना बढ़ गईं ग्लेशियर झीलें, खतरे में भारत के 6 प्रदेश IIT रोपड़ और सिडनी की यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी ने एक साझा स्टडी की। इसी महीने जारी रिपोर्ट के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश में 1990 में सिर्फ 107 ग्लेशियर झीलें थीं। 2024 तक यह संख्या बढ़कर 669 हो गई, यानी 525% की बढ़ोत्तरी। 669 में से 88 झीलों पर नेपाल जैसी ‘ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड’ का खतरा मंडरा रहा है। 9 झीलों को ‘बेहद ज्यादा खतरनाक’, 18 को ‘ज्यादा खतरनाक’ और 26 को ‘मध्यम खतरनाक’ श्रेणी में रखा गया है। रिसर्चर्स ने दो झीलों पर खास मॉडलिंग की- ब्यास बेसिन की हिमसू झील और सतलुज बेसिन की एक बेनाम झील। अगर ब्यास झील का नेचुरल डैम टूट जाए, तो 1,385 क्यूबिक मीटर प्रति सेकेंड की बाढ़ आएगी। यानी हर सेकेंड करीब 14 लाख लीटर पानी बहेगा। इससे हर सेकेंड ओलंपिक साइज के 6 स्विमिंग पूल भरे जा सकते हैं। इसी तरह सतलुज झील से 3,507 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड पानी का सैलाब आएगा। यानी हर सेकेंड करीब 35 लाख लीटर पानी बहेगा। इससे डैम और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट समेत 588 इमारतों को खतरा है। हिमालय का बढ़ता तामपान इस खतरे को और बढ़ा रहा है। जुलाई 2026 में आई IIT खड़गपुर की एक स्टडी बताती है कि ऊंचाई वाले इलाकों का तापमान पिछले 20 सालों में करीब 1 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ चुका है। वैज्ञानिकों की चेतावनी है कि इससे ग्लेशियर पिघलने और नदियों के बहाव में बड़ा बदलाव आ सकता है। ग्लेशियर झीलें अचानक कैसे फट जाती हैं? पहाड़ों पर ऊंचाई पर मौजूद ग्लेशियर जब पिघलते हैं, तो उनका पानी आसपास के निचले इलाके या किसी चट्टानी दीवार के सहारे इकट्ठा होने लगता है। ये धीरे-धीरे एक झील का रूप ले लेता है, जिसे ‘ग्लेशियल लेक’ कहते हैं। ये झील ग्लेशियर के सामने या उसकी निचली सतह पर भी बन सकती है। इन झीलों को बर्फ, पहाड़ का मलबा या चट्टान की एक नैचुरल दीवार यानी ‘डैम’ रोककर रखती है। जब ये दीवार किसी वजह से अचानक टूट जाती है, तो झील में जमा लाखों-करोड़ों क्यूबिक मीटर पानी बहुत तेज रफ्तार से बेकाबू होकर नीचे की तरफ बहता है। इसी को ‘ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड, GLOF या ग्लेशियर की झील फटना कहते हैं। GLOF में पानी के बहाव की रफ्तार आम बारिश से आई बाढ़ के मुकाबले कई गुना ज्यादा होती है, जिससे यह रास्ते में आने वाली हर चीज को बहुत तेजी से काटती-छांटती और बहाती चली जाती है। ग्लेशियर झील 3 वजहों से फट सकती हैं… 1. ग्लोबल वार्मिंग से ग्लेशियर का तेजी से पिघलना 2. बर्फ या चट्टान का झील में गिरना 3. भारी बारिश से झील का ओवरफ्लो होना GLOF की तबाही कैसे रोकी जा सकती है? नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी, NDMA और नेशनल GLOF रिस्क मिटिगेशन प्रोग्राम के मुताबिक, क्या नेपाल की बाढ़ से भारत में फौरन कोई खतरा? इसलिए भोटेकोशी में अधिक पानी आने पर उसका पानी सुनकोशी और फिर कोसी नदी तंत्र में शामिल हो सकता है। इससे सुपौल, सहरसा, मधेपुरा और खगड़िया जिले काफी प्रभावित हो सकते हैं। 2008 में नेपाल के कुसहा में कोसी नदी का तटबंध टूट गया था। इसके बाद कोसी नदी अपने नए/प्राकृतिक रास्ते को छोड़कर सैकड़ों साल पुराने पूर्व की ओर वाले रास्ते पर बहने लगी। इससे अचानक नदी का रुख घनी आबादी और नए इलाकों की तरफ मुड़ गया, जिससे बिहार के 34 लाख से अधिक लोग बिना किसी पूर्व चेतावनी के भीषण बाढ़ की चपेट में आ गए। हालांकि, इस बार रसुवा में लैंडस्लाइड, भूस्खलन या हिम झील टूटने से अचानक नदी में भारी मात्रा में पानी आ गया है। लेकिन नदी ने अपना रास्ता नहीं बदला है। वह अपने तय रास्ते पर बह रही है। इस कारण एक्सपर्ट तटबंध टूटने की संभावना व्यक्त नहीं कर रहे हैं। पानी के भारी दबाव और संभावित बढ़ोतरी को देखते हुए पश्चिमी चंपारण के वाल्मीकिनगर गंडक बैराज के सभी 36 फाटक खोल दिए गए हैं। बिहार के 8 जिलों में हाईअलर्ट जारी किया गया है। ये जिले पश्चिमी चंपारण (बगहा), पूर्वी चंपारण (मोतिहारी), गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी और शिवहर हैं। ———— ये खबरें भी पढ़ें- नेपाल में बाढ़ से तबाही, सैकड़ों लापता, 95 मौतें:पावर प्लांट-पुल बहे; 133 भारतीय लापता, कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे थे नेपाल की बाढ़ से गंडक नदी में अचानक पानी बढ़ा:बैराज के 36 गेट खोले गए, मोतिहारी-गोपालगंज समेत बिहार के 8 जिलों में हाई अलर्ट

ऑस्ट्रेलिया में PM मोदी को अपशब्द बोले:’सतलुज’ फिल्म पर BJP सिख सपोर्टर से भिड़े खालिस्तानी; बीच सड़क झगड़े का VIDEO वायरल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान मेलबर्न में खालिस्तान समर्थक और भाजपा समर्थक सिख भिड़ गए। खालिस्तानी पीएम को अपशब्द बोलते सुनाई दिए। इसका एक वीडियो भी सामने आया है। वीडियो को भाजपा समर्थक सिख जगविंदर विर्क ने 15 जुलाई की सुबह अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया। वायरल वीडियो में कुछ खालिस्तान समर्थक प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां के साथ “खालिस्तान जिंदाबाद” के नारे लगाते दिखाई दे रहे हैं। बहस ‘सतलुज’ फिल्म पर लगे बैन को लेकर शुरू हुई, जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों पक्षों को अलग कर मामला शांत कराया। अब 4 प्वाइंट्स में पढ़ें पूरा मामला:- 3 दिन के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर थे PM मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 8 से 10 जुलाई तक ऑस्ट्रेलिया दौरे पर रहे। इस दौरान 9 जुलाई को भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच यूरेनियम सहयोग को लेकर अहम समझौते पर सहमति बनी। मेलबर्न में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के बीच बैठक के बाद आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोनों देशों ने रक्षा, व्यापार, ऊर्जा, अंतरिक्ष और महत्वपूर्ण खनिज (क्रिटिकल मिनरल्स) समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने से जुड़े समझौतों की घोषणा की। प्रधानमंत्री मोदी ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को लेकर ऑस्ट्रेलिया की नीति की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत बच्चों के लिए सुरक्षित ऑनलाइन वातावरण तैयार करने के ऑस्ट्रेलिया के प्रयासों से सीख रहा है। दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने मेलबर्न में करीब 30 हजार भारतीय समुदाय के लोगों को भी संबोधित किया। —————— ‘सतलुज’ के मेकर्स को मंत्री बिट्टू की चुनौती:बोले- 25 हजार शवों के रिकॉर्ड दिखाओ, वर्ना एक्शन लेंगे; दिलजीत दोसांझ की फिल्म पूरी तरह बैन केंद्रीय राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने पंजाबी एक्टर और सिंगर दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज के मेकर्स को खुली चुनौती दी है। बिट्टू ने मेकर्स को कहा कि उन 25,000 लापता या अवैध रूप से दाह संस्कार किए गए शवों के पुख्ता दस्तावेजी सबूत, आधिकारिक रिकॉर्ड पेश करें, जो फिल्म में दिखाए गए हैं। पूरी खबर पढ़ें…

Diljit Dosanjh: दिलजीत दोसांझ ने ग्रीन कार्ड वाले जोक की आड़ में US सिटिजनशिप के सवाल को किया इग्नोर, बोले- ‘मैं कुछ नहीं कह रहा’

Diljit Dosanjh: हाल ही में एक इंस्टाग्राम लाइव सेशन के दौरान, जब एक फैन ने दिलजीत दोसांझ को US ग्रीन कार्ड के लिए अप्लाई करने का सुझाव दिया, तो उन्होंने मजाकिया अंदाज में प्रतिक्रिया दी। यह कमेंट उस रिपोर्ट के कुछ महीनों बाद आया जिसमें दावा किया गया था कि एक्टर-सिंगर 2022 से US के नागरिक हैं – एक ऐसा दावा जिसकी न तो दिलजीत ने सार्वजनिक रूप से पुष्टि की है और न ही इसका खंडन किया है।

लाइव सेशन के दौरान, दिलजीत मुख्य रूप से अपनी फिल्म ‘सतलुज’ से जुड़े विवाद पर बात कर रहे थे, जिसे रिलीज़ होने के 48 घंटों के भीतर ही Zee5 इंडिया से हटा दिया गया था। हालांकि, जब एक फैन ने उन्हें US ग्रीन कार्ड के लिए अप्लाई करने को कहा, तो दिलजीत ने नागरिकता से जुड़ी अटकलों का सीधे जवाब देने के बजाय उस पल को मजाक में बदल दिया।

प्रशंसक के सवाल का जवाब देते हुए दिलजीत ने कहा, “मैं एक कार्ड लूंगा और उसे हरे रंग से रंग दूंगा।”उन्होंने आगे कहा, “मैं कुछ नहीं कह रहा। सब छोड़कर ये खबर बन जाएगी। ऐसा नहीं होता। दुनिया का नाटक कभी खत्म नहीं होगा। लेकिन मेरा मानना ​​है कि हर किसी को बिना वीजा के किसी भी देश की यात्रा करने की अनुमति होनी चाहिए। पूरी दुनिया को एक हो जाना चाहिए। मैं ठीक हूं, लेकिन ऐसा संभव नहीं है, है ना?”

यह बात इसलिए खास थी क्योंकि यह दिलजीत की नागरिकता के स्टेटस को लेकर चल रही अटकलों के बीच कही गई थी। इस साल की शुरुआत में, ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ने रिपोर्ट किया था कि दिलजीत ने 2022 में अमेरिकी नागरिकता ले ली थी और 1 सितंबर 2022 से अमेरिकी पासपोर्ट पर यात्रा कर रहे हैं। एक्टर-सिंगर ने इस रिपोर्ट पर सार्वजनिक रूप से कोई बात नहीं की है।

फैन ने दिलजीत से डोनाल्ड ट्रंप से बात करने को कहा। एक और लाइव सेशन में, एक फैन ने मजाक में दिलजीत से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बात करने और सभी को अमेरिकी नागरिकता दिलाने में मदद करने को कहा। इस सुझाव पर हंसते हुए दिलजीत ने जवाब दिया, “आप लोग मेरे बारे में क्या सोचते हैं? मैं तो बस एक आर्टिस्ट हूं। मैं उनसे नागरिकता के मुद्दों को हल करने के लिए कैसे कह सकता हूं? उनकी बेटी मुझे फोलो करती है, लेकिन मैंने कभी उनसे भी बात नहीं की है। मैं कभी किसी से कोई फेवर नहीं मांगता। अगर कुछ होना होता है, तो वह होता है। अगर नहीं होना होता, तो नहीं होता।”

दिलजीत के हल्के-फुल्के जवाब ने एक बार फिर नागरिकता की अफवाहों पर सीधे बात करने से बचा लिया, साथ ही यह भी साफ कर दिया कि वह नहीं चाहते थे कि यह बातचीत कोई और हेडलाइन बने। मई में, ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ने रिपोर्ट किया कि दिलजीत दोसांझ 2022 में अमेरिकी नागरिक बन गए थे। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि उनका आखिरी भारतीय पासपोर्ट 2018 में मुंबई में जारी किया गया था और वे 1 सितंबर, 2022 से अमेरिकी पासपोर्ट का इस्तेमाल कर रहे हैं।

रिपोर्ट में आगे बताया गया कि दिलजीत की पत्नी, संदीप कौर, अमेरिकी नागरिक हैं। अमेरिकी नागरिकता लेने के समय, दिलजीत ने कैलिफ़ोर्निया के एक पॉश इलाके में स्थित पांच बेडरूम वाले बंगले को लिया था। अमेरिकी ग्रीन कार्ड किसी व्यक्ति को ‘कानूनी तौर पर स्थायी निवासी’ का दर्जा देता है, जिससे वे बिना किसी अस्थायी वीजा या नियोक्ता (employer) की स्पॉन्सरशिप के, अमेरिका में कहीं भी अनिश्चित काल तक रह सकते हैं, काम कर सकते हैं और पढ़ाई कर सकते हैं। पात्रता की शर्तें पूरी करने के बाद, यह अमेरिकी नागरिकता पाने का एक जरिया भी बन सकता है।

हालांकि, जो व्यक्ति पहले से ही अमेरिकी नागरिक है, उसे ग्रीन कार्ड की जरूरत नहीं होती। इसी वजह से, चल रही अटकलों के बीच फैन का सुझाव और दिलजीत का मजाकिया जवाब चर्चा का विषय बन गया। दिलजीत मुख्य रूप से अपनी फिल्म ‘सतलुज’ के बारे में बात करने के लिए लाइव आए थे।

OTT पर रिलीज होने से पहले, सेंसर की आपत्तियों के कारण यह फिल्म अटकी हुई थी। दिलजीत ने लोगों से यह फिल्म देखने की अपील की और इसे पंजाब और भारत के इतिहास की एक अहम कहानी बताया। ‘सतलुज’ जसवंत सिंह खालरा की कहानी है। उन्होंने उस दौर में अमृतसर और उसके आस-पास हजारों शवों के कथित तौर पर गैर-कानूनी ढंग से अंतिम संस्कार किए जाने का दस्तावेजीकरण किया था, जब पंजाब में उग्रवाद चरम पर था। बाद में खालरा का अपहरण कर उनकी हत्या कर दी गई।

Zee5 से फ़िल्म को अचानक हटाए जाने के बाद सेंसरशिप, इतिहास और इस बात पर बड़ी बहस छिड़ गई है कि क्या मानवाधिकारों से जुड़े दस्तावेज़ी मुद्दों पर आधारित कहानियों को भारतीय दर्शकों तक पहुंचने दिया जा रहा है।

Indus Waters Treaty: सिंधु जल समझौते पर भारत का सबसे बड़ा कानूनी ब्रह्मास्त्र, 15 पॉइंट में समझिए पाकिस्तान क्यों मुंह की ही खाएगा

Indus Waters Treaty Legal points: भारत और पाकिस्तान के बीच साल 1960 से चले आ रहे सिंधु जल समझौते को लेकर खड़े हुए विवाद के बीच कानूनी मोर्चे पर भारत का पक्ष मजबूत है। इसे लेकर विदेश मंत्रालय (MEA) के पूर्व अतिरिक्त सचिव और कानूनी सलाहकार डॉ. विष्णु दत्त शर्मा ने एक डिटेल्ड लीगल एनालिसिस किया है।

पीटीआई पर मौजूद इस एनालिसिस से साफ है कि अगर पाकिस्तान इस समझौते के नियमों का उल्लंघन कर एकतरफा कोई कदम उठाता है तो अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत भारत के पास उसे करारा जवाब देने का एक बड़ा कानूनी ब्रह्मास्त्र मौजूद है। यहां नीचे 15 पॉइंट में समझिए कि इस समझौते का कानूनी ढांचा क्या है और पाकिस्तान इसमें कैसे मुंह की खाएगा-

1- सिंधु नदी प्रणाली का विशाल दायरा

सिंधु नदी लगभग 1800 मील लंबी है। इसकी पश्चिमी सहायक नदियां (काबुल, कुर्रम) 700 मील से अधिक लंबी हैं जबकि पूर्वी सहायक नदियां (झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास, सतलुज) कुल मिलाकर 2800 मील से अधिक लंबी हैं। यह पूरा सिस्टम 450000 वर्ग मील क्षेत्र को कवर करता है। ये इसे दुनिया की सबसे बड़े नदी प्रणालियों में से एक बनाता है। इसका अधिकांश हिस्सा भारत और पाकिस्तान में स्थित है।

2- बंटवारे के बाद विवाद और दिल्ली समझौता

अगस्त 1947 में भारत के विभाजन के साथ ही सिंधु जल विवाद भी पैदा हो गया। दोनों देशों के बीच पानी के नियमन को लेकर पहला समझौता 4 मई 1948 को हुआ। इसे ‘इंटर-डोमिनियन एग्रीमेंट’ या ‘दिल्ली समझौता’ कहा जाता है। इसमें यह माना गया था कि पश्चिम पंजाब (पाकिस्तान) पूर्वी पंजाब (भारत) के पानी पर अधिकार के रूप में कोई दावा नहीं कर सकता। हालांकि पाकिस्तान ने बाद में 23 अगस्त 1950 को इस समझौते को मानने से इनकार कर दिया था।

3- वर्ल्ड बैंक की एंट्री और 1960 की संधि

1951 में टेनेसी वैली अथॉरिटी के पूर्व अध्यक्ष डेविड लिलिएंटथल ने वर्ल्ड बैंक की मदद से दोनों देशों को संयुक्त रूप से सिंधु बेसिन विकसित करने का प्रस्ताव दिया। वर्ल्ड बैंक के तत्कालीन अध्यक्ष यूजीन ब्लैक ने 6 सितंबर 1951 को दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों को पत्र लिखकर इसका प्रस्ताव दिया। इसे दोनों ने स्वीकार किया। बेहद उतार-चढ़ाव और टूटने की कगार पर पहुंचने के बावजूद आखिरकार 1960 में इस संधि पर हस्ताक्षर हो सके।

4- संधि की कानूनी संरचना और वर्ल्ड बैंक की भूमिका

सिंधु जल समझौते पर 19 सितंबर 1960 को कराची में हस्ताक्षर किए गए थे। यह 12 जनवरी 1961 को लागू हुआ लेकिन इसे 1 अप्रैल 1960 से ही लागू माना गया। इस संधि में 12 अनुच्छेदों के तहत कुल 79 पैराग्राफ और 8 एनेक्सचर शामिल हैं। वर्ल्ड बैंक ने सिर्फ विशिष्ट अनुच्छेदों (Articles V, X) और एनेक्सचर (F, G, H) के उद्देश्यों के लिए इस पर हस्ताक्षर किए थे।

5- नदियों का आवंटन और कानूनी मिसाल

इस संधि के तहत पूर्वी नदियों (रावी, ब्यास, सतलुज) का पानी भारत को और पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम, चिनाब) का पानी कुछ अपवादों को छोड़कर पाकिस्तान को आवंटित किया गया है। इस दस्तावेज में स्पष्ट लिखा है कि इस संधि की किसी भी बात को कानून का कोई सामान्य सिद्धांत या मिसाल नहीं माना जाएगा।

6- संधि का मुख्य उद्देश्य: सद्भावना और सहयोग

संधि की प्रस्तावना में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि भारत और पाकिस्तान सरकार सिंधु नदी प्रणाली के पानी का पूर्ण और संतोषजनक उपयोग करने की समान इच्छा रखती हैं। इसके तहत दोनों देशों को सद्भावना, मित्रता और सहयोग की भावना के साथ एक-दूसरे के अधिकारों और दायित्वों को तय करना था और भविष्य में उठने वाले किसी भी सवाल का निपटारा करना था।

विवाद निपटारे का त्रि-स्तरीय तंत्र

7- स्थायी सिंधु आयोग

संधि के तहत विवादों और मतभेदों के निपटारे के लिए एक स्थायी सिंधु आयोग का गठन किया गया है। इसमें दोनों देशों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। इसकी भूमिका मुख्य रूप से प्रशासनिक और परामर्शी होती है।

8- संधि में सवाल, मतभेद और विवाद में अंतर

अनुच्छेद IX विवाद निपटान ढांचे का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह किसी मुद्दे को तीन श्रेणियों में बांटता है, सवाल, मतभेद और विवाद, किसी भी सवाल की जांच सबसे पहले आयोग करता है। अगर आयोग में सहमति नहीं बनती तो उसे मतभेद माना जाता है। फिर इसे एक निष्पक्ष विशेषज्ञ के पास भेजा जाता है। कोई मुद्दा विवाद तभी बनता है जब वह निष्पक्ष विशेषज्ञ के अधिकार क्षेत्र से बाहर हो या विशेषज्ञ खुद आयोग को इसकी जानकारी दे।

9- मध्यस्थता अदालत के लिए कड़ी शर्तें

कोई भी मतभेद विवाद की श्रेणी में तभी आ सकता है जब आयोग के दोनों कमिश्नर इस पर सहमत हों। जब विवाद खड़ा हो जाता है तो आयोग दोनों सरकारों को रिपोर्ट करता है। इसके बाद मध्यस्थों की मदद ली जा सकती है। किसी मध्यस्थता अदालत का गठन सिर्फ दोनों देशों की आपसी सहमति या बातचीत और मध्यस्थता के पूरी तरह विफल होने के बाद ही किया जा सकता है।

पाकिस्तान क्यों खाएगा मुंह की? भारत का कानूनी पक्ष

10- एकतरफा अदालत जाने का कोई अधिकार नहीं

एनेक्सचर G (मध्यस्थता अदालत) की शुरुआती भाषा बेहद महत्वपूर्ण है। इसमें लिखा है कि, ‘अगर आवश्यकता पैदा होती है तो…’ इसका मतलब यह है कि यह चरण तभी आएगा जब सभी आवश्यक शर्तें पूरी होंगी। कोई भी पक्ष अपनी मर्जी से किसी भी सवाल को सीधे मध्यस्थता अदालत में नहीं घसीट सकता। इसके लिए पहले आपसी बातचीत और निष्पक्ष विशेषज्ञ के चरणों से गुजरना अनिवार्य है।

11- एकतरफा कदम पूरी तरह अवैध

कोई भी कमिश्नर मतभेद को निष्पक्ष विशेषज्ञ के पास ले जाने के लिए एकतरफा पहल तो कर सकता है लेकिन किसी मतभेद को विवाद घोषित करने या मध्यस्थता अदालत की प्रक्रिया को एकतरफा शुरू करने का कोई प्रावधान इस संधि में नहीं है। द्विपक्षीय संधियों में हमेशा आपसी निर्धारण का प्रावधान होता है और यही बात सिंधु जल समझौते पर भी लागू होती है।

12- पाकिस्तान की एकतरफा जिद संधि का उल्लंघन

अगर संधि के नियमों के तहत कोई विवाद आधिकारिक रूप से खड़ा ही नहीं हुआ है और उसके बिना ही पाकिस्तान मध्यस्थता अदालत गठित करने के लिए एकतरफा प्रक्रिया शुरू करता है तो यह संधि का सीधा उल्लंघन माना जाएगा और यह पूरी तरह से अवैध होगा। ऐसे में भारत के पास इसके खिलाफ सुधारात्मक कदम उठाने के कानूनी विकल्प मौजूद हैं।

13- वियना कन्वेंशन का कानूनी आधार

अंतरराष्ट्रीय कानून में जब कोई एक पक्ष संधि के किसी महत्वपूर्ण हिस्से का उल्लंघन करता है तो वियना कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ ट्रीटीज 1969 को जरूरी डॉक्यूमेंट के रूप में देखा जाता है। हालांकि भारत और पाकिस्तान दोनों ही इस कन्वेंशन के पक्षकार नहीं हैं और सिंधु जल समझौता इससे पहले का है लेकिन इसके नियम अंतरराष्ट्रीय प्रथागत कानून को दर्शाते हैं।

14- मटेरियल ब्रीच का नियम

वियना कन्वेंशन का अनुच्छेद 60 संधि के उल्लंघन के परिणामों को स्पष्ट करता है। इसके तहत संधि के उद्देश्य या प्रयोजन को पूरा करने के लिए आवश्यक किसी भी प्रावधान का उल्लंघन करना मटेरियल ब्रीच यानी गंभीर उल्लंघन माना जाता है। यह भारत के लिए एक मजबूत कानूनी आधार तैयार करता है।

15- आतंकवाद के कारण भारत सस्पेंड कर सकता है संधि

डॉ विष्णु दत्त शर्मा के निष्कर्ष के मुताबिक इस पूरी संधि की मूल भावना सद्भावना और मित्रता पर आधारित है। ऐसे में यह दलील दी जा सकती है कि पाकिस्तान द्वारा लगातार सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देना संधि के तहत उसके दायित्वों को पूरा करने में विफलता है। ऐसे में पाकिस्तान की ओर से किया जा रहा यह कृत्य एक मटेरियल ब्रीच का रूप लेता है। इस आधार पर भारत को अंतरराष्ट्रीय प्रथागत कानून के तहत यह पूरा अधिकार है कि वह सिंधु जल समझौते को स्थगित कर दे। अगर पाकिस्तान जरूरी प्रक्रियाओं को दरकिनार कर भारत को एकतरफा मध्यस्थता अदालत में खींचने की कोशिश करता है तो वह खुद अपनी ही चाल में फंसकर मुंह की खाएगा।

50 रुपये कमाने से Satluj तक, लंबा सफर तय कर बनाई पहचान | Jagjeet Sandhu | Punjab

फिल्म ‘सतलुज’ में अपने दमदार अभिनय से चर्चा में आए जगजीत संधू ने, सिर्फ़ 7 साल की उम्र में नुक्कड़ नाटक से शुरुआत की थी। और उनकी पहली कमाई 50 रुपये थी। पंजाबी फिल्म Qissa Punjab, Oye Bhola Oye, और हिंदी भाषा के बड़े प्रोजेक्ट जैसे Patal Lok, The Diplomat, और अब Satluj का हिस्सा रहे जगजीत जब भी स्क्रीन पर आए, अपनी एक छाप छोड़ गए।
क्या आपको भी इनकी एक्टिंग पसंद है?
@ijagjeetsandhu

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50 रुपये कमाने से Satluj तक, लंबा सफर तय कर बनाई पहचान | Jagjeet Sandhu | Punjab
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Satluj Row: दिलजीत दोसांझ के फैंस से हर हाल में फिल्म देखने की लगाई थी गुहार, अब ZEE5 ने एंटी-पायरेसी अपील जारी की

Satluj Row: ZEE5 पर रिलीज होने के सिर्फ दो दिन बाद ही, ‘सतलुज’ फ़िल्म को हटा दिया गया, जिसमें दिलजीत दोसांझ ने जसवंत सिंह खालरा का किरदार निभाया है। इसके बाद, एक्टर ने लोगों से फ़िल्म की डाउनलोड की गई कॉपीज को आगे भेजने की अपील की ताकि यह ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंच सके। हालांकि यह फ़िल्म भारत में उपलब्ध नहीं है, लेकिन इसके पायरेटेड वर्जन अभी भी फैल रहे हैं, और इसी वजह से ZEE5 ने लोगों से इन डाउनलोड की गई फाइलों को आगे भेजना बंद करने की अपील की है।

सोमवार, 6 जुलाई को, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ‘सतलुज’ की पायरेटेड कॉपीज फैलने के बाद ZEE5 ने एक और बयान जारी किया। अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर OTT प्लेटफ़ॉर्म ने कहा, “हमें उम्मीद है और हम हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं। पायरेसी को बढ़ावा न दें। हम ‘सतलुज’ को आप तक वापस पहुँचाने के लिए हर संभव रास्ता तलाशने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

ZEE5 ने एक पोस्टर भी शेयर किया जिसमें यह मैसेज था- “सतलुज को वापस लाने के लिए हम अपनी तरफ से कोशिश कर रहे हैं। प्लीज आप भी अपना योगदान दें, पायरेसी को सपोर्ट न करें।” इस बारे में बात करते हुए कि एक बार कंटेंट रिलीज़ हो जाने के बाद उसे बैन करना या डिलीट करना नामुमकिन है।

एक्टर ने आगे कहा, “तो अब मुझे बहुत राहत महसूस हो रही है कि आखिरकार फिल्म आप तक पहुंच गई है। अब यह आपकी फिल्म है। अब इसे रोका नहीं जा सकता। यह अब लोगों की फिल्म है। आप इसे अब रोक नहीं सकते। मुझे लगता है कि जो लोग ऐसा सोच रहे हैं कि एक बार कोई चीज ऑनलाइन आ जाए तो उसे बस ऐसे ही डिलीट किया जा सकता है, वे या तो मासूम हैं या उन्हें जानकारी नहीं है।”

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दिलजीत ने उन लोगों से, जिन्होंने फिल्म डाउनलोड की है, इसे ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए कहा और कहा, “अब आप इसे आपस में शेयर कर सकते हैं। यह आपकी फिल्म है। लेकिन मैं खुश और राहत महसूस कर रहा हूं कि फिल्म आखिरकार दर्शकों तक पहुंच गई। बहुत से लोगों ने इसे पहले ही डाउनलोड कर लिया है। एक बार कोई चीज़ ऑनलाइन आ जाती है, तो वह कभी डिलीट नहीं होती। मैंने राजस्थान का एक वीडियो देखा जिसमें लोग फिल्म देख रहे हैं। मुझे बहुत खुशी हुई। प्लीज इसे अपने दोस्तों और अपने आस-पास के सभी लोगों को दिखाएं।”

हनी त्रेहान के निर्देशन में बनी और दिलजीत दोसांझ की मुख्य भूमिका वाली फिल्म ‘सतलुज’, मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन से प्रेरित है। इस फिल्म का नाम पहले ‘पंजाब ’95’ था और सर्टिफिकेशन से जुड़ी दिक्कतों के कारण यह लगभग चार साल तक रिलीज़ नहीं हो पाई थी। CBFC से मंज़ूरी मिलने के लिए लंबी लड़ाई के बाद आखिरकार इसका प्रीमियर ZEE5 पर हुआ; दिलजीत ने पहले ही कहा था कि प्लेटफ़ॉर्म पर रिलीज़ हुआ वर्शन बिना किसी कट-छाँट वाला है। इस फिल्म को RSVP और MacGuffin Pictures ने प्रोड्यूस किया है और इसमें दिलजीत के साथ अर्जुन रामपाल, कंवलजीत सिंह, सुविंदर विक्की और गीतिका विद्या ओहल्यान मुख्य भूमिकाओं में हैं।

Satluj Controversy: कौन हैं जसवंत सिंह खालरा? भारत में ‘सतलुज’ को किया गया बैन, जानें अब तक फिल्म मामले में क्या-क्या हुआ

Satluj Controversy: इस शुक्रवार को Zee5 पर आने के बाद, हनी त्रेहान की काफी चर्चा में रही है। उनकी फिल्म ‘सतलुज’ को रविवार को बिना किसी इंफॉर्मेशन के प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। इस फिल्म में दिलजीत दोसांझ ने दिवंगत मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा की भूमिका निभाई है।

फिल्म को बनने में चार साल से ज्यादा का समय लगा, जिसमें सेंसर बोर्ड के साथ तीन साल तक लड़ाई की और फिल्म के नाम में दो बार बदलाव शामिल हैं। अब, देर सवेर से रिलीज होने के कुछ ही दिनों बाद, यह फिल्म फिर से दर्शकों तक पहुंचने के लिए संघर्ष कर रही है। लेकिन यह किस बारे में है और इसे लेकर इतना विवाद क्यों है? आइए जानते हैं…

‘पंजाब 95’ नाम क्यों दिया गया था?

‘सतलुज’ एक बायोपिक ड्रामा है, जिसका नाम पहले ‘पंजाब 95’ था। यह फिल्म जसवंत सिंह खालरा की जिदगी से लेकर मौत तक की कहानी बताती है। खालरा एक बैंक क्लर्क थे, जो 90 के दशक के बीच पंजाब में मानवाधिकारों के लिए लड़ने वाले एक बड़े कार्यकर्ता बन गए थे। उन्होंने 1984 से 1994 के बीच राज्य में 25,000 लोगों के अंतिम संस्कार की जांच की थी। इस फिल्म में दिलजीत दोसांझ ने खालरा का किरदार निभाया है और उनके साथ गीतिका विद्या ओहलन, अर्जुन रामपाल, सुविंदर विक्की और कंवलजीत सिंह भी हैं। यह फिल्म सच्ची घटनाओं पर आधारित है और इसमें कुछ असली किरदारों को काल्पनिक रूप दिया गया है। इसके जरिए 80 और 90 के दशक में पंजाब में उग्रवाद के खिलाफ पंजाब पुलिस की लड़ाई का काला चेहरा दिखाया गया है।

फिल्म को लेकर इतना विवाद क्यों है?

2022 में, यह फिल्म ‘घल्लूघारा’ नाम से शुरू की गई थी। यह शब्द सिखों के ऐतिहासिक नरसंहार के लिए इस्तेमाल किया जाता है। उसी साल नवंबर में, जब इसे सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफ़िकेशन (CBFC) के पास भेजा गया, तो बोर्ड ने इसका नाम बदलकर ‘पंजाब 95’ करने और इसमें 21 कट लगाने का सुझाव दिया। चिंता यह थी कि फिल्म में प्रशासन को गलत तरीके से दिखाया गया है। फिल्म बनाने वालों ने बॉम्बे हाई कोर्ट में इन कट के खिलाफ अपील की, जिसने मामले को रिविजन कमेटी के पास भेज दिया। कमेटी ने 120 कट लगाने की भारी-भरकम मांग की। आखिरकार, लगभग चार साल की कानूनी लड़ाई के बाद, यह फिल्म इस शुक्रवार को Zee5 पर ‘सतलुज’ नाम से चुपचाप रिलीज हुई। दिलजीत दोसांझ ने इंस्टाग्राम लाइव पर कहा कि फिल्म की टीम ने प्रमोशन न करने का फैसला किया, क्योंकि उन्हें डर था कि अगर वे इसका प्रमोशन या प्रचार करते, तो रिलीज में देरी हो सकती थी।

जसवंत सिंह खालरा कौन थे?

‘सतलुज’ फिल्म का मुख्य विषय पंजाब पुलिस पर खालरा के वे आरोप हैं, जिनमें कहा गया था कि पुलिसकर्मियों ने हजारों लोगों की गैर-न्यायिक हत्याएं कीं। खालरा ने इसके लिए तत्कालीन पंजाब DGP केपीएस गिल को जिम्मेदार ठहराया था और उन्हें लाइव बहस की चुनौती भी दी। उन्होंने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उठाया और कनाडा के हाउस ऑफ कॉमन्स में भी इस पर बात की थी। फिल्म में यह सब दिखाया गया है, हालांकि इसमें केपीएस गिल का नाम बदलकर IPS बिट्टा कर दिया गया है और पंजाब के मुख्यमंत्री बेअंत सिंह (फिल्म में अनंत सिंह) की हत्या की घटना को भी थोड़ा काल्पनिक रूप दिया गया है।

खालरा का 1995 में अपहरण कर लिया गया था और आरोप है कि उसी साल उनकी हत्या कर दी गई। उनकी लाश कभी नहीं मिली। 2005 में, पंजाब पुलिस के चार कर्मचारियों को उनके अपहरण और हत्या का दोषी ठहराया गया और सात साल की जेल की सजा सुनाई गई। दो साल बाद, पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने उनकी सजा बढ़ाकर उम्रकैद कर दी। फिल्म में पंजाब पुलिस के कर्मचारियों द्वारा खालरा के अपहरण की पूरी कहानी दिखाई गई है और यह भी दिखाया गया है कि हिरासत में उन्हें कैसे प्रताड़ित किया गया और उनकी हत्या कर दी गई।

फिल्म में उनके लापता होने और हत्या की जांच जिस तरह से आगे बढ़ी, उसमें भी असल घटनाओं से समानताएं हैं। इसमें SSP सुग्गा (सुविंदर विक्की) की मौत को आत्महत्या जैसा दिखाया गया है, ठीक वैसे ही जैसे 1997 में इस मामले के मुख्य आरोपी SSP अजीत सिंह संधू की मौत हुई थी। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने दावा किया था कि संधू की हत्या की गई थी और उनकी मौत को आत्महत्या का रूप दिया गया था।

Diljit Dosanjh: ‘मरते दम तक पंजाब के साथ हूं’, भारत में ‘सतलुज’ बैन के बाद दिलजीत दोसांझ ने फैंस से डाउनलोड की हुई कॉपीज शेयर करने को कहा

Diljit Dosanjh: हनी त्रेहान की डायरेक्ट की हुई फिल्म ‘सतलुज’ के रिलीज़ होने के सिर्फ़ दो दिन बाद ही ZEE5 इंडिया से हटाए जाने पर दिलजीत दोसांझ ने अपनी बात रखी है। जहां कई दर्शक इस अचानक हटाए जाने से हैरान थे, वहीं एक्टर का कहना है कि उन्हें पहले से ही पता था कि ऐसा हो सकता है।

सोमवार को एक लाइव सेशन में फ़ैन्स से बात करते हुए दिलजीत ने बताया कि टीम ने जान-बूझकर प्रमोशन नहीं किया, क्योंकि उन्हें डर था कि अगर पहले से ही फ़िल्म के आने की घोषणा कर दी जाती, तो शायद यह कभी रिलीज ही नहीं हो पाती। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा मकसद यह पक्का करना था कि मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा की कहानी लोगों तक पहुंचे, भले ही यह कुछ ही समय के लिए क्यों न हो। लाइवस्ट्रीम के दौरान उन्होंने कहा, “आप मुझे जितना चाहें उतना परेशान कर सकते हैं। मैं मरते दम तक पंजाब के साथ हूं।”

मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा की ज़िंदगी पर बनी बायोपिक ड्रामा फ़िल्म ‘सतलुज’ (जिसे पहले ‘पंजाब ’95’ नाम से बनाया गया था) सेंसरशिप की वजह से लगभग चार साल तक अटकी रहने के बाद आखिरकार 3 जुलाई को ZEE5 पर रिलीज हुई। लेकिन भारत में यह फ़िल्म मुश्किल से दो दिन ही चल पाई और 5 जुलाई को इसे चुपचाप प्लेटफ़ॉर्म से हटा दिया गया।

एक लाइव सेशन के दौरान फ़ैन्स से बात करते हुए दिलजीत दोसांझ ने कहा कि टीम को पहले से ही पता था कि ऐसा हो सकता है। दिलजीत ने कहा, “यह घटना 1995 में हुई थी और तब लोगों को इस बारे में बात नहीं करने दी गई थी। आज भी ऐसा ही हो रहा है। हद हो गई! मुझे थोड़ा दुख है। हम आज भी वहीं खड़े हैं, जबकि अब 2026 चल रहा है।”

इसीलिए उन्होंने फ़िल्म की रिलीज की घोषणा करने या उसका प्रमोशन करने का फ़ैसला नहीं किया। सिंगर-एक्टर ने पंजाबी में कहा, “पहले दिन से ही इसकी उम्मीद थी, और इसीलिए हम फ़िल्म का प्रमोशन भी नहीं कर पाए और बिना किसी को बताए इसे रिलीज कर दिया। अगर हम रिलीज़ की घोषणा करते और दो दिन पहले इसका प्रमोशन करते, तो यह फ़िल्म रिलीज ही नहीं हो पाती। लेकिन अब मुझे तसल्ली है कि फ़िल्म हर घर तक पहुंच गई है। फ़िल्म आपके पास है, लोगों ने इसे डाउनलोड किया है, और आज नई पीढ़ी इसके बारे में बात कर रही है।”

एक्टर ने बताया कि उन्हें उम्मीद थी कि वीकेंड के बाद जब ऑफिस खुलेंगे तो कुछ हलचल होगी, लेकिन उन्होंने यह नहीं सोचा था कि फिल्म को रविवार शाम को ही हटा दिया जाएगा। उन्होंने कहा, “अभी रविवार की शाम है। जिस बात का मुझे शुक्रवार को ही शक था, जो बात मेरे मन में पहले से थी-इसलिए यह कोई हैरानी की बात नहीं है क्योंकि ऐसा होना मुमकिन लग रहा था—हां, मुझे लगा था कि जब सोमवार को ऑफिस खुलेंगे, तो फिल्म पर बैन लग सकता है। लेकिन मुझे अंदाज़ा नहीं था कि ऐसा रविवार शाम को ही हो जाएगा।”

उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म को शुरू से ही मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा, “फिल्म शुरू करने में हमें डेढ़ साल लग गए। एडिटिंग के बाद, फिल्म चार साल तक अटकी रही। मैं दो साल तक फिल्म से जुड़ा रहा। हनी पाजी ने फिल्म को छह साल दिए।”

हालांकि ‘सतलुज’ भारत में सिर्फ़ 48 घंटों के लिए ही उपलब्ध थी, लेकिन दिलजीत दोसांझ का मानना ​​है कि फ़िल्म ने अपना काम कर दिया था। लाइवस्ट्रीम के दौरान उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी है कि लोगों ने इसे देखा, डाउनलोड किया और इसकी कहानी पर बात करना शुरू किया।

उन्होंने लाइवस्ट्रीम में आगे कहा- लेकिन अब मुझे तसल्ली है कि यह फ़िल्म हर घर तक पहुंच गई है। फ़िल्म आप तक पहुंची है, लोगों ने इसे डाउनलोड किया है और आज नई पीढ़ी इसके बारे में बात कर रही है। मैंने एक वीडियो देखा—एक बहुत प्यारा वीडियो जो मैंने आज सुबह उठने के बाद देखा, जिसमें एक गुरुद्वारा साहिब के अंदर फ़िल्म दिखाई जा रही है। तो अब मुझे तसल्ली है कि फ़िल्म आप तक पहुंच गई है। सबने जो मेहनत की थी, उस मेहनत का आप तक पहुंचना बहुत ज़रूरी था। मैं इससे बहुत संतुष्ट हूं। ईश्वर की महिमा हो। मैं सभी का शुक्रिया अदा करता हूं और पूरी टीम को बधाई देता हूं क्योंकि हमारा काम, जो बात हम कहना चाहते थे और जिस तरह से कहना चाहते थे, वह लोगों तक बिल्कुल उसी तरह पहुंची है,” ।

दिलजीत ने यह भी कहा कि एक बार जब कोई चीज़ इंटरनेट पर आ जाती है, तो लोगों को उसे देखने से रोकना लगभग नामुमकिन हो जाता है। उन्होंने कहा कि अब यह फ़िल्म दर्शकों की है। उन्होंने कहा, “अब मुझे बहुत राहत महसूस हो रही है कि आखिरकार यह फ़िल्म आप तक पहुँच गई है। अब यह आपकी फ़िल्म है, अब इसे रोका नहीं जा सकता। यह अब लोगों की फ़िल्म है, आप इसे अब रोक नहीं सकते। मुझे लगता है कि जो लोग ऐसा सोचते हैं कि एक बार कोई चीज़ ऑनलाइन आने के बाद उसे बस ऐसे ही डिलीट किया जा सकता है, वे या तो मासूम हैं या उन्हें जानकारी नहीं है।”

दिलजीत दोसांझ ने उन सभी लोगों से भी अपील की जिन्होंने भारत में फ़िल्म की छोटी सी रिलीज़ के दौरान इसे डाउनलोड किया था कि वे इसे आगे भी शेयर करें ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोग इसे देख सकें। उन्होंने कहा, “अब आप इसे आपस में शेयर कर सकते हैं, यह आपकी फ़िल्म है।

दिलजीत के लिए ‘सतलुज’ सिर्फ़ एक फ़िल्म से कहीं ज़्यादा है। उन्होंने कहा कि यह कहानी ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंचनी चाहिए और दर्शकों से अपील की कि वे इसे अपने दोस्तों और परिवार के साथ शेयर करके ज़िंदा रखें। फ़िल्म को दर्शकों तक पहुंचाने के लंबे संघर्ष के बारे में बात करते हुए, उन्होंने पिछले चार सालों के सफ़र को याद किया। “यह फ़िल्म सबके पास है। जिन्होंने इसे नहीं देखा है, वे इसे अपने दोस्तों और साथियों को दिखा सकते हैं। आज सोमवार है- मैंने सुना है कि फ़िल्म अभी भी विदेशों में उपलब्ध है, देखते हैं कि यह कब तक रहती है। या अगर फ़िल्म कहीं वापस आती है, अगर वे इस मकसद के लिए लड़ सकते हैं… तो हम पिछले चार सालों से इसके लिए लड़ रहे हैं।”

Satluj: रिलीज के 2 दिन बाद ZEE5 से हटाई गई दिलजीत दोसांझ की ‘सतलुज’, प्लेटफॉर्म ने जारी किया बयान

दिलजीत दोसांझ स्टारर फिल्म सतलुज (पहले इसका नाम पंजाब 95 था) एक बार फिर चर्चा में हैं। फिल्म ‘सतलुज’ लंबे इंतजार के बाद ZEE5 पर रिलीज हुई थी। वहीं अपनी रिलीज के कुछ ही दिनों बाद ये फिल्म भारत में ZEE5 से हटा दी गई है। दिलजीत दोसांझ की चर्चित फिल्म सतलुज को रिलीज होने से पहले कई साल तक कानूनी और सर्टिफिकेशन से जुड़ी अड़चनों के बाद रिलीज हुई थी। ZEE5 ने बताया कि, कुछ कारणों की वजह से फिल्म फिलहाल उपलब्ध नहीं है और उसकी टीम इसे दोबारा जल्द से जल्द दर्शकों के लिए लाने की कोशिश कर रही है।

रिलीज के दो दिन बाद ओटीटी से हटाया गया

हनी त्रेहान के निर्देशन में बनी फिल्म सतलुज 3 जुलाई को ZEE5 पर बिना किसी बदलाव के रिलीज की गई थी। फिल्म को दर्शकों का अच्छा समर्थन भी मिला, लेकिन रिलीज के सिर्फ दो दिन बाद ही इसे भारत में प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। ZEE5 ने सोशल मीडिया पर दर्शकों का प्यार और समर्थन मिलने के लिए आभार जताया और कहा कि फिल्म को जल्द दोबारा उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। बयान में कहा गया, “रिलीज के बाद से सतलुज को दर्शकों का शानदार रिस्पॉन्स मिला है। हम उन सभी लोगों के दिल से आभारी हैं जिन्होंने फिल्म को देखने और अपना समर्थन देने का फैसला किया। आपका प्यार और भरोसा हमारे लिए और इस फिल्म से जुड़े हर व्यक्ति के लिए बेहद खास है।”

नहीं बताया गया वजह

प्लेटफॉर्म के मुताबिक, कुछ मौजूदा परिस्थितियों की वजह से फिल्म को फिलहाल भारत में स्ट्रीमिंग से हटा दिया गया है। लेकिन इसे हटाने के पीछे की वजह नहीं बताई गई। बयान में कहा गया, “ZEE5 पर हम फिल्म सतलुज और इसके पीछे की क्रिएटिव विजन के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं। हमारा मानना है कि अच्छी कहानियां लोगों को प्रेरित करने और उन पर गहरा प्रभाव छोड़ने की ताकत रखती हैं। हम हमेशा सच्ची और अर्थपूर्ण कहानियों को दर्शकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए, सतलुज अगली सूचना तक भारत में स्ट्रीमिंग के लिए उपलब्ध नहीं रहेगी।”

 

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पोस्ट में आगे कहा, “हमारी कोशिश है कि सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी कर फिल्म को जल्द से जल्द फिर से दर्शकों के बीच लाया जाए। रचनाकारों और ईमानदारी व उद्देश्य के साथ बनाई गई कहानियों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता पहले की तरह कायम है।”

पोस्ट के साथ साझा किए गए एक अलग कैप्शन में लिखा गया, “सतलुज फिलहाल भले ही स्ट्रीमिंग पर उपलब्ध न हो, लेकिन इस फिल्म ने जो चर्चा शुरू की है, वह अब भी जारी है। हमें इतना प्यार और समर्थन देने के लिए आप सभी का धन्यवाद। हमें उम्मीद है कि फिल्म जल्द ही फिर से आपके बीच होगी।”

कौन-कौन है फिल्म में

हनी त्रेहान के निर्देशन में बनी सतलुज में दिलजीत दोसांझ मुख्य भूमिका में हैं। ये फिल्म ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट जसवंत सिंह खालरा के जीवन से प्रेरित बताई जाती है। पहले इसका नाम पंजाब 95 रखा गया था, लेकिन सर्टिफिकेशन से जुड़ी परेशानियों की वजह से इसकी रिलीज कई साल तक अटकी रही। लंबी प्रक्रिया पूरी होने के बाद फिल्म आखिरकार ZEE5 पर रिलीज हुई। सतलुज का निर्माण RSVP और मैकगफिन पिक्चर्स ने मिलकर किया है। फिल्म में दिलजीत दोसांझ के अलावा अर्जुन रामपाल, कंवलजीत सिंह, सुविंदर विक्की और गीतिका विद्या ओहल्यान भी अहम किरदारों में नजर आए हैं। अपनी दमदार स्टारकास्ट और गंभीर विषय की वजह से यह फिल्म शुरुआत से ही चर्चा में बनी हुई है।

Satluj: दिलजीत दोसांझ की ‘पंजाब ’95’ का बदला नाम, ओटीटी पर फिल्म की गई रिलीज

Satluj: दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘पंजाब ’95’ का नाम बदलकर अब ‘सतलुज’ कर दिया गया है और आखिरकार यह रिलीज हो गई है। यह फ़िल्म शुक्रवार को चुपचाप एक OTT प्लेटफ़ॉर्म पर रिलीज़ हुई। हनी त्रेहान के निर्देशन में बनी ‘सतलुज’ फिल्म सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) के साथ दिक्कतों के कारण देर से रिलीज़ हुई। एक्टिविस्ट जसवंत सिंह खालरा की जिंदगी और मौत पर आधारित यह फ़िल्म पिछले साल फरवरी में दुनिया भर में रिलीज होने वाली थी। हालाँकि, इसकी रिलीज को अनिश्चित काल के लिए टाल दिया गया था। अब यह फ़िल्म Zee5 पर स्ट्रीम करने के लिए उपलब्ध है।

OTT प्लेटफ़ॉर्म के ऑफ़िशियल इंस्टाग्राम अकाउंट से किए गए नए पोस्ट के कैप्शन में यह लिखा है- कुछ कहानियां दबी नहीं रहती। ‘सतलुज’ देखें, जो अब सिर्फ़ Zee5 पर स्ट्रीम हो रही है। इस पोस्ट में दिलजीत के साथ-साथ उनके को-स्टार्स अर्जुन रामपाल और सुरिंदर विक्की के इंस्टाग्राम अकाउंट्स को भी टैग किया गया।

हनी त्रेहान की डायरेक्ट की हुई और रॉनी स्क्रूवाला की प्रोड्यूस की हुई फिल्म ‘सतलुज’ में वरुण बडोला और गीतिका विद्या ओहलन भी हैं। जब से इसे सर्टिफिकेशन के लिए CBFC के पास भेजा गया था, तब से यह फिल्म लगभग तीन साल से विवादों में घिरी हुई है।

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यह दूसरी बार है जब फिल्म का टाइटल बदला गया है। 2022 में ‘सतलुज’ का नाम बदलकर ‘पंजाब ’95’ कर दिया गया था। इससे पहले इसका नाम ‘घलूघारा’ (घलूघारा नरसंहार के नाम पर) था। फिल्म को सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ फ़िल्म सर्टिफ़िकेशन (CBFC) के पास भेजा गया था। हालांकि, CBFC ने फिल्म में 120 कट लगाए और टाइटल पर आपत्ति जताई। आखिरकार, सिखों की सबसे बड़ी धार्मिक संस्था, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने दखल दिया और CBFC कट लगाने पर तो मान गई, लेकिन टाइटल बदलने की बात पर अड़ी रही। आखिरकार, फिल्म का नाम बदलकर ‘पंजाब ’95’ कर दिया गया। उसी साल YouTube पर फिल्म का ट्रेलर लॉन्च किया गया था, लेकिन एक दिन बाद ही उसे हटा दिया गया।

इतना ही नहीं, इस फ़िल्म का वर्ल्ड प्रीमियर 2023 में मशहूर टोरंटो इंटरनेशनल फ़िल्म फ़ेस्टिवल (TIFF) में होना था, लेकिन प्रीमियर की तारीख से ठीक एक दिन पहले इसे लिस्ट से हटा दिया गया। ‘वैरायटी’ को एक सूत्र ने बताया कि टोरंटो से फ़िल्म को हटाए जाने के पीछे ‘राजनीतिक ताकतों का हाथ’ है, क्योंकि भारत के बाद कनाडा में ही सिखों की आबादी सबसे ज़्यादा है। फ़ेस्टिवल के आयोजकों ने कभी भी इस बात की पुष्टि या खंडन नहीं किया।

पंजाब के मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा ने उग्रवाद के दौर में पंजाब पुलिस द्वारा सिख युवाओं के कथित फ़र्ज़ी एनकाउंटर के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ी थी। उन्होंने 1984 और 1994 के बीच पंजाब में हज़ारों अज्ञात शवों के सामूहिक अंतिम संस्कार की जांच की थी।

1995 में वे रहस्यमय तरीके से गायब हो गए और एक दशक बाद, 2005 में, उनके अपहरण और हत्या के आरोप में चार पुलिस अधिकारियों को गिरफ़्तार किया गया। उनका जीवन और मौत राज्य के संवेदनशील इतिहास का एक विवादास्पद हिस्सा है, खासकर उग्रवाद से जुड़े मामलों के कारण। 2007 में, पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने उनकी शुरुआती सात साल की सजा को बढ़ाकर आजीवन कारावास में बदल दिया।